✍️ डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
स्वस्थ विचारों का आदान प्रदान,
ज्ञान और बुद्धि से आगे बढ़ता है,
तर्कहीन वार्तालाप अज्ञानता एवं
अहंकार जैसे दुर्गुण पैदा करता है।
किसी की सरलता व सीधापन को
लोग उसकी कमजोरी मान लेते हैं,
पर सीधापन जल के जैसा होता है,
जो अपने बहाव से चट्टानें तोड़ देता है।
मानव का सीधापन और सरलता
तो उसका अच्छा संस्कार होता है,
जिनके बल पर व सिद्धांत पर चल
इंसान इंसानियत का पोषक होता है।
भारतवासी देश प्रेम में संस्कृत का
अध्ययन करने की पैरवी करते हैं,
परंतु अपने बच्चों को अंग्रेज़ी के
माध्यम से देश विदेश में पढ़ाते हैं।
क्या इसमें कोई बुराई है यदि है,
तो इसमें ऐसा ग़लत सही क्या है,
जिसको जो पढ़ना है, पढ़े व बढ़े,
हर भाषा का ज्ञान संस्कार देता है।
मीठे फल अच्छे पेड़ों में लगते हैं,
कड़वे फल अच्छे बुरे सभी में लगते हैं,
भाषा की अच्छाई सुसंस्कार देती है,
तीखी भाषा सारे संस्कार बदल देती है।
मानव प्रवृत्ति भी अच्छे बुरे पेड़ों जैसी
ही सुसंस्कार कुसंस्कार दोनो देती है,
जिसके हृदय में जैसी भावना होती,
उसकी कृति भी संस्कारों पर निर्भर होती।
संस्कारों की परिभाषा दो बातों से
प्रायः इस दुनिया में परखी जाती है,
आपका धैर्य, जब आप निर्धन हों,
आदित्य ‘रवैया’ जब आप धनी हों।
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