राष्ट्र की परम्परा डेस्क पारंपरिक आयुर्वेद में पुष्प चिकित्सा का अद्भुत उदाहरण आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में हारसिंगार ( Nyctanthes arbor-tristis) का विशेष स्थान बताया गया है। यह केवल एक सुंदर और सुगंधित फूल ही नहीं, बल्कि अनेक रोगों के उपचार में उपयोगी औषधि भी है। शीतल स्वभाव और कटु-तिक्त स्वाद वाले इस पुष्प में वात-कफ शामक और पित्तनाशक गुण विद्यमान हैं। संधिवात, ज्वर, प्लीहा-यकृत विकार तथा त्वचा रोगों में इसके प्रयोग को अत्यंत लाभकारी माना गया है।
हारसिंगार पुष्प से निर्मित प्रमुख औषधियाँ
औषधीय उपयोग का सारांश ज्वर हेतु: क्वाथ, अर्क, रस,संधिवात हेतु: क्वाथ, पुष्प तेल,त्वचा हेतु: चूर्ण, लेप,यकृत-प्लीहा हेतु: अर्क, आसव
विशेषज्ञों की राय
आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, हारसिंगार पुष्प में उपस्थित नाइक्टैनथिन और अन्य जैव सक्रिय तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक हैं। आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधानों ने भी इसके सूजनरोधी, प्रतिज्वरक और रक्तशोधक गुणों की पुष्टि की है।
यह पुष्प वास्तव में प्रकृति का ऐसा वरदान है, जो न केवल सौंदर्य का प्रतीक है, बल्कि स्वास्थ्य का संरक्षक भी है।
ये आयुर्वेद विशेषज्ञ की राय पर प्रकाशित है प्रयोग से पहले डॉक्टर से सलाह जरुर ले
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