Categories: Newsbeat

CNG से हाइड्रोजन तक हर ईंधन पर सरकार की नजर, नया नियम लागू

कानूनी मापन व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव: अब CNG, LPG और हाइड्रोजन पंपों पर नहीं होगी माप-तौल में हेराफेरी


भारत सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण, ऊर्जा पारदर्शिता और आधुनिक तकनीकी प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए “कानूनी मापन (सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्र) संशोधन नियम, 2026” लागू कर दिए हैं। 8 मई 2026 को राजपत्र में प्रकाशित यह संशोधन देशभर में तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है। नए नियमों के तहत अब पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन डिस्पेंसर भी वैज्ञानिक सत्यापन व्यवस्था के दायरे में आ गए हैं। इससे ईंधन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को सही मात्रा में ईंधन मिलना सुनिश्चित होगा।
यह संशोधन केवल तकनीकी बदलाव नहीं बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, उपभोक्ता अधिकारों और प्रशासनिक सुधार यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य कानूनी मापन प्रणाली को अधिक वैज्ञानिक, तकनीक-सक्षम और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है। इससे देश में स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना को मजबूती मिलेगी और भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था के लिए विश्वसनीय आधार तैयार होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय से पेट्रोल पंपों पर कम ईंधन देने, इलेक्ट्रॉनिक छेड़छाड़ और गलत अंशांकन जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। अब सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्र यानी जीएटीसी के माध्यम से नियमित सत्यापन और पुनः सत्यापन की व्यवस्था मजबूत होगी। इससे माप-तौल में गड़बड़ी पर अंकुश लगेगा और उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा।
नए संशोधन के तहत पहली बार पांच नई श्रेणियों को जीएटीसी ढांचे में शामिल किया गया है। इनमें पेट्रोल-डीजल डिस्पेंसर, सीएनजी डिस्पेंसर, एलपीजी डिस्पेंसर, एलएनजी डिस्पेंसर और हाइड्रोजन डिस्पेंसर शामिल हैं। पहले जहां केवल 18 श्रेणियों के उपकरणों का सत्यापन किया जाता था, अब यह संख्या बढ़कर 23 हो गई है। इससे देशभर में परीक्षण क्षमता का विस्तार होगा और सत्यापन प्रक्रिया अधिक तेज तथा व्यवस्थित बनेगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सीएनजी, एलएनजी और हाइड्रोजन जैसे गैसीय ईंधनों का वितरण सामान्य तरल ईंधनों की तुलना में अधिक जटिल होता है। इनमें दबाव, तापमान और गैस घनत्व जैसे कई वैज्ञानिक कारक शामिल रहते हैं। यदि माप उपकरणों का समय पर परीक्षण न हो तो न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान हो सकता है बल्कि सुरक्षा जोखिम भी बढ़ सकते हैं। खासकर हाइड्रोजन जैसी अत्यधिक ज्वलनशील गैस के मामले में तकनीकी सटीकता अत्यंत आवश्यक है।
सरकार ने सत्यापन शुल्क भी निर्धारित कर दिए हैं। पेट्रोल और डीजल डिस्पेंसरों के लिए 5,000 रुपये प्रति नोजल तथा सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन डिस्पेंसरों के लिए 10,000 रुपये प्रति नोजल शुल्क तय किया गया है। सरकार का मानना है कि यह निवेश उपभोक्ता संरक्षण, पारदर्शिता और दीर्घकालिक विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।
संशोधित नियमों में राज्यों को भी अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं। राज्य सरकारें अपनी स्थानीय औद्योगिक और ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुसार अतिरिक्त वजन एवं माप उपकरणों को सत्यापन के लिए अधिसूचित कर सकेंगी। इससे संघीय ढांचे और स्थानीय जरूरतों के बीच बेहतर संतुलन स्थापित होगा।
यह पहल ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और डिजिटल गवर्नेंस को भी मजबूती देगी। अधिक संख्या में सत्यापन केंद्र उपलब्ध होने से उद्योगों को तेज सेवाएं मिलेंगी और ईंधन वितरण नेटवर्क का विस्तार आसान होगा। विशेष रूप से भारत में तेजी से बढ़ रहे सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और हरित हाइड्रोजन मिशन को इससे सीधा लाभ मिलने की संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दुनिया के विकसित देश कानूनी मापन प्रणालियों को अंतरराष्ट्रीय विधिक मापन संगठन (OIML) के मानकों के अनुरूप बना रहे हैं। भारत का यह संशोधन भी वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप माना जा रहा है, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भारत की विश्वसनीयता मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में डिजिटल मीटरिंग, स्मार्ट डिस्पेंसर और एआई आधारित निगरानी प्रणालियों के लिए भी यही कानूनी ढांचा आधार बनेगा। इससे न केवल उपभोक्ताओं को फायदा होगा बल्कि घरेलू उद्योगों, तकनीकी प्रयोगशालाओं और रोजगार के नए अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा।
स्पष्ट है कि कानूनी मापन (सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्र) संशोधन नियम, 2026 भारत को पारदर्शी, वैज्ञानिक और उपभोक्ता-केंद्रित ऊर्जा अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने वाला बड़ा सुधार साबित हो सकता है। पेट्रोल से लेकर हाइड्रोजन तक सभी प्रमुख ईंधन वितरण प्रणालियों को कानूनी सत्यापन ढांचे में शामिल करके सरकार ने यह संदेश दिया है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था भरोसे, तकनीकी सटीकता और पारदर्शिता पर आधारित होगी।

Editor CP pandey

Recent Posts

जंगल नाहरछपरा में विधिक जागरूकता शिविर, श्रमिकों और महिलाओं को योजनाओं की दी जानकारी

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जंगल नाहरछपरा के बड़ा सेमरहना काली स्थान पर गुरुवार को श्रमिक…

5 hours ago

मिशन सेफ फ्यूचर के तहत चला स्कूली वाहनों का चेकिंग अभियान, तीन का चालान, पंजीयन समाप्त वाहन बंद

बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ पर परिवहन विभाग सख्त, नियमों की अनदेखी करने वाले विद्यालयों…

5 hours ago

आकाशीय बिजली का कहर: धान की रोपाई के दौरान नाबालिग और बुजुर्ग महिला की मौत

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में गुरुवार को हुई बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरने…

5 hours ago

जीआरपी व बिहार पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, चोरी के मामले में वांछित अभियुक्त गिरफ्तार

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जीआरपी थाना देवरिया और बिहार पुलिस की संयुक्त टीम ने चोरी…

6 hours ago

सब्जी की फसल बर्बाद सरयू के बढ़ते जल से छोटे किसान परेशान

बरहज/देवरिया(राष्ट्र क़ी परम्परा)सरयू नदी के जलस्तर में हो रही लगातार वृद्धि से छोटे किसान परेशान…

7 hours ago

प्रदेश सरकार शिक्षकों के सम्मान और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध: नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री

शिक्षकों व उनके परिवारों को मिलेगी कैशलेस उपचार की सुविधा, मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना…

7 hours ago