Thursday, February 5, 2026
HomeNewsbeatसुप्रभात तो एक बहाना है: आस्था, धैर्य और जीवन दर्शन पर प्रेरक...

सुप्रभात तो एक बहाना है: आस्था, धैर्य और जीवन दर्शन पर प्रेरक कविता


लेखक: डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र, ‘आदित्य’

लेखक



सुप्रभात तो एक बहाना है
जब सूर्य की कृपा होती है, सूर्य की
किरणें प्रकाश देती हैं, भगवान की
कृपा से ही उसके दर्शन हो सकते हैं
और संसार सागर से पार लगाते हैं।
वैसे ही सन्तों की वाणी से सत्कर्म
का मार्ग प्रशस्त होता है और जहाँ
प्रेम की भाषा होती है वहीँ पर सुखी
परिवार होने की अनुभूति होती है।
कहा गया है कि अच्छे और सच्चे
इंसान के साथ निभा लेना हमेशा
बेहतर होता है बजाय इसके कि
ग़लत इंसान से बहस की जाये।
इस स्थिति में व्यर्थ की बहस न कर
सार्थक चुप्पी हमेशा अच्छी होती है,
धैर्य व शान्ति वह सद्गुण होते हैं जो
परिरिस्थिति पर नियंत्रण कर सकते है।
जैसे ख़ुशी का एहसास दुःख
के एहसास के बाद ही होता है,
आँखो की सुंदरता आंसुओं के
निकलने के बाद बढ़ जाती है।
वैसे ही प्रभु की कृपा भी ऐसे ही
दुःख -सुख व आँसू व नेत्रों की
ख़ूबसूरती जैसी ही है जो बिना तप
व त्याग किए नहीं मिल सकती है।
जैसे सफलता पाने का रहस्य संघर्ष
में छिपा होता है, वैसे ही ईश्वर की
प्राप्ति भी आस्था व विश्वास के
साथ जप-तप करने पर ही निर्भर है।
आदित्य ‘सुप्रभात’तो एक बहाना है,
सुबह सुबह आप को सुप्रभात कहना
स्वयं को ख़ुशी देता है और आप भी
ख़ुश रहें ये शुभ कामना भी देता है।
के लिए संरचित की गई है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments