सुशासन बनाम दंडहीनता: विकसित भारत की असली चुनौती

विकसित भारत 2047 और सुशासन का संकट
ड्रेसकोड, पहचान पत्र और जवाबदेही की अनदेखी बनाम नागरिक-केन्द्रित शासन


भारत आज वैश्विक स्तर पर एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। प्रधानमंत्री से लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्रियों के भाषणों में विकसित भारत 2047 एक केंद्रीय संकल्प के रूप में उभरता है। इस विज़न के चार मुख्य स्तंभ—तकनीकी नवाचार, आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और सुशासन—देश के भविष्य की दिशा तय करते हैं। इनमें सुशासन वह आधार है, जिस पर बाकी सभी स्तंभ टिके होते हैं।
परंतु जमीनी हकीकत यह है कि सरकारी और न्यायालयीन कार्यालयों में अनुशासनहीनता, कमजोर दंड व्यवस्था, ड्रेसकोड और पहचान पत्र की अनदेखी, तथा जवाबदेही के अभाव ने इस संकल्प को चुनौती दी है। आम नागरिक के लिए सुशासन कोई सैद्धांतिक शब्द नहीं, बल्कि रोज़मर्रा का अनुभव है—सरकारी दफ्तरों के चक्कर, अनसुनी शिकायतें, महीनों लंबित फाइलें और असम्मानजनक व्यवहार। यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विश्वास के क्षरण का संकेत है।

ये भी पढ़ें – ग्वाल टोली हादसा: लग्जरी कार, बाउंसर और पुलिस—सवालों के घेरे में सिस्टम

विकसित भारत 2047 और सुशासन की जमीनी सच्चाई
विकसित भारत 2047 तभी साकार होगा जब सुशासन भाषणों से निकलकर कार्यालयों की कार्य-संस्कृति में दिखाई दे। आज अनेक सरकारी कार्यालयों में न तो निर्धारित ड्रेसकोड का पालन होता है, न ही पहचान पत्र प्रदर्शित किए जाते हैं। यह औपचारिक कमी नहीं, बल्कि सत्ता और नागरिक के बीच बढ़ती दूरी की मानसिकता को दर्शाती है।
इसके विपरीत, पंजाब और दिल्ली सरकार द्वारा “सरकार आपके द्वार” और “सरकार तुहाडे द्वार” जैसी पहलों के माध्यम से डोरस्टेप डिलीवरी ऑफ पब्लिक सर्विसेज का मॉडल अपनाया गया है। पंजाब में 10 दिसंबर 2023 से दर्जनों सरकारी सेवाएं घर-घर पहुंचाई जा रही हैं, जिससे दफ्तरों के चक्कर समाप्त हो रहे हैं। यह मॉडल पूरे देश की राज्य सरकारों के लिए अनुकरणीय है।

ये भी पढ़ें – संत कबीर नगर: बिना आदेश कट रहे हरे पेड़, वन माफियाओं का खेल बेखौफ जारी

अंतरराष्ट्रीय मानक और भारत की स्थिति
विश्व बैंक, संयुक्त राष्ट्र और ओईसीडी के अनुसार सुशासन के प्रमुख तत्व हैं—पारदर्शिता, जवाबदेही, कानून का शासन, दक्षता और नागरिक-केन्द्रित सेवाएं। विकसित देशों में सरकारी कर्मचारी केवल सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि पब्लिक ट्रस्ट के संरक्षक माने जाते हैं।
वहां ड्रेसकोड, पहचान पत्र, समयबद्ध सेवाएं और शिष्टाचार प्रशासनिक अनुशासन का अनिवार्य हिस्सा हैं। भारत में इन बुनियादी मानकों की अनदेखी नागरिक-राज्य संबंधों को कमजोर करती है।
अनुशासनहीनता: विकसित भारत की सबसे बड़ी आंतरिक बाधा
अनुशासन किसी भी शासन व्यवस्था की रीढ़ होता है। कार्यालय समय का पालन न करना, नियमों की अवहेलना, नागरिकों से असम्मानजनक व्यवहार और वरिष्ठ अधिकारियों की उदासीनता—ये सब प्रशासनिक विफलता के स्पष्ट संकेत हैं।
न्यायालयीन परिसरों में भी यदि अनुशासन और पारदर्शिता कमजोर हों, तो न्याय प्रणाली पर नागरिकों का विश्वास डगमगाना स्वाभाविक है। विकसित राष्ट्र बनने की प्रक्रिया में यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है।

ये भी पढ़ें – देवरिया: प्यासी गांव की दलित बस्ती में जलजमाव, ग्रामीणों ने चंदे से संभाली व्यवस्था

कमजोर दंड व्यवस्था और दंडहीनता की संस्कृति
भारत में समस्या नियमों की कमी नहीं, बल्कि उनके क्रियान्वयन की है। जब ड्रेसकोड, पहचान पत्र या नागरिक सेवा मानकों के उल्लंघन पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती, तो दंडहीनता की संस्कृति पनपती है। यही संस्कृति सुशासन के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
फाइल संस्कृति, देरी और प्रशासनिक उदासीनता
“फाइल लंबित है” भारत की शासन व्यवस्था का सबसे कुख्यात वाक्य बन चुका है। अनावश्यक प्रक्रियाएं, समयसीमा का अभाव और जवाबदेही न तय होना—ये सभी आर्थिक विकास को धीमा करते हैं और नागरिकों को मानसिक-आर्थिक पीड़ा देते हैं। विकसित देशों में प्रत्येक सेवा की समय सीमा तय होती है और विलंब के लिए जिम्मेदारी निर्धारित होती है।

ये भी पढ़ें – 3 करोड़ की सड़क पांच साल की गारंटी में ही जर्जर

नौकरशाही का दबदबा बनाम नागरिक-केन्द्रित शासन
भारत की प्रशासनिक संरचना अभी भी औपनिवेशिक मानसिकता से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाई है। नागरिक को याचक की तरह देखा जाता है, जबकि वह करदाता और अधिकारधारी है। विकसित भारत 2047 की परिकल्पना तभी साकार होगी जब प्रशासन स्वयं को सेवा प्रदाता और नागरिक को साझेदार माने।
राजनीतिक हस्तक्षेप और जवाबदेही का संकट
जब अनुशासनात्मक कार्रवाई राजनीतिक दबाव में कमजोर पड़ती है, तो नियमों की समानता समाप्त हो जाती है। मजबूत लोकतंत्र वही हैं, जहां प्रशासनिक निर्णय कानून और नियमों के आधार पर होते हैं, न कि संरक्षण पर।
विकसित भारत के लिए आवश्यक संरचनात्मक सुधार
डिजिटल गवर्नेंस, समयबद्ध सेवाएं, प्रदर्शन-आधारित मूल्यांकन और पारदर्शी प्रक्रियाएं सुशासन की रीढ़ हैं। हर प्रक्रिया का डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम अनुशासन और जवाबदेही को स्वाभाविक रूप से मजबूत करता है।
ड्रेसकोड, पहचान पत्र और नागरिक व्यवहार जैसे बुनियादी नियमों के उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, नैतिकता और व्यवहार आधारित प्रशिक्षण अनिवार्य होना चाहिए, ताकि कर्मचारी स्वयं को सत्ता का प्रतिनिधि नहीं, बल्कि सार्वजनिक सेवा का वाहक समझें।

ये भी पढ़ें – प्रेम संबंध में युवक की हत्या, दो आरोपी व एक नाबालिग हिरासत में

निष्कर्ष
अतः स्पष्ट है कि विकसित भारत 2047 का रास्ता अनुशासन से होकर जाता है। सुशासन केवल नीति-दस्तावेज़ या भाषण नहीं, बल्कि कार्यालयों की कार्य-संस्कृति में दिखना चाहिए। छोटे-छोटे प्रशासनिक सुधार—ड्रेसकोड, पहचान पत्र, समयबद्ध सेवाएं और जवाबदेही—ही राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव रखते हैं।
यदि इन क्षेत्रों में त्वरित और ठोस सुधार नहीं हुए, तो तकनीकी नवाचार और आर्थिक विकास भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाएंगे। विकसित भारत का मार्ग बड़े विज़न के साथ-साथ छोटे, ठोस और ईमानदार प्रशासनिक सुधारों से होकर गुजरता है—और यही आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

लेखक: एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
कर विशेषज्ञ | स्तंभकार | साहित्यकार | अंतरराष्ट्रीय लेखक-चिंतक
गोंदिया, महाराष्ट्र

Editor CP pandey

Recent Posts

डीसीएम से गिरकर मजदूर की दर्दनाक मौत, परिवार में मचा कोहराम

भूसा लादने जा रही गाड़ी के पहिए के नीचे आने से मौके पर गई जान…

9 hours ago

शमशान घाट के कायाकल्प को लेकर कांग्रेसियो का प्रदर्शन

भागलपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के स्थानीय शाखा के तत्वाधान मे कांग्रेस प्रवक्ता…

9 hours ago

अभय नाथ दूबे बने पत्रकार प्रेस परिषद (इंडिया) के पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष

बधाइयों का तांता संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े अभय…

9 hours ago

बाढ़ व जलभराव नियंत्रण को लेकर प्रशासन सख्त

पम्पिंग स्टेशनों से लेकर नालों की सफाई तक व्यापक तैयारी मंडलायुक्त व महापौर की अध्यक्षता…

10 hours ago

प्रो. रामवंत गुप्ता को सेगी विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय शोध फेलोशिप

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं…

10 hours ago

जनगणना-2027 की स्वगणना प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में भारत की जनगणना-2027 के तहत…

10 hours ago