गोरखपुर मंडल में जल जीवन मिशन के प्रभाव का भूगोल विभाग ने किया मूल्यांकन

वाटर एड इंडिया और दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का संयुक्त अध्ययन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग और अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवी संस्था वाटर एड इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से जल जीवन मिशन के प्रभाव का आकलन किया गया। यह अध्ययन गोरखपुर मंडल के तीन जिलों—गोरखपुर, कुशीनगर और महराजगंज में किया गया। जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत में जल जीवन मिशन के सकारात्मक और व्यावहारिक परिणामों का विश्लेषण करना था।
जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार की “हर घर जल योजना 2019” के अंतर्गत प्रारंभ इस मिशन के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रतिदिन 55 लीटर स्वच्छ पेयजल नल के माध्यम से उपलब्ध कराने का लक्ष्य था। इसी योजना के प्रभावों को आंकने के लिए जनवरी से मार्च 2025 के बीच भूगोल विभाग ने ट्रांजिट वाक, साक्षात्कार, सामूहिक परिचर्चा और व्यक्तिगत अवलोकन के माध्यम से आठ विभिन्न प्रकार के हितधारकों से फीडबैक लिया।
अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार जल जीवन मिशन ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, आर्थिक विकास एवं सामाजिक समरसता जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन लाए हैं। स्वच्छ जल की उपलब्धता के कारण संक्रामक, उदर और त्वचा रोगों में गिरावट देखी गई है।
इस अध्ययन का संचालन विभागाध्यक्ष प्रो. शिवाकांत सिंह और सहायक आचार्य डॉ. दीपक प्रसाद के निर्देशन में हुआ। डॉ. स्वर्णिमा सिंह, डॉ. सर्वेश कुमार, डॉ. अंकित सिंह, डॉ. मनीष कुमार सिंह, डॉ. श्रीप्रकाश सिंह, डॉ. ज्ञानप्रकाश और डॉ. दुर्गावती यादव सहित कई शिक्षकों ने इसमें सहयोग किया। सर्वेक्षण में विभाग के तीन वरिष्ठ शोधार्थी—मनीषा पासवान, अखंड प्रताप सिंह और तृप्ति उपाध्याय ने 12 स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के साथ मिलकर तीन जिलों में डेटा संग्रह व विश्लेषण कार्य संपन्न किया।
एक अन्य समाचार के अनुसार शनिवार को भूगोल विभाग में एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। जिसमें वाटर एड इंडिया से देवेंद्र सिंह, स्वेता सिंह, अस्मिता शाहा और यशवंत सिंह उपस्थित रहे। सभी शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को किट, प्रमाण-पत्र व स्टाइपेंड प्रदान कर सम्मानित किया गया, जबकि प्रो. शिवाकांत सिंह को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपक प्रसाद ने किया और आभार ज्ञापन विभागाध्यक्ष ने किया।
शोध की गुणवत्ता और निष्कर्षों की गंभीरता को देखते हुए शासन ने गोरखपुर विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग को भविष्य में और शोध कार्यों के संचालन हेतु प्रस्तावित किया है। साथ ही पूर्वांचल के अन्य मंडलों में भी जल जीवन मिशन के प्रभाव मूल्यांकन की जिम्मेदारी अन्य विश्वविद्यालयों को सौंपे जाने की बात कही गई है।
यह अध्ययन न केवल जल जीवन मिशन की सफलता की पुष्टि करता है, बल्कि विश्वविद्यालय स्तर पर ग्रामीण विकास से जुड़े गंभीर शोध की उपयोगिता को भी रेखांकित करता है।

Editor CP pandey

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