स्वस्थ विचारों का आदान प्रदान,
ज्ञान और बुद्धि से आगे बढ़ता है,
तर्कहीन वार्तालाप अज्ञानता एवं
अहंकार जैसे दुर्गुण पैदा करता है।
किसी की सरलता व सीधापन को
लोग उसकी कमजोरी मान लेते हैं,
पर सीधापन जल जैसा होता है,
अपने बहाव से चट्टानें तोड़ देता है।
मानव का सीधापन और सरलता
तो उसका अच्छा संस्कार होता है,
जिनके बल व सिद्धांत पर चलकर
इंसान इंसानियत का पोषक होता है।
भारतवासी देश प्रेम में संस्कृत का
अध्ययन करने की पैरवी करते हैं,
परंतु अपने बच्चों को अंग्रेज़ी के
माध्यम से देश विदेश में पढ़ाते हैं।
क्या इसमें कोई बुराई है यदि है,
तो इसमें ऐसा ग़लत सही क्या है,
जिसको जो पढ़ना है, पढ़े व बढ़े,
हर भाषा का ज्ञान संस्कार देता है।
मीठे फल अच्छे पेड़ों में लगते हैं,
कड़वे फल अच्छे बुरे सबमें लगते हैं,
भाषा की अच्छाई सुसंस्कार देती है,
तीखी भाषा सब संस्कार बदल देती है।
मानव प्रवृत्ति भी अच्छे बुरे पेड़ों जैसी
सुसंस्कार कुसंस्कार दोनो देती है,
जिसके हृदय में जैसी भावना होती,
उसकी कृति संस्कारों पर निर्भर होती।
संस्कारों की परिभाषा दो बातों से
प्रायः इस दुनिया में परखी जाती है,
आपका धैर्य, जब आप निर्धन हों,
आदित्य ‘रवैया’ जब आप धनी हों।
यूपी की सियासत में हलचल! 2027 चुनाव से पहले राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को लेकर क्यों…
फोटो goo BIMSTEC की पहली गृह मंत्रियों की बैठक में अमित शाह का बड़ा संदेश,…
पटना में Gen-Z प्रदर्शन से गरमाया माहौल! गांधी मैदान से JP गोलंबर तक पुलिस का…
फोटो goo प्रयागराज (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) की वर्ष…
Ai निर्मित राहुल गांधी की SIR याचिका को सुप्रीम कोर्ट में बड़ा झटका! 14 खामियां…
फोटो X नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के…