Thursday, April 16, 2026
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समानता दल संयुक्त रूप से करेगी सामाजिक न्याय महासम्मेलन

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
राष्ट्रीय समानता दल के प्रदेश अध्यक्ष संजय दीप कुशवाहा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी किया जिसमे बताया की राष्ट्रीय समानता दल,सीपीआई (एम एल), भारती समाज पार्टी,सी पी एम,सी पी आई,अंबेदारवादी जागरूकता मंच,बहुजन जागरूकता मंच, भारती मुक्ति मोर्चा, आदि संगठन संयुक्त रूप से सामाजिक न्याय सम्मेलन का आयोजन करेगी यह आयोजन संबंध मैरेज लान रुद्रपुर मोड़ में दिनांक 01/10/2023 को आयोजित होगा । आगे इन्होने कहा की देश की राजनीति संक्रमण के दौर से गुजर रही है। वर्तमान सरकार संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर योजनाबद्ध तरीके से हमलावर है। दलितों, अल्पसंख्यकों और पिछड़े समुदायों पर योजनाबद्ध तरीके से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हमला किया जा रहा है। आज संविधान को बदलने का प्रयास किया जा रहा है।देश का संविधान कमजोर, और दलित, अल्पसंख्यक और पिछड़े समुदाय का क्वज है। हम सभी संविधान और लोकतंत्र, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। नफरत की राजनीति को प्यार की आंधी से खत्म करने का संकल्प लेते हुए हम सब मिलकर देश के सर्वांगीण विकास के लिए जातीय जनगणना की मांग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक महासम्मेलन कर रहे हैं। जातीय जनगणना राजनीति का सवाल नहीं है। जाति जनगणना से समावेशन एवं बहिष्करण की त्रुटियां कम होंगी। सटीक जातिगत आंकड़ों से सबसे पिछड़ी जातियों की पहचान की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार सरकारों से जातियों से संबंधित डेटा उपलब्ध कराने को कहा। लेकिन जातीय जनगणना नहीं होने के कारण आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। जातिगत जनगणना वास्तव में नीति निर्धारण के लिए आवश्यक है। किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि कितने लोग हसिए पर हैं। आंकड़ों के मुताबिक देश में लाखों परिवार भूमिहीन हैं। लाखों परिवार कूड़ा बीनकर और भीख मांगकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। ऐसे परिवारों की आर्थिक स्थिति का पता लगाने के लिए जाति जनगणना नितांत आवश्यक है। ताकि पता चल सके कि कौन लोग हैं और किस जाति के हैं। उनकी सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति ऐसी क्यों है।इसलिए संविधान बचाएं और इंडिया एलायंस सहयोग मंच के तत्वावधान में जातीय जनगणना कराएं। अधिकार, सम्मान बचाओ महासम्मेलन में बढ़-चढ़कर भाग लें।

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