संरक्षित गोवंश के वर्ष पर्यन्त भरण-पोषण हेतु पर्याप्त मात्रा में भूसा की उपलब्धता सुनिश्चित करें: डीएम

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर ने शासन के निर्देश के क्रम में संरक्षित गोवंश के वर्ष पर्यन्त भरण-पोषण हेतु पर्याप्त मात्रा में गेहूँ के भूसे का क्रय एवं दान के माध्यम से संग्रहीत करने हेतु सम्बंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा है कि रबी के फसलो की कटाई सन्निकट है। तत्समय स्थानीय स्तर पर किसानो के खेत में ही पर्याप्त भूसा उपलब्ध रहेगा। गोवंश के भरण पोषण हेतु आवश्यक है कि गो-आश्रय स्थलवार वर्षभर के लिए भूसे की आवश्यकताओं का आंकलन कर अधिकाधिक मात्रा में स्थानीय स्तर पर भूसा दानदाताओं से दान में प्राप्त कर संग्रहीत कर लिया जाय। फसल कटाई के समय भूसा कम दरों पर उपलब्ध रहता है, अतः स्थानीय स्तर पर कृषको के खेत से ही आवश्यकता के अनुरूप भूसा क्रय करते हुए भण्डारण कर लिया जाय। संरक्षित निराश्रित गोवंश हेतु वर्ष पर्यन्त भूसे की उपलब्धता निर्वाध रूप से सुनिश्चित किये जाने हेतु कार्यवाही सम्पादित करायी जाय।
उक्त के संबंध में जिलाधिकारी ने निर्देशित किया है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम प्रधान के नेतृत्व में उपजिलाधिकारी स्तर से एक समिति गठित कर ली जाय जिसमें ग्राम पंचायत सचिव, लेखपाल एवं अन्य कर्मचारी सम्मिलित हो। समिति द्वारा ट्रैक्टर अथवा अन्य माल वाहक वाहन के साथ ग्राम सभा में भ्रमण किया जाय और भूसा दान में प्राप्त कर संग्रहीत करते हुए अधिकाधिक दान देने हेतु जनमानस को प्रेरित किया जाय। यह अभियान 15 मार्च से 15 मई तक चलाया जाय। बड़े दानदाताओं से दान करने हेतु उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, खण्ड विकास अधिकारी स्वयं किसानो से सम्पर्क कर भूसा दान में प्राप्त करें और उनको सम्मानित करें। बड़े दानदाताओं को सम्मानित करने के साथ-साथ विभिन्न प्रचार माध्यमों से उनके योगदान को प्रचारित भी कराया जाय, जिससे अन्य लोग प्रेरणा प्राप्त कर भूसा दान हेतु अग्रसर हो सके।
जिलाधिकारी ने गो-आश्रय स्थलों में वर्ष पर्यन्त भूसे की उपलब्धता सुनिश्चित बनाये रखने के दृष्टिगत सम्बंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि रबी की फसल कटाई के समय कृषको के खेत में ही पर्याप्त भूसा उपलब्ध रहता है. अतः पंचायत स्तर पर ही भूसे का क्रय किया जाना उचित होगा। इससे जहाँ एक ओर सस्ती दरों पर भूसा प्राप्त हो सकेगा, वहीं दूसरी ओर परिवहन व्यय भी बचेगा। इस हेतु एस०एफ०सी० पूलिंग से पर्याप्त धनराशि का भी उपयोग किया जाय तथा गो-आश्रय स्थल पर ही स्थानीय प्रचलित विधियों यथा खरही, खोप, भक्कू आदि बनाकर दीर्घकालिक आवश्यकता के अनुरूप भूसा संग्रहीत कर भूसा बैंक स्थापित किया जाय। उन्होंने बताया कि जेम पोर्टल पर उपलब्धता न होने की अपरिहार्य दशा में उ०प्र० प्रोक्योरमेण्ट मैनुअल, 2016 की व्यवस्थानुसार विकास खण्ड स्तर पर भी ई-टेण्डर के माध्यम से दर अनुबन्ध कर भूसे का क्रय किया जा सकता है। इसमें मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एवं जिला पंचायतराज अधिकारी का इस महत्वपूर्ण अभियान में पूर्ण जिम्मेदारी होगी।

rkpnews@somnath

Recent Posts

जनगणना 2027 के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण का दूसरा चरण शुरू, सैकड़ों प्रगणक हुए शामिल

औरैया (राष्ट्र की परम्परा)भारत की जनगणना 2027 को सफल और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से…

1 hour ago

दिशा बैठक में गूंजे जनसमस्याओं के मुद्दे, वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने दिए कड़े निर्देश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में जनहित…

1 hour ago

फार्मर रजिस्ट्री में लापरवाही पर डीएम सख्त, अनुपस्थित कर्मियों का मानदेय-वेतन रोका

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। फार्मर रजिस्ट्री अभियान की धीमी प्रगति पर जिलाधिकारी आलोक…

1 hour ago

राजा भाऊ भदाने को भ्रातृ शोक, भारत तिब्बत समन्वय संघ में शोक की लहर

धार/मध्य प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। मध्य प्रदेश के मालवा प्रांत अंतर्गत धार जिले के निवासी…

1 hour ago

हीटवेव से फसलों को बचाने के लिए किसानों को सतर्क रहने की जरूरत

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)जिले में लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों…

1 hour ago

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच वार्षिकोत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह सम्पन्न

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय गहिला महाविद्यालय खलीलाबाद में शैक्षिक…

2 hours ago