वृद्धावस्था में मानसिक स्वास्थ्य सबसे बड़ी चुनौती: संवेदनशील समाज और पारिवारिक सहयोग की आवश्यकता- प्रो. आदेश अग्रवाल

एलुमनी मीट में गूंजा मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा, वृद्धजनों के सम्मान पर बल

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा शनिवार को “अलोहामोरा’26” के अंतर्गत वार्षिक एलुमनी मीट का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग और वृद्धावस्था पर गंभीर मंथन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि के साथ हुआ।
विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय कुमार ने स्वागत भाषण में पूर्व छात्रों के योगदान को विभाग की सुदृढ़ता का आधार बताते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण फेसबुक के माध्यम से किया गया, जिसमें देश-विदेश से 100 से अधिक पूर्व छात्र ऑनलाइन जुड़े और अपने अनुभव साझा किए।
विशिष्ट अतिथि प्रो. अराधना शुक्ला ने “कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में मानसिक स्वास्थ्य” विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि डिजिटल निर्भरता, आभासी संबंधों और सूचना के अत्यधिक प्रवाह के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। उन्होंने भावनात्मक जुड़ाव, आत्म-नियंत्रण और सामाजिक समर्थन तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य अतिथि प्रो. आदेश अग्रवाल ने “मानसिक स्वास्थ्य एवं वृद्धावस्था” विषय पर कहा कि बढ़ती उम्र के साथ अकेलापन, निर्भरता और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याएँ मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। उन्होंने परिवार, समाज और नीति-निर्माताओं की साझा जिम्मेदारी पर बल देते हुए अंतर-पीढ़ी संवाद को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूक्लियर परिवार व्यवस्था के कारण वृद्धजनों का सामाजिक समर्थन तंत्र कमजोर हो रहा है, ऐसे में संवाद, संवेदनशीलता और सहभागिता अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने विश्वविद्यालय और पूर्व छात्रों के बीच सहयोग को और सशक्त बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर प्रो. प्रेम सागर नाथ तिवारी, प्रो. अनुपम नाथ त्रिपाठी, प्रो. चित्तरंजन मिश्रा, प्रो. नाज़िश बानो, प्रो. मंजू मिश्रा, प्रो. आर.पी. सिंह, डॉ. अंशु मिश्रा सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक एवं शिक्षक उपस्थित रहे। अंत में डॉ. गरिमा सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में “मेंटल हेल्थ: साइको-सोशल पर्सपेक्टिव्स” श्रृंखला की तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। यह श्रृंखला कुल 10 पुस्तकों का व्यापक अकादमिक संकलन है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों पर गहन अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।
अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अनुभूति दुबे ने पुस्तकों का परिचय प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह श्रृंखला शोधार्थियों, विद्यार्थियों और पेशेवरों के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री है। लोकार्पित पुस्तकों में “एजिंग: इश्यूज एंड इंटरवेंशन्स”, “मेंटल हेल्थ एट वर्कप्लेस” तथा “मेंटल हेल्थ: प्रमोशन एंड प्रिवेंशन” शामिल हैं।
मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि ने पुस्तकों को समकालीन समय की आवश्यकता बताया, वहीं अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति ने इसे अकादमिक उत्कृष्टता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

rkpNavneet Mishra

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