शैक्षिक उन्नयन एवं सामाजिक परिवर्तन के लिए पुरातन छात्रों की भूमिका सराहनीय: कुलपति
शिक्षाशास्त्र विभाग में राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पुरातन छात्र सम्मेलन
शिक्षक शिक्षा में नवाचार से ही साकार होगा विकसित भारत @2047 का संकल्प
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पुरातन छात्र सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिक्षाविदों, पुरातन छात्रों, शोधार्थियों, नीति-निर्माताओं एवं शिक्षा विशेषज्ञों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए “विकसित भारत @2047: शिक्षक शिक्षा की भूमिका” विषय पर समकालीन एवं भविष्यपरक आयामों पर गहन विमर्श किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। संयोजक प्रो. सुषमा पाण्डेय ने संगोष्ठी की प्रस्तावना एवं अतिथि परिचय प्रस्तुत किया, जबकि संचालन एवं स्वागत भाषण आयोजन सचिव डॉ. राजेश कुमार सिंह ने किया। प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रो. सुनीता दुबे ने की तथा आभार सह-संयोजक प्रो. उदय सिंह ने व्यक्त किया।
संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य शिक्षक शिक्षा की केंद्रीय भूमिका को सुदृढ़ करते हुए भारत को ज्ञान-आधारित, समावेशी एवं नवाचार-प्रेरित राष्ट्र के रूप में विकसित करना रहा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में शिक्षक शिक्षा की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों एवं संभावनाओं पर विचार करते हुए गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी शिक्षकों के निर्माण पर बल दिया गया।
मुख्य अतिथि प्रो. राजशरण शाही ने कहा कि शिक्षा की जड़ें राष्ट्र की संस्कृति से जुड़ी होनी चाहिए। भारतीय शिक्षा को केवल सूचना का नहीं, बल्कि ज्ञान का केंद्र बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत बताते हुए कुशल शिक्षकों के निर्माण को विकसित भारत की आधारशिला बताया।
तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने शिक्षक शिक्षा की चुनौतियाँ, डिजिटल एवं एआई आधारित नवाचार, गुणवत्ता सुनिश्चितता, सतत व्यावसायिक विकास, समावेशी शिक्षा, भारतीय ज्ञान प्रणाली और 21वीं सदी के कौशल जैसे विषयों पर विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि आज शिक्षक केवल ज्ञान प्रदाता नहीं, बल्कि मार्गदर्शक, नवप्रवर्तनकर्ता और सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत के रूप में उभर रहा है।
द्वितीय सत्र में आयोजित पुरातन छात्र सम्मेलन की अध्यक्षता कुलपति प्रो. पूनम टण्डन ने की। इस दौरान पुरातन छात्रों ने अपने अनुभव साझा करते हुए विभाग के विकास में सहयोग का संकल्प लिया। विभिन्न सुझाव भी प्रस्तुत किए गए, जो विश्वविद्यालय के शैक्षणिक उन्नयन में सहायक होंगे।
समापन सत्र में कुलपति प्रो. पूनम टण्डन ने कहा कि यह आयोजन शिक्षाशास्त्र विभाग की अकादमिक सक्रियता को सुदृढ़ करने के साथ ही “विकसित भारत @2047” के लक्ष्य में शिक्षक शिक्षा की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करता है। आयोजन के अंत में सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
