Thursday, February 19, 2026
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कर्तव्य करिए, फल की इच्छा नहीं

आस्था और विश्वास की ताक़त से
टूटते हुये सम्बंध बार बार जुड़ जाते हैं,
लोगों की उजड़ी अंधियारी दुनिया में
यही हरियाली प्रकाश फैलाते हैं।

आदर्श, अनुशासन, मर्यादा, परिश्रम,
ईमानदारी के साथ साथ आस्था,
विश्वास और उच्च मानवीय मूल्य ही
किसी को जीवन में महान बनाते हैं।

धैर्य और सत्य वह सच्चे पथ हैं जिन
पर चलकर हम नहीं कभी पछताएँगे,
ऐसे पथ पर चलते रहिये, न अपना
शीश और न नज़रें कभी झुकायेंगे।

मत्स्य पियासी जब जल में हो तो
कितनी अनहोनी अद्भुत है यह बात,
हम सब अंश ईश के हैं पर फिर भी
खोजते हैं जीवन से मोक्ष की चाहत।

ईश्वर ने हमें निरंतर कर्तव्य करते
रहने के लिए ही इंसान बनाया है,
फल की इच्छा बिना कर्तव्य करते
रहिये, गीता में भी स्पष्ट बताया है।

आदित्य बिना किसी मोह और
माया के अपने कर्तव्य करते रहिए,
कर्तव्य धर्म है, कर्तव्य ही पूजा है,
कर्तव्य करिये, नेतागीरी कम करिए।

•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’

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