स्वतंत्र पत्रकारिता: लोकतंत्र की आत्माराष्ट्रीय प्रेस दिवस पर विशेष
नवनीत मिश्र राष्ट्रीय प्रेस दिवस केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की उस धड़कन का जीवंत प्रमाण है जो समाज को जागरूक, सतर्क और संवेदनशील बनाए रखती…
निष्पक्ष खबर, सशक्त विचार
नवनीत मिश्र राष्ट्रीय प्रेस दिवस केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की उस धड़कन का जीवंत प्रमाण है जो समाज को जागरूक, सतर्क और संवेदनशील बनाए रखती…
दैहिक, दैविक, भौतिक तापा,कलिकाल सबहिं कहुँ व्यापा। सत्य प्रसंग असत्य कहि देहीं,औरन कहँ अति मतिभ्रम देहीं। सज्जन साधु सन्त मत ऐहू,मष्ट करहु, इन सन् न सनेहू। राम राम श्री राममय…
आस्था और विश्वास की ताक़त सेटूटते हुये सम्बंध बार बार जुड़ जाते हैं,लोगों की उजड़ी अंधियारी दुनिया मेंयही हरियाली प्रकाश फैलाते हैं। आदर्श, अनुशासन, मर्यादा, परिश्रम,ईमानदारी के साथ साथ आस्था,विश्वास…
डाक हिमालय की बर्फीलीलेकर चलीं हवाएं,सुबह-शाम मैदानों कीसांकल चढ़कर खाकाएं। क्रूर-निर्दयी से मर्माहतबार-बार पिस-पिस केअंधियारे की बांहों मेंचांदनी कसमसा सिसकेकुहरे की चादर ओढ़ेअंसुआई आंखों भोरेंअनुभूति को कंपकंपी कीदावत बांटती दिशाएं।…
दादा बड़ा न भैया,सबसे बड़ा रुपैया ।सब पैसे का खेल है,और कछू ना भैया ।। मंदिर मे दिया जाऊँ तोहमें लोग चढ़ावा कहते हैं,स्कूल कालेज में शिक्षा शुल्क,शादी में दो…