Categories: कविता

ईश्वरीय देन

काम करने वाले को कुछ न कुछ
परेशानी हर रास्ते पर आ जाती है,
पर हर परेशानी का कोई न कोई
निदान रास्ते में ही मिल जाता है।

इरादा पक्का हो, राह के रोड़े व
सारी मुसीबतें ख़त्म हो जाती हैं,
निराशा ख़त्म हो हौसला बढ़ता है,
और तब सफलता चरण चूमती है।

मस्तिष्क में आयी सोच की लहरें,
विचार और आती जाती भावनायें,
ईश्वरीय देन और उपहार होती हैं,
यह आयात निर्यात हेतु नहीं होती हैं।

मन में आस्था और विश्वास हो,
ईश्वर से कुछ भी क्यों माँगना,
वह तो स्वयं दाता बन कर देता है,
वैसे ही बिन माँगे सब मिल जाता है।

समस्या का हल, परिश्रम का फल,
साथ ही आने वाले कल को आदित्य
ईश्वर के ऊपर छोड़ देना चाहिये,
उसी से सारी आशायें रखनी चाहिये।

  • डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र
    ‘आदित्य’
Karan Pandey

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