डिजिटल मार्केटिंग से पारंपरिक शिल्प को मिलेगा वैश्विक बाजार

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से पारंपरिक कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की मजबूत पहल


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। पारंपरिक शिल्प और कारीगरी को आधुनिक बाजार से जोड़कर कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से देवरिया जनपद में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विकास खंड सभागार, गौरी बाजार में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यक्रम में 135 से अधिक विश्वकर्मा कारीगरों ने भाग लिया। आयोजन एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय) के तत्वावधान में हुआ।
कार्यक्रम में बढ़ई, लोहार, सोनार, दर्जी, मोची, धोबी, नाई, गुड़िया एवं खिलौना निर्माता जैसे अनेक पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगर शामिल हुए। उन्हें डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स, सरल ऋण सुविधा, कौशल प्रशिक्षण और टूलकिट सहायता जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
पारंपरिक कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक नीरज कुमार ने किया। स्वागत संबोधन में अविनाश कुमार अपूर्व ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान को संजोए रखने में पारंपरिक कारीगरों की भूमिका केंद्रीय है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का लक्ष्य इन्हें आधुनिक तकनीक, वित्तीय संसाधन और बाजार से जोड़कर स्थायी आय का मार्ग प्रशस्त करना है।
स्वरोजगार, उद्योग योजनाएं और सरकारी सहयोग की विस्तृत जानकारी
सहायक प्रबंधक (उद्योग) मनीष वर्मा ने योजना के अंतर्गत मिलने वाले लाभों के साथ राज्य सरकार की औद्योगिक एवं स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कारीगरों को प्रशिक्षण, पूंजी और बाजार उपलब्ध कराने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

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डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स से बढ़ेंगे अवसर
उद्यमी डॉ. संजय भारती ने कारीगरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने के व्यावहारिक तरीके बताए। उन्होंने समझाया कि ऑनलाइन बाजार में पारंपरिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। यदि कारीगर डिजिटल मार्केटिंग अपनाएं तो वे अपने उत्पाद देश-विदेश तक पहुंचा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन बिक्री पारंपरिक व्यवसायों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रही है।
बैंकिंग सुविधाएं और आसान ऋण प्रक्रिया
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की वरिष्ठ शाखा प्रबंधक मोना वर्मा ने योजना के तहत ऋण प्रक्रिया, पात्रता, ब्याज दर और बैंकिंग सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत कारीगरों को सरल शर्तों पर ऋण दिया जा रहा है, जिससे वे आधुनिक उपकरण खरीदकर अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकें।

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डाक विभाग, लॉजिस्टिक्स और प्रशिक्षण कार्यक्रम
भारतीय डाक विभाग के प्रतिनिधि अरविंद गोंड ने बताया कि डाक विभाग पार्सल और लॉजिस्टिक सेवाओं के जरिए कारीगरों को उत्पादों की सुरक्षित और समयबद्ध डिलीवरी में सहयोग दे रहा है।
डीपीएमयू देवरिया के प्रतिनिधि विशाल वर्मा ने कहा कि कौशल प्रशिक्षण से कारीगरों की उत्पाद गुणवत्ता और कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हो रहा है।
योजना की प्रगति: रिकॉर्ड उपलब्धि
सहायक निदेशक एवं समन्वयक नीरज कुमार ने प्रगति रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि देशभर में पांच वर्षों में 30 लाख कारीगरों को लाभ देने का लक्ष्य था, जिसे मात्र डेढ़ वर्ष में ही प्राप्त कर लिया गया है।
उत्तर प्रदेश में अब तक 1,78,031 लाभार्थियों का पंजीकरण, 1,40,440 को प्रशिक्षण, 14,927 को ऋण स्वीकृति और 66,821 कारीगरों को टूलकिट वितरित की जा चुकी है। यह उपलब्धि कारीगरों के सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर है।

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प्रशासन की प्रतिबद्धता और समाधान का आश्वासन
खंड विकास अधिकारी साबिर अनवर ने कहा कि एमएसएमई कार्यालय कारीगरों की हर समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। ऋण, प्रशिक्षण या तकनीकी सहायता से जुड़ी समस्याओं का त्वरित निस्तारण प्राथमिकता पर किया जाएगा।
आत्मनिर्भर भारत को मिल रही मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती दे रही है। इससे रोजगार सृजन के नए अवसर बन रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है।
कार्यक्रम के अंत में उद्यमी अमरेश कुमार ने अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम कारीगरों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं और उन्हें नई पहचान दिलाने में सहायक हैं।

Editor CP pandey

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