Categories: लेख

धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महराज: गोरक्षा आंदोलन से अद्वैत वेदांत तक

🖊️नवनीत मिश्र

भारतीय संस्कृति के आकाश में अनेक साधु-संतों ने अपने तप, त्याग और त्यागमयी जीवन से अमिट प्रकाश फैलाया है। इन्हीं में एक महान विभूति थे, धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज। उनका जीवन त्याग, तपस्या, विद्या और धर्मरक्षा का अद्वितीय उदाहरण है। विक्रम संवत् 1964 (सन् 1907) की सावन शुक्ल द्वितीया को प्रतापगढ़ जिले के भटनी ग्राम में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में उनका अवतरण हुआ। माता-पिता ने उनका नाम रखा हरि नारायण। किंतु यह बालक सामान्य नहीं था। बाल्यावस्था से ही उसमें अध्यात्म की ज्योति प्रज्वलित थी। नौ वर्ष की आयु में विवाह संस्कार सम्पन्न हुआ, परंतु हृदय तो वैराग्य की राह पर अग्रसर था। सत्रह वर्ष की आयु में उन्होंने गृहस्थ जीवन को त्याग दिया और शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती से ब्रह्मचर्य दीक्षा लेकर हरिहर चैतन्य बने। हिमालय की गोद में जाकर उन्होंने कठिन तप और साधना की। भूमि पर शयन, भिक्षा पर जीवन, गंगातट पर कठोर तपस्या, यही उनका जीवन बन गया। उनके हाथ सदैव भिक्षापात्र से जुड़े रहते, इसलिए वे “करपात्री” नाम से प्रसिद्ध हुए। उनकी साधना इतनी कठोर थी कि सूर्य की परिक्रमा की भांति वे एक पैर पर खड़े होकर दिन-रात तपस्या करते। अध्ययन की गति इतनी तीव्र थी कि वे दिनों में ही पूरे पाठ्यक्रम को आत्मसात कर लेते। उनका जीवन साधना, विद्या और भक्ति का संगम था। काशी में उन्होंने धर्मसंघ की स्थापना की। वे अद्वैत वेदांत के प्रखर प्रचारक बने। धर्म, समाज और राष्ट्र की रक्षा के लिए उन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण समर्पित कर दिया। उनका मत था कि धर्म ही राष्ट्र की आत्मा है। सन 1948 में उन्होंने अखिल भारतीय राम राज्य परिषद का गठन किया। यह राजनीतिक दल मात्र सत्ता की चाह से नहीं, बल्कि धर्मप्रधान शासन की स्थापना के उद्देश्य से बना था। इसने लोकसभा और विधानसभा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर यह सिद्ध किया कि सनातन विचारधारा जन-जन के हृदय में जीवित है।
स्वामी करपात्री जी का नाम आते ही स्मरण होता है 7 नवंबर 1966 का, जब संसद भवन के सामने हजारों संतों ने गाय की रक्षा हेतु धरना दिया। यह दिन भारतीय इतिहास का एक अमर अध्याय बन गया। चारों शंकराचार्य, जैन मुनि, सनातन संत और हजारों तपस्वी एक स्वर में गौहत्या पर प्रतिबंध की मांग कर रहे थे। किन्तु शांत संतों पर पुलिस की गोलियाँ चलीं। हजारों साधु शहीद हो गए। यह घटना धर्म की रक्षा हेतु दिए गए सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक बन गई। इस निर्मम घटना से आहत होकर तत्कालीन गृहमंत्री गुलजारीलाल नंदा ने त्यागपत्र दे दिया। 7 फरवरी 1982 (माघ शुक्ल चतुर्दशी) को वाराणसी के केदारघाट पर स्वामी करपात्री जी ने स्वेच्छा से समाधि ली। गंगा मैया की गोद में उन्हें जल समाधि दी गई।
स्वामी करपात्री जी केवल तपस्वी ही नहीं, बल्कि अद्भुत लेखक भी थे। वेदार्थ पारिजात, रामायण मीमांसा, विचार पीयूष, मार्क्सवाद और रामराज्य जैसे उनके ग्रंथ आज भी सनातन संस्कृति के दीपस्तंभ हैं। इनमें भारतीय परंपरा की गहनता और वेदांत का प्रखर प्रकाश झलकता है। स्वामी करपात्री जी का जीवन एक दीपक है, जो सनातन धर्म की राह को आलोकित करता रहेगा। उन्होंने दिखाया कि धर्म केवल मंदिरों की पूजा में नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के उत्थान में भी निहित है। उनकी स्मृति मात्र से ही श्रद्धा और संकल्प की ऊर्जा मिलती है। वे आज भी सनातन संस्कृति के प्रहरी और गोरक्षा आंदोलन के अमर नायक के रूप में सदैव याद किए जाते रहेंगे।

Karan Pandey

Recent Posts

देवरिया में खेत की आग से दर्दनाक हादसा, झोपड़ी जली, दिव्यांग महिला की मौत

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के बरहज थाना क्षेत्र के कोटवा देवरा गांव में बुधवार…

4 hours ago

देवरिया में निःशुल्क बीज मिनीकिट व अनुदानित बीज की ऑनलाइन बुकिंग शुरू

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में किसानों के लिए खरीफ-2026 सीजन हेतु निःशुल्क बीज मिनीकिट…

5 hours ago

दिल्ली में मोमोज खाने से 12 लोग बीमार, बच्चे की हालत गंभीर

दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। राजधानी दिल्ली के पटपड़गंज इलाके से एक चौंकाने वाली घटना सामने…

5 hours ago

देवरिया में संचारी रोग नियंत्रण अभियान तेज, गांव-गांव जागरूकता

भलुअनी/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में संचारी रोगों से बचाव के लिए एक अप्रैल से…

5 hours ago

संतकबीरनगर में सड़क सुरक्षा सख्त: ब्लैक स्पॉट पर रम्बल स्ट्रिप अनिवार्य

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में सड़क हादसों पर नियंत्रण के लिए प्रशासन ने सख्त…

5 hours ago

महिलाओं के अधिकार में देरी क्यों? कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब

सलेमपुर, देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। सलेमपुर स्थित कांग्रेस कार्यालय पर आयोजित कार्यकर्ताओं की बैठक में…

6 hours ago