मऊ (राष्ट्र की परम्परा)
परंपरागत कुम्हारी और माटीकला से जुड़े कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। योजना का मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक उत्पादों के विकल्प के रूप में मिट्टी से बने बर्तनों के उपयोग को बढ़ावा देना और कारीगरों को रोजगार उपलब्ध कराना है।
जिला ग्रामोद्योग विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जनपद को लक्ष्य आवंटित किया गया है। इसके तहत 18 से 55 वर्ष आयु वर्ग के पारंपरिक कारीगर, वर्तमान में कार्यरत शिल्पकार, समूह और समितियां आवेदन कर सकती हैं। पात्र अभ्यर्थियों को बैंक के माध्यम से अधिकतम 10 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
योजना के अंतर्गत ऋण का 95 प्रतिशत हिस्सा बैंक द्वारा दिया जाएगा, जबकि 5 प्रतिशत लाभार्थी को स्वयं वहन करना होगा। इसके साथ ही पूंजीगत ऋण पर 25 प्रतिशत तक मार्जिन मनी अनुदान भी दिया जाएगा। पांच लाख रुपये से अधिक ऋण लेने के लिए अभ्यर्थी का कम से कम आठवीं पास होना अनिवार्य रखा गया है।
आवेदन की अंतिम तिथि 15 मई 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक अभ्यर्थी जिला ग्रामोद्योग कार्यालय, निजामुद्दीनपुरा स्थित कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं या दिए गए मोबाइल नंबरों पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
प्रशासन का मानना है कि इस योजना से न केवल पारंपरिक कारीगरों को रोजगार मिलेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा और प्लास्टिक के उपयोग में कमी आएगी।
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