विकास कार्य ठप होने का डर, प्रधानों ने सरकार तक पहुंचाई आवाज

पंचायत चुनाव टलने पर कुशीनगर में ग्राम प्रधानों का प्रदर्शन, कार्यकाल बढ़ाने की मांग पर डीएम ने दिया आश्वासन


संवाददाता: भगवन्त यादव


कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा) पंचायत चुनाव टलने के मुद्दे पर ग्राम प्रधानों का असंतोष सोमवार को खुलकर सामने आया, जब ग्राम प्रधान संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में प्रधान कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर प्रदर्शन करने लगे। उन्होंने अपने कार्यकाल को बढ़ाए जाने की मांग उठाई और प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि चुनाव में देरी के चलते विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

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प्रदर्शन के दौरान ग्राम प्रधानों ने बताया कि पंचायत चुनाव टलने से गांवों में चल रही योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों में अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में यदि कार्यकाल समाप्त हो जाता है, तो विकास योजनाएं अधूरी रह जाएंगी और पंचायत स्तर पर कामकाज ठप हो सकता है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाए, ताकि गांवों में विकास की रफ्तार बनी रहे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह तंवर ने मौके पर ही ग्राम प्रधानों से बातचीत की और उनकी समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने ज्ञापन प्राप्त कर संबंधित अधिकारियों के साथ तत्काल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा की। इस दौरान जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO), जिला विकास अधिकारी (DDO), परियोजना निदेशक (PD) और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को जोड़कर एक-एक बिंदु पर जानकारी ली गई।
डीएम तंवर का कार्य करने का तरीका इस दौरान काफी सक्रिय और प्रभावी नजर आया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पंचायत स्तर पर लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए और किसी भी तरह की प्रशासनिक बाधा न आने दी जाए। साथ ही उन्होंने ग्राम प्रधानों को भरोसा दिलाया कि उनकी प्रमुख मांग — कार्यकाल बढ़ाने का मुद्दा — शासन स्तर तक पहुंचाया जाएगा।
ग्राम प्रधान संगठन के प्रतिनिधियों ने प्रशासन के इस रुख की सराहना की और उम्मीद जताई कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान निकलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत स्तर पर वित्तीय प्रक्रियाओं में आ रही दिक्कतों और अधिकारों के सीमित दायरे को लेकर भी सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।

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प्रदर्शन के दौरान प्रधानों ने कई अन्य मुद्दे भी उठाए, जिनमें लंबित भुगतान, विकास योजनाओं की स्वीकृति में देरी, और अधिकारियों के स्तर पर समन्वय की कमी प्रमुख रही। इन समस्याओं के समाधान के लिए भी प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग की गई।
जिला प्रशासन की ओर से सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद ग्राम प्रधानों ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन समाप्त कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया कि पंचायत चुनाव में देरी का असर जमीनी स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था और विकास कार्यों पर पड़ रहा है, जिसे लेकर जनप्रतिनिधियों में चिंता बढ़ रही है।

Editor CP pandey

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