Category: लेख

वर्दी, मर्यादा और विश्वास का संकट

— डॉ. प्रियंका सौरभ लोकतंत्र में पुलिस व्यवस्था राज्य सत्ता का सबसे संवेदनशील, प्रभावशाली और भरोसेमंद चेहरा मानी जाती है। पुलिस केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि राज्य…

विकसित भारत का सपना और ज़मीनी हकीकत

भारत की सड़कें, प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही का संकट — विकसित भारत 2047 के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती भारत आज स्वयं को 21वीं सदी की उभरती वैश्विक शक्ति के…

राजधानी एक्सप्रेस से स्वर्ग यात्रा: एक तीखा राजनीतिक व्यंग्य

दिल्ली जाइए: स्वर्ग का रास्ता दिल्ली होकर जाता है व्यंग्य – संजय पराते आजकल हमारे देश में सब काम भगवान भरोसे चल रहा है। भगवान भरोसे इसलिए कि दुनिया के…

बीज पर कारपोरेट कब्ज़ा: किसान अधिकारों के लिए बढ़ता खतरा

बीज संशोधन बिल–2025: किसान, बीज संप्रभुता और खाद्य सुरक्षा पर मंडराता संकट लेखक: इंद्रजीत सिंह बीज संशोधन बिल–2025 के नाम से भारत सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा हाल ही में…

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम और वैश्विक भरोसे की पुनर्स्थापना

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम दावोस 2026: संवाद की भावना और वैश्विक अनिश्चितताओं के युग में सहयोग की नई रूपरेखा गोंदिया – वैश्विक मंच पर स्विट्ज़रलैंड के दावोस में 19 से 23…

महाराणा प्रताप: स्वाभिमान, संघर्ष और स्वतंत्रता के अमर प्रतीक

नवनीत मिश्र भारतीय इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे हैं, जो सत्ता, वैभव और सुविधा से ऊपर स्वाभिमान और स्वतंत्रता को रखते हैं। महाराणा प्रताप ऐसे ही युगपुरुष थे, जिनका जीवन…

संघर्ष, करुणा और कर्म: जीवन को समझने का समग्र दृष्टिकोण

कैलाश सिंह महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।जीवन केवल जन्म और मृत्यु के बीच की एक सीमित यात्रा नहीं है, बल्कि यह निरंतर उठते प्रश्नों और उन्हीं प्रश्नों से जन्म लेते उत्तरों…

धारा 17-ए: ईमानदार अफसरों की सुरक्षा या भ्रष्टाचार की वैधानिक ढाल?

विजन 2047 और भ्रष्टाचार-मुक्त भारत का संकल्प: धारा 17-ए—ईमानदारी की ढाल या भ्रष्टाचार का हथियार? एक समग्र विश्लेषण भारत जब अपनी स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे करने की ओर अग्रसर…

प्रेम, नियंत्रण और मौन: आधुनिक रिश्तों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण

रिश्तों में संतुलन का संकट: भावनाओं के शोषण की सामाजिक सच्चाईडॉ. प्रियंका सौरभ मनुष्य का जीवन रिश्तों के ताने-बाने से ही आकार लेता है। परिवार, मित्रता, प्रेम, सहयोग और सामाजिक…

इतिहास की आड़ में वर्तमान की विफलताओं पर पर्दा

🔴 इतिहास के प्रतिशोध के बहाने इतिहास से ही प्रतिशोध ✍️ बादल सरोज तर्क, विवेक और वैज्ञानिक चेतना पर आधारित भविष्य की ओर बढ़ते किसी भी संवैधानिक लोकतांत्रिक गणराज्य में,…

बाबू गुलाबराय: विचार, विवेक और व्यंग्य की सशक्त परम्परा

✍️ नवनीत मिश्र हिंदी साहित्य में बाबू गुलाबराय का स्थान एक ऐसे लेखक के रूप में सुरक्षित है, जिन्होंने निबन्ध और व्यंग्य को बौद्धिक गहराई तथा नैतिक जिम्मेदारी से जोड़ा।…

हिन्दी के शेक्सपियर ‘रांगेय राघव’: यथार्थ, संघर्ष और सृजन की अमिट विरासत

पुनीत मिश्र हिन्दी साहित्य में जिन रचनाकारों ने अपने समय की सामाजिक विडम्बनाओं, मानवीय संघर्षों और ऐतिहासिक चेतना को गहन कलात्मकता के साथ स्वर दिया, उनमें डॉ. तिरूमल्लै नंबकम् वीरराघव…

भारतीय न्याय की अनूठी पहचान: परंपरा, संविधान और विधवा बहू का अधिकार

भारतीय न्याय,सांस्कृतिक नैतिकता और विधवा बहू का अधिकार-मनुस्मृति से संविधान तक एक समावेशी न्यायिक यात्रा क़ा समग्र विश्लेषण गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत केवल एक भौगोलिक राष्ट्र नहीं, बल्कि एक…

मतदाता सूची से लोकतंत्र की कटाई: क्या भारत फासीवाद की दहलीज पर है?

राजेन्द्र शर्मा नये साल, 2026 में फासीवाद के आगमन की रफ्तार और तेज होती लगती है। कम से कम नये साल के पहले दस-बारह दिनों को देखकर, तो आसार ऐसे…

महादेव गोविंद रानाडे: राष्ट्रसेवा और सामाजिक चेतना के अग्रदूत

पुनीत मिश्र महादेव गोविंद रानाडे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन महान चिंतकों और समाज सुधारकों में अग्रणी थे, जिन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए अपने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं का त्याग किया।…