लेख

मुंशी प्रेमचंद: जिसने समाज को आईना दिखाया

नवनीत मिश्र 31 जुलाई को जब हम प्रेमचंद को याद करते हैं, तो दरअसल हम उस चेतना को याद कर…

12 months ago

उधम सिंह सरदार एक गोली सौ सालों की गूंज

उधम सिंह केवल एक क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि एक विचार थे—संयम, संकल्प और सत्य का प्रतीक। जलियांवाला बाग़ के नरसंहार…

12 months ago

मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर होगा “सवा सेर गेहूं” का मंचन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर नाट्य संस्था रंगाश्रम गोरखपुर द्वारा 31 जुलाई,…

12 months ago

आज भी प्रासंगिक हैं प्रेमचंद के साहित्यिक व सामाजिक विमर्श– कृष्ण कुमार यादव

"साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि उसकी मशाल भी है।" यह कथन प्रेमचंद के साहित्यिक अवदान पर अक्षरशः खरा…

12 months ago

योगी आदित्यनाथ का कीर्तिमान: नेतृत्व के स्थायित्व से विकास की दिशा

✍️नवनीत मिश्र *"योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक स्थायित्व का नया मानक स्थापित किया है, जिसकी मिसाल अन्य राज्यों के लिए भी…

12 months ago

लक्ष्मणरेखा के पार: उपराष्ट्रपति धनखड़ का इस्तीफा और सत्ता-संविधान के बीच संघर्ष

✍️ दिव्या भोसले, पत्रकार, मुंबई भारतीय राजनीति में कुछ फैसले क्षणभर में होते हैं, लेकिन उनके प्रभाव लम्बे समय तक…

12 months ago

भारत में बुजुर्गों का तिरस्कार कब खत्म होगा? – राम शर्मिंदा है,अयोध्या में संभावित परिजनों द्वारा माँ को सड़क पर फेक भाग निकले- मां दम तोड़ गई

गोंदिया - वैश्विक स्तरपर पूरी दुनियाँ में भारत ही एक ऐसा संस्कारी सभ्यता का प्रतीक सर्वधर्म समभाव महा मानवों का…

12 months ago

त्यौहार विशेष

हरियाली तीज- परंपरा की जड़ें और आधुनिकता की डालियाँ हरियाली तीज केवल श्रृंगार, झूला और व्रत का पर्व नहीं, बल्कि…

12 months ago

जब गुनहगार छूटते हैं और पीड़ित रह जाते हैं

2006 के मुंबई लोकल ट्रेन धमाकों में लगभग 189 लोगों की जान गई। लगभग 19 वर्षों तक चले मुकदमे के…

12 months ago