Categories: लेख

मुंशी प्रेमचंद: जिसने समाज को आईना दिखाया

  • नवनीत मिश्र

31 जुलाई को जब हम प्रेमचंद को याद करते हैं, तो दरअसल हम उस चेतना को याद कर रहे होते हैं, जो साहित्य को सिर्फ सौंदर्य और कल्पना नहीं, बल्कि बदलाव का औजार मानती थी। मुंशी प्रेमचंद केवल एक साहित्यकार नहीं थे, वे भारतीय समाज के अंतरविरोधों, पीड़ाओं और उम्मीदों के मौन चितेरे थे। जब देश पर अंग्रेजी हुकूमत का अंधकार छाया था, तब प्रेमचंद ने ‘सोज़-ए-वतन’ के जरिए पहली बार कलम को प्रतिरोध का औजार बनाया। जब उन्हें उर्दू लेखन से रोका गया, तो वे हिंदी में आए और वही प्रेमचंद हिंदी साहित्य के ‘कथासम्राट’ बन गए। प्रेमचंद के लेखन की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने आमजन को अपने साहित्य का केंद्र बनाया। उनके पात्र ज़मीनी थे। खेत जोतता किसान, दहेज में पिसती बेटी, नशे में डूबा पिता, पंचायती न्याय की उलझनें, बेईमान दरोगा और जमींदार। ये सब उनके लेखन में केवल पात्र नहीं, समाज के आईने थे।
आज जबकि साहित्य का एक बड़ा हिस्सा बाजारवाद की गिरफ्त में है, प्रेमचंद हमें याद दिलाते हैं कि कलम की असली जिम्मेदारी केवल कहानियाँ गढ़ना नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करना है।
क्या यह आश्चर्यजनक नहीं कि ‘गोदान’ में जिस होरी को कर्ज, सूद और जमीन के लालच में मरते हुए दिखाया गया, वह आज भी हमारे ग्रामीण भारत में जिंदा है?
क्या ‘निर्मला’ में दिखाई गई दहेज और स्त्री उत्पीड़न की त्रासदी पूरी तरह मिट पाई है?
क्या ‘कफन’ की तरह आज भी कई ‘घीसू’ और ‘माधव’ नहीं हैं, जो गरीबी की भयावहता में मानवीय संवेदना तक खो चुके हैं? प्रेमचंद का लेखन हमें झकझोरता है कि हम क्या थे, क्या हैं और क्या हो सकते हैं।
आज जब देश नई शिक्षा नीति, डिजिटलीकरण, और आर्थिक सुधारों की बात कर रहा है, तो जरूरी है कि हम प्रेमचंद की विरासत को नए सन्दर्भों में पुनर्परिभाषित करें।
साहित्य को फिर से जनसरोकारों से जोड़ना होगा। प्रेमचंद हमें बताते हैं कि सच्चा लेखक वह है जो समय की नब्ज पर हाथ रखे, न कि केवल लोकप्रियता की लहर में बह जाए।
आज आवश्यकता है प्रेमचंद को पढ़ने की नहीं, उन्हें जीने की। क्योंकि वे लेखक नहीं, एक चेतना हैं। जो आज भी शब्दों के रास्ते बदलाव का सपना देखती है।

Karan Pandey

Recent Posts

युवा चेहरे पर दांव की चर्चा, बीकापुर में हरिशंकर यादव की सक्रियता ने बढ़ाई सियासी हलचल

बीकापुर में सपा की सियासत गर्म, युवा चेहरे के रूप में हरिशंकर की दावेदारी चर्चा…

25 minutes ago

किसानों की सिंचाई व्यवस्था मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता: स्वतंत्र देव सिंह

चौधरी चरण सिंह निरीक्षण भवन का किया लोकार्पण संत कबीर नगर(राष्ट्र की परम्परा)। सिंचाई एवं…

54 minutes ago

तीज की उमंग में सजे हाथ, सेवा भारती ने रचाई संस्कृति की मेहंदी

निःशुल्क मेहंदी शिविर में उमड़ी माताओं-बहनों की भीड़, छात्राओं ने हुनर से सजाए हाथ महराजगंज…

1 hour ago

गंगा सिंह सैथवार का दो टूक ऐलान: पांच टिकट दो, तभी सैथवार समाज का साथ

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। “जो राजनीतिक दल सैथवार समाज को पांच या उससे…

1 hour ago

बैग में निकली नोटों की गड्डियां, 30 लाख से ज्यादा कैश बरामद; गोरखपुर कनेक्शन की जांच

देवरिया में ट्रेन से 30.23 लाख रुपये नकद बरामद, संदिग्ध युवक हिरासत में; गोरखपुर ले…

1 hour ago

ऋषि पंचमी का पर्व15 सितम्बर को आचार्य अजय शुक्ल ने बताया व्रत का महत्व

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाए जाने वाले…

1 hour ago