लेख

इतिहास के पन्नों में 5 जनवरी: जब खेल, विज्ञान, राजनीति और युद्ध ने रचा समय का अमिट दस्तावेज़

इतिहास केवल तिथियों का संग्रह नहीं, बल्कि उन निर्णयों, उपलब्धियों और घटनाओं का जीवंत दस्तावेज़ है, जिन्होंने मानव सभ्यता की…

10 months ago

मटमैला पानी: विकास के दावों पर भारी पड़ती जमीनी हकीकत

देश के स्वच्छता सर्वेक्षणों में लगातार अव्वल रहने वाला इंदौर आज एक ऐसे गंभीर सवाल के घेरे में है, जो…

10 months ago

निर्विरोध चुनाव, NOTA और संविधान: क्या यह जन-सहमति का हनन है?

भारत को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है, क्योंकि यहाँ प्रत्येक नागरिक को राजनीतिक भागीदारी का अधिकार प्राप्त…

10 months ago

जंगलों से पहाड़ों तक: मानव और पर्यावरण का बढ़ता टकराव

सुनीता कुमारी, बिहार इसमें कहीं कोई संदेह नहीं है कि मनुष्य ने पहले जंगल काटकर जानवरों का विनाश किया और…

10 months ago

विश्व शांति का शाश्वत मार्ग : सनातन चिंतन की प्रासंगिकता

कैलाश सिंह महाराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।आज की वैश्विक परिस्थितियां अशांति, युद्ध, आतंकवाद, वैमनस्य और मानसिक तनाव से घिरी हुई हैं।…

10 months ago

निंदा से डरे बिना काम करते रहना चाहिए: सावित्रीबाई फुले

मराठी कवयित्री, भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन की नायिका, भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, शोषितों-वंचितों एवं पिछड़ गए लोगों की…

10 months ago

हिन्दी साहित्य के मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार जैनेन्द्र कुमार: विचार, संघर्ष और रचना-दृष्टि

पुनीत मिश्र हिन्दी साहित्य के इतिहास में जैनेन्द्र कुमार का नाम एक ऐसे रचनाकार के रूप में स्थापित है, जिन्होंने…

10 months ago

डिजिटल युग, युवा भारत और स्वभाव की राजनीति: अधिकारों से आगे मानवता का मार्ग

व्यक्ति से विश्व-मानवता तक सफ़लता का शाश्वत दर्शन - स्वभाव ही जीवन की दिशा तय करता है गोंदिया - वैश्विक…

10 months ago

बिना प्रशिक्षण के शिक्षक, अधूरी शिक्षा: क्या दांव पर है बच्चों का भविष्य?

डिजिटल शिक्षा और बदलती शिक्षा व्यवस्था ✍️ सोमनाथ मिश्रा, (राष्ट्र की परम्परा) देश की शिक्षा व्यवस्था तेजी से डिजिटल युग…

10 months ago

सरकारी शिक्षा व्यवस्था : अब सिर्फ सुधार नहीं, निर्णायक कार्रवाई की जरूरत

डॉ. सतीश पाण्डेयमहराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। देश की रीढ़ कही जाने वाली सरकारी शिक्षा व्यवस्था आज गंभीर संकट के दौर…

10 months ago