कविता

पर्यवेक्षक मौन

शब्दों की मधुरता जीवन में रिश्तोंको मज़बूती से बाँध कर रखती है,जैसे गीली मिट्टी पेड़ पौधों की जड़ोंको मज़बूती से…

2 years ago

जैसा था, वैसा ही मिलूँगा

जीवों के प्रति दया व कृतज्ञ भाव,धार्मिक प्रवृत्ति सज्जनता दिखाती है,माया और कृतघ्नता में लिप्त भावनानरक में पहुँचाने का कारण…

2 years ago

कलियाँ जो हवा पानी धूप पाती हैं

समय के संघर्ष से जीत जीवन मेंजो व्यक्ति तक़दीर बदल लेता है,कल क्या होने वाला है उससे बेफ़िक्रक़र्म करे वह…

2 years ago

उधार का दिया : उधार का लिया

उधार देने वाले जब उधार दिया हुआवापस माँगते हैं वो भिखारी हो जाते हैं,और वही उधार लेने वाले धन्नासेठ कीतरह…

2 years ago

सुभाषित ही ख़ुशी देते हैं

सुभाषित ही ख़ुशी देते हैं हम सबको,सुभाषित ही घावों का मरहम करते हैं,भाषा ही ग़मों का कारण बनती है,कुभाषित ही…

2 years ago

यत्र तत्र सर्वत्र, ध्यान, मनन, चिंतन

मनुष्य जीवन लाखों जन्म के भोगोंके बाद ही बड़े भाग्य से मिलता है,यह जीवन जीना आसान नहीं होता है,परिस्थितियों से…

2 years ago

संस्कार से चरित्र

उत्तम शिक्षा और अच्छे संस्कारजीवन में विकास के मूल मंत्र हैं,शिक्षा से ज्ञान विज्ञान बढ़ते हैं,संस्कारों से चरित्र श्रेष्ठ बनते…

2 years ago

पर इंसान, इंसान नहीं रह पाते हैं

चुनाव का दौर, जाति धर्म के नारे,जनता को भी क्या लगते हैं प्यारे,वोट माँगते हैं दोनो हाथ जोड़कर,मालामाल करेंगे चुनाव…

2 years ago

संस्कारशीलता व संस्कारहीनता

एक सुंदर वाक़या हमारी मानसिकता यह दर्शाती है,हम किसी तथ्य को कैसे समझते हैं,कोई अपना परोसा भोजन भी किसीकी ज़रूरत…

2 years ago

ज्ञानार्जन की अद्भुत बातें

जिसके शब्दों में ऐसा प्रेम भरा,उसमे ख़ुद कितना प्रेम भरा होगा,जिसकी बातें ही इतनी सुंदर हैं,उसके भावों में कैसा प्रेम…

2 years ago