आज के दौर में जब भ्रम, दिखावा और नकारात्मकता तेजी से बढ़ रही है, तब “सच देखो सच सुनो सच…
प्रेम का रंग चढ़ता चला गया,यूँ लगा कि दुनिया हमारी है,त्याग का यत्न जब सीखा तोऐसा लगा कि जन्नत हमारी…
भारतीय ऋतुओं में वसंत ऋतु केवल मौसम नहीं, बल्कि जीवन में नवचेतना का उत्सव है। फागुन–चैत के आते ही खेत-खलिहान,…
✍️ डॉ० कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ सच बोलना मानव की मूल प्रवृत्ति है,सच से ही जीवन में पवित्रता सृजित है।झूठ…
— डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ प्रेम केवल भावना नहीं, यह भक्ति का स्वरूप है,प्रेम पूजा है, जहां न स्वार्थ…
✍️ डाॅ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ जीत–हार का तजुर्बा अजीब होता है,जीत पर सारी दुनिया गले लगाती है,हार के बाद…
लेखक: डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र, ‘आदित्य’ लेखक सुप्रभात तो एक बहाना हैजब सूर्य की कृपा होती है, सूर्य कीकिरणें प्रकाश…
• डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ दर्पण का काम ही है सबको सबकीसूरत दिखाना चाहे अच्छी हो या नहीं,कितना निरपेक्ष…