कविता

ख़ुद अच्छे बनो सब अच्छे दिखेंगे

डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र‘आदित्य’ शतरंज के खिलाड़ी हों या प्यादे,अच्छे लोग सदा ही सस्ते होते हैं,बस मीठा बोल बना लो…

4 months ago

ज्ञान

चरित्र की महिमा शांत स्थिर होती हैआचरण जैसे भी हों अनुसरण होते हैंज्ञान व पैसा बहती धारा के किनारे हैंएक…

5 months ago

जननीजन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयशी

जो भी कहूँ जितना भी कहूँ,बेहतर से बेहतर शब्द चुनू,महिला शक्ति की महिमा में,श्रद्धारूपिणी की गरिमा में। जन्म के समय…

5 months ago

प्रयास हमें बहुत कुछ सिखा जाते हैं

— डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ छोटी-छोटी बूंदें जब निरंतर बरसती हैं,तो तालाब और पोखरे सब भर जाते हैं।नदियों का…

5 months ago

युद्ध विभीषिका

युद्ध की विभीषिका में युवा सैनिक,जिसे जानते नहीं उसे जान से मारते हैं,वे न उसे प्रेम करते हैं न घृणा…

5 months ago

अच्छा पेड़–अच्छा फल

✍️ डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’ ‘विद्या वाचस्पति’ जीवन सफ़र उनके लिए सुहावना है,जो इस सफ़र का आनंद उठाते…

5 months ago

हम या आप

अपना हाथ देखूँ, हाथ अपना है,पर स्वयं तो हाथ नहीं हूँ मैं,ऐसे ही अपना पैर देखूँ,पर पैर भी स्वयं नहीं…

5 months ago

सच देखो, सच सुनो, सच बोलो: सकारात्मक सोच और सादा जीवन का संदेश

आज के दौर में जब भ्रम, दिखावा और नकारात्मकता तेजी से बढ़ रही है, तब “सच देखो सच सुनो सच…

5 months ago

✍️ प्रेम का रंग – त्याग, सहिष्णुता और ईमानदारी की प्रेरक कविता

प्रेम का रंग चढ़ता चला गया,यूँ लगा कि दुनिया हमारी है,त्याग का यत्न जब सीखा तोऐसा लगा कि जन्नत हमारी…

5 months ago

फागुन–चैत की बज उठी शहनाई: वसंत, होली और आम्रकुंज की अमराई का काव्य उत्सव

भारतीय ऋतुओं में वसंत ऋतु केवल मौसम नहीं, बल्कि जीवन में नवचेतना का उत्सव है। फागुन–चैत के आते ही खेत-खलिहान,…

5 months ago