जो भी कहूँ जितना भी कहूँ,
बेहतर से बेहतर शब्द चुनू,
महिला शक्ति की महिमा में,
श्रद्धारूपिणी की गरिमा में।
जन्म के समय वो महिला थी,
जिसने थाम लिया था हाथों में,
डाक्टर, नर्स, दाई माँ बनकर,
जन्म कराया मुझको दुनिया में।
दुलराया मुझे गोद में पाला पोषा,
सर रख कर सोने को कंधा दिया,
एक महिला सदा साथ खड़ी मिली,
प्यारी माँ थी जिसने जन्म दिया।
बचपन में एक नारी ने ध्यान रखा,
साथ खेलने के लिए मौजूद वो थी,
बड़ी और छोटी दोनों ही बहनें थीं,
शिक्षक, दोस्त व हमराज़ भी थीं।
एक नारी ने मुझे पढ़ाया लिखाया,
विद्या दान किया, मेरी शिक्षक थी,
जीवन में निराश और हताश हुआ,
मुझे संभाला मेरी महिला मित्र थी।
मेरी अर्धांगिनी, सहयोगी, साथी,
जो प्रेम से सदा साथ खड़ी मिली,
मेरी पत्नी आजीवन मेरे साथ रही,
मेरे परिवार की अडिग धुरी रही।
जीवन की कठिनाई में साथ दिया,
जिन्होंने मेरा व्यवहार नरम किया,
बेटी, बहू घर परिवार का गौरव हैं,
दोनो कुलों की बनी वह मर्यादा हैं।
आख़िरी साँस जिस गोदी में लूँगा,
आदित्य गोद में जो मुझे सुलायेगी,
वह भी धरती माँ अद्भुत नारी होगी,
जननीजन्मभूमिश्चस्वर्गादपि गरीयशी।
डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। आगामी 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक…
बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मिहींपुरवा खंड…
एक सप्ताह से अधिक समय से आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित, त्योहार के बीच अघोषित कटौती से…
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर सन्त विनोबा स्नातकोत्तर महाविद्यालय…
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान…
हर विकासखंड में प्रतिमाह न्यूनतम एक हजार कार्ड बनाने का लक्ष्य, 17 से 29 सितंबर…