Sunday, May 3, 2026
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क्या आपके लिए आज का दिन रहेगा शुभ? जानिए अपनी राशि अनुसार प्रभाव।

पंचांग 24 फरवरी 2026: फाल्गुन शुक्ल सप्तमी, होलाष्टक प्रारंभ, दुर्गाष्टमी व्रत, शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल की सम्पूर्ण जानकारी



पंचांग 24 फरवरी 2026 के अनुसार आज फाल्गुन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है, जो प्रातः 7:02 बजे तक रहेगी, तत्पश्चात अष्टमी तिथि प्रारंभ होकर अगले दिन प्रातः 4:51 बजे तक रहेगी। आज मंगलवार है। होलाष्टक प्रारंभ हो चुका है और दुर्गाष्टमी व्रत भी मनाया जाएगा। धार्मिक दृष्टि से यह दिन विशेष महत्व रखता है।
तिथि और वार
शुक्ल सप्तमी: 23 फरवरी 09:09 पूर्वाह्न से 24 फरवरी 07:02 पूर्वाह्न तक
शुक्ल अष्टमी (क्षय तिथि): 24 फरवरी 07:02 पूर्वाह्न से 25 फरवरी 04:51 पूर्वाह्न तक
वार: मंगलवार
पंचांग 24 फरवरी 2026 में सप्तमी से अष्टमी का संयोग विशेष फलदायी माना गया है।

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नक्षत्र और योग
कृत्तिका नक्षत्र: 24 फरवरी 03:07 अपराह्न तक
रोहिणी नक्षत्र: 03:07 अपराह्न के बाद
इन्द्र योग: 07:23 पूर्वाह्न तक
वैधृति योग: 25 फरवरी 04:26 पूर्वाह्न तक
विष्कुम्भ योग: उसके बाद
कृत्तिका नक्षत्र और मंगलवार के संयोग से सर्वार्थसिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो शुभ कार्यों के लिए उत्तम है।

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करण
वणिज: 07:02 पूर्वाह्न तक
विष्टि: 05:57 अपराह्न तक
बव: 04:52 पूर्वाह्न (25 फरवरी) तक
बालव: उसके बाद
सूर्य और चंद्र स्थिति
सूर्योदय: 06:27 पूर्वाह्न
सूर्यास्त: 05:48 अपराह्न
चंद्रोदय: 10:36 पूर्वाह्न
चंद्रास्त: 01:05 पूर्वाह्न (25 फरवरी)
सूर्य: कुंभ राशि में
चंद्रमा: वृषभ राशि में (पूरा दिन-रात)
पंचांग 24 फरवरी 2026 के अनुसार वृषभ राशि में चंद्रमा का गोचर स्थिरता और धैर्य प्रदान करता है।

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अशुभ काल
राहुकाल: 02:58 अपराह्न से 04:23 अपराह्न तक
यमगण्ड: 09:17 पूर्वाह्न से 10:42 पूर्वाह्न तक
कुलिक: 12:08 अपराह्न से 01:33 अपराह्न तक
दुर्मुहूर्त: 08:43 पूर्वाह्न से 09:29 पूर्वाह्न, रात्रि 10:51 से 11:42 तक
वर्ज्य: 06:08 पूर्वाह्न से 07:38 पूर्वाह्न तक
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: 11:45 पूर्वाह्न से 12:30 अपराह्न
अमृत काल: 12:50 अपराह्न से 02:20 अपराह्न
ब्रह्म मुहूर्त: 04:50 पूर्वाह्न से 05:38 पूर्वाह्न
पंचांग 24 फरवरी 2026 में अभिजीत और अमृत काल विशेष रूप से मंगल कार्यों के लिए श्रेष्ठ माने गए हैं।
चौघड़िया (दिन)
रोग 06:27–07:52
उद्बेग 07:52–09:17
चर 09:17–10:42
लाभ 10:42–12:08
अमृत 12:08–01:33
काल 01:33–02:58
शुभ 02:58–04:23
रोग 04:23–05:48
चौघड़िया (रात्रि)
काल 05:48–07:23
लाभ 07:23–08:58
उद्बेग 08:58–10:32
शुभ 10:32–12:07
अमृत 12:07–01:42
चर 01:42–03:16
रोग 03:16–04:51
काल 04:51–06:26
चंद्रबल (25 फरवरी 06:26 पूर्वाह्न तक)
वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन राशि वालों के लिए शुभ।

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ताराबल
03:07 अपराह्न तक कृत्तिका नक्षत्र आधारित ताराबल
03:07 अपराह्न के बाद रोहिणी नक्षत्र आधारित ताराबल
व्रत और पर्व
होलाष्टक प्रारंभ
दुर्गाष्टमी व्रत
होलाष्टक के कारण शुभ मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। वहीं दुर्गाष्टमी व्रत शक्ति साधना और पूजन के लिए विशेष है।

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विशेष योग
सर्वार्थसिद्धि योग (24 फरवरी 06:27 पूर्वाह्न से 03:07 अपराह्न तक)
त्रिपुष्कर योग (06:27 पूर्वाह्न से 07:02 पूर्वाह्न तक)
पंचांग 24 फरवरी 2026 के अनुसार यह दिन आध्यात्मिक साधना, व्रत और पूजा-पाठ के लिए अनुकूल है।

चकबंदी लेखपाल के निलंबन पर संघ का विरोध, निष्पक्ष जांच की मांग

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। चकबंदी लेखपाल संघ ने सोमवार को लेखपाल राम प्रवेश यादव के निलंबन के विरोध में प्रदर्शन करते हुए इसे बिना ठोस साक्ष्य की कार्रवाई बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। संघ ने चेतावनी दी कि यदि लेखपाल के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।
संघ के अनुसार धनघटा क्षेत्र के ग्राम संठी में चक निर्माण से जुड़े मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर लेखपाल को निलंबित किया गया। संगठन का कहना है कि पर्याप्त प्रमाण के अभाव में यह कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि में लेखपाल को चकबंदी अधिकारी कार्यालय खलीलाबाद से संबद्ध कर दिया गया है और उन पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है।
संघ पदाधिकारियों ने दावा किया कि संबंधित आपत्तियां मौखिक निर्देश पर दर्ज की गई थीं। बाद में काश्तकार ने स्वयं अपनी आपत्ति में संशोधन का अनुरोध किया था तथा पत्रावली काश्तकार के हस्ताक्षर के साथ वापस की गई, जिसकी जानकारी संबंधित कार्यालय को थी।
संगठन ने आरोप लगाया कि लेखपाल को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। संघ ने पूर्व की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि कार्यस्थल के दबाव के कारण कुछ अधिकारी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ चुके हैं।

कृषकों की समस्याओं के समाधान को गांव-गांव पहुंचेगा चकबन्दी प्रशासन

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। चकबन्दी प्रक्रिया के तहत कृषकों से फीडबैक प्राप्त कर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए जनपद की विभिन्न तहसीलों में निर्धारित तिथियों पर ग्राम चौपाल का आयोजन किया जाएगा। इन चौपालों में संबंधित अधिकारी स्वयं उपस्थित होकर किसानों की शिकायतें सुनेंगे और मौके पर निराकरण का प्रयास करेंगे।
अपर जिलाधिकारी (न्यायिक)/उप संचालक चकबन्दी चन्द्रेश कुमार सिंह ने बताया कि कार्यक्रम के अनुसार 24 फरवरी 2026 को अपरान्ह 03 बजे से तहसील धनघटा के ग्राम परशुरामपुर तथा 27 फरवरी 2026 को अपरान्ह 03 बजे से तहसील खलीलाबाद के ग्राम परजूडीह स्थित पंचायत भवन में उनकी अध्यक्षता में चौपाल आयोजित होगी।
बन्दोबस्त अधिकारी चकबन्दी की अध्यक्षता में 24 फरवरी 2026 को अपरान्ह 01 बजे तहसील धनघटा के ग्राम रामजंगला तथा 27 फरवरी 2026 को अपरान्ह 01 बजे तहसील मेंहदावल के ग्राम बेलौली में पंचायत भवन पर चौपाल होगी।
चकबन्दी अधिकारी खलीलाबाद की अध्यक्षता में 26 फरवरी 2026 को अपरान्ह 12 बजे तहसील धनघटा के ग्राम नटवावर में मंदिर प्रांगण में चौपाल आयोजित की जाएगी।
इसी क्रम में चकबन्दी अधिकारी धनघटा की अध्यक्षता में 24 फरवरी 2026 को पूर्वान्ह 11 बजे ग्राम डेबरी के प्राथमिक विद्यालय परिसर में तथा 26 फरवरी 2026 को पूर्वान्ह 11 बजे ग्राम हकीमपुर के पंचायत भवन में चौपाल आयोजित की जाएगी।
प्रशासन ने संबंधित ग्रामों के कृषकों से निर्धारित तिथि व समय पर उपस्थित होकर अपनी समस्याएं रखने की अपील की है।

अलीगढ़ में अतिक्रमण हटाने गई नगर निगम टीम पर हमला, टीम लीडर घायल

अलीगढ़ (राष्ट्र की परम्परा)। दीवानी-कचहरी के पास अतिक्रमण हटाने पहुंची नगर निगम की टीम पर उस समय हमला हो गया, जब ठेल-ढकेल हटवाने की कार्रवाई की जा रही थी। आरोप है कि एक दुकानदार ने तराजू के बाट से हमला कर टीम लीडर मुनेश पाल सिंह को घायल कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, नगर निगम की टीम 23 फरवरी को दीवानी-कचहरी के बाहर खड़े ठेल-ढकेल हटवाने के लिए पहुंची थी। इसी दौरान एक दुकानदार ने विरोध करते हुए टीम लीडर पर बाट से प्रहार कर दिया। हमले में मुनेश पाल सिंह घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी और हंगामा मच गया।

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दुकानदारों का आरोप

मौके पर मौजूद अन्य दुकानदारों का आरोप है कि रमजान माह के दौरान नगर निगम कर्मचारियों ने उनके साथ मारपीट की। इस आरोप को लेकर वहां काफी देर तक विवाद की स्थिति बनी रही।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

हंगामे की सूचना मिलते ही सीओ सिविल लाइन सर्वम सिंह, इंस्पेक्टर सिविल लाइन सहित नगर निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे। स्थिति को काबू में करने में पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी।

हंगामे के कारण दीवानी-कचहरी के बाहर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात प्रभावित रहा। पुलिस ने मारपीट करने वाले दुकानदार को हिरासत में ले लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

संभावित धाराएं

सूत्रों के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा, मारपीट और शांति भंग करने जैसी धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है।

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शिकारपुर चौराहे पर अतिक्रमण का कहर: टैंपो-मारुति भिड़ंत ने खोली यातायात अव्यवस्था की पोल

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के व्यस्ततम चौराहों में शामिल शिकारपुर चौराहा पर अतिक्रमण और अव्यवस्थित टैक्सी स्टैंड के कारण हादसों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को भीड़-भाड़ के बीच एक टैंपो चालक ने मारुति कार में जोरदार टक्कर मार दी। गनीमत रही कि इस दुर्घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन घटना ने चौराहे की बदहाल यातायात व्यवस्था को उजागर कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चौराहे पर टैक्सी और टैंपो चालक सड़क पर ही वाहन खड़ा कर सवारी भरते हैं। सड़क का बड़ा हिस्सा अवैध रूप से घिर जाने से अन्य वाहनों को निकलने के लिए बेहद कम जगह बचती है। सोमवार को भी अचानक ब्रेक और ओवरटेक के प्रयास में टैंपो अनियंत्रित होकर मारुति कार से जा टकराया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गयी।
स्थानीय व्यापारियों और राहगीरों का कहना है कि चौराहे की अव्यवस्था अब स्थायी समस्या बन चुकी है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को हर दिन जाम और दुर्घटना के खतरे के बीच से गुजरना पड़ता है। लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायतों के बावजूद अवैध टैक्सी स्टैंड और सड़क किनारे अतिक्रमण नहीं हटाया गया।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और यातायात विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि अवैध टैक्सी स्टैंड हटाकर सड़क खाली कराई जाए, अतिक्रमण पर सख्त अभियान चलाया जाए, स्थायी ट्रैफिक व्यवस्था लागू की जाए और चौराहे पर पुलिस की नियमित तैनाती सुनिश्चित की जाए।
शिकारपुर चौराहे की यह टक्कर प्रशासन के लिए चेतावनी मानी जा रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में यह अव्यवस्था किसी बड़े और जानलेवा हादसे का कारण बन सकती है।

उद्योग बंधु बैठक में डीएम का सख्त संदेश, लंबित ऋण पर होगी कार्रवाई

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय उद्योग बंधु बैठक में जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र ने बैंकिंग तंत्र और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की। लंबित ऋण आवेदनों, औद्योगिक निवेश प्रस्तावों, पंजीकरण, विद्युत आपूर्ति, औद्योगिक अवसंरचना और विभिन्न सरकारी योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि जनपद में निवेश और उद्यमिता को बढ़ावा देना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैंक या विभागीय स्तर पर अनावश्यक विलंब पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

बैठक में बताया गया कि जनपद में 151 निवेश प्रस्तावों के लिए एमओयू हस्ताक्षरित किए गए थे। इनमें से 61 प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं, जिनसे लगभग 998 करोड़ रुपये का निवेश साकार हुआ है। 46 इकाइयों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है और एक अन्य इकाई में इस माह उत्पादन प्रारंभ होने की संभावना है। जिलाधिकारी ने कहा कि समीक्षा का उद्देश्य केवल आंकड़ों का आकलन नहीं, बल्कि वास्तविक औद्योगिक वातावरण तैयार करना है।

स्वरोजगार एवं वित्त पोषण योजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना में 238 लाख रुपये के लक्ष्य के सापेक्ष 238.13 लाख रुपये का वितरण, एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में 99 लाख रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 101.50 लाख रुपये का वितरण तथा मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान में 2000 के लक्ष्य के सापेक्ष 1800 लाभार्थियों को लाभ दिए जाने की जानकारी दी गई। पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत 330 आवेदनों पर ऋण वितरण हुआ, जबकि 80 प्रकरण बैंकों में लंबित हैं।

लंबित ऋण आवेदनों पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई और लीड बैंक मैनेजर को शाखा स्तर पर निरीक्षण कर अनावश्यक विलंब के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उद्यमियों को बैंकों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।

औद्योगिक अवसंरचना से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। एनएच-29 पर बढुवा गोदाम औद्योगिक क्षेत्र के पास सायफन निर्माण से उत्पन्न समस्या की संयुक्त जांच के निर्देश दिए गए। बी-9 औद्योगिक क्षेत्र में 33 हजार वोल्ट के बिजली पोल हटाने के कार्य का भौतिक सत्यापन कराने को कहा गया। शहादतपुर औद्योगिक क्षेत्र में इंटरलॉकिंग कार्य के लिए शीघ्र निविदा प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए।

कारखाना अधिनियम 1948 के तहत लगभग 200 प्रतिष्ठानों में से केवल 38 के पंजीकरण पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सहायक श्रम आयुक्त को पंजीकरण प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। मंडी शुल्क से संबंधित शिकायतों और मासिक किस्त पुनर्निर्धारण के मुद्दे पर भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

ताजोपुर औद्योगिक क्षेत्र में नए विद्युत उपकेंद्र की स्थापना और ट्रिपिंग की समस्या पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने उद्यमियों से सकारात्मक औद्योगिक वातावरण बनाए रखने में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि उद्योग और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय से ही जनपद आर्थिक रूप से सशक्त बनेगा।

24 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ: इतिहास के पन्नों में दर्ज निर्णायक दिन

24 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
24 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ विश्व इतिहास में राजनीतिक, वैज्ञानिक और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रही हैं। करनाल के युद्ध से लेकर मैक्सिको की स्वतंत्रता, टीबी की खोज, अर्जेंटीना में तख्तापलट और वैश्विक कूटनीतिक घटनाओं तक—यह दिन कई निर्णायक बदलावों का साक्षी रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं 24 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ।
1739 – करनाल का युद्ध और नादिरशाह की विजय
24 फ़रवरी 1739 को Battle of Karnal में फ़ारस के शासक Nader Shah ने मुग़ल सम्राट Muhammad Shah की विशाल सेना को पराजित किया। इस हार ने मुग़ल साम्राज्य की नींव हिला दी और आगे चलकर दिल्ली की लूट का मार्ग प्रशस्त किया। यह 24 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ में सबसे चर्चित घटना मानी जाती है।

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1821 – मैक्सिको को स्वतंत्रता
1821 में मैक्सिको ने स्पेन से स्वतंत्रता की घोषणा की। यह संघर्ष वर्षों तक चला और अंततः देश स्वतंत्र राष्ट्र बना। इस आंदोलन में Agustín de Iturbide की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
1822 – अहमदाबाद में प्रथम स्वामीनारायण मंदिर
1822 में गुजरात के अहमदाबाद में प्रथम Swaminarayan Mandir Kalupur का उद्घाटन हुआ। यह मंदिर आज भी आस्था का प्रमुख केंद्र है।
1831 – डांसिंग रैबिट क्रीक24 की संधि
1831 में Treaty of Dancing Rabbit Creek लागू हुई। यह संधि अमेरिकी सरकार और चॉक्टॉ जनजाति के बीच हुई, जिसके तहत मूल निवासियों को उनकी भूमि से हटाया गया। यह घटना अमेरिकी इतिहास में ‘इंडियन रिमूवल एक्ट’ के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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1882 – टीबी जीवाणु की खोज
1882 में जर्मन वैज्ञानिक Robert Koch ने क्षय रोग (टीबी) के जीवाणु Mycobacterium tuberculosis की खोज की। चिकित्सा विज्ञान में यह खोज मील का पत्थर सिद्ध हुई।
1895 – क्यूबा की स्वतंत्रता की लड़ाई
1895 में क्यूबा ने स्पेन के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम आरंभ किया। इस आंदोलन में राष्ट्रवादी नेता José Martí प्रमुख प्रेरणा स्रोत बने।
1976 – अर्जेंटीना में सैन्य तख्तापलट
1976 में अर्जेंटीना में सेना ने सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया और राष्ट्रपति Isabel Perón को गिरफ्तार कर संसद भंग कर दी। यह काल देश के इतिहास में दमन और राजनीतिक अस्थिरता के रूप में दर्ज है।

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2004 – पुतिन ने प्रधानमंत्री को हटाया
2004 में रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने प्रधानमंत्री Mikhail Kasyanov को पद से हटा दिया। यह निर्णय रूसी राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़ माना गया।
अन्य प्रमुख घटनाएँ

1894 – निकारागुआ ने होंडुरास की राजधानी तेगुसिगाल्पा पर कब्ज़ा किया।

2001 – पाकिस्तान ने भारत से परमाणु निवारण वार्ता की इच्छा जताई।

2003 – चीन के झेजियांग प्रांत में भीषण भूकंप से 257 लोगों की मृत्यु।

2006 – फिलीपींस में तख्तापलट की कोशिश के बाद आपातकाल लागू।

2008 – रिलायंस पावर ने बोनस शेयर जारी करने की घोषणा की।

2008 – मुंबई की शगुन साराभाई ने जोहांसबर्ग में मिस इंडिया वर्ल्ड वाइड का खिताब जीता।

2009 – केंद्र सरकार ने सेवा कर और उत्पाद शुल्क में कटौती की घोषणा की।

2013 – Raúl Castro को दूसरे कार्यकाल के लिए क्यूबा का राष्ट्रपति चुना गया।

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निष्कर्ष
24 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि यह तिथि विश्व इतिहास में परिवर्तन, संघर्ष और उपलब्धियों का प्रतीक रही है। करनाल का युद्ध, मैक्सिको की स्वतंत्रता, टीबी की खोज और वैश्विक राजनीतिक घटनाएँ—इन सभी ने इतिहास की दिशा बदली।
इतिहास के पन्नों में दर्ज 24 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ हमें अतीत से सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाने की प्रेरणा देती हैं।

उच्च शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों पर मंथन, रोकथाम और एआई की भूमिका पर जोर

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में “मेन्टल हेल्थ चैलेंजेज एन्ड साइकोलॉजिकल वेल बीइंग इन हायर एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन्स” विषय पर एक दिवसीय सिम्पोजियम आयोजित हुआ, जिसमें विशेषज्ञों ने उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ते तनाव, अवसाद और प्रतिस्पर्धात्मक दबाव को गंभीर चुनौती बताते हुए रोकथाम, समय पर पहचान और तकनीकी सहयोग को आवश्यक बताया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ इंटरैक्शन सत्र भी हुआ, जहां मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी शंकाओं का समाधान किया गया।
अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं मनोविज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में फ्रीडम फ्रॉम पॉवर्टी ट्रस्ट (इंडिया) एवं मानसिक शक्ति फाउंडेशन का सहयोग रहा। अध्यक्षता कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने की।
मुख्य वक्ता के रूप में अमरेश श्रीवास्तव, प्रोफेसर एमेरिटस, Western University (कनाडा) ने कहा कि “जैसे हैं, वैसे ही स्वयं को स्वीकार करना मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्ति की वास्तविक स्थिति और उसकी अपेक्षाओं के बीच असंतुलन तनाव को जन्म देता है। विशेष रूप से 14 से 17 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य की रोकथाम पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि यह आयु वर्ग अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए समय रहते जागरूकता और परामर्श अनिवार्य है।
बी.आर.डी. मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. तापस के. आइच ने कहा कि मानसिक बीमारी सीधे जीवन नहीं लेती, बल्कि व्यक्ति को अक्षम बनाकर उसके जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। यदि समय पर पहचान, संवेदनशील दृष्टिकोण और उचित उपचार उपलब्ध कराया जाए तो प्रभावित व्यक्ति संतुलित जीवन की ओर लौट सकता है।
मेडिकल कॉलेज अयोध्या में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कुँवर वैभव ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में एआई की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता सेवाओं की सुलभता बढ़ाने, मानसिक रोगों से जुड़े सामाजिक कलंक (स्टिग्मा) को कम करने तथा जरूरतमंदों को निरंतर सहयोग प्रदान करने में प्रभावी हो सकती है। एआई तकनीक सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय सहयोग का सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है।
अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के बिना शिक्षा की यात्रा सुचारु रूप से आगे नहीं बढ़ सकती। प्रतिस्पर्धी वातावरण में विद्यार्थियों के लिए मानसिक संतुलन और भावनात्मक सुदृढ़ता अत्यंत आवश्यक है। विश्वविद्यालय मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सतत प्रयास कर रहा है, जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण निर्माण में सहायक होंगे।
कार्यक्रम संयोजक एवं डीएसडब्ल्यू प्रो. अनुभूति दुबे ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और संवेदनशील होना आवश्यक है। विद्यार्थियों में बढ़ते तनाव, अवसाद और दबाव को देखते हुए कुछ विभागों में काउंसलिंग सेल स्थापित किए जाने की योजना है।
स्वागत भाषण मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय कुमार ने दिया, संचालन डॉ. गरिमा सिंह ने किया तथा आभार ज्ञापन डॉ. विस्मिता पालीवाल ने किया। कार्यक्रम में प्रति कुलपति प्रो. शांतनु रस्तोगी, डीन प्रो. कीर्ति पाण्डेय, कृषि निदेशक डॉ. आर.आर. सिंह सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। एनएसएस, एनसीसी, फार्मेसी के छात्र एवं मनोविज्ञान विभाग के शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही।

24 फरवरी से शुरू होगा अनुपूरक पुष्टाहार वितरण अभियान

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कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में जनवरी 2026 के अनुपूरक पुष्टाहार वितरण को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी अरुण कुमार दुबे ने बताया कि जनवरी माह के लिए पुष्टाहार की आपूर्ति एजेंसी नेफेड द्वारा पूरी कर दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में सामग्री परियोजना कार्यालयों तक पहुंचा दी गई है, जबकि नगरीय क्षेत्रों में सीधे आंगनबाड़ी केंद्रों पर आपूर्ति की गई है।

प्रशासन के अनुसार लाभार्थियों को 24 फरवरी 2026 को पुष्टाहार वितरित किया जाएगा। यदि किसी कारणवश उस दिन वितरण पूर्ण नहीं हो पाता है या किसी केंद्र का अतिरिक्त प्रभार अन्य कार्यकत्री के पास है, तो 25 फरवरी 2026 को वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।

जनपद की सभी प्रमुख बाल विकास परियोजनाओं—रामकोला, खड्डा, सुकरौली, हाटा, कसया, दुदही, पडरौना और फाजिलनगर—में एक साथ वितरण कार्यक्रम आयोजित होगा। ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों के लाभार्थियों को उनके संबंधित आंगनबाड़ी केंद्रों पर ही सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।

विभाग ने चरणबद्ध रणनीति के तहत पहले ग्रामीण परियोजनाओं में सामग्री परियोजना कार्यालयों तक पहुंचाई, इसके बाद स्वयं सहायता समूहों को उपलब्ध कराई गई। नगरीय क्षेत्रों में सीधी आपूर्ति आंगनबाड़ी केंद्रों पर की गई है, जिससे समयबद्ध और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित हो सके।

वितरण के दौरान एफआरएस प्रणाली के माध्यम से लाभार्थियों का सत्यापन अनिवार्य किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुष्टाहार वास्तविक पात्रों तक ही पहुंचे और किसी प्रकार की अनियमितता न हो। वितरण स्थल पर आंगनबाड़ी कार्यकत्री एवं स्वयं सहायता समूह की उपस्थिति भी अनिवार्य रहेगी।

लाभार्थियों की अधिकतम उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बाल विकास परियोजना अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि विभागीय व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करें, संबंधित ग्राम प्रधान एवं सभासदों को सूचना दें तथा वितरण तिथि और स्थान की जानकारी समय से साझा करें।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का शत-प्रतिशत पालन किया जाएगा। वितरण स्थल पर साफ-सफाई बनाए रखना, सूची के अनुसार सामग्री देना, डिजिटल सत्यापन के बाद ही आहार प्रदान करना और शिकायत की स्थिति में त्वरित कार्रवाई करना अनिवार्य होगा। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी और कार्मिक की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

अनुपूरक पुष्टाहार योजना के तहत गर्भवती महिलाएं, धात्री माताएं, छह माह से छह वर्ष तक के बच्चे तथा कुपोषित एवं अति कुपोषित बच्चों को लाभ दिया जाता है। योजना का उद्देश्य कुपोषण की समस्या को कम करना और मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार लाना है।

जनपद स्तर पर अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं और परियोजना अधिकारियों को वितरण की रिपोर्ट समय से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि पारदर्शी व्यवस्था, डिजिटल सत्यापन और सख्त निगरानी के साथ यह अभियान कुपोषण के खिलाफ प्रभावी पहल साबित होगा।

समालोचना उसका हक़

कविता की रचना जब कोई कवि
अपनी कल्पना में जाकर करता है,
यदि पाठक रचना में गलती खोजे,
समालोचना उसका हक़ होता है।

बिना गलती के गलती खोजे यह,
बिगड़ी आदत के कारण होता है,
लेकिन ख़ुद जब वह लिखना चाहे,
एक पंक्ति पूरी नहीं लिख पाता है।

निंदा और समालोचना, सोचने
और समझने के दो पहलू होते हैं,
पहला नकारात्मक पहलू होता है,
दूसरा सकारात्मक पहलू होता है।

नकारात्मकता पाठक को स्वयं
कवि, लेखक नहीं बनाने देती है,
सकारात्मक सोच की समालोचना
पाठक को लिखना सिखला देती है।

पाठक भी ऐसे ही कवि व लेखक
बन कर अपनी रचनायें दे पाते हैं,
आदित्य व्यर्थ ग़लतियाँ जो नहीं
खोजे वह रचनात्मक बन जाते हैं।

डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’

होली महोत्सव 24 फरवरी से 3 मार्च 2026- होलाष्टक से धूलिवंदन तक-चंद्रग्रहण,आस्था, ज्योतिष और व्यवहारिकता के बीच संतुलन

होलाष्टक की मान्यताएं हमें संयम,अनुशासन और आत्मचिंतन का संदेश देती हैं, जबकि होली का रंगोत्सव हमें प्रेम, क्षमा और नई शुरुआत का अवसर देता है -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर होली का त्योहार केवल रंगों काउत्सव नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की जीवंतता,आध्यात्मिकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। भारत सदियों से विविध आस्थाओं,प्रथाओं और मान्यताओं का केंद्र रहा है,जहां हर पर्व को शुद्ध श्रद्धा और सांस्कृतिक अनुशासन के साथ मनाया जाता है। यही कारण है कि होली केवल भारत तक सीमित नहीं, बल्कि विश्वभर में बसे भारतीय समुदायों और विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करता है।2026 में होली का पर्व विशेष चर्चा में है, क्योंकि 24 फरवरी से होलाष्टक प्रारंभ हो रहा है, 2 मार्च को होलिका दहन होगा और 3 मार्च को रंगोत्सव मनाया जाएगा। साथ ही 3 मार्च को चंद्रग्रहण होने की चर्चा ने लोगों के मन में यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि धूलिवंदन 3 मार्च को होगा या 4 मार्च को? इस लेख में हम धार्मिक मान्यताओं,ज्योतिषीय दृष्टिकोण और व्यवहारिक तथ्यों के आधार पर इस भ्रम को दूर करने का प्रयास करेंगे।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि हम सब जानते हैं कि,पौराणिक आधार पर होली की जड़ें भगत प्रहलाद, होलिका और नरसिम्हा की कथा से जुड़ी हैं। असत्य पर सत्य की विजय और अहंकार के अंत का संदेश देने वाली यह कथा भारतीय मानस में गहराई से रची-बसी है।होलिका दहन उस प्रतीकात्मक क्षण का स्मरण है जब भक्ति और धर्म की रक्षा हुई। इसलिए होली केवल रंगों का खेल नहीं,बल्किआध्यात्मिक पुनर्जागरण का अवसर भी है इस आर्टिकल में चर्चा की गई हर बात मान्यताओं पर आधारित सटीकता से इसका कोई संबंध नहीं वह यहां लिखी हुई बातें मानी जाए यह बिलकुल जरूरी नहीं है। 

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साथियों बात अगर हम होलाष्टक 2026: अवधि और धार्मिक मान्यता इसको समझने की करें तो,2026 में होलिका दहन 2 मार्च को पड़ रहा है, अतः उससे आठ दिन पूर्व 24 फरवरी से होलाष्टक प्रारंभ होगा और 3 मार्च तक चलेगा। होलाष्टक का अर्थ है होली से पहले के आठ दिन। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन दिनों में आठ प्रमुख ग्रह उग्र अवस्था में माने जाते हैं,अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध,चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु। मान्यता है कि इस अवधि में शुभ और मांगलिक कार्य करने से जीवन में बाधाएं,कलह या कष्ट आ सकते हैं।इसलिए विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, वाहन क्रय, भूमि पूजन और नए व्यवसाय की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है।हालांकि यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि ये मान्यताएं ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित हैं,न कि किसी विधिक अनिवार्यता पर।भारत के विभिन्न क्षेत्रों में इन मान्यताओं का पालन अलग- अलग स्तर पर किया जाता है। कुछ समुदाय इसे कठोरता से मानते हैं,जबकि कुछ इसे प्रतीकात्मक मानकर अपनी सामान्य जीवनचर्या पूर्वोतःजारी रखते हैं।

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साथियों बात अगर हम चंद्रग्रहण और धूलिवंदन का भ्रम इसको समझने की करें तो,2026 में 3 मार्च को चंद्रग्रहण होने की चर्चा के कारण यह भ्रम फैल रहा है किधूलिवंदन 4 मार्च को मनाया जाना चाहिए। यहां मूल सिद्धांत यह है कि होली का रंगोत्सव पूर्णिमा तिथि के अगले दिन, अर्थात होलिका दहन के बाद मनाया जाता है। यदि 2 मार्च की रात्रि में होलिका दहन हो रहा है और पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को विद्यमान है, तो परंपरागत रूप से रंगों की होली 3 मार्च को ही मनाई जाने की संभावना है।चंद्रग्रहण का प्रभाव मुख्यतःतब माना जाता है जब वह भारत में दृश्य हो और उसके समय का संयोग महत्वपूर्ण पूजा-विधि से हो। यदि ग्रहण का समय रंग खेलने के पारंपरिक समय से भिन्न है या वह भारत में दृश्य नहीं है, तो सामान्यतः होली की तिथि नहीं बदलती। इसलिए केवल ग्रहण की उपस्थिति से धूलिवंदन की तिथि स्वतः 4 मार्च नहीं हो जाती ऐसा कुछ लोगों का मानना है।अंतिम निर्णय पंचांग,स्थानीय परंपरा और मंदिरसमितियों की घोषणा पर निर्भर करता है।इसलिए व्यापक रूप से 3 मार्च 2026 को ही रंगोत्सव मनाया जाना संभावित है,जबतक कि अधिकृत पंचांग बिल्कुल ही अन्यथा न कहे। 

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साथियों बात अगर हम हिंदू धर्म के 16 संस्कारों क़ा संक्षिप्त परिचय जानने की करें तो हिंदू जीवन-पद्धति में 16 संस्कारों का उल्लेख है, जो जन्म से मृत्यु तक व्यक्ति के जीवन को पवित्र और अनुशासित बनाते हैं। ये हैं गर्भाधान,पुंसवन,सीमंतोन्नयन,जातकर्म,नामकरण निष्क्रमण, अन्नप्राशन,चूड़ाकर्म (मुंडन), कर्णवेध,विद्यारंभ उपनयन वेदारंभ,केशांत,समावर्तन,विवाह,अंत्येष्टि होलाष्टक के दौरान सामान्यतःविवाह जैसे मांगलिक संस्कार नहीं किए जाते। किंतु अंत्येष्टि संस्कार जीवन की अनिवार्य प्रक्रिया है,इसलिए उसके लिए शांति पूजन आदि करके कर्म संपन्न किए जाते हैं। यह दर्शाता है कि धार्मिक अनुशासन के साथ व्यवहारिक विवेक भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। 

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साथियों बात अगर हम होलाष्टक में क्या करें और क्या न करें इसको समझने की करें तो,होलाष्टक में क्रोध, विवाद और अनावश्यक बहस से बचने की सलाह दी जाती है।घर में शांत वातावरण बनाए रखना सकारात्मक ऊर्जा के लिए आवश्यक माना गया है। विवाह, गृह प्रवेश, नए निर्माण और बड़े निवेश जैसे कार्य टालने की परंपरा है। वहीं दूसरी ओर पूजा-पाठ, मंत्र-जाप, व्रत, दान और आत्मचिंतन को विशेष फलदायी बताया गया है। इस अवधि में विष्णु , हनुमान और नरसिम्हा की आराधना का विधान बताया जाता है महामृत्युंजय मंत्र का जाप मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल प्रदान करता है। वास्तु और होली पूर्व सफाई: आध्यात्मिक मनोविज्ञान होली से पूर्व घरों में महा-सफाई की परंपरा केवल स्वच्छताअभियान नहीं, बल्कि मानसिक और ऊर्जात्मक शुद्धि का प्रतीक है। टूटी-फूटी वस्तुएं, बंद पड़ी घड़ियां, धुंधले शीशे और पुराने कबाड़ को हटाने की सलाह वास्तु शास्त्र में दी जाती है। यह वैज्ञानिक दृष्टि से भी उचित है, क्योंकि अव्यवस्था तनाव बढ़ाती है और स्वच्छता सकारात्मकता को प्रोत्साहित करती है।पूजा स्थल की विशेष सफाई आवश्यक मानी जाती है। खंडित मूर्तियों को सम्मानपूर्वक हटाना और स्वच्छ वातावरण में पूजा करना आस्था की शुद्धता का प्रतीक है। मुख्य द्वार पर वंदनवार लगाना और ईशान कोण को स्वच्छ रखना पारंपरिक विश्वास हैं, जो घर में शुभता और समृद्धि का संदेश देते हैं। 

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साथियों बात अगर हम रंगों, गुझिया और मस्ती के इस उत्सव को पौराणिक मान्यताओं (हालांक़ि इसका सटीक प्रमाण नहीं है) के दृष्टिकोण से समझने की करें तो पहले हम सभी के घरों में महा-सफाई का अभियान छिड़ चुका है। लेकिन क्या हम जानते हैं कि सिर्फ धूल -मिट्टी झाड़ देना ही काफी नहीं है? वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के कोनों में छिपी कुछ चीजें आपकी तरक्की और खुशहाली को नजर लगा सकती हैं। अगर हम चाहते हैं कि इस बार रंगों के साथ-साथ हमारे घर में मां लक्ष्मी का भी आगमन हो, तो सफाई के दौरान इन चीजों को तुरंत विदा करने क़ा ऑप्शनल विचार कर सकते हैं(1) टूटी- फूटी चीजें: तरक्की की दुश्मन- अक्सर हम बाद में ठीक करा लेंगे के चक्कर में टूटे हुए बर्तन, चटक चुके कांच के सामान या टूटी चप्पलें स्टोर रूम में पटक देते हैं। वास्तु के अनुसार, ये चीजें घर में नकारात्मक ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत हैं। इनसे मानसिक तनाव बढ़ता है और घर के सदस्यों के बीच अनबन की स्थिति बनी रहती है। (2) रुकी हुई घड़ियां:थम न जाए वक्त-क्या हमारे घर की किसी दीवार पर कोई ऐसी घड़ी है जो बंद पड़ी है? तो उसे आज ही ठीक कराएं या हटा दें। रुकी हुई घड़ी जीवन में ठहराव और बाधाओं का प्रतीक मानी जाती है। वक्त को आगे बढ़ाना है तो घड़ी का चलते रहना जरूरी है।(3) पूजा घर की सफाई: सबसे अहम कदम-मंदिर घर का सबसे पवित्र कोना होता है। सफाई के दौरान अगर हमको कोई खंडित (टूटी हुई) मूर्ति या फटी हुई धार्मिक तस्वीर दिखे, तो उसे ससम्मान हटा दें। इन्हें घर में रखने से वास्तु दोष लगता है। होली से पहले इन्हें किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करना या किसी पेड़ के नीचे रखना बेहतर होता है।(4) धुंधले और टूटे शीशे-टूटा हुआ आईना न केवल असुरक्षित है, बल्कि यह वास्तु के नजरिए से भी अशुभ है।यह घर में आने वाली सकारात्मक ऊर्जा को परावर्तित करके वापस भेज देता है। इस होली, चमकते रंगों के साथ अपने घर के शीशों को भी चमकाएं!(5)कुछ खास बातें जो हमको जाननी चाहिए (अ) मुख्य द्वार का महत्व: होली पर घर के मुख्य दरवाजे परवंदनवार जरूर लगाएं। आम के पत्तों या गेंदे के फूल का वंदनवार नकारात्मक शक्तियों को घर में प्रवेश करने से रोकता है।(ब)ईशान कोण की सफाई: घर के उत्तर-पूर्वी कोने (ईशान कोण) को बिल्कुल खाली और साफ रखें। इसे देवताओं का स्थान माना जाता है, यहां सफाई रखने से धन लाभ के योग बनते हैं। (क़) पुराना कबाड़ और अखबार: बरसों से जमा पुराने अखबार और रद्दी दिमागी बोझ बढ़ाते हैं। इस होली कबाड़ मुक्त घर का संकल्प लें(ड)होली सिर्फ रंगों का खेल नहीं, बल्कि पुराने गिले-शिकवे मिटाकर नई शुरुआत करने का मौका है। जब घर वास्तु के अनुसार साफ और व्यवस्थित होता है,तो मन में भी शांति रहती है। तो उठाइए झाड़ू, निकालिए कबाड़ और अपने घर को खुशियों के स्वागत के लिए तैयार करें।

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साथियों बात अगर हम  सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य होलाष्टक और चंद्रग्रहण से लेकर धुलिवंदन  होली महोत्सव को समझने की करें तो,आज होली केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक कूटनीति का माध्यम भी बन चुकी है।अमेरिका, यूरोप और एशिया के अनेक देशों में होली उत्सव आयोजित होते हैं। विदेशी सैलानी भारत आकर मथुरा,वृंदावन और वाराणसी जैसे शहरों में होली का आनंद लेते हैं।यह भारत कीसांस्कृतिक शक्ति और सॉफ्ट पावर का प्रतीक है। 

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अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि होलाष्टक से धुलीवंदन तक आस्था और विवेक का संतुलन, 2026 की होली के संदर्भ में मुख्य बिंदु यह है कि 24 फरवरी से होलाष्टक प्रारंभ होगा, 2 मार्च को होलिका दहन और 3 मार्च को रंगोत्सव मनाया जाएगा।चंद्रग्रहण की उपस्थिति से धूलिवंदन की तिथि स्वतः4 मार्च नहीं हो जाती,जब तक कि अधिकृत पंचांग या धार्मिक संस्थान ऐसा निर्देश न दें।इसलिए भ्रम की स्थिति में स्थानीय पंचांग और मान्य परंपरा का अनुसरण करना ही उचित है।होलाष्टक की मान्यताएं हमें संयम,अनुशासन और आत्मचिंतन का संदेश देती हैं, जबकि होली का रंगोत्सव हमें प्रेम, क्षमा और नई शुरुआत का अवसर देता है। जब हम घर की सफाई के साथ मन के कोनों को भी स्वच्छ करते हैं, तभी सच्चे अर्थों में होली का स्वागत कर पाते हैं। यही भारतीय संस्कृति की विशेषता है,आस्था और विवेक का संतुलित समन्वय।

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-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

फर्जी अपहरण की कहानी निकली, मोबाइल पर लड़की को परेशान करने से जुड़ा मामला


सुखपुरा /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)। सुखपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत दतीवढ़ निवासी कक्षा आठवीं के छात्र आदित्य पासवान (13 वर्ष), पुत्र विनोद पासवान, के कथित अपहरण की घटना ने रविवार की शाम क्षेत्र में सनसनी फैला दी। हालांकि पुलिस जांच में मामला अपहरण का न होकर आपसी विवाद से जुड़ा पाया गया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार की सायं लगभग छह बजे आदित्य पासवान शिवपुर बाजार से मोमोज खाकर अपने घर लौट रहा था। शिवपुर-दतीवढ़ मार्ग पर स्थित एक पुलिया के समीप पहले से खड़े दो मोटरसाइकिल सवार युवकों ने उससे किसी गांव का पता पूछा। आदित्य के अनुसार, जब उसने अनभिज्ञता जताई तो पीछे से आए एक युवक ने उसके मुंह पर रुमाल रख दिया, जिससे वह बेहोश हो गया। होश आने पर उसने स्वयं को मनियर थाना क्षेत्र के रामजीत बाबा स्थान, बड़ागांव के पास मोटरसाइकिल पर दो व्यक्तियों के कब्जे में पाया।
बताया जाता है कि घबराहट में आदित्य ने झटका मारा, जिससे मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर सड़क किनारे गिर गई। उसी समय बड़ागांव की ओर से आ रहे दो अन्य युवकों को देखकर आदित्य घायल अवस्था में उनकी ओर भागा और घटना की जानकारी दी। इस बीच दोनों कथित बदमाश मौके से फरार हो गए। स्थानीय युवकों ने मानवता का परिचय देते हुए बच्चे को बेरुआरबारी तक पहुंचाया।
आदित्य रात लगभग नौ बजे बेरुआरबारी से पैदल ही घर की ओर चल पड़ा। रास्ते में निमंत्रण से लौट रहे गांव के तीन लोगों से उसकी मुलाकात हुई, जिन्होंने उसे सुरक्षित घर पहुंचाया। घर पहुंचकर आदित्य ने रोते हुए परिजनों को पूरी घटना बताई, जिसके बाद परिवार में हड़कंप मच गया। अगले दिन परिजनों ने सुखपुरा थाने में लिखित तहरीर देकर मामले की जानकारी दी।घटना की चर्चा क्षेत्र में तेजी से फैल गई और लोगों में भय का माहौल बन गया। अभिभावकों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। हालांकि पुलिस जांच में मामला अलग दिशा में मुड़ गया।इस संबंध में थाना अध्यक्ष सुखपुरा रत्नेश कुमार दुबे ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह अपहरण की घटना नहीं है। जांच के दौरान पता चला है कि लड़का एक लड़की को मोबाइल फोन से बार-बार परेशान कर रहा था। इस बात की जानकारी होने पर लड़की के परिजनों ने उसे डांट-फटकार लगाई थी। संभवतः इसी से नाराज होकर लड़के ने अपहरण की मनगढ़ंत कहानी बना दी।थाना अध्यक्ष ने बताया कि दोनों पक्षों—लड़के एवं लड़की के परिजनों—को थाने बुलाया गया है। दोनों की उपस्थिति में पूरे प्रकरण की सत्यता की पुष्टि कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें और बच्चों की गतिविधियों पर निगरानी रखें।फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

महिला आयोग की सदस्य गीता विश्वकर्मा ने स्वास्थ्य केन्द्रो का किया निरिक्षण

बरहज /देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
सोमवार को राज्य महिला आयोग उत्तर प्रदेश,लखनऊ की सदस्य गीता विश्वकर्मा के जिले मे प्रथम आगमन पर नपा अध्यक्ष श्वेता जायसवाल बरहज ने स्वागत कर जाना हाल ।
ततपश्चात नपा अध्यक्ष ने राज्य महिला आयोग की सदस्य गीता विश्वकर्मा के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मझगावा एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भलुअनी पहुँच कर निरीक्षण कीया तथा मरीजों के हित में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए इस अवसर पर नगरपालिका अध्यक्ष श्वेता जायसवाल ने कहाँ कि महिला आयोग कि सदस्य के साथ स्वास्थ्य संबन्धित विषयो को सीखने समझने का अवसर प्राप्त हुआ।
इसी क्रम मे गीता विश्वकर्मा एवं नपा अध्यक्ष ने प्राथमिक विद्यालय चकरा भार्गव,भलुअनी में आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित होकर छात्र/छात्राओं/अभिभावकों को सम्बोधित किया एवं फल तथा जूस वितरण किया।कार्यक्रम में मीनू जायसवाल ,जिला प्रबोसन अधिकारी, कृष्ण कुमार सिंह (प्रधानाचार्य), ओम प्रकाश कुशवाहा (ई.प्र.अ.), दुर्गेश मद्देशिया (स.अ.), अभिषेक पाण्डेय (स.अ.), द्वारिका प्रसाद मद्देशिया(जिलाध्यक्ष मद्देशिया समाज),मनोज कुमार मद्देशिया , विनोद मद्देशिया, मनोज तिवारी , संजीव गौतम, अरुण मिश्रा,दीपिका तिवारी सहित क्षेत्र के सम्मानित साथियों सहित विद्यालय के छात्र/छात्राये उपस्थित रहे।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी तेज, 15 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची जारी

औरैया (राष्ट्र की परम्परा)
जनपद में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों को गति देते हुए औरैया पंचायत मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 के अंतर्गत निर्वाचक नामावलियों के वृहद पुनरीक्षण का संशोधित कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। जिला मजिस्ट्रेट/जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत एवं नगरीय निकाय) डॉ. इन्द्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग उत्तर प्रदेश के पत्र दिनांक 19.02.2026 के अनुपालन में संशोधित समय-सारिणी के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय-सीमा में सभी चरण पूरे किए जाएंगे और किसी भी परिस्थिति में अवधि का विस्तार नहीं किया जाएगा। सार्वजनिक अवकाश के दिनों में भी संबंधित कार्यालय खुले रहेंगे ताकि कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण हो सके।
दावे-आपत्तियों का निस्तारण 16 मार्च तक
औरैया पंचायत मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 के तहत दावे और आपत्तियों के निस्तारण, हस्तलिखित पांडुलिपियों की तैयारी, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के कार्यालय में अभिलेख जमा करने तथा संभावित डुप्लीकेट मतदाताओं के सत्यापन/निराकरण की प्रक्रिया 07 जनवरी 2026 से 16 मार्च 2026 तक चलेगी।
इस चरण में मतदाताओं द्वारा प्रस्तुत दावों-आपत्तियों का विधिवत परीक्षण किया जाएगा। पात्रता की पुष्टि होने पर नाम जोड़े जाएंगे और अपात्र प्रविष्टियों को हटाया जाएगा। डुप्लीकेट प्रविष्टियों के सत्यापन के लिए विशेष जांच भी की जाएगी।
पूरक सूचियों का कंप्यूटीकरण और समायोजन
संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 21 फरवरी 2026 से 16 मार्च 2026 तक पूरक सूचियों का कंप्यूटीकरण, उन्हें मूल मतदाता सूची में यथास्थान समाहित करने तथा आवश्यकता अनुसार मतदान केंद्रों/स्थलों के निस्तारण की कार्रवाई की जाएगी।
औरैया पंचायत मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 के इस चरण का उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित और अद्यतन बनाना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी रह सके।
17 मार्च से 13 अप्रैल: क्रमांकन और मैपिंग
मतदाता सूचियों के कंप्यूटीकरण के उपरांत 17 मार्च 2026 से 13 अप्रैल 2026 तक मतदान केंद्रों/स्थलों का क्रमांकन, वार्डों की मैपिंग, मतदाता क्रमांकन, एसवीएन आवंटन तथा मतदाता सूची की डाउनलोडिंग एवं फोटो प्रतियां कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
इस दौरान तकनीकी स्तर पर सूचियों की जांच और समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। प्रशासन ने बताया कि इस चरण में पारदर्शिता और सटीकता सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
15 अप्रैल 2026 को अंतिम प्रकाशन
औरैया पंचायत मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 के अंतर्गत निर्वाचक नामावलियों का अंतिम प्रकाशन 15 अप्रैल 2026 को किया जाएगा। इसके साथ ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप मिल जाएगा।
जिला निर्वाचन अधिकारी ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी मतदाता का नाम सूची में छूटा हो या गलत प्रविष्टि हो तो निर्धारित अवधि के भीतर दावा/आपत्ति अवश्य प्रस्तुत करें। समय-सीमा के बाद कोई भी संशोधन संभव नहीं होगा।
सार्वजनिक अवकाश में भी खुले रहेंगे कार्यालय
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पुनरीक्षण कार्य के दौरान पड़ने वाले सार्वजनिक अवकाशों में भी संबंधित कार्यालय खुले रहेंगे। सभी अधिकारी और कर्मचारी निर्धारित समय-सारिणी के अनुरूप कार्य पूर्ण करने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।
इस संबंध में जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव की तैयारी
औरैया पंचायत मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है, जिससे आगामी पंचायत चुनाव निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय ढंग से संपन्न हो सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि सटीक मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की आधारशिला होती है। यदि सूची में त्रुटियां रहती हैं तो चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए वृहद पुनरीक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रशासन की अपील
जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. इन्द्रमणि त्रिपाठी ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अपने नाम, पता और अन्य विवरणों की जांच कर लें। किसी भी त्रुटि की स्थिति में संबंधित कार्यालय में निर्धारित प्रपत्र के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत करें।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि समय-सीमा का कड़ाई से पालन किया जाएगा और किसी भी स्थिति में पुनरीक्षण की अवधि नहीं बढ़ाई जाएगी।
निष्कर्ष
जनपद में औरैया पंचायत मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 के अंतर्गत जारी संशोधित कार्यक्रम चुनावी प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 16 मार्च तक दावे-आपत्तियों का निस्तारण और 15 अप्रैल को अंतिम प्रकाशन से पहले सभी चरणों को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाएगा।
यदि नागरिक सक्रिय सहभागिता निभाएं और प्रशासन पारदर्शिता बनाए रखे, तो आगामी पंचायत चुनाव सुचारु और निष्पक्ष तरीके से संपन्न होंगे।

पुलिस लाइन देवरिया में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की समीक्षा बैठक आयोजित

देवरिया, (राष्ट्र की परम्परा)
जनपद में बाल विवाह उन्मूलन को लेकर प्रशासन और पुलिस विभाग ने एकजुट होकर व्यापक रणनीति बनाई है। देवरिया बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत पुलिस लाइन देवरिया के प्रेक्षा गृह में 100 दिवसीय राष्ट्रीय विशेष कार्यक्रम (27 नवम्बर 2025 से 08 मार्च 2026) की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस दौरान विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPUs) की मासिक समीक्षा बैठक भी सम्पन्न हुई, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लेकर बाल संरक्षण से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. संजय गुप्ता, नोडल अधिकारी स्वास्थ्य विभाग, देवरिया द्वारा की गई। संचालन जिला बाल संरक्षण इकाई के संरक्षण अधिकारी श्री जय प्रकाश तिवारी ने किया।
बाल विवाह रोकथाम पर प्रशासन की सख्त रणनीति
बैठक में बताया गया कि देवरिया बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जिले में व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। 27 नवम्बर 2025 से प्रारंभ यह अभियान 08 मार्च 2026 तक संचालित रहेगा।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक नागरिक को ऑनलाइन लिंक/स्कैनर के माध्यम से शपथ दिलाई जा रही है, ताकि समाज में बाल विवाह के विरुद्ध सामूहिक प्रतिबद्धता विकसित हो सके।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 की जानकारी देते हुए बताया गया कि 18 वर्ष से कम आयु की बालिका या 21 वर्ष से कम आयु के युवक का विवाह कराने पर दोषी को एक लाख रुपये तक का जुर्माना और दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।
किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण समिति की भूमिका
बैठक में किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य श्री ब्रजेश नाथ तिवारी ने विधि विरुद्ध बालकों को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करते समय सोशल बैकग्राउंड रिपोर्ट अनिवार्य रूप से संलग्न करने पर बल दिया।
बाल कल्याण समिति के सदस्य श्री विवेकानंद मिश्र ने नवीन शासनादेशों की जानकारी देते हुए कहा कि बच्चों के साथ संवेदनशील व्यवहार आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि हर बच्चे को अपने बच्चे की तरह समझते हुए न्याय और संरक्षण सुनिश्चित करें।
खोये-पाये बच्चों के पुनर्वास पर विशेष जोर
राजकीय बाल गृह (बालक) के प्रभारी अधीक्षक राम कृपाल ने बाल गृह की संरचना और खोये-पाये बच्चों के पुनर्वास प्रक्रिया की जानकारी दी।
बैठक में बताया गया कि गुमशुदा बच्चों की खोज के लिए विशेष अभियान “ऑपरेशन खोज” चलाने के निर्देश जारी किए गए हैं। रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन तथा संचालित बाल गृह/आश्रय गृहों का भौतिक निरीक्षण कर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
कार्यालय अपर पुलिस महानिदेशक, गोरखपुर जोन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन पर भी बल दिया गया।
बाल श्रम उन्मूलन और चाइल्ड हेल्पलाइन की जानकारी
श्रम प्रवर्तन अधिकारी श्री दिनेश कुमार ने बाल श्रम उन्मूलन अभियान और श्रम विभाग की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बाल श्रम और बाल विवाह सामाजिक बुराइयां हैं, जिनका उन्मूलन सामूहिक प्रयास से ही संभव है।
चाइल्ड हेल्पलाइन देवरिया की प्रभारी कोऑर्डिनेटर सुश्री अनुराधा राज ने 1098 हेल्पलाइन नंबर की उपयोगिता बताई और बाल विवाह की सूचना मिलने पर तत्काल पुलिस सहयोग लेने की अपील की।
विशेष किशोर पुलिस इकाई की जिम्मेदारी
थाना एएचटीयू के प्रभारी निरीक्षक श्री सुरेश कुमार वर्मा ने एसजेपीयू के कर्तव्यों और दायित्वों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देवरिया बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए प्रत्येक थाना स्तर पर सक्रिय निगरानी आवश्यक है।
उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि वे बाल विवाह की रोकथाम हेतु गांव-गांव जाकर जनजागरूकता फैलाएं और संदिग्ध मामलों की तुरंत सूचना दें।
जिला संचालन समिति का गठन
बैठक में बताया गया कि जनपद में बाल विवाह रोकथाम के लिए जिला संचालन समिति का गठन किया गया है। यह समिति विभिन्न विभागों के समन्वय से अभियान की निगरानी और क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगी।
अधिकारियों ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को “बाल विवाह रोकथाम योद्धा” के रूप में परिभाषित करते हुए उनसे संकल्प दिलाया कि वे जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान नागरिकों को निम्न हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी गई—
181 – महिला हेल्पलाइन
1098 – चाइल्ड हेल्पलाइन
112 – आपातकालीन पुलिस सेवा
इन नंबरों के माध्यम से किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता प्राप्त की जा सकती है।
अधिकारियों की सक्रिय उपस्थिति
बैठक में जिला परिवीक्षा अधिकारी अनिल कुमार सोनकर, जिला बाल संरक्षण इकाई के अरबिंद यादव, उप निरीक्षक गोविंद सिंह, मुख्य आरक्षी सत्यपाल चौहान, आरक्षी आकाश सिंह कुशवाहा सहित एएचटीयू थाना के अधिकारी एवं समस्त थानों पर नामित बाल कल्याण पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
देवरिया बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत आयोजित यह समीक्षा बैठक जिले में बाल संरक्षण के प्रति प्रशासन की गंभीरता को दर्शाती है। 100 दिवसीय विशेष कार्यक्रम के माध्यम से बाल विवाह, बाल श्रम और गुमशुदा बच्चों की समस्याओं के समाधान हेतु ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
यदि प्रशासन, पुलिस और समाज मिलकर प्रयास करें, तो देवरिया को बाल विवाह मुक्त जनपद बनाने का लक्ष्य अवश्य प्राप्त किया जा सकता है। यह अभियान न केवल कानून का पालन सुनिश्चित करेगा, बल्कि बच्चों के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की नींव भी मजबूत करे