बेंगलुरु (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) शहर के व्यस्त कारोबारी इलाके के.आर. मार्केट के पास नागरथपेट क्षेत्र में शनिवार तड़के एक प्लास्टिक सामान निर्माण इकाई में भीषण आग लगने से एक ही परिवार के चार सदस्यों समेत पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक मृतकों की पहचान मदन सिंह (38), उनकी पत्नी संगीता (33), दो बेटे रितेश (7) और विहान (5) तथा पड़ोसी सुरेश कुमार (26) के रूप में हुई है।
मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले मदन सिंह करीब दस वर्षों से इस इमारत को किराए पर लेकर इसमें एक छोटी फैक्टरी चला रहे थे, जहां प्लास्टिक के सामान के साथ-साथ चटाई भी बनाई जाती थी। फैक्टरी के ऊपरी मंजिल पर उनका परिवार रहता था। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई गई है।
अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, घटना की सूचना मिलने पर दमकल की आठ गाड़ियां, 55 दमकलकर्मी और 21 अधिकारी मौके पर पहुंचे। घनी आबादी और गोदामनुमा इमारत में बड़े पैमाने पर रखे सामान के कारण आग पर काबू पाना बेहद मुश्किल रहा।
अधिकारियों ने बताया कि यह इलाका शहर के सबसे घनी आबादी वाले व्यावसायिक क्षेत्रों में से एक है, जहां संकरी गलियों और सामान से भरी दुकानों के कारण आग बुझाने में दिक्कतें आईं। फिलहाल पुलिस ने मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं और आग के सटीक कारण की जांच जारी है।
यह हादसा एक बार फिर घनी आबादी वाले इलाकों में चल रही औद्योगिक इकाइयों और गोदामों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
शिमला(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)हिमाचल प्रदेश में लगातार जारी मानसूनी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। भूस्खलन, अचानक आई बाढ़ और मकान ढहने जैसी घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एचपीएसडीएमए) के अनुसार, 20 जून से अब तक बारिश से संबंधित घटनाओं में 133 लोगों की मौत हुई है, जबकि सड़क दुर्घटनाओं में 124 लोग जान गंवा चुके हैं। इस प्रकार कुल मृतकों की संख्या 257 हो गई है।
सड़क, बिजली और पानी की आपूर्ति पर भारी असर शनिवार तक के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, राज्य भर में 374 सड़कें, 524 बिजली ट्रांसफार्मर और 145 पेयजल योजनाएँ ठप हैं। इनमें दो राष्ट्रीय राजमार्ग—NH-305 और NH-05—भी शामिल हैं, जो भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ के कारण अवरुद्ध हैं। मंडी, कुल्लू और किन्नौर जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं।
मंडी में हालात सबसे गंभीर मंडी जिले में 203 सड़कें बंद हैं और 458 ट्रांसफार्मर ठप पड़े हैं। इसके बाद कुल्लू जिले में 79 सड़कें अवरुद्ध हैं, जिनमें झेड़ (खनाग) में बड़े भूस्खलन से बंद NH-305 भी शामिल है। चंबा (24), कांगड़ा (41) और मंडी (44) की कई जलापूर्ति योजनाएँ भी प्रभावित हुई हैं।
किन्नौर, कुल्लू और लाहौल-स्पीति में बाढ़ का प्रकोप किन्नौर में NH-05 सहित छह सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं। कुल्लू और लाहौल-स्पीति में अचानक आई बाढ़ और हाई टेंशन बिजली लाइनों की खराबी के कारण व्यापक व्यवधान हुआ है।
अब तक के नुकसान का आंकड़ा
बारिश से संबंधित घटनाओं में मौतें: मंडी (26), कांगड़ा (28), चंबा (10), कुल्लू (11) अन्य जिले: बिलासपुर, किन्नौर, शिमला, सिरमौर, सोलन, लाहौल-स्पीति, हमीरपुर और ऊना में भी हताहत प्रमुख आपदाएँ: भूस्खलन, बादल फटना, मकान गिरना, डूबना और बिजली का करंट लगना
प्रशासन की अपील अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में रुक-रुक कर होने वाली बारिश से स्थिति और बिगड़ सकती है। लोगों से अपील की गई है कि वे संवेदनशील इलाकों में यात्रा से बचें।
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने शनिवार को घोषणा की कि उसकी संसदीय बैठक 19 अगस्त 2025 को सुबह 9:30 बजे संसद पुस्तकालय भवन (पीएलबी) स्थित जी.एम.सी. बालयोगी सभागार में होगी। लोकसभा और राज्यसभा के सभी एनडीए सांसदों से समय पर उपस्थित होने का अनुरोध किया गया है। यह सूचना एनडीए संसदीय दल के कार्यालय सचिव डॉ. शिव शक्ति नाथ बख्शी द्वारा जारी की गई।
माना जा रहा है कि इस बैठक के दौरान 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए अपने उम्मीदवार का औपचारिक ऐलान कर सकता है।
इससे पहले, भाजपा 17 अगस्त को दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में अपनी संसदीय बोर्ड की बैठक करेगी। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में भी उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम पर चर्चा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित संसदीय बोर्ड के सभी सदस्य इस बैठक में मौजूद रहेंगे।
उल्लेखनीय है कि 6 अगस्त को एनडीए नेताओं ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का नाम तय करने का अधिकार दिया था।
शासकीय अधिवक्ता दीप कुमार गुप्ता के तर्कों को मानते हुए अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया
शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा) अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट तृतीय शिवकुमार ने पांच वर्षीया बालिका से छेड़छाड़ के एक मामले में आरोपी को पांच साल के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अभियोजन के अनुसार कलान थाना क्षेत्र के एक मोहल्ले में नौ नवंबर 2020 की दोपहर 12 बजे पीड़िता अपने, घर के बाहर खेल रही थी इसी दौरान पड़ोस का एक युवक उसे गलत नियत से पकड़कर ले जाने की कोशिश करने लगा। तभी मोहल्ले की एक महिला ने देख लिया और बच्ची की मां को बुला लाईं। शोरगुल होते ही आरोपी मौके से भाग गया। मामले की रिपोर्ट पीड़िता के पिता ने थाने में दर्ज कराई थी। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय को सौंपा। मुकदमे की सुनवाई में पीड़िता समेत अन्य गवाहों के बयान और शासकीय अधिवक्ता दीप कुमार गुप्ता के तर्कों को मानते हुए अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया है।
मुंबई।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वदेशी का समर्थन करके ‘असली कांग्रेसी’ बन गए हैं। उन्होंने कहा कि स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने का विचार कांग्रेस का था और इसकी नींव महात्मा गांधी व पंडित जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी।
राउत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिया गया स्वदेशी का नारा कांग्रेस का है। महात्मा गांधी ने सबसे पहले यह नारा दिया और यह पंडित नेहरू का भी दृष्टिकोण था। अब मोदी जी भी गांधी और नेहरू के रास्ते पर चल पड़े हैं।”
उन्होंने यह टिप्पणी प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद की, जिसमें मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर जोर देते हुए दुकानदारों से स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की थी।
बरहज /देवरिया (राष्ट्र की परम्परा ) शनिवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर नगर पालिका परिषद गौरा बरहज की अध्यक्ष श्वेता जायसवाल द्वारा कान्हा गौशाला में शासन की मंशा के अनुसार गौ-पूजन कार्यक्रम विधि विधान के साथ किया गया। नगर पालिका अध्यक्ष एवं अधिशाषी अधिकारी एवं माँ गौ-शक्ति समूह की महिलाओं द्वारा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर कान्हा गौशाला परिसर में भगवान श्री कृष्ण जी का पूरे विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन किया गया।इस अवसर पर नपा अध्यक्ष श्वेता जायसवाल,ई ओ निरुपमा प्रताप, कंचन लता (पशु चिकित्सक), अशोक पाण्डेय(पशुधन अधिकारी), संतोष सिंह गहमरी,अरविन्द मद्देशिया,संगीता देवी, नीलू यादव सहित गौशाले से सम्बन्धित सभी महिला कर्मचारीगण उपस्थित रही ।
नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों और बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठे विवाद के बीच निर्वाचन आयोग (ईसी) रविवार को एक असामान्य संवाददाता सम्मेलन करेगा। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के अलावा किसी अन्य मुद्दे पर आयोग द्वारा औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाना दुर्लभ माना जाता है।
सूत्रों के अनुसार, प्रेस कॉन्फ्रेंस का विषय अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन यह संभावना जताई जा रही है कि यह कांग्रेस सहित विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के जवाब में होगी। राहुल गांधी ने हाल के दिनों में बार-बार आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा में बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में हेरफेर कर ‘वोट चोरी’ की गई है। उनका दावा है कि पात्र मतदाताओं के नाम जानबूझकर सूची से हटाए गए, जबकि कुछ जगहों पर फर्जी नाम जोड़े गए।
निर्वाचन आयोग ने इस मामले में राहुल गांधी से लिखित रूप में उन सभी व्यक्तियों के नाम और विवरण मांगे हैं, जिनके बारे में उनका कहना है कि वे गलत तरीके से सूची से हटाए या जोड़े गए हैं। साथ ही, आयोग ने एक हस्ताक्षरित हलफनामा भी प्रस्तुत करने को कहा है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अपने आरोपों को सबूतों के साथ प्रमाणित करने में असफल रहते हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी।
इसी बीच, बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के चलते लाखों पात्र नागरिक दस्तावेजी अभाव के कारण मताधिकार से वंचित हो जाएंगे। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह कदम मतदाता सूची में छेड़छाड़ का रास्ता खोल सकता है।
इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने भी निर्वाचन आयोग को पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने आयोग से बिहार में मतदाता सूची से हटाए गए करीब 65 लाख नामों का पूरा विवरण, उन्हें हटाने के कारणों सहित, सार्वजनिक करने को कहा है।
अब सबकी निगाहें रविवार दोपहर होने वाले निर्वाचन आयोग के इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जिसमें आयोग संभवतः इन सभी आरोपों पर अपना आधिकारिक पक्ष रखेगा।
“हर लापता बेटी के साथ हमारी सोच की परीक्षा होती है — अफ़वाह नहीं, संवेदनशीलता ज़रूरी है”
हर लापता लड़की के साथ हमारी संवेदनशीलता और सिस्टम की परीक्षा होती है। अफ़वाहें, ताने और लापरवाह पुलिस जाँच अपराधियों के लिए सबसे बड़ी मददगार बन जाती हैं। जब तक पुलिस हर गुमशुदगी को गंभीर अपराध मानकर तुरंत कार्रवाई नहीं करेगी और समाज हर बेटी को सहानुभूति की नज़र से नहीं देखेगा, तब तक ऐसी त्रासदियाँ दोहराई जाती रहेंगी। सरकार को दिखावटी सुरक्षा छोड़कर थानों की मजबूती पर ध्यान देना होगा। लड़की की मौत एक चेतावनी है—अब धारणाएँ बदलनी ही होंगी। “लड़की अगर घर से लापता हुई है तो वह भागी ही होगी” — यह सोच केवल पुलिस की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। यही सोच एक लड़की की जान ले गई। जिस पुलिस को तुरंत उसकी तलाश करनी चाहिए थी, उसने मान लिया कि वह कहीं प्रेम प्रसंग के चलते भाग गई होगी। परिणाम यह हुआ कि अपराधियों को मौका मिल गया और एक मासूम ज़िंदगी समाप्त कर दी गई।
आज सबसे बड़ी त्रासदी यही है कि बेटियों के लापता होने की शिकायत पर पुलिस की पहली प्रतिक्रिया “भाग गई होगी” और समाज की पहली प्रतिक्रिया “किसके साथ भागी होगी” होती है। दोनों ही स्थितियाँ अपराधियों के लिए ढाल बन जाती हैं। पुलिस थानों में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाने वाले परिवारों को अक्सर यही सुनने को मिलता है कि “थोड़ा इंतज़ार कीजिए, लड़की खुद लौट आएगी।” यानी शुरुआत से ही मामले को हल्का समझा जाता है। जब तक पुलिस सक्रिय होती है, तब तक कई बार अपराधी अपने मंसूबे पूरे कर चुके होते हैं। यह रवैया केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जीवन के साथ खिलवाड़ है।
यह मान लेना कि हर लापता लड़की प्रेम-प्रसंग में भागी है, पुलिस की सोच का सबसे खतरनाक पहलू है। इससे अपराधियों को समय मिल जाता है और पीड़ित परिवार अपने ही समाज की तानों और शक की निगाहों का शिकार बनता है। हमारे गाँव, कस्बों और शहरों में जब भी कोई लड़की लापता होती है, तो अफ़वाहों का बाज़ार गर्म हो जाता है। लोग यह सोचने की बजाय कि वह कहीं अपराध की शिकार न हो गई हो, यह अनुमान लगाने लगते हैं कि वह किसके साथ भागी होगी। इस सोच से दोहरी चोट लगती है। एक ओर लड़की की इज़्ज़त को बेवजह बदनाम किया जाता है और दूसरी ओर परिवार सामाजिक कलंक से टूटने लगता है।
समाज को यह समझना होगा कि हर लड़की की सुरक्षा पूरे समुदाय की ज़िम्मेदारी है। किसी की अनुपस्थिति पर अफ़वाह फैलाना या दोषारोपण करना न केवल अमानवीय है, बल्कि अपराध को बढ़ावा देने वाला भी है। एक लड़की की मौत केवल एक परिवार का दुख नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता का आईना है। पुलिस ने समय रहते खोजबीन की होती तो शायद वह आज ज़िंदा होती। समाज ने अफ़वाहों की बजाय संवेदनशीलता दिखाई होती तो परिवार को न्याय की लड़ाई में अकेला न रहना पड़ता। अब वह लड़की वापस नहीं आ सकती। लेकिन यह ज़रूरी है कि उसके हत्यारों को सख़्त सज़ा मिले और आने वाले समय में ऐसी त्रासदियाँ दोहराई न जाएँ।
आज पुलिस बल की सबसे बड़ी समस्या संसाधनों की कमी और प्राथमिकताओं की गड़बड़ी है। नेताओं की सुरक्षा में सैकड़ों जवान तैनात रहते हैं, जबकि थानों और चौकियों में फोर्स की कमी है। नतीजा यह होता है कि आम जनता की शिकायतों पर या तो देर से कार्रवाई होती है या बिल्कुल ही उपेक्षा कर दी जाती है। ज़रूरत है कि सरकार नेताओं को दिखावटी सुरक्षा देना बंद करे और हर थाने को पर्याप्त पुलिस बल मुहैया कराए। बेटियों से जुड़े मामलों में फास्ट रिस्पॉन्स सिस्टम लागू हो और जिलों के एसपी से मुख्यमंत्री रोज़ाना सुरक्षा व्यवस्था का फ़ीडबैक लें। जब तक सरकार प्राथमिकताओं में बदलाव नहीं लाएगी, तब तक बेटियाँ असुरक्षित रहेंगी और अपराधियों के हौसले बुलंद रहेंगे।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताज़ा रिपोर्ट इस संकट की गम्भीरता को और भी स्पष्ट करती है। वर्ष 2023 के आँकड़ों के अनुसार भारत में प्रतिदिन लगभग 90 महिलाएँ और लड़कियाँ लापता होती हैं। इनमें से कई कभी वापस नहीं लौट पातीं। वहीं हर साल हज़ारों मामले ऐसे दर्ज होते हैं जिनमें लापता लड़की हत्या, तस्करी या यौन शोषण का शिकार पाई जाती है। इसके बावजूद पुलिस थानों में पहला रवैया यही रहता है कि “भाग गई होगी।” यदि गुमशुदगी को शुरुआती चरण में ही गंभीर अपराध मानकर खोजबीन की जाए, तो इनमें से कई जानें बचाई जा सकती हैं। लेकिन हमारी सोच और व्यवस्था दोनों इस दिशा में बेहद ढीली और उदासीन हैं।
धारणा बदलना आसान काम नहीं है, लेकिन असंभव भी नहीं। जिस दिन पुलिस हर लापता लड़की को संभावित पीड़िता मानेगी, उसी दिन अपराधों पर लगाम लगेगी। जिस दिन समाज लड़की के गायब होने पर तानों और गॉसिप की बजाय सहानुभूति दिखाएगा, उसी दिन परिवारों का बोझ हल्का होगा। जिस दिन सरकार सुरक्षा को पॉलिटिकल शो-ऑफ़ की बजाय पब्लिक राइट मानेगी, उसी दिन व्यवस्था सुधरेगी। आज हम नारे लगाते हैं— “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।” लेकिन जब कोई बेटी लापता होती है, तो हमारी सोच नारे से उलट साबित होती है। “बेटी बचाओ” का असली अर्थ तभी पूरा होगा जब हर शिकायत पर पुलिस त्वरित और गंभीर कार्रवाई करेगी। लड़की जैसी घटनाएँ हमें झकझोरती हैं कि सिर्फ़ भाषण और नारे काफ़ी नहीं हैं। हमें अपनी सोच और व्यवस्था दोनों बदलनी होंगी। लड़की की मौत केवल एक त्रासदी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। यह चेतावनी है कि हमारी पुलिस की जाँच शैली बदलनी होगी, समाज को अपने पूर्वाग्रह छोड़ने होंगे और सरकार को अपनी प्राथमिकताएँ सुधारनी होंगी। वह लड़की लौट नहीं सकती, लेकिन अगर उसके हत्यारों को सज़ा मिले और उसकी मौत से सबक लेकर सिस्टम बदले, तो उसकी शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी। अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर यह तय करें कि हर बेटी सुरक्षित है और उसकी गुमशुदगी को हल्के में लेने की कोई गुंजाइश नहीं है।
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की प्रशंसा करने पर कड़ा विरोध जताया है। शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओवैसी ने इसे भारत के स्वतंत्रता संग्राम का “घोर अपमान” बताया और आरोप लगाया कि आरएसएस ने कभी आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया।
ओवैसी ने कहा, “प्रधानमंत्री द्वारा आरएसएस की प्रशंसा करना गलत है। आरएसएस ने हमेशा समावेशी राष्ट्रवाद का विरोध किया और स्वतंत्रता सेनानियों, जिनमें गांधी भी शामिल हैं, से अंग्रेजों से भी ज़्यादा नफ़रत की।” उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस की विचारधारा भारतीय संविधान के खिलाफ है और यह देश में नफ़रत फैलाने का काम करता है।
उन्होंने सवाल किया कि स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख आंदोलनों – असहयोग आंदोलन, सत्याग्रह, रौलट एक्ट विरोध, सविनय अवज्ञा, भारत छोड़ो आंदोलन और नौसेना विद्रोह – में आरएसएस की कोई भूमिका क्यों नहीं रही।
हिंदू महासभा के नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी का ज़िक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि उनकी राजनीतिक भूमिका और पाकिस्तान प्रस्ताव पेश करने वाले फ़ज़लुल हक़ के साथ काम करने के ऐतिहासिक तथ्य पर भी विचार होना चाहिए।
ओवैसी ने दोहराया कि उनकी पार्टी दार्शनिक रूप से भाजपा के विरोध में है और प्रधानमंत्री द्वारा “नफ़रत फैलाने वाले संगठन” की प्रशंसा करना स्वीकार्य नहीं है।
बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा ) गुरुवार को बरहज नगर क्षेत्र मे 15अगस्त को जोश व जज्बे के साथ मनाया गया। समाज सेवी श्रीप्रकाश पाल द्वारा मदरसा मेराजुल उलमा अंजुमन पटेल नगर, यूनियन बैंक, जाग्रति एकेडमी बैरिया तिवारी, उच्चतर लघु माध्यमिक विद्यालय, पचौहा, न्यू जेनिथ एकेडमी बरहज, एवं उमा टेक्निकल डिग्री कालेज के प्रांगण मे झंडारोहण कर तिरंगे को सलामी दीं गयी। इस दौरान बच्चो ने आजादी के दीवानो के लिए जमकर नारे लगाए। इस दौरान श्रीप्रकाश पाल ने अंजुमन व न्यू जेनिथ सहित आदि विद्यालयों के बच्चो को आजादी का पाठ पढ़ाया। उन्होंने बच्चो को वीर शहीदों के आदर्शो को आत्मसत कर, उनके रास्ते पर चलकर देश की सुरक्षा का संकल्प दिलाया। बच्चो ने देश भक्ति गीतों से सबका मन मोह लिया। आजादी के 79 वें वर्षगांठ पर सदर जब्बार राइन, कारी हमीद रजा, नवीन मैनेजर फुरकान रजा, मुज्ज अंसारी, फेमस मास्टर, हुसैन राइन सहित छात्रावास के बच्चे मौजूद रहे। झण्डारोहण के पर्व पर नगर के प्राथमिक विद्यालय जयनगर नंबर 2, मे स्वतन्त्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया। विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं उत्तर प्रदेशिय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष जय नारायण त्रिपाठी एवं सुरेन्द्र सिंह ने झण्डा रोहण कर आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले भारत माँ के बेटों को यादव किया। विद्यालय के छात्रों द्वारा प्रभात फेरी निकाली गयी जो जयनगर, तहसील परिसर से होते हुए विद्यालय के प्रांगण मे पहुँचे, इस दौरान भारत माता की जय से पूरा वायु मंडल गूंजा रहा। कार्यक्रम मे जय नारायण त्रिपाठी प्रिंस, शिक्षा मित्र अर्चना त्रिपाठी, आशा यादव, मंजू देवी, आशा देवी, श्वेता जायसवाल, वंदना सिंह, कुसुम सिंह सहित सैकड़ो अभिभावक एवं बच्चे मौजूद रहे। वही तहसील क्षेत्र के बाबा फुलेश्वर नाथ शिक्षण संस्थान बढ़या फूलवारिया के परिसर मे प्रधानाचार्य मुद्रीका यादव द्वारा 79 वें स्वतंत्रता दिवस के सुभ अवसर पर अध्यापको व बच्चों संघ झण्डारोहण कर वीर शहीदों की याद मे जयकारा लगाया गया। इस दौरान बच्चों को आजादी के वीर जवानो के संघर्षो को बताया गया। इस ख़ुशी पर बच्चो मे मिष्ठान वितरण किया गया तथा उनके अच्छे कार्यों के लिए पुरसस्कृत किया गया। कार्यक्रम मे कृष्णाकांत तिवारी, अलोक पाण्डेय, दिनेश प्रसाद, मैनेजर सिंह, मोहन तिवारी, अंजलि पाण्डेय, सोनम तिवारी, सपना यादव, कविता विश्वकर्मा, निर्मला सहित भारी संख्या मे लोग उपस्थित रहे।
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) पूरे देश में शनिवार को भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कृष्ण जन्मभूमि मथुरा और वृंदावन में उत्सव का विशेष रंग देखने को मिला, जहां लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से आकर भगवान के दर्शन और लीलाओं का आनंद लेते नजर आए।
मथुरा-वृंदावन में अद्भुत दृश्य भगवान कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा में दिनभर भजन-कीर्तन, रासलीला और झांकियों का आयोजन हुआ। रात 12 बजे भगवान के प्राकट्य के क्षण को देखने के लिए श्रद्धालुओं में अपार उत्साह था। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष सजावट, फूल-बत्ती की रोशनी और भव्य झांकियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में भी जन्माष्टमी की धूम रही, जहां भक्त मंडलियों ने मधुर भजनों से माहौल को कृष्णमय कर दिया।
देश के विभिन्न हिस्सों में उत्सव का रंग राजस्थान के नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर में सुबह मंगला दर्शन के साथ उत्सव की शुरुआत हुई। ठाकुरजी को दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से पंचामृत स्नान कराया गया। रात 12 बजे कान्हा के जन्म के उपलक्ष्य में 21 तोपों की सलामी दी जाएगी, जिसके बाद पुनः पंचामृत स्नान और विशेष आरती होगी।
महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई में पारंपरिक दही हांडी महोत्सव का आयोजन हुआ, जिसमें युवाओं की टोलियों ने मानव पिरामिड बनाकर मटकी फोड़ने की प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। गुजरात के द्वारका मंदिर में भगवान द्वारिकानाथ का भव्य स्नान, अभिषेक और शृंगार आरती का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु स्थित इस्कॉन मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर प्रांगण में भजन-कीर्तन, प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर चलता रहा, वहीं विदेशी श्रद्धालु भी पारंपरिक परिधानों में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में सम्मिलित हुए।
भक्ति और उल्लास का संगम देश के कोने-कोने में जन्माष्टमी पर्व ने आस्था, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। चाहे उत्तर की मथुरा-वृंदावन हो, पश्चिम का नाथद्वारा और द्वारका, दक्षिण का बेंगलुरु हो या फिर पश्चिमी तट की मुंबई—हर जगह भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव ने लोगों को भक्ति और आनंद में डुबो दिया।
मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) पालघर जिले के विरार पुलिस ने 2016 में हुए एक हत्या के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के देवरिया निवासी सोनू अच्छेलाल गुप्ता (35) के रूप में हुई है।
विरार अपराध शाखा के वरिष्ठ निरीक्षक शाहूराज राणावरे के अनुसार, पुलिस टीम ने कई महीनों तक गहन जांच और तकनीकी सुरागों के आधार पर शुक्रवार को आरोपी को दबोच लिया।
मामला 30 अक्टूबर 2016 का है, जब एक विवाद के बाद कुछ लोगों ने सोनू परशुराम झा पर हमला किया था। हमले में झा गंभीर रूप से घायल हो गए थे और करीब दो सप्ताह बाद अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी।
घटना के समय आरोपी गुप्ता ठाणे जिले के ओवाला इलाके में रहता था। वारदात के बाद वह फरार हो गया और बीते 9 वर्षों से पुलिस से बचता रहा। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी के लिए टीम ने आरोपी के पुराने संपर्कों, रिश्तेदारों और संभावित ठिकानों की लगातार निगरानी की, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पुलिस हिरासत में भेजा गया है। पुलिस अब इस मामले में अन्य फरार आरोपियों की तलाश कर रही है।
सिलवासा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)सिलवासा (दादरा एवं नगर हवेली, दमन एवं दीव) समरवरनी इलाके में शुक्रवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां 56 वर्षीय सुनील भाकरे ने अपने दो दिव्यांग बच्चों की हत्या कर खुद फांसी लगाकर जान दे दी।
सिलवासा थाने के उपनिरीक्षक अनिल टी.के. के मुताबिक, मृतक ने पहले दोनों बच्चों — जय (18) और आर्य (10) — को कथित तौर पर ज़हर दिया और फिर रस्सी से गला घोंट दिया। इसके बाद उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
जानकारी के अनुसार, करीब दो हफ्ते पहले उसकी पत्नी उसे छोड़कर चली गई थी, जिसके बाद से वह बच्चों की देखभाल अकेले कर रहा था। मानसिक तनाव और परिस्थितियों से जूझते हुए उसने यह कदम उठाया।
मूल रूप से रायगढ़ (महाराष्ट्र) के रहने वाले सुनील भाकरे पिछले 20 वर्षों से सिलवासा में रह रहे थे। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच जारी है।
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। पादरी बाजार क्षेत्र के जंगल धूषण स्थित एकेडेमिक ग्लोबल स्कूल में स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय करियर काउंसलर पूर्णेन्दु शुक्ल, चेयरमैन ई. संजीव कुमार, वरिष्ठ पत्रकार अरुण सिंह मुन्ना, निदेशक राजेश कुमार, सहायक निदेशक संदीप कुमार, करुणा भदानी, स्वाति कुमार, प्रधानाचार्य वीसी चॉको एवं एडमिनिस्ट्रेटर अफरोज खान ने ध्वजारोहण कर किया। तिरंगे को सलामी देने के बाद छात्रों ने मार्च पास्ट किया। इसके उपरांत पहलगाम आतंकी घटना पर आधारित नाटक ने सभी को भावुक कर दिया, जिसमें निर्दोष महिलाओं व बच्चों पर आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर की जवाबी कार्रवाई का सजीव मंचन किया गया। इसी क्रम में स्वतंत्रता सेनानी रानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आजाद व अन्य वीरों के बलिदान को दर्शाता नाटक प्रस्तुत हुआ। कार्यक्रम में स्वच्छ भारत अभियान पर आधारित नृत्य ने सभी को स्वच्छता के प्रति प्रेरित किया। सृष्टि शुक्ला, कुंवर शौर्य सिंह और आलोक ने भाषण प्रस्तुत किया, अपर्णा कनौजिया ने भरतनाट्यम, शगुन गुप्ता ने देशभक्ति गीत पर नृत्य से समां बांधा। अपने संबोधन में पूर्णेन्दु शुक्ल ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को हमें आजादी के साथ जिम्मेदारी भी मिली। चेयरमैन ई. संजीव कुमार ने राष्ट्रीय एकता में योगदान देने पर बल दिया, जबकि प्रधानाचार्य वीसी चाको ने कहा कि आजादी हमें मिलजुलकर रहना सिखाती है। कार्यक्रम का संचालन दिव्या, अंशिका व समृद्धि ने किया। अंत में आशीष उपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापित किया। शारीरिक शिक्षक अजितेश सोलंकी, श्रवण कुमार, डीपी सिंह व मोहसिना खातून ने तिरंगे को सम्मानपूर्वक उतारा।
चितरंगी(राष्ट्र की परम्परा) । 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर चितरंगी परेड ग्राउंड में जनप्रतिनिधियों और लोकसेवकों ने ध्वजारोहण कर समारोह का शुभारंभ किया। इस दौरान आयोजित सांस्कृतिक प्रतियोगिता में शासकीय सान्दीपनि (सीएम राइज) मॉडल स्कूल प्रथम स्थान पर रहा। द्वितीय स्थान शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और तृतीय स्थान रॉयल फोर्ट विद्यालय ने प्राप्त किया। जिन्हे शनिवार को पुरस्कृत किया गया। सान्दीपनि स्कूल के छात्रों ने ऑपरेशन सिंदूर थीम पर नाट्य-नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। इस प्रस्तुति को सबसे अधिक सराहना व पारितोषिक प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सैकड़ों लोकसेवकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने पर शिक्षक उपेंद्र द्विवेदी को राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया, वहीं सत्यकाम तिवारी, अश्विनी बैस, सौरभ श्रीवास्तव, श्वेता दूबे और प्रेमलाल सिंह सहित कई शिक्षकों को भी प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। एसडीएम सुरेश जाधव ने छात्रों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि प्रस्तुत कार्यक्रम देशभक्ति की भावना को जागृत करने वाला है।