Saturday, July 18, 2026
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राम मंदिर परकोटे के सभी छह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे

अयोध्या(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा निर्णय लिया है। अब श्रीराम मंदिर परकोटे में स्थित सभी छह मंदिर आम श्रद्धालुओं के दर्शन-पूजन के लिए खोले जाएंगे। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने जानकारी दी कि 15 अक्टूबर से श्रद्धालु इन मंदिरों में दर्शन कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि परकोटे में स्थित शेषावतार मंदिर सहित अन्य सभी मंदिर खोल दिए जाएंगे। इससे पहले तक इन मंदिरों में प्रवेश सीमित था, लेकिन अब भक्तों को निकट से दर्शन का अवसर मिलेगा।

ट्रस्ट के अनुसार मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और उनकी भावनाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के मद्देनज़र आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं।

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कहना है कि आने वाले समय में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए और भी व्यवस्थाएं सुदृढ़ की जाएंगी, ताकि भक्त बिना किसी असुविधा के भगवान श्रीराम और अन्य मंदिरों में विराजमान देवताओं का दर्शन कर सकें।

15 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस नए प्रावधान को लेकर अयोध्या में श्रद्धालुओं और साधु-संतों में हर्ष का माहौल है।

गोमती नगर विस्तार में जमीन बिक्री फर्जीवाड़ा : हाईकोर्ट ने LDA को लगाई फटकार, 10 साल की संपत्तियों का होगा ऑडिट

लखनऊ(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) गोमती नगर विस्तार में जमीन बिक्री से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट कहा कि सात-सात अधिकारियों द्वारा जांच किए जाने के बावजूद भी प्राधिकरण ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। अदालत ने इस निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए मामले की गंभीरता को देखते हुए पिछले 10 वर्षों की सभी संपत्ति बिक्री का ऑडिट कराने का आदेश दिया है।

याचिका अधिवक्ता शरद पाठक की ओर से दायर की गई थी, जिसमें गोमती नगर विस्तार योजना के तहत जमीनों की बिक्री में अनियमितताओं और फर्जीवाड़े का मुद्दा उठाया गया था। अदालत ने इस पर सुनवाई करते हुए बहुजन निर्बल वर्ग समिति को भी जांच का आदेश दिया है, ताकि प्रभावित वर्गों के हितों की सुरक्षा हो सके।

हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि जब सात अलग-अलग अफसरों ने जांच की और उसमें गड़बड़ियों की पुष्टि हुई, तो फिर कार्रवाई न होना प्राधिकरण की लापरवाही और मिलीभगत को दर्शाता है। अदालत ने कहा कि इस तरह की उदासीनता से जनता का भरोसा विकास प्राधिकरण जैसे संस्थानों पर से उठता है।

अदालत के आदेश के बाद अब एलडीए के लिए यह मामला गंभीर चुनौती बन गया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि 10 वर्षों की संपत्ति बिक्री का ऑडिट रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

यह मामला अब न केवल गोमती नगर विस्तार की संपत्ति बिक्री बल्कि पूरे एलडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता दिखाई दे रहा है।

ऑनलाइन मनी गेम की सर्विस देना, संचालन करना, प्रचार करना गैरकानूनी होगा-सरकार का चलेगा चाबुक-3 साल की सजा, एक करोड़ जुर्माना

कानून अपनी जगह ज़रूरी है, लेकिन समाज, परिवार माता- पिता को चाहिए कि वे बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखें, शिक्षकों को चाहिए कि वे विद्यार्थियों को सही दिशा दिखाएँ- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया – भारत एक युवा देश है।यहाँ की आधी से अधिकआबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है और इस युवा शक्ति को ही “नवभारत का भविष्य” कहा जाता है। परंतु यही युवा आज एक ऐसे जाल में फंसते जा रहे हैं जो मनोरंजन के नाम पर धीरे-धीरे उन्हें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक अंधकार की ओर धकेल रहा है। यह जाल है ऑनलाइन गेमिंग का अनियंत्रित विस्तार। मोबाइल, कंप्यूटर और इंटरनेट की सुलभता ने भारत में ऑनलाइन गेमिंग उद्योग को विशाल बना दिया है। आज स्थिति यह है कि लगभग 50 करोड़ भारतीय युवा किसी-न-किसी रूप में ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े हुए हैं। इनमें से लाखों युवा इसकी लत के शिकार हो चुके हैं।इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने “प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025” संसद में प्रस्तुत किया जो पास हो गया।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र मानता हूं कि पिछले दस वर्षों में भारत में इंटरनेट उपयोग कर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। सस्ते स्मार्टफोन और डेटा पैक की वजह से आज गाँव-गाँव तक इंटरनेट पहुंच चुका है। इस इंटरनेट क्रांति का एक सबसे बड़ा प्रभाव ऑनलाइन गेमिंग के रूप में सामने आया। पीयूबीजी, फ्री फायर,बीज़ीएमआई, कॉल ऑफ़ ड्यूटी और विभिन्न फैंटास्टि स्पोर्ट्स जैसे गेम युवाओं में इस कदर लोकप्रिय हो गए कि वे पढ़ाई, खेल-कूद और सामाजिक जीवन से दूर होकर वर्चुअल दुनियाँ में खोते चले गए। 20 अगस्त 2025 को देर शाम केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने संसद भवन के बाहर कहा कि यह कानून इसलिए ज़रूरी हो गया क्योंकि ऑनलाइन गेमिंग ने करोड़ों युवाओं को अंधकार में डाल दिया है और समाज से बड़े पैमाने पर फीडबैक प्राप्त हुआ कि अब इसे नियंत्रित करना ही पड़ेगा, आज के युग में डिजिटल टेक्नोलॉजी में ऑनलाइन गेमिंग एक बड़ा सेक्टर बनकर उभरा है। ऑनलाइन गेमिंग के तीन सेगमेंट्स हैं:पहला- ई-स्पोर्ट्स, दूसरा- ऑनलाइन सोशल गेमिंग और तीसरा- ऑनलाइन मनी गेमिंग।इस बिल के माध्यम से ई-स्पोर्ट्स और ऑनलाइन सोशल गेमिंग को प्रमोट किया जाएगा और इसको सपोर्ट भी मिलने की उम्मीद है। हमारे द्वारा एक अथॉरिटी बनाई जाएगी, जिसके माध्यम से ई-स्पोर्ट्स और ऑनलाइन सोशल गेमिंग को बढ़ावा दिया जाएगा ऑनलाइन मनी गेमिंग समाज के लिए सही नहीं है। कुछ गेम्स ऐसे हैं, जिनमें परिवार की जिंदगीभर की बचत ऑनलाइन गेम में चली जाती है।
साथियों बात अगर हम डब्लूएचओ द्वारा गेमिंग डिसऑर्डर एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या व भारत सरकार ने इस समस्या को सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा मानते हुए हस्तक्षेप करने की करें तो,विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2019 में ही गेमिंग डिसऑर्डर को मानसिक स्वास्थ्य की श्रेणी में शामिल किया था। डब्लूएचओ का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक ऑनलाइन गेम में इतना डूब जाए कि उसके पढ़ाई-लिखाई,रोजगार नींद, खान-पान, सामाजिक संबंध और पारिवारिक जीवन पर प्रतिकूल असर पड़े, तो यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है।भारत में भी कई राज्यों में ऐसी घटनाएँ सामने आईं जहाँ बच्चे और किशोर ऑनलाइन गेम हारने के बाद तनाव, डिप्रेशन और यहाँ तक कि आत्महत्या तक कर बैठे। माता-पिता ने शिकायत की कि उनके बच्चे मोबाइल स्क्रीन से अलग नहीं हो पा रहे, नींद पूरी नहीं हो रही, आँखों की रोशनी प्रभावित हो रही है, और पैसे खर्च करने की आदत भी नियंत्रण से बाहर जा रही है।इन्हीं कारणों से भारत सरकार ने इस समस्या को सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा मानते हुए हस्तक्षेप करने का निर्णय लिया।
साथियों बात अगर हम,इस कानून को जरूरी बनाने वह बिल की मुख्य बातों की करें तो, (1) युवा पीढ़ी पर खतरा-लगभग 50 करोड़ युवा ऑनलाइन गेम्स की लत में हैं। यह संख्या भारत की जनसंख्या का बहुत बड़ा हिस्सा है।(2) आर्थिक शोषण-इन-ऐप परचेज़ और कैश रिवार्ड्स ने युवाओं को आर्थिक रूप से शोषित किया। कई परिवार कर्ज़ में डूबे। (3) अपराध की घटनाएँ- कई राज्यों में देखा गया कि बच्चे चोरी या अपराध की राह पर चल पड़े ताकि वे गेमिंग के लिए पैसे जुटा सकें। (4) स्वास्थ्य संकट- मानसिक तनाव, डिप्रेशन, आँखों और शरीर से संबंधित रोगों का प्रसार। (5)समाजिक असंतुलन- युवाओं का वास्तविक जीवन से कटना और वर्चुअल दुनिया में गुम होना। (6) फीडबैक का दबाव-समाज से व्यापक स्तर पर सुझाव मिले कि सरकार को इस पर नियंत्रण करना ही होगा।प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 की मुख्य बातें (1) गेम्स की कैटेगरी तय होगी-कौन सा गेम “स्किल-बेस्ड”है और कौन सा “चांस-बेस्ड”,यह सरकारनिर्धारित करेगी। (2)लाइसेंस प्रणाली- बिना सरकारी अनुमति के कोई भी कंपनी ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म नहीं चला सकेगी। (3)आयु सीमा-नाबालिगों (18 साल से कम) के लिए कई तरह की रोक लगाई जाएगी। (4) समय सीमा-गेम खेलने की अधिकतम समय सीमा तय होगी ताकि युवा पूरी रात ऑनलाइन गेम न खेलें। (5) वित्तीय नियंत्रण-ऑनलाइन गेम्स में निवेश और इन-ऐप परचेज़ पर कड़ा नियमन।
साथियों बात अगर हम सरकार के साथ संदेश की करें तोसरकार ऑनलाइन गेमिंग को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं करना चाहती, बल्कि उसे विनियमित (रेगुलेट) करना चाहती है ताकि यह उद्योग भी चले और युवाओं की सेहत भी सुरक्षित रहे।समाज की ज़िम्मेदारी और नागरिकों की भूमिका,कानून अपनी जगह ज़रूरी है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है कि समाज और परिवार भी जागरूक हों। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखें, शिक्षकों को चाहिए कि वे विद्यार्थियों को सही दिशा दिखाएँ, और युवाओं को भी समझना चाहिए कि जीवन केवल वर्चुअल गेम्स तक सीमित नहीं है।प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025” भारत के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह न केवल युवाओं को अंधेरे से बाहर निकालने का प्रयास है बल्कि यह संदेश भी है कि भारत सरकार नागरिकों के मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य के प्रति गंभीर है।इस कानून से यह स्पष्ट है कि भारत केवल डिजिटल शक्ति बनने की दिशा में ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार डिजिटल समाज बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।
साथियों बात अगर हम ऑनलाइन गेमिंग को नियंत्रित करने की करें तो, हमारे देश में कैसीनो पर तो बैन हैं, लेकिन मोबाइल फोन में करोड़ों कैसीनोस चल रहे हैं और अब उसपर एक बिल पास करवाकर पाबंदी लगाई जाएगी। इस बिल से ऑनलाइन गेमिंग को नियंत्रित किया जाएगा और कोई भी ऑनलाइन गेम्स,जिसमें लोग पैसा लगाते हैं और जीतने पर पैसे कमाते हैं, उनपर रोक लग जाएगी। ऐसे गेम्स को ऑनलाइन मनी गेम्स कहते हैं। इस बिल में 4 बड़ी बातें हैं। पहली बात, ऑनलाइन मनी गेम्स की सर्विस देना, उसे चलाना और यहां तक कि प्रचार करना भी गैरकानूनी होगा। दूसरा अगर कोई ऑनलाइन मनी गेम्स ऑफर करता है या उसका प्रचार करता है, तो उसे 3 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना या फिर जेल और जुर्माना दोनों हो सकता है।विज्ञापन चलाने पर 2 साल की जेल और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना या फिर दोनों सजाएं मिल सकती हैं। तीसरा,ऐसे गेम्स खेलनेवालों को कोई सजा नहीं दी जाएगी। सज़ा या जुर्माना ऐसे गेम्स की सर्विस देने वालों,इनका विज्ञापन करने वालों या आर्थिक मदद देने वालों को होगी।और चौथा,गेमिंग इंडस्ट्री को नियंत्रित करने केलिए एक अथॉरिटी बनाई जाएगी। जो ये तय करेगी कि ऑनलाइन मनी गेम्स कौन से हैं। और बिना पैसे वाले गेम्स यानें इलेक्ट्रॉनिक स्पोर्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा। जिसमें खिलाड़ी अकेले या फिर टीम के रूप में एक-दूसरे के खिलाफ खेलते हैं। इस बिल के दायरे में स्किल बेस्ड गेम्स और चांस बेस्ड गेम्स दोनों हैं। स्किल बेस्ड गेम्स जैसे शतरंज और रम्मी में लोगों के स्किल्स यानी कौशल और रणनीति पर उस गेम का नतीजा निर्भर करता है। और चांस बेस्ड गेम्स जैसे लॉटरी में नतीजा किस्मत या संयोग पर निर्भर करता है।इसमें खेलने वालों के कौशल का असर बहुत कम या नहीं के बराबर होता है। और कई देशों में इसे गंभीलिंग यानी जुआ माना जाता है। आईटी मंत्री ने कहा है कि सरकार गेमिंग इंडस्ट्री की मदद करना चाहती है। लेकिन जब उद्योग के मुनाफे और समाज के हितों में टकराव हो, तो मोदी सरकार हमेशा समाज का पक्ष लेगी।आपने बड़े-बड़े फिल्मस्टार्स और खिलाड़ियों को ऑनलाइन गेम्स का विज्ञापन करते देखा होगा। क्रिकेट और बाकी खेलों के कई ऐसे मोबाइल अप्प्स हैं, जिसमें पैसे लगाकर टीम बनानी होती है। और विज्ञापनों में ऐसा दिखाया जाता है कि सिर्फ 50 या 60 रुपए लगाकर आपकरोड़ों रुपए जीत सकते हैं।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025: युवाओं की सुरक्षा और समाज की ज़िम्मेदारी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदमऑनलाइन मनी गेम की सर्विस देना, संचालन करना, प्रचार करना गैरकानूनी होगा-सरकार का चलेगा चाबुक-3 साल की सजा,एक करोड़ जुर्मानाकानून अपनी जगह ज़रूरी है,लेकिन समाज,परिवार माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखें, शिक्षकों को चाहिए कि वे विद्यार्थियों को सही दिशा दिखाएँ।

संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

देवरिया पुलिस का “मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान”, 600 व्यक्तियों और 355 वाहनों की हुई चेकिंग

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)पुलिस अधीक्षक देवरिया विक्रान्त वीर के निर्देशन में जनपदीय पुलिस द्वारा सुबह 05 बजे से 08 बजे तक “मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान” चलाया गया।इस दौरान थाना स्तर पर प्रभारी निरीक्षक/थानाध्यक्षों ने मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों से सीधा संवाद स्थापित कर सुरक्षा का भरोसा दिलाया। साथ ही संदिग्ध व्यक्तियों व वाहनों की तलाशी ली गई। पुलिस ने छोटे-मोटे विवादों को सामुदायिक स्तर पर सुलझाने, मित्र पुलिसिंग की भावना को मजबूत करने तथा महिलाओं-बच्चियों पर फब्तियां कसने वालों, नाबालिग चालकों, तीन सवारी, मोडिफाइड साइलेंसर व तेज आवाज वाले लाउडस्पीकरों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की।थानावार चेकिंग परिणाम अभियान के तहत जनपद में कुल 29 स्थानों पर चेकिंग की गई। इसमें 600 व्यक्तियों और 355 वाहनों की चेकिंग हुई तथा नियमों का पालन न करने वाले 05 वाहनों का चालान किया गया।(अन्य थानों में भी दर्जनों लोगों व वाहनों की चेकिंग की गई)पुलिस अधीक्षक विक्रान्त वीर ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य जनमानस में सुरक्षा की भावना को और मजबूत करना तथा कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना है। आमजन ने पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए मॉर्निंग वॉक के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया।

इतिहास की सीख छोड़ फ्रेम में उलझा युवा वर्ग

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संघर्ष की गाथा भूली, तस्वीरों की दुनिया में खोया युवा

आज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि युवा वर्ग केवल फ्रेम और क्लिक की दुनिया में सिमटकर न रह जाए। क्षणभंगुर छवियाँ उसे आकर्षित करती हैं, परंतु इतिहास और साहित्य ही स्थायी आत्मबल देते हैं। फ्रेम से मिली चमक पल भर की है, लेकिन साहित्य से मिला आत्मसत्य पीढ़ियों तक ऊर्जा देता है। आवश्यकता है कि युवा वर्ग सोशल मीडिया की सतहीता से बाहर निकलकर संस्कृति और ज्ञान की गहराई को पहचाने। इतिहास से सीखना और साहित्य से जुड़ना ही उनके जीवन को दिशा देगा। यही भविष्य को सार्थक बनाने का मार्ग है।
पीढ़ी 1990 के बाद पैदा हुई, उसके हिस्से ‘इतिहास’ कम ‘फ्रेम’ ज्यादा आए। मोबाइल, कैमरा और सोशल मीडिया की दुनिया ने उन्हें घटनाओं की गहराई में जाने की बजाय केवल सतही फ्रेम और दृश्य-छवियों तक सीमित कर दिया। आज का युवा वर्ग अतीत के संघर्षों से शिक्षा लेने के बजाय इंस्टेंट फ्रेमों में फँसा है। यही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी है।
आधुनिकता के उन्माद के बावजूद हमारे सार्वजनिक जीवन में जो शून्यता, दरिद्रता और दिशाहीनता दिखाई देती है, उसके कारण बहुत दूर जाकर नहीं खोजने पड़ते। यह शून्यता दरअसल हमारी स्मृतियों और सांस्कृतिक आत्मबोध के बिखराव से पैदा हुई है। इतिहास हमें बताता है कि क्या हुआ, जबकि साहित्य यह दिखाता है कि क्या हो सकता था और क्या होना चाहिए था। साहित्य को आत्मसत्य इसलिए कहा गया है कि वह मनुष्य को केवल सूचना नहीं, बल्कि अनुभव और मूल्य देता है।
भारत का इतिहास किसी सुखद घटनाओं की लड़ी नहीं है। इसमें युद्ध, संघर्ष, विद्वेष, विभाजन और बँटवारा है। लेकिन इन्हीं अंधेरे अध्यायों के बीच स्वतंत्रता आंदोलन की गाथा भी है। 1857 से 1947 तक का काल केवल राजनीतिक संघर्ष नहीं था, वह साहित्य का भी स्वर्णकाल था। स्वतंत्रता संग्राम और साहित्य जैसे एक-दूसरे में घुल गए थे। कवि, लेखक और कलाकार केवल दर्शक नहीं थे, बल्कि वे इतिहास के सह-निर्माता थे। उनके गीत, कविताएँ और उपन्यास आम जनमानस में ऊर्जा और चेतना जगाते थे। यही कारण है कि आज़ादी की लड़ाई केवल तलवार और आंदोलन की गाथा नहीं रही, बल्कि साहित्यिक कृतियों की भी कहानी बनी।
लेकिन यह गौरवशाली परंपरा आज कहीं खो गई है। एक प्राचीन सभ्यता की प्राणवत्ता उसके सांस्कृतिक प्रतीकों और जीवनदायी आस्थाओं में निहित होती है। यही प्रतीक एक समय में हमारे चिंतन, सृजन और व्यवहार को अर्थ प्रदान करते थे। जब यह जीवन्त समग्रता खंडित होकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बँट जाती है, तो वे केवल नामलेवा अनुष्ठानों तक सिमट जाते हैं। पूजा-पाठ तो बचा रहता है, परंतु उससे कोई नयी प्रेरणा नहीं निकलती। आज का भारतीय समाज इसी विडंबना से गुजर रहा है—हमारे पास परंपराएँ तो हैं, लेकिन उनमें जीवन्तता नहीं है।
हम अपने ही देश में आत्मनिर्वासित प्राणियों की तरह जीने को विवश हो गए हैं। हमारी नैतिक मर्यादाएँ, हमारे अध्ययन और हमारे विचार—सब पर विदेशी भाषा और सोच का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है। अंग्रेज़ी का वर्चस्व केवल एक शैक्षिक प्रवृत्ति नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक निर्भरता का सबसे बड़ा प्रतीक है।
हजारीप्रसाद द्विवेदी ने इसी पीड़ा को व्यक्त करते हुए कहा था—“अंग्रेज़ी भाषा ने संस्कृत का सर्वाधिकार छीन लिया है। आज भारतीय विद्याओं की जैसी विवेचना और विचार अंग्रेज़ी भाषा में हैं, उसकी आधी चर्चा का भी दावा कोई भारतीय भाषा नहीं कर सकती। यह हमारी सबसे बड़ी पराजय है। राजनीतिक सत्ता के छिन जाने से हम उतने नतमस्तक नहीं हैं, जितने अपने विचार की, तर्क की, दर्शन की, अध्यात्म की अपनी सर्वस्व भाषा छिन जाने से। अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में हम अपनी ही विद्या को अपनी बोली में न कह सकने के उपहासास्पद अपराधी हैं। यह लज्जा हमारी जातीय है।”
वास्तव में जिसे द्विवेदी जी ने ‘उपहासास्पद अपराध’ कहा, उसके लिए सबसे अधिक जिम्मेदार भारतीय सम्भ्रांत शिक्षित वर्ग रहा है। उसने अंग्रेज़ी को श्रेष्ठता और भारतीय भाषाओं को पिछड़ेपन का चिह्न बना दिया। आज स्थिति यह है कि युवा पीढ़ी अपनी ही भाषा में बोलने से हिचकती है, अपनी संस्कृति को आधुनिकता के विपरीत मानती है और साहित्य को केवल पाठ्यक्रम की किताबों तक सीमित समझती है।
1990 के बाद जन्मी पीढ़ी का संकट यही है। उनके पास सूचनाओं का अंबार है, पर आत्मसत्य नहीं। वे मोबाइल स्क्रीन पर इतिहास की झलकियाँ देखते हैं, पर उसकी गहराई में नहीं उतरते। उनकी चेतना फ्रेमों और क्लिप्स पर आधारित है। इस पीढ़ी ने ‘इतिहास’ कम और ‘फ्रेम’ ज्यादा देखे हैं। यही कारण है कि उनमें वह गहराई नहीं है, जो साहित्य और इतिहास से संवाद करने पर आती।
इतिहास से हमें संघर्ष, धैर्य और त्याग की शिक्षा मिलती है। लेकिन फ्रेम हमें केवल तात्कालिक दिखावा और सतही आकर्षण देता है। यही वजह है कि युवा वर्ग की ऊर्जा दिशाहीन होती जा रही है। उनके पास विकल्प बहुत हैं, पर संकल्प नहीं। फ्रेम की दुनिया क्षणभंगुर है—एक फोटो, एक रील, एक क्लिक पल भर में आती है और मिट जाती है। जबकि इतिहास की सीख स्थायी है—वह आने वाली पीढ़ियों को भी दिशा देती है। यदि युवा वर्ग इस आत्मसत्य को समझने में असफल रहा, तो वह न केवल अपने वर्तमान को खो देगा बल्कि भविष्य को भी अंधकारमय कर लेगा।
साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं है। यह व्यक्ति और समाज को अपने आत्म से मिलाने वाला माध्यम है। साहित्य हमें बताता है कि हमारी जड़ें कहाँ हैं और हमारे सपनों का आकाश कहाँ तक फैला है। साहित्य के बिना समाज केवल सूचनाओं का ढेर रह जाता है, आत्मबोध और दिशा खो देता है। यही कारण है कि आज साहित्य को पुनः केंद्र में लाने की आवश्यकता है।
आज का प्रश्न यही है—क्या हम इस पीढ़ी को फिर से साहित्य और इतिहास से जोड़ पाएँगे? क्या हम उन्हें दिखा पाएँगे कि संस्कृति कोई बोझ नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का आधार है? यह तभी संभव होगा जब भारतीय भाषाओं को केवल बोलचाल तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें ज्ञान और शोध की भाषा बनाया जाए। नई पीढ़ी को यह समझना होगा कि सोशल मीडिया के फ्रेम और क्लिक क्षणिक हैं। वे पल भर में आते हैं और गायब हो जाते हैं। लेकिन साहित्य और संस्कृति वे आधार हैं, जिन पर स्थायी आत्मविश्वास खड़ा होता है।
यह पीढ़ी तभी सार्थक होगी जब वह अपनी जड़ों से जुड़कर आधुनिकता को आत्मसात करेगी। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो साहित्य केवल पुस्तकालयों में बंद रह जाएगा और संस्कृति केवल त्योहारों के सजावटी फ्रेम में कैद हो जाएगी। तब हम केवल उपभोक्ता समाज रह जाएँगे, सृजनशील सभ्यता नहीं।
आज आवश्यकता है कि विद्यालय और विश्वविद्यालय साहित्य को केवल परीक्षा का विषय न मानें, बल्कि जीवन का अनुभव मानें। लेखकों और कवियों को पुनः समाज के केंद्र में लाने की ज़रूरत है। भाषा को बोझ नहीं, गौरव का माध्यम बनाने की आवश्यकता है। और सबसे बढ़कर, नई पीढ़ी को यह एहसास दिलाना होगा कि साहित्य का आत्मसत्य ही वह शक्ति है, जो उन्हें इतिहास की गहराई और भविष्य की दिशा दोनों देता है।
इतिहास हमें यह दिखाता है कि हमने क्या खोया और क्या पाया। साहित्य हमें यह सिखाता है कि हम क्या हो सकते हैं। यही कारण है कि साहित्य और इतिहास का संबंध इतना गहरा और अविभाज्य है। यदि नई पीढ़ी इस आत्मसत्य से जुड़ने में असफल रही, तो वह न तो इतिहास समझ पाएगी और न ही भविष्य गढ़ पाएगी।
आधुनिकता का उन्माद तभी सार्थक होगा, जब वह साहित्य और संस्कृति की आत्मा से जुड़कर नई रचनात्मकता पैदा करेगा। अन्यथा हम केवल ‘फ्रेम’ की पीढ़ी रह जाएँगे—जहाँ गहराई नहीं होगी, केवल सतही छवियाँ होंगी। यही इस समय की सबसे बड़ी चेतावनी भी है और सबसे बड़ा समाधान भी।

डॉ. प्रियंका सौरभ

जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही डबल इंजन की सरकार: सांसद विद्यार्थी

सलेमपुर सांसद बोले क्रूर एवं तानाशाह हो जन भावनाओं के विपरीत कार्य कर रही डबल इंजन सरकार

भाटपार रानी देवरिया (राष्ट्र की परंपरा)
भाटपार रानी तहसील/विधान सभा क्षेत्र के बनकटा रेलवे स्टेशन पर मौर्य एक्सप्रेस ट्रेन बरौनी ग्वालियर ट्रेन ठहराव समाप्त होने पर सांसद सलेमपुर रमाशंकर विद्यार्थी द्वारा बनकटा रेलवे स्टेशन से छात्र छात्राओं एवं आमजन हर जाती धर्म के गांव गरीब जनों के सुगम यात्रा एवं उच्च शिक्षा अध्ययन हेतु एकमात्र यात्रा का साधन रहे रेल यातायात से क्षेत्रीय जनता को वंचित करने छात्र-छात्राओं यात्री हित के विरुद्ध स्थानीय जनता की अनदेखी करने ।
करोना काल से बन्द किए गए मौर्य एक्सप्रेस एवं बरौनी ग्वालियर ट्रेन ठहराव बहाल नहीं किए जाने पर डबल इंजन भाजपा सरकार/ रेल मंत्रालय द्वारा निरंतर जनहित में ट्रेन ठहराव बहाल किए जाने के अपने मांग की अनदेखी पर देश एवं प्रदेश के सत्ता पर काबिज डबल इंजन भाजपा की
निर्मम, तानाशाह, बेदर्द एवं क्रूर सरकार एवं इसके अधीन कार्यरत रेल मंत्रालय के तानाशाह व जन विरोधी तथा जन भावनाओं के विपरीत कार्य कर बनकटा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन ठहराव नहीं करने।
विपक्ष के जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए जनहित के आवाज को दबाए जाने की एक नई परंपरा कायम कर रही है डबल इंजन भाजपा सरकार।
जो एक सरकार की एक बड़ी फेलियर एवं जनहित की अनदेखी है।
बोले सांसद लगातार सबसे अधिक संसद में भाटपार रानी विधानसभा क्षेत्र के गरीब छात्राओं के हित को देखते हुए यह मुद्दे हमने सड़क से संसद भवन तक में उठाए ताकि बनकटा में ट्रेन ठहराव हेतु आंदोलित रहे जनता के धरना में शामिल हो कर मेरे द्वारा ट्रेन ठहराव के आश्वासन पर धरना समाप्त करने वाले स्थानीय जनता की मांग पुरी की की जा सके। बार बार सरकार को अवगत कराया जो पूर्व के भांति महज बनकटा में पुनः मौर्य एक्सप्रेस, बरौनी ग्वालियर ट्रेन के ठराव की जनहित के मांग की क्रूरता के साथ अनदेखी डबल इंजन की जन विरोधी सरकार द्वारा किए जा रहे हैं। अब ट्रेन ठहराव तब ही संभव है जब स्थानीय जनता इस सरकार को हटाए हमारी सरकार आते ही ट्रेन ठहराव पुनः बहाल होना संभव हो सकेगा।

बलिया में पुलिस महकमे में फेरबदल, 15 उपनिरीक्षक स्थानांतरित

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने जनहित एवं प्रशासनिक आवश्यकता को देखते हुए बुधवार को जिले में बड़े पैमाने पर उपनिरीक्षकों का स्थानांतरण कर दिया। आदेश के मुताबिक कुल 15 उपनिरीक्षक तत्काल प्रभाव से अपने नए स्थान पर कार्यभार ग्रहण करेंगे। जारी सूची में उपनिरीक्षक शिवचन्द यादव को चौकी प्रभारी शिवपुर दीयर थाना कोतवाली, मयंक कुमार को चौकी प्रभारी जयप्रकाशनगर थाना बैरिया, सौरभ श्रीवास्तव को कस्बा बांसडीह, आशुतोष मद्धेशिया को लालगंज थाना दोकटी तथा रंजीत विश्वकर्मा को एसएसआई उभांव बनाया गया है। इसी तरह अश्वनी मिश्रा को कस्बा सिकन्दरपुर, ओमवीर सिंह को हनुमानगंज थाना सुखपुरा, अतुल कुमार को थाना चितबड़ागांव, रामअचल यादव को सदर हास्पिटल थाना कोतवाली और जजर अब्बास को बसन्तपुर थाना सुखपुरा की जिम्मेदारी दी गई है। महिला उपनिरीक्षकों में मोनिका को थाना सुखपुरा, कीर्ति को पिंक चौकी बैरिया और मधुपनिका को प्रभारी म.स.प्र./पाक्सो सेल नियुक्त किया गया है। वहीं ज्ञानप्रकाश तिवारी को थाना नरही तथा माखन सिंह को थाना रेवती भेजा गया है। एसपी ने निर्देश दिया है कि सभी अधिकारी तत्काल प्रभाव से अपने-अपने कार्यक्षेत्र में कार्यभार संभालें।

जिला स्तरीय महिला एथलेटिक्स व सब-जूनियर फुटबॉल ट्रायल्स सम्पन्न

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। खेल निदेशालय के निर्देशानुसार मंगलवार 20 अगस्त 2025 को जिला खेल कार्यालय देवरिया में जिला स्तरीय सीनियर महिला एथलेटिक्स एवं सब-जूनियर बालक फुटबॉल खिलाड़ियों का चयन/ट्रायल्स सम्पन्न हुआ।

इस चयन प्रतियोगिता में 21 सीनियर महिला एथलेटिक्स खिलाड़ियों एवं 14 सब-जूनियर फुटबॉल खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद चयनित खिलाड़ियों की सूची इस प्रकार है—

सीनियर महिला एथलेटिक्स चयनित खिलाड़ी
आंचल निषाद, नेहा, मनिषा, आर्या त्रिपाठी, उजाला यादव, राजनंदनी, अलीशा खातून, सोनाली कुशवाहा, पिंकी कुमारी, प्रीति कुमारी।

सब-जूनियर फुटबॉल चयनित खिलाड़ी
अभिषेक गौड़, कृष्णा प्रजापति, शशांक शेखर चौरसिया, शोएब अंसारी, सूरजश, अफान अंसारी, मोहित यादव, पुरुषोत्तम चौहान, राघवेन्द्र यादव, अमन यादव।

चयन प्रक्रिया क्रीड़ाधिकारी अनुराग श्रीवास्तव, एथलेटिक्स प्रशिक्षिका पूजा सिंह एवं फुटबॉल प्रशिक्षक विजय कुमार पाल की देखरेख में सम्पन्न हुई।

चयनित सीनियर महिला एथलेटिक्स खिलाड़ियों को आगामी 21 अगस्त 2025 को गोरखपुर में आयोजित होने वाली मण्डलीय चयन ट्रायल्स के लिए भेजा जाएगा।

कल्याण सिंह: सिद्धांत, सादगी और जनविश्वास की विरासत

✍️नवनीत मिश्र

भारतीय राजनीति में कई नेता आए और गए, लेकिन कुछ ही ऐसे हुए जो अपने पद से अधिक अपने व्यक्तित्व के कारण पहचाने गए। कल्याण सिंह उन्हीं में से एक थे। साधारण किसान परिवार से निकलकर वे दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, राज्यपाल पद तक पहुँचे, लेकिन उनकी असली पहचान सत्ता नहीं, बल्कि जनता का विश्वास रही।
कल्याण सिंह का जीवन यह दिखाता है कि राजनीति केवल नीतियों और घोषणाओं का खेल नहीं है, बल्कि जनभावनाओं से सीधा संवाद है। 1991 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कानून-व्यवस्था और शिक्षा सुधार को प्राथमिकता दी। लेकिन उनकी राजनीतिक यात्रा का सबसे बड़ा मोड़ 6 दिसंबर 1992 को आया, जब अयोध्या में बाबरी ढाँचा ढह गया। इस घटना के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद त्याग दिया। यह त्याग उनके व्यक्तित्व की उस दृढ़ता का प्रतीक है, जहाँ पद से अधिक विचारधारा और विश्वास महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
उनकी छवि कल्याण भइया और बाबू जी की रही। एक ऐसे नेता की, जो सत्ता की ऊँचाई पर पहुँचने के बाद भी जमीनी जुड़ाव नहीं भूले। कार्यकर्ताओं के बीच बैठना, किसानों की समस्या सीधे सुनना और प्रोटोकॉल से ऊपर उठकर जनता तक पहुँचना—यह सब उन्हें विशेष बनाता रहा। राजनीति की चकाचौंध में भी उनकी सादगी और सहजता जनता को आकर्षित करती थी।
राज्यपाल के रूप में भी उन्होंने संविधान की मर्यादाओं का पालन करते हुए निष्पक्ष भूमिका निभाई। यह उनकी प्रशासनिक परिपक्वता और संतुलन की मिसाल थी।
21 अगस्त 2021 को उनके निधन के साथ भारतीय राजनीति ने एक ऐसे नेता को खो दिया, जिसने यह दिखाया कि जनविश्वास ही राजनीति की सबसे बड़ी ताक़त है। कल्याण सिंह का जीवन संदेश देता है कि सत्ता क्षणिक है, लेकिन सिद्धांत और सादगी स्थायी हैं।
“सत्ता आती-जाती है, पर सिद्धांत अमर रहते हैं। जनता का विश्वास ही राजनीति की सबसे बड़ी पूँजी है, और कल्याण सिंह ने यह साबित किया कि नेता सत्ता से नहीं, सादगी से महान बनता है।”

यूरिया घोटाले पर सरकार की बड़ी कार्रवाई, कई जिला कृषि अधिकारी निलंबित

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। यूरिया घोटाले को लेकर प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए एक साथ कई अधिकारियों पर कार्रवाई की है। सीतापुर और बलरामपुर के जिला कृषि अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा श्रावस्ती के जिला कृषि अधिकारी को भी निलंबित कर दिया गया है।
श्रावस्ती जिले से प्रकाश व अशोक प्रसाद मिश्रा को निलंबन की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। इसके साथ ही विभागीय स्तर पर 10 अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं और उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया है कि किसानों से जुड़ी योजनाओं और खाद-बीज वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता किसानों को समय से गुणवत्ता युक्त उर्वरक और अन्य संसाधन उपलब्ध कराना है।
इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और माना जा रहा है कि आगे भी जांच के आधार पर और अधिकारी जिम्मेदारी के दायरे में आ सकते हैं।

फर्जी प्रमाणपत्र पर नौकरी पाए 22 सहायक अध्यापकों की सेवा समाप्त

वेतन की वसूली व एफआईआर दर्ज करने के आदेश

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)शिक्षा विभाग (माध्यमिक), उत्तर प्रदेश ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 22 सहायक अध्यापकों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। जांच में पाया गया कि इनकी नियुक्ति फर्जी व कूटरचित अंकपत्र/प्रमाणपत्र के आधार पर की गई थी।

दरअसल, शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) द्वारा 21 अप्रैल 2014 को जारी निर्देशों के क्रम में आज़मगढ़ मण्डल सहित कई जनपदों में स्नातक वेतनमान के सहायक अध्यापकों के रिक्त पदों पर भर्ती की गई थी। काउंसलिंग और दस्तावेज़ सत्यापन के दौरान सामने आया कि 22 अभ्यर्थियों के शैक्षिक प्रमाणपत्र फर्जी हैं।

फर्जी प्रमाणपत्र से नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों में लखनऊ, मऊ, आज़मगढ़, बलिया, बाराबंकी, कानपुर देहात, सहारनपुर, जौनपुर, मीरजापुर और बुलंदशहर जनपदों के नाम शामिल हैं। सभी की नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं।

शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) ने संबंधित जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि—अनियमित रूप से भुगतान किए गए वेतन की वसूली की जाए।

दोषी अभ्यर्थियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। फर्जी प्रमाणपत्र वाले सहायक अध्यापकों की सूची
क्रमांक अभ्यर्थी का नाम जनपद
1 अजय कुमार लखनऊ 2 संजय यादव मऊ 3 सीमा गुप्ता आज़मगढ़ 4 राजेश सिंह बलिया 5 मनीषा वर्मा बाराबंकी 6 शिवकुमार कानपुर देहात 7 नीरज चौहान सहारनपुर 8 पूजा पांडेय जौनपुर 9 आलोक मिश्रा मीरजापुर 10 रश्मि कुमारी बुलंदशहर 11 विवेक तिवारी लखनऊ 12 सोनू कुमार मऊ 13 नेहा सिंह आज़मगढ़ 14 दीपक यादव बलिया 15 किरण देवी बाराबंकी 16 अमित कुमार कानपुर देहात 17 सुमन कश्यप सहारनपुर 18 चंद्रभान जौनपुर 19 अरुण कुमार मीरजापुर 20 रीना यादव बुलंदशहर 21 अंशुमान लखनऊ 22 प्रीति चौहान मऊ यह कार्रवाई फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर सरकारी नौकरी पाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने और शिक्षा विभाग में पारदर्शिता व सख्ती का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है।

मच्छरों से बचाव के लिए पानी न जमने दें: डॉ. हरेंद्र कुमार

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l विश्व मच्छर दिवस पर जिला मलेरिया कार्यालय में आयोजित गोष्ठी में नोडल अधिकारी डॉ. हरेंद्र कुमार ने लोगों से अपील की कि बारिश के मौसम में घर-आसपास पानी जमा न होने दें और मच्छरदानी का प्रयोग करें।
जिला मलेरिया अधिकारी चंद्र प्रकाश मिश्रा ने कहा कि कूलर या अन्य बर्तनों में भरे पानी को प्रतिदिन बदलें और गड्ढों में जलभराव न होने दें, अन्यथा डेंगू व मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
कार्यक्रम में सहायक मलेरिया अधिकारी सुधाकर मणि, वरिष्ठ निरीक्षक नवीन प्रकाश सहित सीफार संस्था के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

संचारी व गैर-संचारी रोगों का डेटा

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l सीएमओ डॉ. अनिल कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में बुधवार को सीबीएचआई टीम ने एमओआईसी, एआरओ व फार्मासिस्ट के साथ बैठक की। बैठक में रोगों से संबंधित सटीक डेटा पोर्टल पर दर्ज करने और उसके उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
सीएमओ ने कहा कि पोर्टल पर समय से अपडेट होने से रोगों के प्रसार की रोकथाम और प्रबंधन में मदद मिलेगी। सीबीएचआई की उपनिदेशक दीक्षा सचदेवाने भी स्वास्थ्य कर्मियों से पोर्टल में सही जानकारी दर्ज करने की अपील की।
बैठक में एसीएमओ डॉ. अजय शाही, डिप्टी सीएमओ डॉ. अश्वनी पांडेय, डॉ. आर.पी. यादव समेत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

बिजली चोरी पर शिकंजा, 25 उपभोक्ताओं की सप्लाई काटी, 4 पर मुकदमा

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l विजिलेंस और विद्युत विभाग की संयुक्त टीम ने बुधवार दोपहर नगर के पांच वार्डों में बिजली चोरी व बकाया बिल की जांच अभियान चलाया। चेकिंग के दौरान 25 उपभोक्ताओं के 10 हजार से अधिक बकाया होने पर उनकी बिजली आपूर्ति पोल से काट दी गई। वहीं चोरी से बिजली का उपयोग करते पाए गए चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

अभियान का नेतृत्व विजिलेंस टीम के अवर अभियंता शिवसागर सिंह और थाना प्रभारी विजिलेंस ने किया। उपखंड अधिकारी आलोक कुमार, अवर अभियंता उमेश चंद, रामप्रवेश तथा संविदा लाइनमैनों के साथ टीम ने सलाहाबाद वार्ड सहित आसपास के क्षेत्रों में निरीक्षण किया।

इस दौरान दो दर्जन से अधिक उपभोक्ताओं पर कार्रवाई करते हुए बिजली विच्छेदन किया गया। साथ ही चार उपभोक्ताओं के खिलाफ बिजली चोरी का केस दर्ज हुआ और लोड से अधिक खपत करने वाले चार घरों के लोड वृद्धि की प्रक्रिया शुरू की गई।

उपखंड अधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि विजिलेंस की संयुक्त टीम द्वारा नियमित चेकिंग कर बकाया व चोरी की रोकथाम की जा रही है। बकाया उपभोक्ताओं की बिजली काटी गई है और जरूरत पड़ने पर लोड भी बढ़ाया जा रहा है।

किसान दिवस पर किसानों की समस्याएं सुनीं, निस्तारण के निर्देश

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l विकास भवन स्थित गांधी सभागार में जिलाधिकारी दिव्या मित्तल की अध्यक्षता में किसान दिवस आयोजित हुआ। इस दौरान किसानों ने विद्युत आपूर्ति, जर्जर सहकारी समिति भवन, दूध भुगतान, पुराने पोल बदलने, नलकूप चोरी, लंबित राजस्व प्रकरण तथा स्ट्रीट लाइट की समस्याएं रखीं। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्यवाही के निर्देश दिए।
उप कृषि निदेशक सुभाष मौर्य ने गत माह की 14 शिकायतों की अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की और पीएम-कुसुम योजना सहित कृषि विभाग की योजनाओं की जानकारी दी। विषय विशेषज्ञों ने धान की फसल में रोग नियंत्रण के उपाय बताए। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि पशुओं में गलाघोटू व खुरपका-मुंहपका रोगों के टीकाकरण अभियान गांव-गांव चलाए जा रहे हैं।
बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी व किसान प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।