मुरादाबाद (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) के कमिश्नर आईएएस आंजनेय सिंह को उनके मूल कैडर सिक्किम के लिए रिलीव कर दिया गया है। उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से छठा सेवा विस्तार नहीं मिल सका।आंजनेय सिंह ने उत्तर प्रदेश में प्रतिनियुक्ति पर रहते हुए करीब 11 वर्षों तक सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ निभाईं। अब वे अपने मूल कैडर सिक्किम वापस लौट रहे हैं।
सीएमएस गोमतीनगर एक्सटेंशन की तीन छात्र-छात्राएं लापता, पुलिस जांच में जुटी
लखनऊ(राष्ट्र की परम्परा ) राजधानी के प्रतिष्ठित सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (सीएमएस) गोमतीनगर एक्सटेंशन शाखा से कक्षा 10 की दो छात्राओं समेत तीन बच्चे अचानक लापता हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक, इन बच्चों का घर से निकलने के बाद अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।
परिजनों ने बच्चों की तलाश में जब सभी संभावित जगहों पर खोजबीन की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद घटना की सूचना पुलिस को दी गई। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
लापता बच्चों में दो छात्राएं और एक छात्र शामिल हैं। पुलिस ने बच्चों के मोबाइल लोकेशन, दोस्तों और परिचितों से भी पूछताछ शुरू की है। साथ ही आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि बच्चों की आखिरी लोकेशन का सुराग मिल सके।
परिवारजन बेहद चिंतित हैं और बच्चों की सकुशल बरामदगी की अपील कर रहे हैं। वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और बच्चों को जल्द से जल्द खोज निकालने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
यह मामला राजधानी के प्रतिष्ठित स्कूल से जुड़ा होने के कारण अभिभावकों में भी चिंता का माहौल है।
पूजा पाल प्रकरण पर स्वामी प्रसाद मौर्य का तीखा हमला, भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) बहुजन राजनीति के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा और सपा दोनों पर ही निशाना साधते हुए पूजा पाल प्रकरण को लेकर बड़ा बयान दिया है। मौर्य ने कहा कि भाजपा पूजा पाल को सिर्फ एक “हथियार” की तरह इस्तेमाल कर रही है और उनकी पार्टी की हमेशा से “यूज एंड थ्रो” (Use & Throw) की नीति रही है।
उन्होंने कहा— “भाजपा पूजा पाल का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन जब काम पूरा हो जाएगा तो उन्हें दूध में मक्खी की तरह निकालकर फेंक दिया जाएगा। भाजपा में पिछड़े वर्ग की हैसियत कभी भी गुलाम से ज्यादा नहीं रही।”
मौर्य ने यह भी याद दिलाया कि राज्यसभा चुनाव के दौरान पूजा पाल पर क्रॉस वोटिंग के आरोप लगे थे। इसी बिंदु पर उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा— “सपा ने पूजा पाल को पार्टी से निकालने में एक साल से ज्यादा का समय लगाया, यह पार्टी की बड़ी गलती थी। अखिलेश यादव पर पूजा पाल क्यों आरोप लगा रही हैं, इसका जवाब तो वही खुद बेहतर दे सकती हैं।”
स्वामी प्रसाद मौर्य के इन बयानों ने न केवल भाजपा बल्कि समाजवादी पार्टी के भीतर भी हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि भाजपा में शामिल होने के बाद पूजा पाल के इर्द-गिर्द सियासी बहस तेज हो गई है और विपक्षी दल इसे “सामाजिक न्याय” और “बैकवर्ड की उपेक्षा” से जोड़कर जनता के बीच भुनाने की कोशिश कर रहे हैं।
जहरीले सांप के काटने से मासूम की मौत

कैमूर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र के उदयरामपुर गांव में शनिवार को दर्दनाक हादसा हुआ। गांव के 3 वर्षीय सिमरन कुमार, पुत्र शिवधार राम, की जहरीले सांप के काटने से मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार, सिमरन घर के पलंग पर खेल रहा था, तभी पास में रखी ईंटों के बीच छिपे सांप ने उसके बाएं पैर के घुटने के पास काट लिया। बच्चे के चिल्लाने पर परिजन उसे तुरंत इलाज के लिए कल्याणपुर स्थित एक निजी क्लिनिक ले जाने निकले, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।
सूचना मिलते ही चैनपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भभुआ सदर अस्पताल भेज दिया। मृतक का पिता शिवधार राम मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
गांव वालों के अनुसार, बच्चे को काटने के बाद सांप भाग निकला। पुलिस ने पुष्टि की है कि मौत सांप के काटने से हुई है।
एसटीएफ से मुठभेड़: 1 लाख रुपये का इनामी बदमाश ढेर, हथियार बरामद

आजमगढ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष कार्यबल (एसटीएफ) ने आजमगढ़ के जहानागंज थाना क्षेत्र में शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए एक लाख रुपये का इनामी बदमाश शंकर कनौजिया को ढेर कर दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कनौजिया हत्या और डकैती के कई मामलों में वांछित था और उसका गिरोह राज्य में कई अपराधों में शामिल था।
अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था/एसटीएफ) अमिताभ यश ने बताया कि वाराणसी इकाई को गुप्त सूचना मिली थी कि कनौजिया अपने गिरोह के साथ किसी बड़ी वारदात की योजना बना रहा है। एसटीएफ की टीम ने उसे पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन कनौजिया ने टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया और अस्पताल ले जाने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया।
पुलिस ने घटनास्थल से बड़ी संख्या में हथियार और अन्य आपराधिक सामग्री बरामद की है। कनौजिया 2011 में दोहरीघाट इलाके में हुई डकैती के दौरान विंध्याचल पांडे की हत्या के बाद फरार हो गया था और तब से कई डकैती और हत्या के मामलों में संलिप्त रहा। इसके अलावा, जुलाई 2024 में उसने महाराजगंज निवासी शैलेंद्र सिंह का अपहरण कर हत्या कर दी थी। इस मामले में उसकी गिरफ्तारी पर 1 लाख रुपये का इनाम रखा गया था।
एसटीएफ की इस कार्रवाई को राज्य में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि राज्य में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और कानून का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
उत्तर प्रदेश की नगरपालिकाएं स्मार्ट सिटी की राह पर तेज़ी से बढ़ रही हैं

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को राजधानी लखनऊ में नगर विकास विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान प्रदेश की जिला मुख्यालय नगर पालिकाओं को तकनीकी रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और नागरिक-केंद्रित बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्मार्ट-विकसित नगर पालिका योजना को तेजी से लागू करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य नगरपालिकाओं को केवल साफ-सफाई तक सीमित न रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है, ताकि नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर मिल सके।
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत शामिल सुविधाओं में गौरव पथ का निर्माण, महिलाओं के लिए पिंक टॉयलेट, शहरी सुविधा केंद्र, स्मार्ट क्लासरूम, उन्नत आंगनबाड़ी, थीम पार्क, ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण, जलाशयों का पुनर्जीवन, ईवी चार्जिंग स्टेशन और ग्रीन क्रेमेटोरियम शामिल हैं।
इसके अलावा, वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट (ODOP) आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर, सामुदायिक केंद्र और उत्सव भवन जैसे ढांचे भी विकसित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी परियोजनाएं पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर तेजी से लागू होंगी और 74वें संविधान संशोधन के अनुसार नगर निकायों को वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार बढ़ाए जाएंगे। लखनऊ में शहीद चंद्रशेखर आज़ाद अंतरराष्ट्रीय शूटिंग रेंज और बहुउद्देश्यीय खेल परिसर के निर्माण के आदेश भी दिए गए हैं।
बैठक में यह भी बताया गया कि लखनऊ और कानपुर में 200 इलेक्ट्रिक बसें नेट कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मोड पर चलाई जाएंगी, जबकि अन्य शहरों में 650 बसों की प्रत्यक्ष खरीद की योजना है। मुख्यमंत्री ने चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।
नगर निकायों की जनसंख्या और कार्यकुशलता के आधार पर उन्हें ₹4 करोड़ से ₹10 करोड़ तक का अनुदान भी दिया जाएगा।
जखनिया CHC में विधायक और प्रभारी डॉक्टर के बीच औचक निरीक्षण के दौरान तीखी नोक-झोंक
गाज़ीपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)के जखनिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पर शनिवार को औचक निरीक्षण के दौरान विधायक बेदी राम और प्रभारी डॉक्टर जोगेंद्र यादव के बीच तीखी नोक-झोंक देखने को मिली।
सूत्रों के अनुसार, विधायक बेदी राम अस्पताल पहुंचे और मरीजों से मिलकर अस्पताल की सुविधाओं का जायजा लिया। अस्पताल की बदहाल स्थिति को देखकर उन्होंने प्रभारी डॉक्टर जोगेंद्र यादव से सवाल किया कि सरकारी अस्पताल में आवश्यक सुविधाओं का अभाव क्यों है।
इस पर प्रभारी डॉक्टर ने तैश में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे सरकार की मंशा के अनुरूप ही काम कर रहे हैं। जब विधायक ने अस्पताल की हालात पर गंभीरता जताते हुए कहा कि यह समाज की अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, तो डॉक्टर ने भी कहा, “मेरे नाम के आगे यादव टाइटल लगा है इसलिए आप ऐसा कह रहे हैं। मुझे नौकरी करने की कोई इच्छा नहीं है, इस्तीफा दे दूँगा और ऐसे कई विधायक देखे हैं।”
डॉक्टर की तीखी प्रतिक्रिया के बाद स्थानीय लोग बीच-बचाव करने की कोशिश करने लगे, लेकिन प्रभारी डॉक्टर ने उन्हें रोकते हुए जोर देकर बाहर चले गए।
विधायक बेदी राम ने कहा कि सरकार की नीतियों के अनुरूप काम करना जरूरी है, लेकिन अगर सरकारी सुविधाएं जनता तक नहीं पहुँच रही हैं तो इसका जवाब जिम्मेदार अधिकारियों को देना होगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में आधारभूत सुविधाओं की कमी लंबे समय से बनी हुई है और समय-समय पर अधिकारियों और नेताओं से शिकायत के बावजूद सुधार नहीं हुआ है।
यह घटना जखनिया क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और प्रशासनिक संवाद की चुनौतियों को उजागर करती है।
उत्तर प्रदेश में मानसून फिर सक्रिय, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

लखनऊ(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है, जिसके चलते प्रदेशभर में मौसम ने करवट ले ली है। मौसम विभाग ने आगामी 25 अगस्त तक रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना जताई है। कहीं हल्की तो कहीं मध्यम और भारी बारिश देखने को मिल सकती है।
कई जिलों में हुई झमाझम बारिश शुक्रवार को प्रदेश के दक्षिणी, पूर्वी और तराई क्षेत्रों में अलग-अलग स्तर की बारिश दर्ज की गई।
जौनपुर में सबसे अधिक 80 मिमी बारिश हुई।
लखीमपुर खीरी और महराजगंज में 70 मिमी बारिश दर्ज की गई।अन्य जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिली।
येलो अलर्ट जारी ,मौसम विभाग ने आज के लिए प्रदेश के 24 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी देते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। इनमें प्रमुख रूप से –
प्रयागराज, सोनभद्र, वाराणसी, आगरा समेत अन्य जिले शामिल हैं।
बिजली गिरने का खतरा
प्रदेश के 59 जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और खुले मैदानों या पेड़ों के नीचे खड़े न होने की अपील की है।
किसानों और आम जनता के लिए राहत
मानसून के दोबारा सक्रिय होने से किसानों को राहत मिलने की संभावना है। धान, गन्ना और सब्जियों की फसलों को बारिश का सीधा फायदा होगा। वहीं गर्मी और उमस से जूझ रही आम जनता को भी ठंडक का अहसास होने लगा है।
उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा संघ के सम्मेलन में बोले सीएम योगी – “न्याय को त्वरित और सुलभ बनाना ही सुशासन की कुंजी”

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को राजधानी में आयोजित उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा संघ के 42वें सम्मेलन में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यदि देश को सुशासन का लक्ष्य प्राप्त करना है तो न्याय प्रणाली को त्वरित और सुलभ बनाना होगा।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह गर्व की बात है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय न केवल न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या के मामले में देश का सबसे बड़ा उच्च न्यायालय है, बल्कि सभी उच्च न्यायालयों में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या भी सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा संघ ने अपने 102 वर्षों के इतिहास में अनेक उपलब्धियाँ हासिल की हैं और यह संगठन राज्य की न्यायिक व्यवस्था की मजबूती का प्रतीक है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा—
“यहाँ उपस्थित न्यायिक अधिकारी एकता, आपसी सहयोग और व्यावसायिक दक्षता के प्रमाण हैं। मैं इस अवसर पर आप सभी का हार्दिक अभिनंदन करता हूँ। यह गर्व की बात है कि देश का सबसे बड़ा उच्च न्यायालय हमारे राज्य में स्थित है।”
मुख्यमंत्री ने इस दौरान यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश एक विकसित भारत के संकल्प की ओर अग्रसर है और इसमें न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि यदि जिला स्तर पर विकास होगा तो वह राज्य के विकास में योगदान देगा और एक विकसित उत्तर प्रदेश ही विकसित भारत की नींव बनेगा।
न्यायिक सेवा संघ को 50 करोड़ की निधि इस मौके पर मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा संघ को 50 करोड़ रुपये की निधि प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह निधि न्यायिक अधिकारियों के कल्याण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में सहायक सिद्ध होगी।
कल्याण सिंह को दी श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि गुरुवार को उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की थी। उन्होंने कहा कि बाबूजी (कल्याण सिंह) ने अपने छोटे से कार्यकाल में दिखाया कि कैसे सुशासन और कानून का राज स्थापित किया जा सकता है।
सीएम योगी ने कहा—
“1977 में स्वास्थ्य मंत्री के रूप में और 1990 में मुख्यमंत्री के रूप में बाबूजी ने साबित किया कि विरासत और विकास साथ-साथ चल सकते हैं। उनका जीवन सुशासन की एक प्रेरक गाथा है।”
सीएम योगी का यह बयान न केवल न्यायिक प्रणाली के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि प्रदेश के समग्र विकास में न्यायपालिका की भूमिका को भी केंद्र में रखता है। उनके अनुसार, त्वरित और सुलभ न्याय ही सुशासन की सच्ची आधारशिला है।
धर्मस्थल विवाद : शिकायतकर्ता गिरफ़्तार, सियासी घमासान तेज़

धर्मस्थल (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) – कर्नाटक के मंदिरों के शहर धर्मस्थल में कथित हत्याओं, बलात्कारों और शवों को ठिकाने लगाने के आरोप लगाने वाली शिकायतकर्ता को विशेष जाँच दल (एसआईटी) ने गिरफ़्तार कर लिया है। यह कार्रवाई एसआईटी प्रमुख प्रणब मोहंती द्वारा की गई पूछताछ और उसके बयानों व दस्तावेज़ों में विसंगतियाँ सामने आने के बाद की गई।
कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इस घटनाक्रम की सराहना की और कहा कि, “मुझे शुरू से ही भरोसा था। धार्मिक नेताओं ने भी जाँच का स्वागत किया है। जिसने ग़लत किया है उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए। मैं किसी एक के पक्ष में नहीं हूँ; मैं न्याय और धर्म के पक्ष में हूँ। धर्म में राजनीति नहीं होनी चाहिए।”
कैसे शुरू हुआ विवाद यह विवाद तब सामने आया जब एक मुखबिर ने दावा किया कि वह 1995 से 2014 तक धर्मस्थल में कार्यरत रहा। उसके अनुसार, उसे महिलाओं और नाबालिगों के शवों को दफनाने या दाह संस्कार करने के लिए मजबूर किया गया था। शिकायत में कहा गया कि कई शवों पर यौन उत्पीड़न के निशान मौजूद थे।
शिकायतकर्ता ने 15 संभावित स्थलों की पहचान की थी, जहाँ कथित रूप से शवों को ठिकाने लगाया गया। इसके बाद एसआईटी का गठन कर खुदाई और निरीक्षण कराया गया। हालाँकि, अब तक ठोस साक्ष्य न मिलने पर एसआईटी ने शिकायतकर्ता को हिरासत में ले लिया।
राजनीतिक तूफ़ान भाजपा ने इस पूरे प्रकरण को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा कि, “धर्मस्थल को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश रची गई है। इससे लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुँची है।”
उन्होंने घोषणा की कि भाजपा शुक्रवार से ‘धर्म युद्ध’ नामक राज्यव्यापी आंदोलन की शुरुआत करेगी, जो अगले सप्ताह तक सभी विधानसभा क्षेत्रों में चलेगा। विजयेंद्र ने सोशल मीडिया पर फैले आरोपों और अभियानों को “श्रद्धालुओं की आस्था पर हमला” करार दिया।
आगे क्या? धर्मस्थल प्रकरण ने एक ओर जहाँ धार्मिक और सामाजिक हलकों में चिंता पैदा की है, वहीं राजनीतिक दल इसे अपने-अपने तरीके से भुनाने में जुट गए हैं। एसआईटी की जाँच अभी जारी है और सरकार ने संकेत दिया है कि “किसी भी निर्दोष के साथ अन्याय नहीं होगा, लेकिन दोषियों को बख्शा भी नहीं जाएगा।”
महिलाओं के अखण्ड सौभाग्य व वैवाहिक जीवन में सुख समृद्धि का पर्व है हरितालिका तीज – आचार्य अजय शुक्ल

26 अगस्त को है हरितालिका तीज महिलाएं रहेंगी निर्जला व्रत
सलेमपुर, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। मां पार्वती जी व भगवान भोलेनाथ को समर्पित पर्व हरितालिका तीज व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष के तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस बार यह व्रत 26 अगस्त को मनाया जाएगा। उक्त बातें बताते हुए आचार्य अजय शुक्ल ने कहा कि तृतीया तिथि का प्रारंभ 25 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट पर हो रहा है तिथि का समापन 26 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 54 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार यह पर्व 26 अगस्त दिन मंगलवार को रहा जाएगा। इस बार इस तिथि पर कुछ खास संयोग भी बन रहा है।अंगारकी चतुर्थी व विनायक चतुर्थी का शुभ संयोग बन रहा है।इस दिन चंद्रमा कन्या राशि में मंगल के साथ धन योग के साथ हस्त नक्षत्र का भी संयोग बन रहा है। इस व्रत को मनाने की कथा बताते हुए आचार्य अजय शुक्ल ने कहा कि एक बार देवी पार्वती जी ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की।उनके पिता राजा हिमाचल ने उनका विवाह भगवान विष्णु से तय कर दिया।पार्वती जी यह विवाह नही करना चाहती थी,इसलिए उन्होंने अपने सखियों के साथ जंगल में जाकर शिवजी की आराधना करने लगी।उन्होंने भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष के तृतीया तिथि को हस्त नक्षत्र में रेत से शिवलिंग बनाया और विधिविधान से पूजा अर्चना किया।उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न हो कर शिवजी ने उन्हें दर्शन दिया और मनोकामना मांगने को कहा तो पार्वती जी ने उनसे पति के रूप में स्वीकार करने को कहा तो भगवान शिव ने उन्हें तथास्तु कह कर आशीर्वाद दिया। इस प्रकार देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से महिलाओं को अखण्ड सौभाग्य के साथ ही सुख समृद्धि का फल प्राप्त होता है।
झूठे मुकदमों का कारोबार और वकीलों की जवाबदेही
“जब न्याय के प्रहरी ही अपराधी बन जाएँ, तो कानून की आस्था कैसे बचे?”
झूठे मुकदमे केवल निर्दोषों को पीड़ा नहीं देते, बल्कि न्याय तंत्र की नींव को भी हिला देते हैं। जब वकील ही इस व्यापार में शामिल होते हैं तो वकालत की गरिमा और न्यायपालिका की विश्वसनीयता दोनों पर गहरा आघात होता है। ऐसे वकीलों पर आपराधिक मुकदमे चलना अनिवार्य है ताकि कानून का दुरुपयोग रोका जा सके। न्याय केवल किताबों में दर्ज प्रावधान नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था है। यह आस्था तभी बची रहेगी जब न्याय के प्रहरी – वकील और अदालत – स्वयं अपने आचरण से पारदर्शिता और ईमानदारी का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे।
भारतीय न्याय व्यवस्था की नींव सत्य और न्याय पर आधारित है। न्यायालय को हमेशा से समाज का सबसे बड़ा सहारा माना जाता रहा है। जब अन्याय पीड़ित व्यक्ति हर दरवाज़े पर ठोकर खाकर थक जाता है, तब उसे अदालत से ही उम्मीद रहती है। लेकिन यह उम्मीद तब कमजोर पड़ जाती है जब न्याय का सहारा बनने वाले लोग ही उसे अपने स्वार्थ और लालच का साधन बना लेते हैं। हाल ही में लखनऊ की अदालत ने एक वकील परमानंद गुप्ता को 29 झूठे मुकदमे दर्ज कराने के अपराध में उम्रकैद और पाँच लाख रुपये के जुर्माने की सज़ा सुनाई। यह फैसला एक उदाहरण है कि न्यायपालिका कानून का दुरुपयोग करने वालों को बख्शेगी नहीं। यह केवल एक व्यक्ति की सजा नहीं है, बल्कि पूरे समाज और न्यायिक व्यवस्था के लिए चेतावनी है कि कानून का मज़ाक उड़ाने वालों की कोई जगह नहीं।
वकील पेशे को समाज में हमेशा सम्मानित दृष्टि से देखा जाता है। वकील को केवल मुवक्किल का प्रतिनिधि नहीं, बल्कि न्यायालय का अधिकारी भी माना जाता है। उससे अपेक्षा की जाती है कि वह सत्य और न्याय के लिए संघर्ष करेगा। लेकिन जब वही वकील झूठे मुकदमों का निर्माण करने लगे, निर्दोषों को फँसाने लगे, और अपने पेशे का इस्तेमाल व्यक्तिगत दुश्मनी या आर्थिक लाभ के लिए करने लगे, तो यह न केवल उसकी आचार संहिता का उल्लंघन है बल्कि पूरे पेशे की गरिमा पर भी प्रश्नचिह्न है। एक वकील जो अदालत में सत्य का पक्षधर होना चाहिए, अगर असत्य का सबसे बड़ा हथियार बन जाए तो समाज में न्याय की कोई गारंटी नहीं रह जाती।
झूठे मुकदमों का असर केवल आरोपित व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। यह उसके परिवार, उसकी सामाजिक स्थिति और उसकी आर्थिक स्थिति तक को झकझोर देता है। वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, बेगुनाही साबित करने के लिए सबूत जुटाने पड़ते हैं और मानसिक यातना अलग से झेलनी पड़ती है। समाज भी ऐसे व्यक्ति को संदेह की दृष्टि से देखने लगता है। इससे उसका आत्मविश्वास टूट जाता है और धीरे-धीरे कानून और अदालत पर से विश्वास उठने लगता है। यही सबसे बड़ा नुकसान है, क्योंकि न्याय पर से भरोसा खत्म होना किसी भी समाज के लिए सबसे खतरनाक स्थिति है।
झूठे मुकदमों की समस्या यह भी है कि यह असली पीड़ितों के मामलों को कमजोर करती है। जब कोई कानून, जैसे एससी-एसटी एक्ट, जिसका उद्देश्य कमजोर वर्गों की सुरक्षा करना है, झूठे मुकदमों में इस्तेमाल किया जाता है तो वास्तविक पीड़ितों की आवाज़ दब जाती है। अदालतों को यह तय करने में अधिक समय लग जाता है कि कौन-सा मामला सच है और कौन-सा झूठा। नतीजा यह होता है कि असली पीड़ितों को न्याय मिलने में देर होती है और उनका दर्द बढ़ जाता है।
इसलिए आज आवश्यकता है कि झूठे मुकदमे गढ़ने वाले और उन्हें अदालत में आगे बढ़ाने वाले वकीलों पर कठोरतम कार्रवाई हो। यदि कोई डॉक्टर लापरवाही करता है, तो उस पर केस चलता है। यदि कोई इंजीनियर खराब निर्माण करता है तो उसे दंडित किया जाता है। तो फिर वकील, जो न्याय के प्रहरी हैं, यदि झूठे मुकदमों का व्यापार करें, तो उन्हें भी आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और न्याय में बाधा डालने जैसी धाराओं में दंडित किया जाना चाहिए। उनकी प्रैक्टिस पर रोक लगनी चाहिए और बार काउंसिल को उनके लाइसेंस रद्द करने चाहिए।
यह केवल कानून की सख्ती का मामला नहीं है, बल्कि वकालत के पेशे की मर्यादा का प्रश्न है। जब तक झूठे मुकदमों के निर्माण और संचालन में शामिल वकीलों पर मुकदमे नहीं चलेंगे, तब तक यह कुप्रथा बंद नहीं होगी। अदालतें जितनी कठोर सज़ा देंगी, उतना ही यह संदेश समाज में जाएगा कि कानून का दुरुपयोग करने वालों की कोई जगह नहीं।
न्याय व्यवस्था को बचाने के लिए आवश्यक है कि कानून में ऐसे प्रावधान हों जिससे झूठे मुकदमों की पहचान होने पर तुरंत कार्रवाई हो। वकीलों की जवाबदेही तय करनी होगी। अगर यह साबित हो कि किसी वकील ने जानबूझकर मुवक्किल को झूठे मुकदमे के लिए उकसाया, तो उस पर केवल पेशेवर कार्रवाई न हो बल्कि आपराधिक मुकदमा भी दर्ज हो। इस कदम से न केवल निर्दोष लोगों की रक्षा होगी बल्कि वकालत का पेशा भी अपने वास्तविक उद्देश्य – न्याय की सेवा – के लिए जाना जाएगा।
आज लखनऊ की अदालत का फैसला पूरे देश के लिए मिसाल है। इसने साबित किया है कि न्यायालय केवल आरोपी और अपराधी के बीच निर्णय करने वाला संस्थान नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की पवित्रता को भी सुरक्षित रखने वाला प्रहरी है। यदि वकील अपने कर्तव्य से भटकेंगे, तो वे भी अपराधी की श्रेणी में आएँगे और उन्हें उसी प्रकार दंड मिलेगा जैसे अन्य अपराधियों को मिलता है।
अब समय आ गया है कि समाज और न्यायपालिका दोनों मिलकर वकालत के पेशे को अपराध का साधन बनने से बचाएँ। बार काउंसिल ऑफ इंडिया को चाहिए कि वह वकीलों के लिए कठोर आचार संहिता लागू करे और झूठे मुकदमों में लिप्त पाए जाने पर तत्काल लाइसेंस रद्द करे। अदालतों को चाहिए कि वे ऐसे मामलों की सुनवाई तेज़ी से पूरी करें ताकि न्याय केवल होता हुआ नज़र ही न आए बल्कि सही समय पर मिले भी।
वकीलों को भी आत्ममंथन करना होगा। उन्हें यह समझना होगा कि उनका पहला कर्तव्य केवल मुवक्किल की जीत नहीं बल्कि न्याय की जीत है। यदि इस सोच को अपनाया जाए तो न्यायालय में पेश होने वाला हर वकील समाज की नज़रों में वास्तविक प्रहरी होगा, न कि अपराध का भागीदार। न्याय केवल कागज़ों पर लिखा शब्द नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था है। और यह आस्था तभी बनी रहेगी जब न्याय के रक्षक भी पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी से अपने कर्तव्य का पालन करेंगे।
झूठे मुकदमों से केवल अदालतों का बोझ नहीं बढ़ता बल्कि समाज का विश्वास भी टूटता है। निर्दोष लोग जब सालों तक जेलों में सड़ते हैं, तब उनके परिवार बर्बाद हो जाते हैं। उनकी मासूम ज़िंदगियाँ खत्म हो जाती हैं। ऐसे समय में अदालतों से सख्त और स्पष्ट संदेश मिलना ही समाज को यह विश्वास दिलाता है कि न्याय जीवित है और उसकी रक्षा की जा रही है।
लखनऊ का फैसला इस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह न केवल एक अपराधी वकील को दंडित करने का मामला है बल्कि पूरे देश को यह चेतावनी है कि झूठे मुकदमे गढ़ने और चलाने वालों के लिए अब जगह नहीं बची है। यह संदेश हर उस वकील को याद दिलाना चाहिए जो कभी भी असत्य के रास्ते पर जाने का प्रयास करेगा। कानून और अदालत किसी के भी दबाव या छलावे में नहीं आने वाले।
इसलिए ज़रूरी है कि इस फैसले को समाज एक आदर्श की तरह देखे और इसे पूरे देश में लागू करने की कोशिश की जाए। वकीलों को भी चाहिए कि वे इस घटना से सीख लें और यह संकल्प लें कि वे अपने पेशे की गरिमा को कभी धूमिल नहीं होने देंगे। तभी न्याय वास्तव में न्याय कहलाएगा और अदालतें आम आदमी के लिए भरोसे का सबसे बड़ा आधार बन सकेंगी।
डॉ प्रियंका सौरभ
एशिया कप हॉकी 2025: जीत के इरादे से राजगीर पहुँची मलेशियाई टीम

राजगीर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)एशिया कप हॉकी 2025 का आगाज़ बिहार के ऐतिहासिक शहर राजगीर में होने जा रहा है। शनिवार सुबह टूर्नामेंट में हिस्सा लेने आई मलेशियाई टीम यहां पहुंची। पिछली बार जकार्ता में हुए रोमांचक फाइनल मुकाबले में मलेशिया को कोरिया के हाथों 1-2 से हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन इस बार टीम के कप्तान मरहान जलील ने साफ कर दिया है कि उनकी टीम जीत के इरादे से मैदान में उतरेगी।
राजगीर पहुँचने के बाद कप्तान जलील ने कहा – “राजगीर आकर बेहद उत्साहित हूं। हमारी तैयारियां बेहतरीन रही हैं और हम इस टूर्नामेंट से शानदार नतीजों की उम्मीद कर रहे हैं। मेजबान भारत को हराना आसान नहीं होगा क्योंकि उन्होंने प्रो लीग में कई शीर्ष टीमों के साथ खेला है और उनके पास बेहतरीन अनुभव और इंटरनेशनल हॉकी का एक्सपोजर है।”
उन्होंने आगे मौजूदा चैंपियन कोरिया को लेकर भी अपनी राय रखी। जलील ने कहा – “कोरिया भी इस टूर्नामेंट में देखने योग्य टीम होगी। हम इस साल उनके खिलाफ खेल चुके हैं और वे बेहद फिट और तेज नजर आते हैं। हमारी प्राथमिकता सुपर-4 में जगह बनाने की होगी और उसके बाद खिताब जीतने पर फोकस करेंगे।”
हॉकी एशिया कप 2025 में भारत, कोरिया, मलेशिया समेत कई एशियाई दिग्गज टीमें मैदान में उतरेंगी। राजगीर के अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में होने वाला यह टूर्नामेंट न केवल खिलाड़ियों की परीक्षा लेगा बल्कि दर्शकों को भी रोमांचक मुकाबलों का तोहफ़ा देगा।
मलेशिया की एंट्री के साथ ही टूर्नामेंट का रोमांच और बढ़ गया है। अब देखना होगा कि क्या पिछली हार का बदला लेकर मलेशियाई टीम इस बार खिताब अपने नाम कर पाती है या नहीं।
भारत बनाएगा अपना अंतरिक्ष स्टेशन : प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर राष्ट्र के नाम संबोधन में भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं की नई दिशा तय की। उन्होंने घोषणा की कि भारत आने वाले वर्षों में अपना स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन बनाएगा। इस दौरान उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के हालिया मिशन की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि अब देश अंतरिक्ष यात्री पूल भी तैयार करेगा, ताकि भविष्य के अभियानों के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञ उपलब्ध रह सकें।
प्रधानमंत्री ने युवाओं से इस पहल में जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत आज सेमी-क्रायोजेनिक इंजन और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में तेज़ी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि वैज्ञानिकों की अथक मेहनत से भारत जल्द ही गगनयान मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करेगा और आगे चलकर अंतरिक्ष स्टेशन भी स्थापित करेगा।
मोदी ने कहा, “मैंने लाल किले से कहा था कि हमारा रास्ता रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म का है। बीते 11 वर्षों में देश ने स्पेस सेक्टर में एक के बाद एक बड़े सुधार किए हैं। आज स्पेस-टेक भारत में गवर्नेंस का भी अहम हिस्सा बन चुकी है।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि आज उपग्रह आधारित आकलन से फसल बीमा योजना किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुँच रही है। मछुआरों को समुद्र में सुरक्षा और मौसम संबंधी जानकारी उपग्रह से मिल रही है। आपदा प्रबंधन, पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान में भू-स्थानिक डेटा का इस्तेमाल—ये सब स्पेस तकनीक की उपलब्धियाँ हैं, जो सीधे सामान्य नागरिकों के जीवन को आसान बना रही हैं।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर वैज्ञानिकों की मेहनत और समर्पण की सराहना की और कहा कि भारत अब केवल उपग्रह प्रक्षेपण तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में एक अहम भूमिका निभा रहा है।
लखनऊ में आवारा कुत्तों के लिए बनेगा आहार स्थल, नियम तोड़ने पर लगेगा भारी जुर्माना

लखनऊ(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) राजधानी में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और लगातार हो रही घटनाओं पर अब नगर निगम ने बड़ा कदम उठाया है। नगर निगम की ओर से शहर में अलग-अलग स्थानों पर आवारा कुत्तों के लिए आहार स्थल (फीडिंग सेंटर) बनाए जाएंगे। इन केंद्रों की स्थापना आवासीय समितियों और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से की जाएगी, ताकि कुत्तों को नियमित रूप से भोजन मिल सके और वे रिहायशी इलाकों में कम भटकें।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, काटने वाले आक्रामक कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में रखा जाएगा, जबकि बाकी आवारा कुत्तों की नसबंदी कर उन्हें उनके मूल क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा। इस व्यवस्था से कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण के साथ-साथ शहर में डॉग-बाइट की घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
नगर निगम ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सख्त नियम भी बनाए हैं।
यदि कोई NGO या संस्था इन नियमों के पालन में बाधा डालती है, तो उस पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
वहीं, सामान्य नागरिकों द्वारा नियम तोड़ने पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भरना होगा।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह कदम न केवल शहर में स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता का भी उदाहरण बनेगा।
