राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया शोक, जारी हैं राहत कार्य
कटरा/नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) माता वैष्णो देवी मंदिर के दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं के लिए बुधवार का दिन बेहद दुखद साबित हुआ। कटरा से मंदिर की ओर जाने वाले तीर्थ मार्ग पर अचानक हुए भूस्खलन में कई श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस दर्दनाक हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, “माता वैष्णो देवी मंदिर के तीर्थयात्रा मार्ग पर भूस्खलन में कई श्रद्धालुओं की मृत्यु की दुखद घटना अत्यंत पीड़ादायक है। मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूँ और राहत एवं बचाव कार्यों की सफलता के लिए प्रार्थना करती हूँ।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि इस हृदयविदारक हादसे ने सभी को गहरे शोक में डाल दिया है। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्थानीय प्रशासन को हर संभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन के अनुसार, घटनास्थल पर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और स्थानीय पुलिस टीम राहत कार्यों में जुटी हुई हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
माता वैष्णो देवी मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इस तरह की घटना ने तीर्थयात्रा पर आए श्रद्धालुओं को गहरे सदमे में डाल दिया है। प्रशासन ने मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए यात्रियों से सावधानी बरतने और यात्रा से पहले आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सड़क हादसों में लगातार बढ़ती मौतों और गंभीर चोटों को रोकने के उद्देश्य से योगी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्यभर में 1 से 30 सितंबर तक “हेलमेट नहीं तो ईंधन नहीं” नामक विशेष सड़क सुरक्षा अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट लगाए आए दोपहिया वाहन चालकों को ईंधन नहीं मिलेगा।
सरकार का कहना है कि इस पहल का मकसद दंड लगाना नहीं, बल्कि नागरिकों को मोटर वाहन अधिनियम के नियमों का पालन करने और सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना है। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 129 के तहत दोपहिया वाहन चालक और पीछे बैठे व्यक्ति दोनों के लिए हेलमेट अनिवार्य है, जबकि धारा 194D इसका उल्लंघन करने वालों के लिए दंड का प्रावधान करती है।
अभियान के संचालन की जिम्मेदारी जिलाधिकारियों को दी गई है। इसमें पुलिस, परिवहन विभाग, राजस्व और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से काम करेंगे। वहीं, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग पेट्रोल पंपों पर निगरानी और समन्वय करेगा। इसके साथ ही सूचना एवं जनसंपर्क विभाग जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाएगा।
सर्वोच्च न्यायालय की सड़क सुरक्षा समिति ने भी राज्यों को हेलमेट नियम को सख्ती से लागू करने की सलाह दी थी। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार ने यह ठोस कदम उठाया है। योगी सरकार का मानना है कि “हेलमेट नहीं, तो ईंधन नहीं” कोई सज़ा नहीं, बल्कि सुरक्षा का संकल्प है।
सरकार ने जनता, पेट्रोल पंप संचालकों और तेल कंपनियों से इस अभियान में पूरा सहयोग करने की अपील की है। यदि यह पहल सफल होती है तो यह सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगी।
नालंदा (राष्ट्र की परम्परा) ज़िले में बुधवार को ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार और हिलसा विधायक कृष्ण मुरारी पर गुस्साए ग्रामीणों ने हमला कर दिया। यह घटना उस समय हुई जब दोनों नेता दनियावां प्रखंड के एक गाँव में शनिवार को हुए सड़क हादसे के पीड़ित परिवारों से मिलने पहुँचे थे। हादसे में ट्रक की चपेट में आने से ऑटो में सवार नौ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
मंत्री और विधायक गाँव पहुँचकर मृतकों के परिजनों से लगभग आधे घंटे तक मुलाकात करते रहे। इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया। लेकिन जब वे गाँव से लौटने लगे तो ग्रामीणों ने मुआवज़े और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर हंगामा करना शुरू कर दिया। देखते-देखते स्थिति बिगड़ गई और ग्रामीणों ने लाठियों से हमला कर दिया।
ग्रामीणों के गुस्से का आलम यह था कि मंत्री और विधायक को जान बचाने के लिए करीब एक किलोमीटर तक भागना पड़ा। हमले में उनके अंगरक्षक और कुछ अन्य लोग घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया है। बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर तैनात कर दिया गया है और स्थिति को नियंत्रण में रखने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि हादसे के बाद प्रशासन ने समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिसके कारण नौ लोगों की जान गई। साथ ही उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसी घटनाओं में मुआवज़े का वादा किया गया था, लेकिन कई प्रभावित परिवारों को मदद नहीं मिली।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है और ग्रामीणों को शांत करने की कोशिशें जारी हैं।
पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)गर्दनीबाग थाना क्षेत्र के चितकोहरा स्थित कन्या मध्य विद्यालय अमलटोला में बुधवार को एक कक्षा 5 की नाबालिग छात्रा ने स्कूल परिसर के बाथरूम में खुद को आग के हवाले कर लिया। घटना के बाद अफरा-तफरी मच गई। तुरंत शिक्षकों और आसपास के लोगों की मदद से छात्रा को गंभीर हालत में पीएमसीएच अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।
परिजनों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने स्कूल में हंगामा किया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में लिया।
इस दौरान भीड़ और पुलिस के बीच कहासुनी हुई और धक्का-मुक्की की नौबत आ गई। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें लोगों और पुलिसकर्मी के बीच विवाद दिखाई दे रहा है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। उधर, छात्रा की गंभीर हालत को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने उसे विशेष निगरानी में रखा है।
मुजफ्फरपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क), बिहार कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को मुजफ्फरपुर में चल रही वोटर अधिकार यात्रा के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब समझ चुकी है कि भाजपा चुनावों में “वोट चोरी” कर लोकतंत्र को कमजोर कर रही है।
राहुल गांधी ने कहा – “बीजेपी की वोट चोरी की सच्चाई अब देश के सामने आ चुकी है। यही वजह है कि अमित शाह जैसे नेता बार-बार कहते हैं कि भाजपा सरकार 40-50 साल तक चलेगी। अगर निष्पक्ष तरीके से चुनाव हो और जनता का वोट सुरक्षित रहे, तो भाजपा सत्ता में दोबारा लौट ही नहीं सकती।”
कांग्रेस नेता ने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग की निष्पक्षता संदिग्ध होती जा रही है। उन्होंने मांग की कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए आयोग को राजनीतिक दबाव से मुक्त होना होगा और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करना होगा।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्या का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों से आम जनता त्रस्त है, जबकि विपक्ष जनता की असली आवाज उठाने का काम कर रहा है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वोटर अधिकार यात्रा का मकसद जनता को जागरूक करना और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए माहौल तैयार करना है।
बघौचघाट,देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) विकासखंड पथरदेवा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत मेदीपट्टी में प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी भगवान श्रीकृष्ण की बरही महोत्सव पर प्राचीन ठाकुर जी मंदिर एवम श्रीकृष्ण की झांकी भव्य एवं आकर्षक रूप से सजाई गई।ग्रामीणों के सहयोग एवं मंदिर समिति ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के बारहवें दिन मंगलवार शाम से बुधवार तक 24 घंटे अखंड कीर्तन का आयोजन कर श्रद्धा और उत्साह के साथ भगवान श्रीकृष्ण की बरही महोत्सव धूमधाम व हर्षोल्लास पूर्वक मनाई गई।विविध धार्मिक अनुष्ठान के साथ आयोजित भंडारे में बड़ी संख्या में लोगों ने महाप्रसाद ग्रहण किया।इस दौरान अखंड हरि कीर्तन के आयोजन के साथ ही श्रीकृष्ण की भव्य झांकी सजाई गई।जिसमे देवरिया समेत बिहार के गोपालगंज की टीम ने हरे राम,हरे कृष्ण महामंत्र का जाप किया।जिससे क्षेत्र का पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।वही स्थानीय लोक गायक की टीम ने शानदार भजनों की प्रस्तुति दी।इसी क्रम में मंदिर परिसर में भजन,सोहर और रात्रि जागरण का भी आयोजन हुआ।जहां श्रद्धालु भजनों पर जमकर झूमे।अखंड हरिकीर्तन के पूर्णाहुति के उपरांत महाप्रसाद एवं भंडारे का आयोजन किया गया। जहां बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।पूजा मंत्र उच्चारण पं अंजनी पांडेय ने किया।इस दौरान मंदिर के पुजारी बृजेश पांडे ने बताया कि यह परंपरा पूर्वजों के समय से चली आ रही है।जिसे संपूर्ण ग्रामवासी आपसी भाईचारे के साथ मिलजुलकर मानते हैं।इस अवसर पर समस्त ग्रामवासी समेत क्षेत्रीय श्रद्धालु गण मौजूद रहे।
भाटपार रानी/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) स्थानीय तहसील क्षेत्र के बनकटा विकास खण्ड क्षेत्र के ग्राम कुटिया भर थाना क्षेत्र बनकटा निवासी बीरबल गोंड द्वारा खुद की पिटाई तहसील परिसर में ही दैनिक कार्य करने वाले अधिवक्ताओं द्वारा किए जाने के आरोप लगाए हैं। वहीं बताते चलें कि इनकी पिटाई करते हुए तहसील भाटपार रानी के परिसर में कुछ अधिवक्ताओं के वायरल फोटो बीडीओ चर्चा में आ गए हैं। पीड़ित का आरोप है कि फरियादी से घुस के नाम पर कुछ पैसे लेकर उसके बाद से भी काम नहीं कराए जाने के बाद खुद का काम नहीं होता देख कर फिर से आवाज उठाने एवं पैसे वापस करने की बात पर कुछ वकीलों ने मिल जुल कर मार पिटाई पीड़ित के साथ किए हैं। वहीं पीड़ित दलित बताए जा रहे हैं। फिलहाल यह जांच का विषय है कि पीड़ित के इन आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल वायरल बीडीओ भाटपार रानी तहसील परिसर में पिटाई का बताया जा रहा है।
त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन 2025-26 के निर्वाचक नामावली वृहद पुनरीक्षण कार्यक्रम बुधवार को तहसील स्तर पर समीक्षा बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता उप जिलाधिकारी/सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी सुनील कुमार ने की।बैठक में खण्ड विकास अधिकारी, खण्ड शिक्षा अधिकारी सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान बीएलओ/सुपरवाइजर की नियुक्ति, ई-बीएलओ ऐप पर उपस्थिति तथा पुनरीक्षण कार्यों की प्रगति पर चर्चा की गई।एसडीएम ने निर्देश दिये कि सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र के बीएलओ से निरंतर संपर्क में रहें और उनके कार्यों की समीक्षा करें। प्रत्येक बीएलओ को ई-बीएलओ ऐप पर सक्रिय रहते हुए मतदान केन्द्र से उपस्थिति सहित सेल्फी अपलोड करना सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने बताया कि लगभग 40 बीएलओ अभी ऐप पर सक्रिय नहीं हैं। सभी को तत्काल सक्रिय होकर पुनरीक्षण कार्य पूरी ईमानदारी, निष्पक्षता और समयबद्धता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए
उद्योग व्यापार मंडल की बैठक में उठा व्यापारियों की समस्या
सलेमपुर,देवरिया( राष्ट्र की परम्परा)। नगर के सिचाई विभाग के डाकबंगला के समीप उद्योग व्यापार मंडल की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में व्यापारियों के समस्याओं के लिए संघर्ष करने की रणनीति तैयार की गई। बैठक को सम्बोधित करते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष शक्ति कुमार गुप्ता ने कहा कि संगठन को और मजबूत करने की जरूरत है, संगठन जब मजबूत होगा तभी व्यापारियों का मान सम्मान सुरक्षित रहेगा। आज पूरे प्रदेश में व्यापारियों के उत्पीड़न की समस्या बढ़ गई है। इसके लिए हम सभी साथियों को संघर्ष करना होगा। जिला अध्यक्ष कुसुमाकर त्रिपाठी ने कहा कि सभी सरकारों में व्यापारियों का उत्पीड़न हुआ है।आज आवश्यकता है कि किसी भी समस्या का समाधान एकजुट होकर करें। तहसील अध्यक्ष सलेमपुर नगर के पूर्व चेयरमैन सुधाकर गुप्त ने कहा कि सलेमपुर में संगठन को सबसे ज्यादा ताकतवर बनाने के लिए और व्यापारी साथियों को जोड़ा जा रहा है।अगर किसी भी साथी को कोई भी कठिनाई महसूस होता है तो हम संगठन के सभी लोग उसका सहयोग करेंगे। बैठक में युवा उद्योग व्यापार मंडल के नवनियुक्त पदाधिकारियों का स्वागत किया गया। बैठक को डॉ धर्मेन्द्र पांडेय, जिला महासचिव वासुदेव वर्मा,दारा यादव, कर्मवीर रौनियार,रवि रौनियार, भरत रौनियार , पप्पू रौनियार, वीरेन्द्र गुप्त, संजय पांडेय, राजेश गुप्ता,बब्लू पांडेय, विनय तिवारी, रामप्रताप यादव, बिनु मद्देशिया, मुन्ना वर्मा, गोपाल गुप्ता, महेश जायसवाल, ओमप्रकाश जायसवाल, संदीप मद्देशिया, अशोक कुमार रौनियार, मेवालाल वर्मा, छेदी जायसवाल, अब्दुल रसीद,सहित सैकड़ों व्यापारी उपस्थित रहे। अध्यक्षता कुसुमाकर त्रिपाठी व संचालन डॉ धर्मेन्द्र पांडेय ने किया।
“सोशल मीडिया की चमक-दमक के शोर में किताबों का स्वर कहीं खो गया है।”
इंस्टाग्राम और डिजिटल मीडिया का दौर है। यहाँ आकर्षण और तमाशा सबसे ज्यादा बिकते हैं। लेकिन समाज की आत्मा को बचाए रखने के लिए जरूरी है कि स्त्रियाँ फिर से साहित्य की ओर लौटें। इंस्टाग्राम का शोर कुछ समय बाद थम जाएगा, पर साहित्य के शब्द अमर रहेंगे। साहित्य पढ़ने वाली स्त्रियाँ कभी गुम नहीं होतीं, वे हर उस किताब के पन्नों में जीवित रहती हैं जिसे कोई दिल से खोलता है। आज के समय में जब हर हाथ मे स्मार्टफोन और हर मन में लाइक्स व फॉलोअर्स की भूख पल रही है, तब साहित्य और किताबें पढ़ने वाली स्त्रियों का अस्तित्व कहीं पीछे छूटता जा रहा है। यह दौर इंस्टाग्राम रील्स, टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल मनोरंजन का है। यहाँ अर्धनग्न होकर मुजरा करने वाली छवियाँ सेकंडों में लाखों लोगों तक पहुँच जाती हैं, पर वहीँ गंभीर साहित्य, कविता या आलोचना पढ़ने वाली स्त्रियों की आवाज़ मानो कहीं दबकर रह जाती है। यह केवल एक सामाजिक विडंबना नहीं बल्कि सांस्कृतिक संकट भी है। सदियों से स्त्रियाँ साहित्य के माध्यम से समाज की आत्मा को संवेदनाओं और करुणा से सींचती रही हैं। महादेवी वर्मा, अमृता प्रीतम, कृष्णा सोबती, मैत्रेयी पुष्पा जैसी लेखिकाएँ न केवल साहित्य रचती थीं बल्कि स्त्री की अस्मिता और समाज की चेतना का प्रतीक भी थीं। लेकिन आज का समय उन्हें पढ़ने से अधिक उन्हें “कोट्स” बनाकर इंस्टाग्राम स्टोरी पर सजाने में व्यस्त है। आज की पीढ़ी का बड़ा हिस्सा विज़ुअल कंटेंट में उलझा है। वीडियो और तस्वीरों की त्वरित खपत ने किताबों की धीमी, गहरी और आत्ममंथन कराने वाली दुनिया को पीछे धकेल दिया है। स्त्रियाँ, जो कभी किताबों में आत्मा का सहारा खोजती थीं, अब सोशल मीडिया पर ग्लैमराइज्ड आइडेंटिटी गढ़ने में मजबूर हो रही हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि सोशल मीडिया स्त्रियों को मंच देता है, पर यह मंच अक्सर उनके शरीर को अधिक महत्व देता है, विचारों को नहीं। यही कारण है कि इंस्टाग्राम पर एक नृत्य या अर्धनग्न अभिनय लाखों लाइक्स पा लेता है, लेकिन किसी स्त्री द्वारा किया गया साहित्यिक विश्लेषण सैकड़ों पर भी नहीं पहुँचता। साहित्य पढ़ने और रचने वाली स्त्रियाँ समाज में गहरी छाप छोड़ती थीं। वे अपने लिखे से व्यवस्था को चुनौती देती थीं, रिश्तों की नई परिभाषा गढ़ती थीं और स्त्री-पुरुष समानता की नई जमीन तैयार करती थीं। लेकिन आज, प्राथमिकताएँ बदल गई हैं। आधुनिक स्त्री अक्सर अपने को साबित करने के लिए सोशल मीडिया की दौड़ में शामिल हो जाती है। यहाँ सुंदरता और आकर्षण अधिक बिकते हैं, विचार और भावनाएँ कम। यह विडंबना है कि जिस साहित्य ने स्त्रियों को आवाज़ दी, वही साहित्य अब उनकी आवाज़ की प्रतीक्षा कर रहा है। महादेवी वर्मा की कविताएँ स्त्री की करुणा, पीड़ा और सौंदर्य का ऐसा प्रतिरूप थीं, जिन्हें पढ़कर आत्मा झंकृत हो जाती थी। वे लिखती थीं—“मैं नीर भरी दुख की बदली…” उनकी कविताओं में स्त्री की आत्मा बोलती थी, पर आज वही आत्मा इंस्टाग्राम फिल्टर और बैकग्राउंड म्यूज़िक के शोर में दबती जा रही है। जहाँ पहले स्त्रियाँ समाज से कहती थीं कि “मेरी आवाज़ सुनो”, आज वे मजबूर हैं यह कहने पर कि “मेरे डांस को लाइक करो।” यही सबसे बड़ा सांस्कृतिक पतन है। हालाँकि यह कहना पूरी तरह उचित नहीं होगा कि साहित्य पढ़ने वाली स्त्रियाँ गायब हो गईं। वे अब भी मौजूद हैं, पर उनका दायरा सीमित हो गया है। पुस्तकालयों, विश्वविद्यालयों और छोटे-छोटे साहित्यिक मंचों पर अब भी स्त्रियाँ साहित्य पढ़ रही हैं, लिख रही हैं और चर्चा कर रही हैं। फर्क बस इतना है कि उनका स्वर उतना बुलंद नहीं है जितना सोशल मीडिया के ग्लैमरस कंटेंट का है। असल में समस्या प्लेटफॉर्म की भी है। इंस्टाग्राम का एल्गोरिद्म ही ऐसा है जो मनोरंजन और तड़क-भड़क को प्राथमिकता देता है। गंभीर साहित्य या लंबी पढ़ाई वहाँ “ट्रेंडिंग” नहीं बन पाती। साहित्य पढ़ने का अर्थ है—अपने भीतर झाँकना, दूसरों की पीड़ा को समझना, और आत्मा को गहराई से महसूस करना। जब समाज साहित्य से दूर होता है, तो वह अपनी संवेदनशीलता भी खो देता है। स्त्रियों की करुणा और कोमलता ही समाज को संतुलित रखती हैं। लेकिन जब यही स्त्रियाँ केवल बॉडी शो तक सीमित हो जाएँ और आत्मा की गहराई को दरकिनार कर दें, तो समाज के संवेदनशील होने की उम्मीद भी घट जाती है। इस स्थिति से निकलने के लिए जरूरी है कि परिवार और शिक्षा व्यवस्था किताबों के प्रति प्रेम जगाए। घर और स्कूलों में बच्चों, खासकर बेटियों को किताबें पढ़ने की आदत डालनी होगी। साहित्यकारों और प्रकाशकों को चाहिए कि वे सोशल मीडिया पर साहित्य को आकर्षक रूप में प्रस्तुत करें। सरकार और समाज को साहित्य पढ़ने और लिखने वाली स्त्रियों को ज्यादा मंच देना चाहिए, ताकि उनकी आवाज़ दबे नहीं। स्त्रियों को आपस में साहित्यिक समूह और बुक क्लब बनाने चाहिए, जो एक-दूसरे को प्रेरित करें। इतिहास गवाह है कि जब भी समाज अंधकार में डूबा, साहित्य ने ही राह दिखाई। और उस साहित्य में स्त्रियों की भूमिका हमेशा निर्णायक रही। चाहे वह मीरा हों, चाहे महादेवी, या फिर समकालीन स्त्रियाँ—उन्होंने अपने शब्दों से समाज की दिशा तय की। आज भी यदि स्त्रियाँ किताबों को गले लगाएँगी, तो आने वाली पीढ़ी को सिर्फ “फॉलोअर्स” और “लाइक्स” नहीं, बल्कि जीवन की गहरी समझ भी मिलेगी। आज का निष्कर्ष यही है कि इंस्टाग्राम और डिजिटल मीडिया का दौर है। यहाँ आकर्षण और तमाशा सबसे ज्यादा बिकते हैं। लेकिन समाज की आत्मा को बचाए रखने के लिए जरूरी है कि स्त्रियाँ फिर से साहित्य की ओर लौटें। क्योंकि इंस्टाग्राम का शोर कुछ समय बाद थम जाएगा, पर साहित्य के शब्द अमर रहेंगे। साहित्य पढ़ने वाली स्त्रियाँ कभी गुम नहीं होतीं—वे केवल समाज की लापरवाही के कारण धुंधली दिखने लगती हैं। जब भी कोई किताब खोली जाएगी, वे फिर से जीवित हो उठेंगी।
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में नियुक्ति प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत बलिया जिले की 56 नवचयनित मुख्य सेविकाओं को नियुक्ति प्रमाण पत्र सौंपे गए। जिलाधिकारी ने नव नियुक्त सेविकाओं को कार्य प्रणाली, कर्तव्यों एवं जनहित में सेवा भावना के साथ कार्य करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह नियुक्ति आपके जीवन की एक नई शुरुआत है, जिसमें समाज के अंतिम पायदान तक सेवा पहुंचाना आपका दायित्व है। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी दिखाया गया। कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी ओजस्वी राज, जिला कार्यक्रम अधिकारी के.एम. पाण्डेय तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय आयात पर दोगुना टैरिफ लगाए जाने के बाद देश की राजनीति गर्मा गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि उनके “प्रिय मित्र” के इस कदम से भारत को अकेले 10 प्रमुख क्षेत्रों में पहले चरण में अनुमानित 2.17 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा।
खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि मोदी सरकार इस बड़े आर्थिक संकट को लेकर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है और अब तक न तो कोई ठोस कदम उठाया गया है और न ही किसानों व छोटे उद्योगों की आजीविका की रक्षा के लिए कोई ठोस योजना सामने रखी गई है।
उन्होंने कहा, “मोदी जी हमेशा अपने मित्र ट्रंप की बातें करते रहे, लेकिन उनके फैसले ने भारत की अर्थव्यवस्था को गहरी चोट दी है। निर्यातक, किसान और छोटे व्यवसायी सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, लेकिन सरकार इस संकट को कम करने के लिए बिल्कुल कुछ नहीं कर रही है।”
किन क्षेत्रों पर पड़ेगा असर
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के टैरिफ फैसले का सबसे ज्यादा असर कृषि उत्पादों, टेक्सटाइल, स्टील, फार्मा, ऑटो पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सेवाओं सहित कई क्षेत्रों पर पड़ेगा।
सरकार पर विपक्ष का दबाव
कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने मांग की है कि केंद्र सरकार तत्काल प्रभाव से इस संकट से निपटने के लिए एक ठोस कार्ययोजना घोषित करे और प्रभावित किसानों व उद्योगों को राहत पैकेज प्रदान करे।
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस दिन को भगवान गणेश के अवतरण दिवस के रूप में जाना जाता है। विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और मंगलकारी देवता गणेश की पूजा-अर्चना के लिए सुबह से ही मंदिरों और घरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी है। परंपरा के अनुसार भगवान गणेश का जन्म माता पार्वती द्वारा बनाए गए बालक के रूप में हुआ था। कथा के अनुसार शिव-पार्वती प्रसंग के दौरान गणेश का सिर काटे जाने और पुनः हाथी का सिर लगाए जाने से उन्हें गणपति के रूप में पूजित होने का गौरव प्राप्त हुआ। इस अवसर पर भक्तों ने गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की है और भजन-कीर्तन व आरती कर रहे है। घरों के साथ-साथ सार्वजनिक पंडालों में भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। जिले के विभिन्न स्थानों पर सजावट और रोशनी से उत्सव का माहौल बना हुआ है। गणेशोत्सव का यह पर्व दस दिनों तक चलेगा। अंतिम दिन गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा, जिसके साथ भक्तगण “गणपति बप्पा मोरया” का जयघोष करते हुए उन्हें विदाई देंगे। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी इस पर्व का विशेष महत्व है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इस उत्सव को सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना का माध्यम बनाया था। तभी से गणेशोत्सव जनभागीदारी और सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया।
नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में जारी गतिरोध का असर अब सीधे भारतीय निर्यात पर दिखने लगा है। बुधवार से अमेरिका ने भारत से आने वाले उत्पादों पर 50% दंडात्मक टैरिफ लागू कर दिया है। यह भारी-भरकम शुल्क भारत के लगभग 48.2 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात पर असर डालेगा।
ट्रंप प्रशासन का यह फैसला भारत द्वारा अमेरिकी दबाव में झुकने से इनकार करने के बाद सामने आया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस कदम से भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धा में भारी नुकसान होगा और कई सेक्टर पर सीधा असर पड़ सकता है।
सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया है कि केंद्र सरकार दंडात्मक टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए कई उपायों पर विचार कर रही है। इनमें वैकल्पिक निर्यात बाजार तलाशना, घरेलू उद्योग को राहत पैकेज देना और अमेरिका के साथ दोबारा बातचीत की पहल शामिल है।
सबसे ज्यादा असर किन पर पड़ेगा?
इंजीनियरिंग और ऑटो पार्ट्स ,फार्मा और केमिकल उत्पाद,कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद,वस्त्र और परिधान उद्योग,व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि यदि विवाद लंबे समय तक जारी रहा तो भारत के रोजगार और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी असर पड़ सकता है।फिलहाल सभी की नजरें केंद्र सरकार की रणनीति और आने वाले दिनों में होने वाली संभावित भारत-अमेरिका वार्ता पर टिकी हैं।
गोवा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क )में बुधवार से 10 दिवसीय गणेश उत्सव पारंपरिक उत्साह और गहरी आस्था के साथ शुरू हो गया है। राज्यभर के लोगों ने अपने-अपने घरों में भगवान गणेश की मूर्तियां स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना की। गोवा की लगभग 70 प्रतिशत आबादी हिंदू है, ऐसे में यह पर्व राज्य के अधिकांश घरों में बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
मंगलवार देर रात भक्तजन बड़े हर्षोल्लास के साथ मूर्तियों को घर लाए और बुधवार सुबह अनुष्ठानों के बीच भगवान गणेश का स्वागत किया। ढोल-ताशों की गूंज और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ गणपति बप्पा मोरया के जयकारे पूरे राज्य में गूंज उठे।
इस उत्सव को लेकर गोवा का हर घर रोशनी और सजावट से जगमगा उठा है। विशेष रूप से पारंपरिक पकवान – मोदक, नेवऱ्या और अन्य व्यंजन बनाए जाते हैं, जिन्हें प्रसाद के रूप में भगवान गणेश को अर्पित किया जाता है।
गणेश चतुर्थी का यह पर्व गोवा की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। खास बात यह है कि राज्य के बाहर या विदेश में काम कर रहे गोवावासी भी इन दिनों अपने पैतृक गांव लौटते हैं ताकि परिवार और समाज के साथ मिलकर इस पर्व का आनंद ले सकें।
समुदायों के बीच एकता, भक्ति और आनंद का यह महापर्व अगले दस दिनों तक चलता रहेगा और फिर विधिवत विसर्जन के साथ समाप्त होगा।