टोक्यो (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो दिवसीय जापान यात्रा पर हैं। शुक्रवार को टोक्यो स्थित शोरिनजान दारुमा-जी मंदिर के मुख्य पुजारी रेव सेशी हिरोसे ने उन्हें पारंपरिक दारुमा गुड़िया भेंट की। जापानी संस्कृति में यह गुड़िया सौभाग्य, दृढ़ता और नवीनीकरण का प्रतीक मानी जाती है।
दारुमा गुड़िया की खासियत यह है कि इसे चाहे कितनी बार गिराया जाए, यह हमेशा सीधे खड़ी हो जाती है। इसी से जुड़ा एक मशहूर जापानी मुहावरा है – “सात बार गिरो, आठ बार उठो”, जो जीवन में हार न मानने और लगातार प्रयास करते रहने की प्रेरणा देता है।
दारुमा गुड़िया क्या है?
दारुमा गुड़िया एक खोखली, गोल आकार की पारंपरिक जापानी गुड़िया है। इसका निर्माण बौद्ध धर्म की ज़ेन परंपरा के संस्थापक महान भिक्षु बोधिधर्म (बोधिधरमा) के आधार पर किया गया है।सामान्यत: यह लाल रंग में बनाई जाती है।
लेकिन अलग-अलग क्षेत्रों और कलाकारों के आधार पर इसके रंग व डिज़ाइन में विविधता देखने को मिलती है।इसे आध्यात्मिक एकाग्रता और सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है।
पीएम मोदी अपनी इस यात्रा के दौरान 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और सामरिक सहयोग पर अहम चर्चा होने की संभावना है।
बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। मूल रूप से बरहज नगर पालिका क्षेत्र (जनपद देवरिया) निवासी और वर्तमान में आगरा में अपर नगर मजिस्ट्रेट (एसीएम) पद पर तैनात राजेश जायसवाल का शुक्रवार को सड़क दुर्घटना में निधन हो गया। इस घटना से प्रशासनिक अमले में शोक की लहर दौड़ गई है। मिली जानकारी के अनुसार एसीएम राजेश जायसवाल शुक्रवार को लखनऊ से अपनी निजी क्रेटा कार से आगरा लौट रहे थे। रास्ते में 77+200 माइलस्टोन के पास उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें सैफई मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। मूल रूप से देवरिया जनपद के बरहज निवासी राजेश जायसवाल अपनी सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे। उनके असामयिक निधन की खबर सुनते ही न केवल परिजन व क्षेत्रवासी, बल्कि पूरा प्रशासनिक अमला शोकाकुल हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही कमिश्नर आगरा शैलेन्द्र सिंह और जिलाधिकारी आगरा तत्काल इटावा रवाना हो गए।
हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती एवं राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर विकासखंड नवानगर के ग्राम सभा रुद्रवार स्थित मनरेगा पार्क में विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता खंड विकास अधिकारी नवानगर विनोद कुमार बिंद ने की। इस अवसर पर ग्राम पंचायत अधिकारी मनु सिंह चौहान, एपीओ अजय सिंह, तकनीकी सहायक वीरेन्द्र कुमार चौहान, ऑडियो पंचायत मनोज कुमार यादव, लेखा सहायक राजेश यादव, कंप्यूटर ऑपरेटर मनरेगा मनोज कुमार तिवारी, तकनीकी सहायक शक्ति सिंह राय सहित क्षेत्र के अनेक संभ्रांत लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और वॉलीबाल, कबड्डी सहित कई प्रकार की खेल प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विजेता बच्चों को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया। राष्ट्रीय खेल दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम ने बच्चों और युवाओं में खेल भावना के साथ-साथ मेजर ध्यानचंद के आदर्शों को अपनाने का संदेश दिया।
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती पर गोरखपुर स्थित रीजनल स्टेडियम में भव्य हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सहजनवां विधायक प्रदीप शुक्ला, जिलाधिकारी दीपक मीणा एवं मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर किया।
इस अवसर पर विधायक प्रदीप शुक्ला ने खिलाड़ियों को खेल भावना और अनुशासन की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि मेजर ध्यानचंद जैसे महान खिलाड़ी से हमें समर्पण और परिश्रम की प्रेरणा लेनी चाहिए। प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में खिलाड़ी, खेल संघों के पदाधिकारी, खेल अधिकारी और खेल प्रेमी उपस्थित रहे।
सीतामढ़ी में दिल दहला देने वाली वारदात, ओलिपुर गांव की घटना
सीतामढ़ी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जिले के रुन्नीसैदपुर थाना क्षेत्र के ओलिपुर गांव में गुरुवार की रात अज्ञात अपराधियों ने डिलीवरी बॉय की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान 28 वर्षीय राहुल कुमार मंडल के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।
जानकारी के अनुसार, राहुल गुरुवार शाम रोज की तरह ग्राहकों के पार्सल लेकर ओलिपुर गांव गया था। डिलीवरी पूरी करने के बाद वह लौट ही रहा था कि बाइक सवार अपराधियों ने उसे घेर लिया। बदमाशों ने नजदीक से गोली मार दी, जिससे राहुल की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद अपराधी उसके पास मौजूद पार्सल और अन्य सामान लूटकर फरार हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर जुट गए और पुलिस को खबर दी। रुन्नीसैदपुर थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने घटनास्थल से खोखा बरामद किया है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की छानबीन तेजी से की जा रही है। अपराधियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी होगी। इधर, राहुल की मौत से परिवार और स्थानीय लोगों में कोहराम मचा हुआ है। लोगों ने घटना पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अपराध पर लगाम कसने की मांग की है।
बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) नगरपालिका कार्यालय मे गणेश चतुर्दशी के पावन अवसर पर लोक कल्याण के लिए श्रद्धा के साथ पूजन अर्चन कर गणेश भगवान की प्रतिमा स्थापित किया गया। शुक्रवार को नगरपालिका अध्यक्ष श्वेता जायसवाल एवं अध्यक्ष प्रतिनिधि श्याम सुंदर जायसवाल द्वारा पूजन, हवन कर, गणपति बप्पा की मूर्ति को हाथो मे उठाकर ढ़ोल नगाड़ो के साथ पालिका गेट से नगर के मुख्य सड़क से होते हुए, थाना घाट पहुँचे। जहाँ पर जयकारे के साथ सरयू की जलधारा मे गणेश जी की प्रतिमा को विसर्जित कीया गया । इस अवसर पर अधिशासी अधिकारी निरुपमा प्रताप,मनोज गुप्ता, संतोष गहमरी, राजा जायसवाल, आनंद सिंह, नथुनी मद्देशिया, अनमोल मिश्रा, शम्भूदयाल भारती, महेश जायसवाल, श्रवण कुमार, अनूप शाह सहित सैकड़ो कर्मचारीगण मौजूद रहे।
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रीय खेल दिवस एवं पद्मभूषण मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर जिले में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस मौके पर विधायक मेंहदावल अनिल कुमार त्रिपाठी ने जिलाधिकारी आलोक कुमार के साथ खिलाड़ियों को शपथ दिलाई और उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामना दीं। इस अवसर पर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में उत्तर प्रदेश के 88 विजेता खिलाड़ियों के पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का सजीव प्रसारण भी दिखाया गया, जिसका सभी ने उत्साहपूर्वक अवलोकन किया। इस अवसर पर जिला क्रीड़ा अधिकारी सहित खेल विभाग के कर्मचारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। गौरतलब है कि भारत के ‘हॉकी जादूगर’ कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद के जन्मदिवस को ही राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने अपने खेल कौशल से न सिर्फ देश को तीन ओलंपिक स्वर्ण पदक दिलाए, बल्कि भारत को अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)“आर्थिक स्वतंत्रता प्रत्येक व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है और हिन्दू महासभा -जस्ट डन इसे इसे प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाकर रहेगी। ” यह उद्घोष अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र कुमार द्विवेदी ने डिजिटल स्वरोजगार प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश के नागरिकों को स्वरोजगार उपलब्ध करवाने में स्वरोजगार क्रांति का आगाज कर चुकी जस्ट डन के कॉरपोरेट कार्यालय द्वारका नई दिल्ली में आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए किया। उन्होंने कहा कि हिन्दू महासभा और जस्ट डन द्वारा डिजिटल स्वरोजगार मिशन के अंतर्गत एक करोड़ नागरिकों को डिजिटल स्वरोजगार योजना से जोड़ने का अभियान आरंभ करने का संदेश प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचा। रोजगार अभियान को आगे बढ़ाते हुए तीन करोड़ लोगों को रोजगार से जोड़ने की स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले के प्राचीर से घोषणा की। अपने संबोधन में हिन्दू महासभा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार और हम सभी मिलकर साझा प्रयास करेंगे, तभी अपने देश को बेरोजगारी के दानव से मुक्त करवा पाएंगे। उन्होंने डिजिटल स्वरोजगार मिशन को देश की आर्थिक आजादी की नवक्रांति घोषित करते हुए जस्ट डन की दुनिया से जुड़ने का आह्वान किया। हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता बी एन तिवारी ने जारी बयान में यह जानकारी देते हुए कहा कि हिन्दू महासभा का स्वरोजगार मिशन भले ही अभी शैशवास्था में है, किंतु यह नहीं भूलना चाहिए कि अगर दिशा सही हो तो छोटा सा कदम भी मंजिल पर पहुंचा देता है। उन्होंने स्वरोजगार को सच्चा स्वराज घोषित करते हुए इस अभियान को नई आर्थिक आजादी की पहचान बताया। गोष्ठी में डिजिटल स्वरोजगार मिशन की प्रगति, नए अवसर और वित्तीय मॉडल पर वक्ताओं ने विस्तार से अपने विचार प्रकट किए। गोष्ठी में हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रोफेसर यशपाल सिंह, अखिल भारत हिन्दू महासभा के स्वरोजगार प्रकोष्ठ हिन्दू स्वरोजगार सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं जस्ट डन के संस्थापक हिमांशु झा, अखिल भारत स्वरोजगार मिशन के मीडिया प्रभारी ओमपाल सिंह सहित अनेक अनेक राष्ट्रवादी चिंतक शामिल हुए। जारी बयान के अनुसार राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रोफेसर यशपाल सिंह ने अपने संबोधन में प्रेरणा देते हुए कहा कि यह स्वरोजगार मिशन एक करोड़ नागरिकों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ट्रेनिंग सेंटर आरंभ करने, डिजिटल मार्केट प्लेस और फाइनेंशियल सपोर्ट के साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वरोजगार केंद्र खोलने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल अर्थव्यवथा ही नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता और संस्कारों की पहचान है। हिन्दू स्वरोजगार सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं जस्ट डन के संस्थापक हिमांशु झा ने गोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वरोजगार मिशन केवल एक परियोजना नहीं, यह भारत के स्वप्नों को हकीकत में बदलने का एक ऐतिहासिक आंदोलन है। यह लाखों परिवारों के जीवन में स्थायित्व, सुरक्षा और सम्मान लाएगा। उन्होंने कहा कि यह स्वरोजगार आंदोलन भारत की आर्थिक स्वतंत्रता का सूत्रधार बनेगा। अखिल भारत हिन्दू स्वरोजगार सभा और जस्ट डन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ओम पाल सिंह ने गोष्ठी में उपस्थित प्रतिनिधियों का स्वागत अभिनंदन करते हुए कहा कि एक करोड़ स्वरोजगार मिशन आत्मनिर्भर भारत की ओर हमारा संकल्प है। हमारा प्रयास स्थानीय व्यापारों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर विदेशी निर्भरता को कम करना है।
दादा गौतम उर्फ़ हरियाणा के विधायक रामकुमार गौतम द्वारा विधानसभा में उठाया गया मुद्दा केवल विवाह की सहमति भर का नहीं, बल्कि समाज की दिशा और संस्कृति के संरक्षण का संकेत है। अभिभावकों की सहमति से विवाह संस्था मजबूत रहती है, जबकि युवाओं की स्वतंत्रता से समाज प्रगतिशील बनता है। चुनौती यह है कि दोनों के बीच संतुलन कायम किया जाए। कानून से अधिक आवश्यक है संवाद और परामर्श की संस्कृति। परिवार और बच्चों का पारस्परिक सम्मान ही वह आधार है, जो विवाह संस्था की गरिमा और समाज की नैतिकता को बनाए रख सकता है। भारत जैसे सांस्कृतिक और पारिवारिक मूल्यों वाले देश में विवाह केवल दो व्यक्तियों का निजी निर्णय नहीं होता, बल्कि यह परिवार, रिश्तेदार और व्यापक समाज की भागीदारी से जुड़ी एक सामाजिक संस्था है। ऐसे में जब हरियाणा विधानसभा में दादा गौतम ने यह मुद्दा उठाया कि जवान बच्चों की शादी में माँ-बाप की सहमति अनिवार्य होनी चाहिए, तो इस पर स्वाभाविक रूप से बहस छिड़ गई। यह बहस केवल एक कानूनी प्रावधान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके केंद्र में हैं—नैतिकता, परंपरा, संस्कृति, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक प्रतिष्ठा।
भारतीय संस्कृति में विवाह केवल एक सामाजिक अनुबंध या कानूनी व्यवस्था नहीं, बल्कि संस्कार है। विवाह को परिवारों का मिलन माना जाता है, न कि केवल दो व्यक्तियों का। यही कारण है कि भारत में अधिकांश विवाह आज भी परिवार और समाज की सहमति से ही तय होते हैं। माता-पिता अपने बच्चों के विवाह में केवल निर्णयकर्ता नहीं, बल्कि मार्गदर्शक होते हैं। उनका अनुभव, सामाजिक पहचान और रिश्तों की समझ विवाह संस्था को स्थिर बनाए रखने में सहायक होती है। परंपरा का यह स्वरूप परिवार की इज़्ज़त-आबरू, सामाजिक प्रतिष्ठा और रिश्तों की निरंतरता से गहराई से जुड़ा हुआ है।
विधानसभा में उठाया गया यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आधुनिक समय में तेजी से बदलती जीवनशैली और युवाओं की बढ़ती स्वतंत्रता ने विवाह संस्था की परिभाषा को बदलना शुरू कर दिया है। कई युवा प्रेम विवाह को प्राथमिकता दे रहे हैं। परिवार की सहमति के बिना विवाह करने के मामलों में वृद्धि हो रही है। कई बार ये विवाह सामाजिक असमानता, जातिगत भेदभाव और पारिवारिक दबाव के खिलाफ प्रतिरोध के रूप में सामने आते हैं। लेकिन इन सबके बीच सवाल यह भी उठता है कि यदि हर विवाह केवल व्यक्तिगत निर्णय बन जाए और अभिभावकों की सहमति को दरकिनार कर दिया जाए, तो समाज में नैतिकता, संस्कृति और रिश्तों की गरिमा पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है।
अभिभावकों की सहमति के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क यह है कि यह परिवार की इज़्ज़त और सामाजिक आबरू को बनाए रखती है। माता-पिता का अनुभव बच्चों के लिए मार्गदर्शक होता है। जीवन की कठिनाइयों, रिश्तों की बारीकियों और सामाजिक जिम्मेदारियों की समझ उनसे बेहतर किसी को नहीं हो सकती। विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि परिवारों और संस्कृतियों का मिलन होता है, इसलिए अभिभावकों की सहमति से विवाह में स्थिरता और दीर्घकालिक सफलता की संभावना अधिक होती है। जब परिवार पीछे खड़ा होता है तो विवाह का भावनात्मक संतुलन भी मजबूत रहता है।
दूसरी ओर विपक्ष में यह तर्क भी उतना ही प्रबल है कि भारतीय संविधान हर वयस्क नागरिक को यह अधिकार देता है कि वह अपनी पसंद का जीवनसाथी चुन सके। किसी भी प्रकार से अभिभावक की सहमति को बाध्यकारी बनाना व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अधिकारों का उल्लंघन होगा। कई बार अभिभावक जाति, धर्म, वर्ग या आर्थिक स्थिति को प्राथमिकता देकर बच्चों की पसंद को नकार देते हैं। ऐसे में यदि उनकी सहमति अनिवार्य कर दी जाए तो यह समानता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों के खिलाफ होगा। अनचाहे विवाह का खतरा भी इसी से पैदा होता है, जहाँ बच्चों पर दबाव डालकर उनकी पसंद के विरुद्ध विवाह कराए जाते हैं। इससे न केवल विवाह असफल होते हैं बल्कि समाज में असंतोष और तनाव भी बढ़ता है।
युवाओं की स्वतंत्रता और समाज की प्रगति के लिए यह आवश्यक है कि उन्हें अपनी पसंद के निर्णय लेने का अवसर मिले। समाज तभी प्रगतिशील बन सकता है जब जातिगत और परंपरागत बंधनों को तोड़कर समानता और आधुनिकता को अपनाया जाए। यह भी सच है कि हर अभिभावक आवश्यक नहीं कि समझदार और प्रगतिशील हो। कई बार उनकी सोच परंपराओं और रूढ़ियों से बंधी होती है, जो बच्चों की स्वतंत्रता और खुशी के आड़े आ सकती है।
यह स्पष्ट है कि दोनों पक्षों में ठोस तर्क हैं। अभिभावकों की सहमति पूरी तरह नज़रअंदाज़ नहीं की जा सकती, क्योंकि यह परिवार और समाज के लिए आवश्यक है। वहीं युवाओं की स्वतंत्रता भी कमतर नहीं आँकी जा सकती, क्योंकि यह उनका संवैधानिक अधिकार है। अतः समाधान इस टकराव में नहीं, बल्कि संतुलन और संवाद में है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की भावनाओं, पसंद और स्वतंत्रता को समझें। युवाओं को चाहिए कि वे अपने निर्णय में परिवार की प्रतिष्ठा और अनुभव को महत्व दें। सरकार और समाज की भूमिका यह होनी चाहिए कि वे संवाद और परामर्श को बढ़ावा दें, न कि केवल कानून बनाकर किसी एक पक्ष को बाध्य करें।
यदि सरकार इस विषय पर कदम उठाना चाहती है, तो सीधे कानून बनाने की बजाय कुछ सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। विवाह के विवादित मामलों में परिवार और युवाओं के बीच संवाद स्थापित करने के लिए परामर्श केंद्र बनाए जा सकते हैं। जल्दबाजी और भावनात्मक निर्णयों को संतुलित करने के लिए मनोवैज्ञानिक और सामाजिक काउंसलिंग की व्यवस्था हो सकती है। अभिभावकों को समझाने के लिए संवेदनशीलता अभियान चलाए जा सकते हैं कि बच्चों की पसंद को नकारना समाधान नहीं है। वहीं युवाओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम जरूरी हैं ताकि वे विवाह को केवल भावनात्मक निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में समझें।
दादा गौतम द्वारा उठाई गई चिंता समाज के लिए एक आवश्यक चेतावनी है। अगर विवाह संस्था से परिवार और अभिभावकों की भूमिका पूरी तरह हटा दी गई, तो समाज में नैतिकता और संस्कार कमजोर होंगे। वहीं अगर अभिभावकों की सहमति को कानूनी रूप से बाध्यकारी बना दिया गया, तो युवाओं की स्वतंत्रता पर चोट पहुँचेगी। इसलिए समाधान केवल यही है कि विवाह संस्था को संवाद, सहमति और समझदारी पर आधारित बनाया जाए। अभिभावकों और बच्चों के बीच पारस्परिक सम्मान ही वह पुल है, जो परंपरा और आधुनिकता, अधिकार और जिम्मेदारी, स्वतंत्रता और संस्कार के बीच संतुलन स्थापित कर सकता है। यदि हम इस संतुलन को साध सके, तभी विवाह संस्था अपनी वास्तविक गरिमा और पवित्रता बनाए रख सकेगी और आने वाली पीढ़ियाँ एक सशक्त, संस्कारित और स्वतंत्र समाज का निर्माण कर सकेंगी।
बेतिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव की अगुवाई में चल रही “वोटर अधिकार यात्रा” शुक्रवार को 13वें दिन पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया पहुंची। इस दौरान यात्रा का नजारा बेहद खास रहा, क्योंकि राहुल गांधी के काफिले में इस बार 100 घोड़े भी शामिल किए गए, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
यात्रा की शुरुआत राहुल गांधी ने बेतिया स्थित हरि वाटिका में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की। इसके बाद उनका काफिला छावनी रोड, सुप्रिया रोड और रेलवे स्टेशन चौक से गुजरते हुए आगे बढ़ा। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने जगह-जगह उनका स्वागत किया।
काफिला नौतन प्रखंड होते हुए गोपालगंज जिले में प्रवेश करेगा। यात्रा की समूची व्यवस्था कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया की देखरेख में की जा रही है।
कांग्रेस और राजद नेताओं का कहना है कि यह यात्रा जनता को जागरूक करने और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए निकाली जा रही है। जगह-जगह लोग इसमें शामिल होकर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव का समर्थन कर रहे हैं।
गौरतलब है कि “वोटर अधिकार यात्रा” का समापन 1 सितंबर को पटना में होगा, जहां एक बड़ी जनसभा का आयोजन किया जाएगा।
पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)एशियाई हॉकी की सबसे प्रतिष्ठित जंग की गवाह बनने जा रही है बिहार की धरती। खूबसूरत ऐतिहासिक नगरी राजगीर इस बार हीरो एशिया कप-2025 की मेजबानी कर रही है। 29 अगस्त से 7 सितंबर तक राजगीर खेल परिसर में स्टिक की टकराहट, खिलाड़ियों का जोश और दर्शकों का जुनून देखने लायक होगा।
भारत की पुरुष हॉकी टीम कप्तान हरमनप्रीत सिंह की अगुआई में एशिया की आठ शीर्ष टीमों के खिलाफ उतरने को तैयार है। भारतीय टीम का लक्ष्य न केवल खिताब जीतना है बल्कि इसके साथ-साथ विश्व कप हॉकी का टिकट पक्का करना भी है।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशिया कप की मेजबानी पर खुशी जताते हुए कहा, “यह टूर्नामेंट रोमांचक मैचों, असाधारण प्रतिभा और यादगार क्षणों से भरपूर होगा, जो भावी पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।” उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में बिहार एक प्रमुख खेल केंद्र के रूप में उभरा है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025, एशिया रग्बी U-20 सेवंस चैंपियनशिप, आईएसटीएएफ सेपकटकरा विश्व कप 2024 और महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी 2024 जैसे आयोजनों ने बिहार की पहचान को और मजबूत किया है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बयान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “बिहार में हीरो एशिया कप-2025 का आयोजन हम सभी के लिए गौरव की बात है। यह न केवल हमारी अंतरराष्ट्रीय क्षमता को प्रदर्शित करेगा, बल्कि पर्यटन, कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी बिहार की वैश्विक छवि को सुदृढ़ करेगा।” उन्होंने बताया कि राजगीर खेल परिसर में विश्वस्तरीय हॉकी स्टेडियम और विभिन्न खेलों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं तैयार की गई हैं।
शुक्रवार को सीएम नीतीश कुमार इस टूर्नामेंट का विधिवत उद्घाटन करेंगे और भारत-चीन मुकाबले के खिलाड़ियों से मुलाकात करेंगे।
अब सबकी नज़रें राजगीर पर
एशिया कप 2025 न केवल हॉकी प्रेमियों के लिए रोमांच का नया अध्याय होगा बल्कि यह बिहार को वैश्विक खेल मानचित्र पर भी नई ऊंचाई देगा। अब देखना यह है कि एशिया की इस बड़ी जंग में कौन बनेगा चैंपियन और कौन ले जाएगा विश्व कप का सुनहरा टिकट।
नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन की तारीखें घोषित कर दी हैं। बोर्ड के अनुसार रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 29 अगस्त 2025 से शुरू होकर 30 सितंबर 2025 तक चलेगी। इस बार रजिस्ट्रेशन को लेकर बोर्ड ने कई नए नियम लागू किए हैं जिनका पालन छात्रों और स्कूलों के लिए अनिवार्य होगा।
रजिस्ट्रेशन की महत्वपूर्ण तिथियां
सामान्य रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि: 30 सितंबर 2025,लेट फीस के साथ रजिस्ट्रेशन: 3 अक्टूबर से 11 अक्टूबर 2025 तक,लेट फीस: ₹2000 परीक्षा शुल्क 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए 5 विषयों पर शुल्क: ₹1600 प्रत्येक अतिरिक्त विषय पर शुल्क: ₹320,12वीं के प्रैक्टिकल विषयों पर अतिरिक्त शुल्क: ₹160 प्रति विषय,दृष्टिबाधित छात्रों को पूरी तरह शुल्क से छूट
नए नियम रजिस्ट्रेशन केवल उन्हीं छात्रों का होगा जिनके पास APAAR ID (Automated Permanent Academic Account Registry) होगी।छात्रों और स्कूलों को रजिस्ट्रेशन के दौरान दी गई जानकारी बाद में सुधारने का मौका नहीं मिलेगा। आपत्ति और विवाद निजी विद्यालयों के संगठन बिहार पब्लिक स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन ने इस नियम पर आपत्ति जताई है। संगठन के अध्यक्ष डीके सिंह और सचिव प्रेम रंजन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आदेश को वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि APAAR ID को अनिवार्य करना बच्चों और स्कूलों दोनों के लिए चिंता का विषय है, जिससे कई छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)भारतीय क्रिकेट के महान ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अब इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) को भी अलविदा कह दिया है। चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) से अपने आईपीएल करियर की शुरुआत करने वाले अश्विन ने अपना आखिरी आईपीएल मुकाबला भी इसी टीम के साथ खेलकर अपने लंबे सफर का समापन किया।
अश्विन का यह फैसला उनके फैंस के लिए किसी झटके से कम नहीं था। 2024 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी माना जा रहा था कि वह आईपीएल में खेलते रहेंगे, लेकिन अचानक टूर्नामेंट से हटने का ऐलान करके उन्होंने सभी को चौंका दिया।
अब क्या करेंगे अश्विन? फैंस के बीच यह सवाल सबसे बड़ा बना हुआ है कि अश्विन अब आगे क्या करने वाले हैं। इस पर खुद उन्होंने खुलासा करते हुए कहा कि वह विदेशी टी20 लीग्स में खेलने के लिए तैयार हैं। अश्विन ने बताया – “मैंने एक लीग के लिए रजिस्ट्रेशन कर दिया है, लेकिन अभी ज्यादा डिटेल्स शेयर नहीं कर सकता। हां, मैं ग्लोबल टी20 लीग्स में खेलने को तैयार हूं।”
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अश्विन का नाम इंग्लैंड की लोकप्रिय लीग ‘द हंड्रेड’ और दक्षिण अफ्रीका की SA20 लीग से जोड़ा जा रहा है।
कोचिंग का भी संकेत अश्विन ने यह भी साफ किया कि क्रिकेट से उनका जुड़ाव यहीं खत्म नहीं होगा। भविष्य में वह कोचिंग की भूमिका निभाने के लिए भी तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह काम वह अपने तरीके और शर्तों पर ही करेंगे।
शानदार करियर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 700 से अधिक विकेट भारत की कई ऐतिहासिक जीतों के नायक आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स जैसे फ्रेंचाइजी के अहम खिलाड़ी
अश्विन का क्रिकेट करियर न सिर्फ उपलब्धियों से भरा रहा है बल्कि उन्होंने अपनी गेंदबाजी और समझदारी से भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।अब देखना होगा कि विदेशी लीग्स में उनका अगला कदम क्रिकेट जगत को किस तरह रोमांचित करता है।
♈ मेष मित्रों और पड़ोसियों के साथ आपके संबंध मजबूत होंगे। मेहनत का पूरा फल मिलेगा और आपकी छवि बेहतर बनेगी। कार्यक्षेत्र में सहयोग मिलेगा और सामाजिक दायरा भी बढ़ेगा।
♉ वृष आज पुराने मित्रों और नज़दीकी रिश्तेदारों से मुलाकात का अवसर मिलेगा। व्यापार और लेन-देन से जुड़े कार्यों में सफलता की संभावना है। धन लाभ के योग भी बन रहे हैं।
♊ मिथुन आज का दिन संघर्षपूर्ण रहेगा। परिवार और व्यापार दोनों में कुछ तनाव झेलना पड़ सकता है। हालांकि मेहनत और धैर्य का परिणाम अंततः आपके पक्ष में रहेगा।
♋ कर्क उधार दिया गया धन वापस मिलने की संभावना है। घरेलू मामलों में राहत मिलेगी। लेकिन छोटी-छोटी बातों पर तनाव से बचना ही बेहतर होगा।
♌ सिंह आज कई समस्याओं का समाधान निकल आएगा। अधीनस्थ और सहयोगी आपके लिए सहायक सिद्ध होंगे। आत्मविश्वास बढ़ेगा और रुके हुए कार्य गति पकड़ेंगे।
♍ कन्या महत्त्वपूर्ण काम आज भी अधूरे रह सकते हैं। धैर्य बनाए रखें, क्योंकि यह देरी भविष्य में आपके लिए उन्नति का मार्ग प्रशस्त करेगी। प्रयासों का सही समय आने वाला है।
♎ तुला वैवाहिक जीवन सुखद और आनंदमय रहेगा। जीवनसाथी का साथ मिलेगा। हालांकि, आपका स्वभाव कुछ हद तक जिद्दी या अड़ियल हो सकता है, जिस पर नियंत्रण रखना ज़रूरी होगा।
♏ वृश्चिक आज आपको हर दृष्टि से सतर्क रहने की आवश्यकता है। धोखे की संभावना है। प्रेम संबंधों में असफलता या निराशा हो सकती है, जिससे मन अशांत रहेगा।
♐ धनु नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों की कृपा मिलेगी। कार्यस्थल पर प्रशंसा होगी। हालांकि, स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न बरतें, थकान और गड़बड़ी की आशंका है।
♑ मकर आज का दिन निर्णय लेने के लिए उपयुक्त है। कुछ अच्छे फैसले आपके भविष्य की नींव मजबूत करेंगे। हालांकि, मेहनत अधिक और लाभ अपेक्षाकृत कम रहेगा।
♒ कुंभ जोखिम भरे कार्यों से दूरी बनाए रखें। सोच-समझकर कदम उठाएं। विशेष ध्यान और मेहनत से ही आप दूसरों का विश्वास जीत पाएंगे।
♓ मीन रोज़गार और व्यवसाय में लाभ के योग हैं। करियर की दिशा में प्रगति होगी। संपत्ति खरीदने या निवेश करने के भी शुभ अवसर बन सकते हैं।