बलरामपुर (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रीय खेल दिवस फिटनेस एवं खेलो को बढ़ावा देने के लिए स्पोर्ट स्टेडियम में प्रशासन एकादश एवं पुलिस एकादश में फ्रेंडली क्रिकेट मैच हुआ। मैच में डीएम पवन अग्रवाल एवं विकास कुमार द्वारा प्रतिभाग किया गया। इस दौरान डीएम पवन अग्रवाल ने कहा कि सभी स्वस्थ रहने के लिए नियमित खेलों से जुड़े रहें। फ्रेंडली मैच में मुख्य विकास अधिकारी, एडीएम वित्त एवं राजस्व, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ,सीओ उतरौला , सीओ लालिया , बीएसए व अन्य संबंधित अधिकारी / कर्मचारीगण उपस्थित रहें।
श्रीदत्तगंज/बलरामपुर (राष्ट्र की परम्परा)। थाना श्रीदत्तगंज क्षेत्र के ग्राम कपौवा शेरपुर कर्बला के पास स्थित जामिया अलीमा सादिया लड़कियों का मदरसा शुक्रवार को प्रशासनिक कार्रवाई के बाद बंद करा दिया गया। अचानक अपर पुलिस अधीक्षक समेत कई थानों की पुलिस और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की टीम के पहुंचने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। मदरसे के बाहर पुलिस बल की तैनाती देख लोग उत्सुकतावश मौके पर जुट गए। जांच के दौरान मदरसे के संचालन से जुड़े सदर गुलाम मैनुद्दीन कोई भी दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं कर सके। मदरसे में हॉस्टल भी संचालित था, जहां 39 छात्राएं रह रही थीं। जांच टीम ने परिजनों को सूचना देकर सभी छात्राओं को उनके हवाले कर दिया। सीओ उतरौला राघवेंद्र सिंह ने बताया कि जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा मदरसे की जांच की जा रही है। दस्तावेज़ उपलब्ध न होने के कारण कार्रवाई करते हुए मदरसे को फिलहाल बंद करा दिया गया है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सिकन्दरपुर/बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के मतुरी गांव निवासी एहसान खान 27 अगस्त को साइबर ठगी का शिकार हो गए। उन्हें एक व्यक्ति ने फेसबुक कॉल के जरिए अपने आपको उनका भांजा रियाज अहमद (निवासी शेखपुरा मर्यादपुर, जनपद मऊ) बताते हुए फोन किया। कॉल करने वाले ने कहा कि वह एयरपोर्ट पर फंसा हुआ है और तुरंत 1 लाख रुपये की जरूरत है। कॉल करने वाले ने अपना नाम वकार साहब बताया और पैसे भेजने के लिए जितेंद्र जना नामक व्यक्ति का बैंक अकाउंट नंबर 347922010003401 (IFSC: UBEN0934798) दिया। परिजन समझ बैठे कि सचमुच भांजा मुसीबत में है और बिना पुष्टि किए ही एहसान खान ने दो बार में 50-50 हजार रुपये भेज दिए। सौभाग्य से बैंक अकाउंट की लिमिट केवल 50 हजार ही थी, अन्यथा और बड़ी ठगी हो सकती थी। घटना के बाद एहसान ने तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई और थाने में भी लिखित आवेदन दिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। क्राइम इंस्पेक्टर नरेश मलिक की अपील अपील पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन या सोशल मीडिया कॉल पर बिना पुष्टि किए पैसे न भेजें। यदि ऐसी कोई स्थिति आती है तो पहले परिजनों से संपर्क कर सत्यता की जांच करें और संदेह होने पर तुरंत 1930 या स्थानीय थाने में सूचना दें।
स्कूल में हिंदी कविता गायन, जनरल नॉलेज प्रतियोगिता एवं क्लास मॉनिटर इन्वेस्टीचर सेरेमनी का भव्य आयोजन
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला मुख्यालय स्थित ब्लूमिंग बड्स स्कूल, मेन ब्रांच में मॉनिटर इन्वेस्टीचर सेरेमनी, अंतरविद्यालयीय जनरल नॉलेज क्विज एवं हिंदी कविता गायन प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रबंध निदेशिका पुष्पा चतुर्वेदी ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष माल्यार्पण एवं पुष्पार्चन कर किया। कार्यक्रम का संचालन ओमप्रकाश मिश्रा, अंबरीश राय एवं बच्चों द्वारा किया गया। विद्यालय द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर प्रत्येक कक्षा से चयनित प्रथम एवं द्वितीय मॉनिटर को बैज एवं सैश प्रदान कर कर्तव्य-बोध का महत्व समझाया गया। प्रतियोगिताओं में विजयी प्रतिभागियों को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया, जिससे बच्चों में हर्ष एवं उत्साह का वातावरण देखने को मिला। जनरल नॉलेज क्विज प्रतियोगिता में कक्षा 6, 7 और 8 में ब्लूमिंग बड्स मेन ब्रांच एवं इंडस्ट्रियल एरिया ब्रांच ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। हिंदी कविता गायन प्रतियोगिता में कक्षा 9 में समृद्धि पांडेय प्रथम, आद्रिका मणि द्वितीय तथा दिव्या पांडे तृतीय स्थान पर रहीं। कक्षा 10 में प्रज्ञा पांडे ने प्रथम, खुशी मिश्रा ने द्वितीय तथा आयुषी उपाध्याय ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कक्षा 11 में शिखा शुक्ला प्रथम, मुस्कान द्वितीय तथा सुहानी तृतीय स्थान पर रहीं। वहीं कक्षा 12 में खुशी यादव ने प्रथम, सिद्धि मिश्रा एवं शिवांगी ने संयुक्त रूप से द्वितीय तथा शिवम चतुर्वेदी ने तृतीय स्थान अर्जित किया। प्रधानाचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी संस्था की शिक्षा की गुणवत्ता और उन्नयन को दर्शाती है। ऐसे आयोजन बच्चों के सार्वभौमिक, नैतिक एवं चारित्रिक विकास में सहायक होते हैं। प्रबंध निदेशिका पुष्पा चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रभा सेवा समिति द्वारा संचालित संस्थान अपनी प्रगतिशील गतिविधियों से समाज में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं और भविष्य में भी शिक्षा की इस दिशा को और सशक्त बनाते रहेंगे। इस अवसर पर प्रभा देवी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रमोद त्रिपाठी, डॉ. अमरनाथ पांडे, डॉ. कौशलेंद्र कुमार त्रिपाठी, एक्जिकूटिव हेड दिनेश चंद्र पांडे, अनूप विश्वकर्मा, डॉ. मीना सिंह, रीमा शुक्ला, रीता यादव, प्रभाकर त्रिपाठी, संजय जायसवाल, हेमंत त्रिपाठी, नेहा राय एवं अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।
सिद्धार्थनगर (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर आगामी 13 सितम्बर 2025 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर आज 30 अगस्त 2025 को परिवार न्यायालय, सिद्धार्थनगर में एक प्री-ट्रायल बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता माननीय अखिलेश कुमार पाण्डेय, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, सिद्धार्थनगर ने की। इस अवसर पर शैलेन्द्र नाथ, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सिद्धार्थनगर, परिवार न्यायालय के परामर्शदाता तथा मध्यस्थता केन्द्र के मध्यस्थगण उपस्थित रहे। बैठक में प्रधान न्यायाधीश श्री पाण्डेय ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक पारिवारिक विवादों के मामले सुलह एवं समझौते के आधार पर निस्तारित किए जाने चाहिए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके और पक्षकारों को शीघ्र न्याय मिले। उन्होंने परामर्शदाता एवं मध्यस्थगण को निर्देशित किया कि वे चिन्हित पारिवारिक वादों में दोनों पक्षों को आपसी सहमति से समाधान निकालने हेतु प्रोत्साहित करें। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अगली प्री-ट्रायल बैठक 04 सितम्बर 2025 को आयोजित की जाएगी। इसके लिए पक्षकारों को समय से नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए, ताकि वे बैठक में उपस्थित होकर सुलह-समझौते की प्रक्रिया में भाग ले सकें। साथ ही मध्यस्थों एवं परामर्शदाताओं को यह भी निर्देशित किया गया कि वे अगली बैठक से पूर्व संबंधित पक्षकारों के साथ अलग-अलग बैठकें कर आपसी बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास करें। ज्ञात हो कि 13 सितम्बर 2025 को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में जिले के चिन्हित पारिवारिक वादों का बड़े पैमाने पर निस्तारण किया जाएगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का प्रयास है कि अधिक से अधिक मामलों को आपसी सहमति से सुलझाकर लोक अदालत को सफल बनाया जाए।
कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर की अध्यक्षता एवं पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार मिश्रा की उपस्थिति में जनपदीय सड़क सुरक्षा समिति एवं विद्यालय परिवहन यान सुरक्षा समिति की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में हुई। बैठक में ई-रिक्शा के संचालन हेतु कसया व पड़रौना में रूट मैप और कलर कोडिंग बनाने, दुर्घटनाओं का आईरैड ऐप पर संकलन, एनएच पर अवैध कट बंद करने व आवश्यकतानुसार फुट ओवरब्रिज बनाने के निर्देश दिए गए। डीएम ने अनफिट वाहनों को प्राथमिकता से सीज करने, स्कूल प्रबंधकों को परिवहन समिति गठन करने, स्कूल वाहनों का फिटनेस अनिवार्य कराने और चालकों का चरित्र सत्यापन कराने के आदेश दिए। वहीं, पेट्रोल पंपों पर “नो हेलमेट-नो फ्यूल” नियम का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए गए। बैठक में एडीएम वैभव मिश्रा, एआरटीओ, पीडब्ल्यूडी, डीएसओ, बीएसए सहित सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
हरियाणा की ट्रांसफर पॉलिसी : सुधार की ज़रूरत या असंतोष का अड्डा
सरकार ने पारदर्शिता और न्याय की मंशा से ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू की थी, लेकिन आज यह नीति शिक्षकों के लिए बोझ और असंतोष का कारण बन चुकी है।
हरियाणा की ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी, जो 2016 में शिक्षकों के लिए पारदर्शिता का प्रतीक बनकर आई थी, अब उनकी सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। वर्षों से ट्रांसफर लंबित हैं, ब्लॉक सिस्टम बाधा बन गया है और विद्यालयों में शिक्षकों का असंतुलन गहरा रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। सरकार को चाहिए कि समयबद्ध ट्रांसफर ड्राइव चलाए और पॉलिसी में सुधार करे, ताकि न तो शिक्षक परेशान हों और न ही छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो। हरियाणा सरकार ने वर्ष 2016 में शिक्षकों के लिए ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू की थी। उस समय इसे शिक्षा जगत में बड़े सुधार के रूप में देखा गया। दशकों से यह आरोप लगता रहा कि तबादलों में राजनीतिक हस्तक्षेप, भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार हावी रहते थे। कई शिक्षक मनचाही जगह सेवा करते थे जबकि अन्य दूरदराज़ और कठिन क्षेत्रों में वर्षों तक फंसे रहते थे। इस असमानता ने शिक्षा व्यवस्था को भी गहरा नुकसान पहुँचाया।
ऑनलाइन पॉलिसी ने शुरू में उम्मीद जगाई। कहा गया कि शिक्षक अपनी पसंद और प्राथमिकता ऑनलाइन दर्ज करेंगे और मेरिट के आधार पर तबादला होगा। इससे भेदभाव खत्म होगा और पारदर्शिता आएगी। परंतु नौ साल बाद यह योजना अब विवादों और असंतोष का दूसरा नाम बन चुकी है।
आश्वासन और हकीकत
हर साल नए शैक्षणिक सत्र से पहले आश्वासन दिया जाता है कि ट्रांसफर होंगे, लेकिन अक्सर यह प्रक्रिया अधूरी रह जाती है। इस साल भी अप्रैल में घोषणा की गई थी कि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए ट्रांसफर सत्र शुरू होने से पहले कर दिए जाएंगे। मगर अगस्त बीत गया और शिक्षकों को निराशा हाथ लगी। जब-जब ऐसी घोषणाएँ अधूरी रह जाती हैं, तो शिक्षकों का मनोबल टूटता है और शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ता है।
ब्लॉक सिस्टम की पेचीदगी
इस नीति की सबसे बड़ी खामी “ब्लॉक सिस्टम” है। सरकार का तर्क है कि इससे प्रशासनिक सुविधा मिलती है और शिक्षक नज़दीकी ब्लॉक में ही स्थानांतरित होते हैं। लेकिन व्यवहार में यह उल्टा साबित हुआ। कई बार एक ही ब्लॉक में किसी विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी होती है, वहीं कुछ विद्यालयों में जरूरत से ज्यादा स्टाफ मौजूद होता है। नीति की जटिलता के कारण समायोजन नहीं हो पाता और विद्यार्थी शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
एक उदाहरण समझिए—मान लीजिए एक ब्लॉक में गणित के शिक्षक की 15 सीटें हैं लेकिन वहां 20 शिक्षक तैनात हैं, जबकि उसी जिले के दूसरे ब्लॉक में 10 सीटें खाली पड़ी हैं। ब्लॉक सिस्टम के कारण अतिरिक्त शिक्षक चाहकर भी खाली स्कूलों में नहीं भेजे जा सकते। इसका सीधा नुकसान विद्यार्थियों को होता है।
शिक्षकों का दृष्टिकोण
शिक्षक केवल अपनी सुविधा के लिए तबादले नहीं मांगते। वे चाहते हैं कि शिक्षा व्यवस्था सुचारु रूप से चले, ताकि उनकी मेहनत सार्थक हो सके। जब वर्षों तक ट्रांसफर लंबित रहते हैं, तो शिक्षक घर-परिवार से दूर रहकर मानसिक तनाव झेलते हैं। कई महिला शिक्षक छोटे बच्चों को छोड़कर दूरदराज़ स्थानों पर सेवाएँ दे रही हैं। ऐसे हालात में उनका मन पढ़ाई पर कितना केंद्रित रह पाता होगा, यह सोचना मुश्किल नहीं।
दूसरी ओर, कई शिक्षक लंबे समय से एक ही जगह टिके हुए हैं। इससे उन पर पक्षपात और भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं। यह भी सच है कि लंबे समय तक एक ही विद्यालय में रहने वाले शिक्षक और प्रधानाध्यापक स्थानीय राजनीति का हिस्सा बन जाते हैं और शिक्षा से ज्यादा निजी हितों में उलझ जाते हैं। इस असंतुलन को खत्म करना बेहद ज़रूरी है।
शिक्षा पर असर
जब किसी विद्यालय में वर्षों तक विज्ञान या गणित का शिक्षक नहीं होता, तो छात्र पीछे रह जाते हैं। बोर्ड परीक्षा परिणाम गिरते हैं और इसका दोष अक्सर छात्रों या अभिभावकों पर मढ़ दिया जाता है। लेकिन असली जिम्मेदार प्रणाली है, जो समय पर सही अध्यापक नहीं भेज पाती। शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) कहता है कि हर विद्यालय में सभी विषयों के शिक्षक होना अनिवार्य है, लेकिन ट्रांसफर पॉलिसी की कमजोरियों ने इस लक्ष्य को ध्वस्त कर दिया है।
संगठन की भूमिका
हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन (हसला) लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है। संगठन का कहना है कि सरकार को समयबद्ध ट्रांसफर ड्राइव शुरू करनी चाहिए। यदि कोई स्कूल खाली रह जाता है, तो जिला स्तर पर शिक्षा अधिकारियों को डिप्यूटेशन का अधिकार दिया जाए। यह सुझाव व्यवहारिक है, क्योंकि इससे तत्कालीन संकट टाला जा सकता है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या सरकार इतनी इच्छाशक्ति दिखाएगी? कई बार लगता है कि ट्रांसफर पॉलिसी का उपयोग प्रशासनिक नियंत्रण और राजनीतिक दबाव बनाए रखने के लिए किया जा रहा है। जब चाहा प्रक्रिया रोक दी जाती है और जब चाहा कुछ तबादले चुनिंदा लोगों के लिए खोल दिए जाते हैं। इससे शिक्षकों का विश्वास डगमगाता है।
डिजिटलाइजेशन बनाम ज़मीनी हकीकत
सरकार ने पॉलिसी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डालकर इसे “ई-गवर्नेंस” की सफलता बताया। लेकिन केवल पोर्टल बना देने से समस्या हल नहीं होती। डिजिटल प्लेटफॉर्म तभी सफल होता है जब उसमें समयबद्धता और जवाबदेही हो। यदि हर साल प्रक्रिया अधूरी ही छोड़ दी जाए, तो ऑनलाइन सिस्टम भी महज़ दिखावा बनकर रह जाता है।
आज हाल यह है कि कई शिक्षक हर साल ऑनलाइन आवेदन करते हैं, फीस जमा करते हैं, दस्तावेज़ अपलोड करते हैं, लेकिन अंत में परिणाम “कोई ट्रांसफर नहीं” निकलता है। ऐसे में उनमें गुस्सा और हताशा स्वाभाविक है।
शिक्षा मंत्री और हकीकत
शिक्षा मंत्री बार-बार कहते हैं कि “जल्द ही ट्रांसफर होंगे” लेकिन नौकरशाही और नीति की जटिलता के कारण बात आगे नहीं बढ़ती। इस बीच, सत्र बीत जाता है और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा चर्चा में रहता है, लेकिन समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं होती।
समाधान क्या है?
ब्लॉक सिस्टम की समीक्षा – इसे या तो खत्म किया जाए या लचीला बनाया जाए, ताकि शिक्षक जरूरत वाले स्कूलों तक पहुँच सकें।
समयबद्ध ट्रांसफर ड्राइव – हर साल अप्रैल से पहले प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य किया जाए।
डिप्यूटेशन का अधिकार जिला स्तर पर – खाली स्कूलों को भरने के लिए अधिकारियों को अधिकार दिया जाए।
पारदर्शिता और जवाबदेही – यदि किसी शिक्षक का ट्रांसफर नहीं होता, तो स्पष्ट कारण बताए जाएं।
मानवीय दृष्टिकोण – महिला शिक्षकों, विकलांग शिक्षकों और कठिन क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान हों।
शिक्षा की आत्मा
समाज में शिक्षा सबसे पवित्र कार्य है। यदि शिक्षक ही असंतोष में रहेंगे, तो वे विद्यार्थियों तक सकारात्मक ऊर्जा कैसे पहुँचाएंगे? एक निराश और हताश शिक्षक बच्चों को वही भाव देगा जो उसके भीतर है। इसलिए शिक्षक की समस्याओं को केवल “ट्रांसफर की मांग” मानकर टालना सही नहीं। यह शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ को मज़बूत करने का सवाल है।
सरकार को चाहिए कि वह शिक्षकों को केवल “डाटा” न माने, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण की आधारशिला समझे। शिक्षक का मनोबल तभी ऊँचा होगा जब उसे न्यायपूर्ण और पारदर्शी व्यवस्था मिलेगी।
सुधार की ज़रूरत या असंतोष का अड्डा
ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी की समीक्षा करके उसमें आवश्यक सुधार करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जब तक इस नीति में पारदर्शिता, समयबद्धता और मानवीय दृष्टिकोण नहीं जुड़ता, तब तक यह केवल कंप्यूटर स्क्रीन पर चमकती फाइलें भर रहेगी, जमीनी हकीकत में नहीं।
शिक्षकों की आवाज़ अनसुनी करना न सिर्फ उनके साथ अन्याय है, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। सरकार को तुरंत कदम उठाकर इस जंजाल को दूर करना चाहिए। तभी शिक्षा का स्तर सुधरेगा और शिक्षक अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा से निभा पाएंगे।
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। पुलिस अधीक्षक विक्रान्त वीर के निर्देशन में जिलेभर में पुलिस द्वारा बैंक चेकिंग अभियान चलाया गया। सभी थाना प्रभारियों ने अपनी टीमों के साथ बैंकों, एटीएम, ग्राहक सेवा केन्द्रों व पेट्रोल पंपों की सघन चेकिंग की। अभियान का उद्देश्य अपराध रोकथाम व कानून-व्यवस्था बनाए रखना था। इस दौरान सुरक्षा गार्डों की मौजूदगी, सीसीटीवी कैमरों की स्थिति और संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया गया।
बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। राम जानकी मार्ग पर नाली निर्माण न होने से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। मौना गाँव के समीप ठेकेदार द्वारा नाला निर्माण नहीं कराया जा रहा है, जिसे लेकर ग्रामीणों ने चिंता जताई है और विभाग के अधिकारियों से सड़क किनारे नाला निर्माण करने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा मनमानी की जा रही है और सड़क के किनारे नाली नहीं बनाई जा रही है। इससे गांव में जल भराव की समस्या उत्पन्न होने की संभावना है। ग्रामीणों ने विभाग के अधिकारियों और एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर से सड़क के किनारे नाला बनवाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क के किनारे जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो वे सड़क निर्माण का विरोध करेंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि वे सड़क निर्माण नहीं होने देंगे यदि उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं। राम जानकी मार्ग बड़हलगंज से लेकर मेहरौना घाट तक का कार्य किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा सड़क निर्माण के साथ-साथ नाला निर्माण की भी अनदेखी की जा रही है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है और वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को तैयार हैं।
बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता के संरक्षण में चल रहे तीन दिवसीय राष्ट्रीय खेल दिवस कार्यक्रम के दूसरे दिन विभिन्न आयोजन हुए। शुभारंभ कुलसचिव एस.एल. पाल ने मेजर ध्यानचंद को नमन कर किया। प्रथम सत्र में योग पर व्याख्यान एवं अभ्यास हुआ, जिसमें मुख्य वक्ता डॉ. विवेक सिंह ने योग को जीवन को बेहतर बनाने का सर्वोत्तम माध्यम बताया। द्वितीय सत्र में शतरंज प्रतियोगिता और तृतीय सत्र में निबंध प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. पुष्पा मिश्रा ने की। संचालन डॉ. सरिता पाण्डेय व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रमोद शंकर पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर कई प्राध्यापक व छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे
बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों की बैठक आयोजित हुई। बैठक में बाढ़ प्रभावित विद्यालयों की स्थिति, जर्जर भवनों की सूची, विद्युत आपूर्ति और स्वच्छता से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जिन विद्यालयों में अब भी पानी भरा हुआ है या गंदगी फैली हुई है, उन्हें साफ-सफाई के बाद ही खोला जाए। साथ ही एक सप्ताह के भीतर सभी बाढ़ प्रभावित विद्यालयों की सूची तैयार कर विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जर्जर विद्यालयों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई समय रहते सुनिश्चित की जाए। विद्युत व्यवस्था को लेकर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई और निर्देश दिए कि जिन विद्यालयों में बिजली का कनेक्शन नहीं है, वहां 15 दिनों के भीतर कनेक्शन कराया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 15 सितम्बर तक जिन विद्यालयों में टॉयलेट निर्माण पूर्ण नहीं होगा, उनके संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों का वेतन रोक दिया जाएगा। इसके अलावा, विद्यालयों में किचन सेट की उपलब्धता सुनिश्चित करने, क्लॉथ रूम में टाइल्स लगाने तथा स्वच्छता टॉयलेट को प्राथमिकता पर कराने का आदेश दिया गया। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में बच्चों की सुविधा हेतु पर्याप्त संख्या में डाइनिंग टेबल व चेयर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना शिक्षा विभाग की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। बैठक में सीडीओ ओजस्वी राज, डीडीओ आनंद कुमार समेत सभी खंड शिक्षा अधिकारी मौजूद रहे।
बेंगलुरु (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को उन सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की कड़ी आलोचना की, जिन्होंने 2011 के सलवा जुडूम फैसले को लेकर विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी पर आपत्ति जताई थी।
पत्रकारों से बातचीत में रिजिजू ने कहा कि हाल ही में कुछ पूर्व न्यायाधीशों ने गृह मंत्री के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाया है, जो बिल्कुल अनुचित है। उन्होंने सवाल उठाया कि उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, ऐसे में रिटायर्ड जज इस तरह के राजनीतिक विवाद में क्यों पड़ रहे हैं?
रिजिजू ने कहा, “कुछ दिन पहले कुछ सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने गृह मंत्री के खिलाफ टिप्पणियां करते हुए एक हस्ताक्षर अभियान चलाया। यह सही नहीं है। यह उपराष्ट्रपति चुनाव है, इसमें न्यायपालिका से सेवानिवृत्त लोग क्यों दखल दे रहे हैं? इससे संदेह पैदा होता है कि जब वे कार्यरत थे, तब उनकी विचारधारा क्या रही होगी।”
उन्होंने साफ किया कि उपराष्ट्रपति चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत हो रहा है और इसमें किसी तरह की बाहरी दखलअंदाजी उचित नहीं है।
जयपुर। (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राजस्थान विधानसभा के पूर्व सदस्य के रूप में पेंशन के लिए आवेदन किया है। विधानसभा सचिवालय ने उनके आवेदन को मंजूरी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
धनखड़ हाल ही में उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद अब पूर्व विधायक पेंशन के पात्र हो गए हैं। वह वर्ष 1993 में कांग्रेस के टिकट पर अजमेर जिले की किशनगढ़ विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए थे और 10वीं राजस्थान विधानसभा (1993–1998) के सदस्य रहे।
विधानसभा सचिवालय के अनुसार, औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद उन्हें हर माह लगभग 42,000 रुपये पेंशन मिलेगी। पहले यह राशि 35,000 रुपये थी। नियमों के तहत यदि भविष्य में उनकी आयु 80 वर्ष से अधिक हो जाती है, तो उनकी पेंशन राशि में 30 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि की जाएगी।
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, “पूर्व विधायक के रूप में पेंशन के लिए जगदीप धनखड़ का आवेदन प्राप्त हो गया है और आवश्यक कार्यवाही चल रही है। जल्द ही उन्हें पेंशन मिलना शुरू हो जाएगी।”
गौरतलब है कि जगदीप धनखड़ का सार्वजनिक जीवन लंबा और प्रतिष्ठित रहा है। वकालत से लेकर राजनीति और फिर देश के 14वें उपराष्ट्रपति तक की उनकी यात्रा हमेशा चर्चा में रही।
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के यूजीसी–मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर (MMTTC) द्वारा 11वाँ ऑनलाइन राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) ओरिएंटेशन एवं सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम आगामी 2 से 10 सितम्बर 2025 तक आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों एवं शोधार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मूल अवधारणाओं तथा उसके प्रभावी क्रियान्वयन से अवगत कराना है। उद्घाटन सत्र का आयोजन 2 सितम्बर को अपराह्न 2:00 बजे होगा। सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन करेंगी। मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी, पूर्व कुलपति, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक (म.प्र.) तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. संजीत कुमार गुप्ता, कुलपति, जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया (उ.प्र.) उपस्थित रहेंगे। संयोजक, अंग्रेजी विभाग के आचार्य एवं पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने बताया कि निदेशक प्रो. चंद्रशेखर के मार्गदर्शन में यह आयोजन हो रहा है, जिसमें देशभर के विश्वविद्यालयों से संकाय सदस्यों और शोधार्थियों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित है। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों की रुचि को देखते हुए विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिष्ठित रिसोर्स पर्सन्स आमंत्रित किए गए हैं। इस दस दिवसीय कार्यक्रम में एनईपी-2020 के सभी प्रमुख आयामों पर चर्चा की जाएगी। इनमें अंतरविषयक एवं बहुविषयक शिक्षा और शोध, भारतीय ज्ञान परम्परा एवं सांस्कृतिक धरोहर, शासन एवं नेतृत्व, समानता एवं समावेशिता, शोध एवं नवाचार, कौशल विकास एवं उद्यमिता, डिजिटल एवं एआई सक्षम शिक्षण, छात्र परामर्श एवं समग्र विकास तथा सतत विकास लक्ष्यों से उच्च शिक्षा की संबद्धता जैसे विषय शामिल होंगे। यह कार्यक्रम प्रतिदिन ऑनलाइन माध्यम से दो सत्रों—दोपहर 2:00 से 3:30 बजे और 3:45 से 5:15 बजे—में संचालित किया जाएगा। पंजीकरण निःशुल्क है और इसकी अंतिम तिथि 1 सितम्बर 2025, रात्रि 12:00 बजे निर्धारित है। कार्यक्रम के सह-संयोजक समाजशास्त्र विभाग के सहायक आचार्य डॉ. मनीष कुमार पाण्डेय हैं।
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा) । विद्यार्थियों की सुरक्षा, गरिमा एवं अनुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में एंटी रैगिंग कमेटी, एंटी रैगिंग स्क्वाड एवं रैगिंग मॉनिटरिंग सेल का गठन किया गया है। यह निर्णय विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टण्डन के आदेशानुसार लिया गया। एंटी रैगिंग कमेटी की अध्यक्षता कुलपति प्रो. पूनम टण्डन करेंगी। समिति में प्रशांत वर्मा, अपर नगर मजिस्ट्रेट (प्रथम), गोरखपुर को जिला प्रशासन के प्रतिनिधि के रूप में सम्मिलित किया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के प्रतिनिधि के रूप में क्षेत्राधिकारी कैण्ट, डॉ. राकेश राय को स्थानीय समाचार माध्यम प्रतिनिधि तथा मान्धाता सिंह (युवा चेतना समिति) को गैर-सरकारी संगठन प्रतिनिधि नामित किया गया है। इसके अतिरिक्त समस्त संकायाध्यक्ष, डॉ. चन्द्रकान्त चौबे (अभिभावक प्रतिनिधि), शिवम निषाद (विधि विभाग, प्रथम सेमेस्टर – नवप्रवेशित छात्र प्रतिनिधि) तथा नवीन उपाध्याय (शोध छात्र, सांख्यिकी विभाग, वरिष्ठ छात्र प्रतिनिधि) सदस्य होंगे। एंटी रैगिंग स्क्वाड की अध्यक्षता प्रो. विनय कुमार सिंह, नियंता, द्वारा की जाएगी। इसमें समस्त संकायाध्यक्ष, विश्वविद्यालय अभियन्ता तथा सभी छात्रावासों के अधीक्षक एवं अभिरक्षक सदस्य होंगे। रैगिंग मॉनिटरिंग सेल रैगिंग मॉनिटरिंग सेल की अध्यक्षता कुलपति प्रो. पूनम टण्डन करेंगी। यह सेल एंटी रैगिंग कार्यक्रमों की अनुश्रवण व्यवस्था एवं सभी महाविद्यालयों के साथ समन्वय हेतु गठित किया गया है। इसके सदस्य वरिष्ठतम संकायाध्यक्ष, कुलसचिव तथा प्रो. विनय कुमार सिंह होंगे। कुलपति प्रो. पूनम टण्डन ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में रैगिंग जैसी किसी भी गतिविधि के प्रति शून्य सहनशीलता नीति (Zero Tolerance Policy) अपनाई जाएगी तथा दोषी पाए जाने पर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।