मालदह बाजार सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया ने स्थानीय दुकानदारों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में सड़क के किनारे अपनी जीविका चलाने वाले सैकड़ों छोटे-बड़े दुकानदारों को यह आशंका सताने लगी है कि सड़क के बीच से 13 मीटर की ज़मीन लिए जाने के बाद भी अतिरिक्त भूमि जाने की संभावना जताई जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि यदि सड़क चौड़ीकरण की सीमा बढ़ाई गई तो उनके दुकानों और ठेलों पर सीधा असर पड़ेगा। इससे उनकी जीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा। वर्षों से दुकान चला रहे एक दुकानदार ने बताया, “हमारा पूरा परिवार इसी दुकान से पलता है। अगर यह उजड़ गई तो रोज़गार का कोई सहारा नहीं बचेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्य का विरोध नहीं है, लेकिन छोटे दुकानदारों की आजीविका को सुरक्षित रखने की गारंटी होनी चाहिए। इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि सड़क चौड़ीकरण योजना जनहित में है, लेकिन किसी की जीविका पर आंच न आए इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि दुकानदारों के सुझाव और समस्याओं को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
मुंबई(राष्ट्र की परम्परा ) जनपद जौनपुर स्थित (बदलापुर) भारतीय जनता पार्टी के लोकप्रिय विधायक रमेशचंद्र मिश्र का मुंबई आगमन पर उत्तर भारतीय समाज की ओर से भव्य स्वागत किया गया। विधायक रमेशचंद्र मिश्र ने थाने स्थित हीरानंदानी क्षेत्र स्थित उद्योगपति प्रशांत एवं बृजेश मिश्रा के गणेश पूजा कार्यक्रम में सम्मिलित होकर भगवान गणेशजी के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य जनों में एडवोकेट प्रदीप मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार पवन पाठक, एडवोकेट रोशन यादव, भाजपा नेता अरुण शुक्ला, युवा नेता अज्जू दुबे और पंकज तिवारी सहित बड़ी संख्या में उत्तरभारतीय समाज के लोग मौजूद रहे। विधायक रमेशचन्द्र मिश्र के स्वागत के दौरान उत्तर भारतीयों ने उनके प्रति आभार और समर्थन व्यक्त करते हुए जोरदार अभिनंदन किया।
दिवा/ महाराष्ट्र(राष्ट्र की परम्परा) कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहे स्थानीय नेता मोतीलाल वर्मा ने अपने समर्थकों के साथ राष्ट्रीय समाजवादी स्वाभिमान मंच का दामन थाम लिया। यह प्रवेश पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा की उपस्थिति में हुआ। मोतीलाल वर्मा के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता और समाजसेवी भी पार्टी में शामिल हुए। इस मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा ने वर्मा और उनके साथ आए लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि पार्टी में हर कार्यकर्ता को समान अवसर दिया जाएगा और जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाया जाएगा। वहीं, मोतीलाल वर्मा ने कहा कि अब समय आ गया है कि जनता के असली हक और अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि राष्ट्रीय समाजवादी स्वाभिमान मंच ही आम लोगों की आवाज़ को मजबूती से आगे बढ़ा सकता है। इस मौके पर पार्टी के पदाधिकारी और स्थानीय कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
काबुल/इस्लामाबाद (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्वी कुनर प्रांत में रविवार देर रात आए 6.0 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक अब तक 500 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि हजारों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। सैकड़ों लोग घायल हैं और बड़ी संख्या में मकान, स्कूल व मस्जिदें ढह गईं।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र जलालाबाद से 27 किमी उत्तर-पूर्व में था और यह रात 11:47 बजे (स्थानीय समय) पर आया। भूकंप की गहराई महज 8-10 किमी थी, जिसके चलते मिट्टी और पत्थर से बने घर पलभर में ध्वस्त हो गए।
सबसे ज्यादा तबाही कुनर में
नंगरहार प्रांत के संचार अधिकारी सिदीकुल्लाह कुरैशी बादलून ने बताया कि सबसे ज्यादा जनहानि कुनर में हुई है। नंगरहार में भी 9 लोगों की मौत दर्ज की गई है। स्वास्थ्य मंत्री शराफत ज़मान ने आशंका जताई है कि दुर्गम इलाकों तक बचाव दलों के देर से पहुंचने के कारण मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।
मलबे में दबी ज़िंदगियां
प्रांतीय सूचना प्रमुख नजीबुल्लाह हनीफ ने बताया कि सैकड़ों घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कई बच्चों की मौत घरों की छत गिरने से हुई है। भूकंप के झटके पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद तक (370 किमी दूर) महसूस किए गए।
तीन आफ्टरशॉक्स से दहशत
मुख्य झटके के बाद तीन आफ्टरशॉक्स भी महसूस किए गए, जिससे लोग दहशत में रातभर खुले में डरे-सहमे बैठे रहे।
विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि अफगानिस्तान का हिंदूकुश इलाका यूरेशियन और भारतीय टेक्टोनिक प्लेटों के संगम पर होने की वजह से अत्यधिक भूकंप-संवेदनशील है। दशकों से संघर्ष और गरीबी से जूझ रहे देश पर ऐसी आपदाएँ पुनर्निर्माण की राह और कठिन बना रही हैं।
देवरिया, (राष्ट्र की परम्परा) देवरिया की जिलाधिकारी दिव्या मित्तल को केंद्र सरकार की विकसित भारत परिकल्पना स्ट्रेटजी में प्रतिभाग हेतु चुना गया है। वे प्रदेश की एकमात्र जिलाधिकारी हैं जिन्हें 4 सितंबर को नई दिल्ली स्थित नीति आयोग में होने वाले सम्मेलन में शामिल होने का अवसर मिलेगा। सम्मेलन में वे विकसित राष्ट्र की परिकल्पना एवं प्रशासनिक नवाचार से जुड़े अनुभव साझा करेंगी। पूर्व में भी वे राष्ट्रीय मुख्य सचिव सम्मेलन (दिसंबर 2024) में प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। आईआईटी दिल्ली व आईआईएम बेंगलुरु से शिक्षित दिव्या मित्तल ने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य व पेयजल जैसी योजनाओं में नवाचार कर प्रशासनिक दक्षता का परिचय दिया है। यह उपलब्धि न सिर्फ देवरिया बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण है।
देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)पुलिस अधीक्षक विक्रान्त वीर के निर्देशन में जनपद पुलिस ने विशेष मॉर्निंग वॉकर चेकिंग अभियान चलाया। यह अभियान प्रातः 5 बजे से 8 बजे तक विभिन्न थानों के क्षेत्रों में संचालित किया गया।अभियान के दौरान थाना प्रभारियों ने मॉर्निंग वॉक पर निकले आमजन से संवाद स्थापित कर सुरक्षा का भरोसा दिलाया। साथ ही संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की गहन चेकिंग की गई। पुलिस का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य लोगों में विश्वास व सुरक्षा की भावना को और मजबूत करना, सामुदायिक स्तर पर छोटे-मोटे विवादों को निस्तारित करना और मित्र पुलिसिंग की भावना को बढ़ावा देना है।इस दौरान संदिग्ध व्यक्तियों की तलाशी, वाहनों की जांच, चोरी की गाड़ी पकड़ने, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने, तीन सवारी बैठाने, मॉडिफाइड साइलेंसर व तेज आवाज वाले लाउडस्पीकर का प्रयोग करने वालों पर कार्रवाई की गई। महिलाओं-बच्चियों पर फब्तियां कसने वालों व अवैध असलहा तथा मादक पदार्थों की रोकथाम पर भी विशेष निगरानी रखी गई।थानावार परिणाम जनपद में कुल 29 स्थानों पर चेकिंग की गई। इस दौरान 548 व्यक्तियों व 330 वाहनों की जांच की गई तथा नियम विरुद्ध चल रहे 2 वाहनों का चालान भी किया गया।जनसामान्य ने पुलिस की इस पहल की सराहना की और मॉर्निंग वॉक के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर संतोष जताया। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जनपदीय पुलिस द्वारा ऐसे अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेंगे ताकि आमजन में सुरक्षा और विश्वास की भावना बनी रहे।
तियानजिन (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र को सोमवार को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाया। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उद्घाटन भाषण के बाद मंच पर आए प्रधानमंत्री मोदी ने बिना नाम लिए पाकिस्तान को घेरते हुए कहा कि “कुछ देश खुले तौर पर आतंकवादी नेटवर्क का समर्थन और पनाह देते हैं, जो मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले का जिक्र किया, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कहा, “हमने पहलगाम में आतंकवाद का एक बेहद बुरा चेहरा देखा। क्या कुछ देशों द्वारा आतंकवाद को खुला समर्थन हमें कभी स्वीकार्य हो सकता है? आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंड अब स्वीकार्य नहीं हैं।”
इस दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी हॉल में मौजूद थे। मोदी ने कहा कि आतंकवाद और उग्रवाद पूरी मानवता के लिए साझा चुनौती हैं और जब तक ये खतरे बने रहेंगे, कोई भी देश या समाज खुद को सुरक्षित नहीं मान सकता। उन्होंने सदस्य देशों से शून्य सहनशीलता की नीति अपनाने का आग्रह किया।
मोदी ने साफ शब्दों में कहा, “आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। हमें हर रूप में इसकी निंदा करनी चाहिए। सीमा पार आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता मानवता के प्रति हमारा कर्तव्य है।” शी जिनपिंग का संदेश सम्मेलन की शुरुआत में अपने उद्घाटन भाषण में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एससीओ की भूमिका को क्षेत्र में स्थिरता की शक्ति बताया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका की रक्षा करने, एकतरफावाद का विरोध करने और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को कायम रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
राष्ट्रपति शी ने घोषणा की कि चीन, एससीओ सदस्य देशों में 100 लघु-स्तरीय विकास परियोजनाएँ लागू करेगा, जिनका उद्देश्य सबसे जरूरतमंद क्षेत्रों में आजीविका सुधारना और असमानता को कम करना है।
तियानजिन में हुए इस शिखर सम्मेलन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वैश्विक और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा है। प्रधानमंत्री मोदी के कड़े बयान और राष्ट्रपति शी के सहयोग व विकास के संकल्प ने एससीओ की दिशा को स्पष्ट संदेश दिया—आतंकवाद के खिलाफ सख्ती और सदस्य देशों के बीच गहन सहयोग।
गया। (राष्ट्र की परम्परा )गयाजी शहर में 6 सितंबर से शुरू हो रहे पितृपक्ष मेले के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को गयाजी पहुंचेंगे। वे यहां अपने पितरों का पिंडदान करेंगे और बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए रोड शो भी करेंगे। सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी गयाजी में रात्रि विश्राम भी कर सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पीएम मोदी के संभावित आगमन को लेकर जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस महकमे के वरीय अधिकारी पूरी तैयारी में जुट गए हैं। पितृपक्ष के दौरान देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु गयाजी पहुंचते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के धार्मिक अनुष्ठान और पिंडदान कार्यक्रम को लेकर भी विस्तृत प्लानिंग शुरू कर दी गई है।
पूर्णिया एयरपोर्ट और पटना मेट्रो का उद्घाटन
17 सितंबर को बिहार दौरे के दौरान पीएम मोदी कई विकास परियोजनाओं का भी शुभारंभ करेंगे। वे पूर्णिया एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे और साथ ही पटना मेट्रो को भी जनता को समर्पित कर सकते हैं। हाल ही में इन दोनों परियोजनाओं से जुड़े शेष कार्यों को जल्द पूरा करने का आदेश दिया गया था।
तियानजिन (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से इतर मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच बेहद गर्मजोशी भरे पल देखने को मिले।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने हाथ मिलाकर एक-दूसरे का स्वागत किया और गले मिलते हुए दोस्ताना संदेश दिया। यह दृश्य सम्मेलन में मौजूद अन्य प्रतिनिधियों का भी ध्यान खींच गया।
बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर दोनों नेताओं की तस्वीर साझा करते हुए लिखा – “राष्ट्रपति पुतिन से मिलना हमेशा खुशी की बात होती है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी–पुतिन की यह मुलाकात भारत और रूस के बीच लंबे समय से चली आ रही दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी की गहराई को दर्शाती है। दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श करते हैं।
SCO शिखर सम्मेलन में यह मुलाकात न केवल राजनीतिक दृष्टि से अहम रही बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत–रूस संबंधों की मजबूती का भी प्रतीक मानी जा रही है।
गणेश पूजा में नारियल अनिवार्य होता है,क्योंकि यह विघ्नहर्ता के आशीर्वाद का प्रतीक है।
गोंदिया – वैश्विक स्तरपर प्रकृति ने मानव को अनेक उपहार दिए हैं, जिनमें पेड़-पौधे, फल-फूल और जल हमारे अस्तित्व का आधार हैं। इन्हीं उपहारों में नारियल एक ऐसा फल है जिसे “जीवन वृक्ष” कहा जाता है। यह केवल एक खाद्य पदार्थ ही नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन के लिए उपयोगी संसाधन है। नारियल का पेड़, उसका फल,जटा, पत्तियाँ, लकड़ी,सब कुछ मानव सभ्यता को पोषण, आश्रय, औषधि और रोजगार प्रदान करता है।आज मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह बातें इसलिए कर रहा हूं क्योंकि नारियल के महत्व को रेखांकित करने के लिए हर वर्ष 2 सितंबर 2025 को “विश्व नारियल दिवस” मनायाजा रहा है। 2009 में एशिया-प्रशांत नारियल समुदाय के गठन के बाद से इस दिवस की शुरुआत हुई। यह संगठन विश्व के उन देशों का प्रतिनिधित्व करता है जहाँ नारियल की खेती बड़े पैमाने पर होती है। आज विश्व नारियल दिवस केवल एक कृषि पर्व नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, संस्कृति, पर्यावरण और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक आंदोलन बन चुका है।नारियल दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य नारियल उत्पादकों और उपभोक्ताओं को जोड़ना, किसानों को सशक्त बनाना और सतत विकास के मार्ग पर आगे बढ़ना है। एपीसीसी का गठन 2 सितंबर 2009 को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में हुआ था। इसमें भारत, श्रीलंका, फिलीपींस, इंडोनेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, मलेशिया, पापुआ न्यू गिनी और फिजी जैसे देश शामिल हैं।यह संगठन किसानों को आधुनिक खेती तकनीक, फसल संरक्षण, अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँच प्रदान करने में सहायक है।विश्व स्तरपर लगभग 12 करोड़ किसान परिवार नारियल की खेती पर निर्भर हैं।फिलीपींस, इंडोनेशिया और भारत मिलकर विश्व का लगभग 70 पर्सेंट नारियल उत्पादन करते हैं। नारियल तेल, कोयर, फर्नीचर, सौंदर्य प्रसाधन, औषधियाँ और पेय पदार्थ अरबों डॉलर के वैश्विक व्यापार का हिस्सा हैं, जो दर्शाता है कि नारियल केवल एक स्थानीय फसल नहीं बल्कि एक वैश्विक वस्तु है।
साथियों बात अगर हम भारत में नारियल को केवल एक फल नहीं बल्कि श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक मानने की करें तो, इसे “श्रीफल” कहा जाता है,जिसका अर्थ हैसमृद्धि देने वाला फल।भारतीय धार्मिक परंपराओं में बिना नारियल के कोई भी पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। गणेश पूजा में नारियल अनिवार्य होता है, क्योंकि यह विघ्नहर्ता के आशीर्वाद का प्रतीक है।दक्षिण भारत में विवाह, गृहप्रवेश और मंदिरों की पूजा में इसका विशेष महत्व है। बौद्ध और जैन धर्म में भी नारियल को पवित्रता और शांति का प्रतीक माना गया है।नारियल के कठोर खोल को अहंकार और वासनाओं का प्रतीक माना जाता है, जिसे फोड़ने पर शुद्ध गूदा और जल प्राप्त होता है। यह आत्मा की पवित्रता और ईश्वर से एकत्व का प्रतीक है।मंदिरों में नारियल चढ़ाने की परंपरा केवल भारत तक सीमित नहीं है। नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड और बाली (इंडोनेशिया) जैसे देशों में भी यह परंपरा देखने को मिलती है। दक्षिण भारत के मंदिरों में नारियल फोड़ना आत्मसमर्पण का प्रतीक है और इससे जुड़े छोटे-छोटे कारोबार हजारों लोगों को रोज़गार भी उपलब्ध कराते हैं। बौद्ध भिक्षु प्रार्थना के समय नारियल जल अर्पित करते हैं। इस प्रकार, नारियल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से लोक और परलोक दोनों से जुड़ा हुआ है और यह कई देशों की आध्यात्मिक परंपराओं में गहराई से समाया हुआ है।
साथियों बात अगर हम नारियल का वृक्ष “कल्पवृक्ष” कहलानें की करें तो,क्योंकि इसका कोई भी हिस्सा बेकार नहीं जाता। फल से हमें जल और गूदा मिलता है, जो पोषण और ऊर्जा का स्रोत है। गूदे से निकाला गया नारियल तेल बालों, त्वचा और भोजन के लिए औषधि के रूप में उपयोग होता है।जटा से रस्सी, चटाई, कालीन, ब्रश और गद्दे बनाए जाते हैं। पत्तियों का प्रयोग झोपड़ी, टोकरियाँ और सजावटी वस्तुएँ बनाने में होता है, जबकि तना फर्नीचर, पुल और नाव बनाने के लिए उपयुक्त है। जड़ें औषधि और रंगाई में प्रयोग की जाती हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नारियल को “ट्री ऑफ़ लाइफ” यानें जीवन का वृक्ष कहा जाता है।
साथियों बात अगर हम वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नारियल को देखने की करें तो विज्ञान की दृष्टि से भी नारियल एक “नेचुरल सुपरफॉड” है।इसमें विटामिन बी,सी और ई प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। पोटेशियम,कैल्शियम,मैग्नीशियम और आयरन जैसे खनिज शरीर को ऊर्जा और मजबूती प्रदान करते हैं। इसमें प्रोटीन और फाइबर भी अच्छी मात्रा में उपलब्ध हैं।नारियल जल को प्राकृतिक और्स कहा जाता है, जो शरीर को हाइड्रेट करता है और गर्मी या बीमारी के दौरान ऊर्जा देता है। हृदय और किडनी रोगों में यह विशेष रूप से लाभकारी है। नारियल तेल एंटीवायरल और एंटीबैक्टीरियल गुणों से युक्त है और मधुमेह तथा रक्तचाप नियंत्रित करने में सहायक है।आधुनिक शोध बताते हैं कि नारियल का प्रयोग वजन घटाने, डिटॉक्स और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। यही कारण है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुर्वेद दोनों ने नारियल को स्वास्थ्य के लिए अमृत समान माना है।
साथियों बात अगर हम नारियल वृक्ष की आयु और उत्पादनक्षमता के लिए भी अद्वितीय होने की करें तो,यह 60 से 80 फीट तक ऊँचा होता है और लगभग 70 से 80 वर्षों तक जीवित रहता है। करीब 15 वर्षों के बाद इसमें नियमित रूप से फल लगना शुरू होता है और एक पेड़ अपनी आयु में हजारों नारियल देता है। यह दीर्घायु वृक्ष किसानों को पीढ़ियों तक आय देता है और उन्हें स्थिरता प्रदान करता है। इसी कारण इसे “गरीब का वृक्ष” (पुवर मैन्स ट्री) कहा जाता है क्योंकि यह हर वर्ग को लाभ पहुँचाता है।
साथियों बात अगर हम नारियल उद्योग वैश्विक मूल्य श्रृंखला का हिस्सा होने की करेंतो,फिलीपींस नारियल तेल का सबसे बड़ा निर्यातक है, जबकि इंडोनेशिया उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान पर है। भारत तीसरे स्थान पर है और घरेलू खपत में सबसे आगे है। श्रीलंका कोयर उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। विश्व नारियल बाजार का आकार 2024 में लगभग 12 अरब डॉलर था और 2030 तक इसके 20 अरब डॉलर तक पहुँचने की संभावना है।अमेरिका यूरोप और जापान में नारियल पानी और ऑर्गेनिक नारियल तेल की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे यह उद्योग और अधिक वैश्विक बनताजा रहाहै।
साथियों बात अगर हम नारियल वृक्ष केवल भोजन और व्यापार ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और समाज के लिए भी महत्वपूर्ण होने की करें तो,यह समुद्र किनारे मिट्टी का क्षरण रोकते हैं और तटीय सुरक्षा प्रदान करते हैं। एक नारियल वृक्ष सालाना लगभग 30–35 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है, जिससे पर्यावरण को शुद्ध बनाने में मदद मिलती है। यह विश्वभर में लगभग 6 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रोज़गार देता है। गरीब किसानों की जीवनरेखा कहे जाने वाले इस वृक्ष ने करोड़ों लोगों को स्थायी जीविका दी है।फिर भी नारियल खेती पर जलवायु परिवर्तन का गहरा प्रभाव पड़ रहा है। समुद्र स्तर में वृद्धि से तटीय नारियल बागान डूबने लगे हैं। सूखा और अनियमित वर्षा से उत्पादन घट रहा है। कीट और रोगों की संख्या बढ़ी है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए एफएओ और एपीसीसी मिलकर नई किस्मों पर शोध कर रहे हैं।भारत ने “केंद्रीय नारियल अनुसंधान संस्थान” बनाया है, जबकि श्रीलंका और फिलीपींस ने कोयर और नारियल तेल आधारित उद्योगों में नवाचार को बढ़ावा दिया है।विश्व नारियल दिवस हमें यह याद दिलाता है कि नारियल केवल एक फल नहीं बल्कि भविष्य की सतत जीवन शैली का आधार है। ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देकर, किसानों को तकनीक और बाजार तक पहुँच प्रदान करके और नारियल आधारित ग्रीन उद्योग विकसित करके हम इस वृक्ष की क्षमता को और अधिक बढ़ा सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना भी आवश्यक है, ताकि छोटे किसान भी वैश्विक बाजार से लाभान्वित हो सकें।
साथियों बात अगर हम नारियल का वृक्ष केवल एक पौधा नहीं, बल्कि मानव सभ्यता का सहारा होने की करें तो,यह धर्म में श्रद्धा, संस्कृति में पहचान, विज्ञान में औषधि और अर्थव्यवस्था में उद्योग का आधार है। विश्व नारियल दिवस 2025 हमें यह संदेश देता है कि हमें इस “जीवन वृक्ष” की रक्षा करनी है और इसे मानवता की समृद्धि के लिए आगे बढ़ाना है। यदि विश्वभर के देश मिलकर नारियल उत्पादन, अनुसंधान और सतत विकास की दिशा में काम करें तो यह वृक्ष आने वाली पीढ़ियों को भी अमृत प्रदान करता रहेगा।नारियल केवल एक फल नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति में यह समर्पण और पवित्रता का संदेश देता है, विज्ञान में यह स्वास्थ्य का स्रोत है और पर्यावरण के लिए यह स्थिरता का दूत है। विश्व नारियल दिवस हमें यह याद दिलाता है कि प्रकृति ने जो यह अद्भुत उपहार दिया है, उसकी रक्षा करना और उसका सतत उपयोग करना हमारी जिम्मेदारी है।आज आवश्यकता है कि हम नारियल उत्पादन बढ़ाने,किसानों को तकनीकी सहयोग देने और इसके औषधीय व पोषण संबंधी गुणों को अधिकाधिक जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लें। तभी नारियल वास्तव में मानव जीवन को समृद्ध और स्वस्थ बनाने में अपनी पूर्ण भूमिका निभा सकेगा।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि विश्व नारियल दिवस केवल एक कृषि पर्व नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, संस्कृति, पर्यावरण और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक आंदोलन बन चुका है।
-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
शादी समारोहों में शराब, डीजे, नाइट पार्टी और वेस्टर्न कल्चर की नकल आम हो गई है।
विवाह एक पवित्र संस्कार, आध्यात्मिक और सामाजिक आयाम हैँ- बढ़ती आधुनिकता का दंश और बदलती शादी की परंपओं को रेखांकित करना जरूरी- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र
गोंदिया – भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में शादी केवल एक सामाजिक अनुबंध नहीं बल्कि एक पवित्र संस्कार मानी जाती है। वेदों से लेकर पुराणों तक, गृहस्थ जीवन को धर्म का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। विवाह को केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं बल्कि दो परिवारों और दो कुलों का मिलन माना जाता है। इसीलिए इसे सात फेरे, सप्तपदी मंत्र, कन्यादान, होम, आशीर्वाद और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सम्पन्न कराया जाता है। किंतु आज बदलते समय में विवाह के स्वरूप में गहरा बदलाव दिखाई दे रहा है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र मानता हूं कि शादी समारोह,जो कभी अध्यात्म, त्याग, संस्कार और सामाजिक सामंजस्य का प्रतीक था,अब धीरे-धीरे दिखावे, पैसे की होड़, दहेज, शराब और भव्यता की दौड़ में सिमटता जा रहा है। यह बदलाव न केवल भारतीय संस्कृति के लिए खतरे की घंटी है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सामने एक विकृत परंपरा स्थापित कर रहा है। इस विषय का विस्तार से डिस्कशन व विश्लेषण हम 5 प्वाइंटों के आधार पर करेंगे।
साथियों बात अगर हम विवाह एक पवित्र संस्कार: आध्यात्मिक और सामाजिक आयाम की करें तो,भारतीय संस्कृति में विवाह को सोलह संस्कारों में एक प्रमुख संस्कार माना गया है। यह केवल पति-पत्नी के शारीरिक या भावनात्मक संबंध का बंधन नहीं है, बल्कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की साधना का आधार है। विवाह का उद्देश्य केवल जीवनसाथी चुनना नहीं,बल्कि समाज में संतुलित,संस्कारित और धार्मिक जीवन की स्थापना करना है। सात फेरे, जिन्हें हर दंपति विवाह के समय अग्नि के साक्षी में लेता है, केवल शब्द नहीं हैं बल्कि जीवन के लिए आजीवन वचन हैं।आज की पीढ़ी इन मंत्रों और वचनों की गहराई को समझे बिना केवल विवाह को “सोशल इवेंट” की तरह देखने लगी है। होटल, रिजॉर्ट, फार्महाउस और डेस्टिनेशन वेडिंग ने विवाह को पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारी के बजाय लक्ज़री इवेंट में बदल दिया है। यह बदलाव भारतीय समाज की मूल आत्मा के विपरीत है।
साथियों बात अगर हम आधुनिकता का दंश और बदलती शादी की परंपरा व दहेज और उपभोक्तावादी संस्कृति की करें तो आधुनिकता अपने साथ तकनीकी विकास,वैश्विक संपर्क और नए अवसर लाती है, परंतु इसका अंधानुकरण विवाह जैसे संस्कारों को विकृत कर रहा है। आज शादियाँ अधिकतर स्टेटस सिंबल बन गई हैं।(अ) लाखों- करोड़ों रुपए खर्च कर “शाही शादी” दिखाना अब फैशन बन चुका है। (ब) शादी समारोहों में शराब, डीजे, नाइट पार्टी और वेस्टर्न कल्चर की नकल आम हो गई है। (क़) रिश्तेदारों और मेहमानों का सम्मान अब मेन्यू की विविधता और सजावट की भव्यता से आंका जाने लगा है, न कि आत्मीयता और आदर से।इस भौतिकवादी दृष्टिकोण ने विवाह की पवित्रता को गहरे तक प्रभावित किया है। जहां कभी विवाह का अर्थ “दो आत्माओं का आध्यात्मिक बंधन” था, वहीं आज विवाह का अर्थ “सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें और वीडियो” बन गया है।दहेज और उपभोक्तावादी संस्कृति-विवाह का कुरूप चेहरा:-दहेज प्रथा भारतीय समाज की सबसे बड़ी बुराइयों में से एक है। स्वतंत्रता के बाद से लगातार प्रयासों के बावजूद यह कुरीति खत्म नहीं हुई। आधुनिकता और भौतिकतावाद ने इसे और मजबूत कर दिया है। आज शादी समारोह में गाड़ियों की डिमांड, महंगे गिफ्ट्स, कैश और प्रॉपर्टी की अपेक्षा खुलेआम की जाती है।दहेज न केवल विवाह के पवित्र बंधन को कलंकित करता है बल्कि यह महिलाओं के लिए अपमानजनक और अमानवीय स्थिति पैदा करता है। हजारों बेटियाँ आज भी दहेज के बोझ के कारण या तो शादी नहीं कर पातीं या शादी के बाद उत्पीड़न का शिकार होती हैं।
साथियों बात अगर हम विवाह और शराब संस्कृति, के तेजी से बढ़ते प्रचलन की करें तो, भारतीय समाज में विवाह हमेशा से संयम, मर्यादा और उत्सव का संगम रहा है। परंतु पिछले दो दशकों में शादियों में शराब की संस्कृति तेजी से फैली है। यह न केवल समारोह की गरिमा को कम करता है बल्कि कई बार हिंसा, विवाद और दुर्घटनाओं का कारण भी बनता है।आज समाज के सामने यह प्रश्न है कि क्या विवाह का उत्सव बिना शराब, नाच-गाने और दिखावे के संभव नहीं? विवाह जैसे पवित्र अवसर पर यदि आत्मसंयम और मर्यादा खो जाए तो वह केवल मनोरंजन बनकर रह जाता है।
साथियों बात अगर हम विवाह में बढ़ता दिखावापन और समाज पर असर की करें तो,”शादी में कितना खर्च हुआ?” यह प्रश्न आज समाज का सबसे बड़ा मूल्यांकन बन गया है। किसी परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा अब शादी की भव्यता से तय होती है। परिणामस्वरूप गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार कर्ज, उधार और आर्थिक बोझ तले दब जाते हैं। (अ) शादियों में करोड़ों का खर्च करना “प्रेस्टीज इश्यू” बन चुका है। (ब) आम परिवार इस दौड़ में शामिल होने के लिए अपनी जिंदगी भर की कमाई खर्च कर देते हैं। (क़) और छोटे कस्बों में भी यह प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है, जिससे आर्थिक असमानता और बढ़ रही है।यह प्रवृत्ति भारतीय समाज के लिए खतरनाक है क्योंकि इससे सामाजिक संतुलन और समानता की अवधारणा को गहरी चोट पहुंचती है।
साथियों बात अगर हम घटते पारंपरिक संस्कार और अनुष्ठान की करें तो पहले विवाह घर-आंगन में, मंदिरों या पंचायतों में पूरे परिवार और समाज की सहभागिता से होते थे। बारात में ढोल-नगाड़े, लोकगीत,नृत्य, भजन- कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान का विशेष महत्व होता था। परंतु अब इनकी जगह डीजे, फिल्मी गाने और कोरियोग्राफ्ड डांस ने ले ली है।कन्यादान, होम, सप्तपदी, वरमाला जैसे संस्कार केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं।कई बार डेस्टिनेशनवेडिंग्स में पुरोहित और मंत्रोच्चार तक “फास्ट फॉरवर्ड” कर दिए जाते हैं। यह बदलाव कहीं न कहीं विवाह को केवल मनोरंजन का साधन बना रहा है।
साथियों बात अगर हम समाज को दिशा दिखाने कीआवश्यकता व सादगीपूर्ण विवाह की करें तो,आज समय की मांग है कि समाज इस बदलते परिदृश्य पर गंभीर चिंतन करे। विवाह को पुनः उसके मूल स्वरूप में लाने की आवश्यकता है। इसके लिए(अ)धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थाओं को विवाह संस्कारों की पवित्रता का प्रचार करना चाहिए। (ब) परिवारों को बच्चों को बचपन से ही विवाह संस्कारों की महत्ता सिखानी चाहिए।(क़) सरकार को दहेज और अनावश्यक खर्च पर रोक लगाने वाले कानूनों को कड़ाई से लागू करना चाहिए। (ड)समाज में “सादगीपूर्ण विवाह” को प्रोत्साहित करने वाले अभियान चलाने चाहिए।सादगीपूर्ण विवाह–भविष्य की राहआज कई राज्यों में “सामूहिक विवाह” और “सादगीपूर्ण विवाह” की परंपरा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें खर्च सीमित रखा जाता है और धार्मिक अनुष्ठानों को महत्व दिया जाता है। इससे न केवल आर्थिक बोझ कम होता है, बल्कि विवाह की सामाजिक और आध्यात्मिक महत्ता भी बनी रहती है।सादगीपूर्ण विवाह को समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा दिलाना होगा। जब तक दिखावे और भव्यता को “प्रेस्टीज” माना जाएगा, तब तक यह प्रवृत्ति नहीं रुकेगी।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि विवाह भारतीय संस्कृति का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण संस्कार है। इसे आधुनिकता और दिखावे की भेंट चढ़ाना हमारी आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय होगा। समाज को यह समझना होगा कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं बल्कि दो परिवारों का पवित्र मिलन है, जिसका उद्देश्य धर्म, परंपरा और संस्कारों को आगे बढ़ाना है।यदि हम विवाह को पुनः उसके आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप में स्थापित कर पाते हैं, तभी हम आधुनिकता के दंश से बचकर आने वाली पीढ़ियों को एक सशक्त और संस्कारित समाज दे पाएंगे।
-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। महीने की शुरुआत ग्राहकों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 1 सितंबर से गैस सिलेंडरों के दाम घटा दिए हैं। इससे पहले 1 अगस्त को भी कीमतों में कमी की गई थी। नियम के मुताबिक हर महीने की पहली तारीख को सिलेंडरों के दामों की समीक्षा और बदलाव किया जाता है। इस बार सबसे ज्यादा बदलाव 19 किलो वाले सिलेंडर में किया गया है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से रेस्टोरेंट, होटल और ढाबों में होता है। वहीं, 14.2 किलो का घरेलू गैस सिलेंडर पहले की तरह ही उपलब्ध है।
तेजी से बढ़ती महंगाई के बीच यह कटौती ग्राहकों के लिए राहत की खबर है। खासतौर पर होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय से जुड़े लोगों को 19 किलो वाले सिलेंडर के दाम घटने से सीधी राहत मिलेगी। वहीं घरेलू उपभोक्ताओं को 14.2 किलो वाले सिलेंडर में फिलहाल किसी बदलाव का इंतजार करना होगा।
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। रविवार की रात सदर रेलवे स्टेशन पर बड़ा बवाल हो गया। ट्रेन चेकिंग के दौरान यात्रियों को परेशान करने की शिकायत पर कार्रवाई करने पहुंचे RPF प्रभारी निरीक्षक आस मोहम्मद पर किन्नरों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से स्टेशन पर अफरातफरी मच गई।
जानकारी के मुताबिक, चेकिंग के दौरान यात्रियों ने शिकायत की थी कि देर रात किन्नर आम लोगों और यात्रियों से वसूली कर उन्हें परेशान कर रहे हैं। इस पर निरीक्षक ने किन्नरों को चेतावनी दी कि वे यात्रियों को उत्पीड़ित न करें। इसी बात से नाराज़ होकर किन्नर उनसे उलझ गए और देखते ही देखते कई अन्य किन्नर भी मौके पर पहुँच गए। इसके बाद किन्नरों ने अचानक हमला कर दिया और निरीक्षक को दौड़ाकर पीटा। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि आमजन और वेंडरों को बीच-बचाव करना पड़ा और किसी तरह RPF प्रभारी की जान बचाई। सूचना पर रेलवे और स्थानीय पुलिस टीम मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया। घटना के बाद यात्रियों में आक्रोश और भय का माहौल है। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपित किन्नरों की पहचान कर कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को और अधिक चुस्त-दुरुस्त एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक देवरिया विक्रान्त वीर ने बड़े पैमाने पर निरीक्षकों एवं उपनिरीक्षकों का स्थानांतरण किया। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी पुलिस कर्मी निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने-अपने कार्यभार का तत्काल ग्रहण करें तथा अनुपालन की सूचना कार्यालय को उपलब्ध कराएं।
निरीक्षक दुर्गेश कुमार सिंह, जो अब तक थाना कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक रहे, उन्हें प्रभारी मॉनीटरिंग सेल बनाया गया है। निरीक्षक विनोद कुमार सिंह, जो अब तक रुद्रपुर थे को थाना कोतवाली सदर के प्रभारी बनाए गए निरीक्षक अजय कुमार पाण्डेय भलूअनी से साइबर प्रभारी बने।निरीक्षक गोरखनाथ सरोज को थाना रामपुर कारखाना से हटाकर थाना ए.एच.टी.का प्रभार दिया गया है। निरीक्षक उमेश कुमार वाजपेयी को लार से एकौना,निरीक्षक रणजीत सिंह भदौरिया पुलिस लाइन से गोरीबाजार निरीक्षक अनिल कुमार को मदनपुर से रुद्रपुर की नई तैनाती दी गई है।
सूची में कुल दर्जनों निरीक्षक एवं उपनिरीक्षक शामिल हैं। इनमें थाना प्रभारियों, एसएसआई तथा चौकी प्रभारियों को परस्पर अदला-बदली कर नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। स्थानांतरण सूची के अनुसार –निरीक्षक संतोष कुमार को पुलिस लाइन से मीडिया सेल का प्रभारी बनाया गया है।उपनिरीक्षक अश्वनी कुमार प्रधान को प्रभारी मीडिया सेल से चौकी प्रभारी कस्बा लार की जिम्मेदारी दी गई। उपनिरीक्षक धर्मेन्द्र कुमार मिश्रा को मेंहरैना से थाना सलेमपुर भेजा गया है।उपनिरीक्षक धर्मेन्द्र सिंह को थाना सलेमपुर से चौकी प्रभारी मेहरौना बनाया गया। उपनिरीक्षक रविन्द्र सिंह को थाना लार से पुलिस लाइन स्थानांतरित किया गया। उपनिरीक्षक वीरेन्द्र कुशवाहा को थाना श्रीरामपुर से पुलिस लाइन भेजा गया। उपनिरीक्षक अजय कुमार सिंह को पुलिस लाइन से न्यायालय सुरक्षा में लगाया गया। उपनिरीक्षक विपिन यादव को पुलिस लाइन से थाना श्रीरामपुर की जिम्मेदारी दी गई। उपनिरीक्षक बलराम सिंह को चौकी प्रभारी प्रतापपुर, थाना श्रीरामपुर से थाना महुआडीह भेजा गया।उपनिरीक्षक राघवेन्द्र सिंह को थाना गौरीबाजार से चौकी प्रभारी प्रतापपुर, थाना श्रीरामपुर बनाया गया।उपनिरीक्षक संजय कुमार पाल को पुलिस लाइन से चौकी प्रभारी रेल रोड, थाना कोतवाली की जिम्मेदारी सौंपी गई। उपनिरीक्षक सुनील कुमार पटेल को थाना बनकटा से कोतवाली स्थानांतरित किया गया।उपनिरीक्षक चन्द्रशेखर यादव को थाना महुआडीह से थाना मदनपुर भेजा गया।उपनिरीक्षक नन्द कुमार यादव को थाना महुआडीह से थाना लार स्थानांतरित किया गया। उपनिरीक्षक परवेज आलम को थाना खुखुन्दू से थाना लार भेजा गया।उपनिरीक्षक घनश्याम सिंह यादव को थाना रामपुर कारखाना से न्यायालय सुरक्षा की नई जिम्मेदारी दी गई।उपनिरीक्षक सत्य प्रकाश यादव को थाना बरियारपुर से मदनपुर स्थानांतरित किया गया।उपनिरीक्षक आहूत कुमार यादव को पुलिस लाइन से एसएसआई थाना भाटपाररानी बनाया गया। महत्वपूर्ण फेरबदल किए गए हैं। यह स्थानांतरण कानून व्यस्था पर को सदृढ़ करने के लिए हुआ है।
वहीं उपनिरीक्षक प्रदीप कुमार को वही थाना प्रभारी बनाया गया दिनेश कुमार मिश्रा को थानाध्यक्ष ए.एच.टी एस एस आई थाना खुखुन्दू बनाया गया दिग्विजय सिंह खामपार महेन्द्र कुमार चतुर्वेदी लार की नई जिम्मेदारी संभालेंगे विशाल कुमार पुलिस लाइन से बग़ैचघाट, प्रदीप कुमार अस्थाना अब लार में कार्यभार ग्रहण करेंगे अभिषेक को रामपुर की जिम्मेदारी दी गई है नन्दा प्रसाद गोरीबाजार से मदनपुर भेजा गया है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि यह स्थानांतरण व्यवस्था को सुदृढ़ करने और कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में किया गया है। साथ ही, उन्होंने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे नई तैनाती स्थल पर समय से कार्यभार ग्रहण कर सुचारु रूप से दायित्वों का निर्वहन करें।
हर पीड़ित पत्रकार के साथ खड़ा रहेगा संगठन – तहसील अध्यक्ष विनय सिंह
कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। पूर्वांचल पत्रकार एसोसिएशन (पीपीए) तहसील इकाई हाटा की बैठक एवं आईडी कार्ड वितरण समारोह रविवार को नगर के वार्ड संख्या 1 स्थित बाघनाथ खागी बाबा की कुटी पर सम्पन्न हुआ। बैठक में पत्रकारों के उत्पीड़न, समस्याओं एवं उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तथा पीपीए के मंडल उपाध्यक्ष भगवन्त यादव ने संबोधित करते हुए कहा कि आज पत्रकारिता में ‘हम बड़े–हम बड़े’ की होड़ देखने को मिलती है, जबकि असली पहचान किसी अखबार या चैनल से नहीं, बल्कि पत्रकार की लेखनी और भाषा से बनती है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता निष्पक्ष, निर्भीक और जनहित से जुड़ी होनी चाहिए।
जिला प्रवक्ता श्रीनिवास तिवारी ने संगठन की एकजुटता पर बल देते हुए कहा कि पत्रकार यदि संगठित रहेंगे तो किसी भी स्तर पर उनके अधिकारों का हनन नहीं हो सकेगा। संगठन में अपार शक्ति है और यही शक्ति हर पत्रकार का संबल है।
तहसील अध्यक्ष विनय सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पीपीए हमेशा पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए तत्पर है। किसी भी पीड़ित पत्रकार को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। संगठन उसकी हर समस्या को अपनी समस्या मानकर समाधान कराने के लिए सदैव आगे रहेगा।
बैठक में तहसील वरिष्ठ उपाध्यक्ष तेजप्रताप गुप्ता, कोषाध्यक्ष रामआशीष यादव, मंत्री अजय पांडे, वरिष्ठ पत्रकार सुरेश चंद्र गांधी, शिवपरसन, सरवन, रामनगीना यादव, रामगणेश सहित बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे।