Thursday, July 16, 2026
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“जहर बना निवाला जहरीला खाना खाने से पिता-पुत्र की मौत, पांच अस्पताल में भर्ती”

“कैसे बचाएं जान जब जीवन का आधार भोजन बन जाए जहर समान”

बक्सर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जिले के औद्योगिक थाना क्षेत्र के दहिवर गांव में सोमवार रात जहरीला खाना खाने से एक ही परिवार के सात लोग अचानक बीमार हो गए। इनमें दो की मौत हो गई, जबकि पांच की हालत गंभीर बनी हुई है। मृतकों की पहचान कृष्णा सिंह (40 वर्ष) और उनके बेटे अमित कुमार के रूप में हुई है।

जानकारी के अनुसार, खाना खाने के कुछ देर बाद ही सभी परिजनों को अचानक उल्टी-दस्त शुरू हो गया। परिवार के सदस्यों की बिगड़ती हालत देखकर ग्रामीणों ने तत्काल उन्हें सदर अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने जांच के बाद कृष्णा सिंह और उनके बेटे अमित को मृत घोषित कर दिया, जबकि तीन बच्चों और एक महिला प्रेमा देवी (50 वर्ष) का इलाज जारी है।

घटना की सूचना मिलते ही सदर डीएसपी गौरव पांडे दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू की। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर खाना जहरीला कैसे हुआ।

गांव में इस घटना से मातम पसर गया है। परिवार के सदस्य सदमे में हैं और स्थानीय लोगों में भय का माहौल है।


नगर निगम का “मिशन विश्वकर्मा” अभियान शुरू

17 सितम्बर तक 400 नगर गाड़ियों की होगी जांच, मरम्मत और सजावट

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) विश्वकर्मा पूजा से पहले पटना नगर निगम ने शहर की स्वच्छता और व्यवस्थाओं को और मजबूत करने के लिए विशेष अभियान “मिशन विश्वकर्मा” की शुरुआत की है। यह अभियान 17 सितम्बर तक चलेगा।

अभियान के तहत निगम की लगभग 400 नगर गाड़ियों की तकनीकी जांच, आवश्यक मरम्मत और सजावट की जाएगी। सोमवार से इसकी शुरुआत हो चुकी है और मंगलवार से इसे पूरी गति से लागू किया जा रहा है।

नगर आयुक्त अनिमेष कुमार नराशर ने संबंधित सभी पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि अभियान के दौरान हर गाड़ी की बारीकी से जांच की जाए, किसी भी खराब वाहन को ठीक किए बिना संचालन में न लाया जाए।

नगर निगम का कहना है कि इस विशेष पहल से न केवल स्वच्छता कार्यों की गति तेज होगी, बल्कि त्योहारों के दौरान गाड़ियों की बेहतर स्थिति से शहरवासियों को स्वच्छ और सुगम सेवाएं मिल सकेंगी।

👉 यह पहल निगम के नियमित कार्यों में अनुशासन और दक्षता लाने के साथ-साथ कर्मकारों के प्रति सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक भी है।

✨ 2 सितंबर 2025: आज का राशिफल – जानें कैसा रहेगा आपका दिन ✨

मेष (Aries)
👉 आज का दिन ऊर्जा और उत्साह से भरा रहेगा। आप अपने लक्ष्यों को पाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पेशेवर और व्यक्तिगत दोनों क्षेत्र में सफलता के संकेत हैं।
🔑 फोकस: आत्मविश्वास और मेहनत
वृषभ (Taurus)
👉 स्थिरता और शांति से भरा दिन। जीवन के हर पहलू में संतुलन बनाने में सफल रहेंगे। धैर्य और केंद्रित दृष्टिकोण आपको प्रगति दिलाएंगे।
🔑 फोकस: संतुलन और धैर्य
मिथुन (Gemini)
👉 दिन मिश्रित रहेगा। कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं लेकिन आपकी बुद्धिमत्ता और संचार कौशल मददगार साबित होंगे। धैर्य बनाए रखें।
🔑 फोकस: संवाद और लचीलापन
कर्क (Cancer)
👉 भावनात्मक और उत्पादक दिन। प्रियजनों के साथ रिश्ते गहरे होंगे। आपकी संवेदनशीलता और सहानुभूति सफलता दिलाएगी।
🔑 फोकस: रिश्ते और भावनाएं
सिंह (Leo)
👉 सफलता और मान्यता का दिन। आप अपनी प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता से सबका दिल जीतेंगे। आत्मविश्वास ऊंचाई पर रहेगा।
🔑 फोकस: नेतृत्व और आत्मविश्वास
कन्या (Virgo)
👉 संगठित और उत्पादक दिन। योजनाओं को कुशलता से लागू करेंगे। विश्लेषणात्मक सोच और बारीकी पर ध्यान आपको लाभ देगा।
🔑 फोकस: योजना और अनुशासन
तुला (Libra)
👉 सामंजस्य और संतुलन से भरा दिन। प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ दोनों में तालमेल बना रहेगा। आकर्षक व्यक्तित्व से फायदा होगा।
🔑 फोकस: कूटनीति और संतुलन
वृश्चिक (Scorpio)
👉 गहन और परिवर्तनकारी दिन। अंतर्ज्ञान मजबूत रहेगा और महत्वपूर्ण निर्णय लेने में मदद करेगा। जुनून और दृढ़ता सफलता दिलाएंगे।
🔑 फोकस: दृढ़ संकल्प और परिवर्तन
धनु (Sagittarius)
👉 रोमांच और उत्साह से भरा दिन। स्वतंत्र विचार और सकारात्मकता से आगे बढ़ेंगे। नई शुरुआत के लिए समय शुभ है।
🔑 फोकस: उत्साह और आशावादी
मकर (Capricorn)
👉 जिम्मेदार और केंद्रित दिन। लक्ष्यों को पाने के लिए मेहनत और अनुशासन काम आएगा। व्यावहारिक सोच से प्रगति मिलेगी।
🔑 फोकस: जिम्मेदारी और मेहनत
कुंभ (Aquarius)
👉 रचनात्मकता और सामाजिकता का दिन। नए विचार और लोगों से जुड़ाव लाभकारी होगा। आपकी सोच आज आपको अलग पहचान दिलाएगी।
🔑 फोकस: रचनात्मकता और नेटवर्किंग
मीन (Pisces)
👉 अंतर्मुखी और संवेदनशील दिन। भावनाएं और सपने आपके लिए प्रेरणा का काम करेंगे। रचनात्मकता पर ध्यान देना शुभ रहेगा।
🔑 फोकस: अंतर्ज्ञान और रचनात्मकता

🌟✨ आज का मंत्र: “सकारात्मक सोच और संतुलित दृष्टिकोण से हर चुनौती का हल संभव है।” ✨🌟

खतरनाक मौसम में भी स्कूल खुले क्यों?

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“बच्चों की सुरक्षा बनाम औपचारिकता का सवाल: जर्जर स्कूल भवन, प्रशासन की संवेदनहीनता और बाढ़-गंदगी के बीच पढ़ाई नहीं, जीवन की रक्षा पहली प्राथमिकता – आपदा में भी आदेशों की राजनीति क्यों?”

बारिश और बाढ़ की स्थिति में बच्चों और शिक्षकों को स्कूल बुलाना उनकी जान से खिलवाड़ है। जर्जर इमारतें, गंदगी, जलभराव और यातायात बाधाएँ पहले से ही खतरनाक हालात पैदा कर चुकी हैं। ऐसे में पढ़ाई से ज़्यादा बच्चों की सुरक्षा पर ध्यान देना ज़रूरी है। शिक्षा तभी सार्थक है जब बच्चे सुरक्षित माहौल में सीखें। सरकार को चाहिए कि संकट की घड़ी में औपचारिकताओं से ऊपर उठकर तुरंत अवकाश घोषित करे, ताकि संभावित हादसों से बचा जा सके

बरसात का मौसम बच्चों के लिए रोमांच और खेलने का समय माना जाता है, लेकिन जब यही मौसम बाढ़, गंदगी और जीवन-जोखिम का कारण बन जाए, तब सवाल उठता है कि हमारी व्यवस्था आखिर बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा के प्रति कितनी संवेदनशील है। हाल ही में हरियाणा प्रदेश के 18 जिलों में बाढ़ का हाई अलर्ट घोषित होने के बावजूद स्कूलों को बंद न करने का निर्णय इस संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

स्कूल भवनों की जर्जर हालत किसी से छिपी नहीं है। कई जगहों पर दीवारों में दरारें हैं, छतों से पानी टपकता है और फर्श गीले होकर दुर्घटनाओं को न्यौता देते हैं। जिन इमारतों में सामान्य दिनों में पढ़ाई मुश्किल हो, वहां लगातार बारिश के दौरान बच्चों और स्टाफ की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है? कई सरकारी और ग्रामीण स्कूल तो वैसे भी मरम्मत और रखरखाव के अभाव में खंडहर जैसी स्थिति में हैं।

साफ-सफाई की समस्या भी गंभीर है। गंदगी, पानी भराव और खुले नाले स्कूल परिसरों को अस्वस्थ और खतरनाक बना देते हैं। बारिश के दिनों में मच्छरों और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बच्चों को स्कूल बुलाना केवल उनकी जान से खिलवाड़ करना है।

यही नहीं, बाढ़ और जलभराव के कारण परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो जाती है। बच्चे और शिक्षक स्कूल तक पहुँचने में भारी कठिनाइयों का सामना करते हैं। कई इलाकों में सड़कों पर घुटनों-घुटनों पानी भरा होता है, कहीं पुल टूटे हैं तो कहीं नदियाँ उफान पर हैं। बच्चों का ऐसे हालात में रोज़ाना आना-जाना केवल प्रशासन की संवेदनहीनता का उदाहरण है।

सबसे हैरानी की बात यह है कि सरकार और उच्च अधिकारी जानते हुए भी स्कूल बंद करने का आदेश नहीं देते। यह निर्णय किसी मजबूरी से अधिक औपचारिकता जैसा लगता है—जैसे केवल आदेश देकर अपनी ज़िम्मेदारी निभा दी गई हो। सवाल यह उठता है कि क्या बच्चों की सुरक्षा से बढ़कर भी कोई औपचारिकता हो सकती है? अगर हादसा हो जाए तो क्या प्रशासन की यह चुप्पी और लापरवाही माफ़ की जा सकेगी?

दुनिया भर में आपदा और संकट के समय शिक्षा व्यवस्था पर अस्थायी रोक लगाना कोई नई बात नहीं है। कोरोना काल में महीनों तक स्कूल बंद रहे और वैकल्पिक माध्यमों से शिक्षा को आगे बढ़ाया गया। जब महामारी के दौर में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि मानी गई, तो बाढ़ और प्राकृतिक आपदा की स्थिति में वही संवेदनशीलता क्यों नहीं दिखाई जाती?

यहाँ तर्क दिया जा सकता है कि पढ़ाई का नुकसान न हो, इसलिए स्कूल बंद नहीं किए जा सकते। लेकिन क्या पढ़ाई का महत्व बच्चों और शिक्षकों की जान से बड़ा है? शिक्षा तभी सार्थक है जब छात्र और शिक्षक सुरक्षित हों। गीली और टूटती छतों के नीचे, पानी से भरे आंगनों में और बीमारी के खौफ में पढ़ाई कराने का निर्णय शिक्षा नहीं, बल्कि मजबूरी और लापरवाही कहलाएगी।

दरअसल, असली समस्या हमारी नीति और नीयत दोनों की है। जिन अधिकारियों को स्थानीय हालात देखकर तुरंत निर्णय लेना चाहिए, वे केवल ऊपर से आए आदेशों का इंतज़ार करते रहते हैं। और ऊपर बैठे नीति-निर्माता आमतौर पर कागज़ी रिपोर्टों और फाइलों के आधार पर निर्णय लेते हैं। नतीजा यह होता है कि जमीनी हालात और सरकारी आदेशों के बीच बड़ा अंतर रह जाता है।

आज ज़रूरत इस बात की है कि शिक्षा विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग मिलकर एक स्पष्ट नीति बनाएँ। इसमें यह तय हो कि किन परिस्थितियों में स्वतः स्कूल बंद माने जाएँगे। जैसे – जब किसी जिले में बाढ़ का हाई अलर्ट जारी हो, जब लगातार बारिश से जीवन अस्त-व्यस्त हो जाए, या जब भवनों की सुरक्षा संदिग्ध हो। इससे निचले स्तर के अधिकारी समय रहते फैसला ले सकेंगे और बच्चों को जोखिम से बचाया जा सकेगा।

इसके साथ-साथ स्कूल भवनों की नियमित मरम्मत और रखरखाव पर भी ज़ोर दिया जाना चाहिए। हर बरसात में छत टपकना और दीवारें गिरना हमारी शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल देता है। यदि बच्चों के लिए सुरक्षित भवन तक उपलब्ध नहीं करा सकते तो फिर शिक्षा के अधिकार की बातें खोखली साबित होती हैं।

एक और पहलू पर ध्यान देना ज़रूरी है। जब सरकारें ‘स्मार्ट क्लास’, ‘डिजिटल एजुकेशन’ और ‘न्यू एजुकेशन पॉलिसी’ की बात करती हैं, तो क्यों न आपदा के समय ऑनलाइन या वैकल्पिक शिक्षा का सहारा लिया जाए? बच्चों की पढ़ाई बिना उनकी सुरक्षा से समझौता किए जारी रखी जा सकती है। लेकिन दुर्भाग्य है कि ऐसे दूरदर्शी कदमों की जगह केवल आदेश जारी करने की औपचारिकता निभाई जाती है।

बच्चे देश का भविष्य हैं—यह वाक्य हम बार-बार सुनते हैं। लेकिन जब इस भविष्य को सुरक्षित रखने का समय आता है, तो हमारी व्यवस्था सबसे ज्यादा असफल साबित होती है। बारिश और बाढ़ जैसे हालात में स्कूलों को खुला रखना बच्चों और शिक्षकों दोनों की जान को खतरे में डालने जैसा है। यह केवल संवेदनहीनता ही नहीं, बल्कि लापरवाही की पराकाष्ठा है।

अब समय आ गया है कि सरकारें औपचारिकताओं से आगे बढ़कर वास्तव में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। स्कूलों को तुरंत बंद किया जाए और हालात सामान्य होने पर ही पुनः खोला जाए। शिक्षा का असली उद्देश्य तभी पूरा होगा जब बच्चे सुरक्षित माहौल में पढ़ें और सीखें। यदि यह न्यूनतम सुरक्षा भी सुनिश्चित नहीं की जा सकती, तो शिक्षा व्यवस्था पर गहन प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।

संवेदनशील शासन वही है जो संकट की घड़ी में अपने नागरिकों—खासकर बच्चों—की सुरक्षा सुनिश्चित करे। यदि इस बुनियादी दायित्व में भी हम असफल रहते हैं, तो विकास, शिक्षा और प्रगति के सारे दावे केवल खोखले नारे भर रह जाएंगे।

डॉ सत्यवान सौरभ

गोरखनाथ मंदिर में तैनात पी ए सी जवान की मौत

बुलेट डिवाइडर से टकराकर गिरी पानी मांगते-मांगते दम तोड़ा

4 महीने पहले हुई थी शादी

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा में तैनात पी ए सी जवान की सड़क हादसे में सोमवार को मौत हो गई। वह बुलेट से तेज रफ्तार में जा रहे थे तभी गाड़ी डिवाइडर से टकराकर उसके ऊपर चढ़ गई। उनके साथ पीछे बैठा पीआरडी का जवान भी घायल हो गया। शोर सुनकर आसपास के लोग आ गए। सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची। दोनों को सदर अस्पताल भेजा गया। डॉक्टरों ने बताया कि सीने में चोट लगने की वजह से पीएसी जवान का फेफड़ा डैमेज हो गया है। यह कहते हुए बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। अभी उन्हें मेडिकल कॉलेज ले जाने की तैयारी चल ही रही थी तभी उन्होंने दम तोड़ दिया। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटना के बाद पीएसी जवान काफी देर तक दर्द से तड़पते रहे। वह बार-बार पानी मांग रहे थे। अभी 4 महीने पहले ही जवान की शादी हुई थी। हादसा बेलीपार थाना क्षेत्र में सोमवार की सुबह 9.30 बजे हुआ। पीआरडी जवान का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। पी ए सी जवान अभिषेक दूबे (27) गोला थाना क्षेत्र के खिरकिटा दूबे गांव के रहने वाले थे। उनके पिता अश्वनी दूबे यूपी पुलिस में श्रावस्ती जिले में इंस्पेक्टर पद पर तैनात हैं। बड़े भाई सोनू दूबे हैं। अभिषेक के साथ बाइक पर पीछे पीआरडी जवान मार्कंडेय बैठा था। अभिषेक का बीते 1 मई, 2025 को तिलक और 8 मई को शादी हुई थी। अभिषेक 30वीं वाहिनी पीएसी गोंडा में आरक्षी पद पर तैनात थे। जहां से गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा में उन्हें भेजा गया था। सोमवार को वह अपने घर खिरकिटा से गोरखनाथ मंदिर जाने के लिए बुलेट से निकले। सुबह करीब 9 बजे वह घर से निकले। रास्ते में उन्हें बेलीपार थाने का पीआरडी जवान मार्कंडेय मिला। अभिषेक ने उन्हें भी अपनी बुलेट पर पीछे बैठा लिया। बेलीपार थाने से थोड़ा पहले महावीर छपरा के पास अचानक सड़क पर तेज रफ्तार बुलेट डिवाइडर पर चढ़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इस दौरान बुलेट का स्लेटर फंसकर तेज हो गया था, जिससे डिवाइडर पर काफी दूर तक बुलेट तेज रफ्तार में दौड़ती रही। अभिषेक चाह कर भी बुलेट को नियंत्रित नहीं कर पाए। इसके बाद बुलेट से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास के लोगों ने अभिषेक को घायल अवस्था में डिवाइडर पर ही लेटा दिया। इसके बाद बेलीपार पुलिस को कॉल किया। सचना मिलने के 10 मिनट के अंदर ही थानेदार विशाल सिंह वहां पहुंचे। एम्बुलेंस से जिला अस्पताल भिजवाया। विशाल सिंह ने बताया कि मैं जब घटना स्थल पर पहुंचा तब पीएसी जवान होश में थे। वह बार-बार पानी मांग रहे। पीएसी जवान अभिषेक ने ही अपने घर का एक नंबर दिया उस नंबर पर कॉल रिसीव नहीं हुई इसके बाद अपने मोबाइल से गांव के ही दूसरे व्यक्ति का नंबर दिया उस पर कॉल रिसीव हो गई। इसके बाद परिवार के लोगों से बात हुई। उन्हें घटनाक्रम बताते हुए जिला अस्पताल बुलाया गया। घटना के बाद उनके परिवार के लोग जिला अस्पताल पहुंचे। लेकिन तब तक अभिषेक ने दम तोड़ दिया था। इसके बाद वहां चीख पुकार मच गई। जिला अस्पताल में बार-बार परिवार के लोगों के पास अभिषेक की पत्नी का कॉल आ रहा था। वह अपने पति की हालत जानना चाह रही थी। लेकिन, परिवार के लोग कुछ बताना नहीं चाह रहे थे। काफी देर बाद अभिषेक के भाई ने सारी बात बताई। जिसके बाद वह फोन पर ही चीख-चीख कर रोने लगी।

भाटपार रानी विधायक सभा कुंवर कुशवाहा के जनता दरबार में सुनी गईं जन समस्याएँ, अधिकारियों को त्वरित निवारण के निर्देश

भाटपार रानी/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। मंगलवार को प्रातः स्थानीय विधायक द्वारा जनता दरबार लगा कर क्षेत्र से आए हुए फरियादियों की बात सुनी गई। उपस्थित तमाम महिला एवं पुरुष युवा एवं बुजुर्ग लोगों ने अपनी अपनी समस्याओं से लोकप्रिय विधायक को अवगत कराया। एक तरफ सरकार एवं प्रशासन द्वारा जनता के समस्याओं के निराकरण पर पूरा जोर है। जबकि लगातार प्रतिदिन लोकप्रिय विधायक के जनता दरबार में अलग अलग विभागों से संबंधित फरियादी अपनी फरियाद के साथ पहुंच रहे हैं। जिसके निवारण हेतु लगातार भाटपार रानी के विधायक सभा कुंवर कुशवाहा के द्वारा अलग अलग विभागों के संबंधित अधिकारियों को तत्काल समस्या निवारण हेतु निर्देशित किया जाता रहा है। इसी क्रम में जनता दरबार में आए ग्राम प्रताप छापर निवासी नगेंद्र यादव ने अपने बीमार बेटे के इलाज में आ रहे भारी भरकम खर्च को लेकर कर सहयोग की गुहार लगाई वहीं क्षेत्र से आए तमाम लोगों में तहसील, विभिन्न ब्लाक, विभिन्न थानों से संबंधी शिकायतों सहित स्वास्थ्य विभाग संबंधित शिकायतों के निवारण को लेकर फरियादियों ने अपनी अपनी समस्या निवारण हेतु अवगत कराया जिस पर संबंधित को लोकप्रिय विधायक ने निर्देशित किए।

UPSSSC PET-2025: एडमिट कार्ड जारी, 6-7 सितम्बर को 48 जिलों में परीक्षा, 25 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल होंगे

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने प्रीलिमिनरी एलिजिबिलिटी टेस्ट (PET-2025) के एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। आयोग ने अभ्यर्थियों के पंजीकृत ई-मेल आईडी पर एडमिट कार्ड डाउनलोड लिंक भेजा है। इसके अलावा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप से भी अभ्यर्थी अपने प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं।

यह परीक्षा आगामी 6 और 7 सितम्बर 2025 को प्रदेश के 48 जिलों में आयोजित की जाएगी। PET-2025 के लिए इस बार रिकॉर्ड तोड़ 25 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है।

आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे परीक्षा केंद्र पर समय से पूर्व पहुँचें और प्रवेश पत्र के साथ निर्धारित पहचान पत्र अवश्य लेकर आएँ। परीक्षा को लेकर सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।

UPSSSC PET प्रदेश में विभिन्न समूह ‘ग’ एवं ‘घ’ की भर्ती प्रक्रियाओं का पहला चरण है। PET क्वालीफाई करने वाले अभ्यर्थी आगे होने वाली मुख्य परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में शामिल हो सकेंगे।

खुले नाले में गिरे सिपाही, डूबने से दर्दनाक मौत — नगर पालिका की लापरवाही उजागर

संभल (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) नगर पालिका की लापरवाही एक बार फिर मौत का सबब बनी। सोमवार सुबह बारिश के बीच ड्यूटी पर जा रहे कांस्टेबल रजनीश कुमार (उम्र लगभग 28 वर्ष) की सड़क पर बने खुले नाले में गिरने से दर्दनाक मौत हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज बारिश के कारण शहर की सड़कें जलमग्न हो गई थीं। इसी दौरान बाइक सवार कांस्टेबल रजनीश कुमार का संतुलन बिगड़ गया और उनकी मोटरसाइकिल फिसलकर सीधे गहरे खुले नाले में जा गिरी। पानी का बहाव तेज होने से रजनीश कुमार बाहर नहीं निकल पाए और उनकी मौके पर ही डूबकर मौत हो गई।

स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस और गोताखोरों की मदद से रजनीश कुमार को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं।

घटना से पुलिस विभाग में शोक की लहर दौड़ गई। एसपी संभल का बयानएसपी संभल ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा, “कांस्टेबल रजनीश कुमार एक कर्तव्यनिष्ठ जवान थे। बारिश में सड़क पर जलभराव और खुले नाले के कारण यह हादसा हुआ। नगर पालिका की लापरवाही साफ तौर पर सामने आई है। नगर पालिका प्रशासन से जवाबदेही तय करने के लिए पत्र भेजा जा रहा है। मृतक सिपाही के परिजनों को विभागीय नियमों के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।”

स्थानीय लोगों ने नगर पालिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शहर में जलभराव और खुले नाले लंबे समय से मौत को दावत दे रहे हैं, लेकिन प्रशासन आँख मूंदे बैठा है। लोगों ने मांग की कि जिम्मेदार अफसरों पर सख्त कार्रवाई हो और शहर की नालियों को ढकने का कार्य तत्काल शुरू कराया जाए।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: शिक्षकों की सर्विस और प्रमोशन के लिए अब TET पास करना अनिवार्य

नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) देशभर के लाखों शिक्षकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि अब शिक्षकों को अपनी नौकरी में बने रहने और प्रमोशन पाने के लिए टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करना अनिवार्य होगा। इसके लिए शिक्षकों को दो साल की समय-सीमा दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिन शिक्षकों की सर्विस में 5 साल से ज्यादा का समय शेष है, उन्हें TET पास करना ही होगा। यदि वे निर्धारित समय-सीमा में परीक्षा पास करने में असफल रहते हैं तो उन्हें या तो इस्तीफा देना होगा या फिर कंपल्सरी रिटायरमेंट लेना होगा।

वहीं, जिन शिक्षकों की नौकरी में सिर्फ 5 साल या उससे कम समय बचा है, उन्हें परीक्षा से राहत दी गई है, लेकिन ऐसे शिक्षक प्रमोशन के लिए पात्र नहीं होंगे।

इस फैसले से लाखों शिक्षकों की स्थिति सीधे प्रभावित होगी। कोर्ट का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला शिक्षा जगत में जवाबदेही और दक्षता बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

कवि विश्वास की पत्नी मंजू शर्मा ने RPSC से दिया इस्तीफ़ा, SI भर्ती पेपर लीक प्रकरण में नाम आने से बढ़ा दबाव

जयपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में सदस्य पद पर कार्यरत कवि एवं आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता डॉ. कुमार विश्वास की पत्नी मंजू शर्मा ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने अपना इस्तीफ़ा राज्यपाल को भेज दिया है।

हाल ही में हुई उप-निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा पेपर लीक प्रकरण में उनका नाम सामने आने के बाद से उन पर राजनीतिक और सामाजिक दबाव बढ़ता जा रहा था। बताया जा रहा है कि इसी कारण उन्होंने यह कदम उठाया।

गौरतलब है कि राजस्थान में बीते कई महीनों से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक मामले लगातार सुर्खियों में रहे हैं। हाल ही में एसआई भर्ती परीक्षा में पेपर लीक के तार कई प्रभावशाली लोगों तक पहुंचे, जिनमें RPSC सदस्य मंजू शर्मा का नाम भी मीडिया और जांच एजेंसियों की चर्चाओं में उभरा।

राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर हलचल तेज है। विपक्ष ने राज्य सरकार और RPSC की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि “जब आयोग के भीतर बैठे जिम्मेदार लोग ही विवादों में फंसे हों तो परीक्षार्थियों का भविष्य सुरक्षित कैसे रहेगा?”

फिलहाल, मंजू शर्मा के इस्तीफ़े पर आधिकारिक प्रतिक्रिया आनी बाकी है, लेकिन माना जा रहा है कि राज्यपाल की स्वीकृति के बाद उनका इस्तीफ़ा प्रभावी हो जाएगा।
मंजू शर्मा को साल 2022 में राजस्थान लोक सेवा आयोग में सदस्य नियुक्त किया गया था।
वे शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी रही हैं और उन्हें एक शिक्षाविद् के रूप में पहचाना जाता रहा है।

SI भर्ती परीक्षा पेपर लीक कांड की जांच अभी जारी है और इस प्रकरण से जुड़े कई लोग अब तक गिरफ्तार हो चुके हैं।
प्रतियोगी छात्रों और अभ्यर्थियों ने इस पूरे मामले में पारदर्शी जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर बैठक

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद न्यायाधीश मोहन लाल विश्वकर्मा के निर्देशन में आगामी 13 सितंबर 2025 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर जनपद न्यायालय सभागार में प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक हुई।
बैठक की अध्यक्षता अपर जनपद न्यायाधीश (पॉस्को)/नोडल अधिकारी लोक अदालत कृष्ण कुमार–V ने की। इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव देवेंद्र नाथ गोस्वामी भी मौजूद रहे।
नोडल अधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि वे अपने-अपने विभागों व कार्यालयों में लोक अदालत के दिन अधिक से अधिक वादों और मामलों का निस्तारण सुनिश्चित करें।
अपर उप जिलाधिकारी सुधीर कुमार ने बताया कि तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और अधिकतम मामलों के निस्तारण का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद अजय सिंह ने बताया कि न्यायालय से प्राप्त नोटिसों की तामील कराई जा रही है तथा थानों के पैरोकारों को सक्रिय किया गया है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव देवेंद्र नाथ गोस्वामी ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के लिए सभी विभागों का सहयोग आवश्यक है।
बैठक में अपर उप जिलाधिकारी सुधीर कुमार, पुलिस क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद अजय सिंह, जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार, नायब तहसीलदार खलीलाबाद राजेश मिश्रा, नायब तहसीलदार मेहदावल, जिला बांट माप अधिकारी वी.पी. वर्मा, उप वनाधिकारी खलीलाबाद, खनन निरीक्षक, सूचना अधिकारी सुरेश कुमार सरोज सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

स्व. राज नारायण पाठक की मनाई गई जयंती

छात्राओं ने वाद विवाद मे अपना अपना पक्ष रखा

बरहज/देवरिया (राष्ट्र क़ी परम्परा)l स्थानीय बाबा राघव दास भगवान दास स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संस्थापक प्राचार्य स्वर्गीय राज नारायण पाठक के जयंती के शुभ अवसर पर, कॉलेज के बाबा राघव दास सभागार में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वर्तमान प्राचार्य प्रोफेसर शंभू नाथ तिवारी ने की, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ महथ प्रसाद कुशवाहा, विशिष्ट अतिथि वीरेंद्र त्रिपाठी बलभद्र त्रिपाठी रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा मां सरस्वती एवं स्वर्गीय राज नारायण पाठक के चित्रपट पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें निबंध लेखन प्रतियोगिता, पोस्टर प्रतियोगिता, रंगोली प्रतियोगिता, वाद विवाद प्रतियोगिता जो स्वर्गीय राज नारायण पाठक की प्रिय प्रतियोगिताओं में से एक रही है। उक्त कार्यक्रम में उनके जीवन के विशेष योगदान एवं कॉलेज के प्रति उनके समर्पण से छात्र-छात्राओं एवं शिक्षक गणों को अवगत कराया गया, जो महाविद्यालय के स्वर्णिम इतिहास को बयां करती है।
निबंध प्रतियोगिता में प्रथम स्थान चालू पासवान, द्वितीय स्थान तनिष्का जायसवाल और तृतीय स्थान अंजली पांडे को प्राप्त हुआ वही रंगोली प्रतियोगिता में प्रथम स्थान आस्था तिवारी, निहारिका सिंह द्वितीय स्थान, और प्रीति गौतम तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। जबकि निशा मद्धेशिया को वाद विवाद प्रतियोगिता में प्रथम स्थान द्वितीय स्थान निहारिका सिंह और तृतीय स्थान सोनू जायसवाल को मिला, इन लोगों ने पक्ष में अपनी बात रखी विपक्ष में प्रथम स्थान आस्था मिश्रा, द्वितीय स्थान नितेश तिवारी, प्रतीक सिंह व वर्षा मद्धेशिया ने प्राप्त किया। कार्यक्रम के इस अवसर पर डॉक्टर दर्शना श्रीवास्तव ,,डॉक्टर आभा मिश्रा ,डॉक्टर मंजू यादव ,कंचन तिवारी ,अरविंद पांडे राजनीति विज्ञान, अरविंद पांडे समाजशास्त्र, बृजेश यादव, अवधेश यादव, उमेश, अभिकल शर्मा, अनुज श्रीवास्तव ,डॉ वेद प्रकाश सिंह ,डॉ प्रज्ञा तिवारी ,,अजय बहादुर, कार्यालय अधीक्षक मनीष श्रीवास्तव, प्रदीप शुक्ला, रुचि मिश्रा, विनय मिश्रा, अनीता जायसवाल ,रीता यादव, राजू कुमार, रवि कुमार , राजीव पांडे सहित सैकड़ो छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

संतुलित व स्वच्छ आहार से ही स्वस्थ जीवन: प्रो. पूनम टंडन

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग में राष्ट्रीय पोषण सप्ताह पर “Eat Right for Better Life” विषयक व्याख्यान आयोजित हुआ। पद्मश्री कृषि वैज्ञानिक एवं पीआरडीएफ निदेशक डॉ. राम चेत चौधरी ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है और इसके लिए सही खानपान बेहद जरूरी है।”
उन्होंने बताया कि स्वाद के पीछे भागकर पौष्टिक आहार की अनदेखी से मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। आयुर्वेद में भोजन को औषधि माना गया है। डॉ. चौधरी ने गृह विज्ञान विभाग के सहयोग से शकरकंद से बने 18 उत्पादों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि गोल्डन स्वीट पोटैटो बीटा-कैरोटीन से भरपूर है, जो विटामिन ए की कमी दूर कर आंखों की बीमारियों से बचाता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बायो-फोर्टीफाइड उत्पादों में पोषक तत्व स्वाभाविक रूप से रहते हैं जबकि फोर्टीफाइड उत्पादों में बाद में मिलाए जाते हैं। अंत में एमएससी छात्राओं द्वारा “Eat Right for Better Life” पर बनाई गई रंगोली आकर्षण का केंद्र रही।
इस कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. दिव्या रानी सिंह, डॉ. अनुपमा कौशिक, डॉ. नीता सिंह, गार्गी पांडे, गरिमा यादव सहित शोध छात्राएं और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।

ग्राम रोजगार सेवकों ने खिरनीबाग में भरी हुंकार क्राफ्ट सर्वे की ड्यूटी से किया इंकार

शाहजहांपुर(राष्ट्र क़ी परम्परा )l उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक पंचायत मित्र वेलफेयर एसोसिएशन ने सोमवार को अपनी मांगों को लेकर खिरनीबाग रामलीला मैदान में बैठक की। इसके बाद सैकड़ों की संख्या में रोजगार सेवकों ने नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्य सचिव को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष पिंटू यादव ने की। उन्होंने साफ कहा कि शासनादेश के मुताबिक ग्राम रोजगार सेवक का कार्यक्षेत्र केवल मनरेगा तक सीमित है। बावजूद इसके, राजस्व विभाग द्वारा उन्हें ई-खसरा/ग्रीनस्टेक सर्वे जैसे कार्यों में लगाया जा रहा है, जो पूरी तरह गलत है। “यह काम लेखपालों का है, लेकिन कम प्रोत्साहन राशि मिलने के कारण लेखपालों ने अपनी ड्यूटी कटवा ली और हमारी ड्यूटी लगा दी गई। हम इसका पूर्ण विरोध करते हैं। प्रदेश उपाध्यक्ष ललितेश शास्त्री ने दो वर्ष का बकाया मानदेय तत्काल दिलाने की मांग की। वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनोज वर्मा ने प्रधानमंत्री आवास सर्वे का मानदेय न मिलने पर रोष जताया। उपाध्यक्ष संतान पाल सिंह ने कहा कि चुनाव ड्यूटी के पैसे तक आज तक नहीं दिए गए। जिला महासचिव कुलदीप सागर ने मांग उठाई कि महंगाई को देखते हुए ग्राम रोजगार सेवकों को कम से कम 20 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाए। जिला कोषाध्यक्ष रविंद्र पाल सिंह ने चेतावनी दी कि यदि ड्यूटी वापस नहीं ली गई तो 3 सितंबर से जिले के 15 ब्लॉकों पर धरना शुरू किया जाएगा। इसके बाद भी कार्रवाई न हुई तो अनिश्चितकालीन आंदोलन होगा। धरना-प्रदर्शन में वक्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बीमा पॉलिसी और अन्य सुविधाओं की घोषणा की गई थी, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण आज तक लागू नहीं की गई। धरना-प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में ग्राम रोजगार सेवक शामिल हुए। इसमें अरवेश वर्मा, इंद्रपाल, जलज पांडेय, अच्छे मिश्रा, अनुज शुक्ला, महिपाल सिंह, धर्मेंद्र मौर्य, सुधीर यादव, देवेश अवस्थी, अमित वर्मा, अर्चना अवस्थी, उपासना कुशवाहा समेत कई पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

हाईटेंशन लाइन से झुलसा मजदूर शरीर से निकला धुआं

शाहजहांपुर(राष्ट्र क़ी परम्परा )l रोजा थाना क्षेत्र में सोमवार को बड़ा हादसा हो गया। मालगाड़ी से माल उतारते वक्त एक मजदूर हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया, करंट इतना तेज था कि मजदूर का शरीर जलने लगा और धुआं निकलने लगा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मजदूर ट्रक पर चढ़कर मालगाड़ी के डिब्बे के ऊपर पहुंचा, तभी ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। करंट लगते ही वह डिब्बे पर ही गिर पड़ा। मौके पर मौजूद अन्य मजदूरों ने चीख-पुकार मचाई और किसी तरह उसे नीचे उतारा। आनन-फानन में एम्बुलेंस बुलाकर घायल को अस्पताल भेजा गया। रोजा थाना प्रभारी राजीव कुमार ने बताया कि घायल का इलाज अस्पताल में जारी है। पुलिस मजदूर के परिवार का पता लगाने में जुटी है। वहीं, वायरल हो रहे वीडियो की पुष्टि आपका अपना शहर नहीं करता है।