लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह और हरियाणवी एक्ट्रेस अंजलि राघव से जुड़ा मामला अब नया मोड़ ले चुका है। जिस प्रकरण पर उत्तर प्रदेश महिला आयोग ने पहले कड़ी कार्रवाई की बात कही थी, अब उसी पर आयोग नरम रुख अपनाता दिखाई दे रहा है।
दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में पवन सिंह लाइव शो के दौरान मंच पर अंजलि राघव को अनुचित तरीके से छूते नजर आए थे। घटना सामने आने के बाद महिला आयोग अध्यक्ष बबिता सिंह ने इसे गंभीर बताते हुए पुलिस आयुक्त को जांच और कार्रवाई के लिए पत्र भेजने की बात कही थी।
लेकिन अब आयोग का रुख बदल गया है। आयोग अध्यक्ष का कहना है कि वीडियो देखने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि पवन सिंह ने यह हरकत मजाक में की थी और अंजलि राघव ने भी उस समय किसी प्रकार का विरोध दर्ज नहीं कराया। बबिता सिंह ने कहा, “अगर अंजलि को गलत लगता तो उन्हें उसी मंच पर विरोध करना चाहिए था।”
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि पब्लिक प्लेटफॉर्म पर इस तरह का व्यवहार किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। इसलिए पवन सिंह को आयोग की ओर से चेतावनी दी गई है।
गौरतलब है कि इस विवाद के चलते पवन सिंह ने पहले ही सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली थी। अब आयोग का नरम रुख सामने आने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर महिला आयोग ने अपना स्टैंड क्यों बदला।
यह मामला न केवल भोजपुरी इंडस्ट्री बल्कि हरियाणवी कला जगत में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
लखनऊ।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से एक बार फिर बड़ी संख्या में डॉक्टरों के इस्तीफे की खबर सामने आई है। इस बार चार डॉक्टरों ने एक साथ अपनी सेवाएं छोड़ दी हैं। इस्तीफा देने वालों में डॉ. मनु अग्रवाल, डॉ. तन्वी भार्गव, डॉ. अशोक और डॉ. करण शामिल हैं।
खास बात यह है कि इन डॉक्टरों ने नोटिस पीरियड पूरा करने के बजाय तीन महीने का वेतन जमा कर तत्काल प्रभाव से संस्थान से खुद को मुक्त करा लिया। KGMU जैसे प्रतिष्ठित और बड़े संस्थान से एक साथ चार डॉक्टरों का जाना मरीजों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
पहले से ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे विभिन्न विभागों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। खासकर मनोरोग विभाग, जहां से डॉ. मनु अग्रवाल जुड़ी थीं। इस विभाग में मरीजों की संख्या अधिक और डॉक्टरों की संख्या सीमित है। ऐसे में मरीजों की परेशानी और बढ़ना तय है।
डॉक्टरों के लगातार इस्तीफे ने KGMU प्रशासन की चिंताओं को भी बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो चिकित्सा सेवाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है।
अयोध्या(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) आगामी रविवार को लगने वाले चन्द्र ग्रहण के अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के कपाट परंपरा के अनुसार बंद कर दिए जाएंगे। मंदिर प्रशासन के अनुसार ग्रहण का सूतक काल रविवार दोपहर 12:30 बजे से प्रारंभ होगा, जिसके बाद रामलला के दर्शन भक्तों के लिए स्थगित हो जाएंगे।
मंदिर ट्रस्ट के सूत्रों ने बताया कि सूतक काल शुरू होते ही रामलला की नियमित भोग-आरती और पूजन-विधि भी स्थगित कर दी जाएगी। कपाट बंद होने से पहले प्रातःकाल की सभी पूजा-पद्धतियां संपन्न कर दी जाएंगी।
चन्द्र ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर में विशेष शुद्धिकरण और पूजन-अर्चन कराया जाएगा। इसके उपरांत ही पुनः कपाट खोले जाएंगे और भक्तगण रामलला के दर्शन कर सकेंगे।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार का चन्द्र ग्रहण धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, और मान्यता है कि सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद रखना आवश्यक होता है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित समय का पालन करें और कपाट पुनः खुलने के बाद ही दर्शन हेतु पधारें।
कोच्चि/दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) इंडिगो एयरलाइन के दो विमानों में अलग-अलग घटनाएं सामने आई हैं। शुक्रवार देर रात अबू धाबी के लिए रवाना हुआ इंडिगो का एक विमान तकनीकी खराबी के चलते उड़ान भरने के करीब दो घंटे बाद कोच्चि लौट आया। विमान में 180 से अधिक यात्री और चालक दल के छह सदस्य सवार थे। एयरलाइन की ओर से फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।
इसी बीच, सोमवार को दिल्ली से कोलकाता जाने वाली इंडिगो की फ्लाइट (6E 6571) में हंगामे की स्थिति पैदा हो गई। जानकारी के अनुसार, एक यात्री जो वकील बताया जा रहा है, शराब के नशे में धार्मिक नारे लगाने लगा और बाकी यात्रियों से भी “जय श्री राम” के नारे लगाने का आग्रह करने लगा। स्थिति तब बिगड़ी जब उसने एयरलाइन क्रू से बहस शुरू कर दी और एक महिला क्रू सदस्य पर आपत्तिजनक टिप्पणी की।
सूत्रों के मुताबिक, यात्री अपने साथ एक सॉफ्ट ड्रिंक की बोतल में शराब लेकर आया था और लगातार दूसरों को परेशान कर रहा था। उड़ान उस समय 30 मिनट से अधिक समय तक पार्किंग बे में रुकी हुई थी।
इंडिगो ने बयान जारी कर कहा, “हमें 01 सितंबर 2025 को दिल्ली-कोलकाता उड़ान में हुई अभद्रता की जानकारी है। संबंधित यात्री शराब के नशे में केबिन क्रू और सह-यात्रियों को परेशान कर रहा था। इस तरह के व्यवहार को गंभीरता से लिया जाता है।”
जयपुर।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) राजधानी जयपुर में शुक्रवार देर रात हुए दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर जर्जर मकानों की असलियत और प्रशासनिक उपेक्षा को सामने ला दिया है। सुभाष चौक सर्किल के पास स्थित एक पुराना मकान अचानक भरभराकर गिर पड़ा, जिसमें पिता-पुत्री की मौत हो गई जबकि पाँच लोग घायल हो गए।
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त दुर्ग सिंह राजपुरोहित ने बताया कि हादसे के समय मकान में करीब 19 लोग किराए पर रहते थे। प्रथम दृष्टया कारण मकान का जर्जर होना और लगातार हो रही बारिश को माना जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुँचे और मलबा हटाने का काम शुरू किया।
हादसे में प्रभात (33) और उनकी छह वर्षीय बेटी पीहू की मौत हो गई। प्रभात की पत्नी सुनीता गंभीर रूप से घायल हैं। अन्य चार घायलों को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज जारी है। बचाव अभियान अब भी जारी है और टीम लगातार मकान की शेष संरचना की स्थिरता का आकलन कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जयपुर समेत कई पुराने शहरों में ऐसे जर्जर भवन खतरनाक स्थिति में खड़े हैं। भारी बरसात से इनका ढांचा और कमजोर हो जाता है। यह हादसा प्रशासन और समाज दोनों के लिए चेतावनी है कि समय रहते पुराने मकानों की जाँच और रखरखाव न किया गया तो और बड़ी त्रासदियाँ सामने आ सकती हैं।
इस बीच, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 6 और 7 सितंबर को गुजरात क्षेत्र, सौराष्ट्र और कच्छ में छिटपुट स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। पूर्वी राजस्थान में भी बारिश का असर जारी रहने की संभावना जताई गई है। यह हादसा सिर्फ एक परिवार का नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए सबक है। पुरानी और कमजोर इमारतों में रहना खतरे से खाली नहीं है। ऐसे मकानों की नियमित जाँच और मरम्मत की संस्कृति अपनाना ही जीवन की सुरक्षा का असली रास्ता है।
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की ताज़ा रिपोर्ट ने देशभर में बच्चों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अध्ययन में पाया गया है कि बिहार के करीब 35 लाख बच्चे ऑनलाइन गेम्स में लिप्त हैं, जिनमें से लगभग 25 लाख (70%) बच्चे मानसिक तनाव और बीमारियों से जूझ रहे हैं।
यह लत न केवल उनकी पढ़ाई और करियर को प्रभावित कर रही है, बल्कि परिवारिक रिश्तों और सामाजिक व्यवहार पर भी नकारात्मक असर डाल रही है।
देशभर की स्थिति देशभर में करोड़ों बच्चे ऑनलाइन गेम्स में समय बर्बाद कर रहे हैं।रिपोर्ट के अनुसार, 50% से अधिक प्रभावित बच्चों में चिड़चिड़ापन, अकेलापन और अवसाद के लक्षण पाए गए।विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति पर काबू नहीं पाया गया तो आने वाले समय में यह “नई नशे की लत” बन सकती है।
बिहार में बढ़ती समस्या बिहार जैसे शैक्षिक रूप से पिछड़े राज्यों में यह समस्या और गहरी है।ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे मोबाइल और इंटरनेट की आसान उपलब्धता से गेम्स के आदी हो रहे हैं।शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर की तैयारी पर गंभीर असर पड़ रहा है।
समाज को संदेश विशेषज्ञों का सुझाव है कि अभिभावक बच्चों पर निगरानी रखें, उन्हें खेलकूद, पढ़ाई और रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रोत्साहित करें। सरकार और स्कूलों को भी जागरूकता अभियान चलाना होगा ताकि अगली पीढ़ी इस खतरे से बच सके।
बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) राम जानकी मार्ग बाईपास रोड पर मोहाव गांव के समीप ट्रांसफार्मर से निकला तार रामजानकी मार्ग के बगल से जमीन से लगभग 4 फिट ऊपर हवा में नंगा लटक रहा है। यह विधुत केबल सड़क के बगल मे नंगा जोड़ के रूप मे हवा मे लटक रहा है, जिससे कभी भी जान माल की हानि हो सकती है। इस बाईपास रोड से हर रोज हजारों गाड़ियां, पैदल राहगीरो का आना जाना होता है। नगर के बहुत सारे विद्युत खम्भो पर तारों का मकड़जाल फैला हुआ है, यही नहीं केवटलिया में लोगों के छतों के ऊपर से विद्युत तार गुजर रहे हैं। इतना ही नहीं कई अति व्यस्त इलाकों में जर्जर तार के लटकने से लोगो के ऊपर खतरा मंडरा रहा है। इस संबंध मे विद्युत् अभियंता से बात करना चाहा किन्तु उनसे बात नहीं हो पायी।
महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था की गिरती गुणवत्ता ने ग्रामीण समाज को गहरी चिंता में डाल दिया है। सरकारी विद्यालयों की दुर्दशा, शिक्षकों की कमी और आधारभूत संसाधनों के अभाव ने बच्चों को ज्ञान से वंचित कर दिया है। गांवों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे न तो प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में टिक पा रहे हैं और न ही उच्च शिक्षा में अपनी जगह बना पा रहे हैं। निजी विद्यालयों की ऊँची फीस ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर तोड़ दी है। शिक्षा का व्यवसायीकरण इतना बढ़ गया है कि अभिभावकों को मजबूरी में कर्ज लेकर बच्चों की पढ़ाई करानी पड़ रही है। इस कारण ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है। भाजपा नेता पंकज राय का कहना है कि बच्चों को मजबूरी में प्राइवेट स्कूलों में भेजना पड़ रहा है, जहा फीस इतनी अधिक है कि आम आदमी के लिए भरना मुश्किल हो जाता है। ग्राम प्रधान पकड़ी बिशुनपुर मु. हुसैन ने कहा कि यदि शिक्षा में सुधार के ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में ग्रामीण समाज और भी पिछड़ जाएगा और देश को योग्य लोगों की भारी कमी झेलनी पड़ेगी। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता पिंटू दुबे ने कहा कि शिक्षा में सुधार किये बिना विकास की कल्पना अधूरी है। गांव गांव में बेहतर विद्यालय आधुनिक संसाधन और प्रशिक्षित शिक्षक मुहैया कराना ही सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। भाजपा मंडल मंत्री घुघली दक्षिणी रिंकू गुप्ता ने कहा कि बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था अब गांव-गांव की आम जनता का मुद्दा बन चुकी है। लोग चाहते हैं कि बच्चों के भविष्य के लिए तुरंत कारगर सुधार योजनाएं लागू हों। ग्रामीणों का कहना है कि ऑन-लाइन शिक्षा व मोबाइल पर निर्भरता से अनुशासन व सीखने की क्षमता प्रभावित हो रही है। आज शिक्षा का अधिकार व्यापार में तब्दील हो गया है। गिरती पढ़ाई के वजह से बच्चे पिछड़ रहे हैं, जिससे अभिभावक परेशान हैं।
श्रद्धया इदं श्राद्धम् – जो श्र्द्धा से किया जाय, वह श्राद्ध है
मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान हमारे पूर्वज किसी न किसी रूप में धरती पर आते हैं और श्राद्ध को ग्रहण कर हमें आशीर्वाद देते हैं-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत मान्यताओं प्रथाओं परंपराओं और गहरी आध्यात्मिकता में आस्था रखने वाले देश के रूप में प्रसिद्ध है।अनेक कारणों में से यह भी एक कारण है की पूरी दुनियां से सैलानी भारत भ्रमण पर आते है जो इन प्रथाओं परंपराओं आध्यात्मिकता को देख उनसे प्रेरणा लेने की कोशिश करते हैं।आधुनिक विज्ञान के इस डिजिटल युग में जहां मानव चांद पर मानव कॉलोनी बनाने की ओर बढ़ गए हैं, सूर्य को अपनी मुट्ठी में लेने के प्रयास हो रहे हैं,मानव का स्थान अब रोबोट ले रहा है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनियां हदें पार कर रही है,परंतु भारत एक ऐसा देश है जिसकी सभ्यता और संस्कृति की जड़ें हजारों वर्षों पुरानी हैं।यहाँ का जीवन- दर्शन केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है बल्कि अतीत और भविष्य को भी जोड़ता है। इसी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का एक गहरा उदाहरण है पितृपक्ष, जिसे हर वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर आश्विन अमावस्या तक मनाया जाता है। वर्ष 2025में यह पवित्र कालखंड 7 सितंबर से 21 सितंबर तक रहेगा। यह समय भारतीय समाज में पूर्वजों की स्मृति, उनके प्रति कृतज्ञता और उनकी आत्मा की शांति के लिए किए जाने वाले कर्मकांड का प्रतीक है। इस पर्व का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है,बल्कि यह मनुष्य को उसकी जड़ों से जोड़ने और सामाजिक सामंजस्य बनाए रखने की प्रेरणा भी देता है। आज भारत के परिवार सच्चे मन से एवं श्रद्धा से श्राद्ध मनाकर अपने पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त कर रहा है। मान्यता के अनुसार इस दौर में हमारे पूर्वज किसी न किसी रूप में धरती पर आते हैं और श्राद्ध को ग्रहण कर हमें आशीर्वाद देते हैं। भारतीय संस्कृति में पितृपक्ष को केवल कर्मकांड का पर्व नहीं माना गया है, बल्कि इसे आस्था और श्रद्धा का जीवंत प्रतीक समझा गया है।”श्रद्धया इदं श्राद्धम्” का शास्त्रीय उद्घोष यही बताता है कि जब किसी कार्य को श्रद्धा, निष्ठा और कृतज्ञता से किया जाता है तो वह श्राद्ध कहलाता है।इसीलिए पितृपक्ष केवल आचार-विचार का विषय नहीं है, बल्कि यह भावनाओं, रिश्तों और पारिवारिक मूल्यों का उत्सव है। जब मनुष्य अपने पूर्वजों का स्मरण करता है,उन्हें तर्पण, पिंडदान और भोजन अर्पण करता है, तो यह उसकी आत्मा को भी शांति प्रदान करता है।चूंकि यह 15 दिवसीय श्राद्ध 7 सितंबर 2025 से शुरू हैं, इसलिएआज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से,चर्चा करेंगे, श्रद्धया इदं श्राद्धम् – जो श्र्द्धा से किया जाय, वह श्राद्ध है। साथियों बात अगर हम पितृपक्ष का मूल उद्देश्य को समझने की करें तो, यही है कि मनुष्य अपने जीवन में यह स्वीकार करे कि उसका अस्तित्व केवल उसकी मेहनत का परिणाम नहीं है। उसकी रगों में उसके माता-पिता और पूर्वजों का रक्त बह रहा है, उसकी संस्कृति और संस्कार उसके पूर्वजों की धरोहर हैं। इसलिए यह पर्व केवल मृतकों को याद करने का माध्यम नहीं है बल्कि यह जीवितों के जीवन को भी अनुशासित और संतुलित करने का अवसर है। यह हमें यह स्मरण कराता है कि परिवार, समाज और संस्कृति की जड़ों को कभी भुलाया नहीं जा सकता।भारतीय धर्मग्रंथों में यह स्पष्ट कहा गया है कि हर मनुष्य पर तीन प्रकार के ऋण होते हैं,देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण। इनमें से पितृ ऋण सर्वोपरि माना गया है क्योंकि माता-पिता और पूर्वजों के बिना किसी का अस्तित्व संभव नहीं है। देव ऋण हमें प्रकृति और देवताओं के प्रति कृतज्ञ बनाए रखता है,ऋषि ऋण हमें ज्ञान और परंपरा की याद दिलाता है, जबकि पितृ ऋण हमें जीवनदाता और हमारी जड़ों की स्मृति कराता है।माता-पिता,दादा-दादी और उन सभी बुजुर्गों को पितृ ऋण के अंतर्गत माना गया है जिन्होंने हमें जीवन का आधार दिया। इसलिए पितृपक्ष में पितरों का स्मरण और उनका तर्पण करना केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि जीवन का नैतिक दायित्व भी है। साथियों बात अगर हम पितृपक्ष के दौरान किए जाने वाले कर्मकांडों की करें तो,उसमें तर्पण पिंडदान और ब्राह्मण भोजन प्रमुख हैं। शास्त्रों के अनुसार, तीन पीढ़ियों तक के पिता पक्ष और तीन पीढ़ियों तक के माता पक्ष के पूर्वजों का स्मरण करना आवश्यक है। इन्हीं को ‘पितर’ कहा गया है। तर्पण के माध्यम से व्यक्ति जल अर्पण करके यह भावना व्यक्त करता है कि वह अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए समर्पित है। पिंडदान के रूप में अन्न का अर्पण उनके प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है। यही कारण है कि इस काल में घर-घर में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण रहता है और लोग अपने पूर्वजों के नाम से विशेष रूप से ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराते हैं। साथियों बात अगर हम पितृपक्ष का एक महत्वपूर्ण पहलू पितृ दोष की करें तो, ज्योतिष और धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब परिवार में पूर्वजों की आत्मा को उचित संतुष्टि नहीं मिलती या उनके लिए श्रद्धापूर्वक श्राद्ध, तर्पण आदि नहीं किया जाता, तो इसे पितृ दोष कहा जाता है। इसका प्रभाव परिवार के जीवन पर पड़ता है और इसे अपूर्ण कार्यों, अशांति, असफलता, आर्थिक संकट या मानसिक तनाव से जोड़ा जाता है। पितृ दोष के कारण घर में प्रगति रुक सकती है और परिवारिक संबंधों में तनाव उत्पन्न हो सकता है। इस दोष को दूर करने के लिए शास्त्रों में कई उपाय बताए गए हैं, जैसे,पितृपक्ष में विधिवत तर्पण करना, पिंडदान करना, गाय, कुत्ते और कौवे को भोजन कराना तथा ब्राह्मणों को दान देना। इसके अतिरिक्त, गीता पाठ, विष्णु सहस्रनाम, नारायण बलि और रुद्राभिषेक जैसे अनुष्ठान भी पितृ दोष को शांत करने में सहायक माने गए हैं। साथियों बात अगर हम आधुनिक संदर्भ में पितृपक्ष का महत्व और भी बढ़ जाने की करें तो,आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर अपने पूर्वजों और पारिवारिक मूल्यों को भूल जाते हैं। लेकिन यह पर्व उन्हें यह स्मरण कराता है कि हमारी जीवनशैली और हमारे संस्कार किसी व्यक्तिगत उपलब्धि का परिणाम नहीं हैं, बल्कि यह पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित धरोहर है। इसी कारण पितृपक्ष को मानव सभ्यता की कृतज्ञता का पर्व कहा जा सकता है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि आधुनिकता के बीच भी परंपराओं को जीवित रखना उतना ही आवश्यक है, जितना प्रगति करना।पितृपक्ष का एक गहरामनोवैज्ञानिक महत्व भी है। जब लोग अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं, तो यह उन्हें आत्मिक संतोष और भावनात्मक स्थिरता प्रदान करता है। यह प्रक्रिया मानसिक शांति और परिवार के भीतर सामंजस्य लाने में सहायक होती है। पूर्वजों का स्मरण करने से व्यक्ति को अपने जीवन के संघर्षों में भी यह प्रेरणा मिलती है कि जैसे उनके पूर्वजों ने कठिनाइयों का सामना किया, वैसे ही वे भी चुनौतियों को पार कर सकते हैं। साथियों बातें अगर हम पितृपक्ष केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय प्रवासी समाज के माध्यम से पूरी दुनिया में फैल चुका है, इसको समझने की करें तो, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अफ्रीका में बसे भारतीय समुदाय इस काल में विशेष श्राद्ध अनुष्ठान करते हैं। वैश्विक स्तर पर यह पर्व इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मनुष्य को उसकी जड़ों से जोड़े रखता है, चाहे वह कहीं भी रह रहा हो। जब प्रवासी भारतीय अपने घरों में पितरों का स्मरण करते हैं और अपने बच्चों को यह परंपरा बताते हैं, तो इससे भारतीय संस्कृति की निरंतरता बनी रहती है। इस प्रकार पितृपक्ष सांस्कृतिक पहचान और वैश्विक भारतीयता का भी प्रतीक बन चुका है।यदि वैश्विक दृष्टिकोण से देखा जाए तो पितृपक्ष का भाव अन्य सभ्यताओं में भी दिखाई देता है। चीन में ‘किंग मिंग फेस्टिवल’(टॉब स्वीपिंग डे), जापान में ‘ओबोन उत्सव’, मैक्सिको में ‘डे ऑफ द डेड’, और यूरोप के कई हिस्सों में ‘ऑल सोल्स डे’ जैसे पर्व इसी बात का प्रतीक हैं कि पूरी दुनिया में मनुष्य अपने पूर्वजों को याद करने की परंपरा निभाता है। यह सांस्कृतिक समानता दर्शाती है कि चाहे भाषा, भूगोल और परंपराएँ अलग हों, लेकिन पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता की भावना वैश्विक स्तर पर समान है। इस दृष्टिकोण से पितृपक्ष केवल भारतीय पर्व नहीं बल्कि विश्व मानवता की साझा धरोहर के रूप में देखा जा सकता है। आज आवश्यकता इस बात की है कि पितृपक्ष के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न रखकर इसे एक मानव-धर्म और नैतिक कर्तव्य के रूप में देखा जाए। जब व्यक्ति अपने पूर्वजों को याद करता है तो वह यह भी सीखता है कि उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या धरोहर छोड़नी चाहिए। इस प्रकार पितृपक्ष केवल अतीत का उत्सव नहीं है बल्कि यह भविष्य के लिए जिम्मेदारी की याद दिलाने वाला पर्व भी है। साथियों बात अगर हम पितृपक्ष के 15 दिनों में हमारे पूर्वजों के हमारे आसपास होने के संकेतों की करें तो,(1) पितृ पक्ष में कौए का विशेष महत्व माना है, माना जाता है कि इन दिनों में पितर कौवों के रूप में धरती पर आते हैं और जल-अन्न ग्रहण करते हैं। पितृ पक्ष के दौरान अगर कौआ आपके घर में आकर भोजन ग्रहण करता है तो इसका मतलब है कि आपके पूर्वज आपके आसपास मौजूद हैं और आप पर उनकी दया दृष्टि है।(2)श्राद्ध के दिनों में अगर आपको अपने घर के आसपास अचानक से काला कुत्ता दिखाई देता है, तो यह आपके आसपास पितरों की मौजूदगी का संकेत हो सकता है।पितृ पक्ष के दौरान काले कुत्ते को पितरों का संदेशवाहक माना जाता है, इन दिनों में काले कुत्ते का दिखना एक शुभ संकेत माना जाता है, इसका मतलब है कि आपके पितृ आपसे प्रसन्न हैं।(3)पितृ पक्ष के दौरान आपको घर में बहुत सारी लाल चीटियां दिखाई दें तो यह भी पितरों के आसपास होने का संकेत है, माना गया है कि आपके पितृ चीटियों के रूप में आपसे मिलने आते हैं,ऐसे में आपको चीटियों को आटा खिलाना चाहिए इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।(4)पितृ पक्ष के दौरान अगर घर में लगी तुलसी अचानक से सुखने लगे तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आपके पूर्वज आपके आसपास ही कहीं हैं, तुलसी का सूखना इस बात का भी संकेत है कि आपके पूर्वज किसी बात पर आपसे नाराज हैं, ऐसे में पितरों की शांति के लिए उपाय करने चाहिए। (5) हिंदू मान्यताओं के अनुसार पीपल पर पितरों का भी वास होता है, आपके घर में अगर अचानक से पीपल का पेड़ निकल आए तो यह पितरों के आसपास मौजूद होने का संकेत होता है, ऐसे में आपको पीपल पर जल अर्पित करना चाहिए और पितृ दोष से मुक्ति के लिए उपाय करने चाहिए। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि पितृपक्ष 07 से 21 सितंबर 2025 पर विशेष।श्रद्धया इदं श्राद्धम् – जो श्र्द्धा से किया जाय, वह श्राद्ध है।मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान हमारे पूर्वज किसी न किसी रूप में धरती पर आते हैं और श्राद्ध को ग्रहण कर हमें आशीर्वाद देते हैं।
बनकटा, देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। क्षेत्र के जीवन ज्योति पब्लिक स्कूल में शिक्षक दिवस बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य मदन मोहन द्विवेदी एवं पूर्व शिक्षक विजय प्रताप सिंह ने माँ सरस्वती और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण कर किया।
छात्रों ने स्वागत गीत, नृत्य, मिमिक्री और भाषण जैसी रंगारंग प्रस्तुतियाँ देकर शिक्षकों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की और उपहार भेंट कर उनका सम्मान किया। विद्यालय प्रशासन ने पूर्व शिक्षक विजय प्रताप सिंह और रमेश मिश्रा को अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न प्रदान कर अभिनंदन किया। वहीं विशिष्ट अतिथि उदय प्रताप सिंह को भी अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
अतिथियों ने अपने उद्बोधन में शिक्षक-छात्र संबंधों और समाज निर्माण में शिक्षकों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
प्रधानाचार्य मदन मोहन द्विवेदी ने कहा कि “शिक्षक जीवन के पथप्रदर्शक होते हैं। विद्यार्थियों का कर्तव्य है कि वे निष्ठा और अनुशासन के साथ अध्ययन करें तथा सदैव अपने गुरुजनों का सम्मान करें।”
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि विद्यालय की वास्तविक नींव उसके शिक्षक ही होते हैं।
देवरिया(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जनपद के एक नामी मॉल से जुड़ा मामला सनसनीखेज आरोपों के चलते सुर्खियों में आ गया है। मॉल में काम कर चुकी एक युवती ने मॉल मालिक उस्मान, उनकी पत्नी तरन्नुम और साले गौहर अंसारी पर यौन शोषण, धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने और व्यापारियों को लड़कियां सप्लाई करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि करीब डेढ़ साल पहले वह एसएस मॉल में कार्यरत थी। इस दौरान मालिक उस्मान और उसके साले ने जबरदस्ती करने की कोशिश की और उसका वीडियो भी बना लिया। विरोध करने पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाया गया। युवती का आरोप है कि मॉल में आने वाले व्यापारियों के ठहरने की व्यवस्था वहीं होती है और वहां काम करने वाली लड़कियों को जबरन उनके पास भेजा जाता है। उसने यह भी बताया कि मॉल मालिक की पत्नी तरन्नुम, लग्जरी जीवन का सपना दिखाकर लड़कियों को धर्म परिवर्तन के लिए तैयार करने का प्रयास करती है।
पीड़िता के अनुसार, पहले शिकायत करने पर पुलिस ने ही उसे धमकाया था। मगर अब उसने पूरे मामले की पुनः शिकायत एसपी से की है।
इस मामले में पुलिस अधीक्षक विक्रांत वीर ने कहा कि पीड़िता हमारे कार्यालय आई थी और उसने शहर के एक प्रतिष्ठान के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। इसकी जांच अपर पुलिस अधीक्षक को सौंपी गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, मॉल मालिक उस्मान ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि “हमारे मॉल में पिछले 10 वर्षों से हिंदू और मुस्लिम भाई-बहन की तरह कार्य करते हैं। इस दौरान कभी भी इस तरह का आरोप नहीं लगा। हमारे यहां कार्यरत मैनेजर मनोज पांडेय की देखरेख में सब काम होता है। युवती पहले भी 6 महीने पहले आरोप लगा चुकी थी लेकिन तब धर्म परिवर्तन का जिक्र नहीं किया था। दरअसल चोरी के एक मामले से बचने के लिए वह अब हमारे ऊपर झूठा आरोप मढ़ रही है।”
पुलिस जांच के बाद ही सच सामने आएगा, लेकिन आरोपों ने देवरिया की फिजा में हलचल जरूर पैदा कर दी है।
देवरिया, (राष्ट्र की परम्परा)।नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया के सभागार में कर्मचारी-शिक्षक संघर्ष समिति, देवरिया द्वारा भव्य शिक्षक – कर्मचारी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में देवरिया सदर विधायक शलभ मणि त्रिपाठी तथा देवरिया – कुशीनगर से विधान परिषद सदस्य रतन पाल सिंह उपस्थित रहे। इस अवसर पर समिति एवं आयोजक मंडल की ओर से सेवा निवृत्त शिक्षक, प्रधानाचार्य, कर्मचारी, अधिकारी प्रतिनिधियों को शाल और सम्मान चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
समारोह में विशेष रूप से उ.प्र. पेंशनर्स कल्याण संस्था, जनपद देवरिया के अध्यक्ष श्रीराम त्रिपाठी सहित अनेक आमंत्रित प्रतिनिधियों को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक, कर्मचारी और पेंशनर्स समाज राष्ट्र निर्माण की रीढ़ हैं और समाज में उनके योगदान को सदैव याद किया जाना चाहिए।
समारोह के अंत में कर्मचारी-शिक्षक संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए “जय कर्मचारी-शिक्षक, पेंशनर्स समाज” और “जय हिंद” के नारों के साथ कार्यक्रम का समापन किया।
नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) भारत ने अज़रबैजान के उस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उसने दावा किया था कि पाकिस्तान से दोस्ती के चलते भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में उसकी पूर्णकालिक सदस्यता पर रोक लगा दी है। शुक्रवार को विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब दिया।
जायसवाल ने कहा कि “एससीओ का विस्तार एक सतत प्रक्रिया है और इस पर सभी सदस्य देशों की सहमति से ही निर्णय लिया जाता है। इस साल आर्मेनिया और अज़रबैजान दोनों ने सदस्यता के लिए आवेदन किया था। लेकिन समय की कमी के कारण तियानजिन में हुई बैठक में इस मुद्दे पर निर्णय नहीं लिया जा सका। यह मामला अभी भी समूह द्वारा विचाराधीन है।”
उन्होंने दो टूक कहा कि भारत किसी भी देश के खिलाफ किसी प्रकार की “बदले की भावना” से काम नहीं करता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी दोहराया कि एससीओ का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है और नए देशों की सदस्यता पर निर्णय सामूहिक सहमति से ही संभव है।
गौरतलब है कि अज़रबैजान ने हाल ही में आरोप लगाया था कि पाकिस्तान से उसके करीबी संबंधों की वजह से भारत उसकी पूर्ण सदस्यता में अड़चन डाल रहा है। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि अज़रबैजान और आर्मेनिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद के कारण भी सदस्य देशों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद मौजूद हैं।
फिलहाल, एससीओ में रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, कज़ाख़स्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान पूर्ण सदस्य हैं। संगठन का विस्तार एशियाई राजनीति और सुरक्षा समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकता है।
ग्राउंड फ्लोर से 80 मरीजों को दूसरी मंजिल पर शिफ्ट किया गया
शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा ) गर्रा नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन भी चौकन्ना हो गया है। लगातार गर्रा नदी में पानी बढ़ने के चलते मेडिकल कॉलेज परिसर में पानी भरने की आशंका बढ़ गई है। मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए प्रबंधन ने एहतियातन सभी वार्डों के मरीजों को दूसरी मंजिल पर शिफ्ट करा दिया। सूत्रों के अनुसार अस्पताल के निचले हिस्सों में पानी भरने की संभावना बनी हुई थी। जिस पर त्वरित निर्णय लेते हुए प्रशासन ने मरीजों को ऊपर की मंजिल पर स्थानांतरित कराया। वहीं, पानी आने वाले रास्ते को रोकने के लिए बाउंड्री बनवाई गई है। ताकि अस्पताल परिसर सुरक्षित रहे। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी इंतजाम किए गए हैं। स्वास्थ्यकर्मियों को अलर्ट पर रखा गया है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमारने बताया कि बाढ़ के कारण अस्पताल परिसर में जलभराव की स्थिति बन सकती थी। मरीजों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। इसलिए सभी मरीजों को तुरंत दूसरी मंजिल पर शिफ्ट कराया गया है।