Wednesday, July 15, 2026
Home Blog Page 717

विद्यालय में गूंजा स्वच्छता का संदेश, बच्चों ने लिया संकल्प

छोटे कदमों से बड़ा बदलाव–यही है स्वच्छ भारत का संकल्प

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के खलीलाबाद विकास खंड स्थित स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल, ब्यारा में एकलव्य एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट, मगहर के सौजन्य से स्वच्छ भारत अभियान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को स्वच्छता के महत्व से परिचित कराना और उन्हें समाज में स्वच्छता का दूत बनाना था।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के बच्चों को स्वच्छता बनाए रखने की शपथ दिलाई गई। बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और साफ-सफाई को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर मुख्य ट्रस्टी गौरव निषाद ने बच्चों को प्रमाण पत्र वितरित किए और उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे केवल विद्यालय ही नहीं बल्कि घर, मोहल्ले और समाज में भी स्वच्छता का संदेश फैलाएँ। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान तभी सफल होगा जब हम सभी मिलकर इसे अपने जीवन में अपनाएँ।
विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों ने भी बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छता सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। बच्चों को शुरू से ही इस दिशा में जागरूक करना बेहद जरूरी है ताकि वे आगे चलकर एक स्वच्छ और स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान दे सकें।
स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत आयोजित यह कार्यक्रम न केवल बच्चों के लिए प्रेरणादायी साबित हुआ बल्कि विद्यालय परिसर में भी स्वच्छता का संदेश गूंजता रहा।

विद्यालय में गूंजा स्वच्छता का संदेश, बच्चों ने लिया संकल्प

छोटे कदमों से बड़ा बदलाव–यही है स्वच्छ भारत का संकल्प

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के खलीलाबाद विकास खंड स्थित स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल, ब्यारा में एकलव्य एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट, मगहर के सौजन्य से स्वच्छ भारत अभियान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को स्वच्छता के महत्व से परिचित कराना और उन्हें समाज में स्वच्छता का दूत बनाना था।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के बच्चों को स्वच्छता बनाए रखने की शपथ दिलाई गई। बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और साफ-सफाई को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर मुख्य ट्रस्टी गौरव निषाद ने बच्चों को प्रमाण पत्र वितरित किए और उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे केवल विद्यालय ही नहीं बल्कि घर, मोहल्ले और समाज में भी स्वच्छता का संदेश फैलाएँ। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान तभी सफल होगा जब हम सभी मिलकर इसे अपने जीवन में अपनाएँ।
विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों ने भी बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छता सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। बच्चों को शुरू से ही इस दिशा में जागरूक करना बेहद जरूरी है ताकि वे आगे चलकर एक स्वच्छ और स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान दे सकें।
स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत आयोजित यह कार्यक्रम न केवल बच्चों के लिए प्रेरणादायी साबित हुआ बल्कि विद्यालय परिसर में भी स्वच्छता का संदेश गूंजता रहा।

भाजपा सांसद की बहन के साथ मारपीट: ससुरालियों पर गंभीर आरोप, पुलिस ने दर्ज किया केस

सांकेतिक फोटो

एटा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) उत्तर प्रदेश के एटा जिले में फर्रुखाबाद के भाजपा सांसद मुकेश राजपूत की बहन के साथ मारपीट और उत्पीड़न का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई और सांसद की बहन की शिकायत पर ससुराल पक्ष के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।

पीड़िता की पहचान रीना सिंह (राजपूत) के रूप में हुई है, जिनकी शादी 17 साल पहले एटा के रानी अवंतीबाई नगर में हुई थी। रीना का आरोप है कि उनके ससुराल वाले उन्हें लंबे समय से प्रताड़ित कर रहे हैं और घर से निकालना चाहते हैं। उनका कहना है कि ‘‘मेरी दो बेटियां हैं, इसी वजह से मेरे ससुराल वाले मुझे पीटते और परेशान करते हैं।’’

रीना का आरोप है कि रविवार को नहाने के दौरान उनके ससुर लक्ष्मण सिंह और देवर गिरीश ने खिड़की से उनका वीडियो बनाने की कोशिश की। विरोध करने पर उनके साथ गाली-गलौज और बर्बर मारपीट की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि ससुर ने न केवल उन्हें लाठियों से पीटा बल्कि लाइसेंसी राइफल तानकर जान से मारने की धमकी भी दी। वहीं देवर राजेश ने धारदार चाकू से हमला किया, जिससे उनके हाथ में चोट आई, और गिरीश ने लोहे की रॉड से हमला किया।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष लगातार उन्हें घर से निकालने का प्रयास कर रहा है और मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है।

पुलिस कार्रवाई
वायरल वीडियो और लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने ससुर लक्ष्मण सिंह, देवर राजेश और गिरीश के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उचित कार्रवाई की जाएगी।

पोस्टर वार: मुद्दों से भागती राजनीति

  • नवनीत मिश्र

प्रदेश की राजनीति इन दिनों पोस्टरों से पटी पड़ी है। ऐसा लगता है जैसे सड़क के किनारे लगे रंगीन कागज़ ही लोकतंत्र का आईना बन गए हों। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही जनता को गुमराह करने और एक-दूसरे पर तंज कसने का नया मैदान पोस्टरों को बना चुके हैं। सवाल है, क्या इसी को राजनीति कहा जाएगा?
समाजवादी पार्टी के एक नेता का ताज़ा पोस्टर भाजपा पर करारा हमला बोलता है— “कभी टोपी, कभी गंगाजल, कभी चालान का बहाना… इनकी सियासत बस झूठ का फ़साना।” पोस्टर में किसानों की खाद की समस्या, छात्रों की सड़क पर बेइज़्ज़ती और अखिलेश यादव को “केवल उम्मीद” बताकर 2027 में PDA सरकार लाने का दावा किया गया है। यह निश्चित रूप से भाजपा को चुनौती है, लेकिन क्या इस चुनौती में ठोस समाधान छिपा है?
दरअसल, पोस्टरवार की राजनीति नेताओं की कमजोरी उजागर करती है। जब जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएँ सुनने और हल करने का साहस न हो, तब पोस्टरों का सहारा लिया जाता है। पोस्टर सच्चाई का आईना नहीं, बल्कि सियासी जुमलों का चश्मा हैं, जो जनता की आँखों पर चढ़ा दिया जाता है।
आज किसान खाद, बिजली और न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए संघर्ष कर रहा है। छात्र रोजगार और सुरक्षित भविष्य की तलाश में ठोकरें खा रहे हैं। स्वास्थ्य और शिक्षा की व्यवस्था बदहाल है। लेकिन नेताओं के लिए यह मुद्दे ज़मीन पर लड़ने लायक नहीं रहे। उनकी लड़ाई अब दीवारों पर चिपके नारों तक सीमित हो गई है।
2027 का चुनाव अभी दूर है, लेकिन उसकी आहट पहले से सुनाई देने लगी है। विपक्ष भाजपा को घेरने की कोशिश कर रहा है और भाजपा इन आरोपों को नकारने में जुटी है। लेकिन यह पूरा खेल जनता की पीड़ा को हाशिये पर धकेल देता है। सत्ताधारी दल से अपेक्षा है कि वह ठोस कामों से जवाब दे, और विपक्ष से अपेक्षा है कि वह केवल तुकबंदियों में नहीं, बल्कि ठोस वैकल्पिक नीतियों में भरोसा दिखाए।
लोकतंत्र नारों और पोस्टरों से नहीं चलता। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष—जनता अब केवल तंज और जुमलों से बहलने वाली नहीं। यदि राजनीति पोस्टर चिपकाने तक ही सीमित रह गई, तो यह लोकतंत्र का मज़ाक बनकर रह जाएगा। अब समय है कि नेता पोस्टरों से निकलकर सड़कों और खेतों में उतरें, जहाँ असली भारत उम्मीद लगाए बैठा है।

जर्जर पुलिया बनी हादसे का कारण, ग्रामीणों में रोष

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। सदर ब्लाक अंतर्गत ग्राम पंचायत जंगल फरदली स्थित शिव मंदिर के पास बना पुलिया इन दिनों जर्जर हालत में है। पुलिया की दरारें और किनारे पर भी टूटने के कारण रोजाना लोगों के लिए खतरा बना हैं, जिसके कारण ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों लोग आवाजाही करते हैं। बच्चे स्कूल जाने के लिए इसी रास्ते से गुजरते हैं, वहीं मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को भी डर सताने लगा है। लोग उधर से गुजरना भी मुनासिब नहीं समझते हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है, क्योंकि पुलिया पर फिसलन और जल-
भराव के चलते हादसे की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारी वर्षों से इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पुलिया का तत्काल मरम्मत एवं पुनर्निर्माण कराया जाए, जिससे किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके। गांव के महेंद्र, सोनू , राजेश, विमला देवी, मन्जू ,सोनी, उर्मिला बेचन आदि लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्यवाही नहीं हुई तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

बीमारी से जूझ रहे दंपति पर टूटा दर्दनाक कहर, पत्नी की हत्या के बाद बुजुर्ग ने काटी कलाई

सांकेतिक फ़ोटो

पालघर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)पालघर जिले के वसई इलाके में शनिवार शाम एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। लंबे समय से बीमार चल रहे 80 वर्षीय बुजुर्ग ने अपनी 74 वर्षीय पत्नी की चाकू से गोदकर हत्या कर दी और फिर आत्महत्या के इरादे से अपनी कलाई काट ली।

पुलिस नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार, दंपति काफी समय से गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। प्रारंभिक आशंका है कि बीमारी और उससे जुड़ी मानसिक व शारीरिक पीड़ा ने ही बुजुर्ग को यह कदम उठाने पर मजबूर किया।

ऐसे हुआ पूरा घटनाक्रम जब दंपति का बेटा घर लौटा तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। बार-बार आवाज देने के बाद भी कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर उसने दरवाजा तोड़ा। अंदर का नजारा देख वह सन्न रह गया। उसकी मां खून से लथपथ मृत अवस्था में पड़ी थी, जबकि पिता घायल हालत में मिले।

बताया गया कि बुजुर्ग ने रसोई से चाकू उठाकर पत्नी पर वार किया और फिर उसी चाकू से अपनी कलाई काट ली। परिजनों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायल बुजुर्ग को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

पुलिस की कार्रवाई पुलिस ने मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया है। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत आरोपी बुजुर्ग के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि फिलहाल बुजुर्ग की हालत गंभीर है और आगे की जांच उनकी स्थिति के स्थिर होने पर की जाएगी।

यह घटना न केवल परिवार बल्कि पूरे इलाके के लिए दर्दनाक और विचलित करने वाली है। बीमारी और मानसिक तनाव किस हद तक इंसान को मजबूर कर सकता है, इसका यह भयावह उदाहरण है।

मुरादाबाद में हिंदू समाज पार्टी जिलाध्यक्ष की गोली मारकर हत्या

फाइल फोटो कमल चौहान

मुरादाबाद। (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)शहर में रविवार की देर रात सनसनीखेज वारदात सामने आई है। हिंदू समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष कमल चौहान की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।

पुलिस के मुताबिक, कमल चौहान का स्वयं भी क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है और उनके खिलाफ विभिन्न थानों में आपराधिक मामले दर्ज हैं। शुरुआती जांच में हत्या के पीछे आपसी रंजिश या पुरानी दुश्मनी की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल पुलिस टीम आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।

एसएसपी मुरादाबाद ने बताया कि हत्या की घटना बेहद गंभीर है और मामले की गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं, हिंदू समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं में आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।

घटना से पूरे जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस अफसरों का कहना है कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कानून के हवाले किया जाएगा।

राजनीति का‘पोस्टर वार’ तेज, सपा ने भाजपा पर साधा निशाना

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राजधानी की सियासत में इन दिनों पोस्टर वार ने रफ्तार पकड़ ली है। राजनीतिक दल एक-दूसरे को घेरने के लिए मंच से ज्यादा पोस्टरों को हथियार बना रहे हैं।

समाजवादी पार्टी के नेता मो. इख़लाक़ ने भाजपा पर हमला बोलते हुए एक नया पोस्टर जारी किया। इस पोस्टर में सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा करते हुए लिखा गया –
“कभी टोपी, कभी गंगाजल, कभी चालान का बहाना… इनकी सियासत बस झूठ का फ़साना। किसान खाद के लिए परेशान, छात्र सड़कों पर झेलें अपमान, अखिलेश हैं सिर्फ़ उम्मीद। बदलेंगे हर हाल और ले आयेंगे 2027 में PDA सरकार।”

यह पोस्टर सीधे तौर पर भाजपा की नीतियों और फैसलों पर सवाल खड़ा करता दिख रहा है। सपा नेता का दावा है कि जनता भाजपा से अब त्रस्त हो चुकी है और 2027 में बदलाव तय है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन पोस्टर राजनीति से साफ है कि सपा और भाजपा के बीच सियासी जंग पहले से ही गरमा चुकी है।

प्रसव त्रासदी : जच्चा-बच्चा की मौत, सीएमओ ने लापरवाही से किया इनकार

सांकेतिक फोटो

अमेठी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)अमेठी जिले के सिंहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के बाद मां-बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। गढ़ी अलादाद गांव की अमीना खातून (32) को सात सितंबर को भर्ती कराया गया था। प्रसव के बाद दोनों की हालत बिगड़ने पर रायबरेली रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में नवजात ने दम तोड़ दिया और देर शाम इलाज के दौरान मां की भी मौत हो गई।
सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि प्रसव सामान्य था, लेकिन जच्चा-बच्चा बेहद कमजोर थे और बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। उन्होंने चिकित्सकीय लापरवाही से इनकार करते हुए कहा कि परिजनों को पहले ही खतरे से अवगत कराया गया था।

कुलगाम में मुठभेड़, आरएस पुरा सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठिया गिरफ्तार

जम्मू कश्मीर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क )जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में सोमवार को आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ छिड़ गई। अधिकारियों के मुताबिक, गुडार वन क्षेत्र में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना के बाद सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इसी दौरान आतंकवादियों ने फायरिंग की, जिसके जवाब में सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाला और मुठभेड़ शुरू हो गई।

इससे पहले रविवार देर रात जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ के जवानों ने एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को दबोच लिया। पकड़े गए घुसपैठिए की पहचान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा निवासी सिराज खान के रूप में हुई है।

देर रात ऑक्ट्रोई चौकी पर गश्त के दौरान बीएसएफ जवानों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और चुनौती दी। घुसपैठिए द्वारा प्रतिक्रिया न देने पर जवानों ने फायरिंग की, जिसके बाद उसे सीमा बाड़ के पास गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से पाकिस्तानी मुद्रा भी बरामद की गई है। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है ताकि घुसपैठ के पीछे की साजिश का पता लगाया जा सके।

स्टेयरिंग फेल होने से कार सोन नहर में गिरी, तीन छात्र बाल-बाल बचे

पटना में हुई घटना सोन नदी में गिरी कार

स्टेयरिंग फेल होने से कार सोन नहर में गिरी, तीन छात्र बाल-बाल बचे

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) पटना के जानीपुर थाना क्षेत्र के नहरपुरा के पास बड़ा हादसा होते-होते टल गया। नौबतपुर से एम्स की ओर जा रही एक कार अचानक स्टेयरिंग फेल होने से अनियंत्रित हो गई। कार पहले सड़क किनारे लगे पोल से टकराई और फिर सोन नहर में जा गिरी। गनीमत रही कि कार में सवार तीनों युवक समय रहते बाहर निकल आए और उनकी जान बच गई।

हादसा कैसे हुआ

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार जैसे ही नहरपुरा के पास पहुंची, अचानक बेकाबू हो गई। ड्राइवर ने स्टेयरिंग घुमाने की कोशिश की लेकिन वह जाम हो गया। इसके बाद कार तेज रफ्तार में पोल से टकराई और जोरदार आवाज के साथ नहर में पलट गई। पानी में गिरते ही आसपास अफरा-तफरी मच गई और लोग मौके पर जुट गए।

छात्रों ने दिखाई सूझबूझ

कार में मुजफ्फरपुर के भीखनपुर निवासी राजन कुमार, शुभम शेखर और सोनू सवार थे। तीनों युवक जानीपुर के वास्तु विहार में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। जैसे ही कार नहर में गिरी, उन्होंने तुरंत दरवाजे खोलकर छलांग लगा दी और सुरक्षित बाहर निकल आए। हल्की चोटें आने के बावजूद उनकी समझदारी की वजह से जान बच गई।

युवक ने लगाई जान की बाज़ी

घटनास्थल पर मौजूद अविनाश यादव नामक युवक ने जब कार को पानी में गिरते देखा तो बिना देर किए नहर में कूद पड़ा। उसे लगा कि लोग गाड़ी में फंसे होंगे। हालांकि जब वह पास पहुंचा तो तीनों छात्र पहले ही बाहर निकल चुके थे। अविनाश का यह साहसिक कदम स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बन गया।

पुलिस व रेस्क्यू अभियान

सूचना मिलते ही जानीपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और कार को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया। थानेदार ने बताया कि हादसे में कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई है। कार को नहर से बाहर निकाल लिया गया है और वाहन मालिक से पूछताछ की जा रही है।

जांच में जुटी पुलिस

पुलिस अब वाहन की तकनीकी जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि स्टेयरिंग जाम होने की असली वजह क्या थी। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं हादसे में लापरवाही तो शामिल नहीं थी।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

स्थानीय निवासियों का कहना था कि यदि कार नहर के और गहरे हिस्से में चली जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। लोगों ने छात्रों का सुरक्षित बच निकलना किसी चमत्कार से कम नहीं माना।

“बढ़ती आत्महत्याओं की घटनाएं: एक वैश्विक चुनौती, रोकथाम है समय की मांग”

“तनाव, अवसाद और अकेलापन बन रहे हैं बड़ी वजहें”“भारत सहित पूरी दुनिया में आंकड़े कर रहे हैं चिंता पैदा”“समाज, परिवार और सरकार—सभी की साझा ज़िम्मेदारी”“जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं और संवाद ही समाधान”बढ़ती आत्महत्याओं की घटनाएं, एक वैश्विक चुनौती-रोकथाम की सख़्त आवश्यकता

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर मानव सभ्यता की प्रगति के साथ -साथ मानसिक,सामाजिक और आर्थिक जटिलताएँ भी बढ़ती गई हैं। इन्हीं जटिलताओं से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर विषय है,आत्महत्या। यह केवल किसी व्यक्ति का निजी निर्णय नहीं होता,बल्कि इसके पीछे सामाजिक़ मनोवैज्ञानिक, सांस्कृतिक और आर्थिक कारकों का गहरा प्रभाव होता है। अंतरराष्ट्रीय स्तरपर आत्महत्या को सार्वजनिक स्वास्थ्य की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक माना जाता है।विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार, हर साल लगभग 7 लाख लोग आत्महत्या करके अपनी जान गंवाते हैं, जिसका अर्थ है कि हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति आत्महत्या करता हैँ। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि  इससे यह स्पष्ट होता है कि यह केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं,बल्कि वैश्विक संकट है। जिसका समाधान अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मिट बुलाकर करना समय की मांग है। बता दे भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति  की घोषणा की है। यह देश में अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है,जिसमें वर्ष  2030  तक आत्महत्या  मृत्यु दर में 10 पर्सेंट की कमी लाने के लिये समयबद्ध कार्य योजना और बहु- क्षेत्रीय सहयोग शामिल है।यह रणनीति आत्महत्या की रोकथाम के लिये  विश्व  स्वास्थ्य  संगठन की दक्षिण-पूर्व  एशिया  क्षेत्र रणनीति के अनुरूप है।

साथियों बात अगर हम  आत्महत्या क्या है और क्यों की जाती है? किस देश में सबसे ज्यादा आत्महत्या होती है?इसको समझने की करें तो, आत्महत्या का सामान्य अर्थ है, व्यक्ति द्वारा जानबूझकर अपनी जान लेना। यह निर्णय किसी क्षणिक आवेग का नहीं, बल्कि लंबे समय तक चले मानसिक और सामाजिक दबाव का परिणाम होता है। डब्लूएचओ की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, आत्महत्या करने वालों में से लगभग 77 पर्सेंट लोग निम्न और मध्यम आय वाले देशों से होते हैं,जहाँ मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ सीमित होती हैं और सामाजिक कलंक के कारण लोग मदद माँगने से कतराते हैं। आत्महत्या के मुख्य कारणों में डिप्रेशन,बाइपोलर डिसऑर्डर, सिज़ोफ्रेनिया, नशे की लत, तथा सामाजिक अलगाव प्रमुख हैं। इसके अलावा रिश्तों में असफलता, बेरोजगारी, आर्थिकw तंगी,घरेलू हिंसा और युवाओं पर शिक्षा व करियर का दबाव भी आत्महत्या के प्रमुख कारक हैं।वैश्विक स्तर परआत्महत्या की दर हर देश में अलग-अलग है।डब्ल्यूएचओ की 2022 की रिपोर्ट बताती है कि लिथुआनिया दक्षिण कोरिया,रूस, गुयाना और जापान जैसे देशों में प्रति 1 लाख आबादी पर आत्महत्या दर सबसे अधिक दर्ज की गई है। उदाहरण के लिए, लिथुआनिया में यह दर लगभग 25.7 प्रति 1 लाख है, जबकि दक्षिण कोरिया में लगभग 20.2 प्रति 1 लाख। वहीं भारत और चीन जैसे देशों में कुल आत्महत्याओं की संख्या सबसे अधिक है,क्योंकि यहाँ जनसंख्या बहुत बड़ी है। भारत में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरब) 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, एक साल में 1.64 लाख से अधिक आत्महत्याएँ दर्ज की गईं, यांनें हर दिन औसतन 450 से अधिक लोग आत्महत्या करते हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या दैनिक वेतन बोगियों, छात्रों और किसानों की है। जापान में आत्महत्या लंबे समय से सामाजिक समस्या रही है,जहाँ हर साल लगभग 20,000 से अधिक लोग जीवन समाप्त कर लेते हैं। 

साथियों बात अगर हम आत्महत्या केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक चुनौती होने की करें तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह स्वीकार किया गया है कि आत्महत्या को केवल व्यक्तिगत समस्या मानना उचित नहीं है।डब्ल्यूएचओ और अंतर्राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम संघ (आईएएसपी) के विशेषज्ञ मानते हैंकि आत्महत्या दरअसल मानसिक,सामाजिक,आर्थिक और सांस्कृतिक कारकों का परिणाम है।2021 में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा गया कि आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं के पीछे गरीबी, सामाजिक असमानता, लैंगिक भेदभाव और शिक्षा का अभाव जैसी समस्याएँ भी प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं।युवाओं मेंआत्महत्या की दर विशेष रूप से चिंताजनक है।15-29 वर्ष आयु वर्ग में आत्महत्या मृत्यु का चौथा सबसे बड़ा कारण है। डिजिटल युग में साइबर बुलिंग, ऑनलाइन दबाव और सोशल मीडिया की अवास्तविक अपेक्षाएँ भी युवाओं को आत्महत्या की ओर धकेल रही हैं। 

साथियों बात अगर हम आत्महत्या रोकने के उपायों की करें तो शोध और डेटा संग्रह आत्महत्या रोकथाम की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है। डब्लूयुएचओ की “मेन्टल हेल्थ अटलस 2020” रिपोर्ट बताती है कि दुनियाँ के 80 पर्सेंट से अधिक देशों में आत्महत्या से संबंधित डेटा उपलब्ध नहीं है या अधूरा है। इससे नीतियों का निर्माण कठिन हो जाता है। आईएएसपी लगातार इस दिशा में अनुसंधान और प्रशिक्षण को बढ़ावा दे रहा है। अमेरिका और यूरोप के देशों ने आत्महत्या रोकथाम पर व्यापक शोध कियाe है,जिससे यह साबित हुआ है कि कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी), साइकोसोशल सपोर्ट, हेल्पलाइन सेवाएँ और सामुदायिक सहयोग आत्महत्या रोकने में बहुत प्रभावी हैं।पेशेवरों को प्रशिक्षित करना भी इस दिशा में अत्यंत आवश्यक है डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाँ भर में प्रति 1 लाख लोगों पर औसतन केवल 13 मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर हैं, जबकि विकसित देशों में यह अनुपात बहुत अधिक है। इस असमानता के कारण निम्न और मध्यम आय वाले देशों में आत्महत्या रोकथाम चुनौतीपूर्ण बन जाती है। यदि डॉक्टर, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और पुलिसकर्मी आत्महत्या के संकेतों को पहचानने और सही समय पर हस्तक्षेप करने में प्रशिक्षित हों, तो कई जिंदगियाँ बचाई जा सकती हैं। 

साथियों बात अगर हम आत्महत्याओं को रोकने के लिए शिक्षा और संवाद की आवश्यकता सबसे मजबूत हथियार होने की करें तो, आईएएसपी और डब्लूयुएचओ दोनों ही यह मानते हैं कि सार्वजनिक जागरूकता से आत्महत्या की प्रवृत्ति को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डब्लूयुएचओ की 2022 की रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि मानसिक स्वास्थ्य पर संवाद बढ़ाने से आत्महत्या दर में 20 पर्सेंट तक की कमी लाई जा सकती है।आज भी अधिकांश समाजों में मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या को लेकर सामाजिक कलंक मौजूद है। लोग इस विषय पर बात करने से कतराते हैं।इसका परिणाम यह होता है कि पीड़ित व्यक्ति अकेलेपन और शर्मिंदगी का शिकार हो जाता है। युवाओं के बीच संवाद को बढ़ावा देना और उन्हें यह समझाना कि मदद माँगना कमजोरी नहीं बल्कि साहस है,अत्यंत आवश्यक है। स्कूलों और विश्वविद्यालयों में काउंसलिंग सेवाएँ, हेल्पलाइन नंबर, मानसिक स्वास्थ्य कार्यशालाएँ शुरू करना उपयोगी साबित हो सकता है। उदाहरण के लिए, दक्षिण कोरिया और जापान ने स्कूल स्तरपरमानसिक स्वास्थ्य शिक्षा लागू की है, जिससे आत्महत्या की दर कम करने में मदद मिली है। 

साथियों बात अगर हम आत्महत्या की रोकथाम के वैज्ञानिक और सामाजिक उपायों की करें तो,आत्महत्या रोकथाम के लिए बहुआयामी उपाय आवश्यक हैं।डब्लूयुएचओ की “लाइव लाइफ” रणनीति (2021) में चार प्रमुख उपाय सुझाए गए हैं (1) हानिकारक साधनों की उपलब्धता को कम करना (जैसे कीटनाशक, आग्नेयास्त्र,दवाइयाँ), (2) मीडिया रिपोर्टिंग के लिए जिम्मेदार दिशानिर्देश बनाना,(3) किशोरों और युवाओं में सामाजिक व भावनात्मक कौशल विकसित करना,(4) जल्दी पहचान और सहायता उपलब्ध कराना।इन उपायों से आत्महत्या की दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उदाहरण के लिए, श्रीलंका ने कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाकर आत्महत्या की दर को 70 पर्सेंट तक घटा दिया। इसी तरह ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन ने हेल्पलाइन और काउंसलिंग सेवाओं का विस्तार करके आत्महत्या रोकथाम में सफलता प्राप्त की हैँ। 

साथियों बात अगर हम इसका रोकथाम दिवस मनाकर इसपर जबरदस्त नियंत्रण की करें तो,10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस  मनाया जाता है,आत्महत्या की समस्या वैश्विक है और इसका समाधान भी वैश्विक सहयोग से ही संभव है।डब्लूएचओ, आईएएसपी और यूएन लगातार आत्महत्या रोकथाम पर काम कर रहे हैं। जिसका उद्देश्य जागरूकता फैलाना और सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना है।भविष्य की दिशा यह होनी चाहिए कि सभी देश आत्महत्या रोकथाम को अपनी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बनाएँ। डिजिटल तकनीक का उपयोग करके एआई आधारित हेल्पलाइन, 24×7 ऑनलाइन काउंसलिंग, मोबाइल एप्स विकसित किए जाएँ, ताकि संकट की घड़ी में लोग तुरंत मदद पा सकें। इसके अलावा आत्महत्या के प्रयास करने वालों को अपराधी मानने की बजाय रोगी समझा जाए और उन्हें उचित चिकित्सा एवं परामर्श दिया जाए। 

अतः अगर हम अपने पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि  इस प्रकार, आँकड़ों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के आधार पर यह स्पष्ट है कि आत्महत्या केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि एक जटिल सामाजिक और वैश्विक चुनौती है। इसके समाधान के लिए सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, समुदायों और परिवारों को मिलकर काम करना होगा। 

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

🌟 08 सितम्बर 2025 : आज का दैनिक राशिफल 🌟

आज का दिन कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति, व्यापार में तरक्की और रिश्तों में मजबूती लेकर आया है। वहीं कुछ राशियों को स्वास्थ्य, विवाद और मानसिक तनाव से जूझना पड़ सकता है। आइए जानते हैं आपकी राशि के सितारे क्या कहते हैं ।
मेष (Aries)
✨ अधूरे कार्य पूरे होंगे।
📜 दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से पहले ध्यान से पढ़ें।
💰 आर्थिक लाभ की संभावना है।
👉 शुभ रंग: लाल | शुभ अंक: 3

वृषभ (Taurus)
✨ व्यापार में विस्तार होगा।
😊 पारिवारिक माहौल सुखद रहेगा।
📈 मेहनत का फल मिलेगा।
👉 शुभ रंग: सफेद | शुभ अंक: 6

मिथुन (Gemini)
👨‍👩‍👧 परिवार में खुशहाली बढ़ेगी।
🏡 घर की सजावट और स्वच्छता पर ध्यान देंगे।
⚖️ कठिनाइयां धीरे-धीरे खत्म होंगी।
👉 शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 5

कर्क (Cancer)
⚠️ नौकरी में लापरवाही नुकसानदेह हो सकती है।
🧘‍♂️ चिंता दूर होगी और मन शांत रहेगा।
👔 कार्यक्षेत्र में सतर्क रहें।
👉 शुभ रंग: सफेद | शुभ अंक: 2

सिंह (Leo)
🌟 व्यक्तित्व निखरेगा।
✅ कार्यों में सफलता मिलेगी।
🤝 संबंध और सम्पर्क प्रगाढ़ होंगे।
👉 शुभ रंग: सुनहरा | शुभ अंक: 1

कन्या (Virgo)
😟 बेचैनी और असमंजस का माहौल रहेगा।
🔄 दिनचर्या में बदलाव लाभकारी होगा।
🧘 धैर्य और संयम बनाए रखें।
👉 शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 7

तुला (Libra)
🎯 योजनाएं सफल होंगी।
😊 मन प्रसन्न रहेगा।
🙌 सभी से सहयोग मिलेगा।
👉 शुभ रंग: गुलाबी | शुभ अंक: 6

वृश्चिक (Scorpio)
🌱 नई संभावनाएं मिलेंगी।
🚶‍♂️ आगे बढ़ने का समय है।
⚠️ अप्रिय समाचार भी मिल सकता है।
👉 शुभ रंग: लाल | शुभ अंक: 9

धनु (Sagittarius)
🏡 सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होगी।
📈 संबंधित क्षेत्रों में प्रगति करेंगे।
😌 आत्मविश्वास बढ़ेगा।
👉 शुभ रंग: पीला | शुभ अंक: 3

मकर (Capricorn)
⚠️ विवाद और जोखिम से बचें।
💰 पूंजी निवेश न करें।
🤔 मन में दुविधा रहेगी।
👉 शुभ रंग: नीला | शुभ अंक: 4

कुंभ (Aquarius)
💰 आय के नए साधन बनेंगे।
📈 धन की स्थिति मजबूत होगी।
⚠️ अप्रत्याशित मुश्किलें आ सकती हैं।
👉 शुभ रंग: बैंगनी | शुभ अंक: 8

मीन (Pisces)
📉 किए गए प्रयास बेकार जा सकते हैं।
💐 सत्कर्मों में धन खर्च होगा और यश मिलेगा।
🙏 आध्यात्मिक झुकाव बढ़ेगा।
👉 शुभ रंग: नीला | शुभ अंक: 7

विशेष सुझाव: आज धैर्य और विवेक ही आपकी सबसे बड़ी ताकत हैं। शुभ कार्यों में आगे बढ़ें और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

पंडित जय प्रकाश पाण्डेय

प्रतिमा विसर्जन के दौरान युवक की यमुना में डूबकर मौत, हाथरस से आया था मथुरा

मथुरा। (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। जिले के बलदेव थाना क्षेत्र के नेरा गांव स्थित मौजा मुसदपुर घाट पर रविवार को हाथरस से आए एक युवक की यमुना में डूबकर मौत हो गई।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मृतक युवक की पहचान अमित (22) पुत्र निवासी कुरसण्डा, थाना सादाबाद, जनपद हाथरस के रूप में हुई है। वह अपने गांव के अन्य लोगों के साथ गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए मथुरा आया था।

प्रतिमा विसर्जन संपन्न होने के बाद ग्रामीण स्नान के लिए यमुना नदी में उतर गए। इसी दौरान अमित भी नहाने लगा, लेकिन अचानक गहरे पानी में चला गया। वह डूबने लगा और देखते ही देखते लहरों में समा गया।

मौके पर मौजूद लोगों ने शोर मचाकर मदद बुलाई। सूचना पाकर गोताखोर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद युवक का शव बरामद किया गया।

पुलिस उपाधीक्षक (सीओ) संजीव कुमार राय ने बताया कि पीड़ित परिवार की ओर से अब तक कोई तहरीर नहीं दी गई है। लिहाजा मामला दर्ज नहीं किया गया है। यदि परिजन लिखित शिकायत देते हैं तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गांव में इस हादसे के बाद मातम पसर गया है। खुशियों का माहौल अचानक गमगीन हो गया।