गन्ना, दलहन, तिलहन और मक्का उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दृष्टि से चल रहे विकसित भारत@2047 अभियान के अंतर्गत जनपद संतकबीर नगर में कृषि विज्ञान केंद्र बगही में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में कृषि उत्पादकता बढ़ाने और नई तकनीकों के उपयोग पर विशेष चर्चा की गई। कृषि वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार सिंह (सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज अयोध्या) ने कहा कि पूर्वांचल के जिलों की तुलना में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की उत्पादकता अधिक है। संतकबीर नगर में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक विधियों, उर्वरकों और सिंचाई तकनीकों का उपयोग आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से गन्ना, गेहूं, चावल, दलहन और तिलहन की उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया। विजय उपाध्याय (हाईटेक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी, नाथनगर) ने बताया कि पौधों को 16 प्रकार के पोषक तत्व चाहिए होते हैं। समय-समय पर इनका प्रयोग करने से उत्पादन में बढ़ोतरी संभव है। उन्होंने कहा कि एफपीओ को पूंजी की आवश्यकता है, जिसके लिए बैंक से ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही मोटा अनाज, मक्का, दलहन और तिलहन की खेती को विशेष ब्लॉकों में बढ़ावा देने का सुझाव दिया।
यशवर्धन पांडेय ने मक्का उत्पादन के लिए बैच ड्रायर, फार्म मशीनरी बैंक, ड्रोन और न्यूमैटिक प्लांटर की जरूरत बताई। राम बहादुर मिश्रा ने आर्गेनिक सरसों और अन्न उत्पादन हेतु प्रमाणपत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि एफपीओ को खाद और प्रोसेसिंग यूनिट नहीं मिल रही है। अमिताभ पांडेय ने दलहनी फसलों के लिए सोलर फैसिलिटी की मांग रखी। अनुराग राय ने प्राकृतिक खेती और पशुधन विकास पर अपने विचार रखे। इस मौके पर अरविंद चतुर्वेदी (निदेशक, डेटार एफपीओ) सहित अन्य कृषि वैज्ञानिकों व प्रबुद्धजनों ने प्राकृतिक और जैविक खेती, उर्वरकों के सही प्रयोग और आधुनिक तकनीकों पर सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, जिनके माध्यम से वर्ष 2047 तक जनपद, प्रदेश और देश को विकसित बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार सिंह, कृषि वैज्ञानिक, अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
देवरिया, (राष्ट्र की परम्परा)। ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजना के अंतर्गत विभिन्न घटकों की जानकारी प्रदान करने हेतु सदर विकास खंड के सभागार में पंचायत सहायकों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य प्रशिक्षक अजीत तिवारी ने कहा कि ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजना में आम जनमानस की सहभागिता बहुत ही महत्वपूर्ण है उन्होंने ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजनाओं की पृष्ठभूमि जल जीवन मिशन,नीर निर्मल परियोजना के संदर्भ में जानकारी प्रदान किया तथा बताया कि दिसंबर 2022 के पहले जल जीवन मिशन के अंतर्गत बनी टंकियों को बिना अभिलेख तथा बिना स्थलीय निरीक्षण के हैंड ओभर कर दिया जाता था। जिसमें अधिकतर ग्राम पंचायत को हैंड ओवर नोट भी नहीं दिए जाते थे। लेकिन वर्तमान समय में अभिलेख पूर्ण होने पर ही परियोजना हैंडओभर की जाएगी, जिसमें भूमि अधिग्रहण की जानकारी, सड़कों का पुनः निर्माण, पानी प्रेशर की स्थिति आदि कार्यों को पूरा किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित योजना की महत्ता के संदर्भ में भी विस्तार से जानकारी प्रदान किया। प्रशिक्षक शंभू नाथ द्विवेदी ने जल जनित बीमारियों के संदर्भ में विस्तार से जानकारी प्रदान किया उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष प्रत्येक परिवार को हजारों रुपए जल जनित बीमारियों पर खर्च करना पड़ता है। प्रशिक्षिका अर्पिता द्विवेदी ने दूषित जल के सेवन से होने वाली बीमारियों तथा जल शोधन पद्धतियों के संदर्भ में जानकारी प्रदान किया। इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ सहायक विकास अधिकारी विंध्याचल सिंह ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन की योजना सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है जिसमें आम जन् मानस को सुगम तरीके से सस्ते कीमत पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाना है। तथा उसका रखरखाव और संचालन भी ग्राम पंचायत को ही करना है इस अवसर पर ग्राम प्रधान राजकुमार गुप्ता, पंचायत सहायक पूनम भारती, गरिमा पांडे, श्रेया त्रिपाठी, रवि कुमार भारती, निकेश तिवारी, निशा गौड़ ,आरती गोंड ,पूजा , मनीष चौहान ,कुमारी प्रीति ,शहनाज खातून, शिवम मिश्रा अजहरुद्दीन अंसारी, रमेश कनौजिया, पल्लवी मिश्रा, अभिलाष माल आदि मौजूद रहे।
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं महिला कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संकल्प हब फॉर एंपावरमेंट ऑफ वूमेन योजना के अंतर्गत 10 दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम के दौरान विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अपर जिला जज एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव देवेंद्र नाथ गोस्वामी ने कहा कि महिलाओं को कानून के प्रति जागरूक होना बेहद जरूरी है। उन्होंने संविधान द्वारा महिलाओं को मिले अधिकारों और सुरक्षा संबंधी प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी। साथ ही महिला कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं और महिलाओं की सहायता हेतु उपलब्ध सभी हेल्पलाइन नंबरों की भी जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर डीएमसी मोनिका शुक्ला, सेंटर मैनेजर ऋतुका दुबे, केस वर्कर सुमन सिंह, डॉक्टर शाहरीन परवीन, सुनीता गुप्ता सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।
संत कबीर नगर(राष्ट्र की परम्परा)। जिले के महुली थाना क्षेत्र के काली जगदीशपुर गांव में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विवादित भूमि पर बने टिन शेड को बिना लिखित आदेश के बुलडोजर से गिरवा दिया गया, जिससे लोगों में नाराज़गी है। गांव के मनीष कुमार और राजीव कुमार के बीच जमीन को लेकर मामला सिविल न्यायालय में विचाराधीन है और इस पर स्थगन आदेश भी जारी है। मनीष का कहना है कि उन्होंने अपने हिस्से में दीवार और टिन शेड बनाया था, जबकि दूसरी ओर प्रतिवादी ने मकान खड़ा किया था। सोमवार को चौकी प्रभारी ने एहतियात के तौर पर तीन लोगों को हिरासत में लेकर बुलडोजर से टिन शेड हटवा दिया। मौके पर मौजूद कानूनगो और लेखपाल ने भी माना कि उनके पास ध्वस्तीकरण का कोई लिखित आदेश नहीं था, केवल मौखिक निर्देश पर उन्हें बुलाया गया था। ग्रामीणों ने पुलिस पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि बाद में दो लोगों का शांतिभंग में चालान भी कर दिया गया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि कार्रवाई अवैध है और न्यायालय की शरण ली जाएगी। वहीं चौकी प्रभारी ललित कांत यादव का कहना है कि ध्वस्तीकरण उच्चाधिकारियों के निर्देश पर किया गया, लेकिन आदेश की प्रति उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।
देवरिया, (राष्ट्र की परम्परा)। पीडीए सम्मान यात्रा के क्रम में सोमवार को चौथे दिन बरहज नगर के रगरगंज वार्ड में निकाली गई। इस दौरान भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे। इस दौरान सपा नेता विजय रावत ने कहा कि सपा की कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं हैं। वह जो कहती है वह करती हैं और पीडीए समाज का भला सिर्फ़ सपा सरकार में ही हो सकता हैं। इसलिए सभी से अपील है की सपा की सरकार बनाएं। पिछले आठ साल के भाजपा सरकार के कार्यकाल में विकास का कोई काम नहीं हुआ और यह सरकार जनता को गुमराह करती रही। भाजपा सरकार में जहां भ्रष्टाचार चरम पर है। वहीं नौजवान बेरोजगार किसान मज़दूर व्यापारी सभी तपका परेशान हैं इसलिए सभी से अपील हैं की सपा की सरकार बनाने का काम करें। इस दौरान एक दर्जन से अधिक लोगों को साल व माला पहनाकर कर सम्मानित किया गया। इस दौरान देवेंद्र यादव, लाल बहादुर चौहान, राहुल कुमार, सज्जन कुमार, विकास शर्मा, अनिल निषाद, विकास यादव, अखिलेश कुमार, राजन सिंह आदि उपस्थित थे।
पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)राजधानी के अटल पथ पर सोमवार को हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तेज रफ्तार कार ने अचानक नियंत्रण खो दिया और कई मोटरसाइकिल सवारों को रौंद डाला। इस दुर्घटना में चार लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए, जिनमें दो छोटे बच्चे भी शामिल हैं। सभी घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार की रफ्तार इतनी अधिक थी कि मोटरसाइकिल सवारों को बचने का मौका तक नहीं मिल सका। टक्कर के बाद कई बाइकें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। हादसे से आक्रोशित लोगों ने कार को क्षतिग्रस्त कर दिया और सड़क जाम करने का प्रयास किया। सूचना मिलते ही पुलिस दल मौके पर पहुंचा और स्थिति को संभालते हुए आरोपी चालक को हिरासत में ले लिया।
यह घटना पाटलिपुत्र थाना क्षेत्र में घटी। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और घायलों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अटल पथ पर तेज रफ्तार वाहन अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि यहां गति सीमा को सख्ती से लागू किया जाए और निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
सिकंदरपुर/बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश सरकार ने सड़क सुरक्षा को लेकर 1 सितंबर से बड़ा कदम उठाते हुए “नो हेलमेट–नो फ्यूल” नियम लागू किया। आदेश साफ था—बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं मिलेगा। लेकिन सिकंदरपुर में यह नियम केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है। स्थानीय पेट्रोल पंपों पर खुलेआम बिना हेलमेट वाहन चालकों को ईंधन दिया जा रहा है। पंप मालिकों ने नियम पालन के लिए बैनर जरूर टांग रखे हैं, लेकिन उस पर अमल करने की हिम्मत नहीं दिखा पा रहे। उनका कहना है कि अधिकतर ग्राहक स्थानीय होते हैं, इसलिए वे मना करने से कतराते हैं। परिवहन आयुक्त बृजेश कुमार सिंह ने सभी जिलाधिकारियों को “पहले हेलमेट, बाद में ईंधन” की तर्ज पर अभियान को सख्ती से लागू कराने का निर्देश दिया है। लेकिन सिकंदरपुर में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और परिवहन विभाग की सक्रियता नदारद दिखाई दे रही है।सरकार की मंशा इस अभियान से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने की थी, मगर सिकंदरपुर में लापरवाह रवैये ने इस उद्देश्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल ये है कि जब शासन स्तर से आदेश साफ है तो स्थानीय स्तर पर अमल कौन कराएगा
सदस्यता अभियान पर जोर, बिहार विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी
महाराष्ट्र (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रीय समाजवादी स्वाभिमान मंच की राष्ट्रीय समिति की अहम बैठक दिवा साबे गांव में संपन्न हुई। बैठक में पार्टी को मजबूत बनाने के लिए नए सदस्यता अभियान को गति देने और जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर रणनीति बनाई गई। बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा ने की। इस अवसर पर विवेक मिश्रा, रामानुज तिवारी, राकेश तिवारी व ब्रह्मजीत तिवारी समेत पार्टी के तमाम वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बैठक में यह भी तय किया गया कि पार्टी आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में जनता के मुद्दों को लेकर मजबूती से चुनावी मैदान में उतरेगा। पार्टी के पदाधिकारियों ने साफ किया कि अब पार्टी जमीनी स्तर पर जनता के साथ सीधा संवाद बनाकर राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरेगा।
नई दिल्ली।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) भारत अब अपनी ड्रोन शक्ति को उस मुकाम पर ले जा रहा है, जहां से चीन, पाकिस्तान और तुर्की के लिए सीधी चुनौती शुरू हो चुकी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय सेना उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर एयर सर्विलेंस नेटवर्क की कमियों को दुरुस्त करने की तैयारी में जुट गई है।
उन्नत रडार सिस्टम की खरीद की तैयारी द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान से होने वाली छद्म निगरानी और हमलावर यूएवी (ड्रोन) की घुसपैठ को रोकने के लिए भारतीय सेना जल्द ही नए उन्नत रडार लगाने जा रही है। ये रडार सिस्टम खासतौर पर रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) वाली हवाई वस्तुओं का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और उन पर हमला करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। ऐसी तकनीक का फायदा यह है कि ड्रोन जैसे छोटे और छिपकर उड़ने वाले लक्ष्यों को भी यह सिस्टम आसानी से पकड़ सकता है।
आकाशतीर वायु रक्षा नेटवर्क में होगा इंटीग्रेशन मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इन नई प्रणालियों को सेना के आकाशतीर वायु रक्षा नेटवर्क में शामिल किया जाएगा। आकाशतीर पहले ही पाकिस्तान के ड्रोन हमलों को नाकाम कर चुका है और अब इसे और मजबूत किया जा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान का ड्रोन दांव जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी ठिकानों पर भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस्लामाबाद ने बड़े पैमाने पर ड्रोन का इस्तेमाल किया। बताया गया कि पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकवादी हमलों का बदला लेने के लिए भारत ने सीमा पार आतंकी ढांचों पर हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में पाकिस्तान ने ड्रोन और युद्धक हथियारों के जरिए भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की।
लेकिन भारतीय सेना ने अपनी स्वदेशी आकाशतीर वायु रक्षा प्रणाली का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के ड्रोन हमलों की पूरी श्रृंखला को विफल कर दिया। यही वजह है कि अब भारतीय सेना इसे और उन्नत तकनीक से लैस करने जा रही है।
रणनीतिक बढ़त की ओर भारत भारत की यह नई तैयारी सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि चीन और तुर्की जैसे देशों के लिए भी एक बड़ा संदेश है, जो आधुनिक ड्रोन युद्ध तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में यह कदम भारत को एशिया की सबसे मजबूत ड्रोन शक्ति के रूप में स्थापित कर सकता है।
शिक्षक की भूमिका, तकनीकी दुविधा और संतुलन का भारतीय मार्ग
कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारतीय शिक्षा के सामने दो राहें खोलती है। एक ओर यह शिक्षक को कागज़ी काम और दोहरावदार कार्यों से मुक्त कर सकती है, जिससे वह संवाद और मार्गदर्शन पर ध्यान दे सके। दूसरी ओर यह खतरा भी है कि शिक्षक महज़ “तकनीकी-प्रबंधक” बन जाए और शिक्षा का मानवीय सार खो जाए। भारत के लिए चुनौती यही है कि वह वैश्विक एआई केंद्र भी बने और साथ ही शिक्षा को मानवीय मूल्यों, सहानुभूति और आलोचनात्मक सोच से भरपूर भी बनाए रखे। यही संतुलन भविष्य की दिशा तय करेगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) आज पूरी दुनिया के लिए अवसर और चुनौती दोनों लेकर आई है। शिक्षा क्षेत्र, जो सबसे संवेदनशील और मानवीय क्षेत्र माना जाता है, इस बदलाव से अछूता नहीं रह सकता। भारत जैसे देश में, जहाँ शिक्षा सिर्फ़ ज्ञान देने का साधन नहीं बल्कि सामाजिक गतिशीलता और समानता का आधार है, वहाँ एआई का प्रवेश और भी गहरी बहस का विषय है। सवाल यह है कि क्या एआई शिक्षक को मुक्तिदायक भूमिका देगा—उसे प्रशासनिक बोझ से मुक्त करके विद्यार्थियों के साथ अधिक संवाद और मार्गदर्शन का अवसर प्रदान करेगा? या फिर यह शिक्षक को मात्र तकनीकी-प्रबंधक बनाकर मानवीय शिक्षा की आत्मा को कमजोर कर देगा? यही इस समय की सबसे बड़ी दुविधा है।
भारत वर्तमान समय में एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहाँ वह वैश्विक एआई केंद्र बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। स्टार्टअप, रिसर्च हब और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर इसकी पुष्टि करते हैं। लेकिन साथ ही यह भी एक सच्चाई है कि शिक्षा का मूल उद्देश्य सिर्फ़ कौशल या दक्षता नहीं, बल्कि इंसान को इंसान बनाना है। यदि तकनीक इस सार को खो दे तो शिक्षा महज़ एक उत्पादन-तंत्र में बदल जाएगी।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सबसे बड़ी क्षमता यह है कि यह दोहराए जाने वाले कार्यों को शिक्षक से छीनकर स्वतः कर सकती है। जैसे—प्रश्नपत्र तैयार करना, असाइनमेंट की जाँच में प्रारम्भिक मदद देना, विद्यार्थियों के स्तरानुसार सामग्री तैयार करना, भाषा अनुवाद करना, और व्यक्तिगत सुझाव देना। इससे शिक्षक के पास समय बचेगा, जिसे वह संवाद, मार्गदर्शन और रचनात्मक गतिविधियों में लगा सकता है। आज भारतीय शिक्षक पर सबसे बड़ी शिकायत यही है कि वह बच्चों के साथ बातचीत कम और कागज़ी काम अधिक करता है। यदि एआई इस बोझ को कम करे तो शिक्षक की वास्तविक भूमिका—मेन्टॉर, प्रेरक और जीवन-दृष्टि देने वाले गाइड की भूमिका—फिर से उभर सकती है। यही मुक्तिदायक पक्ष है।
लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी उतना ही गंभीर है। एआई पर अति-निर्भरता का मतलब है कि शिक्षक धीरे-धीरे सामग्री निर्माण, आलोचनात्मक सोच और नवाचार की क्षमता खो सकता है। यदि हर सवाल का उत्तर मशीन देगी और हर रिपोर्ट मशीन बनाएगी, तो शिक्षक महज़ “डैशबोर्ड चलाने वाला ऑपरेटर” रह जाएगा। शिक्षा का मानवीय संवाद, सहानुभूति और संदर्भ की गहराई खो सकती है। दूसरा खतरा है “डेटा-निर्णय का प्रभुत्व”। यदि हर विद्यार्थी को केवल संख्याओं और एल्गोरिदम से आंका जाएगा तो उसकी व्यक्तित्वगत विविधता गायब हो जाएगी। इसके साथ ही, डेटा की गोपनीयता और एल्गोरिदम में छिपे पूर्वाग्रह भारतीय समाज की असमानताओं को और बढ़ा सकते हैं।
भारत में यह दुविधा और जटिल है क्योंकि यहाँ शिक्षा व्यवस्था में गहरी विषमताएँ मौजूद हैं। महानगरों के निजी विद्यालयों से लेकर ग्रामीण सरकारी विद्यालयों तक संसाधनों और अवसरों का अंतर साफ दिखाई देता है। एआई का प्रयोग यदि बिना नीति और संवेदनशीलता के किया गया तो यह खाई और चौड़ी हो सकती है। अमीर और अंग्रेज़ी जानने वाले बच्चे आगे निकलेंगे, जबकि वंचित तबका पीछे छूट जाएगा। लेकिन यदि एआई का उपयोग भारतीय भाषाओं में सहज सामग्री बनाने, दिव्यांग छात्रों के लिए सहायक तकनीक देने और शिक्षक को प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में किया जाए, तो यह अंतर कम भी हो सकता है। भारत की बहुभाषिक और बहुसांस्कृतिक परिस्थिति एआई को अवसर भी देती है और चुनौती भी।
शिक्षक की भूमिका को लेकर सबसे बड़ा प्रश्न यही है। एआई का एक मॉडल शिक्षक को तकनीकी-प्रबंधक बना सकता है—जहाँ वह केवल मशीन के सुझावों को लागू करे और डाटा पर नज़र रखे। इससे शिक्षक की आत्मनिर्भरता और पेशेवर पहचान पर खतरा आएगा। दूसरी ओर, यदि एआई को “सहायक” की तरह इस्तेमाल किया जाए तो शिक्षक की भूमिका और भी गहरी हो सकती है। वह विद्यार्थी को केवल विषय नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, नैतिक दुविधाओं और आलोचनात्मक सोच में प्रशिक्षित कर सकता है। आखिरकार मशीन भावनाएँ, सहानुभूति और मानवीय विवेक नहीं दे सकती।
भारत को इस संतुलन के लिए बहुआयामी रणनीति बनानी होगी। सबसे पहले शिक्षक-केंद्रित प्रशिक्षण आवश्यक है। प्री-सर्विस और इन-सर्विस दोनों स्तरों पर एआई-साक्षरता, नैतिकता, डेटा गोपनीयता और आलोचनात्मक उपयोग के मॉड्यूल शामिल किए जाएँ। शिक्षक को तकनीकी गुलाम नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण उपयोगकर्ता बनाया जाए। दूसरा, हर नीति और टूल का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि क्या यह शिक्षक-छात्र संवाद को बढ़ाता है या घटाता है। यदि तकनीक संवाद घटाती है तो उसका उपयोग पुनर्विचार योग्य है। तीसरा, भारत को अपने कानूनी ढाँचे को मज़बूत करना होगा, ताकि बच्चों के डेटा का दुरुपयोग न हो। एआई मॉडल में जाति, लिंग और भाषा आधारित पूर्वाग्रहों की नियमित जाँच अनिवार्य होनी चाहिए। चौथा, भारतीय भाषाओं और स्थानीय संदर्भों में एआई का विकास ज़रूरी है। तभी यह ग्रामीण, आदिवासी और वंचित वर्ग तक पहुँच सकेगा। यदि एआई केवल अंग्रेज़ी-मुखी रहा तो यह नई असमानता पैदा करेगा। पाँचवाँ, परीक्षा-केन्द्रित शिक्षा से हटकर प्रोजेक्ट, चर्चा और अनुभव-आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए। तभी एआई से उत्पन्न कॉपी-पेस्ट संस्कृति पर नियंत्रण होगा और छात्र वास्तविक सोच विकसित करेंगे। और छठा, स्टार्टअप्स और शोध केंद्रों को प्रोत्साहन देते समय यह सुनिश्चित किया जाए कि उनके उत्पाद शिक्षा के मानवीय उद्देश्यों को मज़बूत करें, न कि सिर्फ़ बाज़ार या नियंत्रण के साधन बनें।
यह संतुलन केवल नीति बनाने से नहीं आएगा। इसे मापने के ठोस पैमाने तय करने होंगे। जैसे—क्या शिक्षक के पास छात्रों के साथ अधिक समय उपलब्ध हुआ? क्या कमजोर छात्रों की प्रगति तेज़ हुई? क्या छात्रों की रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच में सुधार आया? क्या डेटा गोपनीयता सुरक्षित रही? जब तक इन मापदंडों से परिणाम न दिखें, तब तक एआई का उपयोग महज़ एक दिखावा होगा। भारत के पास दोहरी चुनौती और अवसर है। एक ओर, वह तेजी से बढ़ते एआई स्टार्टअप इकोसिस्टम और डिजिटल अवसंरचना के कारण वैश्विक एआई केंद्र बन सकता है। दूसरी ओर, उसकी बहुभाषिकता, सामाजिक विषमताएँ और विशाल शिक्षा-तंत्र एक प्रयोगशाला भी है—जहाँ दुनिया देख सकती है कि तकनीक और मानवीयता का संतुलन कैसे साधा जाता है। यदि भारत यह दिखा पाए कि एआई शिक्षक को अधिक “मानवीय” बनाता है, न कि केवल “प्रबंधक”, तो यह मॉडल पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा होगा।
एआई शिक्षा को मुक्तिदायक भी बना सकती है और बंधनकारी भी। अंतर इस बात पर निर्भर करेगा कि हम इसे किस दृष्टिकोण से अपनाते हैं। यदि एआई को शिक्षक का स्थानापन्न बना दिया गया तो शिक्षा मानवीयता खो देगी। लेकिन यदि इसे शिक्षक के सहायक और समय-उद्धारक की तरह प्रयोग किया गया, तो यह शिक्षा को और अधिक जीवंत, संवादात्मक और समावेशी बना सकती है। भारत को इस संतुलन के लिए नीति, प्रशिक्षण, डेटा सुरक्षा, भाषा-समावेशन और आकलन के ठोस कदम उठाने होंगे। तभी वह वैश्विक एआई केंद्र भी बन सकेगा और शिक्षा का मानवीय सार भी बचा सकेगा। अंततः प्रश्न यही है—क्या एआई ने शिक्षक और विद्यार्थी को एक-दूसरे के और करीब ला दिया, या सिर्फ़ उन्हें स्क्रीन के और करीब पहुँचा दिया? इसी उत्तर पर भारतीय शिक्षा का भविष्य तय होगा।
काठमांडू। (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)नेपाल में सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों और हाल ही में फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब और स्नैपचैट जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ युवा वर्ग का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। रविवार को राजधानी काठमांडू के मैतीघर क्षेत्र में हज़ारों की संख्या में जेन Z प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए और प्रतिबंध हटाने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
स्थिति तब बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र का उल्लंघन कर संसद परिसर में प्रवेश की कोशिश की। इसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले, रबर की गोलियां और पानी की बौछारों का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर-बितर किया। कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की स्थिति भी बनी।
काठमांडू जिला कार्यालय के प्रवक्ता मुक्तिराम रिजाल ने मीडिया को जानकारी दी कि हालात काबू से बाहर होते देख रविवार रात 10 बजे (1615 GMT) तक कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों को हिंसा रोकने और स्थिति नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
नेपाल में मचे बवाल का असर भारत-नेपाल सीमा पर भी दिख रहा है। अशांति को देखते हुए भारत ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने नेपाल सीमा से सटे इलाकों में अतिरिक्त जवान तैनात कर गश्त और निगरानी बढ़ा दी है।
सूत्रों के अनुसार, नेपाली युवाओं का आरोप है कि सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बैन कर जनता की आवाज़ दबाने की कोशिश कर रही है। यही कारण है कि यह आंदोलन लगातार उग्र रूप लेता जा रहा है। नेपाल में हालात पर भारत की सुरक्षा एजेंसियां भी लगातार नज़र बनाए हुए हैं।
नई दिल्ली।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) देश में 17वें उपराष्ट्रपति पद के चुनाव की सरगर्मी अपने चरम पर है। मंगलवार, 9 सितंबर को होने वाले इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे पहले मतदान करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी पंजाब और हरियाणा से जुड़े सांसदों के साथ मिलकर वोट डालेंगे।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, राम मोहन नायडू और शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे को इस चुनाव के लिए चुनाव एजेंट नियुक्त किया गया है। वहीं, एनडीए खेमे से जुड़े वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी चुनाव से एक दिन पहले यानी 8 सितंबर को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसदों के लिए रात्रिभोज का आयोजन कर सकते हैं।
दो दिग्गज आमने-सामने इस बार का मुकाबला दक्षिण भारत से आने वाले दो नेताओं के बीच है। सत्तारूढ़ एनडीए ने सी. पी. राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है, जबकि विपक्ष की ओर से बी. सुदर्शन रेड्डी मैदान में हैं। वोटों की गिनती मंगलवार शाम को पूरी कर दी जाएगी और देर रात तक नतीजों की घोषणा होने की संभावना है।
चुनाव प्रक्रिया और निर्वाचन मंडल राज्यसभा महासचिव और निर्वाचन अधिकारी पी. सी. मोदी ने बताया कि मतदान संसद भवन के कमरा संख्या एफ-101, वसुधा में होगा।
चुनाव सुबह 10 बजे शुरू होकर शाम 5 बजे तक चलेगा।निर्वाचक मंडल में राज्यसभा के 233 निर्वाचित सदस्य (5 सीटें रिक्त), 12 मनोनीत सदस्य और लोकसभा के 543 निर्वाचित सदस्य (1 सीट रिक्त) शामिल हैं।कुल निर्वाचक मंडल की संख्या 788 है, जिसमें से इस समय 781 सदस्य मतदान करेंगे।
इस चुनाव के जरिए तय होगा कि सी. पी. राधाकृष्णन या बी. सुदर्शन रेड्डी में से कौन देश का 17वां उपराष्ट्रपति बनेगा।
बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर कंपोजिट विद्यालय बरौली करजही विकास खंड भलुवनी में सोमवार को विश्व साक्षरता दिवस का आयोजन किया गया। शिक्षकों, छात्रों ने जागरूकता रैली निकाली। रैली का शुभारंभ बीईओ सत्यप्रकाश कुशवाहा ने किया। शिक्षकों, बच्चों की रैली गांव में जाकर अभिभावकों को शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। छात्रों के बीच स्लोगन प्रतियोगिता आयोजित की गई । खंड शिक्षा अधिकारी सत्यप्रकाश कुशवाहा ने कहा कि शिक्षा जहां होती है वहां विकास, सुख, समृद्धि और उन्नति होती है। शिक्षा आपके अधिकारों से अवगत कराती है, आपको आपका शोषण होने से बचाती है, शिक्षा पल-पल आपका साथ निभाती है। प्रभारी प्रधानाध्यापक संजय गुप्ता ने साक्षरता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साक्षरता शिक्षा की शुरुआत और ज्ञान की राह पर चलाने वाला माध्यम है। रैली बरौली चौराहा होते हुए गांव में भ्रमण की। इस दौरान संदीप कुमार, अर्चना यादव, दिनेश सिंह, धर्मेंद्र प्रजापति,सविनय यादव,संगीता यादव, अमिता देवी,शांति देवी मौजूद रहे।
शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)। जलालाबाद ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम मुडिया कलां में रविवार देर शाम बड़ा हादसा हो गया। जूनियर हाईस्कूल की दीवार अचानक भरभराकर सड़क पर गिर गई। हादसे में दीवार के पास बैठे महिला सहित तीन लोग मलबे की चपेट में आ गए। इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई, जबकि दो पोते गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। ग्राम मुडिया कलां निवासी धनदेवी (60) पत्नी शंकर अपने पोते विनमोल व लवकुश के साथ घर के सामने बैठे हुए थीं। पास ही जूनियर हाईस्कूल की दीवार थी। अचानक दीवार गिर गई और तीनों मलबे में दब गए। घटना से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। परिजनों व ग्रामीणों ने तुरंत तीनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जलालाबाद पहुंचाया। हालत गंभीर देख डॉक्टरों ने उन्हें जिला अस्पताल फर्रुखाबाद रेफर कर दिया। वहां इलाज के दौरान धनदेवी की मौत हो गई। दोनों पोते की टांगें टूट गई हैं और उनका इलाज जारी है। अचानक हुए इस हादसे से परिवार में कोहराम मच गया। परिजन रो-रोकर बेहाल हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2019-20 में स्कूल की दीवार मानकों के विपरीत बनाई गई थी। बरसात में कमजोर दीवार भरभराकर गिर गई, जिससे यह हादसा हुआ। परिजनों के अनुसार सोमवार सुबह धनदेवी का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। वहीं ग्रामीणों ने जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
काठमांडू।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)नेपाल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ जनता सड़कों पर उतर आई है। राजधानी काठमांडू में रविवार को हालात बेकाबू हो गए जब विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें एक युवक की मौत हो गई। इसके बाद पूरे देश में तनाव फैल गया है।
दरअसल, नेपाल सरकार ने फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और X (ट्विटर) समेत कई प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगा दिया है। विपक्ष और जनता का आरोप है कि प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार के आरोपों को दबाने और आलोचना को रोकने के लिए यह कदम उठा रहे हैं।
काठमांडू में संसद परिसर के बाहर हजारों प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ नारेबाजी की। भीड़ ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और तोड़फोड़ शुरू कर दी। हालात बिगड़ते देख पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर गोलीबारी की गई, जिसमें एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई और कई घायल बताए जा रहे हैं।
बढ़ते विरोध को देखते हुए काठमांडू में कर्फ्यू लगा दिया गया है। पूरे देश में इंटरनेट बैन को लेकर आक्रोश है और लोग इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बता रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल में सोशल मीडिया पर रोक लंबे समय तक रही तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। नेपाल में फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और X समेत कई प्लेटफॉर्म पर बैन। काठमांडू में संसद परिसर में प्रदर्शनकारियों ने की तोड़फोड़। पुलिस गोलीबारी में एक प्रदर्शनकारी की मौत, कई घायल। राजधानी काठमांडू में कर्फ्यू लागू। जनता ने सरकार पर भ्रष्टाचार और तानाशाही के आरोप लगाए।