भारतेंदु हरिश्चंद्र (1850–1885) आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक और हिंदी पत्रकारिता के अग्रदूत माने जाते हैं। अल्पायु में उन्होंने हिंदी को केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति का माध्यम ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरण और राष्ट्रीय चेतना का औजार बना दिया। उनके नाटक भारत दुर्दशा, अंधेर नगरी और सत्य हरिश्चंद्र आज भी सामाजिक व राजनीतिक विडंबनाओं पर करारा व्यंग्य करते हैं। कवि और निबंधकार के रूप में उनका लेखन समाज को आत्मगौरव और आत्मचिंतन की ओर ले गया। उनकी प्रसिद्ध उक्ति “निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।” ने हिंदी समाज को अपनी भाषा के महत्व का बोध कराया। भारतेंदु ने पत्रकारिता को परिवर्तन का सशक्त मंच बनाया। कवि वचन सुधा, हरिश्चंद्र मैगज़ीन और हरिश्चंद्र चंद्रिका जैसी पत्रिकाओं से उन्होंने अंग्रेजी शासन की नीतियों पर प्रहार किया और दहेज, बाल विवाह, अंधविश्वास जैसी कुरीतियों के खिलाफ बेबाक लिखा। उनकी पत्रकारिता राष्ट्रभक्ति, सामाजिक सुधार और भाषा-विकास पर आधारित थी, और आज भी पत्रकारों के लिए मार्गदर्शन का स्रोत है। डिजिटल युग की पत्रकारिता के सामने टीआरपी की दौड़, व्यावसायिक दबाव और फेक न्यूज़ जैसी चुनौतियाँ हैं। ऐसे समय में भारतेंदु का आदर्श हमें याद दिलाता है कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्ता की वकालत नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ उठाना और समाज को सही दिशा देना है। भारतेंदु हरिश्चंद्र का जीवन और कृतित्व यह सिखाता है कि साहित्य और पत्रकारिता तभी सार्थक हैं, जब वे समाज और राष्ट्र की उन्नति का माध्यम बनें। उनकी जयंती पर यही संकल्प लेना सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी। “सदा सत्य बोलो, सदा सत्य लिखो, सदा सत्य का पालन करो।”- भारतेंदु हरिश्चंद्र
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) देश के 17वें उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए आज संसद भवन में मतदान प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुबह 10 बजे सबसे पहला वोट डालकर प्रक्रिया की शुरुआत की। मतदान से पहले एनडीए सांसदों की एक ब्रेकफास्ट मीटिंग सुबह 9.30 बजे हुई, जिसमें सभी सांसद शामिल हुए।
चुनाव में मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन और इंडिया ब्लॉक (विपक्ष) के प्रत्याशी बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच है। इस चुनाव में लोकसभा के 542 सांसद और राज्यसभा के 239 सांसद, यानी कुल 781 सदस्य वोट डालने के पात्र हैं।
मतदान सुबह 10 बजे से शुरू होकर शाम 5 बजे तक चलेगा। इसके बाद शाम 6 बजे से वोटों की गिनती शुरू होगी और देर शाम तक परिणाम घोषित किए जाने की संभावना है।
उपराष्ट्रपति का चुनाव सांसदों के वोट से होता है और यह निर्वाचन आयोग की देखरेख में संपन्न कराया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा होने के बाद नए निर्वाचित उपराष्ट्रपति शपथ ग्रहण करेंगे।
राजनीतिक गलियारों में यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं। ऐसे में यह मुकाबला सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है।
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। बरहज सोनुघाट सड़क की दुर्दशा को लेकर समाजवादी पार्टी ने सोमवार को करूअना, बरहज के बीच टूटी सड़क पर धान रोपकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया।
सपा नेता विजय रावत ने कहा कि भाजपा सरकार के आठ सालों के कार्यकाल में विकास का नाम तक नहीं है। जिला मुख्यालय से जुड़ने वाली सड़कें जर्जर हैं और पीडब्ल्यूडी विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर है। बरहज–सोनुघाट मार्ग की हालत इतनी खराब है कि एम्बुलेंस से जाने पर भी प्रसूता महिला की स्थिति गंभीर हो सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कभी पैचिंग के नाम पर जनता का पैसा लूटा गया, तो कभी फोर लेन बनाने का झूठा सपना दिखाकर गुमराह किया गया। सपा नेता ने कहा कि अब सड़क निर्माण को लेकर आर-पार की लड़ाई होगी। इसके लिए जगह-जगह जनजागरण कार्यक्रम और जरूरत पड़ने पर बरहज से सोनुघाट तक पदयात्रा भी निकाली जाएगी।
इस मौके पर रणविजय सिंह, दिनेश यादव, अनरुद यादव, श्रवण कुमार, अनिल कुशवाहा, संजय प्रसाद, राहुल तिवारी, आशुतोष मिश्रा, अख्तर अहमद, विकास यादव, सुनील राजभर सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
मऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)जनपद के जहानाबाद ब्लॉक से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ की निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख (संजय यादव की पत्नी) ने गंभीर आरोप लगाया है कि उनके पति संजय यादव को फर्जी पुलिसकर्मी बनकर उठाया गया है।
संजय यादव हाल ही में जेल से छूटकर बाहर आए थे। उल्लेखनीय है कि गाजीपुर जेल में भी उनके ऊपर कथित एनकाउंटर की कोशिश की चर्चा तेज रही थी। इसी कड़ी में संजय यादव की पत्नी ने कहा है कि इस पूरे खेल के पीछे गाजीपुर के एक मंत्री का इशारा है।
पुरानी घटनाओं से उठी आशंका पत्नी ने आरोप लगाया है कि वाराणसी में बसपा नेता अजय यादव की हत्या भी इसी तरह फर्जी STF बनकर की गई थी। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कहीं उसी स्क्रिप्ट को दोहराने की तैयारी तो नहीं की जा रही।
विवादों से जुड़ रहा मामला बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला ठेकेदारी विवाद और कुछ समय पहले वायरल हुए “गाली प्रकरण” से भी जुड़ा हुआ है।
संवैधानिक सवाल इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है –यदि कोई अपराधी है भी, तो क्या पुलिस की आड़ में फर्जी कार्रवाई करना संवैधानिक है? यदि इस तरह हत्या होती है तो मुकदमा और जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी, जबकि असल में बड़े माफिया जेल से छूट जाएंगे।
नतीजा संजय यादव को फर्जी पुलिसकर्मी बनकर उठाए जाने का यह मामला अब राजनीतिक सरगर्मी और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोग और परिजन उनके जीवन को लेकर भयभीत हैं।
काठमांडू (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)नेपाल में सोशल मीडिया पर बैन हटाए जाने के बावजूद हालात काबू में नहीं आ पा रहे हैं। प्रदर्शनकारी अब प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं। राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन और उग्र होता जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, बीते 24 घंटों में नेपाली कांग्रेस कार्यालय, उप प्रधानमंत्री, गृह मंत्री समेत कई मंत्रियों के घरों पर आगजनी की घटनाएं हुई हैं। इतना ही नहीं, प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रधानमंत्री ओली की पार्टी के दफ्तर में भी आग लगा दी। पुलिस और सुरक्षा बलों को हालात काबू में लाने के लिए तैनात किया गया है।
गौरतलब है कि नेपाल सरकार ने हाल ही में सोशल मीडिया पर लगाया गया बैन वापस ले लिया है। सरकार का कहना है कि बैन हटाने का फैसला जनभावनाओं को देखते हुए लिया गया। लेकिन प्रदर्शनकारी इसे लेकर शांत नहीं हुए हैं और उनका आंदोलन अब सरकार विरोधी हो गया है।
इससे पहले, सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध के बाद हिंसक प्रदर्शनों में 20 से ज्यादा युवाओं की मौत हो चुकी थी। लगातार बिगड़ते हालात से नेपाल सरकार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
👉 मुख्य बिंदु:
नेपाल सरकार ने सोशल मीडिया बैन हटाया।
प्रदर्शनकारियों की मांग अब पीएम ओली का इस्तीफा।
मंत्रियों के घरों व कांग्रेस कार्यालय में आगजनी।
ओली की पार्टी कार्यालय को भी प्रदर्शनकारियों ने निशाना बनाया।
लखनऊ,(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन और यूपीएसएलडीसी के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 का टैरिफ आदेश जारी कर दिया है। इस बार आयोग ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पहली बार ट्रांसमिशन शुल्क का निर्धारण प्रति यूनिट दर की जगह प्रति मेगावाट प्रति माह के आधार पर किया है।
आयोग के इस नए निर्णय से पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी। साथ ही, सिस्टम के रखरखाव व आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक संसाधन भी सुनिश्चित होंगे। राज्य के डिस्कॉम (DISCOMs) और भारतीय रेल को अब पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन को ₹2,13,284 प्रति मेगावाट प्रति माह भुगतान करना होगा। वहीं, ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं से पहले की तरह 26 पैसे प्रति यूनिट की दर से शुल्क लिया जाएगा। उपभोक्ताओं को होगा लाभ नई व्यवस्था से पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन का कैश फ्लो नियमित बना रहेगा, जिससे सिस्टम अपग्रेडेशन और रखरखाव में आसानी होगी। डिस्कॉम और कॉरपोरेशन पर वित्तीय दबाव कम होगा। अप्रत्यक्ष रूप से आम उपभोक्ताओं को भी इसका लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम यूपी की बिजली आपूर्ति प्रणाली को और अधिक विश्वसनीय व सुदृढ़ बनाने में सहायक होगा।
लखनऊ,(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) राजधानी लखनऊ के विभूतिखंड स्थित राज्य कर (GST) कार्यालय में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब कानपुर से आई एक महिला और उसका भतीजा डिप्टी कमिश्नर के केबिन में घुस गए और अचानक उन पर कलछुल (लोहे का औजार) से हमला कर दिया।
हमले में डिप्टी कमिश्नर के हाथ में चोट आई है। मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारियों ने किसी तरह हमलावरों को काबू किया और तत्काल पुलिस को सूचना दी।
आरोपियों की गिरफ्तारी विभूतिखंड थाना पुलिस ने मौके पर पहुँचकर महिला और उसके भतीजे को हिरासत में लिया। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें जेल भेजने का आदेश दे दिया गया।
FIR दर्ज, धाराएँ लागू पुलिस ने दोनों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। हालांकि किन धाराओं में मामला दर्ज हुआ है, इस पर वरिष्ठ अधिकारियों से आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है।
जांच जारी पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी महिला और उसके भतीजे ने इस तरह का हमला क्यों किया। क्या यह किसी व्यक्तिगत रंजिश, आर्थिक विवाद या मानसिक तनाव से जुड़ा मामला है—इसकी तहकीकात चल रही है। साथ ही, डिप्टी कमिश्नर की चोट की चिकित्सीय रिपोर्ट (Medico-Legal Report) भी पुलिस रिकॉर्ड का हिस्सा बनेगी।
इस घटना से राज्य कर विभाग के कर्मचारियों में दहशत का माहौल है। दफ्तर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि आरोपियों ने बिना किसी रोक-टोक के वरिष्ठ अधिकारी के केबिन में प्रवेश कर लिया।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की जांच की जा रही है। आरोपियों की पृष्ठभूमि, मानसिक स्थिति और घटना के पीछे की वजह जल्द स्पष्ट की जाएगी।
रायबरेली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष एवं रायबरेली के सांसद राहुल गांधी 10 और 11 सितंबर को अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह बूथ स्तर से लेकर जिले की दिशा तय करने वाली बैठकों में सक्रिय भागीदारी करेंगे।
कार्यक्रम के अनुसार, राहुल गांधी 10 सितंबर को हरचंदपुर विधानसभा क्षेत्र पहुंचेंगे। यहां वे बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे और संगठन को मज़बूत करने की रणनीति पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा प्रजापति समाज के लोगों से संवाद कर उनकी समस्याओं और सुझावों को जानेंगे। इसी दिन वे गोरा बाज़ार चौराहे पर स्थापित अशोक स्तंभ का लोकार्पण भी करेंगे।
अगले दिन 11 सितंबर को राहुल गांधी जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति पर समीक्षा की जाएगी। दिशा की बैठक समाप्त होने के बाद राहुल गांधी दिल्ली लौट जाएंगे।
राहुल गांधी के इस दौरे को लेकर कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। पार्टी संगठन इसे क्षेत्रीय राजनीति और आगामी रणनीति के लिहाज़ से अहम माना जा रहा है।
अयोध्या। (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक आज दोपहर 3 बजे मणिराम दास छावनी में आयोजित होगी। बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास करेंगे, वहीं निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र भी विशेष रूप से मौजूद रहेंगे।
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में नवंबर माह में प्रस्तावित ध्वजारोहण समारोह को लेकर तैयारियों पर विस्तार से चर्चा होगी। आयोजन की रूपरेखा, श्रद्धालुओं और आगंतुकों की सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था तथा कार्यक्रम स्थल पर आवश्यक प्रबंधों को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
ट्रस्ट पदाधिकारियों का कहना है कि राम मंदिर निर्माण कार्य तेजी से अपने अंतिम चरण में पहुँच रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए आगामी धार्मिक आयोजनों की भव्यता और व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बैठक में ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी, साधु-संत और आयोजन समिति के सदस्य भी शामिल रहेंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बैठक के बाद नवंबर में होने वाले ध्वजारोहण समारोह का स्वरूप और अधिक स्पष्ट हो जाएगा।
मंदिर आंदोलन और उससे जुड़े करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को देखते हुए यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। इसमें लिए गए फैसले न सिर्फ ध्वजारोहण समारोह की दिशा तय करेंगे, बल्कि आने वाले महीनों में होने वाले धार्मिक आयोजनों का खाका भी सामने लाएंगे।
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन से भारत के इथियोपिया स्थित राजदूत एवं अफ्रीकी संघ में भारत के स्थायी प्रतिनिधि अनिल कुमार राय ने भेंट की। राजदूत श्री राय ने कुलपति प्रो. टंडन के साथ उच्च-स्तरीय बैठक में भाग लिया। इस अवसर पर प्रो-वाइस चांसलर प्रो. शंतनु रस्तोगी और डॉ. महेन्द्र कुमार सिंह भी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान अफ्रीकी देशों, विशेषकर इथियोपिया के विश्वविद्यालयों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने, संयुक्त शोध परियोजनाओं की संभावनाएं तलाशने, छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान कार्यक्रम और संभावित समझौता ज्ञापन (एमओयू) जैसे मुद्दों पर गहन विमर्श हुआ। चर्चा में विश्वविद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने और विदेशी छात्रों को आकर्षित करने की रणनीतियों पर भी विचार हुआ। राजदूत राय ने विश्वविद्यालय को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। कुलपति प्रो. टंडन ने इस दौरे को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, “महामहिम राजदूत का यह आगमन हमारे लिए ऐतिहासिक क्षण है। इससे हमें अफ्रीकी देशों के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ने और अपने शोध व शैक्षिक कार्यों को वैश्विक पटल तक ले जाने का अवसर मिलेगा। अफ्रीकी देशों के छात्रों को अपने विश्वविद्यालय में आकर्षित करने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम है।”
महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जिले में वन ग्राम से जोड़ने वाली सड़क योजना के अंतर्गत चानकी पुल से गुलरिहा तुलसीपुर मार्ग का निर्माण घोर लापरवाही का शिकार हो रहा है। संबंधित ठेकेदार व अधिकारियों की मिली-भगत से निर्माण कार्य न केवल मानकों की अनदेखी के साथ किया जा रहा है, बल्कि समय सीमा से भी काफी पीछे चल रहा है। इससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। प्राप्त समाचार के अनुसार, इस 6.5 किमी लंबे मार्ग के लिए 3 करोड़ 39 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं। लेकिन मौके पर निर्माण कार्य की स्थिति देख कर वित्तीय बंदर बांट का अंदेशा साफ झलकता है।सड़क पर गिट्टी तो बिछाई गई है, मगर डस्ट की जगह मिट्टी का प्रयोग किया गया।निर्माण शुरू हुए दो साल हो चुके हैं, फिर भी अब तक महज दो किमी पर इंटरलॉकिंग भी पूरी नहीं हो पाई है। वहीं पुलियों के निर्माण में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। क्षेत्रीय नागरिक रोहित,महेश, संदीप, राजमती, पुष्पा, मोहन, रीता, चन्दन, प्रदीप, ओमप्रकाश, मंजेश सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि निर्माण कार्य में स्क्रीनिंग मैटेरियल के नाम पर लाखों रुपये की बचत कर ली गई है।लोगों ने डीएम से इस मामले में उच्च स्तरीय जांच व दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण प्रथम राजकुमार मिश्र का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।
(सोशल मीडिया पर नेपाल का बड़ा ताला: लोगों की आवाज़ पर रोक या नियमों की ज़रूरत?)
नेपाल सरकार ने 26 बड़े सोशल मीडिया और संदेश भेजने वाले मंच—जिनमें फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स (पहले ट्विटर) शामिल हैं—को देश में बंद करने का आदेश दिया है। सरकार का तर्क है कि कंपनियों ने स्थानीय कार्यालय नहीं खोला और शिकायत निवारण व्यवस्था नहीं बनाई, जिससे अफवाहें और साइबर अपराध बढ़ रहे हैं। आलोचक इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला मानते हैं। इस कदम से आम नागरिक, परिवार, व्यापारी और सामग्री निर्माता प्रभावित होंगे। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि पूर्ण प्रतिबंध की बजाय कंपनियों को नियमों का पालन कराने और जनता की आवाज़ सुरक्षित रखने वाला संतुलित समाधान बेहतर होगा। नेपाल जैसे छोटे लोकतांत्रिक देश ने हाल ही में ऐसा बड़ा निर्णय लिया है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। सरकार ने 26 सोशल मीडिया और संदेश मंचों पर अचानक रोक लगाने का आदेश दिया। इसमें फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स जैसे सबसे लोकप्रिय मंच शामिल हैं। यह फैसला जितना अचानक लिया गया, उतना ही गहरी बहस भी शुरू कर दी कि क्या यह कदम नागरिक अधिकारों पर हमला है या देश की डिजिटल सुरक्षा के लिए जरूरी था।
सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को पहले ही चेतावनी दी गई थी कि वे नेपाल में अपना स्थानीय कार्यालय खोलें, प्रतिनिधि नियुक्त करें और शिकायत निवारण की व्यवस्था सुनिश्चित करें। लेकिन कंपनियों ने इसका पालन नहीं किया। सरकार के अनुसार, इस कारण अफवाहें, भ्रामक खबरें और साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे थे। इसे रोकने के लिए ही यह बड़ा कदम उठाया गया।
लेकिन इस फैसले का विरोध भी तेजी से हो रहा है। पत्रकार संगठन, मानवाधिकार समूह और आम नागरिक इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला मान रहे हैं। उनका तर्क है कि सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह अब नागरिकों की आवाज़ और लोकतंत्र का आधार बन चुका है। जब इतने बड़े स्तर पर मंच बंद कर दिए जाएंगे, तो जनता की संवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गहरा असर पड़ेगा।
नेपाल में लाखों परिवार ऐसे हैं जिनके सदस्य विदेशों में काम कर रहे हैं। उनके लिए व्हाट्सएप और फेसबुक ही परिवार से जुड़े रहने का सबसे आसान माध्यम हैं। इस प्रतिबंध से उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी कठिन हो जाएगी। यही नहीं, छोटे व्यापारी और ऑनलाइन कारोबार करने वाले लोग भी सोशल मीडिया के माध्यम से ग्राहकों तक पहुँचते थे। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक पर विज्ञापन देकर वे अपने उत्पाद बेचते थे। अब यह सब प्रभावित होगा।
हजारों सामग्री निर्माता और यूट्यूबर, जो सोशल मीडिया से अपनी रोज़ी-रोटी चला रहे थे, अचानक बेरोज़गार होने की कगार पर पहुँच गए हैं। युवाओं में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है। यह केवल आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि डिजिटल रोजगार पर भी बड़ा झटका है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह निर्णय नेपाल सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विपक्ष इसे तानाशाही कदम मान रहा है। उनका कहना है कि सरकार आलोचना और सवालों से डर रही है, इसलिए उसने सोशल मीडिया पर रोक लगा दी। लोकतंत्र की असली ताकत जनता की आवाज़ में है। जब उस आवाज़ को दबाया जाता है, तो लोकतंत्र कमजोर पड़ जाता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नेपाल की छवि प्रभावित होगी। निवेशक और डिजिटल कंपनियाँ यह सोचेंगी कि नेपाल का डिजिटल माहौल स्थिर और सुरक्षित नहीं है। इससे निवेश और साझेदारी पर असर पड़ेगा। पर्यटक भी नाखुश हो सकते हैं, क्योंकि आज यात्रा, संचार और जानकारी का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया पर आधारित है।
सरकार का तर्क बिल्कुल गलत नहीं है। सोशल मीडिया पर अफवाहें, फर्जी खबरें और साइबर अपराध तेजी से फैल रहे हैं। इससे सामाजिक तनाव और हिंसा भी भड़क सकती है। सरकार को यह हक़ है कि वह नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और कंपनियों को जिम्मेदार बनाए। लेकिन समस्या का हल सीधे मंचों को बंद करना नहीं होना चाहिए।
दुनिया के कई देशों ने सोशल मीडिया कंपनियों पर नियम लागू किए हैं। भारत ने 2021 में नए सूचना प्रौद्योगिकी नियम बनाए, जिनमें कंपनियों को शिकायत अधिकारी नियुक्त करना और सामग्री पर तुरंत कार्रवाई करना अनिवार्य किया गया। यूरोपियन संघ ने भी डिजिटल सेवा कानून लागू किया। लेकिन कहीं भी इस तरह का पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया। नेपाल का कदम इसलिए कठोर और जल्दबाज़ी भरा लगता है।
समाधान यही है कि सरकार कंपनियों से बातचीत करे, उन पर जुर्माना लगाए और नियमों का पालन करने के लिए दबाव बनाए। जनता की आवाज़ को पूरी तरह रोकना सही तरीका नहीं है। यह न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है बल्कि जनता और सरकार के बीच अविश्वास भी बढ़ाएगा।
भविष्य में नेपाल को संतुलन की राह चुननी होगी। उसे समझना होगा कि सोशल मीडिया अब केवल तकनीकी साधन नहीं है, बल्कि लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। इसे बंद करना लोगों की स्वतंत्रता और संवाद दोनों पर चोट है। बेहतर होगा कि सरकार कंपनियों को सख्त नियमों के दायरे में रखे, लेकिन नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुरक्षित भी रहे।
लोकतंत्र की असली ताकत जनता का भरोसा है। यह भरोसा तभी बनता है जब सरकार जनता से संवाद करेगी, न कि उसकी आवाज़ को दबाएगी। नेपाल को चाहिए कि वह अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करे और ऐसा रास्ता अपनाए जिससे कानून का पालन भी हो और नागरिकों की स्वतंत्रता भी सुरक्षित रहे। यही सही लोकतांत्रिक समाधान है।
नेपाल की यह घटना पूरे विश्व के लिए भी सीख है। यह दिखाती है कि डिजिटल दुनिया में नियमों और स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाना कितना महत्वपूर्ण है। एक ओर सुरक्षा, अफवाहों और अपराधों पर नियंत्रण की जरूरत है, तो दूसरी ओर जनता की अभिव्यक्ति और संवाद की स्वतंत्रता का सम्मान भी उतना ही आवश्यक है। यदि यही संतुलन मिल जाता है, तो लोकतंत्र मजबूत रहेगा और डिजिटल दुनिया का लाभ सभी को मिलेगा।
नेपाल के निर्णय ने यह स्पष्ट किया है कि सरकारें डिजिटल दुनिया में सही कदम उठाने के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन इस जिम्मेदारी का मतलब जनता की आवाज़ पर अंकुश लगाना नहीं होना चाहिए। हर लोकतंत्र में नागरिकों की स्वतंत्रता सर्वोपरि है। इसलिए नेपाल को चाहिए कि वह कानून की कठोरता और लोगों की स्वतंत्रता के बीच सही संतुलन बनाए और सोशल मीडिया को केवल प्रतिबंध का शिकार न बनने दे।
अंततः यह निर्णय एक चेतावनी भी है कि सोशल मीडिया का महत्व अब केवल मनोरंजन या सूचना तक सीमित नहीं है। यह लोकतंत्र, रोजगार, सामाजिक संवाद और वैश्विक पहचान का अहम हिस्सा बन चुका है। इसे सही ढंग से नियंत्रित करना, नियम लागू करना और नागरिकों की आवाज़ सुरक्षित रखना ही भविष्य की दिशा है।
नेपाल को चाहिए कि वह इस निर्णय का पुनर्विचार करे और ऐसा समाधान निकाले जो कानून का पालन सुनिश्चित करे, अफवाहों और साइबर अपराध पर रोक लगाए, और साथ ही जनता की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को भी सुरक्षित रखे। यही लोकतंत्र की सच्ची ताकत है।
बीएमसी एल वार्ड पर स्थानीय पत्रकार पवन पाठक ने लगाया लापरवाही के आरोप,
रिपोर्ट :अजय उपाध्याय मुंबई (राष्ट्र की परम्परा (कुर्ला पश्चिम के काजुपाड़ा क्षेत्र अंतर्गत गरीबी हटाओ सोसायटी, पांडेय चाल और हलाई मेमन चाल में डेंगू और मलेरिया का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। स्थानीय निवासी पत्रकार पवन पाठक का आरोप है कि पिछले दो महीनों से बीएमसी ने यहां धुआं तक नहीं मारा, जिससे मच्छरों का प्रकोप और भी ज्यादा हो गया है। इस स्थानिक इलाके के रहिवासी लगातार डेंगू,मलेरिया जैसे घातक बीमारियों से जूझ रहे हैं। बढ़ते संक्रमण के बीच इलाज कराने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है | स्थानीय निवासी एवं पत्रकार पवन पाठक ने इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए एल विभाग मनपा के सहायक आयुक्त धनाजी हेर्लेकर से तुरंत पेस्ट कंट्रोल विभाग को आदेश जारी कर धुआं फॉगिंग अभियान शुरू कराने की मांग की है। पाठक ने कहा कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो डेंगू-मलेरिया जैसी घातक बीमारियां और फैल सकती हैं, जिससे आम जनता की जान खतरे में पड़ जाएगी।
गोंदिया – विश्व स्वास्थ्य जगत में कैंसर एक ऐसा सार्वभौमिक संकट रहा है जिसने अनेक बार वैज्ञानिकों को अचम्भित किया है। बढ़ते कैंसर के मामलों और उसके आर्थिक व सामाजिक प्रभावों की चुनौतियों ने एक से अधिक बार चिकित्सा अनुसंधान को अग्रसर किया है।कैंसर आज के समय में इंसानों को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है, पहले यह बड़े उम्र के लोगों में ज्यादा होता था,लेकिन आज कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में हैं, मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि अगर सरल शब्दों में कहा जाए तो स्त्री से लेकर पुरुष तक हर कोई कैंसर से परेशान है,इसके अलावा इसके इलाज में काफी खर्च आता है जो आम इंसान कभी-कभी उतना दे नहीं पाता और इसके चलते हर साल बड़ी संख्या में इससे लोगों की मौत हो जाती है, अब इसी बीमारी को काउंटर करने के लिए रूस ने वैक्सीन का निर्माण किया है,यह वैक्सीन अगर इंसानों पर पूरी तरह सफल होती है, तो यह मानव सभ्यता के सबसे महान खोजों में से एक होने वाली है, 8 सितंबर 25 को देर रात्रि आई जानकारी के अनुसार,अभी तक एम- आरएनए बेस्ड वैक्सीन ‘एंटरोमिक्स’ ने प्री-क्लिनिकल ट्रायल्स में 100 प्रतिशत तक प्रभावशील और सुरक्षित दिखी है, इस वैक्सीन को रूस के नेशनल मेडिकल रिसर्च रेडियोलॉजी सेंटर और रूस के ही एकेडमी ऑफ साइंस के एंगेलहार्ट इंस्टीट्यूट ऑफ मॉलिक्यूलर बायोलॉजी ने साथ मिलकर तैयार किया है।समाचारों में अक्सर”नई वैक्सीन”,”नया इलाज” “क्रांतिकारी शोध” जैसी बातें सामने आती हैं परंतु सच्चाई अक्सर संतोषजनक नहीं होती। इसलिए रूस की वैज्ञानिक टीम द्वारा प्रकाशित हालिया रिपोर्ट, जिसमें दावा है कि “इंटरोमिक्स” नामक एम-आरएनए कैंसर वैक्सीन ग्लोबली प्रीक्लिनिकल से लेकर क्लिनिकल ट्रायल्स में 100 पर्सेंट सफल रही है,वास्तव में एक व्यापक और सावधानी पूर्वक मूल्यांकन मांगती है।चूँकि एक नई उम्मीद “इंटरोमिक्स” कैंसर वैक्सीन:- कैंसर को वैक्सीन से हराने की पहल, वैश्विक शोध जगत में इस खोज को एक संभावित गेम-चेंजर माना जा रहा है।इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्धजानकारी के सहयोग से इसआर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे,कैंसर के इलाज में रूस की क्रांतिकारी खोज-“नई वैक्सीन” “नया इलाज”,”क्रांतिकारी शोध”- “इंटरोमिक्स” कैंसर वैक्सीन। साथियों बात अगर हम शोध का दायरा और वैक्सीन का निर्माण व ट्रायल के प्रारंभिक नतीजों की करें तो,रूसी नेशनल मेडिकल रिसर्च रेडियोलॉजिकल सेंटर एवं एंगेल्हार्डट इंस्टिट्यूट ऑफ़ मोलेक्युलर बायोलॉजी (रूसी विज्ञान अकादमी) द्वारा मिलकर विकसित की गई “इंटरोमिक्स ” वैक्सीन का आधार वही एम-आरएनए तकनीक है जो कोविड-19 वैक्सीन में प्रयोग हुई थी। इसकी खासियत है,यह व्यक्तिगत ट्यूमर जीनोमिक प्रोफ़िलिंग पर आधारित,पूर्णतया कस्टमाइज़्ड थेरेपी है। इसका मतलब है कि प्रत्येक मरीज के ट्यूमर की जीन-म्युटेशनल विश्लेषण के आधार पर वैक्सीन तैयार की जाती है ताकि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कैंसर कोशिकाओं को पहचान कर उन्हें लक्ष्य कर सके। यह प्रयास केवल वर्गगत प्रतिरक्षा (स्टैंडर्ड कैंसर वैक्सीन) से हटकर, सटीक, तेज और प्रभावी चिकित्सा का नेतृत्व करता है। ट्रायल के प्रारंभिक नतीजे–फेज-1 क्लिनिकल ट्रायल, जिसमें लगभग 48 स्वैच्छिक प्रतिभागियों को शामिल किया गया था,में मरीजों में ट्यूमर में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई और कोई गंभीर साइड-इफेक्ट्स नहीं दर्ज हुए। यह दुर्लभ उपलब्धि है, क्योंकि कैंसर उपचार में अक्सर कष्टप्रद स्वास्थ्य प्रभाव आते हैं,विशेषकर कीमोथेरेपी, रेडिएशन या सर्जरी में। ट्रायल में प्राप्त परिणामों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि वैक्सीन सुरक्षित और अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई है। साथियों बात अगर हम कोलोरेक्टल कैंसर पर पहली सफलता व दावे और दूसरी परीक्षण पोकियाँ की करें तो हम देखेंगे कि इंटरोमिक्स की पहली लक्षित उपयोगिता कोलोरेक्टल कैंसर (बड़ी आंत का कैंसर) पर केंद्रित रही। इस कैंसर का वैश्विक स्तर पर प्रसार और मृत्यु दर काफ़ी उच्च है।प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार,इंटरोमिक्स ने कोलोरेक्टल कैंसर से ग्रसित रोगियों में ट्यूमर सिकुड़ने और वृद्धि में बाधा डालने में सफलता हासिल की है।दावे और दूसरी परीक्षण पोकियाँ-रूसी एजेंसी एफएमबीए (फेडरल मेडिकल एंड बायोलॉजिकल एजेंसी) ने घोषणा की है कि कई वर्षों की अनुसंधान अवधि और कम से कम तीन साल के अनिवार्य प्रीक्लिनिकल अध्ययनों के बाद अब यह वैक्सीन “उपयोग के लिए तैयार” है,लेकिन “आधिकारिक अप्रूवल” अभी अग्रसर है।रिपोर्ट अनुसार, ट्यूमर की वृद्धि दर में 60 पर्सेंट से 80 पर्सेंट तक की गिरावट दिखाई गई और जीवनकाल में सुधार भी हुआ। साथियों बात अगर हम अगली चुनौतियों: ग्लोबल ज़रूरतों और अवरोधों पर नजर डालकर समझने की करें तो, वैश्विक शोध जगत में इस खोज को एक संभावित गेम-चेंजर माना जा रहा है। अगर अगले चरण के ट्रायल—फेज -2, फेज-3,में यह वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी साबित होती है, तो यह कैंसर उपचार के आसपास के परिदृश्य को बदलने का दम रखती है। हालांकि, वैज्ञानिक विश्व में सामान्यतः “फेज-1 की सफलता” अंतिम मंज़िल नहीं होती। फेज-2 और फेज-3 के बड़े, व्यापक ट्रायल्स, दीर्घकालिक प्रभाव, उत्पादन- लागत, वितरण व्यवस्था और नियामकीय मंज़ूरी जैसीचुनौतियाँ अभी बाकी हैं।फिर भी, आज 8 सितंबर 2025 की तारीख में, वैश्विक स्वास्थ्य और कैंसर अनुसंधान की दुनिया में रूस की यह खोज निश्चित रूप से एक उल्लेखनीय और प्रेरणादायी मोड़ बन चुकी है, जो नई उम्मीदों को जन्म देती है।यह व्यक्तिगत, मुँहतोड़ और साइड- इफेक्ट- रहित चिकित्सा का भविष्य का प्रवाह हो सकता है।भारत जैसे देशों में, जहाँ कैंसर की बीमारी आर्थिक बोझ और चिकित्सा पहुँच की चुनौतियों के बीच एक गंभीर समस्या है, ऐसी सफलता आशा की किरण बन सकती है,बशर्ते लागत, इंफ़्रास्ट्रक्चर और नियामक अवरोधों का समाधान हो सके।भारत में कैंसर के इलाज पर अनुमानत: 29,000 करोड़ रूपए सालाना खर्च होता है, जिससे अनेक परिवार आर्थिक रूप से बुरी तरह प्रभावित होते हैं।बच्चों, वृद्धों और समाज पर प्रभाव- कैंसर कोई उम्र-विशिष्ट बीमारी नहीं है,यह बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक किसी को भी प्रभावित कर सकता है। कई बार इस बीमारी से युवा जीवन की संभावना छिन जाती है, या जो लोग बच जाते हैं, उन्हें सारा जीवन आर्थिक और मानसिक संघर्ष करना पड़ता है। अगर इंटरोमिक्स जैसी वैक्सीन हर उम्र वर्ग में सफल हो जाती है, तो यह मानवीय विकास का सबसे महान योगदानों में से एक बन सकती है। साथियों बात अगर हम वैश्विक परिप्रेक्ष्य: इतिहास में सामने आई अन्य कोशिशें तथा डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों की करें तो,पहले भी कुछ देशों और संस्थानों ने कैंसर वैक्सीन विकास की पहल की,जैसे अमेरिका कीऑनकफज (विटेस्पेन) नामक वैक्सीन, जिसे रूस ने भी अप्रूवल दिया था (2008 में शुरुआती-स्टेज किडनी कैंसर के लिए)। लेकिन इसके बावजूद वैश्विक स्तरपर यह वैक्सीन व्यावसायिक रूप से सफल नहीं हो सकीइसलिए इंटरोमिक्स की सफलता सिर्फ एक वैज्ञानिक अध्याय नहीं, बल्कि एक व्यापक वैश्विक चुनौती और संभावनाओं का भाग हो सकती है। यदि व्यापक परीक्षणों और वैश्विक मान्यता में यह सफल हो जाती है, तो चिकित्सा जगत की चुनौतियाँ और उपचार दृष्टिकोण दोनों परिवर्तित हो सकते हैं।वैश्विक दृष्टिकोण से,विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, प्रत्येक वर्ष लगभग 2 करोड़ नए कैंसर के मामलों का सामना विश्व करता है, और करीब 1 करोड़ कैंसर के कारण मर जाते हैं। अतःअगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे किरूस का लाइलाज़ बीमारी कैंसर को वैक्सीन से हराने की क्रांतिकारी खोज़ -“नई वैक्सीन”,”नया इलाज”, “क्रांतिकारी शोध”इंटरोमिक्स कैंसर वैक्सीनएक नई उम्मीद “इंटरोमिक्स” कैंसर वैक्सीन:- वैश्विक शोध जगत में इस खोज को एक संभावित गेम-चेंजर माना जा रहा है।
देवरिया।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) मंगलवार, 9 अगस्त 2025 को देवरिया जनपद के भटनी खण्ड के नूनखार रेलवे स्टेशन पर एक बड़ा हादसा टल गया। छपरा से गोरखपुर जा रही नौतनवा इंटरसिटी एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 15105) का इंजन अचानक डिब्बों से अलग होकर आगे निकल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही ट्रेन नूनखार स्टेशन पर पहुंची, अचानक इंजन डिब्बों से कटकर आगे बढ़ गया जबकि ट्रेन के सभी डिब्बे स्टेशन पर ही खड़े रह गए। इस दौरान यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और लोग भयभीत हो उठे। गनीमत रही कि यह घटना स्टेशन पर हुई और गति बहुत तेज नहीं थी, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।
रेलवे अधिकारियों को मामले की सूचना मिलते ही हड़कंप मच गया। तकनीकी टीम को मौके पर भेजकर इंजन और डिब्बों को दोबारा जोड़ा गया। इस घटना के चलते ट्रेन का संचालन करीब एक घंटे प्रभावित रहा।
सूत्रों का कहना है कि यह घटना कपलिंग (इंजन और डिब्बों को जोड़ने वाली व्यवस्था) में तकनीकी खराबी के कारण हुई है। फिलहाल जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
यात्रियों ने राहत की सांस ली कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन इस तरह की घटनाओं ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रेन : नौतनवा इंटरसिटी एक्सप्रेस (15105) रूट : छपरा से गोरखपुर स्थान : नूनखार स्टेशन, देवरिया भटनी खण्ड तिथि : मंगलवार, 9 अगस्त 2025 घटना : इंजन डिब्बों से अलग होकर आगे चला गया, बड़ा हादसा टला, जांच शुरू हो गई।