Wednesday, July 15, 2026
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बरहज-सोनूघाट मार्ग निर्माण हेतु तीसरे दिन करमटार में प्रदर्शन

देवरिया, (राष्ट्र की परम्परा)।शनिवार को बरहज विधानसभा की जर्जर सड़क बरहज-सोनूघाट मार्ग बनाने हेतु तीसरे दिन करमटार चौराहे पर सैकड़ों नौजवानों व ग्रामीणों ने सांकेतिक प्रदर्शन किया और सपा नेता विजय रावत को अपना समर्थन दिया। इस दौरान सपा नेता विजय रावत ने कहा कि भाजपा सरकार में विकास का कोई काम नहीं हो रहा हैं जिसका जीता जागता सबूत बरहज-सोनूघाट मार्ग व मोहन सेतु करूअना मगहरा मार्ग है। बरहज सोनूघाट मार्ग बनाने हेतु सैकड़ों की संख्या में आकर धरने को समर्थन दिया है इसके सभी का आभारी हूं। यह सड़क पिछले कई सालों से टूटी व जर्जर पड़ी है जिसके वजह से इस सड़क पर आम आदमी का चलना दुशवार हो गया है और सड़क टुटी होने के कारण आये दिन दुर्घटना हो रही हैं लेकिन शासन प्रशासन सुनने का नाम तक नहीं ले रहे हैं इस लिए हम लोगों एक दिन कैंप कर हर चटी चौराहे पर सांकेतिक प्रदर्शन कर रहे हैं अगर उसके बाद भी यह सरकार नही जगी तो बरहज सोनूघाट सड़क बनाने हेतु बरहज से सोनूघाट तक पद यात्रा निकाली जाएगी जिसमें सब के सहयोग की ज़रूरत है क्योंकि कोई भी लड़ाई जनता के सहयोग से लड़ी जाती हैं क्या जनता इस सड़क को बनाने में मेरा सहयोग करेगी। सभी लोगों ने हाथ उठाकर कर समर्थन दिया। इस दौरान मुख्य रूप से रणविजय सिंह, धन्नु गुप्ता, ऋषि केश, सनी कुशवाहा, विपिन सिंह, राहुल यादव, सत्यम सिंह, दिनेश यादव, संजय कुमार, दिलीप, प्रवीण चौहान, चन्दन पासवान, आदित्य कुमार आदि उपस्थित रहे।

एशिया कप 2025: भारत-पाकिस्तान मैच पर विवाद, शहीद की पत्नी और शिवसेना सांसद का विरोध

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) एशिया कप 2025 के तहत 14 सितंबर को दुबई में होने वाले भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या द्विवेदी ने बड़ा बयान देते हुए मैच का कड़ा विरोध किया है।

ऐशान्या द्विवेदी का बयान

ऐशान्या ने कहा कि बीसीसीआई को भारत और पाकिस्तान के बीच मैच की अनुमति नहीं देनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि –“बीसीसीआई उन 26 परिवारों के प्रति भावुक क्यों नहीं है, जिन्होंने अपने परिजनों को खोया?”“क्रिकेटर क्या कर रहे हैं? कहा जाता है कि वे राष्ट्रवादी होते हैं, लेकिन 1-2 को छोड़कर किसी ने भी पाकिस्तान के खिलाफ मैच का बहिष्कार करने की अपील नहीं की।”

उन्होंने आगे कहा कि बीसीसीआई खिलाड़ियों को बंदूक की नोक पर खेलने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। क्रिकेटरों को देश के लिए खड़ा होना चाहिए। उन्होंने प्रायोजकों और प्रसारकों पर भी सवाल उठाते हुए कहा –
“मैच से होने वाली कमाई पाकिस्तान के पास जाएगी और वह इसका इस्तेमाल आतंकवाद के लिए करेगा। लोग इस मैच का बहिष्कार करें, इसे न देखें और टीवी तक न चलाएँ।”

प्रियंका चतुर्वेदी का विरोध

शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी मैच का विरोध किया है। उन्होंने अमेरिका से जारी एक वीडियो में कहा कि उन्होंने बीसीसीआई अध्यक्ष को पत्र लिखकर मैच रद्द करने की मांग की थी।

चतुर्वेदी ने कहा:

“पहलगाम आतंकी हमले में 26 युवाओं की जान गई और 26 महिलाएं विधवा हो गईं। इसी के बाद ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया।”“हमने संकल्प लिया था कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाएगा, तब तक उससे बातचीत या व्यापार नहीं होगा। लेकिन अब क्रिकेट मैच की घोषणा कर दी गई है।”उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तानी क्रिकेटर सोशल मीडिया पर भारत और ऑपरेशन सिंदूर का अपमान करते पाए गए हैं और वे हमेशा अपने देश के आतंकवादियों के साथ खड़े रहते हैं।

भारत -पाकिस्तान मैच को लेकर एक तरफ जहाँ करोड़ों क्रिकेट प्रेमी उत्सुक हैं, वहीं शहीद परिवारों और राजनीतिक वर्ग का बड़ा हिस्सा इसके विरोध में खड़ा है। अब देखना होगा कि बीसीसीआई और सरकार इस बढ़ते विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं।

“एक दिवस में क्यों बंधे, हिन्दी का अभियानरचे बसे हर पल रहे, हिन्दी हिन्दुस्तान”

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हिंदी दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव न रह जाए, बल्कि यह हमारी चेतना और जीवन का स्थायी हिस्सा बने। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और आत्मगौरव की पहचान है। यदि हम अपने घर, शिक्षा, तकनीक और कार्यस्थल पर हिंदी को सहजता से अपनाएँ, तभी इसका वास्तविक विस्तार संभव होगा। अंग्रेज़ी सीखना बुरा नहीं है, लेकिन हिंदी का सम्मान करना और इसे रोज़मर्रा में जीवंत रखना कहीं अधिक आवश्यक है। हिंदी को हर पल जीना ही सच्चा हिंदी दिवस है।
हिंदी दिवस प्रतिवर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिन हमें यह सोचने का अवसर देता है कि हिंदी का स्थान आज हमारे समाज, शिक्षा, साहित्य और तकनीक में कहाँ है। लेकिन एक सवाल हमेशा उठता है—क्या किसी भाषा का सम्मान केवल एक दिन मनाने तक ही सीमित रह जाना चाहिए? भाषा तो जीवन की धारा है, वह हर दिन, हर पल हमारे साथ बहती है। इसीलिए यह दोहा हमें झकझोरता है कि हिंदी का अभियान किसी दिवस में क्यों बंधे? हिंदी को तो भारतवासियों की सांसों में रचा-बसा रहना चाहिए।

हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की पहचान और आत्मा है। यह भाषा हमें जोड़ती है, हमारी संस्कृति को अभिव्यक्त करती है और देश की विविधता में एकता का सूत्र बनाती है। अंग्रेज़ी, विज्ञान और तकनीक की भाषा हो सकती है, लेकिन हिंदी हमारे हृदय की भाषा है। इसे केवल भाषणों, आयोजनों और सरकारी औपचारिकताओं में सीमित कर देना इसके महत्व को छोटा करना है।

आज के दौर में यह और भी आवश्यक हो गया है कि हम हिंदी को एक दिवस तक सीमित न रखें। अंग्रेज़ी का प्रभुत्व इतना बढ़ गया है कि लोग यह मानने लगे हैं कि सफलता की गारंटी केवल अंग्रेज़ी सीखने से मिलती है। अभिभावक अपने बच्चों को अंग्रेज़ी माध्यम स्कूलों में भेजने को ही भविष्य की सुरक्षा मानते हैं। लेकिन यह एक गहरी भ्रांति है। दुनिया के जिन देशों ने प्रगति की है—जापान, कोरिया, चीन, जर्मनी—उन्होंने अपनी मातृभाषाओं को शिक्षा और विकास का आधार बनाया है। भारत ही एक ऐसा देश है जहां अपनी ही भाषा को हीन दृष्टि से देखा जाता है। यह मानसिकता बदलनी होगी।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (2020) ने इस सोच को सुधारने का प्रयास किया है। इसमें प्रावधान है कि कक्षा 5 तक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा या स्थानीय भाषा हो। इसका सीधा अर्थ है कि हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी के माध्यम से शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। इससे बच्चों की समझ और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। जब शिक्षा अपनी भाषा में होगी तो बच्चे बोझ महसूस नहीं करेंगे और पढ़ाई को आनंदपूर्वक आगे बढ़ाएंगे। इस नीति को सही मायनों में लागू करना हिंदी के अभियान को निरंतरता देगा।

हिंदी दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में अक्सर बड़े-बड़े नारे लगाए जाते हैं, भाषण दिए जाते हैं और हिंदी के गौरव का बखान होता है। लेकिन समस्या यह है कि यह सब अगले ही दिन ठंडा पड़ जाता है। हमें यह तय करना होगा कि हिंदी का उपयोग रोज़मर्रा की जिंदगी में कैसे बढ़ाया जाए। दफ्तरों में, अदालतों में, तकनीकी संस्थानों में, यहां तक कि सोशल मीडिया पर भी हिंदी का स्थान और सशक्त होना चाहिए। केवल मंच पर हिंदी का गुणगान करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उसे व्यवहारिक जीवन में उतारना होगा।

आज हिंदी इंटरनेट की दुनिया में तेजी से फैल रही है। आंकड़े बताते हैं कि हिंदी कंटेंट उपभोक्ताओं की संख्या अंग्रेज़ी से कहीं अधिक तेज़ी से बढ़ रही है। गूगल, फेसबुक, यूट्यूब जैसी कंपनियाँ हिंदी में विशेष रूप से सामग्री उपलब्ध करा रही हैं। इसका अर्थ है कि हिंदी की संभावनाएँ अपार हैं। हमें इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए और हिंदी को आधुनिकता से जोड़ना चाहिए। हिंदी में विज्ञान, तकनीक, प्रबंधन और कानून की शब्दावली विकसित कर इसे समकालीन जरूरतों के अनुरूप बनाना होगा।

हिंदी साहित्य का संसार भी बहुत विशाल और समृद्ध है। कबीर, तुलसी, सूर, प्रेमचंद, निराला, महादेवी वर्मा जैसे अनेकों रचनाकारों ने हिंदी को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। लेकिन आधुनिक पीढ़ी साहित्य से दूर होती जा रही है। उन्हें यह समझाना होगा कि हिंदी साहित्य में जीवन की गहराइयाँ, समाज की सच्चाइयाँ और मानवीय मूल्यों का अनमोल खजाना है। जब युवा पीढ़ी अपनी भाषा से जुड़ाव महसूस करेगी तभी हिंदी सचमुच हर पल जीने की भाषा बनेगी।

हिंदी का अभियान केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। यह हर नागरिक का दायित्व है। जब हम अपने घर में, अपने बच्चों से, अपने साथियों से हिंदी में बातचीत करेंगे, तब यह अभियान स्वतः मजबूत होगा। यदि हम स्वयं ही अंग्रेज़ी बोलने में गर्व और हिंदी बोलने में संकोच करेंगे तो यह भाषा कैसे फलेगी-फूलेगी? हमें अपनी मानसिकता बदलनी होगी और हिंदी को सम्मान देना होगा।

चुनौतियाँ निश्चित ही कम नहीं हैं। भारत में सैकड़ों भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं। हर भाषा का अपना महत्व है और उसे सम्मान मिलना चाहिए। हिंदी को थोपने का नहीं, बल्कि जोड़ने का कार्य करना चाहिए। हिंदी एक संपर्क भाषा के रूप में पूरे देश को जोड़ सकती है, क्योंकि यह सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। लेकिन यह तभी संभव है जब हिंदी का स्वरूप लचीला और समावेशी हो।

हिंदी के प्रचार-प्रसार में प्रौद्योगिकी का भी अहम योगदान हो सकता है। मोबाइल ऐप्स, ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफॉर्म, अनुवाद सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हिंदी के प्रसार में क्रांति ला सकते हैं। हिंदी में शोध पत्र, पत्रिकाएँ और अंतरराष्ट्रीय स्तर की किताबें प्रकाशित की जानी चाहिए। यदि हिंदी को ज्ञान और रोजगार से जोड़ा जाएगा तो इसका अभियान स्वतः जीवन का हिस्सा बन जाएगा।

आज की पीढ़ी को यह संदेश देना होगा कि हिंदी पिछड़ेपन की भाषा नहीं है, बल्कि यह उन्नति और आत्मनिर्भरता की भाषा है। हमें यह धारणा तोड़नी होगी कि सफलता केवल अंग्रेज़ी माध्यम से ही मिलती है। सफलता का आधार मेहनत, ज्ञान और आत्मविश्वास है, और यह अपनी मातृभाषा में भी उतनी ही दृढ़ता से हासिल किया जा सकता है।

इसलिए हिंदी दिवस को सिर्फ़ एक प्रतीक न मानें। इसे एक प्रेरणा के रूप में लें कि हिंदी हर दिन, हर पल हमारी पहचान का हिस्सा बनी रहे। हमें अपने बच्चों को यह सिखाना होगा कि हिंदी केवल घर की भाषा नहीं, बल्कि ज्ञान और प्रगति की भी भाषा है। हमें यह वातावरण बनाना होगा कि हिंदी में पढ़ना, लिखना और संवाद करना गर्व की बात हो।

जब हिंदी का अभियान किसी एक दिवस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज के हर क्षेत्र में रच-बस जाएगा, तभी यह भाषा सचमुच हिंदुस्तान की आत्मा बन पाएगी।

डॉ प्रियंका सौरभ

हिन्दी: नारे व स्वतंत्रता संग्राम

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के
प्रमुख वचन व नारों में हिंदी थी,
स्वतंत्रता संग्राम में हिंदी के नारों
की अत्यंत विशिष्ट भूमिका थी।

स्वतंत्रता के लिए हिन्दी नारों ने
भारत में ऐसी जान फूंक दी थी,
क्रान्तकारियों का नारा अंग्रेजों
के ताबूत में आखिरी कील थी।

जयहिन्द का नारा सुभाषचंद्र बोस,
इन्कलाब- जिंदाबाद-भगत सिंह,
दिल्ली चलो-सुभाषचंद्र बोस जी,
करो या मरो – महात्मा गांधी जी।

आराम हराम है-जवाहरलाल नेहरू,
पूर्ण स्वराज-जवाहर लाल नेहरू,
हिंदी, हिंदू, हिंदोस्तान-भारतेंदु का
वेदों की ओर लौटो-दयानंद सरस्वती।

अंग्रेजों भारत छोड़ो-महात्मा गांधी
वन्दे मातरम्-बंकिमचन्द्र चटर्जी,
आदित्य जन गण मन अधिनायक
जय हे का नारा रवींद्रनाथ टैगोर।

  • डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र
    ‘आदित्य’,

गोरखपुर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक ने रासायनिक शोध में रचा इतिहास, नया पेटेंट हासिल

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के शोधकर्ता डॉ. आनंद रत्नम ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने अपने अभिनव आविष्कार “एक मिश्रित प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष पाइरीडीन-क्रियाशील इमिडाज़ोलियम लवण (एनएचसी लिगैंड), और इसकी तैयारी की विधि” का पेटेंट प्राप्त किया है।
यह पेटेंट पूरी तरह विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला में डिज़ाइन और संश्लेषित किए गए एक नए लिगैंड को मान्यता देता है। पाइरीडीन-क्रियाशील संरचना वाला यह एन-हेटेरोसाइक्लिक कार्बीन (NHC) लिगैंड विशेष रूप से ऐसे उत्प्रेरक विकसित करने के लिए बनाया गया है, जो अधिक कुशल, स्थायी और टिकाऊ हों।
डॉ. रत्नम का यह नवाचार दवा निर्माण और कृषि-रसायन उद्योगों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। इस विधि से होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाएँ तेज़, अधिक चयनात्मक और कम अपव्ययकारी होंगी, जिससे नई दवाओं, उन्नत सामग्रियों और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण तकनीकों के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन, विभागाध्यक्ष प्रो. यू.एन. त्रिपाठी, प्रो. सुधा यादव समेत रसायन विज्ञान विभाग के प्राध्यापकों ने डॉ. रत्नम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता विश्वविद्यालय में विकसित हो रहे विश्वस्तरीय शोध वातावरण और नवाचार की भावना का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

मणिपुर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, दो साल बाद पूर्वोत्तर राज्य की पहली यात्रा

71,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन और शिलान्यास, आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों से करेंगे मुलाकात

इंफाल(राष्ट्र की परम्परा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को मणिपुर पहुँचे। मई 2023 में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से यह पूर्वोत्तर राज्य की उनकी पहली यात्रा है। यह दौरा पाँच राज्यों की तीन दिवसीय यात्रा का हिस्सा है, जिसके दौरान प्रधानमंत्री 71,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।

इंफाल हवाई अड्डे पर राज्यपाल अजय कुमार भल्ला और मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया। मोदी ने शनिवार सुबह मिज़ोरम के आइज़ोल से अपने इस दौरे की शुरुआत की, जहाँ उन्होंने ऐतिहासिक बैराबी-सैरांग रेल लाइन का उद्घाटन किया। इस रेल परियोजना से पहली बार मिज़ोरम भारतीय रेल नेटवर्क से जुड़ गया है।

चुराचांदपुर में रोड शो और बैठक

यात्रा कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले इंफाल से हेलीकॉप्टर द्वारा कुकी बहुल ज़िले चुराचांदपुर पहुँचने वाले थे। वहाँ 4-5 किलोमीटर लंबा रोड शो करके वे पीस ग्राउंड पहुँचते और मणिपुर में अपनी पहली बैठक की अध्यक्षता करते। हालाँकि, भारी बारिश के कारण कार्यक्रम में बदलाव हुआ और अब प्रधानमंत्री सड़क मार्ग से चुराचांदपुर की ओर रवाना हुए।

जातीय हिंसा के बाद पहली यात्रा

गौरतलब है कि मई 2023 में मणिपुर में भड़की जातीय हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 60,000 से ज्यादा लोग विस्थापित होकर राहत शिविरों में जीवन बिता रहे हैं। हालात को देखते हुए फरवरी 2025 से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है। प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के दौरान आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (आईडीपी) से भी संवाद करेंगे और शांति बहाली की अपील करेंगे।

इंफाल और चुराचांदपुर में अलग-अलग कार्यक्रम

प्रधानमंत्री का कार्यक्रम राज्य के दोनों प्रमुख समुदायों से संवाद साधने पर केंद्रित है। वे मैतेई बहुल राजधानी इंफाल और कुकी बहुल चुराचांदपुर दोनों जगह कार्यक्रमों में शामिल होंगे।

केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस दौरे के जरिए न केवल विकास योजनाओं का संदेश दिया जाएगा बल्कि शांति और विश्वास बहाली की प्रक्रिया को भी गति मिलेगी

प्रियंका गांधी और खड़गे ने मोदी के मणिपुर दौरे को बताया दिखावा, पीड़ितों के दर्द से किया पलायन

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मणिपुर यात्रा पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के दो साल बाद प्रधानमंत्री का दौरा करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। केरल के वायनाड में पत्रकारों से बात करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा, “मुझे खुशी है कि उन्होंने दो साल बाद यह फैसला किया कि यह दौरा उनके लिए फ़ायदेमंद होगा। लेकिन उन्हें बहुत पहले आना चाहिए था। इतने लोगों की मौत हो गई, हजारों लोग कठिनाइयों से गुज़रते रहे और उन्होंने उन्हें यूँ ही होने दिया।”

प्रियंका ने कहा कि आज़ादी के बाद से परंपरा रही है कि प्रधानमंत्री किसी भी दल के हों, जहाँ भी पीड़ा और दुख होता है, वहाँ तुरंत पहुँचते हैं। लेकिन मोदी ने इस परंपरा को तोड़ा और अब दो साल बाद मणिपुर जा रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मोदी के केवल तीन घंटे के मणिपुर दौरे को “एक दिखावा और पीड़ितों का घोर अपमान” बताया। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “मणिपुर में आपका तीन घंटे का पड़ाव करुणा नहीं है, यह केवल दिखावा और कायरतापूर्ण पलायन है। इंफाल और चुराचांदपुर में आपका रोड शो राहत शिविरों में लोगों की चीखें न सुनने के लिए बहाना भर है।”

खड़गे ने प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 864 दिनों से मणिपुर हिंसा जारी है, जिसमें करीब 300 लोगों की जान गई, 1,500 लोग घायल हुए और 67,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए। इसके बावजूद प्रधानमंत्री ने 46 विदेश यात्राएँ कीं लेकिन मणिपुर आने की ज़रूरत नहीं समझी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि मोदी की पिछली मणिपुर यात्रा जनवरी 2022 में चुनाव प्रचार के लिए हुई थी।

कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, प्रधानमंत्री का यह दौरा संवेदना से अधिक चुनावी रणनीति और दिखावटी राजनीति का हिस्सा है।

ग्वालियर में सनसनीखेज वारदात: दिनदहाड़े युवक ने लिव-इन पार्टनर की गोली मारकर हत्या, आरोपी गिरफ्तार

ग्वालियर(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) सबसे पॉश इलाके में शनिवार को दिनदहाड़े हुई वारदात ने पूरे शहर को दहला दिया। प्रतिष्ठित कैप्टन रूप सिंह स्टेडियम के सामने एक युवक ने अपनी लिव-इन पार्टनर को बीच सड़क पर रोककर ताबड़तोड़ गोलियाँ दाग दीं। गोली लगने से युवती गंभीर रूप से घायल हो गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

कैसे हुई वारदात? पुलिस के मुताबिक, आरोपी अरविंद परिहार (35) ने अपनी प्रेमिका नंदिनी परिहार को सड़क पर रोककर उसके चेहरे पर कई गोलियाँ चलाईं। हमले के बाद नंदिनी सड़क पर गिर पड़ी जबकि आरोपी उसके शव के पास पिस्तौल लेकर खड़ा रहा। इस दौरान स्तब्ध राहगीर दूरी बनाए रहे।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुँची। ग्वालियर एसएसपी धर्मवीर सिंह और एसपी धर्मवीर यादव ने बताया कि आरोपी के हाथ में लोडेड हथियार था, जिससे किसी भी नागरिक, पुलिसकर्मी या खुद को मारने का खतरा था। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और भीड़ के सहयोग से आरोपी को काबू में किया। हथियार जब्त कर लिया गया है और हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है।

रिश्ते में थी खटास

जानकारी के अनुसार, अरविंद और नंदिनी ने आर्य समाज मंदिर में विवाह किया था और सिररोल इलाके में साथ रहते थे। दोनों ने अभी अपने-अपने जीवनसाथी से तलाक नहीं लिया था। रिश्तों में बढ़ते विवाद के कारण वे अक्सर झगड़ते थे।

आरोपी पर पहले से दर्ज हैं मामले

पुलिस ने बताया कि आरोपी अरविंद परिहार के खिलाफ पहले से ही छह आपराधिक मामले दर्ज हैं। वारदात के बाद स्थानीय लोगों ने उसकी पिटाई भी की, जिसके बाद पुलिस उसे हिरासत में ले गई।

शहर में दहशत

दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने पूरे ग्वालियर को हिलाकर रख दिया है। पॉश इलाके और प्रतिष्ठित स्टेडियम के सामने हुई घटना ने कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

जर्जर वाहनों से बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़, कभी भी हो सकती है बड़ी घटना

प्राइवेट विद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था नदारद, अभिभावकों ने की डीएम से कार्रवाई की मांग

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)।जनपद के तमाम प्राइवेट विद्यालयों में बच्चों को लाने–ले जाने के लिए कबाड़ और जर्जर वाहनों का उपयोग किया जा रहा है। स्थिति इतनी भयावह है कि किसी भी दिन बड़ा हादसा होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
सदर ब्लाक क्षेत्र के रामपुर बुजुर्ग, परासखाड़, महुहवा ढाला और बागापार चौराहा स्थित विद्यालयों में दर्जनों जर्जर वाहन बच्चों को ढोने का काम कर रहे हैं। यही हाल मिठौरा ब्लाक के चौक बाजार, अरनहवां झनझनपुर चौराहा, सिंदुरिया, टीकर, खोस्टा, मोहनापुर और मदनपुरा क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है।
सिसवा ब्लाक के सेमरा, हेवती, चिऊटहा, कदुआगंज, सबेया ढाला और मथनिया क्षेत्रों में भी ऐसे ही कबाड़ वाहनों से बच्चों की ढुलाई जारी है। इन वाहनों की न तो फिटनेस जांची गई है और न ही चालकों के पास पर्याप्त अनुभव और मान्य लाइसेंस होने की पुष्टि है। लगातार हो रही इस लापरवाही से अभिभावकों में गहरी चिंता व्याप्त है। उनका कहना है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से कबाड़ वाहन बिना रोक-टोक संचालित हो रहे हैं और जिला प्रशासन इस गंभीर मामले पर चुप्पी साधे हुए है।
अभिभावकों ने जिलाधिकारी से तत्काल संज्ञान लेने और जिले के सभी विद्यालयों में संचालित वाहनों की फिटनेस जांच, चालकों के लाइसेंस व सुरक्षा मानकों की पड़ताल कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कभी भी मासूम बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है।

मिजोरम की राजधानी आइज़ोल पहली बार भारतीय रेल नेटवर्क से जुड़ी, पीएम मोदी ने बैराबी-सैरांग रेल लाइन का किया उद्घाटन

प्रतीकात्मक फोटो

आइजोल (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मिज़ोरम में 8,070 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली बैराबी-सैरांग नई रेल लाइन का उद्घाटन किया। यह रेल लाइन राज्य की राजधानी आइज़ोल को पहली बार भारतीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ेगी। इस चुनौतीपूर्ण परियोजना में 45 सुरंगें, 55 बड़े पुल और 88 छोटे पुल बनाए गए हैं।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने आइज़ोल से एक नई राजधानी एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाई। इसके साथ ही उन्होंने 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई अन्य विकास परियोजनाओं का भी उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें राजमार्ग, ऊर्जा, शिक्षा और खेल से जुड़ी परियोजनाएँ शामिल हैं।

ऊर्जा क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रधानमंत्री ने मुआलखांग में 30 टीएमटीपीए क्षमता वाले एलपीजी बॉटलिंग प्लांट की आधारशिला रखी, जिससे मिज़ोरम व पड़ोसी राज्यों में रसोई गैस की आपूर्ति बेहतर होगी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने राज्य के कई विद्यालयों का भी उद्घाटन किया।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार, मोदी का यह मिज़ोरम का प्रधानमंत्री बनने के बाद दूसरा दौरा है। इस अवसर पर आइज़ोल में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ये विकास परियोजनाएँ पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी, रोजगार और ‘जीवन सुगमता’ को नई ऊँचाइयों पर ले जाएँगी।

खराब मौसम की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी और कार्यक्रम स्थल में बदलाव की संभावना भी जताई गई थी। मोदी 13 से 15 सितंबर तक मिज़ोरम, मणिपुर, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार का दौरा करेंगे और इस दौरान 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास करेंगे।

बिहार की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल : एक करोड़ से अधिक ने किया आवेदन

सांकेतिक फोटो

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार सरकार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को महिलाओं से जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। सात सितंबर से शुरू हुई आवेदन प्रक्रिया में अब तक एक करोड़ से अधिक महिलाओं ने आवेदन किया है।

योजना का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत सरकार महिलाओं को अपना कारोबार शुरू करने के लिए आर्थिक मदद दे रही है।

योजना की खास बातें लाभार्थी महिलाओं को पहली किस्त के रूप में 10-10 हजार रुपये दिए जाएंगे।आगे चलकर दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता भी मिल सकती है।जीविका समूह से जुड़ना अनिवार्य है।

अब तक 90 लाख से ज्यादा आधार-लिंक्ड बैंक खाते तैयार हो चुके हैं।आवेदन ग्राम संगठन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से लिए जा रहे हैं।योजना में सास और बहू को अलग परिवार मानकर दोनों को आवेदन का अवसर दिया गया है।महिलाओं की पहली पसंद

आवेदन करने वाली महिलाओं ने सबसे ज्यादा रुचि पशुपालन (बकरी, मुर्गी, गाय पालन), किराना दुकान और चाय-पकौड़े की दुकान जैसे छोटे व्यवसायों में दिखाई है।इन कार्यों में कम पूंजी में व्यवसाय शुरू करने की सुविधा है।जल्दी आमदनी होने की संभावना रहती है।पशुपालन से महिलाएं घर पर ही काम कर सकती हैं।

किराना और चाय-पकौड़े की दुकान आसपास की जरूरतें पूरी कर आय का साधन बन सकती हैं। महिलाओं के लिए बड़ा अवसरविशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से ग्रामीण और शहरी महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे परिवार की जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकेंगी। केवल छह दिनों में मिले इतने बड़े पैमाने पर आवेदनों से यह स्पष्ट है कि महिलाओं में आत्मनिर्भर बनने की ललक और उत्साह लगातार बढ़ रहा है।

बाइकर्स गैंग का आतंक: महिला पुलिसकर्मी और अस्पतालकर्मी बनी शिकार, चेन लूटकर फरार

सांकेतिक फोटो

धनबाद (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) में बाइकर्स गैंग का उत्पात लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को शहर में दिनदहाड़े चेन स्नैचिंग की दो घटनाओं ने पुलिस-प्रशासन की नींद उड़ा दी। हैरानी की बात यह है कि अपराधियों ने अब महिला पुलिसकर्मी तक को निशाना बना डाला।

पहली घटना धैया लाहबनी इलाके में घटी, जहां अस्पताल में कार्यरत महिला कर्मी लीला देवी से बाइक सवार बदमाशों ने सोने की चेन झपट ली। घटना उस वक्त हुई जब वह ड्यूटी खत्म कर घर लौट रही थीं। शोर मचाने के बावजूद आरोपी तेज रफ्तार से फरार हो गए।

दूसरी वारदात में वायरलेस ऑफिस में तैनात महिला कांस्टेबल प्रीति कुमार अपराधियों का शिकार बनीं। शाम को धीरेंद्रपुरम कॉलोनी में टहल रही थीं, तभी दो बदमाश बाइक पर आए और उनके गले से चेन झपट ली। प्रीति ने बताया कि बाइक चालक नीली और पीछे बैठा युवक काली शर्ट पहने हुए था।

दोनों पीड़िताओं ने धनबाद थाना में शिकायत दर्ज करायी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगालकर अपराधियों की पहचान में जुटी है।

पुलिस की बड़ी कामयाबी: 24 घंटे में अपहृत दो मासूमों को सकुशल छुड़ाया, 19 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आलमबाग थाना क्षेत्र से अपहृत 10 और 12 वर्षीय दो बच्चों को पुलिस ने मात्र 24 घंटे के भीतर सकुशल बरामद कर लिया। इस घटना में शामिल 19 वर्षीय आरोपी विजय शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस के अनुसार, दोनों बच्चे बृहस्पतिवार रात घर नहीं लौटे तो परिजनों ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। शुक्रवार सुबह परिवार को एक टेक्स्ट मैसेज मिला, जिसमें प्रत्येक बच्चे के बदले 10-10 लाख रुपये फिरौती की मांग की गई थी।

थाना प्रभारी (एसएचओ) सुभाष चंद्र सरोज ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज में एक युवक बच्चों को साइकिल से ले जाता दिखा। जांच में उसकी पहचान विजय शर्मा (निवासी सीतापुर, फिलहाल पटेल नगर, लखनऊ) के रूप में हुई। उसका ठिकाना लखीमपुर खीरी जिले के गोला गोकर्णनाथ में मिला।

पुलिस की विशेष टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बच्चों को सुरक्षित छुड़ा लिया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। एसएचओ ने बताया कि दोनों बच्चे पूरी तरह सुरक्षित हैं और परिजनों के सुपुर्द कर दिए गए हैं। इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

गणेश विसर्जन यात्रा पर टूटा कहर: ट्रक की टक्कर से 8 श्रद्धालुओं की मौत, 20 से अधिक घायल

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हासन (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। कर्नाटक के हासन जिले के मोसाले होसाहल्ली गांव में गणेश विसर्जन यात्रा के दौरान शुक्रवार रात एक भीषण हादसा हो गया। श्रद्धालुओं से भरी यात्रा में अचानक एक ट्रक घुस आया, जिससे कम से कम 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा रात लगभग 8 बजकर 45 मिनट पर गणेश चतुर्थी के अंतिम दिन हुआ।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मृतकों में ज्यादातर युवा लड़के शामिल हैं। गंभीर रूप से घायल आठ से अधिक लोगों का हासन के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ट्रक अरकलागुडु से आ रहा था और चालक भुवसनेश वाहन से नियंत्रण खो बैठा, जिससे श्रद्धालु उसकी चपेट में आ गए। हादसे के बाद चालक ने भागने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने उसे पकड़कर पिटाई की और पुलिस के हवाले कर दिया। बताया जा रहा है कि ट्रक एक लॉजिस्टिक्स कंपनी का है।

सरकार का मुआवजा व सहायता
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने हादसे पर गहरा शोक जताते हुए मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि सरकार घायलों के इलाज का पूरा खर्च वहन करेगी। सीएम ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि “मैं दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”

नेताओं ने जताया शोक
केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने भी हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि “हासन तालुका में गणपति विसर्जन यात्रा के दौरान हुए इस भीषण हादसे की खबर से मैं बेहद दुखी हूं।”

गांव और आसपास के इलाके में इस दर्दनाक घटना के बाद शोक की लहर है। प्रशासन ने स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखी है।

“हिंदी में बसी है भारत की परंपरा और आत्मा”

प्राचीन भारत में साहित्य कला एवं संस्कृति में हिंदी का अभिन्न योगदान है व भारतीय समाज की आत्मा है- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं

गोंदिया- वैश्विक स्तरपर भारत एक ऐसा देश है जो अपनी विविधताओं में एकता के लिए जाना जाता है।यहां सैकड़ों भाषाएं और बोलियां बोली जाती हैं, जिनमें से हिंदी देश की सबसे ज्यादा बोली और समझी जाने वाली भाषा है। यह दिन केवल एक भाषा के सम्मान का दिन नहीं है, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और पहचान की आत्मा का उत्सव है। हिंदी न केवल भारत में करोड़ों लोगों की मातृभाषा है, बल्कि यह विश्व के उन प्रमुख भाषाई ध्वजों में से एक है, जिसने अपनी जड़ों को मजबूत बनाए रखा,वैश्विक स्तरपर भी विस्तार पाया है।हर साल 14 सितंबर का दिन पूरे देश में हिंदी दिवस के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि वैश्विक स्तरपर इंग्लिश मंदारिन के बाद,हिंदी विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोलने वाली भाषा है।10 जनवरी 2025 को जहां विश्व में हिंदी दिवस मनाया जाता है, वही 14 सितंबर को भारत में हिंदी दिवस के रूप में भी मनाया जा रहा है, क्योंकि हिंदी को 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में राजभाषा बनाने का फैसला किया था।वैश्विक स्तरपर हिंदी को लेकर पहला आयोजन 10 जनवरी 1974 को महाराष्ट्र के नागपुर में किया गया था, इस सम्मेलन में 30 देशों के 122 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। साल 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन का उद्घाटन किया था। साल 2006 में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। हिंदी हमारी एक राजभाषा है और उत्तर भारत के कई राज्यों में प्रमुख रूप से बोली जाती है। हिंदी भारत के अलावा भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका में भी बोली जाती है,इसके अलावा दुनियाँ के कई देशों में यह भाषा लोकप्रिय है और मॉरीशस जैसे देशों में भी बोली जाती है। हिंदी को जन-जन की भाषा के रूप में भी जाना जाता है औए इस भाषा को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए हिंदी दिवस के अवसर पर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।हर साल दो बार हिंदी दिवस मनाया जाता है।जनगणना 2011 के अनुसार, भारत की लगभग 44 पर्सेंट आबादी हिन्दी को अपनी मातृभाषा के रूप में बोलती है। हिन्दी भाषा का प्रभाव सबसे ज़्यादा उत्तर भारत में देखने को मिलता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली को अक्सर ‘हिन्दी बेल्ट’ कहा जाता है।इसी पृष्ठभूमि में 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मनाना न सिर्फ भाषा के गौरव को बढ़ाता है, बल्कि हमें यह भी याद दिलाता है कि अपनी मातृभाषा कोअपनाना और आगे बढ़ाना कितना ज़रूरी है।साहित्य की बात करें तो हिन्दी साहित्य का एक महत्वपूर्ण दौर छायावादी युग कहलाता है, जिसके चार स्तंभ माने जाते हैं- जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा।वहीं, हिन्दी के ‘राष्ट्रकवि’ रामधारी सिंह दिनकर को माना जाता है।हिन्दी हमारी पहचान और संस्कृति का अहम हिस्सा है, इसलिए इस दिन लोग अलग-अलग तरीकों से अपनी मातृभाषा का सम्मान करते हैं। चूँकि हिंदी केवल एक भाषा ही नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति परंपरा व जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा है, इसलिए मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से, इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे,राष्ट्रीय हिंदी दिवस 14 सितंबर 2025, हिंदी भाषा सभी समुदायों धर्मो संस्कृतियों को एक सूत्र में बांधने का कार्य करती है।
साथियों बात अगर हम हिंदी भाषा को गहराई से जानने की करें तो, (1) राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी ने हिन्‍दी को जनमानस की भाषा कहा था। वह चाहते थे कि हिन्दी राष्ट्रभाषा बने। उन्‍होंने 1918 में आयोजित हिन्‍दी साहित्‍य सम्‍मेलन में हिन्‍दी को राष्‍ट्र भाषा बनाने के लिए कहा था। आजादी मिलने के बाद लंबे विचार-विमर्श के बादआखिरकार 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में हिन्‍दी को राज भाषा बनाने का फैसला लिया गया। हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाए जाने के विचार से बहुत से लोग खुश नहीं थे। कइयों का कहना था कि सबको हिंदी ही बोलनी है तो आजादी के क्या, मायने रह जाएंगे, ऐसे में मत बंटने से हिंदी नहीं बन पाई देश की राष्ट्रभाषा। (2) इंग्लिश और मंदारिन के बाद हिंदी विश्व की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है।(3) विश्व हिंदी दिवस और हिंदी दिवस में अंतर है, भारत में हिंदी दिवस 14 सितंबर को होता है। वहीं हर साल विश्व हिंदी दिवस 10 जनवरी को मनाया जाता है। दोनों दिनों का मकसद हिन्दी को प्रोत्साहित करना है। विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य वैश्विक स्तरपर इसे बढ़ावा देना है।14 सितंबर के दिन 1949 में संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा बनाने का फैसला किया था। इस दिन की याद में राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता है। जबकि विश्व हिंदी दिवस का मकसद विश्व में हिंदी को बढ़ावा देना है। 10 जनवरी, 2006 को भारत सरकार ने इसे विश्व हिन्दी दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी। पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन 10 जनवरी, 1975 को नागपुर में किया गया था। अभी तक पोर्ट लुईस, स्पेन, लंदन, न्यूयॉर्क, जोहानसबर्ग आदि सहित भारत में विश्व हिन्दी सम्मेलनों का आयोजन किया जा चुका है। (4) दुनियाँ की सबसे प्रसिद्ध ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी (शब्दकोश) हर साल भारतीय शब्दों को जगह दे रही है।ऑक्सफोर्ड ने आत्मनिर्भरता, चड्डी, बापू, सूर्य नमस्कार, आधार, नारी शक्ति और अच्छा शब्द को भी अपने प्रतिष्ठित शब्दकोश में जगह दी है। ‘अरे यार!’,भेलपूरी, चूड़ीदार, ढाबा, बदमाश, चुप, फंडा, चाचा, चौधरी, चमचा, दादागीरी, जुगाड़, पायजामा, कीमा, पापड़, करी, चटनी, अवतार, चीता, गुरु, जिमखाना, मंत्र, महाराजा, मुग़ल, निर्वाण, पंडित, ठग, बरामदा जैसे शब्द भी इसमें शामिल हैं। (5) दक्षिण प्रशांत महासागर क्षेत्र में फिजी नाम का एक द्वीप देश है जहां हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया है। (6) भारत के अलावा मॉरीशस,फिलीपींस, नेपाल, फिजी, गुयाना, सुरिनाम, त्रिनिदाद, तिब्बत औरपाकिस्तान में कुछ परिवर्तनों के साथ ही सही लेकिन हिंदी बोली और समझी जाती है। (7) हिंदी में उच्चतर शोध के लिए भारत सरकार ने 1963 में केंद्रीय हिंदी संस्थान की स्थापना की। देश भर में इसके आठ केंद्र हैं। (8) अभी विश्‍व के सैंकड़ों विश्‍वविद्यालयों में हिन्‍दी पढ़ाई जाती है और पूरी दुनिया में करोड़ों लोग हिन्‍दी बोलते हैं। अमेरिका में लगभग एक सौ पचास से ज्यादा शैक्षणिक संस्थानों में हिंदी का पठन-पाठन हो रहा है। (9) भारत,फिजी के अलावामॉरीशस, फिलीपींस, अमेरिका, न्यूजीलैंड, यूगांडा, सिंगापुर, नेपाल, गुयाना, सुरिनाम, त्रिनिदाद, तिब्बत, दक्षिण अफ्रीका, सूरीनाम यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी और पाकिस्तान में कुछ परिवर्तनों के साथ ही सही लेकिन हिंदी बोली और समझी जाती है। (10) हिंदी का नाम फारसी शब्द ‘हिंद’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है सिंधु नदी की भूमि। फारसी बोलने वाले तुर्क जिन्होंने गंगा के मैदान और पंजाब पर आक्रमण किया,11वीं शताब्दी कीशुरुआत में सिंधु नदी के किनारे बोली जाने वाली भाषा को ‘हिंदी’ नाम दिया था। यह भाषा भारत की आधिकारिक भाषा है और संयुक्त अरब अमीरात में एक मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक भाषा है।
साथियों बात अगर हम हिंदी भाषा को एक भाषा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति परंपरा वह जीवन शैली के लिए अभिन्न हिस्सा होने की करें तो, हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा है। यह हमारी पहचान है, और हम सभी हिंदी बोलकर अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखते हैं। हिंदी भाषा का इतिहास बहुत पुराना है और यह हमारे साहित्य, कला, और फिल्म उद्योग का अभिन्न हिस्सा है। हिंदी फिल्मों के माध्यम से यह भाषा न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में लोकप्रिय हुई है। बॉलीवुड ने हिंदी को वैश्विक स्तर पर एक पहचान दिलाई है।दुनिया भर में हिंदी बोलने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। भारत में लगभग 44 प्रतिशत लोग हिंदी बोलते हैं और यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसके अलावा, नेपाल पाकिस्तान, बांगलादेश, श्रीलंका जैसे देशों में भी हिंदी बोली जातीहै।आजकल हिंदी का प्रभाव वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा है, और विभिन्न देशों में हिंदी सीखने वाले छात्रों की संख्या में वृद्धि हो रही है। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हिंदी भाषा अब न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी लोगों के बीच संवाद का माध्यम बन गई है। हिंदी भाषा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सभी समुदायों, धर्मों और संस्कृतियों को एक सूत्र में बांधने का कार्य करती है। भारत में विविधता के बावजूद हिंदी ने हमेशा एकता का प्रतीक माना है। यह भाषा हमारे राष्ट्र की एकता और अखंडता को मजबूत करती है। हिंदी में संवाद करने से हम अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को आसानी से व्यक्त कर सकते हैं।विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य हिंदी को एक वैश्विक भाषा के रूप में स्थापित करना है। इस दिन हम यह संकल्प लेते हैं कि हम अपनी भाषा को बढ़ावा देंगे और इसे पूरे विश्व में फैलाने का कार्य करेंगे। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हिंदी को न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी सम्मान मिले।
अतः अगर हम उपलब्ध पर्यावरण का अध्ययन करें इसका विशेषण करें तो हम पाएंगे कि, राष्ट्रीय हिंदी दिवस 14 सितंबर 2025-हिंदी है हम वतन है हिन्दोस्तां हमाराहिंदी भाषा सभी समुदायों धर्मों संस्कृतियों को एक सूत्र में बांधने का कार्य करती है।हिंदी केवल एक भाषा ही नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति परंपरा में जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा है।प्राचीन भारत में साहित्य कला व संस्कृति में हिंदी का अभिन्न योगदान है व भारतीय समाज की आत्मा है।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र