Monday, July 13, 2026
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“H-1B बदलाव का असर: भारत के टैलेंट पर चोट या वैश्विक अवसर का द्वार?”

अब तक भारत से “ब्रेन ड्रेन”होता रहा है, टैलेंटेड युवा विदेश जाकर अपनी क्षमताएं वहीं इस्तेमाल करते थे।अब नया परिदृश्य ब्रेन गेन बन सकता है- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और आर्थिक नीतियों की दुनियाँ में अमेरिका हमेशा से अपनी इमिग्रेशन पॉलिसीज़ के ज़रिए विश्वभर के टैलेंट को आकर्षित करता रहा है। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से अमेरिकी वीज़ा और माइग्रेशन नीतियों में एक के बाद एक सख्ती देखने को मिली है। कभी टैरिफ के नाम पर व्यापारिक प्रतिबंध, तो कभी टेक सेक्टर के लिए वीज़ा नियमों में कट्टर बदलाव,ये सब कदम स्पष्ट करते हैं कि “अमेरिकी फर्स्ट” पॉलिसी सिर्फ नारा नहीं, बल्कि ट्रंप प्रशासन का आधारभूत एजेंडा है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र ऐसा मानता हूं कि इसी कड़ी में ट्रंप सरकार ने टैरिफ के बाद, भारतीयों पर एक और स्ट्राइक की है,उन्होंने एच-1बी वीजा पर एक लाख डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) की फीस थोप दी है,ये चोट कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि 70 फीसदी एच-1बी वीजा भारतीयों को मिलते हैं,अब सवाल ये है कि क्या इतनी मोटी रकम खर्च करके कंपनियां भारतीयों को अमेरिका में नौकरी पर रखेंगी?इसकी तगड़ी मार भारतीयों के अलावा अमेरिकी टेक सेक्टर पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है खासकर भारतीय प्रोफेशनल्स और टेक कंपनियों की नींद उड़ा दी है।इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे,ट्रंप का नया एच-1बी वीजा वार-भारतीय प्रोफेशनल्स पर गहरी चोट या भारत के लिए ब्रेन गेन का अवसर?

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साथियों बात अगर हम एच-1बी वीजा पर ट्रंप की नई स्ट्राइक और उसका नोटिफिकेशन को समझने की करें तो एच-1बी वीज़ा वह रास्ता है जिसके माध्यम से भारतीय और अन्य देशों के उच्च कौशल वाले प्रोफेशनल्स अमेरिका की कंपनियों में काम कर सकते हैं। सिलिकॉन वैली से लेकर न्यूयॉर्क के फाइनेंशियल सेक्टर तक, भारतीय इंजीनियर,आईटी प्रोफेशनल्स और मैनेजमेंट एक्सपर्ट्स की बड़ी मौजूदगी इन्हीं वीज़ा के जरिए संभव हुई है।ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में एक नोटिफिकेशन जारी किया है जिसके अनुसार एच-1बी वीज़ा पर हर साल $100,000 की फीस देनी होगी। यह फीस केवल पहली बार वीज़ा आवेदन करने वालों पर ही नहीं, बल्कि उन लोगों पर भी लागू होगी जो पहले से अमेरिका में हैं और वीज़ा रिन्यू करना चाहते हैं। इस निर्णय को न केवल अप्रवासी समुदाय बल्कि अमेरिकी कॉर्पोरेट जगत भी “अत्यधिक बोझ” मान रहा है।हर साल की फीस: पुराने और नए आवेदकों पर समान बोझ- अब तक वीज़ा शुल्क केवल आवेदन और प्रोसेसिंग के समय एकमुश्त लिया जाता था। लेकिन अब इस नए नियम के तहत फीस हर साल देनी होगी।जो भारतीय प्रोफेशनल्स पहले से अमेरिका में काम कर रहे हैं, उन्हें भी वीज़ा रिन्यूअल के दौरान यह राशि चुकानी होगी।इसका मतलब यह है कि यदि किसी का वीज़ा 3 साल का है और वह दो बार रिन्यू करवाता है, तो कुल मिलाकर करीब $300,000 (2.64 करोड़ रुपये से अधिक) का बोझ कंपनियों या कर्मचारियों पर पड़ेगा।इससे कंपनियों पर वित्तीय दबाव और बढ़ेगा और वे सोच-समझकर ही भारतीय या अन्य विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने का निर्णय लेंगी।ग्रीन कार्ड का सपना और दूर होता भविष्य-भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका का सपना केवल एच-1बी वीज़ा तक सीमित नहीं है। इसका अंतिम लक्ष्य है-ग्रीन कार्ड और नागरिकता।लेकिन इस भारी- भरकम फीस ने उस सपने को और कठिन बना दिया है।कंपनियां अब इतनी बड़ी राशि खर्च करने से पहले कई बार सोचेंगी कि क्या किसी कर्मचारी के लिए ग्रीन कार्ड स्पॉन्सर करना उनके लिए लाभकारी है।पहले ही ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा सूची भारतीयों के लिए दशकों लंबी हो चुकी है, ऐसे में अतिरिक्त वित्तीय बोझ कंपनियों को पीछे हटने पर मजबूर कर सकता है।भारतीयों का अमेरिका में स्थायी बसने का सपना अब पहले से भी ज्यादाकठोर कठिन और अनिश्चित हो गया है।

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साथियों बात अगर हम 70 पेर्सेंट भारतीयों पर सीधा असर व पूरी तरह कर्मचारी की ब्रेन “वैल्यू” पर निर्भर होने को समझने की करें तो, एच-1बी वीज़ा की हकीकत यह है कि इसमें सबसे बड़ाहिस्सा भारतीयों का है।हर साल जारी होने वाले एच-1बी वीज़ा में लगभग 70 पेर्सेंट भारतीयों को ही मिलता है।इसका मतलब है कि इस नीति का सीधा और सबसे ज्यादा असर भारतीयों पर पड़ेगा।लाखों भारतीय युवा जो अमेरिका जाकर करियर बनाने का सपना देखते हैं, उनकी राह में अब बड़ी बाधा आ खड़ी हुई है।साथ ही, भारतीय आईटी कंपनियां जैसे इंफोसिस, टीसीएस,विप्रो आदि भी इससे प्रभावित होंगी, क्योंकि उनके हजारों कर्मचारी हर साल अमेरिका में सेवाएं देते हैं।यह बदलाव भारत-अमेरिका संबंधों में भी तनाव पैदा कर सकता है, क्योंकि यह स्पष्ट रूप से भारतीय प्रोफेशनल्स को निशाना बनाता दिख रहा है।कर्मचारी की ब्रेन “वैल्यू” और कंपनी की गणना- ट्रंप की नई नीति का एक और पहलू यह है कि यह अब पूरी तरह कर्मचारी की ब्रेन”वैल्यू”पर निर्भर करेगा।यदि किसी कंपनी को लगता है कि कोई भारतीय प्रोफेशनल इतना कुशल है कि उसका काम कोई अमेरिकी कर्मचारी नहीं कर सकता, तभी कंपनी यह भारी-भरकम फीस देने को तैयार होगी।इसका नतीजा यह होगा कि केवल “टॉप टैलेंट” को ही अब अमेरिका में अवसर मिलेगा।मिड-लेवल या सामान्य कौशल वाले भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका का दरवाजा लगभग बंद हो जाएगा।इससे अमेरिका में कार्य संस्कृति और भर्ती प्रक्रिया में गहरा बदलाव आएगा।

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साथियों बात अगर हम भारत के लिए ब्रेन गेन का सुनहरा अवसर होनें की करें तो,अब तक भारत से “ब्रेन ड्रेन” होता रहा है,टैलेंटेड युवा विदेश जाकर अपनी क्षमताएं वहीं इस्तेमाल करते थे।अब नया परिदृश्य ब्रेन गेन बन सकता है,आईआईटीप्रोफेशनल्स और भारत की टेक्नोलॉजी हब बनने की राह मिल सकती है,इस फैसले का सबसे ज्यादा असर आईआईटी, आईआईएम और अन्य शीर्ष संस्थानों से निकलने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स पर होगा।अब तक इन संस्थानों के कई टॉप टैलेंट अमेरिका में काम करने चले जाते थे।लेकिन जब फीस इतनी भारी होगी, तो कंपनियां ऐसे टैलेंट को रखने से पहले कई बार सोचेंगी।इसका नतीजा यह होगा कि धीरे-धीरे भारतीय टैलेंट की “वापसी” तेज होगी और भारत में ही हाई-टेक रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन को बल मिलेगा। भारत पहले से ही बैंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम जैसे शहरों में आईटी और स्टार्टअप हब के रूप में उभर चुका है। ट्रंप का यह कदम इस प्रक्रिया को और तेज कर सकता है।अमेरिका से लौटने वाले उच्च कुशल भारतीय अब भारत की कंपनियों, विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप्स में नई ऊर्जा और विशेषज्ञता लेकर आएंगे।इससे भारतीय टेक इंडस्ट्री और स्टार्टअपइकोसिस्टम को एक नई उड़ान मिलेगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग,साइबर सिक्योरिटी और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में भारत अगले दशक में विश्व नेता बन सकता है।
साथियों बात अगर हम अदालत में चुनौती और कंपनियों की नई रणनीति को समझने की करें तो, ट्रंप के इस फैसले को अदालत में चुनौती देने की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। अमेरिकी कंपनियां और अप्रवासी अधिकार संगठन इसे भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक मानते हैं।यदि अदालत इस फैसले को रोक देती है तो भारतीयों को राहत मिलेगी।लेकिन अगर कोर्ट भी इस नियम को बरकरार रखता है, तो कंपनियों को नई रणनीति अपनानी होगी।वे अब भारत में ही ऑफशोर डेवलपमेंट सेंटर स्थापित कर सकती हैं और वर्क-फ्रॉम-इंडिया मॉडल पर काम कर सकती हैं।इससे भारतीय आईटी उद्योग में निवेश और रोजगार बढ़ सकता है।

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अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि ट्रंप का यह कदम भारतीयों पर सीधा वार है। यह न केवल व्यक्तिगत सपनों को तोड़ता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कारोबारी समीकरणों को भी प्रभावित करता है।जहां एक तरफ लाखों भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए यह दुखद और निराशाजनक है, वहीं दूसरी ओर भारत के लिए यह “ब्रेन गेन” का मौका भी है। अब सवाल यह है कि भारत इस मौके को कितनी दूरदर्शिता से भुना पाता है। यदि भारत अपनी नीतियों को मज़बूत करे, स्टार्टअप इकोसिस्टम को और सहारा दे तथा रिसर्च और इनोवेशन में निवेश बढ़ाए, तो यह ट्रंप का झटका भारतीयों के लिए नई उड़ान का अवसर भी साबित हो सकता है।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

निर्माणाधीन मकान की छत गिरने से दो सगे भाइयों समेत तीन मजदूरों की मौत, चार घायल

सुलतानपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जिले के लम्भुआ थाना क्षेत्र के धरियामऊ गाँव में सोमवार रात एक दर्दनाक हादसे में तीन मजदूरों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों में दो सगे भाई भी शामिल हैं।

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जानकारी के अनुसार, धरियामऊ निवासी राम तीर्थ धुरिया के मकान का निर्माण कार्य चल रहा था। सोमवार रात करीब आठ बजे निर्माणाधीन मकान की छत अचानक भरभराकर गिर पड़ी। इस हादसे में अर्जुनपुर निवासी आनंद (23) और उसका भाई विक्रम (20) समेत हिमांशु (22) की मलबे में दबकर मौत हो गई।

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घटना की सूचना पर जिलाधिकारी कुमार हर्ष और पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लिया। हादसे के बाद अयोध्या से एसडीआरएफ टीम को बुलाया गया, जिसने रातभर मशक्कत कर मलबे में दबे मजदूरों को बाहर निकाला।

पुलिस के अनुसार, छत पर मौजूद मजदूर सुभाष (36), अफसर अली (40) और रवि सरोज (26) गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल सीएचसी लम्भुआ पहुंचाया गया, जहाँ हालत गंभीर होने पर रवि को राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। वहीं, एक अन्य मजदूर अरुण चौहान (25) को कड़ी मशक्कत के बाद देर रात करीब 10:30 बजे मलबे से जिंदा बाहर निकाला गया।

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करीब साढ़े 12 बजे रात को एसडीआरएफ टीम ने तीनों मृत मजदूरों के शव बरामद किए। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

सीतापुर जेल से आज़म खान की रिहाई आज, भारी सुरक्षा के बीच समर्थकों की भीड़

सीतापुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आज़म खान लगभग 23 महीने जेल में रहने के बाद मंगलवार को सीतापुर जेल से रिहा होंगे। उनकी रिहाई में कुछ घंटे की देरी हो गई क्योंकि वे दो मामलों में 8,000 रुपये का जुर्माना भरना भूल गए थे। अदालत में जुर्माना अदा करने और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उन्हें जेल से बाहर किया जाएगा।

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आजम खान की रिहाई से पहले ही सीतापुर प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनज़र सख्ती बढ़ा दी है। पूरे शहर में धारा 144 लागू कर दी गई है। पुलिस ने लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को जेल परिसर के आसपास जमा न होने की चेतावनी दी है। बावजूद इसके बड़ी संख्या में समर्थक अपने वाहनों के साथ जेल के बाहर पहुंच गए, जिससे यातायात बाधित हुआ। ट्रैफिक पुलिस ने कई वाहनों के चालान काटे।

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नगर क्षेत्र के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) विनायक भोसले ने बताया कि बीएनएसएस की धारा 163 लागू होने के बावजूद अफरा-तफरी और भीड़भाड़ की स्थिति बनी रही। जेल परिसर के पास वाहनों की आवाजाही पर रोक थी, लेकिन समर्थकों की भीड़ वहां पहुंचने में कामयाब रही, जिसके चलते कार्रवाई करनी पड़ी।

आजम खान के बड़े बेटे अदीब खान सुबह से ही समर्थकों के साथ जेल के बाहर मौजूद रहे। उन्होंने कहा, “आजम खान आज के नायक हैं। मैं अपने पिता के स्वागत के लिए आया हूं। बाकी बातें वे खुद जेल से बाहर आने के बाद करेंगे।”

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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व विधायक अनूप गुप्ता, जिला अध्यक्ष छत्रपति यादव समेत कई नेता भी जेल के बाहर मौजूद दिखे। लगभग दो साल की कैद और कई मामलों का सामना करने के बाद आजम खान के जमानत पर जेल से बाहर आने का यह दिन सपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए जश्न जैसा बन गया है।

आरजेडी विधायक प्रहलाद यादव के बेटे विनय कुमार का निधन, परिवार व समर्थकों में शोक की लहर

लखीसराय (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सूर्यगढ़ा से आरजेडी विधायक प्रहलाद यादव के बेटे विनय कुमार का सोमवार की देर रात पटना के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वे लंबे समय से अस्वस्थ थे और गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती थे। तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उनकी जान नहीं बचा सके।

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बेटे की मौत की खबर मिलते ही विधायक प्रहलाद यादव की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों की देखरेख में उनकी स्थिति अभी स्थिर बताई जा रही है।

करीब डेढ़ साल पहले ही विनय कुमार की शादी हुई थी। उनकी एक छोटी बेटी है। विनय कुमार का स्वभाव मिलनसार था और वे समाज में सभी से सहजता से घुल-मिल जाते थे। लोगों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहने के कारण वे स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय भी रहे। उनके निधन को परिवार और समर्थकों ने अपूरणीय क्षति बताया है।

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गौरतलब है कि सूर्यगढ़ा विधानसभा सीट बिहार की चर्चित सीटों में गिनी जाती है। इस सीट से प्रहलाद यादव एक बार निर्दलीय और चार बार आरजेडी के टिकट पर विधायक रह चुके हैं। फिलहाल वे एनडीए का हिस्सा हैं, जिससे आगामी 2025 विधानसभा चुनाव में यह सीट दोनों गठबंधनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है। लेकिन चुनावी हलचल के बीच इस बड़े हादसे ने राजनीतिक माहौल को भी गमगीन कर दिया है।

बिहार चुनाव से पहले महागठबंधन में बढ़ी खींचतान, पप्पू यादव के बयान से गहराया विवाद

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, महागठबंधन के भीतर मतभेद और अधिक स्पष्ट होते जा रहे हैं। एक ओर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) लगातार नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने पर जोर दे रही है, वहीं कांग्रेस इस मुद्दे पर अब तक चुप्पी साधे हुए है। इसी बीच जन अधिकार पार्टी (JAP) के प्रमुख और सांसद पप्पू यादव का ताजा बयान विपक्षी गठबंधन में खींचतान को और गहरा करता दिख रहा है।

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मोतिहारी में मीडिया से बातचीत के दौरान पप्पू यादव ने साफ कहा कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का चेहरा तय करना लोकतांत्रिक परंपरा के खिलाफ है। उनके अनुसार, “लोकतांत्रिक परंपरा यही कहती है कि चुनाव के बाद विधायक दल ही मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री का चयन करता है।” उनका यह रुख सीधे तौर पर राजद की मांग के विपरीत है, जो तेजस्वी यादव को पहले से सीएम उम्मीदवार घोषित करने पर जोर दे रही है।

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इसके साथ ही पप्पू यादव ने कांग्रेस की सीटों की हिस्सेदारी और टिकट बंटवारे पर भी अपना पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के सम्मान से कोई समझौता नहीं होगा। टिकट उन्हीं नेताओं को दिया जाएगा जिनकी विचारधारा मजबूत हो और जिनकी पकड़ जमीनी स्तर पर साबित हो चुकी हो।

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राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पप्पू यादव का यह बयान महागठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन और तालमेल की मुश्किलों को उजागर करता है। राजद जहां अपनी दबदबे की राजनीति से पीछे हटने को तैयार नहीं है, वहीं कांग्रेस बराबरी का सम्मान चाहती है। ऐसे में मुख्यमंत्री उम्मीदवार और सीट बंटवारे को लेकर महागठबंधन में सहमति की राह फिलहाल मुश्किल ही नजर आ रही है।

मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, मेट्रो सेवाएं बाधित

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कोलकाता (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पश्चिम बंगाल में आधी रात के बाद शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने राजधानी कोलकाता समेत कई जिलों में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। लगातार हुई बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव हो गया और कई आवासीय परिसरों में पानी घुस गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पूर्व में बने कम दबाव के क्षेत्र के चलते दक्षिण बंगाल के विभिन्न हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।

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बारिश का सबसे बड़ा असर कोलकाता मेट्रो पर पड़ा। महानायक उत्तम कुमार और रवींद्र सरोबर स्टेशन के बीच जलभराव होने से मेट्रो सेवाएं बाधित हो गईं। मेट्रो अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए शहीद खुदीराम और मैदान स्टेशनों के बीच सेवाएं पूरी तरह रोक दी गई हैं। वहीं, दक्षिणेश्वर से मैदान के बीच सीमित सेवाएं चलाई जा रही हैं। मौके पर रेलवे कर्मचारी और इंजीनियर पानी निकालने के लिए जुटे हुए हैं।

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आईएमडी ने बताया कि कम दबाव का क्षेत्र उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ सकता है, जिससे 25 सितंबर तक दक्षिण बंगाल के पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर, दक्षिण 24 परगना, झारग्राम और बांकुड़ा जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है। इसी दौरान पूर्व-मध्य और उससे सटे उत्तरी बंगाल की खाड़ी में एक और नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना भी जताई गई है।

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कोलकाता नगर निगम (KMC) के अनुसार, शहर के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई। गरिया कामदहारी में महज कुछ घंटों में 332 मिमी वर्षा हुई। जोधपुर पार्क में 285 मिमी, कालीघाट में 280 मिमी, तोपसिया में 275 मिमी, बल्लीगंज में 264 मिमी और उत्तरी कोलकाता के थंटानिया में 195 मिमी बारिश दर्ज की गई।

भारी बारिश से जगह-जगह जलभराव, जाम और बिजली कटौती की स्थिति बनी हुई है। नगर निगम और आपदा प्रबंधन की टीमें राहत और जलनिकासी कार्य में जुटी हैं। मौसम विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने और अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने की अपील की है।

राष्ट्रकवि दिनकर की जयंती पर सीएम योगी ने दी श्रद्धांजलि

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लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की जयंती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा— “दिनकर जी की अमर रचनाएं हर पीढ़ी को देशभक्ति, साहस और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती रहेंगी।”

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सीएम योगी ने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर की कालजयी कृतियां केवल साहित्यिक धरोहर ही नहीं, बल्कि भारतीय समाज और संस्कृति की प्रेरणास्रोत भी हैं। उनकी कविताओं में जहां क्रांति की गूंज सुनाई देती है, वहीं किसानों की पीड़ा और रणभूमि का शौर्य भी प्रतिध्वनित होता है।

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दिनकर ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अपनी लेखनी से युवाओं को जाग्रत किया और स्वतंत्र भारत के निर्माण में अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना को मजबूती दी। ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ जैसी पंक्तियां आज भी जनआंदोलनों और लोकतांत्रिक संघर्षों का प्रतीक मानी जाती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिनकर जी की कविताएं आने वाली पीढ़ियों को सदैव देशहित में सोचने, अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और राष्ट्र की एकता-अखंडता की रक्षा करने की प्रेरणा देती रहेंगी।

थाली में कैसे पहुंच रहा ज़हर? पटना में नकली आलू-पनीर का खुलासा

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राजधानी में आम लोगों की थाली तक जहर पहुंचाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। खाद्य सुरक्षा प्रशासन की टीम ने मीठापुर और मीना बाजार मंडी में छापेमारी कर पुराने आलू को नया दिखाकर बेचे जाने का गोरखधंधा पकड़ा है। जांच में खुलासा हुआ कि इन आलुओं को गेरुआ मिट्टी और हानिकारक रसायनों से चमकदार बनाया जा रहा था। टीम ने मौके से करीब दो ट्रक आलू जब्त किए और उन्हें जांच के लिए लैब भेजा है।

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कार्रवाई का नेतृत्व खाद्य सुरक्षा अधिकारी अजय कुमार ने किया। टीम को सूचना मिली थी कि मंडी में पुराने आलू को “नया आलू” बताकर ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। जब अधिकारी मौके पर पहुंचे तो पाया कि आलुओं को रंग और केमिकल से चमकाया जा रहा था। बाजार में नया आलू 75–80 रुपये किलो बिक रहा है, जबकि पुराना आलू केवल 20–25 रुपये किलो मिलता है। इसी भारी मुनाफे के लालच में कारोबारी उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे थे।

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जांच में यह भी पता चला कि ये आलू छत्तीसगढ़ से लाए जाते थे। इनमें केमिकल इतना अधिक था कि आलू दो दिन के भीतर ही सड़ जाते थे। यानी ग्राहकों तक पहुंचते-पहुंचते ही इनकी असली पहचान उजागर हो जाती।

मंडी से कैफे-बिरयानी हाउस तक छापेमारी

टीम ने केवल मंडियों में ही नहीं, बल्कि शहर के अन्य हिस्सों में भी औचक जांच की। बोरिंग रोड स्थित गोरखनाथ कॉम्प्लेक्स के एक कैफे और राजा बाजार के एक बिरयानी हाउस में भी छापा मारा गया। यहां नकली पनीर बेचने की आशंका पर नमूने लिए गए और फिलहाल बिक्री रोक दी गई है। यह साफ दर्शाता है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से बड़े पैमाने पर समझौता हो रहा है।

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कैसे पहचानें नकली आलू?

विशेषज्ञों का कहना है कि नकली आलू को पहचानना मुश्किल नहीं है।असली आलू में प्राकृतिक खुशबू होती है, जबकि केमिकल वाले आलू से अजीब गंध आती है।असली आलू को काटने पर अंदर और बाहर का रंग समान होता है, जबकि नकली में असमान्यता दिख सकती है।पानी में डालकर भी जांच की जा सकती है। असली आलू पानी में डूब जाता है, जबकि केमिकल से भारी आलू तैर सकते हैं।

सेहत पर खतरनाक असर

पीएमसीएच के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जे.के. तिवारी के अनुसार, गेरुआ मिट्टी और रसायनों से रंगे आलू का सेवन लिवर और किडनी पर सीधा असर डालता है। लंबे समय तक ऐसे आलू खाने से किडनी फेल होने तक का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टरों ने उपभोक्ताओं को चेतावनी दी है कि आलू खरीदते समय विशेष सतर्कता बरतें, खासकर तब जब आलू असामान्य रूप से चमकदार लगे और दाम बहुत अधिक हों।

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बड़ी चुनौती : भरोसा किस पर करें?

यह खुलासा खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अगर पटना जैसे बड़े शहर में खुलेआम नकली आलू और नकली पनीर बेचे जा रहे हैं, तो छोटे कस्बों और गांवों में स्थिति कितनी भयावह हो सकती है, यह सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

फिलहाल कार्रवाई जारी है, कारोबारी फरार हैं। लेकिन असली चुनौती यह है कि आम उपभोक्ता आखिर भरोसा किस पर करे। साफ है कि “नए आलू” के नाम पर बाजार में ज़हर परोसा जा रहा है और उपभोक्ताओं को अपनी सुरक्षा के लिए खुद जागरूक रहना होगा, क्योंकि एक लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है।

अवेक क्रैनियोटॉमी से टाटा मोटर्स अस्पताल ने रचा नया इतिहास

जमशेदपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। चिकित्सा जगत में एक नई मिसाल पेश करते हुए टाटा मोटर्स अस्पताल ने 72 वर्षीय महिला के मस्तिष्क में ट्यूमर का सफल ऑपरेशन किया। गोविंदपुर निवासी भगवती देवी का यह ऑपरेशन अवेक क्रैनियोटॉमी तकनीक से हुआ, जिसकी खासियत यह है कि सर्जरी के दौरान मरीज पूरी तरह होश में रहती हैं।

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सर्जरी का नेतृत्व अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉ. हार्दिक सिरोया ने किया। उनकी टीम में डॉ. स्वस्तिका चक्रवर्ती और एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञ शामिल थे। ऑपरेशन के दौरान भगवती देवी न सिर्फ होश में थीं, बल्कि सामने लगी स्क्रीन पर अपनी सर्जरी को लाइव देखती भी रहीं।

टाटा मोटर्स अस्पताल के हेड मेडिकल सर्विसेज डॉ. संजय कुमार ने बताया कि मरीज की उम्र, उच्च रक्तचाप और बोलने व स्मृति की समस्या को देखते हुए अवेक क्रैनियोटॉमी तकनीक अपनाई गई। इस तकनीक से डॉक्टर लगातार मरीज की वाणी और स्मृति की जांच करते रहे, जिससे सर्जरी के बाद भाषा और बोलने की क्षमता प्रभावित नहीं हुई।

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उन्होंने कहा, “यह एक चुनौतीपूर्ण मामला था, खासकर क्योंकि मरीज बुजुर्ग थीं और उन्हें उच्च रक्तचाप के साथ-साथ बोलने और याददाश्त की समस्या भी थी। हमारी टीम ने अवेक क्रैनियोटॉमी तकनीक से सर्जरी की योजना बनायी। इस तकनीक की खासियत है कि मरीज ट्यूमर डीकंप्रेशन के दौरान जागा रहता है, ताकि सर्जरी के बाद बोलने और भाषा पर कोई असर न पड़े।”

फिलहाल भगवती देवी की स्थिति स्थिर है और वे तेजी से स्वस्थ हो रही हैं। टाटा मोटर्स अस्पताल की यह उपलब्धि उन्नत तकनीक और विशेषज्ञता का प्रमाण है, जिसने जटिल और जोखिमपूर्ण सर्जरी को भी सफलतापूर्वक संभव बनाया।

रेलकर्मी की पत्नी ने ट्रेन के आगे कूदकर दी जान, दो मासूम बच्चों के सिर से उठा मां का साया

जमशेदपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। टाटानगर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर बीती रात एक हृदयविदारक घटना सामने आई। यहां आज़ाद हिंद एक्सप्रेस ट्रेन के सामने कूदकर एक महिला ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। मृतका की पहचान रेलवे कर्मचारी अनिल राय की पत्नी सौदामिनी राय (निवासी : बर्मामाइंस सी-9, एल कैरेज कॉलोनी) के रूप में हुई है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर खड़े होने के दौरान महिला स्टेशन पर मौजूद थी। जैसे ही आज़ाद हिंद एक्सप्रेस धीरे-धीरे आगे बढ़ी, महिला ने अचानक उसके सामने छलांग लगा दी। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। तुरंत ट्रेन को रोका गया और महिला को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

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सूचना मिलते ही आरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। घटना की खबर सुनकर परिवार सहित पूरे इलाके में मातम छा गया। मृतका के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। अचानक हुए इस हादसे से परिजन और रेलवे के सहकर्मी सदमे में हैं।

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इस दर्दनाक घटना ने न केवल परिवार, बल्कि स्थानीय लोगों और रेलवे कर्मचारियों को भी झकझोर दिया है। लोग इसे एक असहनीय क्षति बता रहे हैं। परिवार के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे, वहीं कॉलोनी और स्टेशन परिसर में शोक की लहर फैल गई है।

एकलव्य मॉडल स्कूलों में 7267 पदों पर भर्ती, ऑनलाइन आवेदन शुरू

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) । केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन संचालित एकलव्य मॉडल रेजिडेंसियल स्कूल (EMRS) में शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों पर बड़ी भर्ती निकली है। राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति (NESTS) की ओर से जारी विज्ञापन के अनुसार तक emrs.tribal.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

पदों का विवरण और योग्यता

प्रिंसिपल (225 पद) – स्नातकोत्तर + बीएड, 8–12 वर्ष का अनुभव

PGT (1460 पद) – संबंधित विषय में स्नातकोत्तर
TGT (3962 पद) – स्नातक + बीएड + CTET (पेपर-2 पास)

हॉस्टल वार्डन (635 पद) – स्नातक
महिला स्टाफ नर्स (550 पद) – बीएससी नर्सिंग
लेखाकार (61 पद) – वाणिज्य/लेखा में स्नातक
जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट (228 पद) – 12वीं पास + टाइपिंग कौशल
लैब अटेंडेंट (146 पद) – 12वीं (साइंस) या 10वीं + डिप्लोमा/सर्टिफिकेट

विषयवार प्रमुख वैकेंसी

PGT – अंग्रेज़ी (112), गणित (134), रसायन विज्ञान (169), भौतिकी (198), अर्थशास्त्र (155), कंप्यूटर साइंस (154)
TGT – हिंदी (424), अंग्रेज़ी (395), विज्ञान (408), कंप्यूटर साइंस (550), सामाजिक अध्ययन (392)
TGT क्षेत्रीय भाषाएँ – उड़िया (57), संथाली (71), तेलुगु (44), मणिपुरी (11) सहित अन्य (कुल 223 पद)
TGT विविध विषय – संगीत (314), कला (279), PET पुरुष (173), PET महिला (299), लाइब्रेरियन (124)

आवेदन शुल्क

प्रिंसिपल – SC/ST/महिला/दिव्यांग: ₹500 | अन्य: ₹2500
PGT/TGT – SC/ST/महिला/दिव्यांग: ₹500 | अन्य: ₹2000
नॉन-टीचिंग स्टाफ – SC/ST/महिला/दिव्यांग: ₹500 | अन्य: ₹1500

परीक्षा और चयन

इस भर्ती परीक्षा का आयोजन नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स (NESTS) द्वारा किया जाएगा। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आवेदन से पहले आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध विस्तृत अधिसूचना अवश्य पढ़ें।

इतिहास के पन्नों से

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घटनाएँ

1803 – ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठों के बीच अस्से का युद्ध हुआ।

1846 – जर्मन खगोलशास्त्री जोहान गॉटफ्रीड गैले ने नेप्च्यून ग्रह की खोज की।

1857 – सिपाही विद्रोह के दौरान दिल्ली पर ब्रिटिश सेना का पुनः कब्ज़ा हुआ।

1932 – सऊदी अरब एकीकृत साम्राज्य के रूप में स्थापित हुआ।

1949 – सोवियत संघ ने अपना पहला परमाणु बम परीक्षण किया।

1955 – पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र का सदस्य बना।

1983 – चक्रवाती तूफ़ान “अलिज़ा” ने अमेरिका के टेक्सास क्षेत्र में तबाही मचाई।

2019 – जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन (UN Climate Action Summit) न्यूयॉर्क में आयोजित।

जन्म

1861 – बिस्मिल्लाह खान, प्रसिद्ध शहनाई वादक।

1905 – रामधारी सिंह दिनकर, हिंदी के प्रसिद्ध कवि और लेखक।

1926 – जॉन कोलट्रेन, प्रसिद्ध अमेरिकी जैज़ संगीतकार।

1930 – रायलमपेट चिंतामणि, भारतीय राजनीतिज्ञ।

1943 – जुल्फिकार मिर्ज़ा, पाकिस्तानी राजनेता।

निधन

1939 – सिगमंड फ़्रॉयड, मनोविश्लेषण के जनक।

1973 – पाब्लो नेरूदा, प्रसिद्ध चिली कवि, साहित्य में नोबेल पुरस्कार विजेता।

1974 – डॉ. कुशलकुमार शाह, भारतीय चिकित्सक।

2004 – के.एन. राज, भारतीय अर्थशास्त्री।

नौसेना प्रमुख एडमिरल त्रिपाठी श्रीलंका दौरे पर


कोलंबो/श्रीलंका (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी सोमवार से चार दिवसीय श्रीलंका दौरे पर हैं। यह दौरा दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अपने दौरे के दौरान, एडमिरल त्रिपाठी श्रीलंका के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रक्षा सचिव सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। वे अपने श्रीलंकाई समकक्ष, नौसेना कमांडर वाइस एडमिरल प्रियंथा परेरा के साथ भी बातचीत करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच मौजूदा रक्षा संबंधों को और गहरा करना और भविष्य के सहयोग के अवसरों पर चर्चा करना है।
इस दौरे से हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत और श्रीलंका के साझा हितों पर भी जोर मिलने की उम्मीद है। दोनों देश नियमित रूप से संयुक्त अभ्यास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेते रहे हैं, जो उनकी परिचालन क्षमताओं और अंतर-संचालन क्षमता को बढ़ाते हैं।
एडमिरल त्रिपाठी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य उपस्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। भारत और श्रीलंका दोनों ही हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में एक स्वतंत्र और खुले वातावरण के पक्षधर हैं। इस दौरे से दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
यह यात्रा भारत की ‘पड़ोसी पहले’ (Neighbourhood First) और ‘क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास’ (SAGAR) नीतियों के अनुरूप है।

इजरायल के पीएम नेतन्याहू ने फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने पर यूके, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया को चेतावनी दी


तेल अवीव (राष्ट्र की परम्परा)। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया को फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने की योजनाओं के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है। नेतन्याहू ने कहा कि ऐसा कदम “आतंकवाद के लिए इनाम” होगा और यह क्षेत्र में शांति लाने के प्रयासों को कमजोर करेगा।
हाल के दिनों में, ऐसी खबरें आई हैं कि ये तीनों देश, गाजा में चल रहे युद्ध के बीच, फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने पर विचार कर रहे हैं। इन देशों का मानना है कि दो-राज्य समाधान ही इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष का एकमात्र दीर्घकालिक समाधान है।
नेतन्याहू ने एक बयान में कहा, “फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने का कोई भी एकतरफा कदम हमास और अन्य आतंकवादी समूहों को मजबूती देगा।” उन्होंने आगे कहा, “आतंकवाद को इनाम नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि उसे हराया जाना चाहिए।”
इजरायल का मानना है कि फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना केवल सीधी बातचीत और सुरक्षा गारंटी के साथ होनी चाहिए। इजरायल सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने से पहले हमास को पूरी तरह से समाप्त करना आवश्यक है।
हालांकि, कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने से शांति प्रक्रिया में नई गति आ सकती है और गाजा में मानवीय संकट को कम करने में मदद मिल सकती है।
इस मुद्दे पर ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि नेतन्याहू की चेतावनी ने इस संवेदनशील कूटनीतिक मुद्दे पर तनाव बढ़ा दिया है। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन लगातार दो-राज्य समाधान के लिए दबाव बना रहे हैं, जिसे वे स्थायी शांति के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं।

मुंबई में बाढ़ का कहर: भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने दिए मदद के निर्देश


मुंबई (राष्ट्र की परम्परा)। महाराष्ट्र में मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर कहर बरपाया है। राजधानी मुंबई समेत राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सड़कों और निचले इलाकों में पानी भर गया है, जिससे यातायात व्यवस्था चरमरा गई है।


तत्काल मदद के निर्देश


महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने स्थिति का जायजा लेते हुए प्रभावित नागरिकों को तत्काल मदद पहुंचाने का निर्देश दिया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के लिए कहा है। शिंदे ने कहा, “हमारी सरकार बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़ी है और उन्हें हर संभव मदद मुहैया कराई जाएगी।”


बारिश से प्रभावित इलाके

मुंबई: शहर के कई प्रमुख इलाकों, जैसे कि किंग सर्कल, सायन, हिंदमाता और अंधेरी में सड़कों पर पानी भर गया है। लोकल ट्रेन सेवाएं भी बाधित हुई हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पालघर और ठाणे: इन जिलों में भी भारी बारिश ने तबाही मचाई है। कई गांवों का संपर्क टूट गया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

कोंकण क्षेत्र: रत्नागिरी और रायगढ़ जैसे तटीय जिलों में नदियां उफान पर हैं, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।


मौसम विभाग की चेतावनी


भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले 24 घंटों में भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। लोगों को घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है और मछुआरों को समुद्र में न जाने के लिए कहा गया है।
सरकार की तैयारियां


एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात की गई हैं। प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं ताकि लोग आपात स्थिति में मदद मांग सकें। डिप्टी सीएम शिंदे ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें।