Monday, July 13, 2026
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विदाई समारोह आयोजित कर सेवानिवृत्ति पर नलकूप चालक की विदाई

बनकटा/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। सिंचाई विभाग नलकूप खंड सलेमपुर के अंतर्गत विकास खंड बनकटा में कार्यरत रहे कैलाश प्रसाद गुप्ता चालक एवं कैलाश मौर्य नलकूप चालक के सेवानिवृत्ति होने पर विदाई समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम बनकटा रेलवे स्टेशन बाजार के मध्य दुर्गा मंदिर पर किया गया। वहीं इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे वलिस्टर कुशवाहा जिलेदार प्रथम भाटपार रानी। अपने संबोधन में उनके द्वारा उक्त दोनों सेवानिवृत्ति हुए नलकूप चालकों को उनके कार्यों की सराहना सराहना करते हुए आगे के लिए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना किया। एवं उनके परिवार को भी शुभकामनाएं दी। इस बैठक के आयोजन सींचपाल पर्यवेक्षक अजय कुमार पांडेय तथा रामप्रवेश सिंह द्वारा किया गया। बैठक का संचालन कन्हैया सिंह द्वारा किया गया। विदाई समारोह में सींचपाल पर्यवेक्षक राम नरेश प्रसाद, बृजेंद्र सिंह, महंथ यादव, रतन प्रकाश पांडे तथा नलकूप चालक सुजीत कुमार ,नीरज पांडे, रवि रंजन, अजय कुमार, रितेश कुमार ,लक्ष्मण प्रसाद, रामबडा़ई ,प्रकाश कुमार सिंह, ,भृगुनाथ मिश्र, मृत्युंजय मणि तिवारी, रमजान अंसारी, दीनानाथ शर्मा, शिवसागर चौहान , तथा अन्य ग्रामवासी सुमित कुमार मनोज कुमार कुशवाहा राम आशीष शर्मा संजीत कुमार बरनवाल आदि उपस्थित रहे।

चिकित्सकों की लापरवाही ने छीनी प्रसूता की जान, चार घंटे में ही मासूमों के सिर से उठा मां का साया

लार/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)।
लार नगर के खीरी मोहल्ला निवासी मुख्तार अहमद की पुत्री निकहत परवीन (30 वर्ष) पत्नी साजिद अहमद की प्रसव के दौरान हुई मौत ने परिजनों और क्षेत्रवासियों को गहरे शोक में डाल दिया।

सोमवार की शाम निकहत परवीन को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लार लेकर पहुंचे। शाम करीब साढ़े छह बजे नार्मल डिलीवरी से बच्ची का जन्म हुआ। जन्म के बाद सब कुछ सामान्य था, लेकिन कुछ घंटे बाद निकहत परवीन को अचानक अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा।

परिजनों का आरोप है कि चिकित्सकों ने समय रहते ध्यान नहीं दिया। हालत गंभीर होती देख रात लगभग दस बजे उसे मेडिकल कॉलेज देवरिया रेफर किया गया, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि रास्ते में ही प्रसूता की मृत्यु हो गई।

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मृत्यु की सूचना मिलते ही पति साजिद अहमद और परिजनों में कोहराम मच गया। देर रात शव को बरहज स्थित ससुराल ले जाया गया और मंगलवार दोपहर बाद बरहज कब्रिस्तान में धार्मिक रीति-रिवाज से दफन कर दिया गया।

मृतका की तीन वर्षीय बेटी खुशी और नवजात बच्ची के सिर से मां का साया उठ जाने से पूरा परिवार गहरे सदमे में है। परिजन प्रसव के दौरान लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि मृतका बरहज ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मुजफ्फर हुसैन मंसूरी के भतीजे की पत्नी थी।

दशम आयुर्वेद दिवस:आयुष चिकित्सालय खामपार में मूर्ति कलश स्थापन कर पूजन हवन संपन्न

भाटपार रानी देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
दशम आयुर्वेद दिवस-2025 के अवसर पर आयुष चिकित्सालय खामपार द्वारा आयुर्वेद विभाग के तरफ से विशेष दवा चिकित्सा परामर्श सहित आयुर्वेद के जनक धन्वंतरि महराज के भव्य प्रतिमा एवं कलश स्थापना किया गया था जो अगले रोज बुधवार को हवन एवं पूजन पूजन सहित सम्पन्न हुआ इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर विनोद यादव, आयुर्वेद के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर मलिक, एवं यूनानी के चिकित्सा अधीक्षक एवं चिकित्सालय के अन्य वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी कर्मचारी एवं पत्रकार /कवि/ बृजेश मिश्र आदि द्वारा हवन पूजन में भाग लिया गया।

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वहीं यह मूर्ति कलश स्थापन का आयोजन चिकित्सालय के मुख्य हाल में किया गया। प्रातः 10 बजे से हवन पूजन कार्यक्रम शुरू हुआ जो काफी लंबे समय दोपहर के करीब तक चलता रहा। यह पूजन हवन एवं मूर्ति कलश स्थापन आदि समस्त कार्यक्रम सभी स्टाफ के सहयोग से सम्पन्न हुआ है। जिसमें चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर विनोद कुमार यादव,आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ मनीष चन्द मलिक, एवं यूनानी के डॉक्टर अनीस के नेतृत्व में विभाग के सभी कार्मिक सहित लगभग सैकड़ों लोग/नागरिक शामिल हुए।

“ऐतिहासिक आदेश के बाद यूपी में जाति-मुक्त भारत की ओर तेजी से कदम”

गोंदिया – भारत में जाति व्यवस्था ने भारतीय राजनीति में आज व्यापक रूप ले लिया है, और ये विवादों की सबसे बड़ी जड़ बन गई है। जातिगत पार्टियों की बहस में अब गवर्नेंस की कमी स्पष्ट होती जा रही है। चाहे यूपी हो या बिहार, कास्ट-बेस्ड पोलिटिकल पहचान डेमोक्रेसी के लिए बड़ी भीड़ जुटाती है, लेकिन शासन प्रशासन के लिए जिम्मेदारी निभाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस इलेक्शन में सभी पोलिटिकल पार्टीज को चुनौती दी जाती है कि वो कास्ट और रिलिजन से ऊपर उठकर काम करें और सबके लिए काम करने का वादा पूरा करें।यूपी में एक बार फिर जाति के नाम पर सियासत हो रही है, लेकिन इस बार स्टाइल एकदम अलग है, हर बार जाति जानकर,जाति पूछकर राजनीतिक दल रणनीति बनाते हैं, लेकिन इस बार मामला उलट है, इस बार तो बवाल इस बात पर है कि यूपी में जाति नहीं बताई जाएगी,ना जातियों के नाम पर रैलियां होंगी,ना जाति से जुड़े नोटिस बोर्ड लगेंगे,ना पुलिस रिकॉर्ड्स में जाति मेंशन होगा, ना ही वाहनों पर जाति लिखकर जोर दिखाया जाएगा,युपी सरकार ने इसको लेकर आदेश जारी कर दिया है,यूपी सरकार को ऐसा करने के लिएइलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था, हालांकि सरकार ने जो आदेश जारी किया उसमें कुछ चीजें कोर्ट के बताए सुझावों से एक्स्ट्रा भी हैं, दिलचस्प ये है कि कोर्ट का ये आदेश जाति से जुड़ी किसी याचिका को लेकर नहीं आया बल्कि हुआ ये कि इटावा के जसवंत नगर थाने की पुलिस ने 29 अप्रैल, 2023 को एसयूवीं रोकी थी, जिसमें तीन लोग पकड़े गए। पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में पेश की और प्रिक्रिया के होते हुए,16 सितंबर 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि  इसने पूरे देश में नई बहस को जन्म दिया।अदालत ने कहा कि पुलिस दस्तावेजों, एफआईआर, अपराध रजिस्टर और सरकारी अभिलेखों में जाति का उल्लेख करना भारतीय संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। संविधान का अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 15 (भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा) सीधे-सीधे जातिगत पहचान पर आधारित किसी भी भेदभाव को निषिद्ध करते हैं।अदालत ने यह स्पष्ट किया कि किसी अपराध की जांच में व्यक्ति की जाति अप्रासंगिक है और जातीय उल्लेख समाज में विभाजन को गहरा करता है। इस आदेश ने जातिवाद पर संस्थागत प्रहार किया और इसे “विकसित भारत 2047” के सपने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना गया।इसको सफल बनाना है तो जातिवाद को समाप्त करना ही होगा। न्यायालय ने इसे केवल कानूनी नहीं, बल्कि नैतिक और सामाजिक सुधार का हिस्सा बताया। यदि भारत अगले 22 वर्षों में जाति-मुक्त समाज बना लेता है, तो दुनियाँ के सामने यह सबसे बड़ा लोकतांत्रिक प्रयोग होगा।इस आदेश में कहा गया है कि एससी-एसटी एक्ट जैसे मामले इस आदेश से प्रभावी नहीं होंगे।हाईकोर्ट के आदेश के सिर्फ एक हफ्ते के भीतर 23 सितंबर 2025 को यूपी सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शासनादेश जारी किया। इस आदेश के तहत निर्देश दिया गया कि अब से पुलिस अभिलेखों,सरकारी रजिस्टरों और प्रशासनिक फाइलों में जाति का उल्लेख नहीं किया जाएगा। साथ ही, राज्य सरकार ने सभी विभागों को यह भी आदेश दिया कि जातीय पहचान को दर्ज करने की प्रथा समाप्त की जाए।यूपी सरकार ने इस कदम को सामाजिक समरसता और “सबका साथ, सबका विकास” की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया। इसे जातिवाद समाप्त करने कीराजनीतिक इच्छाशक्ति का उदाहरण माना गया।इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगेजाति-मुक्त भारत की ओर इलाहाबाद हाईकोर्ट क़ा ऐतिहासिक आदेश और यूपी सरकार की पहल। 

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साथियों बात अगर हम भारत के लिए यूपी मॉडल,एक राष्ट्रीय प्रयोगशाला होने की करें तो यूपी,जो भारत का सबसे बड़ा राज्य है, अक्सर राजनीतिक और सामाजिक प्रयोगों की प्रयोगशाला माना जाता है। यदि यहाँ जातीय उल्लेख को समाप्त करने की नीति सफल होती है, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी मॉडल बन सकती है। 2047 तक विकसित भारत के विजन को सफल बनाने के लिए इस पहल को “मील का पत्थर” कहा जा रहा है। सामाजिक वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि जाति को प्रशासनिक दस्तावेजों से हटाया गया तो धीरे-धीरे यह चुनावी राजनीति और सामाजिक व्यवहार से भी कमज़ोर होगी।जातीय राजनीति पर विराम लगेगा और लोकतंत्र की नई दिशा मिलेगी, भारत की राजनीति लंबे समय से जातीय समीकरणों पर आधारित रही है। प्रत्याशी चयन, टिकट वितरण, गठबंधन और चुनावी रणनीति सब जाति के अंकगणित पर टिकी रहती हैं। यदि प्रशासनिक स्तरपर जाति का उल्लेख ही नहीं होगा, तो धीरे-धीरे जातीय पहचान की राजनीतिक महत्ता घटेगी। इससे लोकतंत्र अधिक विचार-आधारित और विकास- आधारित हो सकेगा। जातिवाद पर यह प्रहार भारतीय लोकतंत्र को उसकी मूल आत्मा,”एक व्यक्ति, एक वोट”,के असली स्वरूप के बहुत सटीक करीब ले जाएगा। 

साथियों बात अगर हम  क्या भारत में जाति-मुक्त समाज संभव है? इस प्रश्नों को समझने की करें तो,सवाल उठता है कि क्या भारत जैसा विशाल और विविधतापूर्ण देश जाति-मुक्त समाज बना सकता है? उत्तर यह है कि कठिन जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। जाति-मुक्त समाज बनने से निम्नलिखित फायदे होंगे(1) सामाजिक समानता- कोई ऊँच-नीच नहीं, सबको समान सम्मान। (2) आर्थिक अवसरों की समानता-रोजगार और शिक्षा में अवसर जाति से नहीं, क्षमता से तय होंगे। (3) राजनीतिक स्थिरता-जातीय संघर्ष और वोट-बैंक कीराजनीति कम होगी।(4)राष्ट्रीय एकता- जाति -धर्म की दीवारें गिरने से भारत की वैश्विक छवि मजबूत होगी।जाति-आधारित राजनीति खत्म करने की आवश्यकता- जाति-आधारित राजनीति ने भारत में कई बार समाज को विभाजित किया है। यदि राजनीतिक पार्टियाँ जातीय समीकरणों पर टिकट देना बंद करें और केवल योग्यता, सेवा और विकास के एजेंडे पर चुनाव लड़ें तो लोगों में आत्मविश्वास बढ़ेगा। समाज में झगड़े-झमेले घटेंगे और राष्ट्रीय ऊर्जा सकारात्मक कार्यों में तेज़ी से लगेगी। 

साथियों बात अगर हम एमवाय और पीडीए की राजनीति विभाजन की जड़ और लोकतंत्र में आंकड़ों के खेल को समझने की करें तो, भारतीय राजनीति में एमवाय (मुस्लिम-यादव) और पीडीए (पिछड़ा-दलित- अल्पसंख्यक) समीकरणों ने दशकों तक पार्टियों की चुनावी रणनीति तय की। इससे जाति और धर्म को एक स्थायी राजनीतिक औजार की तरह इस्तेमाल किया गया। यदि जातीय व्यवस्था से भारत को मुक्ति मिलती है, तो ये समीकरण अप्रासंगिक हो जाएंगे और राजनीति असली मुद्दों, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सुरक्षा,पर केंद्रित होगी।लोकतंत्र में आंकड़ों का खेल- जाति, धर्म, क्षेत्र, भाषा और समाज़ क़ा वेटज़-भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में अक्सर चुनावों को जातीय, धार्मिक और क्षेत्रीय आधार पर बांट दिया जाता है। किसी समुदाय की जनसंख्या का “वेटेज” जितना अधिक होता है, राजनीतिक पार्टियाँ उतनी ही उसकी परवाह करती हैं। यही कारण है कि हर पार्टी का चुनावी रोडमैप जातीय समीकरणों पर आधारित होता है। लेकिन यदि जातीय उल्लेख बंद हो जाएगा, तो धीरे-धीरे यह वेटेज अप्रासंगिक होगा और लोकतंत्र वास्तविक रूप से जन-केन्द्रित बनेगा। 

साथियों बातें अगर हम जाति समीकरणों के इतिहास को समझने की करें तो,1950 से 1990 तक जातीय राजनीति का विकास भारत की आज़ादी के बाद राजनीति में जातीय समीकरण धीरे-धीरे हावी होते गए।(1)1950-1970-इस दौर में ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम राजनीति के केंद्र में रहे। कांग्रेस ने इन्हें संतुलित करने की कोशिश की।(2)1974-पिछड़ी जातियों के नेताओं का उदय शुरू हुआ, जिसने राष्ट्रीय राजनीति का समीकरण बदल दिया। (3)1990-मंडल आयोग, पिछड़ी जातियों को आरक्षण देने के फैसले ने जातीय राजनीति को स्थायी रूप से स्थापित कर दिया। इसके बाद से हर चुनाव जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमने लगा।

साथियों बात अगर हम आरएसएस प्रमुख और प्रधानमंत्री के बयान को समझने की करें तो 28 अगस्त 2025 को आरएसएस प्रमुख ने कहा था कि “जाति अब समाज को बांटने का औजार नहीं रहनी चाहिए, यह केवल एक सामाजिक बुराई है जिसे समाप्त करना ही होगा।” यह बयान समाज सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना गया। 30 नवंबर 2023 को प्रधानमंत्री ने चार “जातियों” का उल्लेख किया था, गरीब, युवा, महिला और किसान। उन्होंने कहा था कि भारत की राजनीति को इन्हीं चार वर्गों के कल्याण पर केंद्रित होना चाहिए। यह बयान पारंपरिक जातीयराजनीति से आगे बढ़कर विकास- केंद्रित राजनीति की ओर इशारा करता है।एक टैक्स, एक चुनाव, एक जाति, राष्ट्रीय एकता की दिशा भारत में पहले ही एक टैक्स (जीएसटी) और एक देश, एक चुनाव जैसी योजनाओं पर काम हो रहा है। अब यदि “एक जाति” यानी जातिवाद-मुक्त समाज की अवधारणा को साकार किया जाए तो यह राष्ट्रीय एकता की दिशा में क्रांतिकारी कदम होगा। इससे लोकतंत्र की जड़ें और गहरी होंगी और सामाजिक समरसता बढ़ेगी।

अतःअगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि जाति-मुक्त भारत, विकसित भारत-इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश और यूपी सरकार का त्वरित शासनादेश केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति का संकेत है। यदि पूरे भारत में इसे अपनाया गया तो जाति-आधारितराजनीति कमजोर होगी, समाज में समानता बढ़ेगी और भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के अपने लक्ष्य को हासिल कर पाएगा।यह वह रास्ता है जिससे भारत दुनियाँ को दिखा सकता है कि लोकतंत्र केवल राजनीतिक व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता कावास्तविक आधार है।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

जागरूकता ही एनीमिया से बचाव का आसान तरीका- सपना कश्यप

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा) जैतीपुर एनीमिया मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए बुधवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यक्रम का आयोजन कर अभियान की शुरुआत की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ ब्लॉक प्रमुख सपना कश्यप नें किया। उन्होंने उपस्थित महिलाओं को एनीमिया के बारे में जागरूक किया।बताया एनीमिया एक गंभीर बीमारी है।जो सबसे ज्यादातर महिलाओं में होती है। शरीर में खून की कमी होने के कारण कमजोरी आ जाती है। उन्होंने रोग की पहचान व उपाय बताएं।महिलाओं को फोलिक एसिड व आयरन की गोली खिलाई। इसके साथ विकासखंड में एनीमिया मुक्त अभियान की शुरुआत की गई।सभी विभागों के सहयोग से घर-घर जाकर महिलाओं को जागरूक कर दवा खिलाई गई।

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कार्यक्रम में खंड विकास अधिकारी मनीष दत्त, चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर मो. सज़र,ब्लॉक प्रमुख पति राजीव कश्यप,लोकेश मिश्रा,फार्मासिस्ट प्रियंका गंगवार मंजुल कुमार आदि मौजूद रहे।

फांसी लगाकर युवक ने की आत्महत्या घर में मचा कोहराम

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा) जैतीपुर कस्बे में बुधवार दोपहर घटना हो गई।थाने से करीब सौ मीटर दूर रहने वाले रामकिशन के 19 वर्षीय बेटे रोनू नें अज्ञात कारणों से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।जिससे उसकी मौत हो गई।जानकारी पाकर ग्रामीणों की भीड़ लग गई परिजनों का हाल बेहाल हो गया।मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच पड़ताल की।सूचना पर पहुंची फॉरेंसिक विभाग की टीम ने घटना स्थल का निरीक्षण कर जरूरी साक्ष्य जुटाए।पुलिस नें शव को फंदे से उतार कर पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।बता दें कि रामकिशन के बेटे रोनू की उम्र तकरीबन 19 वर्ष थीं,वह पांच भाइयों में सबसे छोटा था मां की काफी समय पहले मौत हो चुकी है।बुधवार दोपहर वह मोहल्ले में घूम कर आया और भूसा भरे कमरे में अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।किसी तरह लिंटर में पंखे के कुंडे में रस्सी डाल कर फांसी लगा ली। जानकारी पाकर परिजनों ने दरवाजा खोलने की कोशिश की।असफल रहने पर खिड़की को तोड़ा गया गया तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।बताया जा रहा है परिवार में कई दिनों से कलह चल रही थी,

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आपसी विवाद ज्यादा बढ़ गया था। सूचना पर पुलिस टीम के साथ पहुंचे एसआई संजीव कुमार नें परिजनों से पूछताछ कर आवश्यक जानकारी जुटाई।एफएसएल टीम द्वारा साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस नें पंचनामा भर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।मौके पर कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।पुलिस आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही हैं,कारण स्पष्ट नहीं हो सका है।

भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष अशोक सिंह और उनके कर्मचारी विकास सिंह के शव राजस्थान से बरामद

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

रेवती थाना क्षेत्र के अघैला गांव में उस समय गमगीन माहौल हो गया जब गांव के ही भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष अशोक सिंह और उनके कर्मचारी विकास सिंह के शव राजस्थान से बरामद होने की सूचना गांव पहुँची। अशोक सिंह, जो रेलवे नई दिल्ली में वरिष्ठ अधिकारी आईएएस निर्भय नारायण सिंह के बड़े भाई भी थे, अपने कर्मचारी विकास सिंह के साथ 19 सितम्बर को व्यवसायिक कार्य से बलिया से जयपुर के लिए रवाना हुए थे। परिवार के अनुसार, जयपुर पहुँचने के बाद दोनों का फोन अचानक बंद हो गया और उनसे संपर्क टूट गया। अनहोनी की आशंका में परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लंबे इंतजार के बाद 23 सितम्बर को राजस्थान स्थित दो अलग-अलग कुओं से अशोक सिंह और विकास सिंह के शव बरामद हुए। इस हृदय विदारक घटना की सूचना मिलते ही न केवल परिवार बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। लोग अवाक रह गए कि लोकप्रिय और मिलनसार व्यक्तित्व वाले अशोक सिंह इस तरह से अचानक दुनिया छोड़ जाएंगे। बुधवार को परिजनों ने लखनऊ में दोनों का अंतिम संस्कार किया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में रिश्तेदार, शुभचिंतक और भाजपा कार्यकर्ता शामिल हुए। पूरे वातावरण में गमगीन सन्नाटा था और हर किसी की आंखें नम थीं। अशोक सिंह की सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता को याद करते हुए लोगों ने कहा कि उनका जाना पार्टी और समाज दोनों के लिए अपूरणीय क्षति है। इसी क्रम में भाजपा जिला कार्यसमिति सदस्य कौशल सिंह के गायघाट स्थित आवास पर शोकसभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष सतेंद्र सिंह, मुकेश पांडेय, अनिल सिंह, सुशील श्रीवास्तव सहित अनेक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी।
अशोक सिंह की असामयिक मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। लोग इसे राजनीति और समाज दोनों के लिए बड़ी क्षति मान रहे हैं। गाँव से लेकर जिले तक इस घटना की चर्चा है और हर कोई दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना कर रहा है।

कैरियर काउंसलिंग विषय पर विशेष कार्यक्रम आयोजित

देवरिया, (राष्ट्र की परम्परा)
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग, लखनऊ की मा० सदस्य ऋतु शाही की अध्यक्षता में बलजीत अशर्फी इंटरमीडिएट कॉलेज, परसौना, देवरिया में कैरियर काउंसलिंग विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को उच्च शिक्षा के अवसरों, विभिन्न कैरियर विकल्पों एवं प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के प्रति जागरूक करना था।

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अपने उद्बोधन में शाही ने कहा कि वर्तमान समय में सही परामर्श युवाओं, विशेषकर बालिकाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे अपने लक्ष्य स्पष्ट करें, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और समाज व देश की प्रगति में योगदान दें।इस अवसर पर विशेषज्ञों ने छात्राओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीकी, प्रशासनिक सेवाओं तथा स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी प्रदान की। छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपने प्रश्न रखे और विशेषज्ञों व महिला कल्याण विभाग से मार्गदर्शन प्राप्त किया।

प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत हमारे अपने विचार होते है जो सफलता या असफलता के लिए उत्तरदायी होते है

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मनुष्य के जीवन में सफलता, उन्नति और आत्मसंतोष का मूल आधार प्रेरणा है। प्रेरणा वह अदृश्य शक्ति है जो व्यक्ति को कठिनाइयों का सामना करते हुए भी अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। यह शक्ति किसी व्यक्ति, घटना, विचार, पुस्तक, अथवा स्वयं के अनुभवों से प्राप्त हो सकती है।
प्रेरणा का महत्व अत्यधिक है। यह हमें सकारात्मक सोच प्रदान करती है और चुनौतियों को अवसर में बदलने की क्षमता देती है। यदि प्रेरणा न हो, तो जीवन में दिशा का अभाव हो जाता है। यही कारण है कि महान व्यक्तियों ने अपने जीवन की कठिनाइयों को प्रेरणा का साधन बनाया और असंभव को भी संभव कर दिखाया। महात्मा गांधी की अहिंसा की नीति, स्वामी विवेकानंद के विचार और ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के संघर्षपूर्ण जीवन ने अनगिनत लोगों को प्रेरित किया है।
प्रेरणा के स्रोत विविध होते हैं। यह हमारे माता-पिता, गुरुजनों, मित्रों, पुस्तकों या समाज के आदर्श व्यक्तित्वों से मिल सकती है। आज के समय में तकनीक और इंटरनेट भी प्रेरणा का बड़ा माध्यम बन गए हैं, परंतु यह आवश्यक है कि हम सकारात्मक और सच्चे स्रोतों से ही प्रेरणा ग्रहण करें।
प्रेरणा एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। यह हमें मेहनत, अनुशासन और धैर्य के साथ आगे बढ़ने की शक्ति देती है। जीवन में आने वाली बाधाएँ प्रेरणा के बिना पहाड़ जैसी लगती हैं, लेकिन प्रेरणा के साथ वही बाधाएँ सफलता की सीढ़ियाँ बन जाती हैं।प्रेरणा जीवन की वह ऊर्जा है जो साधारण व्यक्ति को असाधारण बना सकती है। यदि हम स्वयं को प्रेरित रखते हुए दूसरों को भी प्रेरित करना सीख लें, तो जीवन न केवल सार्थक बल्कि समाज के लिए भी उपयोगी बन सकता है।
प्रेरणा का अर्थ है किसी कार्य, लक्ष्य या विचार को करने के लिए मन में उत्पन्न होने वाली सकारात्मक ऊर्जा, उत्साह या प्रोत्साहन होती है,यह वह शक्ति है जो किसी व्यक्ति को किसी दिशा में सोचने, आगे बढ़ने और कार्य करने के लिए उत्साहित व सक्रिय करती है।

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प्रेरणा की सरल भाषा में इसप्रकार परिभाषा दी जा सकती है
“प्रेरणा वह आंतरिक या बाहरी शक्ति है, जो हमें किसी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए उत्साहित करती है।”
प्रेरणा के स्रोत हमारे अंदर मौजूद होता है जिसे आंतरिक प्रेरणा कहते है। जब हम अपने अंदर से किसी काम को करने के लिए प्रेरित होते हैं, जैसे सपनों को पूरा करना, कुछ नया सीखना आदि ये हमारी आंतरिक प्रेरणा है।
कुछ प्रेरणा हम बाहर से भी ग्रहण करते है उसे बाह्य प्रेरणा या बाहरी प्रेरणा कहते है।
ये हमें बाहरी कारणों से प्रेरित करते हैं, जैसे पुरस्कार, सफलता, दूसरों की प्रशंसा या प्रतिस्पर्धा आदि।
जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा की आवश्यकता सभी को होती है। कोई इसे सफल व्यक्तियों की कहानियों में ढूँढ़ता है, कोई पुस्तकों में, तो कोई परिस्थितियों में। परंतु सच्चाई यह है कि प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत हमारे अपने विचार हैं। यही विचार हमें दिशा देते हैं, हमारी ऊर्जा को सही मार्ग पर लगाते हैं और कठिनाइयों को अवसर में बदलने की शक्ति प्रदान करते हैं।आंतरिक प्रेरणा को प्रोत्साहित करने के लिए सकारात्मक सोच की शक्ति की अवश्यकता होती है
हमारे विचार ही हमारे कर्मों की नींव होते हैं। जब मन में सकारात्मक सोच होती है, तो आत्मविश्वास स्वतः बढ़ता है। “मैं कर सकता हूँ” जैसा विचार असंभव को भी संभव बनाने की क्षमता देता है।
आत्मसंवाद से जागरूकता बढती है जो आंतरिक प्रेरणा को बल प्रदान करती है।
अपने विचारों से संवाद करना, उन्हें पहचानना और समझना आवश्यक है। जब हम स्वयं से ईमानदारी से बातें करते हैं, तो अपने लक्ष्य और क्षमता को स्पष्ट रूप से देख पाते हैं। यह आत्मसंवाद हमें दिशा और उत्साह दोनों प्रदान करता है।
जीवन में कठिनाइयाँ आना स्वाभाविक है। ऐसे समय में बाहरी सहारा सीमित हो सकता है, लेकिन अपने विचारों की दृढ़ता हमें थामे रखती है। मजबूत विचार कठिनाई को चुनौती में और हार को सीख में बदल देते हैं।
दूसरों से प्रेरणा अस्थायी होती है, लेकिन अपने विचारों से उपजी प्रेरणा स्थायी होती है। यह भीतर से उत्पन्न होती है और बार-बार हमें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
हमारे विचार हमारे जीवन की दिशा तय करते हैं। यदि वे सकारात्मक, स्पष्ट और दृढ़ हों, तो प्रेरणा की कोई कमी नहीं रहती। इसलिए आवश्यक है कि हम अपने विचारों को संवारें, उन्हें सकारात्मक दिशा दें और उन्हें अपना सबसे बड़ा मित्र बनाएं।

सुनीता कुमारी बिहार

लेह में हिंसक प्रदर्शन, भाजपा कार्यालय के बाहर सुरक्षा वाहन फूंका – राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की माँग तेज़

लेह में Gen-Z ने भयंकर बवाल मचाया

लद्दाख (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)लद्दाख की सियासत और सामाजिक संघर्ष एक बार फिर उबाल पर है। लेह में बुधवार को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची लागू करने की माँग को लेकर किया गया विशाल विरोध प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारी युवाओं ने पुलिस पर पथराव किया और भाजपा कार्यालय के बाहर खड़े एक सुरक्षा वाहन में आग लगा दी। हालात काबू से बाहर होते देख सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले छोड़ने और लाठीचार्ज करना पड़ा।

अधिकारियों के मुताबिक स्थिति नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रही लेह एपेक्स बॉडी (LAB) की युवा शाखा और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) का कहना है कि यह गुस्सा केंद्र सरकार की उदासीनता और लंबित माँगों को नजरअंदाज करने का नतीजा है।

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कारगिल डेमोक्रेटिक फ्रंट के नेता सज्जाद कारगिली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि, “लद्दाख, जो कभी शांति का प्रतीक था, अब असफल केंद्र शासित प्रदेश प्रयोग के कारण निराशा और असुरक्षा में घिर गया है। सरकार को तुरंत संवाद बहाल करना चाहिए और छठी अनुसूची व राज्य का दर्जा देने की माँग को मान लेना चाहिए।”

इस बीच, भूख हड़ताल कर रहे 15 कार्यकर्ताओं में से दो की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस लंबे आंदोलन का हिस्सा हैं। इसी उग्र माहौल की वजह से लेह में चल रहा चार दिवसीय लद्दाख महोत्सव भी अंतिम दिन रद्द करना पड़ा।

केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच अब 6 अक्टूबर को वार्ता का नया दौर तय किया गया है। लोग इस बातचीत से ठोस समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।

रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस

बिहार को दोहरीकरण व नई सड़क परियोजनाओं की सौगात, शिपबिल्डिंग सेक्टर को ₹69,725 करोड़ का पैकेज

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को कई अहम फैसले लेकर देशभर के लाखों परिवारों और उद्योग जगत को बड़ी राहत दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 10.91 लाख से अधिक रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) देने को मंजूरी दी गई। इस पर सरकार लगभग ₹1,865.68 करोड़ खर्च करेगी। बोनस की घोषणा से त्योहारी सीजन में रेलकर्मियों और उनके परिवारों में उत्साह और खुशी का माहौल बनेगा।

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रेलकर्मियों के बोनस के अलावा बिहार को भी दो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की सौगात मिली है। बख्तियारपुर-राजगीर-तिलैया रेलवे लाइन के दोहरीकरण पर ₹2,192 करोड़ खर्च होंगे, जिससे यात्रियों को तेज़ और सुविधाजनक रेल सेवाएं मिलेंगी, वहीं माल ढुलाई की क्षमता भी बढ़ेगी।

इसके साथ ही एनएच-139W के साहिबगंज-अरारज-बेतिया खंड को चार लेन का बनाने की मंजूरी भी दी गई है। करीब 78.942 किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना पर ₹3,822.31 करोड़ की लागत आएगी। परियोजना पूरी होने पर बिहार में सड़क कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापारिक गतिविधियों में भी इजाफा होगा।

देश के औद्योगिक और सामरिक दृष्टिकोण से अहम शिपबिल्डिंग और समुद्री क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए केंद्र सरकार ने ₹69,725 करोड़ के विशाल पैकेज का ऐलान किया है। यह पैकेज 4-पिलर दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें जहाज निर्माण, समुद्री वित्तपोषण और घरेलू क्षमताओं को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसका लक्ष्य भारत को आने वाले वर्षों में वैश्विक समुद्री हब के रूप में स्थापित करना है।

कांदिवली में गैस सिलेंडर धमाके से लगी भीषण आग, सात लोग बुरी तरह झुलसे

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) कांदिवली (पूर्व) इलाके में बुधवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ। मिलिट्री रोड स्थित राम किसान मेस्त्री चॉल की एक दुकान में गैस सिलेंडर फटने के बाद भीषण आग भड़क उठी। आग की लपटों में घिरे सात लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिनमें छह महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक तीन पीड़ितों की हालत बेहद नाजुक है क्योंकि वे 85 से 90 प्रतिशत तक जल चुके हैं। अचानक हुए धमाके से आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

दमकल विभाग की चार गाड़ियां और अन्य बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे और करीब 25 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया।

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घायलों की स्थिति और अस्पताल में भर्ती रक्षा जोशी (47), दुर्गा गुप्ता (30), पूनम (28): 85 से 90% तक झुलसीं, फिलहाल कस्तूरबा अस्पताल में भर्ती। नीतू गुप्ता (31): 80% तक जलीं।जानकी गुप्ता (39) और शिवानी गांधी (51): लगभग 70% तक झुलसीं।मनाराम कुमाकट (55): करीब 40% तक झुलसे।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दुकान में मौजूद एलपीजी सिलेंडर और गैस स्टोव के पास शॉर्ट सर्किट या गैस रिसाव से धमाका हुआ, जिससे आग तेजी से फैल गई। नगर निगम और अग्निशमन अधिकारियों ने कहा कि आग सीमित क्षेत्र में ही रही, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

मोदी और योगी पर सोशल मीडिया पर की अभद्र टिप्पणी करने वाला युवक गिरफ्तार

अमेठी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने वाले एक युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के मुताबिक, 23 सितंबर की शाम को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें दोनों नेताओं को लेकर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया था। यह मामला शुकुल बाजार थाना क्षेत्र से जुड़ा बताया गया। जांच के बाद पुलिस ने आरोपी की पहचान शुकुल बाजार क्षेत्र के पूरे जोगा गांव निवासी मेराज के रूप में की। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में ले लिया।

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भाजपा जिलाध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी को सख्त सजा मिलेगी।

उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने किसानों को दिलाया त्वरित राहत का भरोसा

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार भारी बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। कई जिलों में खेत जलमग्न हो गए हैं और फसलें चौपट हो गईं। ऐसे हालात में राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने बुधवार को सोलापुर जिले के करमाला तालुका का दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने प्रभावित किसानों से सीधे मुलाकात की, उनकी समस्याएँ सुनीं और आश्वासन दिया कि सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।

पवार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि नुकसान का सटीक आकलन कर प्रभावित किसानों को तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन को पूरी संवेदनशीलता और सावधानी के साथ कार्ययोजना बनानी होगी ताकि किसी भी किसान को राहत पाने में देरी न हो।

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सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए उपमुख्यमंत्री ने लिखा कि भारी बारिश से खेतों में भारी नुकसान हुआ है और उन्होंने स्वयं खेतों का निरीक्षण कर किसानों की पीड़ा को नजदीक से समझा। उन्होंने साफ कहा कि हमारी सरकार किसानों को हरसंभव मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है और आपदा के इस समय में उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।

मिर्जापुर में यूट्यूबर सरोज सरगम गिरफ्तार: मां दुर्गा पर किया था अभद्र टिप्पणी, संतों का गुस्सा फूटा

मिर्जापुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में यूट्यूब पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले गीत अपलोड करने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। स्थानीय पुलिस ने यूट्यूबर सरोज सरगम और उसके पति राममिलन बिन्द को मड़िहान क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सरोज सरगम ने 19 सितंबर को अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो गीत डाला था, जिसमें देवी दुर्गा के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। इस वीडियो के सामने आते ही हिंदू संत समाज और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।

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वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सोमेन बर्मा ने बताया कि मड़िहान थाने में दारोगा संतोष कुमार राय की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की गई। जांच में यह सामने आया कि वीडियो के निर्माण और संपादन का काम सरोज के पति राममिलन बिन्द ही करता था। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

इस घटना के बाद जूना अखाड़े के संत और बढे़नाथ मंदिर के महन्त डॉ. योगानंद गिरि ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि आरोपितों को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया गया, तो साधु-संत सड़क पर उतर कर आंदोलन करेंगे।

सरोज सरगम मड़िहान क्षेत्र के गढ़वा गांव की रहने वाली है। उसका यूट्यूब चैनल करीब 60 हजार सब्सक्राइबर वाला है, जिस पर अब तक 35 से 40 वीडियो अपलोड हो चुके हैं। पुलिस और साइबर टीम पूरे मामले की तकनीकी जांच कर रही है और विधिक कार्रवाई आगे बढ़ा रही है।

इसी बीच, जांच में यह भी सामने आया है कि सरोज सरगम ने वन विभाग की करीब 15 बीघा भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा था। इस जमीन को वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मुक्त करा लिया गया है। विभाग अब इस संबंध में भी कानूनी कदम उठा रहा है।