Tuesday, July 7, 2026
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Ujjain Mahakal Mosque Case: उज्जैन महाकाल लोक परिसर की मस्जिद पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, कहा – नमाज कहीं भी अदा की जा सकती है

इंदौर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर बेंच ने उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल लोक परिसर (Mahakal Lok) में स्थित तकिया मस्जिद (Takiya Masjid) से जुड़े मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मस्जिद तोड़े जाने के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए कहा कि “नमाज कहीं भी अदा की जा सकती है”, इसलिए याचिकाकर्ताओं की मांग न्यायसंगत नहीं है।

यह फैसला जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने सुनाया। अदालत ने कहा कि अपीलकर्ताओं के पास मस्जिद के पुनर्निर्माण की मांग का कोई कानूनी अधिकार नहीं है और सरकार द्वारा किया गया भूमि अधिग्रहण पूर्णतः वैध है।

याचिकाकर्ताओं की दलील

याचिकाकर्ता मोहम्मद तैयब सहित अन्य ने दलील दी थी कि तकिया मस्जिद करीब 200 साल पुरानी है और यह जमीन वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। उनका कहना था कि सरकार को इसे तोड़ने का अधिकार नहीं था। उन्होंने मस्जिद के पुनर्निर्माण और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की थी।

सरकारी पक्ष का जवाब

सरकारी वकील आनंद सोनी ने कोर्ट में कहा कि भूमि का अधिग्रहण कानूनी प्रक्रिया के तहत किया गया था। संबंधित पक्ष को मुआवजा दिया जा चुका है, और अब यह जमीन सरकारी स्वामित्व में है। साथ ही बताया गया कि वक्फ बोर्ड ने पहले ही भोपाल वक्फ ट्रिब्यूनल में केस दायर किया हुआ है।

न्यायालय की टिप्पणी

हाई कोर्ट ने कहा —

“किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार किसी विशेष स्थान से जुड़ा नहीं होता। नमाज कहीं भी अदा की जा सकती है।”

इसी आधार पर कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील को खारिज कर दिया।

विशेष विमान से पहुंचे मुकेश अंबानी, की बदरीनाथ-केदारनाथ में पूजा-अर्चना, लिया आशीर्वाद

उत्तराखंड (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Ltd) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) शुक्रवार सुबह देहरादून एयरपोर्ट पहुंचे। वह यहां से विशेष विमान (private jet) से पहुंचे थे। एयरपोर्ट पहुंचने के बाद मुकेश अंबानी अपने साथ आए अन्य लोगों के साथ दो हेलिकॉप्टरों के जरिए बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के दर्शनों के लिए रवाना हुए।

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जानकारी के अनुसार, मुकेश अंबानी सुबह 8:00 बजे देहरादून एयरपोर्ट पहुंचे और लगभग 8:30 बजे हेलिकॉप्टर से बदरी-केदार के लिए रवाना हुए। बताया जा रहा है कि उन्होंने दोनों धामों में विशेष पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। दर्शन के बाद वह वापस देहरादून लौटकर अपने विमान से मुंबई रवाना हो जाएंगे।

हर साल की तरह इस बार भी मुकेश अंबानी ने उत्तराखंड के धामों के दर्शन कर देश और परिवार की समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

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Delhi Bus Fire: मोरी गेट में DTC की इलेक्ट्रिक बस में लगी भीषण आग, मौके पर मचा हड़कंप

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। दिल्ली में एक बार फिर सड़क हादसे ने लोगों को दहला दिया। राजधानी के मोरी गेट (Mori Gate) इलाके में शुक्रवार को डीटीसी (DTC) की इलेक्ट्रिक बस में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते बस धू-धू कर जलने लगी। मौके पर अफरातफरी मच गई और राहगीरों ने तुरंत इसकी सूचना दमकल विभाग को दी।

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जानकारी के अनुसार, दमकल की कई गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू की। फिलहाल आग पर नियंत्रण पा लिया गया है। हादसे में अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है।

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स्थानीय लोगों के मुताबिक, बस में आग लगते ही चालक और यात्री समय रहते बाहर निकल आए, जिससे बड़ा हादसा टल गया। बस पूरी तरह से धू-धू कर जलकर खाक हो गई।

गौरतलब है कि इससे पहले भी दिल्ली में इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे डीटीसी के रखरखाव और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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नीतीश की पार्टी में भगदड़, तीन बड़े चेहरे हुए लालू खेमे में शामिल

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) को जबरदस्त झटका लगा है, क्योंकि पूर्णिया के पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का दामन थामने की तैयारी कर ली है। यह कदम न केवल पूर्णिया बल्कि सीमांचल क्षेत्र की राजनीतिक तस्वीर को भी बदल सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, आज राजद कार्यालय में एक भव्य औपचारिक प्रवेश समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता संतोष कुशवाहा और अन्य नेताओं का स्वागत करेंगे। बताया जा रहा है कि कुशवाहा के साथ बांका से जदयू सांसद गिरधारी यादव के पुत्र चाणक्य प्रकाश रंजन और जहानाबाद के पूर्व सांसद जगदीश शर्मा के पुत्र राहुल शर्मा भी राजद की सदस्यता ग्रहण करेंगे।

संतोष कुशवाहा, जो दो बार सांसद रह चुके हैं, पूर्णिया क्षेत्र में जदयू का मजबूत चेहरा माने जाते हैं। उनके राजद में शामिल होने से पार्टी को निचले स्तर पर संगठनात्मक मजबूती और ओबीसी वोट बैंक में नई बढ़त मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राजद इस समय अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं को साथ जोड़कर अपने संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

वहीं, राहुल शर्मा पहले विधायक रह चुके हैं और अपने पारिवारिक राजनीतिक प्रभाव के कारण स्थानीय स्तर पर अच्छी पकड़ रखते हैं। चाणक्य प्रकाश रंजन की एंट्री से राजद को बांका क्षेत्र में भी नई ऊर्जा मिल सकती है।

इस बीच, जदयू ने आगामी चुनावों के लिए सीट बंटवारे की जिम्मेदारी भाजपा को सौंप दी है। भाजपा अब लोजपा (रामविलास), हम और रालोजद के साथ सीटों पर सहमति बनाने में जुटी है। हालांकि जदयू खेमे में बड़े नेताओं के दलबदल से पार्टी के अंदरूनी समीकरणों में हलचल तेज हो गई है।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बिहार की सियासत अब “नए समीकरण बनाम पुरानी निष्ठा” के दौर में प्रवेश कर चुकी है — और इस बार की जंग केवल सीटों की नहीं, बल्कि साख की भी होगी।

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भारत फिर खोलेगा काबुल दूतावास: जयशंकर-मुत्ताकी बैठक से नई कूटनीतिक राह खुली

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारत और अफगानिस्तान के बीच राजनयिक संबंधों में नई ऊष्मा तब देखी गई जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक के दौरान यह घोषणा की कि भारत शीघ्र ही काबुल में अपना दूतावास फिर से खोलेगा। अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत ने अपनी राजनयिक उपस्थिति को स्थगित कर दिया था।

2022 में भारत ने एक तकनीकी दल भेजकर सीमित स्तर पर अपनी मौजूदगी बहाल की थी, जिसे अब दूतावास के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि यह कदम अफगान जनता के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतीक है और क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक ठोस प्रयास है।

यह बैठक 2021 में अमेरिकी सेनाओं की वापसी और तालिबान के शासन संभालने के बाद दोनों देशों के बीच पहली औपचारिक उच्चस्तरीय वार्ता रही। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंज़ूरी के तहत मुत्ताकी 9 से 16 अक्टूबर तक भारत दौरे पर हैं। शुक्रवार को उन्होंने जयशंकर से मुलाकात की और आगामी दिनों में आगरा एवं देवबंद मदरसे का दौरा करने के साथ भारत में रह रहे अफगान समुदाय से भी संवाद करेंगे।

यह ऐतिहासिक अवसर है जब किसी तालिबान सरकार के विदेश मंत्री ने भारत की धरती पर कदम रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात दक्षिण एशिया में बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत की विदेश नीति के नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।

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फिलीपींस में धरती डोली 7.6 तीव्रता के भूकंप से, सुनामी का अलर्ट! समुद्र उफान पर, लोगों में दहशत

फिलीपींस (राष्ट्र की परम्परा डेस्क )फिलीपींस में शुक्रवार को 7.6 तीव्रता का भीषण भूकंप दर्ज किया गया, जिसने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। तेज़ झटकों के कारण लोगों में अफरातफरी मच गई और कई इलाकों में बिजली व संचार सेवाएं बाधित हो गईं।
भूकंप का केंद्र समुद्र की गहराइयों में स्थित बताया जा रहा है, जिसके चलते तटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सुनामी की आशंका जताई गई है।
सरकारी एजेंसियों ने तुरंत हाई अलर्ट जारी कर दिया है और लोगों से समुद्र तटों से दूर रहने की अपील की गई है।
स्थानीय प्रशासन ने राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय कर दिया है। तटीय गांवों में निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।
भूकंप के झटके इतने शक्तिशाली थे कि इमारतें हिलने लगीं और कई स्थानों पर दीवारों में दरारें तक देखी गईं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के भूकंप के बाद आफ्टरशॉक (Aftershocks) आने की संभावना बनी रहती है। प्रशासन ने नागरिकों से संयम बनाए रखने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

असमंजस और अहंकार

ज़िन्दगी असमंजस से भरी,
जो चाहते वो मिलता नहीं,
जो मिले उससे संतोष नहीं,
उम्मीद कभी पूरी होती नहीं।

उम्मीदों का है फ़साना,
शब्दों का ही अफ़साना,
उम्मीदें तो बदल पाएँगे
पर कहे शब्द कैसे बदलेंगे।

बंदूक़ से निकली हुई गोली
और मुँह से निकले हुए शब्द,
न गोली अंदर वापस जाती
न कही हुई बात वापस आती।

न चाहो जो वह मिलता रहे,
जो चाहो वह कभी ना मिले,
चाहत नफ़रत बनी ज़िंदगी,
एक अफ़साना है ज़िन्दगी।

प्रार्थना कर मन ही मन ख़ुश होना,
इस ख़ुशी से दूसरों की सेवा करना
सेवा है माध्यम औरों तक पहुँचना,
पहुँचकर उनको भी अपना बनाना।

अपना बनाना है रिश्ता निभाना,
स्नेह से प्रस्फुटित रिश्ता जताना
संवाद और सम्वेदना से महसूस
कर रिश्ता दिल से आगे बढ़ाना ।

जीवन असमंजस का है आकर,
गलफ़हमियों से रिश्ते मुरझाते,
आदित्य मत होने दो अहंकार,
इससे आने से रिश्ते बिखर जाते।

डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’

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सपा यूथ फ्रंटल संगठनों ने मनाया सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव का पुण्य तिथि

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।
समाजवादी पार्टी के यूथ फ्रंटल संगठनों के कार्यकर्ताओं ने सपा संस्थापक एवं पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की पुण्यतिथि पर मेहड़ा पुरवा स्थित वृद्धाश्रम में फल व मिठाई का वितरण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने नेता जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके आदर्शों को याद किया।

समाजवादी युवजन सभा के जिलाध्यक्ष रणवीर यादव ने कहा कि नेता जी गरीबों, किसानों, छात्रों, नौजवानों और अल्पसंख्यकों के सच्चे हितैषी थे।
समाजवादी लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि नेता जी समाजवादी आंदोलन और सामाजिक न्याय के अग्रदूत थे।
समाजवादी छात्र सभा के जिलाध्यक्ष मनोज यादव ने कहा कि नेता जी ने त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था लागू कर समाज के अंतिम व्यक्ति को सशक्त बनाया।
यूथ ब्रिगेड के जिलाध्यक्ष खुर्शीद आलम अंसारी ने कहा कि नेता जी ने देश के जवानों के कल्याण के लिए कई ऐतिहासिक कार्य किए।

कार्यक्रम में इजहारुल हक बबलू, काका चौधरी, बलवंत यादव, सूरज यादव, मनीष सिंह सैथवार, धीरज यादव, अनीश कुशवाहा, सूरज कुशवाहा, अशोक चौहान सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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सत्ता के खेल में कुर्सियों की छीना-झपटी और राष्ट्रीयता कमजोर करती है

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राजनीति का मूल उद्देश्य राष्ट्र की सेवा, जनकल्याण, और देश के समग्र विकास की दिशा में कार्य करना है। किंतु जब राजनीति सेवा का मार्ग छोड़कर सत्ता का साधन बन जाती है, तब कुर्सियों की छीना-झपटी का खेल शुरू हो जाता है। इस खेल में न विचारधारा की कोई अहमियत रहती है, न ही राष्ट्रहित की चिंता; केवल सत्ता प्राप्त करने और उसे बनाए रखने की लालसा सर्वोपरि हो जाती है। इस सत्ता-संघर्ष में नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप की बौछार करते हैं, दल-बदल करते हैं, और गठबंधन बनाते-तोड़ते हैं। ऐसी राजनीतिक अस्थिरता का सीधा प्रभाव जनता और राष्ट्रीयता पर पड़ता है। जब नेता अपने निजी स्वार्थ को राष्ट्रहित से ऊपर रखते हैं, तो राष्ट्रीयता की भावना धीरे-धीरे क्षीण होने लगती है, और जनता के मन में राजनीति के प्रति अविश्वास बढ़ता है, जिससे लोकतंत्र की नींव कमजोर पड़ने लगती है।राष्ट्र की प्रगति के लिए यह आवश्यक है कि सत्ता के पद को सेवा का माध्यम समझा जाए, न कि स्वार्थ की सीढ़ी। जब तक राजनीति में निष्ठा, पारदर्शिता, और आदर्शों का वर्चस्व नहीं होगा, तब तक यह कुर्सियों की दौड़ देश को भीतर से खोखला करती रहेगी। उदाहरण के लिए, 2019 में कर्नाटक में देखा गया कि सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार को अस्थिर करने के लिए कई विधायकों ने दल-बदल किया। इस घटना में निजी लाभ और सत्ता की लालसा ने जनादेश का अपमान किया, जिससे जनता के बीच अविश्वास और निराशा बढ़ी। शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे उपेक्षित रह गए, और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की बजाय, इस तरह की राजनीति ने सामाजिक विभाजन को बढ़ावा दिया।आज आवश्यकता है ऐसी राजनीति की जो विचारों पर आधारित हो, व्यक्ति-पूजा पर नहीं; जो राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे, न कि सत्ता को। सत्ता का खेल यदि देशहित की दिशा में खेला जाए, तो वह विकास का सशक्त माध्यम बन सकता है। किंतु यदि यह केवल कुर्सी की छीना-झपटी तक सीमित रह जाए, तो यह राष्ट्रीयता की आत्मा को कमजोर कर देता है। राष्ट्रीयता का अर्थ केवल झंडा लहराना या देशभक्ति के नारे लगाना नहीं है, बल्कि वह भावना है जो हमें अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर देश के हित में सोचने की प्रेरणा देती है। जब नेता और दल इस भावना को भुला देते हैं, तो राष्ट्र की एकता और अखंडता को गहरा आघात पहुँचता है। इसलिए, राजनीति में नैतिकता, पारदर्शिता, और जनसेवा की भावना का समावेश आवश्यक है, ताकि राष्ट्रीयता की नींव सुदृढ़ हो और देश सच्चे अर्थों में प्रगति के पथ पर अग्रसर हो सके।

चंद्रकांत सी पुजारी -गुजरात

हारसिंगार पुष्प: औषधीय गुणों से भरपूर अमृत तुल्य औषधि

राष्ट्र की परम्परा डेस्क पारंपरिक आयुर्वेद में पुष्प चिकित्सा का अद्भुत उदाहरण आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में हारसिंगार ( Nyctanthes arbor-tristis) का विशेष स्थान बताया गया है। यह केवल एक सुंदर और सुगंधित फूल ही नहीं, बल्कि अनेक रोगों के उपचार में उपयोगी औषधि भी है। शीतल स्वभाव और कटु-तिक्त स्वाद वाले इस पुष्प में वात-कफ शामक और पित्तनाशक गुण विद्यमान हैं। संधिवात, ज्वर, प्लीहा-यकृत विकार तथा त्वचा रोगों में इसके प्रयोग को अत्यंत लाभकारी माना गया है।

हारसिंगार पुष्प से निर्मित प्रमुख औषधियाँ

  1. हारसिंगार पुष्प चूर्ण
    सूखे फूलों को छाया में सुखाकर महीन चूर्ण तैयार किया जाता है। यह वात-कफ शामक, रक्तशोधक व ज्वरनाशक गुणों से युक्त होता है।
    सेवन विधि: 2–3 ग्राम चूर्ण शहद या गुनगुने जल के साथ, एक से दो माह तक।
    लाभकारी: संधिवात, रक्तदोष, त्वचा रोग और ज्वर।
  2. हारसिंगार पुष्प क्वाथ (काढ़ा)
    5–10 ग्राम पुष्पों को 200 मि.ली. पानी में उबालकर 1/4 भाग रहने तक पकाया जाता है।
    सेवन विधि: 20–30 मि.ली. सुबह-शाम, 15–40 दिन तक।
    लाभकारी: संधिवात, गाउट, जीर्ण ज्वर, प्लीहा और यकृत रोग।
  3. हारसिंगार पुष्प अर्क
    भाप आसवन विधि से तैयार किया गया अर्क रक्तशोधक, प्रतिज्वरक और वातशामक होता है।
    सेवन विधि: 10–15 मि.ली. जल या शहद में मिलाकर, 3–6 सप्ताह तक।
    लाभकारी: पुराना ज्वर, यकृत विकार, प्लीहा वृद्धि।
  4. हारसिंगार पुष्प रस
    ताजे पुष्पों को पीसकर रस निकालने से यह तैयार होता है।
    सेवन विधि: 10–15 मि.ली. रस शहद या मिश्री के साथ, 7–15 दिन तक।
    लाभकारी: वायरल या मलेरिया ज्वर, बदन दर्द, रक्तशुद्धि।
  5. हारसिंगार पुष्प तेल
    पुष्पों को तिल तेल में क्वथित कर तैयार किया गया यह तेल मालिश हेतु प्रयोग किया जाता है।
    गुण: वातशामक, पीड़ा-नाशक, शोथहर।
    लाभकारी: संधिवात, पीठ-दर्द, जोड़ो का दर्द, सूजन।
  6. हारसिंगार पुष्प लेप
    ताजे पुष्पों का पेस्ट बनाकर त्वचा पर लगाने से फोड़े-फुंसी, सूजन और त्वचा विकारों में राहत मिलती है।
  7. हारसिंगार पुष्प आसव/सिरप
    पुष्पों, शक्कर, जल और औषधीय द्रव्यों के किण्वन से तैयार यह आसव बलवर्धक, ज्वरहर और यकृतवर्धक माना गया है।
    सेवन विधि: 10–15 मि.ली. भोजन के बाद, 1–2 माह तक।
    लाभकारी: भूख न लगना, मंदाग्नि, पुराना बुखार।

औषधीय उपयोग का सारांश ज्वर हेतु: क्वाथ, अर्क, रस,संधिवात हेतु: क्वाथ, पुष्प तेल,त्वचा हेतु: चूर्ण, लेप,यकृत-प्लीहा हेतु: अर्क, आसव

विशेषज्ञों की राय

आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, हारसिंगार पुष्प में उपस्थित नाइक्टैनथिन और अन्य जैव सक्रिय तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक हैं। आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधानों ने भी इसके सूजनरोधी, प्रतिज्वरक और रक्तशोधक गुणों की पुष्टि की है।
यह पुष्प वास्तव में प्रकृति का ऐसा वरदान है, जो न केवल सौंदर्य का प्रतीक है, बल्कि स्वास्थ्य का संरक्षक भी है।

ये आयुर्वेद विशेषज्ञ की राय पर प्रकाशित है प्रयोग से पहले डॉक्टर से सलाह जरुर ले

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परासखाड़ और बड़हरा राजा ग्राम पंचायतों में अब रातें हुईं रोशन, ग्रामीणों ने की पहल की प्रशंसा

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)।
सदर विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतें परासखाड़ और बड़हरा राजा इन दिनों पहले से कहीं अधिक रोशनी से जगमगा उठी हैं। हाल के दिनों में चोरी और संदिग्ध गतिविधियों की अफवाहों से डरे ग्रामीणों को अब राहत मिली है।

दोनों ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों — परासखाड़ के दिनेश गुप्ता और बड़हरा राजा के मेराज आलम — ने अपने निजी खर्चे से विद्युत पोलों पर सैकड़ों एलईडी ट्यूब लाइट्स लगवाकर गांवों को उजाले से भर दिया है।

ग्राम प्रधान दिनेश गुप्ता ने बताया कि अंधेरे के कारण अक्सर चोरी या संदिग्ध लोगों की अफवाहें फैलती थीं, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल रहता था। ऐसे में उन्होंने और मेराज आलम ने मिलकर अपनी निधि से यह पहल की, ताकि गांव सुरक्षित और प्रकाशमान बने।

मुख्य सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थलों पर लगाई गई इन लाइटों से न सिर्फ अंधेरा खत्म हुआ है, बल्कि ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना भी मजबूत हुई है।

ग्रामीण रमा, रक्षा, सरिता देवी और मोहन ने बताया, “ग्राम प्रधान ने जो किया, वह वाकई सराहनीय है। पहली बार ऐसा हुआ है कि पूरा गांव रात में भी उजाले से चमकता है। अब लोग बेखौफ होकर आ-जा सकते हैं।”

हालांकि कुछ लोगों ने इस पहल को चुनावी तैयारी या सरकारी बजट के उपयोग से जोड़ते हुए सवाल उठाए। इस पर ग्राम प्रधान दिनेश गुप्ता ने स्पष्ट कहा —

“यह पूरा कार्य मेरे निजी पैसों से कराया गया है, सरकारी फंड से नहीं। ग्रामीणों की सुरक्षा और सुविधा हमारी जिम्मेदारी है।”

इस संबंध में ग्राम पंचायत सचिव प्रियंका पटेल ने कहा कि उन्हें इसकी पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी, संभवतः यह कार्य प्रधान ने अपने निजी संसाधनों से कराया होगा।

ग्रामीणों का मानना है कि यदि अन्य ग्राम पंचायतें भी ऐसी पहल करें, तो गांवों में सुरक्षा, स्वच्छता और विकास का माहौल और सुदृढ़ होगा।

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देवरिया मेडिकल कॉलेज की पानी टंकी में मिले अज्ञात शव की पहचान, महाराष्ट्र के अशोक गावंडे के रूप में हुई पुष्टि

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। । तीन दिन पहले मेडिकल कॉलेज परिसर की पानी टंकी में मिले अज्ञात शव की आखिरकार पहचान हो गई है। देवरिया पुलिस ने बताया कि मृतक का नाम अशोक गावंडे (उम्र लगभग 60 वर्ष) है, जो महाराष्ट्र के निवासी थे।

पुलिस के अनुसार, शव की पहचान मृतक की पत्नी और साले ने की है। परिवारजनों ने बताया कि अशोक गावंडे मानसिक रूप से अस्वस्थ चल रहे थे।

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घटना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

तीन दिन तक शव की शिनाख्त न हो पाने के बाद पुलिस ने सोशल मीडिया और अन्य थानों में सूचना प्रसारित की थी, जिसके बाद पहचान संभव हो सकी।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और हर पहलू से जांच की जा रही है कि अशोक गावंडे की पानी टंकी में गिरकर मौत कैसे हुई।

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राष्ट्रीय विधिक सहायता दिवस (सप्ताह) : न्याय का अधिकार सब तक पहुँचाने की दिशा में एक प्रयास

(लेखक: राजकुमार मणि त्रिपाठी द्वारा राष्ट्र की परम्परा के लिए प्रस्तुति )

भारत एक संवैधानिक लोकतंत्र है, जहाँ प्रत्येक नागरिक को न्याय प्राप्त करने का अधिकार संविधान द्वारा सुनिश्चित किया गया है। न्याय तक समान पहुँच सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने “राष्ट्रीय विधिक सहायता दिवस” (National Legal Services Day) की स्थापना की। यह दिवस प्रति वर्ष 9 नवंबर को मनाया जाता है। इसी अवसर पर पूरे सप्ताह को राष्ट्रीय विधिक सहायता सप्ताह के रूप में मनाने की परंपरा भी विकसित हुई है, जिसका उद्देश्य न्यायिक जागरूकता फैलाना और विधिक सहायता सेवाओं के प्रति आम जनता को संवेदनशील बनाना है।

राष्ट्रीय विधिक सहायता दिवस की स्थापना और उद्देश्य

राष्ट्रीय विधिक सहायता दिवस की स्थापना वर्ष 1995 में हुई, जब भारतीय विधिक सेवा प्राधिकरण (Legal Services Authority) ने यह सुनिश्चित किया कि आर्थिक या सामाजिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों और वंचित लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए। संविधान का अनुच्छेद 39A इस दिशा में मार्गदर्शक है, जो कहता है कि राज्य को न्यायिक प्रणाली ऐसी बनानी चाहिए कि वह गरीब और कमजोर वर्ग के नागरिकों के लिए सुलभ और प्रभावी हो।

इस दिवस का मुख्य उद्देश्य समाज के हाशिए पर रहने वाले नागरिकों को न्यायिक प्रणाली के प्रति जागरूक करना और उन्हें कानूनी सहायता प्रदान करना है। इसके तहत नि:शुल्क कानूनी परामर्श, काउंसलिंग, और न्यायिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है।

राष्ट्रीय विधिक सहायता सप्ताह की महत्ता
राष्ट्रीय विधिक सहायता सप्ताह में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों का लक्ष्य आम जनता के बीच कानूनी अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी फैलाना है। स्कूल, कॉलेज, पंचायत, और नगरपालिकाओं में जागरूकता शिविर आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा, विधिक सेवा प्राधिकरण लोक अदालतों (Lok Adalats) का आयोजन करता है, जहाँ विवादों का समाधान तेजी से किया जाता है।

लोक अदालतों की खासियत यह है कि यह विवादों का सुलझाव जल्दी और बिना बड़े खर्च के करती है। इसके माध्यम से छोटे और मध्यम वर्गीय नागरिकों को न्याय प्राप्त करने में आसानी होती है। इसके साथ ही महिलाओं, बच्चों, वृद्ध नागरिकों और विकलांग व्यक्तियों के लिए विशेष कानूनी सहायता शिविर आयोजित किए जाते हैं।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका
राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर विधिक सेवा प्राधिकरण इस प्रक्रिया के संचालन के लिए जिम्मेदार होते हैं। इनकी भूमिका केवल कानूनी सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों में न्याय की भावना और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता भी पैदा करते हैं। इसके अंतर्गत कानूनी शिक्षा, विधिक जागरूकता कार्यक्रम, और न्यायिक प्रणाली के सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

विशेष रूप से गरीब और वंचित वर्ग के लिए कानूनी सहायता न केवल उनके अधिकारों की सुरक्षा करती है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त करने में भी सहायक होती है। यह समाज में न्याय और समानता की भावना को मजबूत बनाती है।

समाज पर प्रभाव और जागरूकता
राष्ट्रीय विधिक सहायता सप्ताह का आयोजन समाज में न्याय के प्रति विश्वास बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। नागरिकों को यह समझने का मौका मिलता है कि वे केवल कागजी अधिकारों के अधिकारी नहीं हैं, बल्कि उनके पास कानूनी साधनों के माध्यम से अपने अधिकारों की रक्षा करने का अवसर भी है। इस सप्ताह में आयोजित कार्यक्रमों के जरिए अदालतों, वकीलों और समाज के अन्य संगठनों के बीच सहयोग बढ़ता है।

इसके अलावा, मीडिया, सामाजिक संस्थाएं और स्वयंसेवी संगठन इस सप्ताह में भाग लेकर समाज में कानूनी जागरूकता को बढ़ावा देते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि हर नागरिक, चाहे वह किसी भी सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि से हो, न्याय तक पहुँच प्राप्त कर सके।

राष्ट्रीय विधिक सहायता दिवस और सप्ताह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं हैं, बल्कि यह समाज में न्याय और समानता की भावना को मजबूत करने का प्रतीक हैं। यह उन लोगों के लिए एक संदेश है, जिन्हें न्यायिक प्रणाली तक पहुँच प्राप्त करने में कठिनाई होती है, कि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य उनके साथ है।

इस दिवस और सप्ताह के आयोजन से न्यायिक जागरूकता फैलती है, कानूनी सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल बनती है और समाज में कानून के प्रति विश्वास बढ़ता है। यही कारण है कि राष्ट्रीय विधिक सहायता दिवस और सप्ताह हर वर्ष उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ मनाया जाता है।

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राष्ट्रीय डाक-तार दिवस: संचार के इतिहास में एक गौरवपूर्ण दिन

राष्ट्र की परम्परा डेस्क – राष्ट्रीय डाक-तार दिवस हर साल 10 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिवस हमारे देश में डाक और तार सेवाओं के महत्व को याद करने और उनकी उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए समर्पित है। भारत में डाक और तार सेवाओं ने न केवल आम जनता के जीवन को आसान बनाया, बल्कि शासन, व्यापार और सामाजिक संचार के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

डाक और तार सेवाओं का इतिहास
भारत में डाक सेवा की शुरुआत ब्रिटिश शासनकाल में हुई थी। 1854 में डाक विभाग की स्थापना हुई और उस समय डाक सेवा का उद्देश्य मुख्यतः पत्राचार और सरकारी दस्तावेज़ों के आदान-प्रदान को सुगम बनाना था। बाद में तकनीकी विकास के साथ तार सेवा ने भी लोगों के जीवन में एक क्रांतिकारी बदलाव लाया। तार सेवा ने दूरसंचार के क्षेत्र में न केवल सरकार के कार्यों को तेज किया, बल्कि व्यापार और निजी जीवन में भी त्वरित संचार की सुविधा उपलब्ध कराई।

राष्ट्रीय डाक-तार दिवस का महत्व
राष्ट्रीय डाक-तार दिवस केवल डाककर्मियों और तार कर्मचारियों के योगदान को सम्मानित करने का दिन नहीं है, बल्कि यह आम जनता को भी यह याद दिलाने का अवसर है कि कैसे संचार ने समाज को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस दिन विशेष रूप से डाक और तार विभाग के कर्मचारियों को उनके समर्पण और मेहनत के लिए सम्मानित किया जाता है।

डाक-तार सेवाओं का आधुनिक रूप
आज डिजिटल युग में ईमेल, मोबाइल और इंटरनेट आधारित संचार ने डाक और तार सेवाओं की परंपरागत भूमिकाओं को चुनौती दी है। फिर भी, डाक सेवा आज भी ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में संपर्क का एक प्रमुख माध्यम बनी हुई है। इसके अलावा, डाक विभाग ने ऑनलाइन ट्रैकिंग, वित्तीय सेवाओं और ई-कॉमर्स डिलीवरी जैसी नई सेवाओं को भी शामिल कर आधुनिक संचार की दिशा में कदम बढ़ाया है।

राष्ट्रीय डाक-तार दिवस हमें यह याद दिलाता है कि संचार केवल संदेश भेजने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के विकास का एक अहम स्तंभ भी है। यह दिन हमें उन सभी कर्मचारियों की मेहनत और समर्पण को याद करने का अवसर देता है, जिन्होंने वर्षों तक लोगों और सरकार के बीच संचार को सुचारू बनाए रखा।

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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर विशेष

“मन की शांति ही जीवन की असली संपत्ति” — विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जानें मनोस्वास्थ्य का महत्व

हर वर्ष 10 अक्टूबर को पूरी दुनिया में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना, मानसिक रोगों से जुड़े भ्रम और सामाजिक कलंक (stigma) को दूर करना तथा मनोवैज्ञानिक सहायता को बढ़ावा देना है। इस वर्ष का विषय (थीम) है — “Mental health is a universal human right” यानी “मानसिक स्वास्थ्य प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है।”
💬 मानसिक स्वास्थ्य क्यों है आवश्यक?
शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही मानसिक स्वास्थ्य भी एक व्यक्ति की समग्र सुख-समृद्धि के लिए आवश्यक है।
मानसिक स्वास्थ्य से हमारा आशय है — भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक संतुलन, जो हमारे सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने के तरीके को प्रभावित करता है।
एक स्वस्थ मन ही हमें जीवन की चुनौतियों से जूझने, सही निर्णय लेने और सकारात्मक संबंध बनाए रखने में मदद करता है।
⚠️ मानसिक रोग — एक बढ़ती वैश्विक चुनौती
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर 8 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी मानसिक समस्या से जूझ रहा है।
डिप्रेशन, चिंता (Anxiety), तनाव, अकेलापन, नशे की लत और आत्महत्या जैसी समस्याएं अब आम होती जा रही हैं।
भारत में भी मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति चिंताजनक है — हर वर्ष हजारों लोग मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या करते हैं।
लेकिन दुःख की बात यह है कि बहुत कम लोग समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेते हैं।
🌼 जागरूकता और सहयोग की आवश्यकता

  1. खुलकर बात करें: मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत को सामान्य बनाएं।
  2. सुनें और समझें: किसी के मन की बात सुनना भी एक बड़ा सहारा हो सकता है।
  3. विशेषज्ञ की मदद लें: मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक से सलाह लेने में झिझकें नहीं।
  4. स्वस्थ दिनचर्या अपनाएं: योग, ध्यान, पर्याप्त नींद और पौष्टिक भोजन मन को शांत करते हैं।
  5. सकारात्मक रहें: खुद से प्यार करें, छोटी-छोटी खुशियों को महसूस करें।
    🌍 सरकार और समाज की भूमिका
    मानसिक स्वास्थ्य सिर्फ व्यक्तिगत विषय नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
    भारत सरकार ने राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) और टेली-मनोसामाजिक सहायता हेल्पलाइन (Tele MANAS) जैसी योजनाएँ शुरू की हैं ताकि हर व्यक्ति को आसानी से सहायता मिल सके।
    मीडिया, स्कूल, कार्यस्थल और परिवार — सभी को मिलकर एक सहायक वातावरण तैयार करना होगा।
    🌱 “मन का संतुलन ही जीवन का सबसे बड़ा आधार है।”
    विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस हमें यह याद दिलाता है कि मन की देखभाल भी उतनी ही जरूरी है जितनी शरीर की।
    जब हम मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे, तभी समाज, राष्ट्र और मानवता स्वस्थ रह पाएगी।
    आइए, आज से ही एक वादा करें — “हम अपने और दूसरों के मानसिक स्वास्थ्य की कद्र करेंगे।”
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