Tuesday, July 7, 2026
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डॉ. राममनोहर लोहिया की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित, समाजवादियों ने लिया उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प

कपरवार/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, महान समाजवादी विचारक और देश के प्रख्यात नेता डॉ. राममनोहर लोहिया की पुण्यतिथि रविवार को श्रद्धा एवं सादगीपूर्वक मनाई गई। यह श्रद्धांजलि सभा समाजवादी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव अर्जुन सिंह के नेतृत्व में उनके आवास पर आयोजित की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. लोहिया के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन करने से हुई। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि डॉ. लोहिया ने अपने जीवन में सामाजिक समानता, आर्थिक न्याय और राष्ट्र के स्वाभिमान की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष किया। उनके विचार आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत हैं।

श्रद्धांजलि सभा में डॉ. बी.एन. निषाद, डॉ. संजय सिंह सोलंकी, अनील गोस्वामी, राजन मिश्रा, बिक्रमा सिंह, अंजनी सिंह, संतोष यादव, संजय गुप्ता, हरेराम तिवारी, नेमबहादुर गौड़, ज्ञानेंद्र यादव, बालेश्वर पासवान, अमर प्रसाद सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
अंत में सभी ने डॉ. लोहिया के आदर्शों पर चलने और समाज में समानता व न्याय की स्थापना के लिए कार्य करने का संकल्प लिया।

सनकी पति ने पत्नी को गोली मारकर की हत्या, फिर खुद को भी मारी गोली – तीन बेटियां हुईं अनाथ

फतेहपुर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। गाजीपुर थाना क्षेत्र के लमेहटा गांव में पति ने पत्नी की गोली मारकर हत्या करने के बाद खुद को भी गोली मार ली। इस घटना में दंपती की तीन मासूम बेटियां अनाथ हो गईं।

मृतक की पहचान मुकेश निषाद (36) और उसकी पत्नी गुड़िया (27) के रूप में हुई है। दोनों ने वर्ष 2019 में प्रेम विवाह किया था। मुकेश दिल्ली में पेंटिंग का काम करता था और एक माह पहले ही गांव लौटा था। शनिवार रात करीब तीन बजे घर से गोली चलने की आवाज सुनकर आंगन में सो रही मां शांति देवी जब कमरे में पहुंचीं, तो उन्होंने बेटे और बहू को रक्तरंजित हालत में पड़ा देखा।

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मौके से एक तमंचा और दो कारतूस के खोखे बरामद हुए हैं। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

परिजनों के अनुसार, मुकेश की मानसिक स्थिति कुछ दिनों से अस्थिर थी। वह हाल ही में बालाजी मंदिर दर्शन कर लौटा था। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि मुकेश को पत्नी के चरित्र पर शक था, जिससे दोनों के बीच विवाद रहता था।

एसपी अनूप सिंह और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
थानाध्यक्ष हनुमान प्रताप सिंह ने बताया कि प्राथमिक जांच में पारिवारिक कलह और मानसिक तनाव को कारण माना जा रहा है, हालांकि ठोस वजह की जांच जारी है।

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सरदार पटेल की 150वीं जयंती धूमधाम से मनाएगी यूपी सरकार, सीएम योगी बोले – ‘अखंड भारत के शिल्पी थे लौह पुरुष’

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश सरकार इस साल सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती को भव्य रूप से मनाने की तैयारी कर रही है। देश के पहले गृह मंत्री और ‘लौह पुरुष’ कहलाने वाले सरदार पटेल की जयंती पर 31 अक्तूबर को पूरे प्रदेश में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को समीक्षा बैठक में कहा कि सरदार पटेल केवल स्वतंत्रता सेनानी नहीं बल्कि अखंड भारत के शिल्पी थे। आज जो एकता और अखंडता वाला भारत हमें दिखाई देता है, वह सरदार पटेल की दूरदर्शिता और दृढ़ नेतृत्व का परिणाम है।

सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रदेश के सभी जिलों में ‘रन फॉर यूनिटी’, संगोष्ठी, प्रदर्शनी, और सरदार पटेल की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। साथ ही स्कूल-कॉलेजों में एकता दिवस की शपथ दिलाई जाएगी।

सरकार का उद्देश्य है कि नई पीढ़ी सरदार पटेल के योगदान और देश निर्माण में उनकी भूमिका को गहराई से समझे।

नालंदा में महिला की गोली मारकर हत्या: सिर में लगी गोली, पैसों के लेनदेन में रेखा देवी पर हत्या का आरोप

नालंदा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार के नालंदा जिले से रविवार सुबह एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। चंडी थाना क्षेत्र के कोयल विगहा–पहाड़पुर मार्ग के किनारे एक महिला का गोली मारा हुआ शव बरामद हुआ। मृतका की पहचान सरिता देवी (55 वर्ष), पत्नी रामप्रवेश यादव, निवासी गंगा बीघा गांव (वेना थाना क्षेत्र) के रूप में की गई है।

परिजनों के अनुसार, सरिता देवी को शनिवार शाम जीविका की सीएम रेखा देवी किसी काम के बहाने घर से बुलाकर ले गई थी, जिसके बाद वे वापस नहीं लौटीं। देर रात तक खोजबीन के बावजूद कोई पता नहीं चला। रविवार सुबह स्थानीय लोगों ने सड़क किनारे पुल के पास पानी में महिला का शव पड़ा देखा और पुलिस को सूचना दी।

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परिवार ने आरोप लगाया कि सरिता देवी ने रेखा देवी को करीब 5 लाख रुपये उधार दिए थे, इसी पैसे के विवाद में रेखा देवी ने उन्हें बुलाकर सिर में गोली मारकर हत्या कर दी और शव सड़क किनारे फेंक दिया। बताया जा रहा है कि मृतका स्वयं भी जीविका समूह से जुड़ी हुई थीं।

घटना की सूचना पर हिलसा एएसपी शैलजा और चंडी थानाध्यक्ष सुमन कुमार मौके पर पहुंचे। पुलिस ने एफएसएल टीम को बुलाकर साक्ष्य एकत्रित किए और शव को पोस्टमार्टम के लिए बिहार शरीफ मॉडल अस्पताल भेज दिया गया।

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प्रारंभिक जांच में पैसे के लेनदेन से जुड़े विवाद में हत्या की आशंका जताई गई है। पुलिस अब सभी पहलुओं पर जांच कर रही है और आरोपित की तलाश जारी है।

किस्सा कुर्सी का

लघुकथा

सुनीता कुमारी
पूर्णियां बिहार

छोटे से राज्य जनविकासपुर में चुनाव का मौसम था। हर गली में पोस्टर, हर चौराहे पर भाषण, और हर घर में बहस—कौन आएगा इस बार सत्ता में?
मुख्यमंत्री राघव सिंह पाँच साल से कुर्सी पर थे। शुरुआत में उन्होंने जनता के लिए बहुत काम किया—सड़कें बनवाईं, अस्पताल खोले, युवाओं को नौकरी दिलवाई। लेकिन धीरे-धीरे कुर्सी का मोह बढ़ता गया। अब उनका मकसद “विकास” नहीं, बल्कि “विजय” रह गया था।
उधर, उनके पुराने साथी अरविंद मिश्रा, जो कभी उनकी ही पार्टी में थे, अब विपक्ष में जाकर ईमानदारी और पारदर्शिता की राजनीति करने का दावा कर रहे थे। जनता में अरविंद की छवि “सच्चे नेता” की बन चुकी थी।
चुनाव की पूर्व संध्या पर एक गाँव में रैली थी। राघव सिंह ने मंच से कहा—
“मैंने आपके गाँव में बिजली लाई, सड़क बनाई, स्कूल खोले। अब आप ही बताइए, मुझसे बेहतर कौन?”
भीड़ में से एक बूढ़ी औरत खड़ी हुई। उसकी आवाज़ काँप रही थी, पर शब्द तेज़ थे—
“साहब, सड़क तो बनी, पर हमारे बेटे की नौकरी अभी भी नहीं लगी। अस्पताल तो बना, पर डॉक्टर कभी नहीं आता। अगर विकास सिर्फ दिखावे में है, तो हम क्या करें उस सड़क का?”
पूरा मैदान सन्न रह गया।
राघव सिंह पहली बार बिना शब्दों के रह गए। उन्होंने उस औरत की आँखों में देखा — वहाँ डर नहीं था, सिर्फ सच्चाई थी।
चुनाव के नतीजे आए — राघव सिंह हार गए।
अरविंद मिश्रा मुख्यमंत्री बने। लेकिन सत्ता में आते ही उन्हें भी वही दबाव, वही स्वार्थ और वही प्रलोभन घेरने लगे।
कुछ महीनों बाद वही बूढ़ी औरत फिर सचिवालय के बाहर दिखी। इस बार उसने कहा—
“बेटा, कुर्सी चाहे किसी की भी हो, अगर नीयत न बदले तो जनता का हाल नहीं बदलता।”
राजनीति में असली जीत चुनाव की नहीं होती — असली जीत जनता के भरोसे की होती है। और जब नेता उस भरोसे को खो देता है, तो उसकी हर कुर्सी खोखली हो जाती है।

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📰 बाल्मीकि जयंती कार्यक्रम सम्पन्न

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।
विश्व हिंदू परिषद, जिला देवरिया के नगर क्षेत्र में शनिवार की देर शाम नारायणी हॉस्पिटल, गोरखपुर रोड पर महर्षि वाल्मीकि जयंती का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बाल्मीकि समाज के हिरा ने की।

इस अवसर पर वक्ताओं ने महर्षि वाल्मीकि जी के जीवन, उनके आदर्शों और योगदान पर प्रकाश डाला।
प्रांत उपाध्यक्ष उपेंद्र शाही ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि संस्कृत रामायण के प्रथम रचयिता हैं और “आदिकवि” के रूप में विश्वप्रसिद्ध हैं।
प्रांत धर्म प्रसार प्रमुख भागवत यादव ने बताया कि वाल्मीकि रामायण भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो सत्य और कर्तव्य के मार्ग का संदेश देती है।

जिला उपाध्यक्ष डॉ. एस.के. अग्रवाल ने कहा कि रामायण एक ऐसा महाकाव्य है, जो श्रीराम के आदर्श जीवन और धर्मपरायणता से हमें परिचित कराता है।
जिला अध्यक्ष अनिल जायसवाल ने कहा कि ‘आदिकवि’ शब्द का अर्थ है — प्रथम कवि, जिन्होंने संसार को काव्य रचना की दिशा दी।
नगर अध्यक्ष विजय प्रताप सिंह ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि ने संसार का पहला श्लोक कहा, जिससे रामायण की रचना का शुभारंभ हुआ।
प्रांत प्रवर्तन प्रमुख नंदकिशोर सिंह ने कहा कि प्रथम संस्कृत महाकाव्य की रचना के कारण ही वाल्मीकि जी को “आदिकवि” कहा जाता है।
विभाग सेवा प्रमुख अवध किशोर त्रिपाठी ने बताया कि रामायण की रचना महर्षि वाल्मीकि ने श्रीराम के जन्म से पहले ही कर दी थी।

कार्यक्रम का संचालन जिला मंत्री राम सिंह ने किया। इस अवसर पर सह मंत्री जय शिव मिश्र, दुर्गा वाहिनी संयोजिका पूनम मिश्रा, मातृशक्ति संयोजिका पूनम सिंह, मीरा मणि, संध्या श्रीवास्तव, अजय कुमार गुप्ता, अभिषेक मौर्य, प्रिंस कुशवाहा, विशाल पांडे, अनीता श्रीवास्तव, कृष्णकांत श्रीवास्तव, विनोद सिंह, अशोक कुशवाहा, अशोक सिंह, राधेश्याम चौबे सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं सर्व समाज के लोग उपस्थित रहे।

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फिल्मों से राजनीति तक रवि किशन नंबर वन: 33 साल बाद मिला पहला फिल्मफेयर अवार्ड

नई दिल्ली/गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार और गोरखपुर के सांसद रवि किशन शुक्ला ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा से देशभर में गोरखपुर का नाम रोशन किया है। गुजरात में आयोजित प्रतिष्ठित फिल्मफेयर अवार्ड 2025 समारोह में रवि किशन को फिल्म ‘लापता लेडीज’ में शानदार अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता (Best Supporting Actor) का अवार्ड दिया गया।

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यह पल रवि किशन के लिए बेहद खास रहा, क्योंकि अपने 33 साल के लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने पहली बार फिल्मफेयर ट्रॉफी अपने नाम की है। मंच पर अवार्ड ग्रहण करते हुए उन्होंने भावुक होकर कहा — “महादेव की कृपा, जनता का स्नेह, परिवार और खासतौर पर पत्नी के सहयोग से यह सफलता मिली है। यह सम्मान मेरे दर्शकों, मेरे क्षेत्र और मेरे देश को समर्पित है।”

रवि किशन न केवल सिनेमा जगत में बल्कि राजनीति में भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। उन्हें हाल ही में जनसेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘सांसद रत्न’ अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था।

फिल्मों, राजनीति और समाजसेवा के क्षेत्र में लगातार सक्रिय रवि किशन आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।

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धनौती मठिया में चाकूबाजी के बाद बम धमकी, रंजिश में तना गांव का माहौल

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देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। मदनपुर थाना क्षेत्र के धनौती मठिया गांव में मंगलवार की शाम पुरानी रंजिश में एक युवक ने बाप-बेटे समेत तीन लोगों पर चाकू से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। इसके अगले दिन पीड़ित परिवार को बम से उड़ाने की धमकी भरा पत्र मिला, जिससे गांव में दहशत का माहौल है।

जानकारी के अनुसार, आरोपी शराब के नशे में धुत था और विवाद के दौरान चाकू से हमला कर फरार हो गया। घायलों को जिला अस्पताल से बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर किया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।

अगले दिन सुबह पीड़ित परिवार के घर के बाहर एक डंडे से बंधा धमकी भरा पत्र मिला। पत्र में लिखा था— “अगर हम जेल गए, तो तुम्हारा पूरा परिवार बम से उड़ा दिया जाएगा।”

इससे पूरे गांव में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने धमकी को गंभीरता से नहीं लिया।

पुलिस ने बताया कि शिकायत दर्ज कर ली गई है और धमकी भरे पत्र की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी। गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

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“अहोई अष्टमी — बहती आँखों से लिखी माँ की पुकार, संतान की दीर्घायु का आशीर्वाद”

अहोई अष्टमी का व्रत और पूजा: स्पर्श करती भावनाओं की कहानी

कार्तिक कृष्ण अष्टमी का दिन हिंदू धर्म में उन स्त्रियों के लिए विशेष महत्व रखता है, जिनकी संतान हर पल उनकी प्रार्थना का केंद्र होती है। आज उस पावन पर्व की कथा-पटकथा आपसे साझा कर रहा हूँ — एक ऐसी अमूल्य श्रद्धा, जो पीढ़ियों से माता की असीम आस्था और स्नेह को स्वर देती आई है।

व्रती स्त्रियाँ सवेरे-सवेरे स्नान कर पवित्र शरीर, मन और वचन तैयार करती हैं। दिनभर निर्जला अथवा सूखे फल-जल से निर्जला व्रत रखती हैं। शाम होते-होते वही पलकें उस ध्यान की ओर कर देती हैं जहाँ दीवार पर पुतली (आठ कोष्ठक) बनाई गई है। उस कोष्ठक के पास सेई (चुहिया) और उसके बच्चों के चित्र अंकित होते हैं — उनकी ममता से जुड़ी एक संवेदनशील संवेदना।

इसके बाद एक चौका (थाली) बनाकर कलश स्थापित किया जाता है। कलश पूजन के पश्चात् दीवार पर बनी पुतली के समक्ष अहोई अष्टमी की पूजा की जाती है। पूजा के बाद दूध-चावल (दूध-भात) का भोग लगाया जाता है और एक कथा सुनाई जाती है, जिसमें देवी अहोई माता की कृपा, माता पार्वती की माता के रूप में अनहोनी को होनी बनाने की शक्ति और अपार मातृशक्ति का स्मरण मिलता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक समय किसी नगर में एक साहूकार था, जिसकी पत्नी ने मिट्टी खोदते समय अनजाने में एक सेह (चुहिया) के बच्चे को नुकसान पहुँचाया। पश्चात चारों ओर असमय मृत्यु का अँधेरा फैला और साहूकार की स्त्री ने पुत्रों को खो दिया। जब उसने अपनी भीतरी पीड़ा बांटी, तब वृद्ध औरतों ने सुझाव दिया कि वह उसी अष्टमी पर सेह और उसके बच्चों को चित्रित कर पूजन करे। इसी अनुष्ठान के फलस्वरूप उसे सात पुत्रों की प्राप्ति हुई; उसी कथा से यह व्रत लोककथा बन कर आज भी हर वर्ष श्रद्धालुओं द्वारा किया जाता है।

समय बदलने पर आधुनिक युग में, जो स्त्रियाँ खुद दीवारों पर कला चित्रण करने में सक्षम न हों, वे रेडीमेड अहोई चित्र बाजार से ले आती हैं। इन्हें पूजा स्थल पर स्थापित कर विधिपूर्वक पूजन करती हैं। इस नये स्वरूप ने व्रत की संलग्नता को सहज कर दिया है।

इस दिन कुछ स्थानों पर ‘धोबी मारन लीला’ का मंचन भी होता है — यह एक प्रहसनात्मक दृश्य है जिसमें श्रीकृष्ण द्वारा कंस द्वारा भेजे गए धोबी को मारने की लीला प्रस्तुत की जाती है। इस लीला का प्रतीकात्मक अर्थ है — अन्याय के धोबी (दुष्कृतियों) का संहार।

अहोई माता को देवी पार्वती की प्रतिमूर्ति माना जाता है — उस माता रूप को जो अपार शक्ति से ‘अनहोनी को होनी’ में बदल देती है। इस दिन व्रत करने वाली स्त्रियाँ प्रभात-संध्या ध्यान करती हैं, कथा सुनती हैं, भक्ति भावी गीत गाती हैं और अन्त में भगवान से यह वर मांगती हैं — कि उनकी संतान दीर्घायु एवं सुख-समृद्धि से जीवन व्यतीत करे।

जब चंद्रिका ने आकाशवाणी द्वारा बताये अनुसार विधि-विधान से व्रत रखा, पूजन किया और स्नान कर घर लौटी, तब अहोई माता ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए और वरदान प्रदान किया। “तथास्तु!” कहकर माता ने पुत्रों की दीर्घायु की कृपा प्रदान की।

आज भी यही विश्वास इस व्रत को पवित्र बनाता है — कि अगर श्रद्धा और भक्ति अपार हो, यदि मन, वचन, कर्म सच्चे हों, तो माता अवश्य आशीर्वाद देती हैं।
प्रस्तुति – पंडित ध्रुव मिश्र

दिशानिर्देश (Direction):
राष्ट्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परम्पराओं ने हमें यह सिखाया है कि हर पूजा-उपक्रम अपना अर्थ समझकर, श्रद्धा और नियमपूर्वक करना चाहिए। परंपराओं का अनुसरण करते समय विशेष रूप से किसी धार्मिक अनुष्ठान या व्रत को अपनाने से पहले विद्वानों, पूज्य गुरुओं या अपने परिवार के धार्मिक मार्गदर्शक से परामर्श लेना अनिवार्य है। इससे न केवल आपकी श्रद्धा सुबुद्ध हो, बल्कि अनवांछित भूल से बचाव भी होगा।

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💫 धीरे मेटाबॉलिज्म, बढ़ता वजन? 💫

घर के ये प्राकृतिक नुस्खे जलाएंगे चर्बी, लौटेगी स्फूर्ति और आत्मविश्वास!

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बढ़ता वजन हर किसी की चिंता बन गया है। कई बार डाइट और एक्सरसाइज करने के बावजूद भी वजन कम नहीं होता, क्योंकि असली वजह होती है — स्लो मेटाबॉलिज्म। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं! अब न तो महंगे सप्लीमेंट्स पर खर्च करना है, न ही जिम में घंटों पसीना बहाना। बस अपनी रसोई के कुछ साधारण लेकिन असरदार खाद्य पदार्थों को रोजमर्रा की डाइट में शामिल करें और देखें फर्क खुद!
🌿 अदरक – थर्मोजेनेसिस से बढ़े कैलोरी बर्निंग
अदरक शरीर में थर्मोजेनेसिस बढ़ाकर मेटाबॉलिज्म को तेज करता है। इससे कैलोरी जल्दी बर्न होती है और पाचन भी सुधरता है। सुबह या शाम हल्की अदरक की चाय पीएं, या इसे सब्जियों, सूप या दाल में मिलाएं – असर साफ दिखेगा।
🌶️ मिर्च – गर्मी से घटे फैट
मिर्च में पाया जाने वाला कैप्सेसिन शरीर की गर्मी बढ़ाकर फैट को गलाने का काम करता है। जब शरीर खुद को ठंडा करने में मेहनत करता है, तो अधिक कैलोरी खर्च होती है। बस ध्यान रखें, अगर एसिडिटी रहती है तो सीमित मात्रा में ही सेवन करें।
🧄 लहसुन – फैट को रोके, ऊर्जा को बढ़ाए
लहसुन सिर्फ स्वाद नहीं बढ़ाता, बल्कि ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखता है और फैट जमने से रोकता है। यह शरीर के एनर्जी एंजाइम्स को एक्टिव करता है। रोज सुबह खाली पेट 1–2 कली कच्चा लहसुन गुनगुने पानी के साथ लें और दिनभर हल्कापन महसूस करें।
🍋 नींबू पानी – टॉक्सिन्स बाहर, मेटाबॉलिज्म भीतर से मजबूत
नींबू में मौजूद विटामिन C शरीर को आयरन सोखने में मदद करता है और टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है। सुबह गुनगुना नींबू पानी पीना मेटाबॉलिज्म को नैचुरल बूस्ट देता है और दिन की ऊर्जा बढ़ाता है।
🪔 राष्ट्र की परम्परा का सुझाव:
इन घरेलू उपायों को अपनाने से पहले किसी जानकार आयुर्वेदाचार्य या डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

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यात्रियों के लिए रेलवे का क्रांतिकारी कदम!”

अब बदल सकेंगे कन्फर्म ट्रेन टिकट की तारीख

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)भारतीय रेलवे लगातार यात्रियों को बेहतर सुविधाएँ देने के लिए नए-नए प्रयोग कर रहा है। भारत जैसे विशाल देश में सबसे अधिक लोग रेलमार्ग से सफर करते हैं, और उनकी यात्रा को सरल बनाने के लिए IRCTC हमेशा प्रयासरत रहता है। इसी कड़ी में रेलवे ने यात्रियों के लिए एक नई सुविधा शुरू करने की तैयारी की है, जो यात्रा को और भी आसान बना देगी।

अब यात्री अपने कन्फर्म रेल टिकट की यात्रा तिथि को बदल सकेंगे। जी हां, यह कोई अफवाह नहीं, बल्कि सच्चाई है। रेलवे ने इस प्रक्रिया को अत्यंत सरल बना दिया है। यदि आपने किसी तारीख का टिकट बुक किया है लेकिन अब किसी कारणवश यात्रा की योजना बदलनी हो, तो आप उसी टिकट की नई तारीख ऑनलाइन बदल पाएंगे।

हालांकि, सीट की उपलब्धता नई तारीख पर निर्भर करेगी। उदाहरण के तौर पर, यदि आपके पास 14 तारीख का कन्फर्म टिकट है और आप 15 तारीख को यात्रा करना चाहते हैं, तो पहले यह सुनिश्चित करें कि उस दिन सीट उपलब्ध है या नहीं। अगर सीटें फुल हैं, तो आपकी टिकट वेटिंग में चली जाएगी।

रेलवे के अनुसार, टिकट की तारीख बदलने पर किसी प्रकार की कैंसिलेशन फीस नहीं लगेगी और नया टिकट स्वतः जनरेट हो जाएगा। लेकिन ध्यान दें कि यह सुविधा साल 2026 से लागू होगी, और शुरुआत में केवल ऑनलाइन टिकटों पर ही उपलब्ध होगी। फिलहाल ऑफलाइन काउंटर से यह सुविधा नहीं मिलेगी।

यह कदम रेलवे की डिजिटल दिशा में एक और बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है, जो लाखों यात्रियों के लिए राहत लेकर आएगा।

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भयमुक्त हो बालक : शिक्षा में बढ़ती हिंसा पर आत्ममंथन जरूरी

शिक्षा का मकसद केवल पढ़ाई-लिखाई तक सीमित नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहाँ बालक निडर होकर सोच सके, प्रश्न कर सके और अपने सपनों को आकार दे सके। लेकिन आज का हाल इसके उलट दिखाई दे रहा है। स्कूल, जो बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित जगह माने जाते हैं, अब हिंसा और प्रताड़ना की खबरों से सुर्खियों में हैं। कहीं शिक्षक की मार से बच्चा घायल हो रहा है, तो कहीं साथी छात्रों के बीच विवाद जानलेवा रूप ले रहा है।
यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर हमारी शिक्षा व्यवस्था में संवेदनशीलता की कमी क्यों बढ़ती जा रही है? अनुशासन के नाम पर बच्चों के साथ कठोरता, मारपीट या मानसिक उत्पीड़न किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता। एक डर में पला बच्चा कभी आत्मविश्वासी नहीं बन सकता।
आज भी समाज में यह धारणा गहराई तक बैठी है कि डांट-फटकार या हल्की मार से बच्चा सुधरता है। लेकिन सच्चाई यह है कि इससे बच्चे के भीतर भय और हीनभावना घर कर जाती है। उसे लगता है कि गलती करने का मतलब सजा है, न कि सीखने का अवसर। यही डर आगे चलकर उसकी रचनात्मकता और आत्मविश्वास को खत्म कर देता है। शिक्षा का असली उद्देश्य बच्चे में सोचने और समझने की शक्ति विकसित करना है, न कि उसे डराकर आज्ञाकारी बनाना।
शिक्षक का कार्य केवल पढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों के मनोभाव को समझना भी है। आज के बच्चों पर स्कूल और घर दोनों जगह प्रदर्शन का दबाव है। अभिभावकों को भी यह स्वीकार करना होगा कि अंकों से अधिक जरूरी है बच्चे का मानसिक स्वास्थ्य। बच्चों से संवाद बढ़ाना, उन्हें सुनना और उनके विचारों को महत्व देना – यही सही शिक्षा का मार्ग है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में ‘भयमुक्त शिक्षा’ की बात कही गई है, लेकिन इसे जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी विद्यालयों और समाज दोनों की है। हर स्कूल में बाल सुरक्षा समिति, मनोवैज्ञानिक परामर्श केंद्र और शिकायत तंत्र होना चाहिए। शिक्षकों को ‘बाल मनोविज्ञान’ और ‘सहानुभूति आधारित अनुशासन’ की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए, ताकि वे बच्चे के विकास में साथी बन सकें, भय का कारण नहीं।
बच्चे समाज का भविष्य हैं। यदि हम उन्हें भय और हिंसा के साये में बड़ा करेंगे, तो वे कभी स्वतंत्र और संवेदनशील नागरिक नहीं बन पाएंगे। शिक्षा का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब हर बालक विद्यालय में सुरक्षित, सम्मानित और निडर महसूस करे। अब वक्त आ गया है कि हम सब मिलकर यह तय करें, शिक्षा का आधार डर नहीं, भरोसा होगा। तभी सच में कहा जा सकेगा , भयमुक्त हो बालक, भयमुक्त हो शिक्षा।

“भोजन ही भक्ति है: मसालों की पवित्रता से किचन में आए समृद्धि”

“किचन को बनाए मंदिर: जहां मसालों की सुगंध और स्वाद संस्कार की पहचान बना दे”


हर भारतीय घर की रसोई केवल खाना बनाने की जगह नहीं होती, बल्कि वह घर का मंदिर होती है — जहां स्वाद के साथ भावनाएं भी पकती हैं। एक सच्ची गृहणी के लिए उसकी किचन पूजा-पाठ की थाली से कम नहीं होती। जैसे हम पूजा से पहले थाली और दीपक को साफ रखते हैं, वैसे ही किचन के मसालों और बर्तनों की पवित्रता बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।

हमारे भोजन का असली स्वाद मसालों में छिपा होता है। ताज़े और सुगंधित मसाले किसी भी साधारण सब्जी को स्वादिष्ट बना देते हैं, जबकि पुराने या खराब मसाले पूरे खाने का जायका बिगाड़ देते हैं। अक्सर देखा गया है कि कई बार हम मसालों को गलत तरीके से स्टोर करते हैं और यही वजह होती है कि उनका रंग, खुशबू और असर खत्म हो जाता है।

सबसे आम गलती यह है कि जब मसाले का डिब्बा आधा रह जाता है, तो हम उसी में नया पैकेट खाली कर देते हैं। ऐसा करने से पुराना मसाला नया मसाला खराब कर देता है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि पहले पुराना मसाला पूरी तरह इस्तेमाल करें, फिर डिब्बा धोकर धूप में अच्छी तरह सुखाएं और तभी नया मसाला भरें। ऐसा करने से न केवल मसाले लंबे समय तक टिकते हैं, बल्कि उनकी खुशबू और स्वाद भी बरकरार रहती है।

इसके अलावा, मसाले निकालने के लिए गीली चम्मच का उपयोग बिल्कुल न करें। हल्की-सी नमी भी मसालों को चिपचिपा बना देती है और फफूंदी लगने की संभावना कई गुना बढ़ा देती है। हमेशा सूखी चम्मच का ही प्रयोग करें। अगर संभव हो तो मसालों के लिए एक अलग सूखी चम्मच ही रखें। यह छोटी-सी आदत आपके मसालों को महीनों तक ताज़ा रख सकती है।

कई बार गृहणियाँ सुविधा के लिए मसालों के डिब्बे गैस स्टोव या चूल्हे के पास रख देती हैं, ताकि काम में आसानी हो। लेकिन यही सबसे बड़ी भूल होती है। खाना पकाने के दौरान निकलने वाली गर्मी और भाप मसालों में नमी भर देती है। इससे मसाले गीले होकर चिपकने लगते हैं, उनका रंग फीका पड़ जाता है और सुगंध गायब हो जाती है। इसलिए मसालों को हमेशा ठंडी, सूखी और हवादार जगह पर रखें।

याद रखें, आपकी रसोई केवल स्वाद की नहीं, बल्कि संस्कारों की प्रयोगशाला है। जैसे पूजा में स्वच्छता और शुद्धता का महत्व होता है, वैसे ही किचन में भी स्वच्छता और सादगी ही उसकी पवित्रता की पहचान है। एक अच्छी गृहणी अपनी रसोई को ऐसे सजाती-संवारती है जैसे वह देवी अन्नपूर्णा का घर हो — जहां हर मसाला, हर खुशबू और हर पकवान घर में खुशहाली का प्रतीक बनता है।

राष्ट्र की परंपरा ने सुझाव दिया है कि उपरोक्त उपायों को अमल में लाने से पहले किसी अनुभवी जानकार या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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रंजना तिवारी ब्यूटीशियन

हर महिला चाहती है कि उसकी त्वचा हमेशा प्राकृतिक रूप से निखरी और स्वस्थ दिखे। लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारी स्किन दिनभर कई तरह के प्रदूषण, धूप और धूल-मिट्टी का सामना करती है। ऐसे में त्वचा की प्राकृतिक नमी और चमक धीरे-धीरे खत्म हो जाती है। नतीजतन, स्किन रूखी, बेजान और धब्बों से भर जाती है। अक्सर हम महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स के झांसे में आकर केमिकल युक्त क्रीम और सीरम का इस्तेमाल करने लगते हैं, जिनसे कुछ समय के लिए असर तो दिखता है, लेकिन लंबे समय में यह त्वचा को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

यही वजह है कि आजकल स्किन एक्सपर्ट्स और ब्यूटी थेरेपिस्ट प्राकृतिक तरीकों से स्किन केयर करने की सलाह देते हैं। इन्हीं में से एक सबसे भरोसेमंद और असरदार उपाय है ग्लिसरीन (Glycerin) का इस्तेमाल। यह एक प्राकृतिक मॉइस्चराइज़र है, जो त्वचा में मौजूद नमी को लॉक कर उसकी मुलायमता बनाए रखता है।

ग्लिसरीन न केवल त्वचा को ड्राईनेस से बचाती है, बल्कि यह डेड स्किन हटाकर चेहरे को नैचुरल ग्लो भी देती है। सर्दियों में जहां त्वचा रूखी पड़ जाती है, वहीं गर्मियों में भी यह सन टैनिंग और जलन से राहत दिलाती है।

यदि आपकी स्किन पर झाइयां, दाग-धब्बे या पिगमेंटेशन की समस्या है, तो ग्लिसरीन का नियमित इस्तेमाल आपकी त्वचा को धीरे-धीरे साफ और उजली बना देता है। यह त्वचा की गहराई तक जाकर उसे रिपेयर करता है और नमी बनाए रखता है।

आप चाहें तो ग्लिसरीन को रोजाना गुलाबजल (Rose Water) और नींबू के रस (Lemon Juice) के साथ मिलाकर टोनर के रूप में इस्तेमाल कर सकती हैं। यह फेस पर नमी भी लाएगा और फ्रेशनेस भी बनाए रखेगा। वहीं, सोने से पहले ग्लिसरीन में थोड़ा-सा एलोवेरा जेल मिलाकर चेहरे पर लगाने से स्किन मुलायम और बेदाग बनती है।

ग्लिसरीन का इस्तेमाल केवल फेस के लिए ही नहीं, बल्कि होंठों, एड़ियों और हाथों की खुरदरी त्वचा के लिए भी किया जा सकता है। यह उन जगहों की नमी को बनाए रखता है और स्किन को स्मूद बनाता है।

इसलिए यदि आप भी अपनी त्वचा को नेचुरली खूबसूरत बनाए रखना चाहती हैं, तो आज से ही ग्लिसरीन को अपनी डेली स्किनकेयर रूटीन का हिस्सा बना लें।
यह सस्ता, असरदार और पूरी तरह सुरक्षित विकल्प है।

राष्ट्र की परम्परा ने सुझाव दिया है — किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले अपनी त्वचा विशेषज्ञ या जानकार से परामर्श अवश्य लें।

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नागा साधु का हाई वोल्टेज ड्रामा: नशे की हालत में सड़क पर मचाया बवाल, दरोगा छोड़ गए बुलेट – पुलिस जांच में जुटी

वाराणसी (राष्ट्र की परम्परा)। काशी नगरी में शनिवार को एक अनोखा नजारा देखने को मिला, जब एक नागा साधु ने नशे की हालत में सड़क पर हंगामा मचाकर पुलिस की नाक में दम कर दिया। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के गोलघर साड़ी मंडी इलाके का है, जहां साधु के तांडव के आगे पुलिसकर्मी खुद को बेबस महसूस करने लगे। हालात ऐसे बने कि चौकी इंचार्ज को अपनी बुलेट मोटरसाइकिल छोड़कर भागना पड़ा।

सोते साधु को उठाना पड़ा भारी

जानकारी के अनुसार, गोलघर साड़ी मंडी क्षेत्र में एक नागा साधु सड़क किनारे एक मकान के बाहर सोया हुआ था। लंबे समय तक उसके न उठने पर स्थानीय लोगों ने अनहोनी की आशंका जताई और पुलिस को सूचना दी।

सूचना मिलते ही कालभैरव चौकी इंचार्ज विवेक शुक्ला और सिपाही अरुण व्यास मौके पर पहुंचे। लोगों के साथ मिलकर उन्होंने साधु को जगाने की कोशिश की, लेकिन जब साधु नहीं उठा, तो किसी ने उस पर पानी डाल दिया। इसके बाद साधु अचानक उठ बैठा और गुस्से में तांडव शुरू कर दिया।

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पुलिस को देखकर बढ़ा साधु का गुस्सा

पुलिस को सामने देखकर नागा साधु और भड़क गया। उसने सड़क पर जमकर हंगामा मचाना शुरू कर दिया। कभी वह गुजरते वाहनों के आगे लेट गया, तो कभी राहगीरों को अपशब्द कहने लगा।

स्थिति बिगड़ती देख चौकी इंचार्ज ने हालात संभालने की कोशिश की, लेकिन साधु का गुस्सा शांत नहीं हुआ।

दरोगा की बुलेट पर साधु का कब्जा

ड्रामा तब और बढ़ गया जब चौकी इंचार्ज विवेक शुक्ला वहां से जाने लगे तो साधु उनकी बुलेट मोटरसाइकिल के पीछे लटक गया और जाने से रोकने लगा। बताया जा रहा है कि वह नशे की हालत में था, जिससे उसकी बातें किसी को समझ नहीं आ रही थीं।

हालात बेकाबू होते देख दरोगा ने अपनी बुलेट मौके पर ही छोड़ दी और उसकी चाबी स्थानीय लोगों को देकर वहां से निकल गए। बाद में लोगों ने देखा कि साधु उसी बुलेट को कभी आगे तो कभी पीछे चला रहा था।

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आधे घंटे तक चलता रहा हंगामा

करीब आधे घंटे तक चला यह हाई वोल्टेज ड्रामा पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा गया। तमाशा देखने वालों की भीड़ जुट गई, जबकि पुलिसकर्मी मौके से नदारद हो गए।
कुछ देर बाद नागा साधु खुद ही वहां से चला गया। उसके जाने के बाद स्थानीय लोगों ने दरोगा की बुलेट को सुरक्षित थाने पहुंचा दिया।

पुलिस जांच में जुटी

इस पूरे मामले के बाद से वाराणसी पुलिस हरकत में आ गई है। पुलिस ने कहा कि नागा साधु की पहचान की जा रही है और उसके व्यवहार के पीछे की वजह (नशा या मानसिक असंतुलन) की जांच की जा रही है।

स्थानीय लोग इस घटना को लेकर लगातार चर्चा कर रहे हैं। किसी ने कहा – “अब पुलिस को भी काशी में साधु-संतों की ताकत का अंदाज़ा हो गया होगा।”