Monday, July 6, 2026
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जनहित में कुशीनगर के तहसीलदारों का तबादला, डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने जारी किया आदेश

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने जनहित में प्रशासनिक पुनर्संरचना के तहत जनपद के तहसीलदारों एवं नायब तहसीलदारों के स्थानांतरण और नई तैनाती के आदेश जारी किए हैं। यह आदेश शासनिक कार्यों के सुचारू संचालन को ध्यान में रखते हुए तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

जारी आदेश के अनुसार, महेश कुमार, तहसीलदार खड़डा को स्थानांतरित करते हुए तहसीलदार (न्यायिक) तमकुहीराज के पद पर तैनात किया गया है। वहीं सुनील कुमार सिंह–I, तहसीलदार तमकुहीराज को स्थानांतरित कर संबद्ध कलक्ट्रेट मुख्यालय में भेजा गया है। उन्हें सीलिंग से संबंधित मामलों और उच्च न्यायालय में लंबित वादों की पैरवी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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इसके अलावा, अभिषेक कुमार, नायब तहसीलदार खड़डा को निर्देश दिया गया है कि वे अपने मूल कार्य के साथ-साथ तहसीलदार खड़डा के रिक्त दायित्वों (धारा–67 के वादों को छोड़कर) का निस्तारण करेंगे। जबकि धारा–67 से संबंधित वादों का निस्तारण लिंक अधिकारी तहसीलदार पडरौना द्वारा किया जाएगा।

डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि यह निर्णय राजस्व कार्यों की गति बढ़ाने और प्रशासनिक कार्य प्रणाली को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। आदेश का प्रभाव तत्काल रूप से लागू होगा।

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“मौज और खुशियों में फोड़े फटाके, धर्म-परंपरा से न जोड़ें”

भारत में दीवाली का त्योहार रोशनी, रंगोली, और खुशियों का प्रतीक है। यह वह समय है जब हम अपने घरों को दीयों से सजाते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं, और अपनों के साथ उत्सव मनाते हैं। लेकिन पिछले कुछ दशकों में, दीवाली का एक और पहलू चर्चा में रहा है—फटाके। फटाकों का शोर, धुआँ, और पर्यावरण पर उनका प्रभाव अब एक गंभीर बहस का विषय बन चुका है। सवाल यह है कि क्या फटाके वाकई हमारी दीवाली की परंपरा का हिस्सा हैं? और क्या इन्हें धर्म से जोड़ना उचित है?

भारत में फटाकों का इतिहास
भारत में फटाकों का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है। इतिहासकारों के अनुसार, फटाकों की शुरुआत चीन में हुई थी, और भारत में ये मध्यकाल में, लगभग 15वीं-16वीं सदी में, मुगल शासकों के समय प्रचलन में आए। उस समय फटाकों का उपयोग युद्ध, समारोहों, और शाही उत्सवों में होता था। दीवाली जैसे धार्मिक पर्वों में फटाकों का व्यापक उपयोग 20वीं सदी में ही शुरू हुआ। यानी, फटाके हमारे हजारों साल पुराने सांस्कृतिक इतिहास का हिस्सा नहीं हैं। फिर भी, आज इन्हें दीवाली की परंपरा का अभिन्न अंग मान लिया गया है।

दीवाली में परंपरा का इतिहास और विज्ञान

दीवाली का मूल आधार हैप्रकाश और ज्ञान का उत्सव। यह पर्व श्री राम के अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है, जब नगरवासियों ने दीयों से उनका स्वागत किया था। दीये, रंगोली, और मिठाइयाँ दीवाली की आत्मा हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, मिट्टी के दीये जलाने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। तेल और बाती का दहन न केवल प्रकाश देता है, बल्कि पर्यावरण को शुद्ध करने में भी मदद करता है। वैसे ही घी में किए गए दिए बहुत मात्रामे ऑक्सीजन उत्पन्न करते हे। साथमे रंगोली बनाने की परंपरा रचनात्मकता और सौंदर्य को बढ़ावा देती है, जो मन और आत्मा को सुकून देती है।और आपकी कला प्रस्तुत करने का मौका देती हे।
दूसरी ओर, फटाकों का वैज्ञानिक प्रभाव चिंताजनक है। फटाकों से निकलने वाला धुआँ वायु प्रदूषण को बढ़ाता है, जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, और अन्य हानिकारक कण शामिल होते हैं। यह न केवल मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि पशु-पक्षियों और पर्यावरण को भी नुकसान पहुँचाता है। शोर प्रदूषण से बच्चों, बुजुर्गों, और पालतू जानवरों को गंभीर परेशानी होती है। फिरभी दुख तो तब होता हे जब हम अपने धर्म को दूसरे धर्म को जोड़के बोलते हे की दीवाली हे तो फ़टाके फोड़ेंगे वह धर्म को यह कहो वह कहो।इससे यह लगता हे की 400 साल पुराने फटाके हजारों साल पुराने इतिहास पर भारी?हमारा सांस्कृतिक इतिहास हजारों साल पुराना है, जिसमें दीवाली का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व गहराई से जुड़ा है। लेकिन फटाके, जो केवल 400-500 साल पहले भारत आए, क्या वाकई इस प्राचीन परंपरा का हिस्सा हो सकते हैं? फटाकों को दीवाली से जोड़ना एक आधुनिक चलन है, जिसे हमने मनोरंजन के लिए अपनाया। यह शोख और उत्साह का प्रतीक हो सकता है, लेकिन इसे धर्म या परंपरा का हिस्सा मानना गलत है।
हमारे शास्त्रों में दीवाली का उल्लेख दीयों, पूजा, और भक्ति के साथ है, न कि शोर और धुएँ के साथ।फटाकों को धर्म से जोड़कर आप धर्म के विरुद्ध जा रहे हैं। हिंदू धर्म में प्रकृति को पूजनीय माना गया है। नदियाँ, पर्वत, वृक्ष—सबको देवता के रूप में देखा जाता है। दीवाली का असली संदेश है अंधेरे पर प्रकाश की जीत, अज्ञान पर ज्ञान की विजय। फटाकों का धुआँ और शोर न तो प्रकाश बढ़ाता है, न ही ज्ञान। यह केवल क्षणिक मोज देता है, जिसका मूल्य पर्यावरण और स्वास्थ्य के नुकसान के रूप में चुकाना पड़ता है।

फटाकों को धर्म से जोड़कर हम अनजाने में अपने ही धर्म के मूल्यों के खिलाफ कार्य कर रहे हैं

धर्म हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने की सीख देता है, न कि उसे नष्ट करने की। फटाकों के उपयोग को धार्मिक कृत्य मानना न केवल गलत है, बल्कि यह हमारे धर्म की मर्यादा को भी ठेस पहुँचाता है।दीए और रंगोली का धार्मिक महत्वदीवाली में दीये जलाने का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। दीया आत्मा का प्रकाश है, जो हमें अंधकार से मुक्ति की ओर ले जाता है। रंगोली का महत्व भी गहरा है—यह घर में सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करती है और समृद्धि का प्रतीक है। ये परंपरा न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि हमारे मन को शांति और समृद्धि का अनुभव भी कराती हैं। इन्हें अपनाने से हम अपनी संस्कृति को जीवित रखते हैं और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रखते हैं।
आपका जीवन दीयों की तरह प्रकाशमय हो, और रंगोली की तरह रंगीन! मिठाई की तरह मीठा रहे और परिवार में सुख , शांति समृद्धि बनी रहे।

प्रतीक संघवी, राजकोट गुजरात

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गांव की गली में मिला था 19 वर्षीय युवती का शव

लार (देवरिया)।
लार थाना क्षेत्र के हरिकुंडावल गांव के हरिजन टोला में रविवार सुबह एक 19 वर्षीय युवती का शव उसके घर के बगल स्थित गली में पड़ा मिला। मृतका की पहचान गांव निवासी विरन प्रसाद की पुत्री मनीषा के रूप में हुई थी। इस घटना की सूचन युवती के पिता द्वारा 112 नंबर पर दी गई थी । सूचना पर पुलिस मौके पहुंची और जांच-पड़ताल शुरू की। इसके कुछ ही देर बाद पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) सुनील कुमार सिंह तथा सीओ सलेमपुर भी घटनास्थल पर पहुंचे और फॉरेंसिक टीम व डॉग स्क्वॉड के साथ मौके का बारीकी से निरीक्षण किया।

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। मृतका के पिता विरन प्रसाद द्वारा दी गई तहरीर में एक पूर्व परिचित व्यक्ति पर हत्या का संदेह व्यक्त किया गया है। उसी आधार पर थाना लार पुलिस ने समुचित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना प्रारंभ कर दी है।

अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) सुनील कुमार सिंह ने बताया कि “घटना के अनावरण हेतु पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं। फॉरेंसिक रिपोर्ट और साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही पूरे प्रकरण का खुलासा कर लिया जाएगा।”

फिलहाल गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है। एहतियातन क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

फायरिंग की गूंज के साथ थम गया एक पुलिसकर्मी का जीवन

इंस्पेक्टर सुमन तिर्की ने खत्म की अपनी जीवन यात्रा, पुलिस विभाग में शोक की लहर

नालंदा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जिले के राजगीर थाना परिसर से मंगलवार सुबह एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने पूरे पुलिस महकमे को झकझोर दिया। डायल-112 सेवा में तैनात एएसआई सुमन तिर्की ने अपनी सरकारी रिवॉल्वर से खुद को गोली मारकर जीवन लीला समाप्त कर ली।
घटना की भनक लगते ही थाना परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही डीएसपी सुनील कुमार समेत जिले के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तत्काल शव को कब्जे में लेकर सदर अस्पताल, बिहारशरीफ भेजा, जहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया प्रारंभ की गई।
फॉरेंसिक टीम को भी घटनास्थल पर बुलाया गया, जो हर बारीकी से सबूत इकट्ठा कर रही है।
बताया जा रहा है कि सुमन तिर्की, झारखंड के गुमला जिले के धाबरा थाना क्षेत्र के बिहार भटौली गांव के निवासी थे। करीब एक वर्ष से वे राजगीर में डायल 112 सेवा में अपनी ड्यूटी निभा रहे थे।
डीएसपी सुनील कुमार के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह मामला पारिवारिक कलह से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। हालांकि, घटना की सटीक वजह सामने आने के लिए पुलिस जांच में जुटी है।
पुलिस लाइन से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक यह खबर फैलते ही शोक की लहर दौड़ गई। साथियों ने बताया कि सुमन तिर्की शांत स्वभाव के अधिकारी थे, उनकी आत्महत्या ने सभी को स्तब्ध कर दिया है।

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बिहार चुनाव में बीजेपी का बड़ा दांव: 48 प्रत्याशियों की पहली सूची तय, कई पुराने चेहरों की छुट्टी

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर जारी रस्साकशी के बीच भाजपा ने बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने सोमवार को अपने 48 संभावित प्रत्याशियों की पहली सूची लगभग तय कर ली है और इनमें से सभी उम्मीदवारों को अगले एक-दो दिन में नामांकन दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इन सीटों पर किसी तरह का विवाद नहीं है और उम्मीदवारों के नामों पर संगठन की पूरी सहमति बन चुकी है। सूची में कई मौजूदा विधायकों के टिकट दोबारा काटे गए हैं, वहीं कुछ नए चेहरों को मौका दिया गया है, जिससे पार्टी ने “युवा और संतुलित टीम” का संदेश देने की कोशिश की है।

48 संभावित प्रत्याशी

सिद्धार्थ सौरभ (बिक्रम), संगीता कुमारी (मोहनिया), पवन जायसवाल (ढाका), मोतीलाल प्रसाद (रीगा), अनिल कुमार (बथनाहा), सुनील कुमार पिंटू (सीतामढ़ी), विनोद नारायण झा (बेनीपट्टी), अरुण शंकर प्रसाद (खजौली), हरिभूषण ठाकुर (बिस्फी), नीतीश मिश्रा (झंझारपुर), नीरज कुमार सिंह (छातापुर), विद्या सागर (फारबिसगंज), विजय कुमार मंडल (सिकटी), कृष्ण कुमार ऋषि (बनमनखी), विजय कुमार खेमका (पूर्णिया), तारकिशोर प्रसाद (कटिहार), कविता देवी (कोढ़ा), आलोक रंजन झा (सहरसा), सुजीत कुमार सिंह (बौराम गौरा), संजय सरावगी (दरभंगा), जीवेश मिश्रा (जाले), विनय बिहारी (लौरिया), कृष्णनंदन पासवान (हरसिद्धि), राणा रणधीर (मधुबन), लाल बाबू प्रसाद गुप्ता (चिरैया), अरुण कुमार सिंह (बरुराज), अशोक कुमार सिंह (पारू), राजकुमार सिंह (साहेबगंज), राम प्रवेश राय (बरौली), मंगल पांडेय (सिवान), देवेश कान्त सिंह (गोरियाकोठी), जनक सिंह (तरैया), कृष्ण कुमार मंटू (अमनौर), लखेंद्र कुमार रौशन (पातेपुर), राजेश कुमार सिंह (मोहिउद्दीनगर), वीरेंद्र कुमार (रोसड़ा), कुमार शैलेन्द्र (बीहपुर), राम नारायण मंडल (बांका), विजय कुमार सिन्हा (लखीसराय), संजीव चौरसिया (दीघा), नितिन नवीन (बांकीपुर), श्रेयसी सिंह (जमुई), निक्की हेब्रम (कटोरिया), प्रमोद कुमार (मोतीहारी), कर्णजीत सिंह (दरौंदा), निशा सिंह (प्राणपुर), कुसुम देवी (गोपालगंज), वीरेंद्र सिंह (वाजीरगंज)।

पटना सिटी से नंदकिशोर यादव की जगह नया चेहरा संभव

सूत्रों के अनुसार, भाजपा की इस सूची में कुछ चौंकाने वाले नाम भी हैं। पटना सिटी से विधायक नंद किशोर यादव का टिकट कटने की चर्चा तेज है। उनकी जगह रत्नेश कुशवाहा को टिकट मिलने की संभावना जताई जा रही है।
वहीं, कुम्हरार से विधायक अरुण कुमार का भी नाम सूची से बाहर है और उनकी सीट से संजय गुप्ता को मौका मिल सकता है।
दरभंगा से संजय सरावगी और झंझारपुर से नीतीश मिश्रा को हरी झंडी मिल गई है। इसके अलावा, लखीसराय से उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, बांकीपुर से मंत्री नितिन नवीन, जाले से जीवेश मिश्रा, और छातापुर से नीरज कुमार सिंह बबलू पुनः मैदान में उतरेंगे।

भाजपा की इस सूची से साफ है कि पार्टी इस बार ‘युवा जोश और अनुभव का संगम’ बनाकर चुनावी समीकरणों को साधने में जुट गई है।

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गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)।सदर तहसील क्षेत्र के जंगल कौड़िया विकासखंड की ग्रामसभा मीरपुर में पांच दिन से सूखी नल जलापूर्ति आखिरकार बहाल हो गई। जल निगम ने ख़राब मोटर की मरम्मत कर मंगलवार को पुनः पानी की सप्लाई शुरू कर दी, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।

गांव में बीते सप्ताह मोटर जलने से जलापूर्ति ठप हो गई थी। इससे मीरपुर के सैकड़ों परिवारों को पेयजल संकट झेलना पड़ा। महिलाओं और बच्चों को रोज़ाना कई किलोमीटर दूर हैंडपंपों से पानी भरना पड़ रहा था। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई घरों में पीने के पानी की बोतलें खरीदनी पड़ीं।

स्थानीय मीडिया में समस्या प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद विभाग हरकत में आया। जल निगम के तकनीकी दल ने गांव पहुंचकर मोटर को बदला और सप्लाई लाइन की सफाई भी कराई। मरम्मत पूरी होते ही नल जल योजना से पानी आने लगा।

गांववासियों ने मीडिया और अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारिता की सक्रियता से ही विभाग ने त्वरित कार्रवाई की। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब नियमित निरीक्षण से भविष्य में जल संकट दोबारा न झेलना पड़े।

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आरटीओ में बड़ा घोटाला: फर्जी दस्तावेजों पर जारी हुई 4 ट्रकों की आरसी, विजिलेंस जांच शुरू

शिमला (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। आरटीओ शिमला कार्यालय में वाहनों के पंजीकरण में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। विजिलेंस ब्यूरो की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि चार ट्रकों को फर्जी दस्तावेजों और बिना भौतिक सत्यापन के आरसी (पंजीकरण प्रमाणपत्र) जारी किए गए। मामले में आरटीओ कार्यालय के अधिकारियों, वाहन मालिकों और निजी कंपनियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। विजिलेंस ने इस पूरे प्रकरण में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मामला क्या है?

जांच के अनुसार, ट्रक नंबर एचपी 63 डी 5642, एचपी 63 डी 5842, एचपी 63 एफ 2342 और एचपी 63 डी 3842 अशोक लीलैंड कंपनी की अंबाला एजेंसी से खरीदे गए थे। इन ट्रकों पर टैंकर फ्रेब्रिकेशन का काम साई फेब्रिकेशन एंड इंजीनियरिंग वर्क्स (हिसार) और सूर्या टैंक एंड एलाइड इंडस्ट्रीज (पठानकोट) ने किया था।

वाहन मालिकों का दावा था कि ट्रक शिमला भौतिक सत्यापन के लिए लाए गए थे और टोल टैक्स नकद में दिया गया था, लेकिन टोल रसीदें मौजूद नहीं हैं। विजिलेंस जांच में सामने आया कि 17 से 21 जुलाई 2025 के बीच सनवारा टोल बैरियर, परवाणू से कोई भी ट्रक नहीं गुजरा।

इससे साफ है कि वाहन शिमला लाए ही नहीं गए, फिर भी आरटीओ शिमला कार्यालय ने बिना सत्यापन के आरसी जारी कर दीं।

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फर्जीवाड़े के सबूत

जांच में यह भी सामने आया कि साई फेब्रिकेशन ने वाहन मालिकों के साथ मिलकर फर्जी रिकॉर्ड तैयार किया। ट्रकों की फैक्ट्री में आने की तारीख को अशोक लीलैंड अंबाला की ओर से जारी गेट पास से दो दिन पहले का दिखाया गया। इतना ही नहीं, फेब्रिकेशन यूनिट ने कोई गेट एंट्री/एग्जिट रजिस्टर भी नहीं रखा, फिर भी उन्होंने सटीक तारीखों वाले दस्तावेज जमा किए — जो जांच एजेंसी को बेहद संदिग्ध लगे।

शिकायत और कार्रवाई

इस घोटाले की शिकायत बलविंद्र सिंह निवासी डेराबस्सी (पंजाब) ने अप्रैल 2025 में विजिलेंस को दी थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरटीओ शिमला की ओर से कई सर्टिफिकेट और आरसी बिना सत्यापन के जारी की गईं।

विजिलेंस की जांच में यह भी सामने आया कि बलविंद्र सिंह की फर्म ने आईओसीएल (इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड) के एक टेंडर के लिए आवेदन किया था, लेकिन टेंडर चारों ट्रकों के मालिकों को मिल गया था। शिकायत के बाद जब जांच हुई, तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।

विजिलेंस ने अब वाहन मालिक अनुपम चंडोक, उमंग चंडोक, साई फेब्रिकेशन एंड इंजीनियरिंग वर्क्स (हिसार) के अधिकारियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता साबित होने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बिना अनुमति बच्चों की पढ़ाई! शिक्षा विभाग ने किया बड़ा खुलासा

खंड शिक्षा अधिकारी की बड़ी कार्रवाई — धुरियापार में बिना मान्यता चल रहे स्कूल पर लगा ताला, प्रबंधन में हड़कंप

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। उरुवा विकासखंड के धुरियापार क्षेत्र में बिना शैक्षिक मान्यता के चल रहे शोभा देवी पब्लिक स्कूल पर खंड शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बड़ी कार्रवाई की है। निरीक्षण के दौरान विद्यालय के पास किसी भी प्रकार के मान्यता संबंधी दस्तावेज न मिलने पर उन्होंने तत्काल प्रभाव से विद्यालय बंद कराने का आदेश दिया।

जानकारी के अनुसार, उक्त विद्यालय में कक्षा 1 से 12 तक की पढ़ाई बिना अनुमति के कराई जा रही थी। खंड शिक्षा अधिकारी के पहुंचने पर विद्यालय प्रबंधन से जब मान्यता प्रमाणपत्र मांगा गया, तो वे कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इस पर बीईओ मनोज कुमार सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए विद्यालय को तत्काल बंद करने का निर्देश दिया और स्पष्ट कहा कि जब तक विद्यालय मान्यता प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं करता, तब तक किसी भी स्थिति में इसे दोबारा न खोला जाए।

क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार, उरुवा ब्लॉक में दर्जनों ऐसे विद्यालय संचालित हैं जो विभागीय अनुमति के बिना ही शिक्षा व्यवसाय में लिप्त हैं। इन स्कूलों में न तो योग्य शिक्षक हैं, न ही आवश्यक आधारभूत सुविधाएँ।
खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि क्षेत्र में लगातार अभियान चलाया जा रहा है और बिना मान्यता के स्कूलों पर शिकंजा कसा जाएगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि दोबारा ऐसा पाया गया, तो संबंधित विद्यालय प्रबंधन के विरुद्ध सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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पुलिस पर उठे सवाल

भाटपार रानी/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा):भाटपार रानी थाना क्षेत्र में सोमवार देर शाम एक युवक की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान ग्राम कोटिलवां निवासी मनु यादव (उम्र लगभग 18 से 20 वर्ष) पुत्र उमेश यादव के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक, मनु परिवार का इकलौता सहारा था। पिता उमेश यादव विदेश में नौकरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। बेटे की अचानक हुई मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।बताया गया कि सोमवार की शाम मनु अपने गाँव के ही बीरेंद्र के बेटे के साथ किसी “बर्थडे पार्टी” में शामिल होने के लिए निकला था। घर से जाते समय उसने परिजनों से कहा था कि वह जल्दी लौट आएगा और रात को मछली बनाकर मिलकर खाने की बात कही थी। परंतु देर रात तक जब वह घर नहीं लौटा तो परिजनों की चिंता बढ़ गई। मां और बहनों ने गाँव व आसपास के क्षेत्रों में उसकी तलाश शुरू की।

सड़क किनारे मिली बाइक घटना स्थल से कुछ दूरी पर पड़ा मिला शव खोजबीन के दौरान सलेमपुर-मैरवा मार्ग पर रघुनाथपुर के पास सड़क किनारे मनु की लावारिस बाइक खड़ी मिली। बाइक में चाभी भी लगी हुई थी, जिससे आशंका गहराने लगी। कुछ घंटों बाद ही ग्राम बरईपार में सड़क से कुछ दूरी पर उसका शव मिलने की सूचना पर हड़कंप मच गया। देखते-देखते घटनास्थल पर सैकड़ों ग्रामीण जुट गए।सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मौके पर पहुंचे समाजसेवी अश्वनी कुमार सिंह और पूर्व विधायक आशुतोष उपाध्याय (बबलू) ने घटना पर गहरी संवेदना प्रकट की और कहा कि पुलिस को मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए ताकि तथ्यों का जल्द खुलासा हो सके।इलाके में दहशत, पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल स्थानीय लोगों ने बताया कि हाल में क्षेत्रीय पुलिस सर्किल में हुए तबादलों के बाद अपराधियों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि युवक की संदिग्ध मौत न तो सड़क दुर्घटना जैसी लगती है और न ही सामान्य घटना। कई लोगों ने इसे हत्या की आशंका से जोड़ते हुए गहन जांच की मांग की है।ग्रामीणों का कहना है कि मनु सभी से मिलनसार स्वभाव का था और किसी से उसकी दुश्मनी नहीं थी। अचानक उसकी मौत से गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। कोटिलवां गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं पुलिस प्रशासन पर भी ग्रामीणों ने सुस्ती बरतने के आरोप लगाए हैं।पुलिस की जांच जारीभाटपार रानी थानाध्यक्ष ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को जांच के लिए बुलाया गया है। सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा।इस बीच स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि युवक की मौत के पीछे की सच्चाई सामने लाने के लिए उच्चस्तरीय जांच टीम गठित की जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

कुपवाड़ा में घुसपैठ की कोशिश नाकाम, सीमा पर सेना का चौकन्ना पहरा — सर्दियों से पहले बढ़ी निगरानी

सेना ने एलओसी पर संदिग्ध गतिविधि देख दी जवाबी कार्रवाई, सर्च ऑपरेशन जारी | बीएसएफ ने भी बढ़ाई चौकसी, सीमा पार लॉन्च पैड्स पर आतंकियों की हलचल तेज

कुपवाड़ा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा ज़िले में भारतीय सेना ने सोमवार देर रात नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर एक और घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया।
सेना के सूत्रों के अनुसार, गश्ती दल ने संदिग्ध हलचल देखी और घुसपैठियों को ललकारा। इसके बाद दोनों ओर से कुछ देर तक गोलीबारी हुई। फिलहाल इलाके में सघन तलाशी अभियान जारी है।

अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान की ओर से सीमा पार घुसपैठ की कोशिशें सर्दियों से पहले बढ़ जाती हैं। बर्फबारी शुरू होने से पहले आतंकी घाटी में घुसपैठ की कोशिशें तेज़ कर देते हैं।
भारत-पाक सीमा पर बढ़ी सतर्कता
इन घटनाओं के बीच बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) ने भी अपनी निगरानी और सतर्कता को और मजबूत किया है।
बीएसएफ के अतिरिक्त महानिदेशक सतीश एस. खंडारे ने बताया, “ऐतिहासिक रूप से सर्दियों से पहले घुसपैठ की कोशिशें बढ़ जाती हैं। हमने अपने जवानों को हाई अलर्ट पर रखा है और सीमा पर तकनीकी निगरानी बढ़ाई गई है।”

उन्होंने कहा कि खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक सीमा पार आतंकियों के कई लॉन्च पैड सक्रिय हैं। “सीमा पार से आतंकी गतिविधियों की साजिशें जारी हैं, लेकिन हमारी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क और तैयार हैं,” उन्होंने जोड़ा।

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मदीना में मुस्लिम युवक ने संत प्रेमानंद के लिए की दुआ, कहा – “इंसानियत सबसे बड़ी धर्म”, वीडियो वायरल

आगरा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य को लेकर प्रयागराज के रहने वाले सुफ़ियान अल्लाहबादी ने मदीना शरीफ में दुआ मांगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा – “क्या हिंदू, क्या मुसलमान, इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है।” उनका यह वीडियो अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है।

सुफ़ियान ने मदीना की पवित्र मस्जिद में संत प्रेमानंद महाराज की फोटो दिखाते हुए कहा कि उन्हें महाराज के स्वास्थ्य की खबर से चिंता हुई। उन्होंने दुआ की – “हे अल्लाह, भारत के महान संत प्रेमानंद महाराज को शीघ्र स्वस्थ करें ताकि वे अपने भक्तों का मार्गदर्शन जारी रख सकें।”

सुफ़ियान का यह संदेश सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बन गया है। उन्होंने कहा, “कोई हिंदू हो या मुसलमान, फर्क नहीं पड़ता। जरूरी यह है कि इंसान अच्छा और सच्चा हो।” सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनका यह वीडियो लाखों लोगों तक पहुंच चुका है।

11 दिन बाद फिर शुरू हुई संत प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा
स्वास्थ्य में सुधार के बाद महाराज ने 11 दिन बाद अपनी पदयात्रा दोबारा शुरू कर दी है। सोमवार को उन्होंने पूर्ववत मार्ग पर यात्रा की। मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालु खड़े रहे और जगह-जगह रंगोली व फूलों से स्वागत किया गया।

स्वास्थ्य को लेकर फैली थी अफवाहें
2 अक्टूबर को श्रीराधे हित केलिकुंज आश्रम से संदेश जारी किया गया था कि संत प्रेमानंद महाराज की तबीयत ठीक न होने के कारण पदयात्रा कुछ दिन स्थगित रहेगी। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके स्वास्थ्य को लेकर अफवाहें फैल गईं।

विदेशों तक फैली आस्था
संत प्रेमानंद महाराज के अनुयायी न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी हैं। बॉलीवुड जगत की कई हस्तियाँ भी उनसे आशीर्वाद ले चुकी हैं।

बाद में महाराज ने स्वयं स्पष्ट किया कि वह स्वस्थ हैं और कुछ लोग बेवजह भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने आश्रम से बाहर आकर दर्शन भी दिए, जिससे भक्तों में उत्साह लौट आया। अब एक बार फिर से उनकी पदयात्रा में पहले जैसी भीड़ और श्रद्धा दिखाई दे रही है।

अहोई का व्रत रखे इंतजार करती रही मां, खिर्वा फ्लाईओवर पर हादसे में 19 साल के बेटे की मौत

मेरठ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के खिर्वा फ्लाईओवर पर सोमवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में 19 वर्षीय बाइक मिस्त्री सोनू की मौत हो गई। हादसे में उसका साथी योगी गंभीर रूप से घायल हो गया। दोनों युवक बाइक से पल्लवपुरम से लौट रहे थे, तभी पीछे से आ रहे अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों करीब 10 फीट दूर जाकर सड़क पर गिर पड़े।

राहगीरों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने सोनू को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। सीओ दौराला प्रकाशचंद्र अग्रवाल ने बताया कि आरोपी वाहन चालक की तलाश के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

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मां ने बेटे की लंबी उम्र के लिए रखा था अहोई का व्रत
मृतक सोनू नंगलाताशी गांव निवासी किशनवीर का तीसरा बेटा था और बाइक मिस्त्री का काम करता था। हादसे की शाम उसकी मां राजेश ने बेटे की लंबी उम्र के लिए अहोई माता का व्रत रखा था। पूजा के बाद सोनू ने घर से निकलते हुए कहा था कि “आधे घंटे में लौट आऊंगा।” लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था — कुछ देर बाद ही उसकी मौत की खबर आई।

घर में मातम छा गया। मां राजेश बार-बार बिलखती हुई कह रही थीं कि उन्होंने बेटे की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा था, लेकिन उसी दिन उसका निधन हो गया। पुलिस का कहना है कि अगर सोनू हेलमेट पहने होता तो उसकी जान बच सकती थी।

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नेताओं, कलाकारों और समाजसेवियों की विरासत

⚰️ 14 अक्टूबर को हुए प्रसिद्ध निधन


रज़िया सुल्तान (1240) – दिल्ली की पहली महिला शासिका
रज़िया सुल्तान का निधन 14 अक्टूबर 1240 को हुआ। वे दिल्ली की पहली और एकमात्र महिला शासिका थीं। रज़िया ने शासन में साहस, न्यायप्रियता और प्रशासनिक कौशल का परिचय दिया। उनका योगदान भारतीय इतिहास में महिला नेतृत्व की मिसाल है। उन्होंने समाज में महिलाओं की स्थिति सुधारने और न्याय प्रणाली को सुदृढ़ करने का प्रयास किया। उनका जन्मस्थान दिल्ली था और उन्होंने शासनकाल में कई प्रशासनिक और सामाजिक सुधार किए।
नरसिंह चिंतामन केलकर (1947) – पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी
नरसिंह चिंतामन केलकर का निधन 14 अक्टूबर 1947 को हुआ। वे लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के सहयोगी और प्रसिद्ध पत्रकार थे। उनका योगदान स्वतंत्रता संग्राम और पत्रकारिता में अमूल्य रहा। उन्होंने भारतीय समाज और राजनीति में जागरूकता फैलाने का काम किया। उनका जन्म महाराष्ट्र में हुआ था। केलकर ने शिक्षा, पत्रकारिता और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
दसरथ देब (1998) – भारतीय कम्युनिस्ट नेता
दसरथ देब का निधन 14 अक्टूबर 1998 को हुआ। वे भारतीय कम्युनिस्ट नेता और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री थे। उनका योगदान राजनीतिक सुधार, सामाजिक न्याय और जनहित के लिए प्रयास करना रहा। देब ने त्रिपुरा के विकास और समाज कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जन्मस्थान त्रिपुरा था। उन्होंने शिक्षा, राजनीतिक नेतृत्व और समाज सुधार में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दत्तोपंत ठेंगड़ी (2004) – मजदूर संघ के संस्थापक
दत्तोपंत ठेंगड़ी का निधन 14 अक्टूबर 2004 को हुआ। वे भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक और राष्ट्रवादी विचारक थे। उनका योगदान मजदूर अधिकारों, सामाजिक न्याय और राजनीतिक जागरूकता में अतुलनीय था। ठेंगड़ी ने समाज के कमजोर वर्गों के लिए संघर्ष किया और मजदूरों को संगठित किया। उनका जन्मस्थान महाराष्ट्र था। उन्होंने शिक्षा और मजदूर सुधार के क्षेत्र में भी योगदान दिया।
मोहन धारिया (2013) – पूर्व केंद्रीय मंत्री और समाजसेवी
मोहन धारिया का निधन 14 अक्टूबर 2013 को हुआ। वे भारतीय राजनीति और समाज सेवा में सक्रिय थे। उन्होंने ग्रामीण विकास, शिक्षा और सामाजिक कल्याण में योगदान दिया। उनका जन्मस्थान महाराष्ट्र था। धारिया का योगदान समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाना और शिक्षा के माध्यम से विकास करना रहा।
शोभा नायडू (2020) – प्रसिद्ध कुचिपुड़ी नृत्यांगना
शोभा नायडू का निधन 14 अक्टूबर 2020 को हुआ। वे कुचिपुड़ी नृत्य की प्रख्यात कलाकार थीं। उनका योगदान भारतीय शास्त्रीय नृत्य को विश्व स्तर पर पहचान दिलाना और कला शिक्षा में युवाओं को मार्गदर्शन देना रहा। उनका जन्मस्थान आंध्र प्रदेश था। शोभा नायडू ने कला, शिक्षा और सांस्कृतिक समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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👶 14 अक्टूबर को जन्मे और प्रसिद्ध व्यक्तित्व

14 अक्टूबर का दिन इतिहास और समाज के लिए कई महान


व्यक्तित्वों का जन्मदिन रहा है। इस दिन जन्मे लोगों ने अपनी मेहनत, कौशल और समर्पण से समाज, देश और विश्व में अद्भुत योगदान दिया। आइए जानते हैं 14 अक्टूबर को जन्मे प्रमुख व्यक्तित्वों के बारे में, उनके शिक्षा, कार्यक्षेत्र और राष्ट्र के प्रति योगदान के साथ।

  1. बहादुर शाह प्रथम (1643) – मुगल सम्राट
    बहादुर शाह प्रथम का जन्म 14 अक्टूबर 1643 को हुआ था। वे मुगल साम्राज्य के पाँचवें सम्राट थे और उनके शासनकाल में साम्राज्य में स्थिरता और प्रशासनिक सुधार पर ध्यान केंद्रित किया गया। बहादुर शाह प्रथम ने धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा दिया और कई ऐतिहासिक काव्य और साहित्यिक योगदान को संरक्षण दिया। उनका जन्मस्थान आगरा, उत्तर प्रदेश था। उन्होंने युवावस्था से ही प्रशासनिक प्रशिक्षण लिया और राज्य के विभिन्न मामलों में अनुभव प्राप्त किया। उनके शासनकाल में समाज और संस्कृति में समृद्धि और संतुलन बना रहा।
  2. लालू भाई सामलदास मेहता (1863) – प्रसिद्ध उद्योगपति
    लालू भाई सामलदास मेहता का जन्म 14 अक्टूबर 1863 को हुआ था। वे भारत के अग्रणी उद्योगपतियों में से एक थे, जिन्होंने व्यापार, उद्योग और सामाजिक कार्यों में अद्वितीय योगदान दिया। उनका जन्म गुजरात के सूरत जिले में हुआ था। लालू भाई ने शिक्षा में विशेष रुचि ली और व्यवसायिक कौशल में महारत हासिल की। उन्होंने विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं और शिक्षा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके प्रयासों ने भारत में उद्योग और समाज के विकास में नई दिशा दी।
  3. लाला हरदयाल (1884) – गदर पार्टी के संस्थापक
    लाला हरदयाल का जन्म 14 अक्टूबर 1884 को भारत के बनारस (उत्तर प्रदेश) में हुआ। वे स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी और गदर पार्टी के संस्थापक थे। लाला हरदयाल ने शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दिया और युवा पीढ़ी में देशभक्ति और क्रांति की भावना जगाई। उनका प्रमुख कार्य भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को गति देना और विदेशी शासन के खिलाफ जागरूकता फैलाना था। उन्होंने अमेरिका और यूरोप में भारतीय छात्रों और प्रवासियों को संगठन में शामिल कर स्वतंत्रता संग्राम को वैश्विक स्तर पर मजबूती दी।
  4. बीरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य (1924) – असमिया साहित्यकार
    बीरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य का जन्म 14 अक्टूबर 1924 को असम के गुवाहाटी में हुआ। वे असमिया साहित्य के प्रख्यात लेखक और आलोचक थे। उन्होंने अपनी लेखनी से समाज और संस्कृति को समृद्ध किया। भट्टाचार्य ने कविता, उपन्यास और आलोचना के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया। उनका शिक्षा क्षेत्र में योगदान असमिया भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने नई पीढ़ी को साहित्यिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से मार्गदर्शन दिया।
  5. मोबुतु सेसे सेको (1930) – ज़ैरे के राष्ट्रपति
    मोबुतु सेसे सेको का जन्म 14 अक्टूबर 1930 को कांगो के बंडु में हुआ। वे ज़ैरे (कांगो) के राष्ट्रपति बने और उन्होंने देश के राजनीतिक और आर्थिक ढांचे में महत्वपूर्ण सुधार किए। उनके शासनकाल में राज्य का केंद्रीयकरण हुआ और विदेश नीति को सुदृढ़ किया गया। मोबुतु ने शिक्षा और सैन्य क्षेत्र में भी योगदान दिया, हालांकि उनके शासनकाल में विवाद और आलोचना भी हुई। उन्होंने अफ्रीका में कूटनीति और नेतृत्व के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाया।
  6. निखिल रंजन बैनर्जी (1931) – प्रख्यात सितार वादक निखिल रंजन बैनर्जी का जन्म 14 अक्टूबर 1931 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ। वे भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान सितार वादक थे। उनके संगीत ने भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रतिष्ठा बढ़ाई। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान किया और संगीत के प्रशिक्षण के लिए अनेक छात्र तैयार किए। बैनर्जी का योगदान भारतीय संगीत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने और संगीत शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय रहा।
  7. सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल (1950) – परमवीर चक्र से सम्मानित सैनिक
    अरुण खेत्रपाल का जन्म 14 अक्टूबर 1950 को बड़वानी, मध्य प्रदेश में हुआ। वे भारतीय सेना के सेकेंड लेफ्टिनेंट थे और 1971 के भारत-पाक युद्ध में वीरगति प्राप्त की। उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। खेत्रपाल का योगदान देश की रक्षा में अद्वितीय था। उन्होंने साहस, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका जीवन और कार्य आज भी भारतीय सैनिकों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
  8. रित्विक भट्टाचार्य (1979) – भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी
    रित्विक भट्टाचार्य का जन्म 14 अक्टूबर 1979 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ। वे भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी हैं जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का नाम रोशन किया। रित्विक ने खेल के क्षेत्र में अनुशासन, मेहनत और कौशल का परिचय दिया। उनका योगदान युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करना और स्क्वैश खेल के विकास में मदद करना रहा। उन्होंने खेल प्रशिक्षण और कोचिंग में भी युवाओं को मार्गदर्शन दिया।
  9. हरजिंदर कौर (1996) – भारतीय महिला वेटलिफ्टर
    हरजिंदर कौर का जन्म 14 अक्टूबर 1996 को पंजाब के लुधियाना में हुआ। वे भारतीय महिला वेटलिफ्टर हैं और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। हरजिंदर ने कड़ी मेहनत और अनुशासन से खेल जगत में अपनी पहचान बनाई। उनका योगदान महिला खेलों के विकास और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनना रहा। उन्होंने खेल और फिटनेस के क्षेत्र में युवाओं को मार्गदर्शन दिया और देश की खेल धरोहर में नई उपलब्धियाँ जोड़ीं।
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