Monday, July 6, 2026
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शादी के दबाव में प्रेमी ने की युवती की हत्या: पांच साल के रिश्ते का खौफनाक अंत, खेत में मिला शव

भटनी/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जिले के घांटी बाजार क्षेत्र में धान के खेत में मिली युवती की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया कि प्रेमी रोहित कुशवाहा ने अपनी प्रेमिका की शादी और गर्भपात के दबाव से परेशान होकर गला दबाकर हत्या कर दी।

पुलिस के अनुसार, आरोपी और युवती के बीच पांच साल से प्रेम संबंध चल रहा था। आरोप है कि युवक शादी का झांसा देकर युवती का शारीरिक शोषण करता था। जब युवती गर्भवती हो गई और उसने शादी के लिए दबाव बनाया, तो आरोपी ने सुनियोजित तरीके से उसकी हत्या कर दी और शव को धान के खेत में फेंक दिया।

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मंगलवार की सुबह जब ग्रामीणों ने खेत में शव देखा तो सूचना पर भटनी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। जांच में पता चला कि युवती खामपार थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली थी। परिवार ने बताया कि सोमवार की रात भोजन के बाद वह अचानक घर से लापता हो गई थी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या और युवती के तीन महीने की गर्भवती होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने युवती के मोबाइल सीडीआर और लोकेशन डिटेल खंगाले, जिससे आरोपी रोहित से लगातार बात होने और दोनों का वारदात स्थल पर मौजूद रहना साबित हुआ।

शुक्रवार को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर खैराट पुल से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि सोमवार की रात गर्भपात के लिए मिलने के दौरान विवाद हुआ और उसने गुस्से में गला दबाकर हत्या कर दी।

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गांव में इस घटना को लेकर सनसनी फैल गई है। ग्रामीणों ने बताया कि युवती पहले भी गर्भवती हो चुकी थी, जिसके बाद दोनों परिवारों के बीच पंचायत हुई थी और गर्भपात कराया गया था। मामला दो समुदायों से जुड़ा होने के कारण पुलिस पूरी सतर्कता से जांच कर रही है।

दिवाली पर घर जाने की होड़: चंडीगढ़ ISBT-43 में यात्रियों का सैलाब, बसों में मारामारी और सड़कों पर जाम

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चंडीगढ़ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। दिवाली पर घर लौटने की तैयारी में शुक्रवार को चंडीगढ़ के दोनों प्रमुख बस अड्डों — ISBT सेक्टर-43 और सेक्टर-17 — पर यात्रियों का सैलाब उमड़ पड़ा। पंजाब, हरियाणा और हिमाचल जाने वाले यात्रियों की भारी भीड़ के कारण टिकट काउंटरों पर लंबी कतारें लग गईं। शाम चार बजे के बाद अड्डे पर पैर रखने की जगह नहीं बची। छात्रों से लेकर सरकारी व निजी कर्मचारी तक हर कोई अपने परिवार के पास पहुंचने की जल्दी में था।

एचआरटीसी (HRTC) ने यात्रियों की सुविधा के लिए चंडीगढ़ और दिल्ली से 250 विशेष बसें चलाई हैं, लेकिन इसके बावजूद टिकटों की कमी बनी हुई है। प्रशासन का कहना है कि शुक्रवार को सामान्य दिनों की तुलना में दोगुने से अधिक यात्री बस अड्डों पर पहुंचे।

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आईएसबीटी-43 और सेक्टर-17 पर जहां त्योहार की रौनक दिखी, वहीं व्यवस्था की कमी ने परेशानी बढ़ा दी। कई यात्रियों को घंटों तक बसों का इंतजार करना पड़ा। यमुनानगर की यात्री ज्योति ने बताया कि दो बसें निकल गईं, लेकिन सीट नहीं मिली। महिलाओं ने सरकार से त्योहारों पर स्पेशल बसें चलाने की मांग की, ताकि सफर सुरक्षित और सहज हो सके।

ट्रैफिक जाम से शहर हुआ बेहाल
त्योहारी भीड़ के कारण चंडीगढ़ की मुख्य सड़कों पर भीषण जाम लग गया। रेलवे स्टेशन, ट्रिब्यून चौक, मटका चौक, पोल्ट्री फार्म चौक, सेक्टर 22, 21 और 19 के आसपास वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। कई गाड़ियां घंटों तक रेंगती रहीं।

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भीड़ को संभालने के लिए चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस ने 22 वैकल्पिक पार्किंग साइट्स चिह्नित की हैं, जो 2 से 21 अक्टूबर तक सक्रिय रहेंगी। वहीं दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा में भी इसी तरह के जाम की स्थिति बनी रही, जहां पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द करनी पड़ीं।

एक पैर कटा, दूसरे में 31 फ्रैक्चर, फिर भी नहीं टूटी हिम्मत

अलीगढ़ (राष्ट्र की परम्परा)। जिंदगी और मौत के बीच जूझती 21 वर्षीय फूलमाला हिम्मत की मिसाल बन गई है। एक पैर पूरी तरह कट चुका है और दूसरे पैर की हड्डी छह इंच के हिस्से में 31 जगह से टूट चुकी है, लेकिन यह बहादुर बेटी अपने पिता को ढांढस बंधा रही है। अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज के वार्ड नंबर 7 में भर्ती फूलमाला अपने पिता रमेश चंद्र के आंसू पोंछते हुए बार-बार कहती है — “आप चिंता मत करो पापा, एक दिन मैं फिर से खड़ी हो जाऊंगी।”

हाथरस के जंक्शन थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर गांव निवासी रमेश चंद्र की बेटी फूलमाला 15 अक्टूबर को दादरी में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) सिपाही भर्ती की शारीरिक परीक्षा देकर अपने पिता के साथ ट्रेन से लौट रही थी। महरावल स्टेशन के पास उसे बेचैनी महसूस हुई, इसलिए वह दरवाजे के पास चली गई। तभी अचानक झटका लगने पर वह ट्रेन से गिर गई। बेटी को गिरते देख पिता ने भी बिना सोचे-समझे छलांग लगा दी। हादसे में फूलमाला का एक पैर कट गया, जबकि दूसरे पैर का आधा पंजा भी बुरी तरह जख्मी हो गया।

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वह फिलहाल जेएन मेडिकल कॉलेज के बेड नंबर 744 पर भर्ती है। दर्द से कराहने के बावजूद वह खुद से ज्यादा अपने पिता की चिंता कर रही है। डॉक्टरों के अनुसार, “फूलमाला खुद के घावों की चिंता नहीं करती, बल्कि लगातार अपने पिता के बारे में पूछती रहती है।”

डॉक्टरों की टीम ने 17 अक्टूबर को एक जटिल सर्जरी कर फूलमाला के बाएं पैर की टूटी हड्डियों को स्क्रू की मदद से फिक्स किया है। सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अमजद अली रिजवी ने बताया कि उसका दूसरा पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त है, लेकिन डॉक्टर पूरी कोशिश कर रहे हैं कि पैर बचाया जा सके। अब जख्म भरने की प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर दूसरी सर्जरी की जाएगी।

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फूलमाला की जिजीविषा और अपने पिता के प्रति प्रेम ने हर किसी का दिल जीत लिया है। दर्द के बीच भी उसकी मुस्कान और हिम्मत जीवन के प्रति उसकी अटूट आशा की कहानी कहती है।

आज भी बरकरार है बताशे का महत्व, धार्मिक और मांगलिक आयोजनों में होती है विशेष भूमिका

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। समय के साथ भले ही मिठाइयों के रूप बदल गए हों, लेकिन बताशे का महत्व आज भी कायम है। त्योहारों, धार्मिक अनुष्ठानों और मांगलिक कार्यक्रमों में बताशे का उपयोग एक पारंपरिक आस्था का प्रतीक माना जाता है। धनतेरस, दीपावली और भैया दूज जैसे पर्वों पर चीनी से बने बताशे, खिलौने और मटकियों की मांग आज भी बनी हुई है।

विद्वानों का कहना है कि सत्यनारायण कथा, भैया दूज और अन्य व्रत-पूजाओं में बताशे के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। विशेष रूप से भैया दूज के दिन बहनें चीनी से बने खिलौनों और घरिया के साथ मां गौरी और भगवान गणेश की पूजा कर भाई की लंबी आयु की कामना करती हैं।

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पुरोहितों के अनुसार, बादाम या काजू की मिठाइयों का प्रयोग धार्मिक पूजा में वर्जित माना गया है। वहीं, व्यापारियों का कहना है कि बताशे का कारोबार सालभर चलता है, जबकि खिलौना और घरिया केवल दीपावली व भैया दूज के समय बनाए जाते हैं। हालांकि, चीनी की बढ़ती कीमतों के कारण कारोबार में थोड़ी मंदी आई है।

करीब ढाई दशक पहले तक जनपद के बाजारों में बताशों, घरिया और खिलौनों की रौनक अलग ही होती थी। कारखानों की भट्ठियाँ लगातार जलती रहती थीं और कारीगर दिन-रात काम करते थे। उस दौर में मेहमानों को पानी के साथ बताशा परोसना परंपरा थी, वहीं मांगलिक कार्यों और लड़कियों की विदाई में झपोली में बताशे देना शुभ माना जाता था। हालांकि अब यह परंपरा धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है।

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लक्ष्मी के आगमन पर जलने वाले दीपक बनाने वाले खुद दो जून की रोटी के लिए मोहताज कुम्हार

मिट्टी नहीं मिलने से अपना पुश्तैनी धंधा छोड़ खड़ी देशों को कर रहे पलायन

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाज़ार में चाइना के सामानों के व्यापक फैलाव होने के कारण कुम्हारों का पुश्तैनी व्यापार बंद होने के कगार पर है ।मिट्टी के दीए बनाने वाले खुद दो जून की रोटी के लिए मोहताज हो रहे हैं दीपावली पर सैकड़ों दीये खरीदने वाले मात्र धन की देवी के पास ही दिये जलाते हैं मिट्टी से बने दीपक से दूसरो के घरों को रोशन करने वाले कुम्हारो के घर में अंधेरा हो रहा है।

रोशनी का पर्व दीपावली का आमतौर पर वही उत्सुकता से इंतजार करने वाले कुम्हार बढ़ती महंगाई और दिखते की जगह बिजली से जगमगाने वाली चाइनीज झालरों और बल्बो से खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं सस्ते और आकर्षक होने का कारण पिछले कई सालों से दीपावली पर चाइनीज झालरों रंगीन मोमबत्ती होती हैं। टिमटिमाते बल्बों की खरीदारी की तरफ लोगों का झुकाव बढ़ रहा है ग्रामीण शिल्पकारो का कहना है कि पहले हम लोग चार पांच महीने पहले से ही दीपावली पर बिकने वाले दीया और भैया दूज पर बिकने वाले खिलौने बनाने में जुट जाते थे लेकिन अब वह बात नहीं रह गई कुछ दुकानों पर आज भी कुल्हडों में चाय बिकती जिससे हम लोगों का व्यवसाय कुछ चल रहा है। इसी वजह से हम लोगों की दाल, रोटी चल रही है। काफी परिवार पुश्तैनी पेशा बंद करके दूसरे व्यापार में लग गये हैं। दीपावली दीयों का ही त्यौहार है। भगवान राम जब बुराई के उपासक लंकेश रावण का अंत करके अयोध्या नगरी पहुंचे तो अयोध्या वासियों ने भगवान राम के आने और विजय की खुशी मे पूरे नगर, देश को दीयों से रोशन कर दिया था। तब से लेकर आज तक यह परंपरा चलती आ रही है। लेकिन उस परंपरा को अब विकास ने पीछे छोड दिया है।

क्षेत्र के राहुल प्रजापति, अमरनाथ प्रजापति, मुन्ना प्रजापति, सन्तोष प्रजापति व रामअवध आदि ने बताया कि चाइनीज निर्मित झालर व बल्ब लोगों की पहली पसंद हैं जिससे कुम्हार अब इस धन्धे को छोड़ने को मजबूर हो रहे है।

मायके में विवाहिता ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, परिजन ने दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद मऊ के घोसी कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत कल्याणपुर में शुक्रवार की देर शाम एक विवाहिता ने मायके में दुप्पटे से फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर दी। घटना के समय घर में कोई मौजूद नहीं था। परिजनों ने ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

घटना की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। मृतका आरती राजभर, हाजीपुर क्षेत्र के कल्याणपुर निवासी राधेश्याम राजभर की पुत्री थी। आरती की शादी अप्रैल 2024 में आजमगढ़ के जहानागंज थाना क्षेत्र के आवाव में हुई थी।

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परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल के लोग दहेज के लिए लगातार उत्पीड़न कर रहे थे। शादी के दिन ही बुलेट बाइक की मांग की गई थी और बाइक न देने पर विदाई रोक दी गई थी। स्थानीय लोगों और परिजनों के हस्तक्षेप के बाद लड़की की विदाई हुई, लेकिन बुलेट बाइक की मांग को लेकर लगातार उत्पीड़न जारी रहा।

मृतका की मां बिंदु देवी ने बताया कि बीती रात लगभग 1 बजे ससुराल से फोन पर लंबी बातचीत हुई थी। आज दिन में सभी घर से बाहर थे, उसी दौरान आरती ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घर के दरवाजे बंद होने के कारण परिजन ने पीछे से जाकर देखा तो सीढ़ी पर लगी बल्ली के सहारे दुपट्टे से लटकी मिली।

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घटना से परिजनों में कोहराम मच गया। मौके पर सीओ जितेंद्र कुमार सिंह, प्रभारी निरीक्षक प्रमेन्द्र कुमार सिंह और नायब तहसीलदार अमरनाथ यादव पुलिस बल के साथ पहुंचे और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

सीओ जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि विवाहिता की आत्महत्या पर जांच पड़ताल की गई है और तहरीर के आधार पर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जाएगी।

चीनी समानों का बहिष्कार कर मनाएँ स्वदेशी दिवाली

दीपावली केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। यह पर्व न केवल अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश देता है, बल्कि हमारे जीवन में भी नए उत्साह, सृजनशीलता और स्वदेशी चेतना का संचार करता है। ऐसे में, यदि हम इस पावन पर्व को स्वदेशी भाव के साथ मनाएँ तो यह केवल दीपों की रोशनी नहीं, बल्कि आर्थिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता का भी उजास फैलाएगा।

आज बाजारों में सस्ते चीनी सामानों की भरमार ने भारतीय उत्पादकों और कारीगरों की मेहनत को पीछे धकेल दिया है। दीये, लाइटें, झालरें, मूर्तियाँ, सब कुछ विदेशी बाजारों से आ रहा है। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि यह सस्ता चमकदार सामान हमारी अपनी अर्थव्यवस्था पर कितना भारी पड़ रहा है? जब हम चीनी लाइट खरीदते हैं, तो उसका मुनाफा हमारे कुम्हार, बढ़ई, बुनकर या हस्तशिल्पी को नहीं, बल्कि विदेश को जाता है। इससे हमारे गांवों की अर्थव्यवस्था कमजोर होती है और लाखों लोगों की आजीविका पर असर पड़ता है।

भारत सदियों से आत्मनिर्भरता और स्थानीय उत्पादन की भूमि रहा है। गांधीजी ने “स्वदेशी” को राष्ट्र निर्माण का मूल मंत्र बताया था। आज जब ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियान चल रहे हैं, तो हमारा दायित्व है कि हम अपने त्योहारों को भी इस विचार से जोड़ें। मिट्टी के दीयों, घरेलू झालरों, हस्तनिर्मित सजावट और भारतीय मिठाइयों से सजी दिवाली न केवल अधिक सुंदर और पारंपरिक होगी, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी नवप्राण का संचार होगा।

इस दिशा में भारत तिब्बत समन्वय संघ (बीटीएसएस) समेत अनेक सामाजिक व सांस्कृतिक संस्थाएँ भी निरंतर जन-जागरूकता फैलाने में जुटी हैं। वे लोगों से अपील कर रही हैं कि इस दीपावली पर स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता दें और विदेशी, विशेषकर चीनी उत्पादों से दूरी बनाएं। ऐसे प्रयास न केवल उपभोक्ता चेतना को बढ़ाते हैं बल्कि राष्ट्रहित में एक सशक्त संदेश भी देते हैं।

चीनी वस्तुओं का बहिष्कार केवल आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक संकल्प है। यह संकल्प है, अपनों को अपनाने का, अपनी धरती, अपनी मिट्टी और अपने कारीगरों के प्रति सम्मान जताने का। जब हर घर में स्वदेशी दीप जलेंगे, तब वह रोशनी केवल घरों को नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा को भी प्रकाशित करेगी।

इस दीपावली पर हमें तय करना होगा कि हम सिर्फ दीप जलाएँगे या देश का दीपक भी प्रज्वलित करेंगे। आइए, इस बार चीनी समानों का बहिष्कार कर स्वदेशी दिवाली मनाएँ, ऐसी दिवाली, जिसमें देशभक्ति की लौ हर दीपक में झिलमिलाए।

अमृतसर-सहरसा गरीब रथ ट्रेन में आग, सरहिंद रेलवे स्टेशन के पास महिला झुलसी, तीन एसी कोच प्रभावित

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पंजाब (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। अमृतसर-सहरसा गरीब रथ (12204) ट्रेन में सरहिंद रेलवे स्टेशन के पास अचानक आग लगने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। आग की चपेट में आने से एक महिला यात्री झुलस गई, जिसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जानकारी के अनुसार, यह घटना फतेहगढ़ साहिब के ब्राह्मणमाजरा के पास हुई। आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी मानी जा रही है। प्रभावित हुए एसी डिब्बे G19 (223125/C) और दो अन्य डिब्बे को ट्रेन के बाकी हिस्सों से अलग कर दिया गया।

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मौके पर नगर कौंसिल सरहिंद की दमकल गाड़ियां तुरंत पहुंचीं और आग पर काबू पाया गया। प्राथमिक जांच में यह पाया गया कि प्रभावित डिब्बे इलेक्ट्रिक पैनल वाले डिब्बे के पास थे। घटना में कोई बड़ा हताहत नहीं हुआ, हालांकि सामान निकालते समय महिला झुलस गई।

रेलवे प्रशासन ने आग की घटना पर नजर बनाए रखी और प्रभावित यात्रियों के लिए तत्काल राहत एवं जांच की प्रक्रिया शुरू की है।

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महराजगंज में उर्वरक विक्रेता की कालाबाजारी पर कृषि विभाग की जांच, लोकायुक्त से शिकायत की तैयारी

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जनपद के एक किसान की शिकायत पर कृषि विभाग ने उर्वरक विक्रेता वर्मा बिल्डिंग मटेरियल एंड खाद भंडार के खिलाफ जांच शुरू की है। शिकायत में आरोप था कि विक्रेता वर्मी कम्पोस्ट और यूरिया उर्वरक की कालाबाजारी कर रहा है। यह शिकायत जनसुनवाई पोर्टल पर संदर्भ संख्या 40018725018614 के माध्यम से दर्ज की गई थी।

जांच के दौरान संयुक्त कृषि निदेशक (पूर्वांचल) और उप कृषि निदेशक, महराजगंज ने जिला कृषि अधिकारी को जांच के आदेश दिए। जांच में विक्रेता के क्रियाकलापों में अनियमितताएं पाई गईं, जिसके बाद उसके उर्वरक निबंधन प्रमाण-पत्र को निरस्त कर दिया गया और नियमानुसार कार्रवाई शुरू की गई।

हालांकि, दूसरी आख्या में यह उल्लेख भी किया गया कि शिकायत के समय विक्रेता अपने खेत में उर्वरक ले जा रहा था और किसानों ने बताया कि उन्हें निर्धारित दर पर यूरिया प्राप्त हुआ। इसके बावजूद विभाग ने भविष्य में पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त निगरानी और कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि उर्वरक विक्रेता की दुकान अभी भी संचालित है और विभाग झूठी रिपोर्ट लगाकर जनता को भ्रमित कर रहा है। अब शिकायतकर्ता लोकायुक्त से शिकायत दर्ज कराकर निष्पक्ष जांच कराने की तैयारी कर रहे हैं।

यह मामला महराजगंज में किसानों के हित और उर्वरक वितरण में पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

महराजगंज में निचलौल मार्ग पर नया टोल प्लाजा निर्माण बना जन आक्रोश का कारण, समाजसेवी ने उठाया सवाल

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जनपद महराजगंज से निचलौल जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर नया टोल प्लाजा बनाने की खबर ने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। जानकारी के अनुसार दमकी क्षेत्र के पास नया टोल प्लाजा प्रस्तावित है, जबकि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के नियमों के अनुसार दो टोल प्लाजा के बीच न्यूनतम दूरी 60 किलोमीटर होनी चाहिए। नया टोल सिर्फ 30 किलोमीटर की दूरी पर बनाया जा रहा है, जिसे ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता नियमों की अवहेलना बता रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि निचलौल और आसपास के इलाके पहले से ही कृषि और छोटे-मोटे व्यवसायों पर निर्भर हैं। ऐसे में हर कुछ किलोमीटर पर टोल टैक्स देना किसानों और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए भारी आर्थिक बोझ साबित होगा।

मिठौरा बाजार के समाजिक कार्यकर्ता प्रमोद गुप्ता ने सोशल मीडिया पर बताया कि दशहरा पर्व के दौरान उन्होंने दमकी क्षेत्र में नए टोल प्लाजा का निर्माण देखा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे आमजन पर अतिरिक्त बोझ डालता है। गुप्ता ने प्रशासन और केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और निर्माण रोकने की मांग की।

स्थानीय जानकारों के अनुसार, महराजगंज में पहले से ही एक टोल प्लाजा मौजूद है। यदि नियमों का पालन नहीं किया गया, तो नया टोल न केवल जनविरोधी बल्कि नियमानुसार भी गलत होगा। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और संबंधित विभागों से मामले की तत्काल जांच और निर्माण रोकने की मांग की है।

यह मुद्दा क्षेत्रीय जनता के लिए आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील माना जा रहा है, और लोगों ने अपनी एकजुट आवाज उठाने की अपील की है।

त्योहारों को देखते हुए डीआईजी और एसएसपी ने किया पैदल गश्त, सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायज़

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। धनतेरस, दीपावली और गोवर्धन पूजा के अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए थाना राजघाट क्षेत्र के मुख्य बाजारों और भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर डीआईजी रेंज एस. चनप्पा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) राजकरन नय्यर ने क्षेत्राधिकारी ओमकार दत्त के साथ पैदल गश्त किया।

इस दौरान अधिकारियों ने व्यापारीगण और स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित कर सुरक्षा के प्रति भरोसा दिलाया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि त्योहारों के दौरान विशेष सतर्कता बरती जा रही है और भीड़भाड़ वाले बाजारों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

डीआईजी ने निर्देश दिए कि संवेदनशील स्थानों पर निरंतर गश्त और निगरानी जारी रहे। स्थानीय व्यापारियों ने पुलिस प्रशासन की तत्परता पर संतोष व्यक्त किया और सहयोग का आश्वासन दिया।

यह पहल गोरखपुर में त्योहारों के दौरान शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।

दिल्ली के निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर IRCTC कर्मचारियों की बेल्ट और डस्टबिन से मारपीट, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर 15 अक्टूबर को IRCTC कर्मचारियों के बीच जमकर मारपीट हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कर्मचारी डस्टबिन, बेल्ट और घुसों का इस्तेमाल कर एक-दूसरे पर हमला करते दिख रहे हैं।

वीडियो में देखा जा सकता है कि मामूली बहस बड़ी लड़ाई में बदल जाती है। एक कर्मचारी दूसरे को जमीन पर गिराकर मार रहा है, तो कुछ कर्मचारी बेल्ट और पास रखे डस्टबिन से हमला कर रहे हैं। घटना के दौरान पुलिसकर्मी और कुली बीच में आते हैं, लेकिन उनकी अनुपस्थिति में लड़ाई फिर से शुरू हो जाती है।

सोशल मीडिया पर यह वीडियो फेसबुक के @SoulsteerGwalior अकाउंट से शेयर किया गया। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने मजेदार और तीखे रिएक्शन दिए। कई लोग इसे बागपत चाट युद्ध के बाद निजामुद्दीन बेल्ट युद्ध कह रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि “कूड़ेदान ऐसे मौके पर सबसे काम आता है,” तो दूसरे ने लिखा कि “यह कौन सा गेम है भाई।”

रेलवे प्रशासन ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और झगड़े में शामिल कर्मचारियों से उत्तर मांगा गया है।

नेपाल में बड़ी कार्रवाई: पूर्व प्रधानमंत्री देउबा, ओली और प्रचंड की संपत्तियों की जांच शुरू, संपत्ति शुद्धीकरण विभाग की जांच तेज

काठमांडू (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। नेपाल में संपत्ति शुद्धीकरण अनुसंधान विभाग (Department of Money Laundering Investigation) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों — शेरबहादुर देउबा, केपी शर्मा ओली और पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ — की चल-अचल संपत्तियों की जांच शुरू की है।

विभाग ने इन नेताओं के साथ पूर्व विदेश मंत्री आरजू राणा देउबा (शेरबहादुर देउबा की पत्नी) और पूर्व मंत्री दीपक खड्का के खिलाफ भी जांच शुरू की है। आरोप है कि इन नेताओं ने सार्वजनिक पद का दुरुपयोग कर अवैध संपत्ति अर्जित की।

जांच के दायरे में शेरबहादुर देउबा के बेटे जयवीर सिंह का नाम भी शामिल है। विभाग ने इन सभी नेताओं और उनके परिवारजनों के नाम पर दर्ज बचत खातों, निवेश, कंपनियों और कारोबार से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए नेपाल राष्ट्र बैंक, नेपाल धितोपत्र बोर्ड, कंपनी रजिस्ट्रार कार्यालय और भूमि अभिलेख विभाग से पत्राचार किया है।

जले हुए नोटों का मामला भी जांच में शामिल
अधिकारियों के अनुसार, जेन-जी आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने देउबा, प्रचंड और दीपक खड्का के घरों में आगजनी की थी। घटना के बाद जले हुए नोटों और राख के टुकड़े बरामद हुए थे। विभाग ने अब उन जले नोटों के नमूने और वीडियो साक्ष्य मांगे हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार, मनी लांड्रिंग जांच में आरोपी व्यक्ति के साथ उसके परिवार और ससुराल पक्ष की तीन पीढ़ियों तक की संपत्ति और कारोबार की भी जांच की जाती है।

यह कार्रवाई नेपाल की राजनीति में भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति जांच की दिशा में सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

डीआरडीओ के कर्नल की कॉल रिकॉर्ड लीक, सूबेदार पर जासूसी और हत्या की साजिश का आरोप; राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल

रायपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के वरिष्ठ अधिकारी कर्नल कमलेश सिंह बिष्ट ने अपने निजी मोबाइल की कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) अवैध रूप से निकलवाने और उनके खिलाफ जासूसी व हत्या की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी निजी जानकारी अवांछनीय लोगों के पास पहुंचना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।

कर्नल बिष्ट ने सीधे तौर पर पूर्व सहकर्मी सूबेदार अजनीश पर इस षड्यंत्र का आरोप लगाया है। मामले में रायपुर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि कर्नल ने पुलिस पर जांच में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है।

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जानकारी के अनुसार, कर्नल ने 9 जनवरी को साइबर क्राइम थाने और 7 फरवरी को रायपुर थाने में शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में एसटीएफ ने जीरो एफआईआर दर्ज कर मामला रायपुर पुलिस को सौंपा।

दिसंबर 2024 में एक अज्ञात महिला ने कर्नल को फोन कर बताया कि सूबेदार अजनीश ने अवैध रूप से उनकी CDR निकलवाई है। इसके बाद डीआरडीओ के सीनियर टेक्निकल असिस्टेंट कुलवंत सिंह का पत्र सामने आया, जिसमें अजनीश पर जासूसी, साजिश और हत्या की सुपारी देने के आरोप लगाए गए।

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कर्नल बिष्ट ने पुष्टि की कि उनकी फरवरी और मार्च 2023 की CDR लोकेशन वास्तविक स्थानों से मेल खाती है, जिससे डेटा की सत्यता साबित होती है। उन्होंने कहा कि एक संवेदनशील पद पर रहते हुए उनकी निजी जानकारी का इस तरह से लीक होना देश की सुरक्षा के लिए बेहद चिंताजनक है।

दिल्ली के बाजारों में ऑफर्स की बहार, जीएसटी दर घटने से खरीदारी में जबरदस्त उछाल

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। धनतेरस के शुभ अवसर पर शनिवार सुबह से ही दिल्ली के बाजारों में खरीदारी का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। जीएसटी दरों में कमी और आकर्षक फेस्टिव ऑफर्स की वजह से बाजारों में बूम के हालात हैं। परंपरागत सोना-चांदी, बर्तन और सिक्कों के साथ-साथ लोग इस बार स्मार्टफोन, टीवी, फ्रिज और गाड़ियों की खरीदारी की ओर भी रुख कर रहे हैं।

चांदनी चौक, लाजपत नगर, राजौरी गार्डन, सरोजिनी नगर, नेहरू प्लेस, साकेत और करोल बाग जैसे प्रमुख बाजारों में सुबह से ही भारी भीड़ उमड़ी। दुकानदारों के मुताबिक, ग्राहकों ने इस बार एक महीने पहले से ही धनतेरस की बुकिंग कर ली थी ताकि आखिरी समय में स्टॉक की समस्या न हो।

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इलेक्ट्रॉनिक और ऑटोमोबाइल शोरूमों में ग्राहकों की जबरदस्त भीड़ रही। कई ब्रांड्स ने एक पर एक मुफ्त, कैशबैक और डिस्काउंट ऑफर्स लॉन्च किए हैं। वहीं, ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी नए वाहन की डिलीवरी के लिए लोगों की लंबी कतारें देखी गईं।

मिठाई और गिफ्ट आइटमों की दुकानों पर भी रौनक देखने को मिली। लोग परिवार और दोस्तों के लिए मिठाइयां, चॉकलेट गिफ्ट पैक और धार्मिक वस्तुएं खरीद रहे हैं।

ज्वेलरी बाजारों में इस बार चांदी के सिक्कों, गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों और धार्मिक उपहारों की जबरदस्त मांग है। दुकानदारों का कहना है कि धार्मिक वस्तुओं और चांदी के उपहारों की बिक्री में भारी वृद्धि दर्ज की जा रही है।

रियल एस्टेट सेक्टर में भी आज का दिन खास रहा। कई परिवारों ने धनतेरस के शुभ अवसर पर नए घरों में गृहप्रवेश किया। बिल्डरों के अनुसार, इस त्योहारी सीजन में बुकिंग और रजिस्ट्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज होने की उम्मीद है।

भीड़ को देखते हुए पुलिस और ट्रैफिक विभाग ने प्रमुख बाजारों में सुरक्षा और पार्किंग की पुख्ता व्यवस्था की है।

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