Monday, July 6, 2026
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श्रीसन फार्मा का बड़ा फर्जीवाड़ा: बिना लैब टेस्टिंग के बाजार में पहुंचा जहरीला कोल्ड्रिफ कफ सिरप, SIT जांच में खुलासा

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बच्चों की मौत का कारण बने कोल्ड्रिफ कफ सिरप को लेकर एसआईटी जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि इस सिरप की लैब टेस्टिंग कभी हुई ही नहीं, यानी बिना किसी परीक्षण के ही यह जहरीला सिरप बाजार में बेचा गया।

सूत्रों के मुताबिक, श्रीसन फार्मा की केमिकल एनालिस्ट के. माहेश्वरी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि कंपनी में लैब टेस्टिंग की पर्याप्त सुविधा मौजूद नहीं थी। उन्होंने बताया कि कुछ दवाओं की सिर्फ औपचारिक जांच होती थी, जबकि कोल्ड्रिफ कफ सिरप को बिना किसी टेस्ट के बाजार में उतार दिया गया।

ड्रग डिपार्टमेंट की लापरवाही भी उजागर

जांच में यह भी सामने आया कि ड्रग विभाग ने कंपनी की नियमित जांच नहीं की। आरोपी माहेश्वरी करीब 18 साल से इस क्षेत्र में कार्यरत हैं और पिछले चार साल से श्रीसन फार्मा में पदस्थ थीं।

SIT ने फैक्ट्री मालिक रंगनाथन से की आमने-सामने पूछताछ

एसआईटी टीम ने जहरीला सिरप बनाने वाली फैक्ट्री के मालिक रंगनाथन से भी पूछताछ की। टीम उसे कुछ दिन पहले तमिलनाडु लेकर गई थी, जहां से जरूरी दस्तावेज और साक्ष्य जुटाए गए। शुक्रवार शाम को टीम लौटने के बाद देर रात तक रंगनाथन और माहेश्वरी को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई।

माहेश्वरी जेल भेजी गई, रंगनाथन की रिमांड बढ़ी

तीन दिन की पुलिस रिमांड खत्म होने पर शनिवार को आरोपी माहेश्वरी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया। वहीं, फैक्ट्री मालिक रंगनाथन की पुलिस रिमांड 20 अक्तूबर तक बढ़ा दी गई है।

लव ट्राएंगल का खौफनाक अंत: गर्भवती महिला और दो प्रेमियों के बीच चली चाकूबाजी, दिल्ली में डबल मर्डर से सनसनी

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मध्य दिल्ली के नबी करीम इलाके में शनिवार देर रात एक लव ट्राएंगल ने दो जिंदगियों का अंत कर दिया। प्रेम प्रसंग के विवाद के चलते हुई डबल मर्डर वारदात में एक गर्भवती महिला और उसके पूर्व प्रेमी की मौत हो गई, जबकि महिला का पति गंभीर रूप से घायल है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मृतकों की पहचान शालिनी (22 वर्ष), निवासी बगीची प्रताप नगर, और आशु उर्फ शैलेंद्र (34 वर्ष), निवासी अमरपुरी, नबी करीम के रूप में हुई है। घायल का नाम आकाश (23 वर्ष) बताया गया है, जो शालिनी का पति है।

ऐसे हुआ खून से सना प्रेम-त्रिकोण का अंत

घटना 18 अक्टूबर की रात करीब 10:15 बजे की है। आकाश अपनी पत्नी शालिनी के साथ उसकी मां शीला से मिलने कुतुब रोड पहुंचा था। उसी दौरान शालिनी का पूर्व प्रेमी आशु वहां पहुंच गया और उसने आकाश पर चाकू से हमला करने की कोशिश की। आकाश बच निकला, लेकिन आशु ने ई-रिक्शा में बैठी शालिनी पर ताबड़तोड़ चाकू से वार कर दिए।

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बीच-बचाव करने पर आकाश भी घायल हो गया, लेकिन उसने किसी तरह आशु से चाकू छीना और पलटवार किया। दोनों गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े।

घटना के बाद शालिनी और आकाश को उसकी मां और भाई एलएचएमसी अस्पताल ले गए, जबकि पुलिस ने आशु को अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने शालिनी और आशु दोनों को मृत घोषित कर दिया, जबकि आकाश की हालत नाजुक बनी हुई है।

लिव-इन रिलेशनशिप और गर्भ से जुड़ा विवाद

शालिनी की मां शीला के अनुसार, शालिनी और आकाश की शादी हो चुकी थी और उनके दो बच्चे भी हैं। शालिनी गर्भवती थी, लेकिन कुछ समय पहले वह आकाश से नाराज होकर आशु के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगी थी। बाद में उसने आकाश से सुलह कर ली, जिससे आशु नाराज था।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आशु दावा करता था कि शालिनी के गर्भ में पल रहे बच्चे का पिता वही है। इसी विवाद ने आखिरकार मौत का खेल रच दिया।

पुलिस ने शालिनी की मां शीला के बयान पर धारा 103(1)/109(1) बीएनएस के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बताया गया है कि आशु नबी करीम थाना का बीसी (Bad Character) था, जबकि आकाश पर भी तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।

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23 सैनिकों और 10 नागरिकों की मौत के बाद अफगान-पाक सीमा पर थमा युद्ध, क़तर की भूमिका अहम

काबुल/इस्लामाबाद (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।
लगातार एक हफ्ते से जारी खूनी संघर्ष और सैकड़ों जिंदगियों को झकझोर देने वाली सीमा झड़पों के बाद आखिरकार अफगानिस्तान और पाकिस्तान ने युद्धविराम का ऐलान किया है। यह फैसला क़तर और तुर्की की मध्यस्थता में हुई लंबी, गहन बातचीत का नतीजा है, जिसने दोनों पड़ोसी देशों के बीच स्थायी शांति की उम्मीद जगा दी है।

क़तर के विदेश मंत्रालय ने शनिवार (19 अक्टूबर) को पुष्टि की कि दोनों देश न केवल तत्काल युद्धविराम पर सहमत हुए हैं, बल्कि दीर्घकालिक स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए संयुक्त तंत्र बनाने पर भी चर्चा हुई है।

इस बातचीत का नेतृत्व पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने किया, जबकि अफगानिस्तान की ओर से तालिबान नेतृत्व के वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद थे। दोनों पक्ष आने वाले दिनों में फॉलो-अप वार्ताओं के जरिए संघर्षविराम की निगरानी और भरोसा बहाली की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।

🔥 पृष्ठभूमि: खूनी सीमा झड़पों ने ली 30 से अधिक जानें

यह संघर्ष 14 अक्टूबर की रात स्पिन बोल्डक (अफगानिस्तान) और चमन (पाकिस्तान) की सीमा पर दोबारा भड़क उठा था। पाकिस्तानी सेना के मुताबिक, झड़पों में 23 सैनिकों की मौत हुई, जबकि अफगान अधिकारियों ने दावा किया कि पाकिस्तानी हवाई हमलों में कम से कम 10 नागरिक, जिनमें महिलाएं, बच्चे और एक स्थानीय क्रिकेटर शामिल थे, की जान गई।

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पहले बुधवार को 48 घंटे का अस्थायी युद्धविराम घोषित हुआ था, मगर शुक्रवार शाम इसे खत्म कर दिया गया और उसके तुरंत बाद सीमा पार जवाबी हमले शुरू हो गए।

🌐 क्षेत्रीय चिंता और वैश्विक अपील

इस तनावपूर्ण स्थिति पर सऊदी अरब, क़तर और तुर्की जैसे क्षेत्रीय देशों ने संयम बरतने की अपील की थी। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी हिंसा इस्लामिक स्टेट (ISIS) और अल-क़ायदा जैसे आतंकी संगठनों को दोबारा सक्रिय होने का मौका दे सकती है।

2,611 किलोमीटर लंबी अफगान-पाक सीमा दशकों से दोनों देशों के बीच आतंकी गतिविधियों और घुसपैठ के आरोपों को लेकर विवाद का केंद्र रही है। पाकिस्तान अफगानिस्तान पर अपने विरोधी सशस्त्र गुटों को शरण देने का आरोप लगाता है, जिसे तालिबान सरकार ने बार-बार नकारा है।

✍️ युद्धविराम दोनों देशों के बीच रिश्तों में नया मोड़ साबित हो सकता है। अब दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह संघर्ष विराम शांति की दिशा में स्थायी कदम बनेगा या एक और अस्थायी राहत साबित होगा।

पहले चरण की चुनावी जंग में बड़ा झटका: 467 उम्मीदवारों के नामांकन रद्द, चिराग पासवान की पार्टी की सीमा सिंह भी सूची में

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की सियासी पारी में अब तस्वीर साफ़ होने लगी है। नामांकन पत्रों की जांच पूरी होने के बाद 467 प्रत्याशियों के नामांकन रद्द कर दिए गए हैं। इस सूची में कई दिग्गजों के साथ-साथ चर्चित चेहरों के नाम भी शामिल हैं। सबसे बड़ा झटका चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को लगा है, जिनकी प्रत्याशी सीमा सिंह का नामांकन रद्द हो गया। वहीं बसपा और जदयू के कई बागी उम्मीदवारों की उम्मीदें भी धराशायी हो गईं।

भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पहले चरण में कुल 1976 नामांकन पत्र वैध घोषित किए गए हैं। यह चरण 121 विधानसभा क्षेत्रों में 6 नवंबर को मतदान के साथ होगा।

अब सबकी नज़रें नाम वापसी की अंतिम तारीख — 20 अक्टूबर (सोमवार) पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस दिन कई सीटों पर समीकरण बदल सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज़ है, क्योंकि महागठबंधन के भीतर अब तक कई सीटों पर उम्मीदवारों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।

पहले चरण के साथ ही बिहार की सियासत में रणनीति, गठबंधन और दावेदारी की असली परीक्षा शुरू हो चुकी है। हर पार्टी अपने पत्ते सावधानी से खोल रही है, क्योंकि एक

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“बिहार की राजनीति: जहां सत्ता नहीं, गठबंधन ही असली मुख्यमंत्री है”

गठबंधनों के गणित में उलझा जनादेश, विचारधारा से अधिक समीकरणों का दौर)

राष्ट्र की परम्परा डेस्क ✍️ बिहार की राजनीति किसी रंगमंच से कम नहीं—यहां हर किरदार की अपनी स्क्रिप्ट है, लेकिन मंच साझा है। कोई भी अभिनेता अकेले तालियां नहीं बटोर सकता। यहां विचारधाराएं नहीं, समीकरण तय करते हैं कि कौन ‘कुर्सी’ पर बैठेगा। 35 साल से बिहार की सत्ता एक ही कहानी दोहराती रही है—गठबंधन बने, टूटे, फिर बने। जनता हर बार ‘परिवर्तन’ का सपना लेकर वोट डालती है, लेकिन नतीजा हमेशा “साझा सरकार” का ही होता है। सवाल उठता है—क्या बिहार की राजनीति गठबंधन की लत में इस कदर डूब चुकी है कि अब यहां बहुमत नाम की चीज़ बची ही नहीं?
🧭 बिहार की सियासत का सफरनामा: 1990 से 2025 तक
अगर बिहार की राजनीति का इतिहास खोला जाए, तो 1990 से अब तक यह कहानी दो चेहरों के इर्द-गिर्द घूमती है—लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार।
लालू यादव ने 1990 में भाजपा के समर्थन से सत्ता की सीढ़ी चढ़ी, और फिर उसी भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बनाकर नया समीकरण गढ़ा।
दूसरी ओर, नीतीश कुमार राजनीति के सबसे “लचीले” रणनीतिकार साबित हुए—कभी एनडीए में, कभी महागठबंधन में, और फिर दोबारा एनडीए में।
35 वर्षों में नीतीश कुमार 9 बार मुख्यमंत्री की शपथ ले चुके हैं—लेकिन हर बार किसी न किसी गठबंधन के सहारे। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है कि सत्ता तक पहुंचने के लिए विचारधारा से ज्यादा ज़रूरी “साझेदारी” बन गई है।
⚖️ गठबंधन की राजनीति बनाम विचारों की राजनीति
कभी राजनीति का आधार विचारधारा होती थी—विकास, सामाजिक न्याय या राष्ट्रीय एकता। पर बिहार में समीकरणों ने विचारों को पीछे छोड़ दिया है।
यहां कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता जातीय जोड़-घटाव से तय होता है। यादव, कुर्मी, भूमिहार, मुसलमान—हर जाति का अपना “राजनीतिक ठिकाना” है।
आरजेडी का ‘MY समीकरण’ (मुस्लिम-यादव) तभी कारगर होता है जब कांग्रेस या वामदल जैसे सहयोगी उसके साथ हों।
वहीं भाजपा को सवर्ण वोट से लेकर अतिपिछड़ा समाज तक पहुंचने के लिए नीतीश कुमार या जीतनराम मांझी जैसे सहयोगियों की जरूरत होती है।
बिहार में राजनीति की यह “केमिस्ट्री” इतनी जटिल हो चुकी है कि वोट बैंक ही गठबंधन की असली प्रयोगशाला बन गया है।
🧩 वोट का विज्ञान और गठबंधन की केमिस्ट्री
बिहार के चुनावी आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि किसी भी दल को अकेले 35% से अधिक वोट नहीं मिले।
इसका मतलब साफ है—“अकेले चलना नुकसान का सौदा” है।
यही कारण है कि चुनाव से पहले ही पार्टियां “पोस्ट-इलेक्शन अरेंजमेंट” पर काम करने लगती हैं।
आज महागठबंधन में 7 दल हैं और एनडीए में 5 सहयोगी।
लेकिन अंदरखाने हर चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर रस्साकशी जारी रहती है।
इतना ही नहीं, जैसे ही सत्ता समीकरण बदलते हैं, गठबंधन भी बदल जाता है—यानी यहां दोस्ती भी मौसमी है और दुश्मनी भी रणनीतिक।
अस्थिर सरकारों का इतिहास: सत्ता का खेल, जनता का भ्रम
1967 से लेकर अब तक बिहार में 9 बार ऐसी स्थिति बनी जब सरकारें कुछ ही महीनों में गिर गईं।
कभी मुख्यमंत्री का कार्यकाल सिर्फ 7 दिन भी रहा।
ऐसे में राजनीति के खिलाड़ी समझ गए कि जनता चाहे जिसे चुने, कुर्सी उन्हीं की होगी जो जोड़-घटाव के माहिर हैं।
इससे जनता का भरोसा धीरे-धीरे “व्यक्ति” से हटकर “गठबंधन” पर चला गया।
लेकिन विडंबना यह है कि गठबंधन आने के बाद जिम्मेदारी किसी की तय नहीं रहती—विकास ठहर जाता है, जवाबदेही बंट जाती है।
🧮 जाति और सत्ता का गणित
बिहार में राजनीति जाति से शुरू होती है और उसी पर खत्म भी।
हर जाति अपने नेता को “अपना प्रतिनिधि” मानती है, और यही नेताओं की ताकत बनती है।
इसलिए हर चुनाव में पार्टियां नारे नहीं, समीकरण लेकर उतरती हैं—
आरजेडी: मुसलमान + यादव
जेडीयू: कुर्मी + अतिपिछड़ा
भाजपा: सवर्ण + अति पिछड़ा + दलित
कांग्रेस और वामदल: अल्पसंख्यक + शहरी बुद्धिजीवी वोट
यह जातीय संतुलन ही तय करता है कि गठबंधन किस ओर झुकेगा।
सत्ता का सूत्र बस इतना है—जिसके पास जोड़ने की कला है, वही आगे बढ़ेगा।
🧭 गठबंधन की लत या लोकतंत्र की मजबूरी?
यह कहना गलत नहीं होगा कि बिहार में गठबंधन अब एक राजनीतिक नशा बन चुका है।
नेता जानते हैं कि जनता उन्हें विचारधारा पर नहीं, गठबंधन की छतरी पर चुनती है।
यह स्थिति लोकतंत्र की सेहत के लिए चिंताजनक है—क्योंकि जब सत्ता साझी होती है, तो जवाबदेही बंट जाती है।
कोई भी नेता अकेले निर्णय नहीं लेता, सब “कंसेंसस” के नाम पर जिम्मेदारी टाल देते हैं।
इससे विकास की रफ्तार धीमी और नीतियों की दिशा अस्थिर रहती है।
🔍 आगे का रास्ता: क्या बिहार कभी गठबंधन मुक्त होगा?
बिहार की राजनीति अब एक ऐसे मोड़ पर है जहां जनता खुद यह तय करेगी कि क्या उसे हर बार “साझा सरकार” चाहिए या स्थिर नेतृत्व।
नई पीढ़ी के मतदाता जातीय सोच से आगे बढ़ रहे हैं, उन्हें रोजगार, शिक्षा और विकास चाहिए।
अगर यह प्रवृत्ति बढ़ी, तो शायद पहली बार बिहार में कोई दल बहुमत हासिल कर पाए।
पर अभी के हालात में यह कहना जल्दबाजी होगी।
क्योंकि बिहार की सियासत का असली नियम यही है—“बिना जोड़ के कोई जोड़ नहीं।”
🕊️ समापन: सत्ता का खेल या जनादेश का अपमान बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा सबक यही है कि सत्ता किसी एक के पास नहीं रहती।
यह लगातार घूमती रहती है—जैसे कोई मशाल जो हर बार नए हाथ में चली जाती है।
पर सवाल वही रहता है—क्या जनता के हाथ में कभी यह मशाल लौटेगी?
जब तक गठबंधन की गणित में जनता की ज़रूरतें नहीं जुड़तीं, तब तक बिहार का लोकतंत्र अधूरा ही रहेगा।

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US Navy ने समुद्र में ड्रग्स से भरी पनडुब्बी को किया नष्ट, ट्रंप बोले– “अगर नहीं रोका होता तो 25 हजार अमेरिकन मर जाते”

अमेरिकी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने दावा किया है कि US Navy ने कैरिबियन सागर (Caribbean Sea) में एक ड्रग्स से लदी पनडुब्बी (Submarine) को तबाह कर दिया है। ट्रंप ने शनिवार (18 अक्टूबर 2025) को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि यह पनडुब्बी फेंटेनाइल (Fentanyl) और अन्य खतरनाक ड्रग्स से भरी हुई थी और अमेरिका की ओर बढ़ रही थी।

ट्रंप ने कहा, “यह अभियान मेरे लिए गर्व की बात है। हमने एक विशाल ड्रग तस्करी नेटवर्क को खत्म किया है। इस पनडुब्बी को अगर हमने नहीं रोका होता, तो कम से कम 25,000 अमेरिकी नागरिक अपनी जान गंवा सकते थे।” उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान दो संदिग्ध मारे गए, जबकि दो को इक्वाडोर (Ecuador) और कोलंबिया (Colombia) वापस भेज दिया गया।

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कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो (Gustavo Petro) ने पुष्टि की है कि उनके देश का एक नागरिक जीवित लौट आया है और उस पर कानून के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। इक्वाडोर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।

यह कार्रवाई सितंबर 2025 में शुरू किए गए उस अमेरिकी सैन्य अभियान (US Military Anti-Drug Operation) का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य लैटिन अमेरिकी देशों से अमेरिका तक ड्रग्स की तस्करी रोकना है। अब तक US Navy छह से अधिक जहाजों और अर्ध-पनडुब्बियों (Semi-Submarines) को निशाना बना चुकी है।

हालांकि, मानवाधिकार संगठनों (Human Rights Groups) और अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने इस अभियान पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बिना न्यायिक प्रक्रिया के संदिग्धों को मार गिराना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है।

अमेरिकी प्रशासन ने यह खुलासा नहीं किया कि यह पनडुब्बी कहां से आई थी, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह कोलंबिया या वेनेज़ुएला के किसी गुप्त शिपयार्ड से निकली थी। ऐसी पनडुब्बियों का इस्तेमाल लंबे समय से दक्षिण अमेरिका से कोकीन तस्करी के लिए किया जाता रहा है।

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फेंटेनाइल, जो एक शक्तिशाली सिंथेटिक ड्रग है, अमेरिका में ओवरडोज़ महामारी (Overdose Crisis) का मुख्य कारण बन चुकी है। इसी वजह से अमेरिकी प्रशासन ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा (National Security Threat) घोषित किया है और ड्रग माफिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति (Zero Tolerance Policy) अपनाई है।

देवरिया पुलिस ने चलाया मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान, 449 व्यक्तियों और 284 वाहनों की हुई जांच

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पुलिस अधीक्षक श्री संजीव सुमन के निर्देशन में आज 19 अक्टूबर 2025 को प्रातः 5 बजे से 8 बजे तक मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान (Morning Walker Checking Campaign) चलाया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शांति, सुरक्षा और कानून व्यवस्था को मजबूत बनाना तथा आमजन में पुलिस पर विश्वास और सुरक्षा की भावना बढ़ाना रहा।

अभियान के दौरान थाना प्रभारी/थानाध्यक्षों ने आमजन से सीधे संवाद स्थापित किया और संदिग्ध व्यक्तियों, वाहनों और विधिविरुद्ध गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी। तलाशी और पूछताछ के दौरान पुलिस ने चोरी की गाड़ी पकड़ना, तीन सवारी वाले वाहनों पर कार्रवाई, मोडिफाइड साइलेंसर वाले दोपहिया वाहनों के चालान, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर कार्यवाही और असली हथियार एवं अवैध मादक पदार्थ पकड़ने जैसे कदम उठाए।

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जनसामान्य ने पुलिस की इस पहल की सराहना की और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संतोष व्यक्त किया। अभियान के तहत जनपद में कुल 24 स्थानों पर 449 व्यक्तियों और 284 वाहनों की चेकिंग की गई। पुलिस ने कहा कि ऐसे अभियान आमजन की सुरक्षा, शांति और विश्वास बनाए रखने के लिए नियमित रूप से जारी रहेंगे।

जर्मनी का झांसा देकर रूस भेजा गया युवक, युद्ध में बम विस्फोट में मौत, शव डेढ़ माह बाद पहुंचा कैथल

कैथल (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) थाना सीवन क्षेत्र के जनेदपुर गांव का 22 वर्षीय युवक कर्मचंद विदेश जाने के सपनों में फंसा और उसका जीवन रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) में समाप्त हो गया। एजेंट ने उसे जर्मनी भेजने का वादा करके धोखे से रूस भेजा, जहां उसे रूस की सेना में भर्ती करवा दिया गया। युद्ध के दौरान 6 सितंबर को बम विस्फोट (Bomb Explosion) में उसकी मौत हो गई।

कर्मचंद 7 जुलाई को एजेंट के जरिए विदेश गया था। एजेंट ने उससे 8 लाख रुपये लेकर जर्मनी भेजने का भरोसा दिया, लेकिन वास्तव में उसे रूस में युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने एजेंट के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला (Fraud Case) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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कर्मचंद के माता-पिता ने सरकार से अपील की है कि उन्हें शहीद का दर्जा (Martyr Status) और परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। साथ ही उन्होंने अपनी बेटी के लिए सरकारी नौकरी (Government Job) की भी मांग की।

परिवार को कर्मचंद की मौत की जानकारी 13 दिन बाद 19 सितंबर को टेलीग्राम (Telegram) के जरिए मिली। लंबी कागजी प्रक्रिया के बाद उसका शव 17 अक्टूबर को भारत लौटा। 18 अक्टूबर सुबह जब शव जनेदपुर पहुंचा, तो पूरे गांव में गमगीन माहौल (Grief-Stricken Atmosphere) फैल गया।

इस दुखद घटना ने गांववासियों को स्तब्ध कर दिया है और वे एजेंट के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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छोटी दिवाली 2025: क्या आज खुले रहेंगे बैंक? जानें RBI गाइडलाइन और हॉलिडे लिस्ट का पूरा अपडेट

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)आज पूरे देश में छोटी दिवाली 2025 (Narak Chaturdashi 2025) का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस बीच लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या आज बैंक खुले रहेंगे या आज बैंक हॉलिडे (Bank Holiday) रहेगा। इसको लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की गाइडलाइन के अनुसार हर राज्य में अलग-अलग छुट्टियां तय की जाती हैं।

दरअसल, भारत में सभी बैंकों की छुट्टियां एक जैसी नहीं होतीं। स्थानीय त्योहारों और राज्यवार कैलेंडर के आधार पर छुट्टियां तय होती हैं। ऐसे में अगर आप आज बैंक में कोई जरूरी काम करने की सोच रहे हैं, तो पहले यह जान लें कि क्या आपके राज्य में बैंक बंद हैं या खुले।

आज 19 अक्टूबर (रविवार) को नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली के साथ रविवार का अवकाश भी है। इसलिए आज देशभर के सभी बैंक बंद रहेंगे। अगर आप किसी जरूरी बैंकिंग काम के लिए जाने वाले थे, तो आज वह संभव नहीं होगा।

हालांकि, ग्राहकों की सुविधा के लिए नेट बैंकिंग (Net Banking) और मोबाइल बैंकिंग (Mobile Banking) सेवाएं चालू रहेंगी। ग्राहक UPI, डिजिटल वॉलेट और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए अपने वित्तीय काम निपटा सकते हैं।

क्या दिवाली के दिन भी बंद रहेंगे बैंक?
20 अक्टूबर को दिवाली (Diwali 2025) का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन अगरतला, अहमदाबाद, आइजोल, बैंगलुरू, भोपाल, चंडीगढ़, चेन्नई, देहरादून, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, कानपुर, लखनऊ, नई दिल्ली, कोलकाता, रायपुर, रांची, शिमला, शिलांग, विजयवाड़ा और तिरुवनंतपुरम समेत कई शहरों में बैंक बंद रहेंगे।

त्योहारी सीजन के दौरान ATM से नकद निकासी (Cash Withdrawal) बढ़ जाती है। ऐसे में बैंक यह सुनिश्चित करते हैं कि ATM में पर्याप्त नकदी उपलब्ध रहे। अगर किसी ATM में पैसे निकालने में दिक्कत आती है, तो आप UPI या डिजिटल पेमेंट ऐप्स से लेनदेन कर सकते हैं।

अमेरिका की चेतावनी: हमास गाजा में फलस्तीनियों पर हमले की तैयारी में, संघर्षविराम समझौते का उल्लंघन बताया

वाशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। अमेरिका ने शनिवार को हमास को कड़ी चेतावनी जारी की है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसे विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिली है, जिसके अनुसार हमास (Hamas) गाजा में फलस्तीनी नागरिकों पर सुनियोजित हमले की योजना बना रहा है। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसा होता है तो यह इस्राइल-हमास संघर्षविराम समझौते (Ceasefire Agreement) का सीधा और गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

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विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, यह हमला न केवल संघर्षविराम का उल्लंघन होगा बल्कि इससे गाजा शांति प्रक्रिया (Gaza Peace Process) पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा। अमेरिका ने गाजा शांति समझौते की गारंटी देने वाले देशों को इस बारे में सूचित किया है और हमास से तत्काल पीछे हटने की अपील की है।

बयान में कहा गया है कि यदि हमास फलस्तीनी लोगों पर हमला करता है तो इससे अब तक मध्यस्थता के जरिए हुई प्रगति खतरे में पड़ जाएगी। अमेरिका और अन्य गारंटी देने वाले देशों ने कहा है कि वे गाजा के नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार हैं।

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अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि अमेरिका आम नागरिकों की सुरक्षा, संघर्षविराम की विश्वसनीयता और मध्य पूर्व में स्थिरता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि हमास की ओर से कोई भी आक्रामक कदम न केवल संघर्षविराम का उल्लंघन होगा, बल्कि लंबे समय से जारी शांति वार्ताओं को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

दीपों की रोशनी में निहित है मानवता, सौहार्द और नई शुरुआत का संदेश

दीपावली 2025-वैश्विक आलोक का पर्व- अंधकार से प्रकाश, दरिद्रता से समृद्धि और मानवता से एकता की ओर

भारत से विश्व तक फैला दीपोत्सव का आलोक—संस्कृति का वैश्विक उत्सव-किसन

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत सहित पूरी दुनियाँ में पौराणिक काल से भारतीयों के बीच ऐसी मान्यता है कि जो मां लक्ष्मी के सामने दिल से भावपूर्ण भाव से अपनी मनोकामना रखेगा मां लक्ष्मी उन शुद्ध निस्वार्थ ईमानदार भावों पर अपनी कृपा दृष्टि ज़रूर बरसाती है औरउनकी दरिद्रता गरीबी हर लेती है,व धन-धान्य की बारिश करती है जिसका सटीक दिन दीपावली और पल या क्षण लक्ष्मी पूजा है।इस बार दीपावली की तारीख को लेकर दुनियाँ भर में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को दीपावली मनाए जाने का विधान है।भारत में अधिकतम राज्यों लोगों द्वारा सोमवार 20 अक्टूबर 2025 को दीपावली मनाई जा रही है अनेक स्कूलों में भी 19 तारीख से ही छुट्टियां घोषित की गई है,जम्मू कश्मीर सरकार ने दिवाली के पावन पर्व पर राज्य के छात्रों,शिक्षकों और कर्मचारियों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए पूरे देश में सबसे अधिक 15 दिन की लंबी छुट्टियों की घोषणा कर दी है। राज्य सरकार ने 19 अक्टूबर से 2 नवंबर तक पूरे दो सप्ताह का दिवाली अवकाश घोषित किया है। यह निर्णय प्रदेश के सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर लागू होगा। इस अवधि में प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थान पूरी तरह से बंद रहेंगे और कोई शैक्षणिक गतिविधि नहीं होगी।2025 में यह पर्व पहले से भी अधिक भव्य, आध्यात्मिक और विश्वव्यापी स्वरूप ले चुका है। इस वर्ष भारत के उत्तर प्रदेश में अयोध्या की पावन नगरी में होने वाला दीपोत्सव विश्व का सबसे बड़ा सामूहिक आलोक उत्सव बनने जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका के टाइम्स स्क्वायर, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, सिंगापुर और खाड़ी देशों में बसे भारतीय समुदायोंने भी दीपावली को विश्व सांस्कृतिक एकता के प्रतीक के रूप में मनाने की तैयारी कर ली है। इस बार का दीप पर्व न केवल घर-आंगन बल्कि विश्व के हृदय को भी रोशन करेगा।
साथियों बात अगर कर हम दीपावली पर्व 2025 की बेला आई भक्तों की मन्नतें और मां लक्ष्मी की आराधना को समझने की करें तो,दीपावली का अर्थ ही है,“अंधकार पर प्रकाश की विजय”।यह त्योहार हर उस व्यक्ति के जीवन में नई आशा, विश्वास और समृद्धि का दीप जलाता है जो परिश्रम, श्रद्धा और सकारात्मकता में विश्वास रखता है। 2025 की दीपावली की बेला पर भक्तों ने मां लक्ष्मी से अपनी मन्नतें सुनाई,”हे मां लक्ष्मी, दरिद्रता, गरीबी और कष्टों को दूर करो, हमारे घरों में धन, ज्ञान और स्वास्थ्य की वर्षा करो”।इस भावना में केवल भौतिक समृद्धि नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन की भी आकांक्षा निहित है।प्रत्येक घर में माँ लक्ष्मी का स्वागत विशेष भक्ति भाव से किया जाता है,द्वारपर रंगोली, आंगन में दीपमाला और पूजा स्थल पर धूप-दीप का समर्पण। यह वह क्षण होता है जब संपूर्ण वातावरण में एक दिव्य ऊर्जा का संचार होता है, जैसे स्वयं ब्रह्मांड भी भक्तों के आह्वान को सुनकर झिलमिलाने लगता है।
साथियों बात अगर हम लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त,कृपा वर्षा का दिव्य क्षण को समझने की करें तो,दीपावली की सबसे प्रमुख संध्या होती है मां लक्ष्मी पूजन की रात्रि, जब पूरा परिवार एकत्र होकर देवी महालक्ष्मी, भगवान विष्णु, गणेश और कुबेर की पूजा-अर्चना करता है।2025 के शुभ मुहूर्त के अनुसार, यह पूजन अत्यंत मंगलकारी संयोग में होगा,जहां ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति धन प्राप्ति, व्यापार उन्नति और सौभाग्य में वृद्धि का संकेत दे रही है।मान्यता है कि लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त में स्वयं देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर अवतरित होकर अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि बरसाने निकलती हैं। जिन घरों में स्वच्छता, शुद्धता और श्रद्धा का वातावरण होता है, वहां मां की विशेष कृपा बरसती है। कहा जाता है,“जिस पर लक्ष्मी की नज़र पड़ी,उसकी किस्मतनिहाल हो गई”वही कारण है कि इस रात हर घर दीपों से जगमगा उठता है, हर मन में नई उम्मीद जाग उठती है।इस दिन लोग केवल धन की नहीं, बल्कि धर्म, ज्ञान और सद्बुद्धि की कामना भी करते हैं। क्योंकि भारतीय दर्शन के अनुसार धन तभी मंगलकारी होता है जब वह धर्म के मार्ग पर चलकर समाज की भलाई में प्रयुक्त हो।
साथियों बात अगर हम आओ सभी मिलकर,समाज, देश और विश्व की समृद्धि के लिए प्रार्थना करने की करें तो दीपावली केवल व्यक्तिगत सुख-संपत्ति का पर्व नहीं, यह सामूहिक समृद्धि और सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस वर्ष का दीपोत्सव विशेष रूप से “सर्वजन सुखाय, सर्वजन हिताय” की भावना को समर्पित है।हर व्यक्ति को इस अवसर पर यह संकल्प लेना चाहिए कि वह अपने परिवार,समाज और देश के कल्याण के लिए कुछ सकारात्मक योगदान देगा। दीप जलाना केवल प्रतीक नहीं, बल्कि यह हमारे भीतर के अंधकार,ईर्ष्या, घृणा, लोभ, और अहंकार को मिटाने का भी एक प्रयास है।भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने इस वर्ष पटाखों और प्रदूषण को लेकर दिशा- निर्देश जारी किए हैं।यह आवश्यक है कि दीपावली का उल्लास प्रकृति की मर्यादाओं के भीतर रहे। हम सभी को चाहिए कि इस पर्व को पर्यावरण-मित्र तरीके से मनाएँ,दीप जलाएँ, पर धुआँ नहीं फैलाएँ। बच्चों को भी यह सिखाना जरूरी है कि उत्सव का आनंद प्रकृति के साथ तालमेल में ही पूर्ण होता है।
साथियों बात अगर हम अयोध्या का दीपोत्सव 2025 के अवसर पर 26 लाख दीयों से जगमगाएगी सरयू घाट को समझने की करें तो,विश्व की सांस्कृतिक राजधानी बन चुकी अयोध्या में इस बार का दीपोत्सव इतिहास रचने जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, 19 अक्टूबर 2025 को सरयू घाट और आसपास के 50 से अधिक घाटों पर कुल 26,11,101 दीप जलाए जाएंगे।यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भारत का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराने की तैयारी भी है।अयोध्या में यह दृश्य मानो किसी दिव्य लोक का प्रतीत होता है,सरयू के जल पर झिलमिलाते दीप, मंदिरों की आरतियाँ, राम जन्मभूमि परिसर में गूंजते भजन, और चारों ओर “जय श्रीराम” का जयघोष। यह वह क्षण है जब पूरी धरती मानो रामराज्य की अनुभूति करती है।इस आयोजन में लाखों श्रद्धालु, पर्यटक और अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्रतिनिधि सम्मिलित होंगे। ड्रोन और उपग्रहों से इस अद्भुत नजारे का सीधा प्रसारण दुनिया भर में किया जाएगा।अयोध्या का यह आलोकोत्सव न केवल धार्मिक भावना का प्रतीक है बल्कि भारत की “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना का भी जीवंत उदाहरण है।
साथियों बात अगर हम विश्व में गूंजेगी दीपावली,टाइम्स स्क्वायर से लेकर सिडनी हार्बर तक को समझने की करें तो,अब दीपावली केवल भारतीय सीमाओं तक सीमित नहीं रही। अमेरिका के न्यूयॉर्क टाइम्स स्क्वायर में हर वर्ष की तरह इस बार भी “दिवाली एट टाइम्स स्क्वायर” का आयोजन होग़ा, जहाँ भारतीय मूल के हजारों लोग दीपों और रंगारंग प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे।ब्रिटेन के लंदन के ट्राफलगर स्क्वायर, सिडनी हार्बर (ऑस्ट्रेलिया), सिंगापुर के लिटिल इंडिया, दुबई के ग्लोबल विलेज, और कनाडा के टोरंटो सिटी हॉल में भी दीपावली महोत्सव मनाया जाएगा। इन आयोजनों में न केवल भारतीय समुदाय बल्कि स्थानीय नागरिक भी बड़ी संख्या में भाग लेते हैं, जिससे यह पर्व वैश्विक सांस्कृतिक संवाद का माध्यम बन गया है।इन अंतरराष्ट्रीय उत्सवों का संदेश स्पष्ट है,चाहे धर्म,भाषा या भूगोल भिन्न हो,लेकिन प्रकाश का संदेश सार्वभौमिक है। अंधकार के विरुद्ध प्रकाश का यह उत्सव पूरी मानवता को एक सूत्र में पिरो देता है।
साथियों बात अगर हम आध्यात्मिक दृष्टि से दीपावली आत्मप्रकाश का उत्सव को देखने की करें तो,यदि धार्मिक अनुष्ठानों और परंपराओं से परे देखें तो दीपावली का गूढ़ अर्थ है,अपने भीतर के प्रकाश को जगाना। यह वह पर्व है जब व्यक्ति अपने कर्म, विचार और दृष्टिकोण में सुधार कर नई शुरुआत करता है।भगवान श्रीराम का अयोध्या लौटना केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि यह धर्म, सत्य और करुणा की पुनर्स्थापना का प्रतीक है। हर युग में जब अंधकार बढ़ता है, तब कोई न कोई दीप उसे मिटाने के लिए जलता है। दीपावली हमें यही प्रेरणा देती है कि हम भी अपने भीतर एक दीप बनें,जो अज्ञान के अंधकार को मिटाए, और समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाए।
साथियों बात अगर हम आर्थिक दृष्टि से दीपावली व्यापार,निवेश और रोजगार का पर्व समझने की करें तोदीपावली भारत की सबसे बड़ी आर्थिक गतिविधि का भी समय है। इस अवसर पर बाजारों में करोड़ों रुपये का लेन-देन होता है,सोना-चांदी,ऑटोमोबाइल,इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वस्त्र मिठाइयाँ और सजावटी वस्तुएँ, सबकी बिक्री में वृद्धि होती है।2025 में भारत का खुदरा व्यापार संगठनके अनुसार, दीपावली सीजन में लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये के कारोबार की संभावना है। यह उत्सव न केवल अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देता है बल्कि लाखों छोटे व्यापारियों, कारीगरों और हस्तशिल्पकारों के जीवन में भी खुशियाँ लाता है।
साथियों बात अगर हम पर्यावरणीय जागरूकता,हरित दीपावली की ओर कदम को समझने की करें तो,2025 की दीपावली का विशेष संदेश है,“हरित दीपावली,स्वच्छ भारत।” सरकार और पर्यावरण संगठनों ने लोगों से आग्रह किया है कि वे मिट्टी के दीपक, प्राकृतिक रंगों और पर्यावरण- मित्र सजावट का उपयोग करें।इस वर्ष कई स्कूलों, कॉलेजों और संस्थानों ने “एक दीप प्रकृति के नाम” अभियान शुरू किया है, जिसके तहत वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्लास्टिक-मुक्त उत्सव को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे दीपावली का वास्तविक उद्देश्य,“प्रकाश फैलाना”अपनी सार्थकता में और गहरा हो जाता है।
साथियों बात अगर हम संस्कृति से वैश्विक कूटनीति तकदीपावली का नया आयाम को समझने की करें तो,भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में दीपावली को सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी के रूप में भी प्रस्तुत किया है।संयुक्त राष्ट्र,
व्हाइट हाउस और डाउनिंग स्ट्रीट जैसी जगहों पर दीपावली समारोह का आयोजन अब सामान्य बात हो गई है।2025 में, भारत-ब्रिटेन और भारत- अमेरिका संबंधों में सांस्कृतिक एकता के प्रतीक के रूप में दीपावली का उपयोग विशेष महत्व रखेगा। यह संदेश देता है कि भारत केवल आर्थिक या सैन्य शक्ति नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शक्ति भी है,जो “विश्व गुरु” की भावना को जीवित रखती है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि दीपों की यह रोशनी मानवता का उत्सव है,दीपावली 2025 केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता के प्रकाश का उत्सव बन चुकी है। यह हमें याद दिलाती है कि चाहे युग बदल जाए, तकनीक आगे बढ़ जाए,लेकिन प्रकाश का मूल्य कभी कम नहीं होता।जब अयोध्या की सरयू घाट पर 26 लाख दीप जलेंगे, जब टाइम्स स्क्वायर पर भारतवंशी “जय श्रीराम” और “शुभ दीपावली” का उद्घोष करेंगे, तब पूरी दुनिया यह संदेश सुनेगी,“जहाँ प्रकाश है, वहीं जीवन है। जहाँ प्रेम है, वहीं ईश्वर है।”इस दीपावली पर केवल अपने घर ही नहीं, बल्कि अपने हृदय को भी रोशन करें।क्योंकि सच्ची दीपावली वही है जो अंधकार को मिटाकर आत्मा को प्रकाशित कर दे।

-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभक़ार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र9226229318

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15 वर्षों से अधर में देवरिया-पकड़ी मार्ग की ठाकुरदेवा लिंक रोड: भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी ग्रामीणों की उम्मीदें

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पकड़ी बाजार से करीब 3 किलोमीटर पहले यदुपरसिया पेट्रोल पंप से 700 मीटर की दूरी पर स्थित ठाकुरदेवा लिंक रोड पिछले 15 वर्षों से बदहाली की मार झेल रही है। यह सड़क अब गड्ढों में तब्दील हो चुकी है, जिससे राहगीरों, स्कूली बच्चों, किसानों और वाहनों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी वर्षों से इस सड़क की मरम्मत के नाम पर केवल कागजों में काम दिखा रहे हैं। जमीन पर स्थिति बेहद भयावह है—सड़क की तीसरी परत तक उखड़ चुकी है, डामर गायब हो गया है और जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं। बरसात में यह सड़क कीचड़ के तालाब में बदल जाती है।

15 साल से बिना मरम्मत — आखिर जिम्मेदार कौन?

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस सड़क की मरम्मत का कार्य विगत 15 वर्षों से नहीं हुआ है, जबकि ग्रामीण सड़कों का “नवीनीकरण (Renewal)” हर 5 वर्ष में किया जाना चाहिए। यह नियम लोक निर्माण विभाग के मानक विनिर्देश (PWD Manual) में स्पष्ट रूप से दर्ज है। यानी अब तक इस सड़क का तीन बार नवीनीकरण होना चाहिए था, लेकिन विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार ने इसे पूरी तरह बर्बाद कर दिया।

फर्जी भुगतान और मिलीभगत का खेल!

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से दो बार फर्जी भुगतान तक किया गया है। जबकि सड़क पर एक इंच का भी नया काम नहीं हुआ। अधिशासी अभियंता (Executive Engineer), सहायक अभियंता (AE) और अवर अभियंता (JE) तीनों स्तरों पर जवाबदेही तय नहीं हुई।
सूत्र बताते हैं कि “ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए अधिकारियों ने फर्जी माप पुस्तिकाओं (Measurement Books) में काम दिखाकर भुगतान किया गया।” लेकिन जब ग्रामीणों ने इसकी शिकायत की, तो उनकी बात अनसुनी कर दी गई।

ग्रामीणों का रोष—‘अब नहीं सहेंगे अन्याय’

ठाकुरदेवा, पकड़ी और यदुपरसिया गांव के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि सड़क की मरम्मत जल्द शुरू नहीं की गई, तो वे लोक निर्माण विभाग के कार्यालय का घेराव करेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि “अधिकारियों की नजर केवल कागजी लाभ पर है, जमीनी सच्चाई पर नहीं।”

सवाल उठता है – आखिर कब बनेगी सड़क?

ग्रामीण सड़कें विकास की रीढ़ कही जाती हैं, लेकिन देवरिया-पकड़ी मार्ग की यह लिंक रोड आज भ्रष्टाचार की जकड़ में कराह रही है।
15 साल से जनता सिर्फ झूठे आश्वासन सुन रही है। अगर अब भी जांच कर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह एक और उदाहरण बन जाएगा कि कैसे विकास योजनाएं अधिकारियों की जेबों में सिमट जाती हैं।

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BIS Care App: अब घर बैठे करें सोने की शुद्धता की जांच, ऐसे पहचानें असली और नकली गोल्ड में फर्क

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। धनतेरस और दिवाली पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है, लेकिन नकली या कम शुद्ध सोना लेने का खतरा हमेशा बना रहता है। अब इस परेशानी से छुटकारा देने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने उपभोक्ताओं के लिए ‘BIS Care App’ लॉन्च किया है। इस मोबाइल एप की मदद से आप घर बैठे सोने की शुद्धता (Gold Purity) और हॉलमार्क HUID नंबर की जांच कर सकते हैं।

ऐसे करें सोने की शुद्धता की जांच:

  1. गूगल प्ले स्टोर या एप्पल स्टोर से BIS Care App डाउनलोड करें।
  2. रजिस्ट्रेशन के बाद ऐप में “Verify HUID” ऑप्शन चुनें।
  3. अपने सोने के आभूषण पर लिखे 6 अंकों के HUID नंबर को दर्ज करें।
  4. ऐप आपको बताएगा —

सोने की शुद्धता (कैरेट या प्योरिटी मार्क)

ज्वेलर का नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर

हॉलमार्किंग सेंटर की जानकारी

प्रमाणन की तारीख
अगर ऐप की जानकारी और ज्वेलरी बिल में फर्क है, तो आप तुरंत वहीं से शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

क्या है BIS हॉलमार्क?
BIS हॉलमार्क भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का प्रतीक चिन्ह है जो सोने और चांदी की शुद्धता की गारंटी देता है। असली BIS हॉलमार्क में चार निशान होते हैं:

BIS लोगो, प्योरिटी मार्क (जैसे 22 कैरेट के लिए 916, 18 कैरेट के लिए 750), हॉलमार्किंग सेंटर कोड, ज्वेलर का यूनिक कोड

घर पर सोने की जांच के आसान तरीके:
अगर आपके पास ऐप नहीं है, तो भी कुछ घरेलू टेस्ट से नकली सोने की पहचान की जा सकती है:

मैग्नेट टेस्ट: असली सोना चुंबक से नहीं चिपकता।

सिरेमिक टेस्ट: असली सोना पीली लकीर छोड़ता है।

सिरका टेस्ट: सिरका डालने पर असली सोना अपना रंग नहीं बदलता।

डेंसिटी टेस्ट: सोने की घनत्व 19.3 g/cm³ होती है।

इस दिवाली और धनतेरस पर सोना खरीदने से पहले BIS Care App पर HUID नंबर जरूर वेरिफाई करें, ताकि आपकी खुशियों की चमक हमेशा असली सोने जैसी बनी रहे।

दीपावली 2025 : शुभ दीपोत्सव पर क्या बनाएँ भोजन, जिससे घर में बरसे लक्ष्मी कृपा

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🪔 भैया दूज की कथा और महत्त्व भी जानें

“दीपों की रोशनी में जब घर जगमगाता है, तो मन की हर अंधियारी भी मिट जाती है।”

गृह विशेष संवाददाता | राष्ट्र की परम्परा

दीपावली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है — प्रेम, प्रकाश, समृद्धि और पारिवारिक सौहार्द का उत्सव।
हर साल कार्तिक अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व, मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की आराधना का प्रतीक है।
इस दिन सही भोजन और विधिपूर्वक पूजन से घर में सुख-शांति और आर्थिक समृद्धि आती है।


🌼 घर को महकाने वाला शुभ भोजन

दीपावली के दिन बना भोजन न केवल स्वाद का प्रतीक है, बल्कि उसमें धार्मिक और आध्यात्मिक ऊर्जा भी होती है।
कहा जाता है — “जहाँ सात्विकता, स्वच्छता और प्रेम हो, वहीं लक्ष्मी का निवास होता है।”

🍛 1. पूरनपोली या गुड़-चना दाल परांठा
गुड़ और चने की दाल से बना यह व्यंजन लक्ष्मी पूजन के बाद बनाना शुभ माना जाता है।
यह संपन्नता और मधुरता का प्रतीक है।

🍚 2. खीर — चावल, दूध और शुद्ध घी का संगम
खीर को “शुभता का प्रसाद” कहा गया है।
लक्ष्मी पूजन के बाद खीर का भोग लगाने से घर में सौभाग्य और समृद्धि बनी रहती है।

🫓 3. पूड़ी और कद्दू की सब्जी
उत्तर भारत में दीपावली की सुबह यह पारंपरिक भोजन बनता है।
कद्दू को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है — इसका सेवन नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।

🧆 4. चने और सूखे मेवे
ऊर्जा और संतुलन का प्रतीक — शरीर और मन दोनों में सकारात्मक शक्ति जगाते हैं।

🍬 5. मिठाइयाँ : बेसन लड्डू, बर्फी और गुजिया
दीपावली का स्वाद मिठाइयों के बिना अधूरा है।
“जितनी मिठास मिठाई में, उतनी ही बातों में हो” — यही दीपावली का संदेश है।


🌸 लक्ष्मी आगमन के भोजन नियम

1️⃣ भोजन सात्विक और ताजे घी में बना होना चाहिए।
2️⃣ प्याज-लहसुन का प्रयोग न करें।
3️⃣ पहले मां लक्ष्मी और गणेश जी को भोग लगाएँ, फिर परिवार भोजन करे।
4️⃣ भोजन में मिठास और प्रेम का भाव अवश्य हो।
5️⃣ दीपावली की रात रसोई में दीप जलाना “अन्न देवता” का सम्मान माना गया है।


🪔 दीपोत्सव का भावनात्मक संदेश

“अंधकार चाहे कितना भी गहरा हो, एक दीपक की लौ उसे मिटा सकती है।”

दीपावली हमें सिखाती है कि बाहरी सफाई जितनी ज़रूरी है, मन की शुद्धि भी उतनी ही आवश्यक है।
इस दिन किया गया दान, सेवा और शुभ कार्य कई गुना फल देता है।


🌺 भैया दूज 2025 : प्रेम, रक्षा और आशीर्वाद का पर्व

दीपावली के दो दिन बाद मनाया जाने वाला भैया दूज भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है।
इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है।


📜 भैया दूज की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, यमराज और उनकी बहन यमुना का प्रेम अद्भुत था।
एक दिन यमुनाजी ने अपने भाई को घर आमंत्रित किया, तिलक किया और भोजन कराया।
प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया —

“जो बहन इस दिन अपने भाई का तिलक करेगी, वह उसके दीर्घायु और सुख की कामना करेगी।”
तभी से यह परंपरा आज तक चली आ रही है।


💐 भैया दूज पर क्या करें

1️⃣ सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2️⃣ बहन भाई के माथे पर चंदन या कुमकुम का तिलक लगाए।
3️⃣ पूजा में सुपारी, पान, रोली, मिठाई और नारियल का प्रयोग करें।
4️⃣ भाई बहन को उपहार दे और आशीर्वाद ले।
5️⃣ भोजन में पुए, पूड़ी, हलवा और खीर बनाना शुभ माना गया है।


🌹 भैया दूज का आध्यात्मिक अर्थ

भैया दूज केवल तिलक का पर्व नहीं, बल्कि संबंधों में विश्वास और प्रेम की पुनर्स्थापना का अवसर है।
भाई का प्रण — “मैं सदा तुम्हारी रक्षा करूंगा।”
बहन का आशीर्वाद — “तुम्हारा जीवन दीपों की तरह उज्जवल रहे।”


🕯️ दीप से दीप जले — यही दीपावली का अर्थ

दीपावली और भैया दूज दोनों हमें सिखाते हैं कि रोशनी और रिश्ते जीवन की असली पूंजी हैं।
सात्विक भोजन, मां लक्ष्मी की आराधना और भैया दूज का तिलक —
ये तीनों मिलकर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और प्रेम का संगम बनाते हैं।

🪔 हर दीपावली यह संकल्प लें — हम सिर्फ घर नहीं, दिल भी रोशन करेंगे।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रोहित-कोहली की होगी धमाकेदार वापसी, शुभमन गिल की कप्तानी में नीतीश रेड्डी कर सकते हैं डेब्यू

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खेल (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रविवार से तीन मैचों की वनडे सीरीज की शुरुआत होने जा रही है। क्रिकेट फैन्स की निगाहें एक बार फिर रोहित शर्मा और विराट कोहली पर टिकी होंगी, जो लंबे अंतराल के बाद भारतीय टीम में वापसी कर रहे हैं। यह पहली बार होगा जब दोनों दिग्गज खिलाड़ी शुभमन गिल की कप्तानी में मैदान पर उतरेंगे।

2018 में आखिरी बार चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान साथ खेलने वाले रोहित और कोहली ने इस सीरीज से पहले जमकर अभ्यास किया है। दोनों के लिए यह सीरीज 2027 वनडे विश्व कप की तैयारी का अहम पड़ाव मानी जा रही है। खास बात यह है कि रोहित के सिर पर अब कप्तानी का दबाव नहीं होगा, जिससे वे खुलकर बल्लेबाजी कर पाएंगे। वहीं, कोहली एक बार फिर लंबी पारी खेलने की कोशिश करेंगे।

टीम इंडिया की कमान इस बार शुभमन गिल के हाथों में है, जिन्होंने टेस्ट कप्तान के रूप में अच्छा प्रदर्शन किया था। वनडे सीरीज में गिल के सामने अपनी कप्तानी को साबित करने की चुनौती होगी। टीम संयोजन की बात करें तो नीतीश कुमार रेड्डी को वनडे में डेब्यू का मौका मिल सकता है, क्योंकि ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या चोट के कारण बाहर हैं।

पहले वनडे की संभावित प्लेइंग-11:


भारत: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर (उपकप्तान), अक्षर पटेल, केएल राहुल (विकेटकीपर), नीतीश कुमार रेड्डी, वाशिंगटन सुंदर, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज।


ऑस्ट्रेलिया: मिचेल मार्श (कप्तान), ट्रेविस हेड, जोश फिलिप (विकेटकीपर), टिम डेविड, मैथ्यू शॉर्ट, मार्नस लाबुशेन, मिचेल ओवेन, मिचेल स्टार्क, जैवियर बार्टलेट, मैथ्यू कुहनेमैन, जोश हेजलवुड।