Monday, July 6, 2026
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MSME को मिला ₹2.65 लाख करोड़ का लोन, फास्टैग सालाना पास अब तोहफे में दें; मीशो IPO से जुटाएगा ₹4250 करोड़

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बिजनेस ( राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर को बीते सात सालों में बड़ी राहत मिली है। PSB Loans in 59 Minutes प्लेटफॉर्म के जरिए उद्यमियों को ₹2.65 लाख करोड़ से अधिक के लोन मंजूर किए गए हैं। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म 2018 में लॉन्च हुआ था और अब तक लगभग 30 लाख ऋण स्वीकृत कर चुका है। यहां 10 लाख से लेकर 5 करोड़ रुपये तक के लोन एक घंटे के भीतर मंजूर हो जाते हैं। यह प्लेटफॉर्म जीएसटी रिटर्न, आयकर फाइलिंग और बैंक स्टेटमेंट जैसी जानकारी को एकीकृत कर प्रक्रिया को आसान बनाता है।

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इसी बीच, फास्टैग उपयोगकर्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। अब राजमार्गयात्रा ऐप के जरिए कोई भी फास्टैग सालाना पास गिफ्ट के रूप में दे सकता है। उपयोगकर्ता “पास जोड़ें” विकल्प पर क्लिक करके वाहन नंबर और संपर्क विवरण डालकर ओटीपी सत्यापन के बाद सालाना पास सक्रिय कर सकते हैं। यह पास एक साल तक या 200 टोल क्रॉसिंग तक वैध रहेगा, जिसकी कीमत ₹3,000 है।

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वहीं, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मीशो (Meesho) आईपीओ के जरिए ₹4,250 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। कंपनी ने सेबी (SEBI) के पास ड्राफ्ट दस्तावेज दाखिल कर दिए हैं। प्रस्तावित पब्लिक इश्यू में नए शेयर जारी होंगे, साथ ही मौजूदा निवेशक भी अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। कंपनी का अंतिम मूल्यांकन शेयर प्राइस बैंड जारी होने के बाद तय किया जाएगा।

दीपावली 2025: सुबह से शाम तक पूर्ण पूजा पद्धति

दीपावली (या दिवाली) भारतीय संस्कृति का सबसे प्रमुख और शुभ त्योहार है। यह अंधकार पर प्रकाश की विजय, बुराई पर अच्छाई की जीत, धन और समृद्धि की प्राप्ति का प्रतीक है। 2025 में दीपावली का मुख्य दिन 20 अक्टूबर है। इस दिन को सही विधि और भाव के साथ मनाना अत्यंत शुभ माना जाता है। नीचे सुबह से शाम तक पूजा और अन्य कार्यों का क्रम सरल भाषा में समझाया गया है।

  1. सुबह के कार्य
    1.1 समय पर जागना
    दीपावली के दिन जल्दी उठना बहुत शुभ माना जाता है। आदर्श समय सूर्योदय से पहले है।
    सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। विशेषतः नए वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
    1.2 शुद्धिकरण
    घर की सफाई करें। खासकर पूजा स्थान, आंगन और घर के प्रवेश द्वार को साफ करें।
    तुलसी, धूप और दीप से घर को शुद्ध करें।
    दीयों को साफ कर तेल और व wick की जांच कर लें।
    1.3 मानसिक तैयारी
    मन को शांत रखें।
    दिन की शुरुआत में घर के सदस्यों से प्रेम और सौहार्द्र के साथ मिलें।
    “ॐ नमो नारायणाय” का जाप करके दिन की शुरुआत करें।
  2. मुख्य पूजा की तैयारी
    2.1 पूजा स्थान सजाना
    पूजा स्थल को साफ और स्वच्छ रखें।
    नीचे लाल या पीला वस्त्र बिछाएँ।
    पूजा स्थान पर लक्ष्मी गणेश जी की मूर्ति या फोटो रखें।
    फूल, अक्षत (चावल), हल्दी-कुंकुम, दियों और मिठाईयों की व्यवस्था करें।
    2.2 आवश्यक सामग्री
    दियो: मिट्टी के 10–20 छोटे दीपक
    दीप का तेल या घी
    मक्खन व छोटी मेणबत्तियाँ (अगर चाहें)
    फूल: गुलाब, गेंदा, चमेली
    धूप और अगरबत्ती
    लाल वस्त्र या पूजा थाल
    कुमकुम, हल्दी, चावल (अक्षत)
    मिठाई, फलों का भोग
  3. सुबह की विधि
    3.1 गणेश पूजन
    दीपावली पर सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें।
    मंत्र:
    ॐ गणेशाय नमः
    हल्दी-कुंकुम और अक्षत चढ़ाएँ।
    अगरबत्ती और दीपक जलाएँ।
    3.2 लक्ष्मी पूजन
    लक्ष्मी माता के समक्ष दीपक और फूल चढ़ाएँ।
    घर के कोनों में सोने या धन से संबंधित प्रतीक रखें।
    लक्ष्मी पूजन मंत्र:
    ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्नी च धीमहि
    तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ॥
    इस मंत्र का कम से कम 11 बार जाप करें।
    मिठाई और फलों का भोग रखें।
  4. दिन के समय
    4.1 घर और आंगन सजाना
    रंगोली बनाना इस दिन का विशेष आकर्षण है।
    आंगन और पूजा स्थान पर दीपों की व्यवस्था करें।
    घर के दरवाजों पर लाल या पीली रेशमी लम्बी रिबन या फूलों का हार लगाएँ।
    4.2 दान और सेवा
    गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या पैसे दें।
    यह दिन केवल पूजा का नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द्र का भी दिन है।
    4.3 कामकाजी गतिविधियाँ
    व्यापारियों के लिए दिन शुभ होता है। वे आज नया खाता खोल सकते हैं।
    घर के सदस्यों के लिए घर के वित्तीय काम और निवेश का शुभारंभ कर सकते हैं।
  5. शाम की विधि (सांझ पूजा)
    5.1 दीप जलाना
    शाम होते ही सभी घर के कोनों में दीपक जलाएँ।
    दीप जलाने का तरीका:
  6. मिट्टी का दीपक लें।
  7. तेल या घी भरें।
  8. व Wick को डालें और आग लगाएँ।
  9. दीपक को घर के प्रवेश द्वार, आंगन, पूजा स्थान और खिड़कियों पर रखें।
    दीप जलाने का मंत्र (जपते हुए):
    ॐ ज्योतिर्लिंगाय नमः
    यह बुराई और अंधकार को दूर करने का प्रतीक है।
    5.2 लक्ष्मी माता का पूजन
    दीप जलाने के बाद लक्ष्मी माता की विशेष पूजा करें।
    फूल, अक्षत, मिठाई और फलों का भोग चढ़ाएँ।
    अगर संभव हो तो संतान और परिवार के सभी सदस्य मिलकर पूजा करें।
    5.3 आरती
    शाम को लक्ष्मी और गणेश जी की आरती करें।
    दीपक हाथ में लेकर घुमाएँ और परिवार के सदस्यों को उनका आशीर्वाद दें।
    आरती के दौरान “सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके” का गायन करें।
  10. दीपावली की विशेष बातें
  11. दीपों की संख्या:
    मुख्य पूजा स्थल पर 5–7 दीपक और घर के कोनों में 1–2 दीपक रखें।
  12. दीप जलाने का समय: सूर्यास्त के बाद।
  13. धन लाभ: पूजा के समय साफ हाथों से सिक्के रखें।
  14. मंत्र और भजन: संकल्प लेकर हर दीप के सामने मंत्र बोलना शुभ माना जाता है।
  15. रंगोली और सजावट: रंगोली में लाल, पीला, नारंगी और हरे रंग का प्रयोग करें।
  16. दिवाली का सांकेतिक महत्व
    दीप जलाना: अज्ञान और अंधकार पर ज्ञान और प्रकाश की विजय।
    लक्ष्मी पूजन: धन और समृद्धि की प्राप्ति।
    गणेश पूजन: सभी कार्यों में सफलता और बाधाओं से मुक्ति।
    दान: दूसरों के कल्याण से स्वयं का पुण्य।
    सामाजिक मिलन: रिश्तों में मिठास और सामंजस्य।
  17. सरल मंत्र और व्रत की पद्धति
    8.1 शुभ मंत्र
    गणेश मंत्र:
    ॐ गण गणपतये नमः
    लक्ष्मी मंत्र:
    ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
    दीपक मंत्र:
    ॐ ज्योतिर्लिंगाय नमः
    8.2 व्रत और नियम
    दिन भर हल्का और शुद्ध भोजन करें।
    अपशब्दों से बचें और मानसिक शांति रखें।
    परिवार के सभी सदस्य मिलकर पूजा में भाग लें।
  18. पूजा के बाद
    पूजा समाप्त होने के बाद दीपक के तेल में थोड़ी हल्दी डालकर अगली बार उपयोग करें।
    मिठाई और प्रसाद सभी को बांटें।
    रात को आकाश की ओर दीपक देखकर मन में शुभकामनाएँ करें।
    अगले दिन दीपावली का त्योहार पूरे परिवार के साथ आनंद और प्रेम से यादगार बने।
  19. संपूर्ण दिन का सार
    समय कार्य
    सुबह स्नान, साफ कपड़े, गणेश पूजन, घर की सफाई
    पूर्व दोपहर घर की सजावट, रंगोली, फूल और पूजा सामग्री व्यवस्था
    दोपहर दान, सेवा, व्यापार/घर के शुभ कार्य
    शाम (सांझ) दीप जलाना, लक्ष्मी पूजन, आरती, भोग अर्पण
    रात प्रसाद बांटना, घर की कोनों में दीपक रखकर शुभकामना

दीपावली का दिन न केवल पूजा और दीप जलाने का दिन है, बल्कि यह परिवार, समाज और स्वयं के लिए उज्जवलता, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाने का दिन है। सही विधि और सच्चे मनोभाव से पूजा करने पर लक्ष्मी माता का आशीर्वाद सदैव मिलता है।

महान व्यक्ति: समाज और संस्कृति पर अमिट छाप

19 अक्टूबर का दिन इतिहास में उन महान व्यक्तियों के योगदान और उनके निधन के लिए याद रखा जाता है जिन्होंने साहित्य, राजनीति, कला और समाज सेवा में अपूरणीय योगदान दिया। इस दिन विभिन्न क्षेत्रों के उन व्यक्तियों का निधन हुआ जिन्होंने अपने जीवन के माध्यम से समाज और संस्कृति में स्थायी छाप छोड़ी। आइए जानते हैं इस दिन हुए प्रमुख निधन और उनके जीवन की महत्वपूर्ण झलकियाँ।

  1. कक्कानादन (2011) – भारतीय लेखक और कथाकार
    कक्कानादन का निधन 19 अक्टूबर 2011 को हुआ। वे भारतीय साहित्य के प्रमुख कथाकारों में से एक थे। कक्कानादन की कहानियाँ समाज की गहन संवेदनाओं और मानवीय रिश्तों का सजीव चित्रण करती थीं। उन्होंने साहित्य के माध्यम से सामाजिक मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया और अपने पात्रों के माध्यम से मानवीय अनुभवों को पाठकों के सामने प्रस्तुत किया।
    कक्कानादन की शैली सरल लेकिन प्रभावशाली थी। उनकी कहानियों में आम लोगों की जीवन-यात्रा और संघर्ष की झलक मिलती है। उन्होंने केवल साहित्य नहीं लिखा, बल्कि समाज के असली चेहरों और उनके मुद्दों को पाठकों तक पहुँचाया। उनके योगदान से भारतीय साहित्य को नई दिशा और गहराई मिली।
    मुख्य योगदान:
    समाजिक और मानवीय मुद्दों पर साहित्यिक चेतना।
    उपन्यास और कहानियों में पात्रों के माध्यम से वास्तविक जीवन की झलक।
    साहित्यिक पुरस्कार और सम्मान, जिन्होंने उन्हें भारतीय साहित्य में प्रमुख स्थान दिलाया।
  2. जॉन बोस्को जसोकी (2005) – भारतीय राजनीतिज्ञ
    जॉन बोस्को जसोकी का निधन 19 अक्टूबर 2005 को हुआ। वे भारतीय राजनीति के सक्रिय सदस्य थे और समाजिक न्याय, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके नेतृत्व और दूरदर्शिता ने कई योजनाओं और नीतियों को सफल बनाया।
    जसोकी ने हमेशा आम जनता के कल्याण के लिए काम किया। उनके कार्यकाल में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेक योजनाएँ लागू हुईं, जिन्होंने समाज के कमजोर वर्गों की स्थिति सुधारने में मदद की। उनकी विचारधारा और नीति निर्धारण की क्षमता ने उन्हें एक सम्मानित नेता के रूप में स्थापित किया।
    मुख्य योगदान:
    समाजिक न्याय और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार।
    स्वास्थ्य योजनाओं के माध्यम से गरीब और वंचित वर्गों की मदद।
    भारतीय राजनीति में दूरदर्शी नेतृत्व और नीति निर्माण।
  3. कुमारी नाज़ (1995) – हिंदी फ़िल्म अभिनेत्री
    कुमारी नाज़ का निधन 19 अक्टूबर 1995 को हुआ। वे हिंदी फ़िल्म उद्योग की लोकप्रिय अभिनेत्री थीं और अपनी अदाकारी के लिए जानी जाती थीं। कुमारी नाज़ ने फिल्मों में विविध भूमिकाएँ निभाई और दर्शकों के दिलों में अपनी छवि बनाई।
    उनकी अभिनय क्षमता, स्क्रीन उपस्थिति और भावनाओं को सहजता से व्यक्त करने की कला उन्हें एक अद्वितीय अभिनेत्री बनाती थी। उनकी फिल्मों में निभाई गई भूमिकाएँ आज भी याद की जाती हैं और उनके योगदान ने हिंदी सिनेमा को समृद्ध किया।
    मुख्य योगदान:
    हिंदी सिनेमा में महत्वपूर्ण भूमिका और यादगार अभिनय।
    विभिन्न प्रकार की भूमिकाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन।
    सिनेमा प्रेमियों के लिए प्रेरणा और कला का प्रतीक।
  4. रामअवध द्विवेदी (1971) – प्रसिद्ध साहित्यकार
    रामअवध द्विवेदी का निधन 19 अक्टूबर 1971 को हुआ। वे हिंदी साहित्य के महान कवि और लेखक थे। उनके लेखन में मानवीय संवेदनाएँ, समाजिक विषय और संस्कृत के गहन अध्ययन का प्रतिबिंब मिलता है।
    रामअवध द्विवेदी की कविताएँ और निबंध समाज के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हैं। उन्होंने साहित्य में गहनता और सुंदरता का समन्वय स्थापित किया, जिससे हिंदी साहित्य को नई पहचान मिली। उनके योगदान से साहित्य प्रेमियों और शोधकर्ताओं को अमूल्य ज्ञान और प्रेरणा मिली।
    मुख्य योगदान:
    हिंदी साहित्य और कविता में नवीन दृष्टिकोण।
    समाजिक और मानवीय मुद्दों पर साहित्यिक विमर्श।
    संस्कृत और भारतीय संस्कृति का गहन अध्ययन।

19 अक्टूबर का इतिहास और इस दिन जन्मे महान व्यक्तियों की विरासत

“19 अक्टूबर: प्रतिभा और साहस का दिन”
19 अक्टूबर का दिन इतिहास में कई महान व्यक्तियों के जन्म और उपलब्धियों के लिए याद किया जाता है। यह दिन केवल तारीख नहीं, बल्कि प्रेरणा और योगदान का प्रतीक है। आज हम उन महान व्यक्तियों के जीवन पर प्रकाश डालेंगे, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में अद्भुत योगदान दिया और समाज, कला, विज्ञान और खेल के क्षेत्र में अपूरणीय योगदान छोड़ा।

  1. दिव्यांश सिंह पंवार (2002) – निशानेबाज़
    दिव्यांश सिंह पंवार 19 अक्टूबर 2002 को जन्मे भारतीय निशानेबाज़ हैं। अपनी युवा उम्र में ही उन्होंने निशानेबाजी में कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। दिव्यांश ने भारत के लिए गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। उन्होंने अपने प्रशिक्षण और अनुशासन से युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का काम किया। उनकी मेहनत और फोकस निशानेबाजी की दुनिया में भारतीय प्रतिभा का प्रतीक है।
  2. नीतू घंघास (2000) – मुक्केबाज़
    नीतू घंघास 19 अक्टूबर 2000 को जन्मी भारत की युवा मुक्केबाज़ हैं। नीतू ने अपने करियर की शुरुआत बहुत कम उम्र में की और भारत के लिए कई अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज़ी टूर्नामेंट में पदक जीते। उनकी डेडिकेशन और फोकस युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। नीतू ने देश में महिलाओं की खेलों में भागीदारी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
  3. मातंगिनी हज़ारा (1870) – क्रांतिकारी
    मातंगिनी हज़ारा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रसिद्ध महिला क्रांतिकारी थीं। उनका जन्म 19 अक्टूबर 1870 को हुआ। मातंगिनी ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई और उन्होंने अपने साहस और समर्पण से कई युवाओं को प्रेरित किया। उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया और आज भी उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों में एक प्रेरणास्त्रोत माना जाता है।
  4. सारंगधर दास (1887) – स्वतंत्रता सेनानी
    सारंगधर दास का जन्म 19 अक्टूबर 1887 को हुआ। वे स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख सेनानी थे और उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में विशेष योगदान दिया। उनके नेतृत्व और साहस ने कई लोगों को राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने का काम किया।
  5. वेंकटरामा रामलिंगम पिल्लई (1888) – साहित्यकार
    वेंकटरामा रामलिंगम पिल्लई तमिलनाडु के महान साहित्यकार थे। उनका जन्म भी 19 अक्टूबर 1888 को हुआ। उन्होंने तमिल साहित्य को नई दिशा दी और अपने लेखन में सामाजिक मुद्दों पर जोर दिया।
  6. गोविंदराम सेकसरिया (1888) – उद्योगपति
    गोविंदराम सेकसरिया स्वतंत्रता-पूर्व भारत के सबसे सफल व्यवसायियों में से एक थे। उनका जन्म भी 19 अक्टूबर 1888 को हुआ। उन्होंने औद्योगिक क्षेत्र में अपने कार्यों से भारतीय व्यापार जगत को नई दिशा दी और आर्थिक विकास में योगदान दिया।
  7. आर. सी. बोराल (1903) – संगीतकार
    आर. सी. बोराल का जन्म 19 अक्टूबर 1903 को हुआ। वे हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध संगीतकार थे। आर. सी. बोराल ने फिल्म संगीत के क्षेत्र में भारतीय सिनेमा को नई दिशा दी और उनके रचनात्मक संगीत ने बॉलीवुड को समृद्ध किया।
  8. सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर (1910) – खगोल भौतिक शास्त्री
    सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर का जन्म 19 अक्टूबर 1910 को हुआ। उन्होंने खगोल और भौतिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध किया और भारत में विज्ञान की प्रतिष्ठा को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया।
  9. मजाज़ (1911) – शायर
    मजाज़ का जन्म 19 अक्टूबर 1911 को हुआ। वे हिंदी-उर्दू के प्रसिद्ध शायर थे। उनके शेर और ग़ज़लें आज भी प्रेम, सामाजिक चेतना और मानवता का संदेश देती हैं।
  10. भोलाशंकर व्यास (1923) – साहित्यकार
    भोलाशंकर व्यास का जन्म 19 अक्टूबर 1923 को बनारस (काशी) में हुआ। वे साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान देने वाले प्रमुख व्यक्तियों में से हैं।
  11. सनी देओल (1961) – अभिनेता
    सनी देओल, जिनका जन्म अजय सिंह के नाम से 19 अक्टूबर 1961 को हुआ, हिंदी फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता हैं। उनकी फिल्में और अभिनय का अंदाज़ उन्हें भारतीय सिनेमा में एक अलग पहचान दिलाता है।
  12. निर्मला देशपांडे (1929) – सामाजिक कार्यकर्ता
  13. निर्मला देशपांडे का जन्म 19 अक्टूबर 1929 को हुआ। वे गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित सामाजिक कार्यकर्ता थीं। उन्होंने महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए कई सामाजिक अभियानों का नेतृत्व किया।
  14. पाण्डुरंग शास्त्री अठावले (1920) – दार्शनिक
    पाण्डुरंग शास्त्री अठावले का जन्म 19 अक्टूबर 1920 को हुआ। वे महान भारतीय दार्शनिक और समाज सुधारक थे। उनके विचार और शिक्षाएँ आज भी सामाजिक और आध्यात्मिक चेतना को प्रभावित करती हैं।19 अक्टूबर के जन्मदिन पर इन महान हस्तियों की उपलब्धियाँ याद रखना और उनका योगदान जानना प्रेरणादायक है। ये व्यक्तित्व समाज, विज्ञान, कला, खेल और साहित्य में अमूल्य योगदान छोड़ गए हैं।

धनतेरस से भाई दूज तक: पंचदिवसीय महापर्व — समृद्धि, पवित्रता, भक्ति और प्रेम की सांस्कृतिक सरगम

✍️ सोमनाथ मिश्र की प्रस्तुति

भारत की संस्कृति में दीपावली केवल एक दिन का नहीं बल्कि पाँच दिनों तक चलने वाला एक महापर्व है — जो धनतेरस से आरंभ होकर भाई दूज पर पूर्ण होता है। यह पर्व समृद्धि, पवित्रता, भक्ति, स्नेह और पारिवारिक प्रेम का प्रतीक है। दुनियाभर में बसे भारतवंशी इन दिनों में भारतीय परंपराओं की ज्योति प्रज्वलित करते हैं।

🌟 पहला दिन: धनतेरस — आरोग्य और समृद्धि का आरंभ

धनतेरस को भगवान धन्वंतरि का जन्मदिन माना जाता है। इस दिन सोना-चाँदी, बर्तन या अन्य धातु की वस्तु खरीदना शुभ माना जाता है। यह दिन स्वास्थ्य, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।

🪔 दूसरा दिन: नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)

इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। यह अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक दिन है। घरों में दीप सजाए जाते हैं और लोग नकारात्मकता से मुक्ति के लिए स्नान और पूजा करते हैं।

🎇 तीसरा दिन: दीपावली — लक्ष्मी पूजन और उजियारा पर्व

दीपावली की रात्रि में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इस दिन घर-आँगन दीपों से जगमगा उठता है, और वातावरण में भक्ति, प्रसन्नता तथा एकता की भावना व्याप्त रहती है।

🪶 चौथा दिन: गोवर्धन पूजा — प्रकृति और कर्तव्य का सम्मान

गोवर्धन पूजा का संबंध भगवान कृष्ण द्वारा इंद्र के अहंकार भंजन से है। यह पर्व प्रकृति, पर्यावरण और सामूहिक सहयोग का संदेश देता है। इस दिन अन्नकूट का आयोजन कर भगवान को अर्पण किया जाता है।

👩‍❤️‍👨 पाँचवाँ दिन: भाई दूज — प्रेम और स्नेह का प्रतीक

भाई दूज पर बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर दीर्घायु की कामना करती हैं। यह दिन भाई-बहन के शुद्ध प्रेम और पारस्परिक संरक्षण का प्रतीक है।

🌍 आज विश्वभर में बसे भारतवंशी धनतेरस से भाई दूज तक अपने घरों में भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और परिवारिक एकता का दीप जलाते हैं। इन पाँचों दिनों का संदेश है —

> “प्रकाश फैलाओ, प्रेम बाँटो, और संस्कृति को अपनाओ।”

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रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला: दो परिजनों ने नाबालिग से किया दुष्कर्म

उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश के एक कस्बे में रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। 13 वर्षीय नाबालिग के साथ उसके दो परिजनों द्वारा शारीरिक शोषण किए जाने का आरोप लगा है। पीड़िता की तबीयत बिगड़ने पर जब परिवारजन उसे अस्पताल लेकर गए, तब मामला सामने आया।

यह भी पढ़ें – NH-34 पर बड़ा हादसा: बस में लगी आग, 60 यात्रियों ने कूदकर बचाई जान

पुलिस के अनुसार, परिजनों की शिकायत पर दोनों आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जांच के बाद दोनों आरोपियों को रामनगर क्षेत्र से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

थानाध्यक्ष दुर्गा सिंह ने बताया कि पीड़िता को चिकित्सकीय जांच और काउंसलिंग के लिए भेजा गया है। पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

NH-34 पर बड़ा हादसा: बस में लगी आग, 60 यात्रियों ने कूदकर बचाई जान

हरदोई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। शनिवार रात एनएच-34 (NH-34) पर धरपा कट के पास बड़ा हादसा टल गया। हरदोई जा रही एक निजी सवारी बस में अचानक आग लग गई। बस में सवार करीब 60 से अधिक यात्रियों ने समय रहते कूदकर अपनी जान बचाई। हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन बस पूरी तरह जलकर खाक हो गई।

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जानकारी के मुताबिक, बस दादरी से सवारियां लेकर हरदोई के लिए रवाना हुई थी। इसमें अलीगढ़, हाथरस और अन्य जिलों के यात्री सवार थे। जब बस एनएच-34 पर धरपा कट के पास पहुंची, तभी इंजन से धुआं उठने लगा। चालक ने तुरंत बस रोक दी और यात्रियों को नीचे उतरने को कहा। कुछ ही देर में इंजन से उठे धुएं ने आग का रूप ले लिया। चालक ने तत्परता दिखाते हुए सभी यात्रियों को बाहर निकाल लिया।

आग लगने की सूचना पर खुर्जा देहात थाना पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने में जुट गई। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। हादसे के दौरान करीब एक घंटे तक हाईवे पर यातायात बाधित रहा, जिसे बाद में सामान्य कर दिया गया।

सीओ शशांक श्रीवास्तव ने बताया कि समय रहते सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

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“जीवन की नई सीख के साथ लौटे हरीश रावत — मेरठ में बड़ा सड़क हादसा, ईश्वर की कृपा से सुरक्षित”

“ईश्वर की कृपा से बची ज़िंदगी: मेरठ में सड़क हादसे में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत बाल-बाल बचे, समर्थकों में राहत की लहर”

मेरठ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत शनिवार एक भयावह सड़क हादसे में बाल-बाल बच गए। यह हादसा उत्तर प्रदेश के मेरठ के पास उस समय हुआ जब वे किसी राजनीतिक कार्यक्रम से लौट रहे थे।
रास्ते में अचानक उनकी गाड़ी अनियंत्रित होकर फिसल गई और सड़क किनारे बने बैरियर से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहन का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन सौभाग्य से हरीश रावत को कोई गंभीर चोट नहीं आई।

स्थानीय लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा क्षणभर का था पर बेहद डराने वाला। मौके पर पहुंची पुलिस ने वाहन को हटवाया और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

बाद में हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर खुद जानकारी देते हुए सभी शुभचिंतकों को आश्वस्त किया — “ईश्वर की असीम कृपा और आप सभी के आशीर्वाद से मैं पूरी तरह सुरक्षित हूँ। यह हादसा क्षणिक था लेकिन जीवन की सीख दे गया कि सावधानी और संयम हर सफर में जरूरी हैं।”

घटना के बाद से ही सोशल मीडिया पर समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ईश्वर का आभार व्यक्त करते हुए राहत की सांस ली। किसी ने लिखा — “नेता जी का सुरक्षित रहना पूरे उत्तराखंड के लिए सौभाग्य की बात है।”

यह हादसा एक बार फिर यह याद दिला गया कि जीवन कितना अनमोल है, और सतर्कता ही सुरक्षा का सबसे बड़ा मंत्र है।

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19 अक्टूबर: प्रतिभा, साहस और प्रेरणा का दिन

भारतीय समाज और संस्कृति में 19 अक्टूबर के योगदान


19 अक्टूबर का दिन इतिहास में कई महान व्यक्तियों के जन्म और उपलब्धियों के लिए याद किया जाता है। यह दिन केवल तारीख नहीं, बल्कि प्रेरणा और योगदान का प्रतीक है। आज हम उन महान व्यक्तियों के जीवन पर प्रकाश डालेंगे, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में अद्भुत योगदान दिया और समाज, कला, विज्ञान और खेल के क्षेत्र में अपूरणीय योगदान छोड़ा।

  1. दिव्यांश सिंह पंवार (2002) – निशानेबाज़
    दिव्यांश सिंह पंवार 19 अक्टूबर 2002 को जन्मे भारतीय निशानेबाज़ हैं। अपनी युवा उम्र में ही उन्होंने निशानेबाजी में कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। दिव्यांश ने भारत के लिए गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। उन्होंने अपने प्रशिक्षण और अनुशासन से युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का काम किया। उनकी मेहनत और फोकस निशानेबाजी की दुनिया में भारतीय प्रतिभा का प्रतीक है।
  2. नीतू घंघास (2000) – मुक्केबाज़
    नीतू घंघास 19 अक्टूबर 2000 को जन्मी भारत की युवा मुक्केबाज़ हैं। नीतू ने अपने करियर की शुरुआत बहुत कम उम्र में की और भारत के लिए कई अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज़ी टूर्नामेंट में पदक जीते। उनकी डेडिकेशन और फोकस युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। नीतू ने देश में महिलाओं की खेलों में भागीदारी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
  3. मातंगिनी हज़ारा (1870) – क्रांतिकारी
    मातंगिनी हज़ारा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रसिद्ध महिला क्रांतिकारी थीं। उनका जन्म 19 अक्टूबर 1870 को हुआ। मातंगिनी ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई और उन्होंने अपने साहस और समर्पण से कई युवाओं को प्रेरित किया। उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया और आज भी उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों में एक प्रेरणास्त्रोत माना जाता है।
  4. सारंगधर दास (1887) – स्वतंत्रता सेनानी
    सारंगधर दास का जन्म 19 अक्टूबर 1887 को हुआ। वे स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख सेनानी थे और उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में विशेष योगदान दिया। उनके नेतृत्व और साहस ने कई लोगों को राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने का काम किया।
  5. वेंकटरामा रामलिंगम पिल्लई (1888) – साहित्यकार
    वेंकटरामा रामलिंगम पिल्लई तमिलनाडु के महान साहित्यकार थे। उनका जन्म भी 19 अक्टूबर 1888 को हुआ। उन्होंने तमिल साहित्य को नई दिशा दी और अपने लेखन में सामाजिक मुद्दों पर जोर दिया।
  6. गोविंदराम सेकसरिया (1888) – उद्योगपति
    गोविंदराम सेकसरिया स्वतंत्रता-पूर्व भारत के सबसे सफल व्यवसायियों में से एक थे। उनका जन्म भी 19 अक्टूबर 1888 को हुआ। उन्होंने औद्योगिक क्षेत्र में अपने कार्यों से भारतीय व्यापार जगत को नई दिशा दी और आर्थिक विकास में योगदान दिया।
  7. आर. सी. बोराल (1903) – संगीतकार
    आर. सी. बोराल का जन्म 19 अक्टूबर 1903 को हुआ। वे हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध संगीतकार थे। आर. सी. बोराल ने फिल्म संगीत के क्षेत्र में भारतीय सिनेमा को नई दिशा दी और उनके रचनात्मक संगीत ने बॉलीवुड को समृद्ध किया।
  8. सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर (1910) – खगोल भौतिक शास्त्री
    सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर का जन्म 19 अक्टूबर 1910 को हुआ। उन्होंने खगोल और भौतिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध किया और भारत में विज्ञान की प्रतिष्ठा को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया।
  9. मजाज़ (1911) – शायर
    मजाज़ का जन्म 19 अक्टूबर 1911 को हुआ। वे हिंदी-उर्दू के प्रसिद्ध शायर थे। उनके शेर और ग़ज़लें आज भी प्रेम, सामाजिक चेतना और मानवता का संदेश देती हैं।
  10. भोलाशंकर व्यास (1923) – साहित्यकार
    भोलाशंकर व्यास का जन्म 19 अक्टूबर 1923 को बनारस (काशी) में हुआ। वे साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान देने वाले प्रमुख व्यक्तियों में से हैं।
  11. सनी देओल (1961) – अभिनेता
    सनी देओल, जिनका जन्म अजय सिंह के नाम से 19 अक्टूबर 1961 को हुआ, हिंदी फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता हैं। उनकी फिल्में और अभिनय का अंदाज़ उन्हें भारतीय सिनेमा में एक अलग पहचान दिलाता है।
  12. निर्मला देशपांडे (1929) – सामाजिक कार्यकर्ता
  13. निर्मला देशपांडे का जन्म 19 अक्टूबर 1929 को हुआ। वे गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित सामाजिक कार्यकर्ता थीं। उन्होंने महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए कई सामाजिक अभियानों का नेतृत्व किया।
  14. पाण्डुरंग शास्त्री अठावले (1920) – दार्शनिक
    पाण्डुरंग शास्त्री अठावले का जन्म 19 अक्टूबर 1920 को हुआ। वे महान भारतीय दार्शनिक और समाज सुधारक थे। उनके विचार और शिक्षाएँ आज भी सामाजिक और आध्यात्मिक चेतना को प्रभावित करती हैं।19 अक्टूबर के जन्मदिन पर इन महान हस्तियों की उपलब्धियाँ याद रखना और उनका योगदान जानना प्रेरणादायक है। ये व्यक्तित्व समाज, विज्ञान, कला, खेल और साहित्य में अमूल्य योगदान छोड़ गए हैं।
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“क़िले से कैंपस और कॉकपिट तक: 19 अक्टूबर के दिन में दर्ज छह ऐतिहासिक मोड़”

19 अक्टूबर का दिन विभिन्न युगों और संस्कृतियों में अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं का गवाह रहा है। इस दिन 1689 में औरंगज़ेब ने रायगढ़ क़िले पर कब्जा किया, 1950 में मदर टेरेसा ने कलकत्ता में Missionaries of Charity की स्थापना की, 1956 में रूस व जापान के बीच युद्ध‐स्थिति समाप्त करने वाली समझौते पर हस्ताक्षर हुए, 1960 में नागरिक अधिकारों के नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर को अटलांटा में गिरफ्तार किया गया, 1970 में भारत में निर्मित पहला MiG‑21 वायु सेना में शामिल हुआ, तथा 1987 में अमेरिका में “ब्लैक मंडे” शेयर बाजार दुर्घटना घटी।
1689 – रायगढ़ पर औरंगज़ेब का कब्जा
17वीं शताब्दी में मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब ने 1689 19 अक्टूबर को रायगढ़ किला (महाराष्ट्र) पर कब्जा कर मराठा साम्राज्य को एक कठिन मोड़ पर ला खड़ा किया। इस क़िले की गढ़बंदी और रणनीतिक स्थिति मराठों के लिये बल का केंद्र थी। औरंगज़ेब द्वारा इस पर अधिकार पाने ने मराठा साम्राज्य को नए सिरे से संगठनात्मक चुनौतियाँ दीं तथा छद्म-सैनिक व कूटनीतिक परिवर्तन तेज़ कर दिए। यह घटना उस काल की राजनीति, साम्राज्य विस्तार और भीतर की रणनीति को प्रतिविम्बित करती है।
1950 – मदर टेरेसा ने मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी की नींव रखी
7 अक्टूबर 1950 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में मदर टेरेसा द्वारा मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य अत्यन्त निर्धन, असहाय एवं उपेक्षित लोगों की सेवा करना था। हालांकि आपने 19 अक्टूबर बताया, किन्तु प्रमुख स्रोतों में 7 अक्टूबर का जिक्र है। उस ने एक नए धार्मिक और सामाजिक आन्दोलन की नींव रखी, जिसने भारत व विश्व में लाखों जीवन को प्रभावित किया। इस संगठन ने घर-घर पहुँच कर शिक्षा, स्वास्थ्य व आश्रय का काम आरंभ किया। भारत में इस कदम का अर्थ था — औपचारिक रूप से एक समर्पित सेवा-संस्था का आरम्भ, जिसने गरीबी व उपेक्षा से जूझ रहे वर्गों के लिये उदाहरण प्रस्तुत किया।
1956 – रूस और जापान के बीच युद्ध-स्थिति समाप्ति
19 अक्टूबर 1956 को सोवियत संघ (USSR) और जापान ने मॉस्को में एक संयुक्त घोषणा (signing) पर हस्ताक्षर करके द्वितीय विश्व युद्ध की जापान-सोवियत युद्ध-स्थिति औपचारिक रूप से समाप्त की। यह समझौता पूर्वकाल युद्धावस्था को शांतिपूर्वक राजनीतिक रिश्तों में बदलने का संकेत था। इस घटना ने एशिया-प्रशांत की शक्ति-राजनीति में एक नया अध्याय खोला—जहाँ युद्ध के बाद प्रतिद्वंद्वियों के बीच संवाद व कूटनीति का महत्त्व बढ़ा। जापानी-सोवियत संबंधों में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि यह प्रत्यक्ष युद्धविराम नहीं था, परन्तु औपचारिक शांति की दिशा में एक आधार था।
1960 – मार्टिन लूथर किंग जूनियर की गिरफ्तारी
19 अक्टूबर 1960 को अमेरिका के अटलांटा (जॉर्जिया) में नागरिक अधिकार आंदोलन के अग्रणी नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने एक “लंच काउंटर” प्रतिरोध (sit-in) के दौरान गिरफ्तार किए गए। उन्होंने रंगभेद विरोधी आंदोलन को नई दिशा दी। इस गिरफ्तारी ने अमेरिकी राजनीति को भी प्रभावित किया क्योंकि उसी वर्ष का राष्ट्रपति चुनाव करीब था और इस तरह अधिकार-आंदोलन और जनमत का संबंध उजागर हुआ। इस घटना ने दिखाया कि सामाजिक परिवर्तन अकेले कानून या संसद के माध्यम से नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष गतिविधियों व नागरिक भागीदारी से भी आता है।
1970 – भारत में निर्मित पहला मिग-21 विमान
आपके द्वारा बताए अनुसार 19 अक्टूबर 1970 को भारत में निर्मित पहला मिग-21 विमान भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ। हालांकि स्रोतों में साफ़ 1970 के दिन-तारीख का उल्लेख नहीं मिलता, तथापि मिग-21 के भारत में पहले उपयोग-प्रारंभ का महत्व वृतांत में दर्ज है। यह विमान भारत की वायुशक्ति को नए युग में ले गया — एक स्वदेशी निर्माण-योग्य (लाइसेंस अंतर्गत) सुपरसॉनिक लड़ाकू विमान के रूप में। मिग-21 ने कई युद्धों व सीमांत तनावों में भूमिका निभाई, और वायु सेना के पायलट-शिक्षण से लेकर अशोधन तक का आधार बनी। भारत-रूस रक्षा सम्बंधों का यह प्रतीक भी बन गया।
1987 – “ब्लैक मंडे” शेयर बाज़ार धक्का
19 अक्टूबर 1987 को अमेरिकी शेयर-बाज़ार में एक सघन दुर्घटना घटी जिसे “Black Monday (1987)” कहा जाता है। उस दिन Dow Jones Industrial Average 22.6 % तक गिर गया — एक दिन में सबसे बड़े प्रतिशत घटाव में से एक। इस घटना ने वैश्विक वित्तीय प्रणालियों, निवेश-रुझानों व संकट-प्रबंधन की चुनौतियों को उजागर किया। इसकी गूँज आज भी आर्थिक इतिहास में सुनाई देती है कि बड़ी तकनीकी या भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ कैसे सिस्टम-व्यापी संकट में बदल सकती हैं।
19 अक्टूबर की ये घटनाएँ समय व स्थान की सीमाओं को पार करती हैं — भारत-महाराष्ट्र के किले से लेकर अमेरिका के कॉर्पोरेट वित्त तक, कलकत्ता की धर्म-सेवा से लेकर रूस-जापान कूटनीति तक। ये सभी घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि इतिहास केवल बड़े निर्णयों का संग्रह नहीं, बल्कि व्यक्तियों, समाजों और प्रणालियों के आपसी संबंधों का जाल है। एक ही दिन के भीतर इतनी विविध-प्रकार की घटनाएँ यह याद दिलाती हैं कि उस दिन किस-किस मोड़ पर बदलाव हुआ।

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देवरिया में क्षेत्रीय किसान मेला: कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया उद्घाटन, आधुनिक तकनीकों से किसानों को कराया गया अवगत

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। स्वर्गीय रवीन्द्र किशोर शाही (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जनसंघ एवं पूर्व मंत्री) की 43वीं पुण्य स्मृति पर आचार्य नरेन्द्र देव इंटर कॉलेज, पथरदेवा, देवरिया में श्रद्धांजलि सभा एवं दो दिवसीय क्षेत्रीय किसान मेला और स्वास्थ्य शिविर का आयोजन 17-18 अक्टूबर को किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत सरकार के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान रहे। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, केंद्रीय राज्य मंत्री कमलेश पासवान, सांसद शशांक मणि त्रिपाठी, मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम, विधायक सभाकुंवर, दीपक मिश्रा ‘शाका बाबा’, सुरेन्द्र चौरसिया सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

मेले में कृषि, पशुपालन, उद्यान, मत्स्य, गन्ना, रेशम, सहकारिता, एग्रो, सिंचाई, विद्युत, बैंकिंग, एनजीओ/एफपीओ, कृषि विज्ञान केंद्र आदि विभागों ने अपने-अपने स्टॉल और प्रदर्शनी लगाई। किसानों को खाद, बीज, कीटनाशक, जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य एवं आधुनिक कृषि उपकरणों की जानकारी दी गई।

कृषि वैज्ञानिकों में डा. आर.के. मलिक (आईआरआरआई वाराणसी), डा. एस.के. नायक (इफको), डा. संजीव तेतरिया (इफको लखनऊ), डा. आर.आर. सिंह (कुमारगंज, फैजाबाद) और डा. मान्धाता सिंह (केवीके) ने किसानों को फसल विविधीकरण, आधुनिक तकनीक, और कृषि नवाचारों पर उपयोगी सुझाव दिए।

कार्यक्रम में कृषि निदेशक पंकज त्रिपाठी, अपर कृषि निदेशक आर.के. सिंह, संयुक्त कृषि निदेशक आशुतोष मिश्रा, मुख्य विकास अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी समेत अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मेले में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर नई तकनीकों, योजनाओं एवं उत्पादों की जानकारी प्राप्त की और इसे कृषि विकास के लिए अत्यंत लाभकारी बताया।

🪔 दीपों के पर्व से पहले मऊ पुलिस सतर्क, जिले में बढ़ाई गई सुरक्षा—शांति व सौहार्द बनाए रखने की अपील

मऊ (राष्ट्र की परम्परा) धनतेरस और दीपावली जैसे प्रकाश और उल्लास के त्योहारों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए मऊ पुलिस प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। त्योहारों के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया गया है। पुलिस अधीक्षक इलामारन जी के निर्देशन और अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार के पर्यवेक्षण में शनिवार को कोपागंज थाने पर विशेष ब्रीफिंग आयोजित की गई।

इस दौरान थानाध्यक्ष रविंद्रनाथ राय ने थाने के सभी पुलिसकर्मियों को सतर्कता बरतने, गश्त बढ़ाने और भीड़भाड़ वाले इलाकों में अतिरिक्त चौकसी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दीपावली के उत्सव में सुरक्षा और शांति बनाए रखना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। सभी पुलिसकर्मियों को आम जनता से सौहार्दपूर्ण व्यवहार करते हुए सतर्क दृष्टि बनाए रखने का आदेश दिया गया।

थानाध्यक्ष ने बताया कि संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। बाजारों, पूजा स्थलों और मुख्य मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि नागरिक निश्चिंत होकर दीपावली का पर्व मना सकें।

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स्वदेशी उत्पादों के प्रोत्साहन हेतु 15 दिवसीय मेला का हुआ समापन

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। उ०प्र० ट्रेड शो स्वदेशी मेला-2025 का आयोजन शासन के निर्देशानुसार दिनांक 09.10.2025 से18.10.2025 तक स्थानीय जूनियर हाईस्कूल पडरौना के परिसर में सफलता पूर्वक किया गया, इस आयोजन का शुभांरभ सांसद कुशीनगर विजय कुमार दुबे द्वारा किया गया था।
उपायुक्त उद्योग अभय कुमार सुमन ने बताया कि स्वदेशी मेले में जिले में निर्मित उत्पाद जैसे खाद्य पदार्थ मसाला, टॉफी, बिस्कुट, पापड़, आचार, चिप्स, ओ०डी०ओ०पी० के केले के फल से निर्मित उत्पाद एवं केला रेशा से बने हस्तशिल्प उत्पाद की प्रदर्शिनी लगायी गई। इसके अतिरिक्त मेले में फर्नीचर, चादर, बेड शीट, एल0ई0डी बल्ब, दवाई, रेडीमेड गारमेंट आदि उत्पादों के 35 स्टाल लगाये गये थे। जिला प्रशासन के निर्देशानुसार पूरे मेला काल में विकास संबंधी योजनाओं के स्टाल भी लगाये गए तथा प्रतिदिन एक विभाग को अपनी योजना के प्रचार-प्रसार करते हुए लोगों को प्रमाण पत्र एवं सम्मान कराया गया। इसके अन्तर्गत प्रमुख रुप से श्रम विभाग, सेवायोजन विभाग, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, कृषि एवं उद्यान विभाग द्वारा विभिन्न तिथियों में कार्यक्रम किए गए। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान कार्यक्रम एवं बच्चों के मनोहारी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यक्रम के साथ ही शासन से आए अपर आयुक्त उद्योग श्री एच० पी० सिंह द्वारा मेले का निरीक्षण किया गया एवं बच्चों तथा उद्यमियों को प्रमाण पत्र वितरित किया गया। आई०टी०आई० एवं पालिटेक्निक के बच्चों के साथ नॉलेज सेशन कार्यक्रम किया गया जिसमें, एल०डी०एम, जी0एस0टी0 एवं उद्योग विभाग के अधिकारियों ने योजना की जानकारी देकर नए स्टार्ट अप स्थापित करने को प्रेरित किया। समापन की पूर्व संध्या पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।स्वदेशी मेला के समापन अवसर पर आज मेले में प्रतिभागीगण को जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर द्वारा सहभागिता प्रमाणपत्र वितरित कर कार्यक्रम का समापन किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान विभिन्न तिथियों में जनप्रतिनिधिगण यथा सुरेन्द्र कुशवाहा विधायक फाजिलनगर, विनय प्रकाश गौंड विधायक रामकोला, असीम कुमार राय विधायक तमकुहीराज, जिला भाजपा अध्यक्ष दुर्गेश राय के अतिरिक्त जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सावित्री जायसवाल एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति द्वारा लाभार्थियों को शुभकामना प्रेषित की गई।

प्राथमिक विद्यालय पर लटका ताला, शिक्षिका गायब, विभाग बेखबर

बीएसए ने लिया रसोईया सीमा यादव से विद्यालय की जानकारी

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सदर विकासखंड के ग्राम पंचायत बागापार टोला कोदईपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय, जो बच्चों की शिक्षा का केंद्र और विद्या का मंदिर कहलाता है, इन दिनों विवादों के कारण बच्चों पर गहरा प्रभाव पड़ा है। विद्यालय में तैनात शिक्षिका और शिक्षामित्र के बीच उत्पन्न विवाद लगातार गहराता जा रहा है। यह विवाद अब विद्यालय की शिक्षण व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है और ग्रामीणों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है।स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय की स्थिति बेहद खराब है। शुक्रवार की सुबह लगभग 9:50 बजे जब मीडिया टीम विद्यालय पहुँची,तो विद्यालय का दृश्य चौंकाने वाला था। तैनात शिक्षिका रीना कनौजिया विद्यालय से अनुपस्थित पाई गईं थीं काफी समय तक इंतजार के बाद जब शिक्षामित्र राधा पाण्डेय से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने जानकारी देने से इंकार कर दिया।विद्यालय में कुल 47 बच्चों का पंजीकरण है, लेकिन मौके पर केवल 12 बच्चे ही उपस्थित पाए गए थे । वहीं स्कूल में शिक्षामित्र राधा पाण्डेय, रसोइया सीमा यादव और केदार मौजूद रहे थे। ग्रामीणो की सूचना पर जब मीडिया टीम शनिवार को दोपहर लगभग बारह बजे पहुंचकर विद्यालय का हाल जाना तो विद्यालय पर ताला लटकता मिला। बच्चे घर चलें गए थे। वहीं विद्यालय के आस-पास मौजूद रसोइया सीमा यादव ने बताया कि शिक्षिका और शिक्षामित्र की अनुपस्थिति होने से विद्यालय बंद करना पड़ा है। वहीं बिमारी से ग्रस्त शिक्षामित्र राधा पाण्डेय ने आनलाइन अवकाश लिया है। दुसरी ओर शिक्षिका भी अनुपस्थित रही। जब मीडिया टीम ने बीएसए को जानकारी दी तो विद्यालय की स्थिति के विषय में रसोईया सीमा यादव ने बीएसए को अवगत कराया। वहीं स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार शिक्षिका का व्यवहार स्टाफ और विद्यार्थियों के प्रति अनुचित रहता है, जिससे पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। ग्राम सभा के कई ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से मांग की है कि विभागीय जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही विद्यालय में मिड-डे मील योजना की गड़बड़ियों की भी उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि विद्यालय की छवि पुनः सुधर सके और बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो। ग्रामीणों का कहना है कि मामला लंबे समय से चल रहा है, फिर भी शिक्षा विभाग ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे उच्चाधिकारियों को ज्ञापन सौंपने के लिए बाध्य होंगे।
इस सम्बन्ध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रिद्धि पाण्डेय ने कहा कि सम्बन्धित के विरुद्ध कार्यवाही की जायेगी।

गौरीबाजार पुलिस ने हत्या के आरोपी प्रेमी को किया गिरफ्तार

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। थाना गौरीबाजार पुलिस ने एक नाबालिग लड़की की हत्या के मामले में वांछित आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में चलाए जा रहे अपराध व अपराधियों के विरुद्ध अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई ।अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी आनन्द कुमार पाण्डेय के निर्देशन एवं क्षेत्राधिकारी रुद्रपुर हरिराम यादव के पर्यवेक्षण में थाना गौरीबाजार की पुलिस टीम ने मुंशी उर्फ नेयाजुद्दीन पुत्र रहमुद्दीन निवासी रतनपुर थाना गौरीबाजार को रेलवे पश्चिमी ढाला के पास से गिरफ्तार किया। आरोपी के विरुद्ध मुकदमा अपराध संख्या 465/2025 धारा 137(2), 103(1), 238(बी) बीएनएस के अंतर्गत कार्रवाई की जा रही है।पुलिस पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसका मृतका लड़की से प्रेम संबंध था, पर उसे शक था कि वह किसी अन्य युवक से बातचीत करती थी। इसी कारण उसने उसकी हत्या कर शव तालाब में फेंक दिया।
गौरतलब है कि 12 अक्टूबर को ग्राम रतनपुरा की 14 वर्षीय सबीना लापता हो गई थी। उसकी मां हसीबुन पत्नी इसरायल ने 14 अक्टूबर को थाने में तहरीर दी थी। उसी दिन गांव के पोखरे से सबीना का शव बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट एवं साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने हत्या की धाराएं बढ़ाते हुए जांच आगे बढ़ाई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तार अभियुक्त: मुंशी उर्फ नेयाजुद्दीन पुत्र रहमुद्दीन, निवासी रतनपुर, थाना गौरीबाजार, जनपद देवरिया।

गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम:- प्र0नि0 राहुल कुमार, का0 रमेश यादव, का0 सुरजीत यादव, का0 अभिनव यादव (सभी थाना गौरीबाजार, जनपद देवरिया)