Sunday, July 5, 2026
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🚨 छठ पर उमड़ा भीड़ का सैलाब, लालू का केंद्र पर हमला – “मेरे बिहारवासी अमानवीय हालात में सफर को मजबूर”

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।बिहार में लोक आस्था के महापर्व छठ की रौनक चरम पर है, लेकिन इस बीच राजनीति भी तेज़ हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने शनिवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। लालू ने आरोप लगाया है कि छठ पर्व पर बिहार लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए पर्याप्त ट्रेनों की व्यवस्था नहीं की गई, जिससे लाखों लोग “अमानवीय परिस्थितियों” में यात्रा करने को मजबूर हैं।

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लालू प्रसाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें छठ पर्व के लिए बिहार लौट रही ठसाठस भरी ट्रेनों में यात्रियों की मुश्किलें साफ दिख रही हैं। उन्होंने लिखा,

“झूठ के बेताज बादशाह और जुमलों के सरदार ने कहा था कि 13,198 में से 12,000 ट्रेनें बिहार के लिए चलेंगी। यह भी सफेद झूठ निकला। मेरे बिहारवासियों को अमानवीय तरीके से सफर करने को मजबूर किया जा रहा है।”
उल्लेखनीय है कि भाजपा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा ने हाल ही में कहा था कि छठ पर्व के दौरान यात्रियों की भीड़ को देखते हुए रेल मंत्रालय ने इस बार 12,000 विशेष ट्रेनें चलाई हैं।

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लेकिन लालू प्रसाद ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि “एनडीए सरकार बिहारियों के साथ अन्याय कर रही है।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा,
“20 साल की एनडीए सरकार में बिहारियों को पलायन का दंश झेलना पड़ा। छठ जैसे महापर्व पर भी ये सरकार ट्रेनों की व्यवस्था नहीं कर पा रही है। यह बेहद शर्मनाक है।”
लालू ने आगे कहा कि “संप्रग सरकार के बाद से बिहार में कोई बड़ा उद्योग नहीं लगाया गया, जिससे लोगों को रोज़गार मिले। डबल इंजन सरकार बिहार विरोधी है।”
इधर, बिहार में दो चरणों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं — पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा 11 नवंबर को। परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।
छठ पर्व और चुनावी माहौल के बीच यह बयान राज्य की राजनीति में नया ताप भर गया है।

आस्था या अवसरवाद: जब विश्वास बन गया व्यापार, भक्त की भावनाओं से हो रहा खिलवाड़

आस्था — जो कभी आत्मा और ईश्वर के बीच का सबसे पवित्र सेतु मानी जाती थी — आज कई जगहों पर व्यापार और दिखावे का माध्यम बन चुकी है। भक्ति, श्रद्धा और विश्वास की आड़ में धर्म के नाम पर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ का दौर लगातार बढ़ता जा रहा है।
जहाँ मंदिरों में श्रद्धालु नतमस्तक होकर अपने आराध्य की कृपा पाने आते हैं, वहीं कुछ तथाकथित ‘बाबा’ और ‘सेवक’ इस आस्था को अपने स्वार्थ का साधन बना चुके हैं।
भक्ति में व्यापार का प्रवेश
पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहाँ चमत्कार, भस्म, जल या ‘दर्शन’ के नाम पर लाखों रुपये वसूले गए।
कोई जल छिड़ककर भाग्य बदलने का दावा करता है, तो कोई रोगमुक्ति के नाम पर चढ़ावे की तयशुदा रकम मांगता है। श्रद्धालु अपनी आस्था में इतने गहरे होते हैं कि बिना जांचे-परखे इन दावों को सच मान बैठते हैं।
देवरिया जिले के एक श्रद्धालु ने बताया कि वह गोरखपुर से विंध्याचल माता के दर्शन के लिए निकले थे। भक्ति और आशीर्वाद की भावना लेकर जब वे मंदिर पहुँचे, तो सेवा में लगे एक पंडे ने उन्हें रोक दिया।
“मैंने श्रद्धा से चढ़ावा लेकर पहुंचा था, पर उन्होंने कहा कि निर्धारित राशि चढ़ाओ, नहीं तो दर्शन नहीं मिलेगा,”
भक्त की आँखों में निराशा झलकते हुए उसने कहा,
“उस क्षण ऐसा लगा जैसे मां की मूरत तो सामने थी, पर आशीर्वाद कहीं बिक चुका था।”
वह बताते हैं कि विंध्याचल से निराश होकर जब वे वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर पहुँचे, तो वहां भी कुछ इसी तरह की स्थितियां देखने को मिलीं — सेवा के नाम पर शुल्क, विशेष दर्शन के नाम पर टिकट, और भक्तिभाव में खलल डालते आर्थिक व्यवहार।
“आस्था तब तक पवित्र है जब तक विवेक साथ हो”
समाजशास्त्रियों का कहना है कि आस्था तभी सच्ची है जब वह ज्ञान और विवेक से जुड़ी हो।
“जब भक्ति बुद्धि से कट जाती है, तो वह अंधविश्वास का रूप ले लेती है और वहीं से शुरू होता है शोषण,”
ऐसा कहना है वरिष्ठ समाजशास्त्री डॉ. सुनील मिश्रा का।
धार्मिक विद्वान भी यही मानते हैं कि असली धर्म दिखावे या चमत्कार में नहीं, बल्कि मानवता, सेवा और सत्य में बसता है। धर्म का उद्देश्य लोगों को जोड़ना है, बाँटना नहीं।
आस्था के उजले उदाहरण भी हैं
जहाँ कुछ धार्मिक स्थल आस्था के नाम पर आर्थिक लालच में डूब रहे हैं, वहीं कुछ संस्थान ऐसे भी हैं जो सच्ची सेवा भावना के उदाहरण हैं।
जैसे जम्मू के वैष्णो देवी मंदिर और महाराष्ट्र के सिद्धिविनायक मंदिर — जहाँ भक्तों से किसी भी प्रकार का अनिवार्य चढ़ावा नहीं मांगा जाता। यहाँ श्रद्धा को धन से नहीं, भाव से तौला जाता है।
अब सवाल समाज और शासन दोनों से
क्या धर्म के नाम पर चल रही इस “लूट-खसोट” पर रोक लगेगी?
क्या सरकार ऐसे पंडों, दलालों और फर्जी संस्थाओं पर सख्त कार्रवाई करेगी जो आस्था को व्यापार बना रहे हैं?
यह सवाल सिर्फ शासन से नहीं, समाज से भी है — क्योंकि जब तक जनता विवेक से नहीं जागेगी, तब तक धर्म के नाम पर ठगी का यह खेल जारी रहेगा।
🕉️आस्था का अर्थ है विश्वास — पर विवेक के साथ।
जब तक भक्ति में बुद्धि का प्रकाश नहीं होगा, तब तक धर्म के नाम पर व्यापार फलता-फूलता रहेगा।
जरूरत है उस “सच्चे धर्म” की ओर लौटने की — जो सेवा, सत्य और समर्पण में बसता है।

विरह की विषाद-धान: 25 अक्टूबर को खोए हुए उन सात महान व्यक्तियों की अमिट छाप”

आज हम उन सात महान विभूतियों को याद कर रहे हैं, जिनका निधन 22 अक्टूबर की तारीख से जुड़ा नहीं है बल्कि 25 अक्टूबर को हुआ था — और जिन्होंने विभिन्न-विविध क्षेत्रों में अपना अमूल्य योगदान दिया। नीचे प्रत्येक का जन्म-स्थान, शिक्षा, प्रमुख उपलब्धियाँ तथा योगदान “भिन्न शब्दों” में प्रस्तुत कर रहा हूँ।


१. साहिर लुधियानवी (8 मार्च 1921-25 अक्टूबर 1980)

साहिर लुधियानवी का जन्म पंजाब के लुधियाना-शहर में हुआ था। उनके पारिवारिक वातावरण में जमींदारी व्यवस्था थी, परंतु उनकी मां ने अपने साहस से संघर्ष का रास्ता चुना। शिक्षा-प्रारंभ लुधियाना में हुई, जहाँ उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ कवि-मशायरे और उर्दू-हिंदी गीतकार के रूप में अपनी प्रतिभा निखारी।

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उनकी रचनाएँ सिर्फ प्रेम-विषयक नहीं थीं, बल्कि सामाजिक अन्याय, जात-पात, गरीबी और मानवीय मूल्यों के प्रति संवेदनशील थीं। हिंदी-उर्दू सिनेमा में उन्होंने अमिट छाप छोड़ी — यदि ‘प्यासा’, ‘कभी कभी’ जैसे गीत आज भी गूंजते हैं, तो यह उनकी गहरी सोच का प्रमाण है। उन्होंने अपने विलेख-शब्दों से “सामान्य आदमी” की पीड़ा, अरमान, प्रेम-उलझन को बड़ी सहजता से अभिव्यक्त किया।
उनका निधन 25 अक्टूबर 1980 को हुआ। उनकी विरासत आज भी प्रेरणा-का स्रोत है।
२. निर्मल वर्मा (3 अप्रैल 1929-25 अक्टूबर 2005)
निर्मल वर्मा का जन्म हिमाचल-प्रदेश के शिमला में हुआ था, जहाँ उनके पिता ब्रिटिश भारत की सिविल सर्विस में थे। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफन कॉलेज से इतिहास विषय में एम.ए. किया। उसके बाद उन्होंने यूरोप-मध्‍यदेश की संस्कृति-भाषा-अनुवाद का अनुभव हासिल किया, विशेष रूप से चेक भाषा-स साहित्य का।
निर्मल वर्मा की लेखनी में भारतीय-पश्चिमी दृष्टिकोणों का समन्वय दिखता है; उनकी कहानियाँ, उपन्यास और निबंध आज भी हिन्दी साहित्य में नए-सिरे से मूल्य रखती हैं। उनकी शैली ने ‘नई कहानी’ आन्दोलन को आकार दिया।
उनका देहांत 25 अक्टूबर 2005 को हुआ। उन्होंने साहित्य-प्रेमियों के दिलों में गहरी जगह बनाई।

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३. दिलीपभाई रमणभाई पारिख (16 फरवरी 1937-25 अक्टूबर 2019)

दिलीपभाई पारिख का जन्म 16 फरवरी 1937 को हुआ था। उन्होंने मुंबई के एल्फिन्स्टन कॉलेज से अर्थशास्त्र की शिक्षा प्राप्त की थी। बाद में उन्होंने उद्योग-जगत में कदम रखा और गुजरात के उद्योग संघों में सक्रिय रहे।
राजनीति में उनका पदार्पण 1990 में हुआ और 28 अक्टूबर 1997 से 4 मार्च 1998 तक वे गुजरात के 13वें मुख्यमंत्री रहे। उनकी सरकार थोड़ी अवधि की थी, पर उन्होंने उद्योग-विकास, वाणिज्यिक संवेदनशीलता और राजनीतिक संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनका निधन 25 अक्टूबर 2019 को हुआ। गुजरात-राजनीति में उनका नाम याद रहने वाला रहा।

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४. पाण्डुरंग शास्त्री अठावले (19 अक्टूबर 1920-25 अक्टूबर 2003)
पाण्डुरंग शास्त्री अठावले का जन्म महाराष्ट्र के रोहा-गाँव में 19 अक्टूबर 1920 को हुआ था। उन्होंने अपने पिता की प्रेरणा से युवा-काल में वेद, उपनिषद और भगवद् गीता का गहन अध्ययन किया और 12 वर्ष की आयु में ही ‘टपोंवन-शाला’ जैसी शिक्षा प्रणाली में लगे।
1954 में उन्होंने ‘स्वाध्याय परिवार’ का आरंभ किया — यह स्व-अध्ययन, आत्म-सम्मान और सामाजिक समरसता का आंदोलन बना। उन्होंने भारत के ग्रामीण-क्षेत्रों में लाखों लोगों को आत्म-सशक्त बनाने की दिशा में काम किया।
उनका दिव्य निधन 25 अक्टूबर 2003 को हुआ। उनका जीवन सामाजिक न्याय-आधारित प्रेरणा-कथा बन गया।
५.विलियमसन ए. संगमा (18 अक्टूबर 1919-25 अक्टूबर 1990)
विलियमसन ए. संगमा भारतीय उत्तर-पूर्व क्षेत्र के मेघालय राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री थे। उनका जन्म 18 अक्टूबर 1919 को मेघालय के बाघमारा-भूभाग में हुआ था। उन्होंने धाक जमा ली कि हिल-स्टेट आंदोलन को आगे बढ़ाकर गारो-भूमि के हितों की रक्षा करें।
उनकी राजनीति-कार्यशैली में आदिवासी पहचान-संरक्षण, भौगोलिक तथा सामाजिक समावेशन की दिशा थी। उन्होंने मेघालय के गठन-प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनका निधन 25 अक्टूबर 1990 को हुआ। पूर्वोत्तर के नेतृत्व-युग में उनका नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज है।
६. जसपाल भट्टी (3 मार्च 1955-25 अक्टूबर 2012)
जसपाल भट्टी का जन्म 3 मार्च 1955 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था। उन्होंने चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
हालाँकि उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, पर उनका असली पहचान हास्य-विषयक व्यंग्य में गई — टीवी श्रृंखला Flop Show, Full Tension आज भी याद किये जाते हैं। वे आम आदमी की दिक्कतों-पत्रों-निराशाओं को हल्के-फुल्के अंदाज में उजागर करते थे, लेकिन उनका असर गहरी-था।
25 अक्टूबर 2012 को एक दुखद सड़क दुर्घटना में उनका निधन हुआ। भारतीय हास्य-समीक्षा में उनका नाम स्थायी है।
७. शिवेन्दर सिंह सिन्धू (?-25 अक्टूबर 2018)
शिवेन्दर सिंह सिन्धू का नाम भारत के संवैधानिक-सेवा-क्षेत्र में आता है। उन्होंने मणिपुर, गोवा एवं मेघालय जैसे राज्यों में राज्यपाल की जिम्मेदारी का निर्वाह किया। वे जन-सेवा के उस उसर पर थे जहाँ प्रशासन-निर्वाह का मिश्रण राजनीतिक-ज्ञान से होता है।
उनका निधन 25 अक्टूबर 2018 को हुआ। उनकी सेवा-यात्रा आज भी प्रेरणा देती है।

25 अक्टूबर की यह तारीख कई क्षेत्रों में असाधारण व्यक्तित्वों के लिए विदा-दिन रही है — कवि-गीतकार से साहित्यकार, राजनीतिक नेतृत्व से सामाजिक-दर्शक, हास्य-वर्तुना से राज्यपाल-सेवक तक। ये सात लोग हमारे समाज-लोक में अलग-अलग क्षेत्रों में “छाप छोड़ने” वाले थे — और उनकी याद हमें प्रेरणा देती है कि हमें अपने कार्य-क्षेत्र में भी कुछ “अमिट” छोड़ना है।

मानवता, कला और राजनीति के सितारे—25 अक्टूबर में जन्मे अद्भुत व्यक्तित्व”

दिनांक 25 अक्टूबर को अनेक प्रतिभाएँ जन्म ले चुकी हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में अमिट छाप छोड़ी है। नीचे उन प्रमुख व्यक्तियों पर संक्षिप्त लेकिन विस्तृत विवरण प्रस्तुत हैं — उनके जन्म-स्थान, शिक्षा-पृष्ठभूमि, योगदान और प्रभाव को उजागर करते हुए।

  1. गुरजीत कौर (25 अक्टूबर 1995)
    गुरजीत कौर पंजाब के अमृतसर जिले स्थित गाँव मियाड़ी कलाँ से हैं, जो 25 अक्टूबर 1995 को जन्मीं।
    बाल-परिवार में किसान-पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने शिक्षा भी ग्रहण की, विशेष रूप से कट्टर हॉकी-कॅरियर के लिए 2011 में जालंधर के लायलपुर खालसा कॉलेज में प्रशिक्षण आरंभ किया गया।
    अपने करियर में वे भारतीय महिला हॉकी टीम की एक प्रमुख डिफेंडर और विशेष “ड्रैग-फ्लिकर” की भूमिका निभा रही हैं। उदाहरणस्वरूप, 2017 एशिया कप में उन्होंने 8 गोल किए और टीम को चैंपियन बनाने में योगदान दिया।
    उनका योगदान सिर्फ स्पोर्ट्स तक सीमित नहीं रहा — उन्होंने ग्रामीण पृष्ठभूमि की लड़कियों के लिए प्रेरणा-स्तंभ का काम किया है, तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में भारत का नाम रोशन किया है। उनके खेल-शैली, लगन और परिणाम-प्रदर्शन ने उन्हें एक आदर्श स्वरूप बना दिया है।
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  3. अडाला प्रभाकर रेड्डी (25 अक्टूबर 1948)
    अडाला प्रभाकर रेड्डी का जन्म 25 अक्टूबर 1948 को आंध्र-प्रदेश के नेल्लोर जिले के नॉर्थ मोपुरू नामक स्थान में हुआ था।
    उन्होंने इंटर (Higher Secondary) स्तर तक शिक्षा प्राप्त की थी और 1999 में आंध्र प्रदेश विधानसभा के सदस्य बने।
    उनका राजनीतिक-सफर विभिन्न दलों से जुड़ा रहा—टीडीपी, कांग्रेस और बाद में वाईएसआर कांग्रेस में। 2019 में उन्होंने नेल्लोर लोकसभा क्षेत्र से सांसद के रूप में विजय प्राप्त की।
    उनका योगदान मुख्य रूप से जन-कल्याण, ग्रामीण विकास और सामाजिक न्याय-प्रवर्तन से जुड़ा रहा। उन्होंने विधानसभा व लोकसभा स्तर पर विभिन्न समितियों में काम किया और अपने क्षेत्र में बेहतर बुनियादी सुविधाओं तथा नेटवर्किंग के लिए प्रयासरत रहे।
  4. मुकुंदी लाल श्रीवास्तव (25 अक्टूबर 1896)
    मुकुंदी लाल श्रीवास्तव का जन्म 25 अक्टूबर 1896 को मध्य-प्रदेश के सागर जिले के गोरझामर गाँव में हुआ था।
    उन्होंने बी.ए. तथा पूर्व में एम.ए. (प्रीवियस) किया था, मनोवृत्ति-सहकारी माहौल में पढ़े-लिखे। अपनी प्रारंभिक विधा के युवा-काल (लगभग 15 वर्ष की उम्र में) से ही उन्होंने साहित्य-लेखन आरंभ कर दिया था।
    उनका साहित्यिक योगदान अतुलनीय है—उन्होंने कई पुस्तकों का संपादन किया, ‘हिंदी शब्द संग्रह’, ‘बृहत् हिंदी कोश’ आदि तैयार किए, साथ ही अनुवाद एवं निबंध रचना की।
    उनकी कड़ी मेहनत, भाषा-विविधता के प्रति समर्पण और हिंदी साहित्य के विकास में दिये गये योगदान ने उन्हें हिन्दी-विश्व में एक सम्मानित स्थान दिलाया।
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  6. पाब्लो पिकासो (25 अक्टूबर 1881)
    पाब्लो पिकासो का जन्म 25 अक्टूबर 1881 को स्पेन के मालागा नगर में हुआ था।
    उनके पिता चित्रकार एवं कला शिक्षक थे, जिन्होंने पिकासो को बचपन से ही चित्रकलायें सिखाईं। पिकासो ने मात्र सात वर्ष की उम्र में चित्रकला आरंभ कर दी थी।
    उनकी कला-यात्रा ने आधुनिक कला-दृष्टिकोण, क्यूबिस्म, सुररियलिज्म इत्यादि को आकार दिया। उनकी शैली ने 20वीं सदी की कला को नई दिशा दी। मालागा-संस्कृति, भूमध्यसागरीय रंग-भूमि ने उनके काम को विशेष रूप दिया।
    उनका योगदान सिर्फ कला तक सीमित नहीं रहा — उन्होंने विश्व-व्यापी कला-संस्कृति, चित्रप्रयोग और अभिव्यक्ति की सीमाओं को चुनौती दी, तथा लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बने।
    इन व्यक्तित्वों — खेल की गहराई में उतरने वाली गुरजीत कौर, राजनीति-सेवा में समर्पित अडाला प्रभाकर रेड्डी, भाषा-संपदा की संरक्षक मुकुंदी लाल श्रीवास्तव तथा विश्व-कला को नया आयाम देने वाले पाब्लो पिकासो — ने अपने-अपने क्षेत्र में “25 अक्टूबर” को सिर्फ एक तारीख नहीं बल्कि उत्कृष्टता, संघर्ष और प्रेरणा का प्रतीक बना दिया है। इनके जीवन से हमें यह संदेश मिलता है कि जन्म-तिथि चाहे सामान्य हो, लेकिन संकल्प, प्रयास और समर्पण के आगे हर सीमा पारी जा सकती है।

परिवार से जुड़ाव

शब्द व व्यवहार ही मनुष्य
की असली पहचान होते हैं,
चेहरा व ऐश्वर्य तो आज हैं,
शायद कल नहीं रह पाते हैं।

तकलीफ़ें और मुसीबतें ईश्वर निर्मित
प्रयोगशालाओं में तैयार की जाती हैं,
मनुष्य का आत्मविश्वास और उसकी
योग्यता भी वहाँ ही परखी जाती है ।

चिंता करना व फ़िक्र करना दोनो
अलग अलग अभिप्राय रखते हैं,
चिंतित को समस्या दिखाई देती हैं,
फ़िक्र मंद समस्या हल कर लेते हैं।

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समस्या जब परिवार,
समाज पर आती है,
तो जिन्हें फ़िक्र होती है
वे उसे हल कर लेते हैं,
जो चिंता में डूबे रहते हैं,
वे उसमें ही उलझे रहते हैं।

पत्ते व डाली तभी तक हरे रहते हैं
जब तक पेंड़ पौधों से जुड़े होते हैं,
इंसान भी तभी तक ख़ुश रहता है,
जब तक परिवार से जुड़ा रहता है।

पत्ते व डालियाँ सूखते हैं पेंड़ पौधे
उनको खाद पानी नहीं दे पाते हैं,
परिवार से अलग होने वाले इंसान
आदित्य अपने संस्कार खो देते हैं।

डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’

छठ पर्व का पहला दिन ‘नहाय-खाय’: क्यों खास होता है लौकी-भात का प्रसाद

दीवाली के बाद छठ पर्व की शुरुआत होती है, जो चार दिनों तक चलता है। इस पर्व में व्रती सूर्य देव और छठी मइया की आराधना करते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में यह पर्व आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
छठ पूजा का पहला दिन ‘नहाय-खाय’ कहलाता है। इस दिन व्रती सुबह पवित्र स्नान कर सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं, जिसमें लौकी की सब्जी और चावल यानी लौकी-भात प्रमुख होता है। यह भोजन छठ व्रत की शुद्ध और पवित्र शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
लौकी हल्की, पचने में आसान और शरीर को ठंडक देने वाली सब्जी है। कार्तिक माह में जब मौसम बदलता है, तब लौकी शरीर के तापमान को संतुलित रखती है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है। यही कारण है कि इसे छठ व्रत की पहली थाली में शामिल किया जाता है।

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लौकी-भात साधारण लेकिन सात्विक भोजन है, जो सादगी और संयम का संदेश देता है। इसे देशी घी में पकाया जाता है, जिससे ऊर्जा और पवित्रता दोनों बनी रहती हैं। लोक परंपरा के अनुसार, छठी मइया को सात्विकता प्रिय है, इसलिए व्रती इसी भोजन से अपने पर्व की शुरुआत करते हैं।

जब बदल गई दुनिया की दिशा: इतिहास का स्वर्ण दिवस

25 अक्टूबर का इतिहास: वह दिन जिसने बदल दी दुनिया की दिशा


इतिहास के पन्नों में 25 अक्टूबर की तिथि कई महत्वपूर्ण घटनाओं की साक्षी रही है। इस दिन विश्व के अनेक कोनों में ऐसी घटनाएँ घटित हुईं जिन्होंने राजनीति, समाज, विज्ञान, युद्ध और मानव सभ्यता की दिशा तक को प्रभावित किया। आइए जानते हैं 25 अक्टूबर को घटित प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में विस्तार से —
1415 – एजिनकोर्ट की ऐतिहासिक लड़ाई में इंग्लैंड की विजय
25 अक्टूबर 1415 का दिन इंग्लैंड के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। इंग्लैंड और फ्रांस के बीच सौ वर्षों के युद्ध में यह लड़ाई निर्णायक साबित हुई। इंग्लैंड के राजा हेनरी पंचम ने अपनी सीमित सेना के साथ फ्रांस की विशाल सेना को परास्त किया। यह विजय न केवल इंग्लैंड की सैन्य क्षमता का प्रमाण बनी बल्कि यूरोप के सत्ता समीकरणों को भी बदल दिया। इस युद्ध ने इंग्लिश राष्ट्रवाद को नई पहचान दी।

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1812 – अमेरिका ने ब्रिटिश पोत मैसिडोनिया पर कब्जा जमाया
1812 में अमेरिका और ब्रिटेन के बीच चल रहे समुद्री युद्ध के दौरान अमेरिकी फ्रिगेट यूएसएस यूनाइटेड स्टेट्स ने ब्रिटिश जहाज़ मैसिडोनिया पर कब्जा कर लिया। यह अमेरिका के लिए एक बड़ी नौसैनिक सफलता थी जिसने अमेरिकी नौसेना की प्रतिष्ठा को बढ़ाया। यह घटना अमेरिका की समुद्री शक्ति के उदय का प्रतीक बनी और भविष्य में ब्रिटिश प्रभुत्व को चुनौती देने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई।
1917 – रूस में बोल्शेविक क्रांति की शुरुआत
1917 की इस तारीख को व्लादिमीर इलिच लेनिन के नेतृत्व में बोल्शेविकों ने रूस में सत्ता हथिया ली। इस घटना ने साम्यवादी विचारधारा को जन्म दिया और पूरी दुनिया में राजनीतिक व्यवस्था की सोच बदल दी। रूसी क्रांति ने पूंजीवाद के विरुद्ध एक नया अध्याय खोला, जिसने 20वीं सदी के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया।

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1924 – सुभाषचंद्र बोस की गिरफ्तारी
25 अक्टूबर 1924 को ब्रिटिश हुकूमत ने भारत के महान क्रांतिकारी सुभाषचंद्र बोस को गिरफ्तार कर दो वर्षों के लिए जेल भेज दिया। उस समय बोस ने ब्रिटिश नीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाई थी और युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया था। उनकी गिरफ्तारी ने राष्ट्रवादी आंदोलन को और अधिक तेज़ी से फैलाया।
1951 – भारत में पहले आम चुनाव की शुरुआत
यह दिन भारत के लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया। 25 अक्टूबर 1951 को देश में पहले आम चुनाव की शुरुआत हुई। यह चुनाव स्वतंत्र भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की नींव साबित हुआ। जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने इस चुनाव में भारी बहुमत हासिल किया। इसने भारत को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनाने की दिशा में पहला कदम रखा।

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1962 – जॉन स्टीनबेक को साहित्य का नोबेल पुरस्कार
अमेरिकी लेखक जॉन स्टीनबेक को 25 अक्टूबर 1962 को साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। उनके उपन्यासों में समाज की सच्चाइयों, गरीबी, और मानवीय संघर्षों की गहरी झलक मिलती है। “The Grapes of Wrath” जैसी कृतियाँ आज भी सामाजिक यथार्थ की मिसाल मानी जाती हैं।
1964 – ‘विजयंत’ टैंक का निर्माण
25 अक्टूबर 1964 को भारत ने स्वदेशी तकनीक से निर्मित पहला टैंक ‘विजयंत’ बनाया। यह भारतीय रक्षा उद्योग की आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक कदम था। अवादी कारखाने में बना यह टैंक उस युग में भारत की सैन्य शक्ति और तकनीकी प्रगति का प्रतीक बन गया।
1971 – संयुक्त राष्ट्र महासभा में ताइवान का मुद्दा
इस दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा में मतदान के दौरान ताइवान को चीन में शामिल करने का निर्णय लिया गया। यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण घटना थी। इस निर्णय ने वैश्विक स्तर पर चीन की स्थिति को मज़बूत किया और ताइवान के राजनैतिक भविष्य पर गहरा प्रभाव डाला।
1995 – नरसिम्हा राव का संयुक्त राष्ट्र में संबोधन
भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव ने 25 अक्टूबर 1995 को संयुक्त राष्ट्र की 50वीं वर्षगांठ पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनके भाषण में वैश्विक शांति, विकास और आर्थिक सुधारों की झलक देखने को मिली। राव का यह संबोधन भारत की नई आर्थिक नीति की दिशा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने वाला साबित हुआ।
2000 – डिस्कवरी स्पेस मिशन की सफल वापसी
25 अक्टूबर 2000 को अमेरिकी अंतरिक्ष यान डिस्कवरी 13 दिन के लंबे अभियान के बाद सकुशल पृथ्वी पर लौटा। यह मिशन अंतरिक्ष अनुसंधान में अमेरिका की निरंतर प्रगति का उदाहरण था। इस अभियान ने अंतरिक्ष यात्राओं के क्षेत्र में नई तकनीकी संभावनाएँ खोलीं और मानव सभ्यता को अंतरिक्ष युग की ओर और आगे बढ़ाया।
2005 – इराक में नए संविधान को मंजूरी
इस दिन इराक के नागरिकों ने जनमत संग्रह में नए संविधान को भारी बहुमत से मंजूरी दी। यह घटना वर्षों से चले आ रहे अशांति और तानाशाही शासन के बाद लोकतंत्र की ओर पहला कदम थी। संविधान की स्वीकृति ने इराक को नए युग में प्रवेश कराया, हालांकि चुनौतियाँ अभी भी बनी रहीं।

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2007 – तुर्की की बमबारी और सुलावेसी ज्वालामुखी विस्फोट
25 अक्टूबर 2007 को तुर्की के लड़ाकू विमानों ने उत्तरी इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में बमबारी की, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। इसी दिन इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप पर माउंट सोपुटान ज्वालामुखी फट पड़ा, जिससे सैकड़ों लोग विस्थापित हुए। यह दिन प्राकृतिक और राजनीतिक दोनों ही दृष्टि से उथल-पुथल भरा रहा।
2008 – सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री नर बहादुर भंडारी को सजा
2008 में इस दिन सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री नर बहादुर भंडारी को भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में छह महीने की सज़ा सुनाई गई। यह घटना भारत में राजनीति में जवाबदेही और पारदर्शिता की दिशा में एक उदाहरण बनी।
2009 – बगदाद बम धमाकों से तबाही
25 अक्टूबर 2009 को इराक की राजधानी बगदाद में हुए बम विस्फोटों ने पूरी दुनिया को दहला दिया। इन हमलों में 155 लोगों की मौत और 700 से अधिक घायल हुए। यह घटना उस समय के इराकी संघर्ष और आतंकवाद के भयावह रूप को सामने लाने वाली साबित हुई।
2012 – ‘सैंडी’ तूफान की तबाही
क्यूबा और हैती में 25 अक्टूबर 2012 को आए सैंडी तूफान ने भारी विनाश किया। 65 लोगों की मौत और करोड़ों डॉलर की संपत्ति नष्ट हो गई। बाद में यही तूफान अमेरिका के पूर्वी तट पर पहुंचा और उसे भी झकझोर दिया। यह तूफान प्रकृति की शक्ति का भयानक उदाहरण बना।
2013 – बोको हराम के 74 आतंकवादी ढेर
25 अक्टूबर 2013 को नाइजीरियाई सेना ने आतंकवादी संगठन बोको हराम के 74 आतंकवादियों को मार गिराया। यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ देश की सबसे बड़ी सैन्य सफलताओं में से एक मानी गई। इससे न केवल देश में सुरक्षा का विश्वास बढ़ा बल्कि आतंकवादी संगठनों पर निर्णायक प्रहार भी हुआ।

इतिहास के इन पन्नों से यह स्पष्ट होता है कि 25 अक्टूबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के परिवर्तन, संघर्ष, उपलब्धियों और सीखों का प्रतीक है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हर संघर्ष, चाहे वह युद्ध का हो, राजनीति का या प्रकृति से जुड़ा — दुनिया को कुछ न कुछ सिखा जाता है।

IND vs AUS 3rd ODI Live: भारत-ऑस्ट्रेलिया तीसरा वनडे आज, टीवी और मोबाइल पर कैसे देखें मैच?

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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीसरा वनडे (IND vs AUS 3rd ODI) आज शनिवार, 25 अक्टूबर 2025 को सिडनी में खेला जाएगा। ऑस्ट्रेलियाई टीम पहले दो मैच जीतकर सीरीज में 2-0 की बढ़त पर है। भारत इस सीरीज में शुभमन गिल की कप्तानी में पहला वनडे सीरीज खेल रहा है और तीसरे वनडे में जीत दर्ज कर सीरीज को 2-1 पर खत्म करना चाहेगा।

लाइव मैच देखने का तरीका:

टीवी पर: मैच का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर देखा जा सकता है।

मोबाइल/ओटीटी पर: मैच की लाइव स्ट्रीमिंग जियो हॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध होगी।

मुकाबले की अहम बातें:
तीसरे वनडे में सभी की निगाहें कप्तान शुभमन गिल और विराट कोहली पर रहेंगी, जिन्होंने पिछले दो मैचों में ज्यादा प्रभाव नहीं डाला।

रोहित शर्मा और विराट कोहली ने इस सीरीज में सात महीने बाद इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी की।

रोहित शर्मा ने दूसरे वनडे में 73 रन बनाए थे।

विराट कोहली को तीसरे वनडे में बल्ले से प्रदर्शन करना होगा, क्योंकि वह पहले दो मैचों में शून्य पर आउट हुए थे।

ऑस्ट्रेलिया की टीम मिच मार्श की कप्तानी में क्लीन स्वीप करना चाहेगी, जबकि भारत सीरीज बचाने और तीसरे वनडे जीतने के इरादे से मैदान में उतरेगा।

600 युवा वैज्ञानिकों के साथ उड़ान भरेगा पूर्वांचल का सपना

🌠 देवरिया-कुशीनगर के बच्चों में अंतरिक्ष का जुनून: नारायणी तट पर रॉकेट लांच पैड ने जगाई विज्ञान की लौ


IN-SPACe प्रतियोगिता 2024-25 से जगी वैज्ञानिक बनने की ललक, STEM शिक्षा को लेकर छात्रों में जबरदस्त उत्साह

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।देवरिया लोकसभा क्षेत्र के तमकुहीराज में इन दिनों माहौल कुछ बदला-बदला है — गलियों में क्रिकेट की चर्चा नहीं, बल्कि रॉकेट और स्पेस साइंस के सपने हैं। नारायणी नदी के तट पर बन रहा मॉडल रॉकेट्री लांच पैड स्थानीय युवाओं के भीतर विज्ञान और नवाचार की नई ऊर्जा जगा रहा है।
यह सब संभव हुआ है सांसद शशांक मणि की ‘अमृत प्रयास’ पहल के तहत हो रहे IN-SPACe Model Rocketry / CanSat India Student Competition 2024-25 से, जिसने देवरिया-कुशीनगर क्षेत्र को पहली बार राष्ट्रीय वैज्ञानिक नक्शे पर लाकर खड़ा कर दिया है।

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देशभर से आने वाले 600 युवा वैज्ञानिकों और 120 वरिष्ठ वैज्ञानिकों के स्वागत की तैयारियों के बीच, स्थानीय स्कूलों के बच्चे रोज़ आयोजन स्थल पहुंचकर लांच पैड, कमांड सेंटर और साइंस गैलरी को देखकर रोमांचित हो रहे हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ‘विकसित भारत @2047’ मिशन की जीवंत शुरुआत है।

🚀 गांव में रॉकेट, बच्चों में विज्ञान की उड़ान
लांच पैड से लगभग एक किलोमीटर दूर बनाया गया कमांड सेंटर छात्रों के लिए किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं।
12वीं के छात्र रोहित कुशवाहा ने कहा,
“हम साइंस फिक्शन फिल्मों में रॉकेट देखते थे, पर अब अपने घर के पास लांच पैड बन रहा है। अब हमें विज्ञान और इंजीनियरिंग में करियर बनाना सही लगने लगा है।”
वहीं छात्र गुड्डू यादव बोले,

“यह हमारे लिए जीवन का सबसे बड़ा मौका है। अब हमें डेटा एनालिटिक्स और स्पेस-टेक्नोलॉजी में करियर दिखने लगा है।”
10वीं के छात्र शाहिल चौहान कहते हैं,
“हमारे क्षेत्र में इतना बड़ा वैज्ञानिक आयोजन होना किसी सपने से कम नहीं। अब विज्ञान पढ़ना मजेदार हो गया है।”

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🛰️ साइंस म्यूजियम गैलरी बनेगी आकर्षण का केंद्र
आयोजन स्थल पर आर्ट एंड स्पेस गैलरी भी तैयार हो रही है, जो एक छोटे साइंस म्यूजियम की तरह काम करेगी।
यहां उत्तर प्रदेश के 8 जिलों से आने वाले ‘आर्ट एंड स्पेस कंप्टीशन’ के विजेता छात्र अंतरिक्ष जैसी रोशनी और ध्वनि से बने दृश्यों का अनुभव करेंगे। इससे स्थानीय बच्चों में यह विश्वास बढ़ा है कि विज्ञान अब दूर नहीं, उनके गांव तक पहुंच चुका है।
🔭 शिक्षाविद बोले — STEM शिक्षा की नई दिशा
शिक्षाविदों के अनुसार, यह आयोजन बच्चों में STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) विषयों के प्रति झुकाव बढ़ाएगा। अब छात्र समझने लगे हैं कि अंतरिक्ष तकनीक का उपयोग सिर्फ रॉकेट तक सीमित नहीं, बल्कि यह कृषि, मौसम पूर्वानुमान, डेटा एनालिटिक्स और संचार तकनीक तक फैला है।
सांसद शशांक मणि ने कहा — “देवरिया-कुशीनगर की पहचान अब केवल एक जिला नहीं, बल्कि विज्ञान और अंतरिक्ष नवाचार की धरती के रूप में होगी।”

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⚙️लांच पैड का निर्माण कार्य पूरा।
रॉकेट असेम्बली अंतिम चरण में।
जर्मन हेंगर टेंट में मुख्य स्टेज तैयार।
आर्ट एंड स्पेस गैलरी में उपकरण इंस्टॉल हो रहे हैं।
वरिष्ठ वैज्ञानिकों की टीम कुशीनगर पहुंच चुकी है और स्थानीय होटलों में ठहरी है।

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🧭 तमकुहीराज में होने वाला यह आयोजन न सिर्फ एक तकनीकी प्रयोग है, बल्कि पूर्वांचल के युवाओं के सपनों को नई दिशा देने वाला आंदोलन बन चुका है। देवरिया और कुशीनगर की यह धरती अब केवल खेती के लिए नहीं, बल्कि आकाश को छूने के सपनों के लिए भी जानी जाएगी।

बदल जाएगा यूपी का मौसम! बारिश और कोहरे की दस्तक से बढ़ेगी सर्दी — जानिए कब गिरेगा तापमान”

उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। यूपी में मौसम अब करवट लेने लगा है। प्रदेश के कई जिलों में सुबह और शाम के समय हल्की सर्दी के साथ धुंध और कोहरा छाने लगा है। वहीं दिन के वक्त धूप निकलने से मौसम शुष्क बना हुआ है।
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 25 अक्टूबर को भी पश्चिमी और पूर्वी दोनों संभागों में छिछला कोहरा देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में सर्दी अपने पूरे जोश के साथ दस्तक देने वाली है।

अगले कुछ दिनों का मौसम पूर्वानुमान:
मौसम विभाग का कहना है कि शनिवार को पश्चिमी और पूर्वी यूपी के अधिकतर हिस्सों में आसमान साफ रहेगा और दिन में धूप खिली रहेगी। हालांकि, सुबह और देर रात में धुंध व हल्का कोहरा देखने को मिलेगा।
प्रदेश के सभी 75 जिले ग्रीन जोन में हैं — यानी कहीं भी किसी मौसम चेतावनी की संभावना नहीं है।

29-30 अक्टूबर को बारिश के संकेत:
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 29 और 30 अक्टूबर को पूर्वांचल के कुछ जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। इससे सर्दी में इजाफा होगा और तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी।

तापमान में गिरावट से बढ़ेगी ठंड:
मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों तक तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन उसके बाद अधिकतम तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है।
वहीं, न्यूनतम तापमान में 2-3 डिग्री की कमी आने की संभावना है, जिससे रात और सुबह की ठंडक बढ़ेगी।

यूपी के ठंडे जिले:
बीते 24 घंटे में मेरठ सबसे ठंडा जिला रहा, जहां न्यूनतम तापमान 16.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। इसके अलावा बरेली, मुजफ्फरनगर, बाराबंकी और इटावा भी ठंडे जिलों में शामिल रहे।
लखनऊ में न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
उत्तर-पूर्वी हवाओं के चलने से अब रातों में ठंडक और कोहरा दोनों में बढ़ोतरी हो रही है।

Delhi Cyber Fraud: रिटायर्ड बैंकर से 22.92 करोड़ की ठगी, 6 हफ्ते तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा — अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी का खुलासा

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। देश की राजधानी दिल्ली से अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। दक्षिण दिल्ली के गुलमोहर पार्क में रहने वाले एक सेवानिवृत्त बैंकर को ठगों ने डिजिटल अरेस्ट कर 22.92 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी कर ली।
पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल साइबर क्राइम में शामिल 5 आरोपियों — अशोक, मोहित, अमित, समरजीत और कनकपाल — को दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से गिरफ्तार किया है।

दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में तीन बैंक खाता धारक, एक बिचौलिया और एक एनजीओ संचालक शामिल हैं। जांच में यह सामने आया है कि इस ठगी के तार कंबोडिया में बैठे चीनी साइबर अपराधियों से जुड़े हैं, जो दक्षिण-पूर्व एशिया से भारत में ठगी के नेटवर्क को संचालित कर रहे थे।

कैसे हुई ठगी:
ठगों ने पहले एक महिला को दूरसंचार कंपनी की “वरिष्ठ अधिकारी” बनाकर भेजा, जिसने पीड़ित को बताया कि उनका मोबाइल नंबर अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद फर्जी मुंबई पुलिस, ईडी और सीबीआई अधिकारी बनकर ठग वीडियो कॉल पर सामने आए और जांच के नाम पर पीड़ित को छह सप्ताह तक डिजिटल कैद में रखा।
हर दो घंटे में वीडियो कॉल कर यह सुनिश्चित किया गया कि वह किसी से संपर्क न कर सके। गोपनीयता की शपथ के नाम पर उनसे एक सादे कागज पर हस्ताक्षर करवाए गए, जिसकी फोटो व्हाट्सएप पर मंगाई गई।

एनजीओ के जरिये मनी लॉन्ड्रिंग:
ठगों ने ठगे गए पैसों को वैध दिखाने के लिए उत्तराखंड के एक गांव में स्थित एनजीओ के खाते में ट्रांसफर किया। एनजीओ संचालक कनकपाल को कमीशन के लालच में इस नेटवर्क से जोड़ा गया था।

पुलिस की कार्रवाई:
दिल्ली पुलिस ने अब तक 2,500 बैंक खातों को फ्रीज किया है, जिनमें से करीब 3 करोड़ रुपये की राशि रोकी गई है। जांच एजेंसियों को शक है कि यह गिरोह देशभर में कई लोगों को इसी तरह डिजिटल अरेस्ट कर ठग चुका है।

UPPRPB: यूपी पुलिस कंप्यूटर ऑपरेटर भर्ती परीक्षा 1 नवंबर को, सिटी स्लिप जारी — एडमिट कार्ड तीन दिन पहले डाउनलोड कर सकेंगे उम्मीदवार

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लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) ने कंप्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए भर्ती 2023 की लिखित परीक्षा तिथि जारी कर दी है।
बोर्ड के अनुसार यह परीक्षा 1 नवंबर 2025 (शनिवार) को आयोजित की जाएगी। परीक्षा दो पालियों में होगी, जिसमें पहली पाली का समय सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक तय किया गया है।

सिटी स्लिप और परीक्षा तिथि

सभी उम्मीदवार अपनी परीक्षा की तिथि, पाली और परीक्षा केंद्र का शहर बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट http://uppbpb.gov.in पर देख सकते हैं।
इसके लिए अभ्यर्थियों को अपना पंजीकरण नंबर और जन्मतिथि दर्ज कर लॉगिन करना होगा।

एडमिट कार्ड परीक्षा से तीन दिन पहले जारी होंगे

परीक्षा का एडमिट कार्ड (Admit Card) परीक्षा तिथि से तीन दिन पहले वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।
उम्मीदवार अपने लॉगिन क्रेडेंशियल के माध्यम से बोर्ड की वेबसाइट से एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे।
बोर्ड ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे किसी भी फर्जी लिंक या अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही अपडेट प्राप्त करें।

सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर और ईमेल जारी

यदि किसी उम्मीदवार को एडमिट कार्ड डाउनलोड करने या वेबसाइट से जुड़ी किसी तकनीकी समस्या का सामना करना पड़े तो वे निम्न माध्यमों से सहायता प्राप्त कर सकते हैं:

हेल्पलाइन नंबर: 8064526226

ईमेल: helpdesk@coexams.com

बोर्ड की अपील

UPPRPB ने कहा है कि परीक्षा से संबंधित सभी आधिकारिक अपडेट, नोटिस और निर्देश केवल बोर्ड की वेबसाइट पर ही उपलब्ध होंगे।
उम्मीदवारों को अपनी तैयारी जारी रखने और किसी भी अनधिकृत सूचना से बचने की सलाह दी गई है।

तेज रफ्तार कार का कहर: सात लोगों को रौंदा, पांच की मौत

आगरा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश के आगरा में शुक्रवार रात एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ, जब तेज रफ्तार कार ने सात लोगों को रौंद दिया, जिसमें पांच लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से घायल हैं। यह दर्दनाक हादसा थाना न्यू आगरा क्षेत्र के केंद्रीय हिंदी संस्थान रोड, नगला बूढ़ी इलाके में हुआ।

तेज रफ्तार कार ने मचाई तबाही

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात करीब 8 बजे दयालबाग मार्ग से 80 फुटा रोड की ओर तेज रफ्तार में आ रही कार ने सबसे पहले एक फूड डिलीवरी बॉय को टक्कर मारी।
बताया गया कि कार चालक नशे में धुत था और पुलिस चेकिंग से बचने के लिए वाहन को तेज गति से भगाने लगा।
कुछ ही दूरी पर उसने मां-बेटे और दो दोस्तों को भी कुचल दिया।

कार 100 मीटर बाद डिवाइडर से टकराई, घर पर बैठे लोगों पर गिरी

कार की स्पीड इतनी अधिक थी कि वह 100 मीटर आगे जाकर डिवाइडर से टकराई और तीन बार पलटने के बाद एक घर के बाहर बैठे लोगों पर जा गिरी।
इस हादसे में प्रेमचंद के घर के बाहर बैठे राहुल और वीरेंद्र कार के नीचे दब गए।
स्थानीय लोगों ने शोर सुनकर कार को उठाया और घायलों को बाहर निकाला। सभी को एस.एन. मेडिकल कॉलेज, आगरा ले जाया गया, जहां 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई।

मृतकों की पहचान

  1. बबली (38) — निवासी नगला बूढ़ी
  2. गोलू (बेटा, उम्र 10 वर्ष)
  3. कमल (23) — पेंटर
  4. कृष उर्फ कृष्णा (20) — पेंटर
  5. बंटेश (50) — स्थानीय निवासी

घायल दो अन्य व्यक्तियों का इलाज अस्पताल में जारी है।

हादसे के बाद गुस्साई भीड़ का हंगामा

हादसे के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया। गुस्साई भीड़ ने कार चालक को पकड़कर लाठी-डंडों से पीट दिया।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह चालक को भीड़ से बचाया और थाने ले जाकर हिरासत में लिया।
चालक के नशे में होने की पुष्टि प्रत्यक्षदर्शियों ने की है।

पुलिस ने लिया मामले का संज्ञान

मौके पर पहुंचे एडीसीपी आदित्य सिंह और एसीपी हरीपर्वत अक्षय संजय महाडिक ने स्थिति को नियंत्रित किया।
पुलिस ने लोगों को शांत कर घटनास्थल से कार को कब्जे में लिया और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
स्थानीय लोगों ने पीड़ित परिवारों के लिए सरकारी मुआवजे की मांग की है।

घटना की झलक (संक्षेप में):

तेज रफ्तार कार ने सात लोगों को कुचला

पांच की मौत, दो गंभीर

चालक नशे में था, पुलिस चेकिंग से बचने की कोशिश

भीड़ ने आरोपी की पिटाई की

पुलिस ने किया बचाव और गिरफ्तारी

200 साल तक मिट्टी में दबी रही बुद्ध की 5500 किलो सोने की मूर्ति, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। दुनिया में बुद्ध को मानने वाले करोड़ों श्रद्धालु हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसी बुद्ध प्रतिमा भी है जो ठोस सोने से बनी है और करीब दो सदियों तक मिट्टी में दबी रही? यह अद्भुत मूर्ति न सिर्फ कला का उत्कृष्ट नमूना है, बल्कि इतिहास और आध्यात्मिकता का भी अनमोल प्रतीक मानी जाती है।

कहां स्थित है यह सोने की बुद्ध मूर्ति?

यह अद्वितीय मूर्ति थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में स्थित वाट ट्रैमिट मंदिर में स्थापित है।
इस मूर्ति को ‘गोल्डन बुद्ध (Golden Buddha)’ के नाम से जाना जाता है।

मूर्ति की ऊंचाई लगभग 3 मीटर (10 फीट) है।

इसका कुल वजन करीब 5,500 किलोग्राम (12,125 पाउंड) है।

यह दुनिया की सबसे बड़ी ठोस सोने की बुद्ध प्रतिमा मानी जाती है।

मूर्ति के निर्माण में लगभग 83% शुद्ध सोना इस्तेमाल हुआ है।

बुद्ध के शरीर का भाग 40% शुद्ध सोने से बना है।

जबकि बाल और चोटी 99% शुद्ध सोने से निर्मित हैं।

अगर मौजूदा सोने के अंतरराष्ट्रीय दाम के अनुसार कीमत आंकी जाए तो इस मूर्ति का मूल्य करीब 480 मिलियन अमेरिकी डॉलर (₹4,000 करोड़ से अधिक) बताया जाता है।

बुद्ध की मुद्रा और आध्यात्मिक प्रतीक

गोल्डन बुद्ध की यह प्रतिमा भूमिस्पर्श मुद्रा में विराजमान है — यह मुद्रा ज्ञान, वासना और अज्ञान पर विजय का प्रतीक है।
प्रतिमा का शांत और आभामय स्वरूप बौद्ध दर्शन की गहराई और जीवन में स्थिरता का संदेश देता है।

क्यों 200 सालों तक मिट्टी में छिपाई गई थी मूर्ति?

इतिहासकारों के अनुसार, इस मूर्ति को 18वीं सदी में प्लास्टर और मिट्टी की मोटी परत से ढक दिया गया था।
इसका कारण था —

आक्रमणों के समय इसे लूट से बचाना।

और इसके असली सोने के स्वरूप को गोपनीय रखना।

कई वर्षों तक किसी को भी पता नहीं था कि यह मूर्ति सोने की बनी है। 1955 में जब इसे एक नए मंदिर में स्थानांतरित किया जा रहा था, तभी परत का कुछ हिस्सा टूट गया और सोने की चमक सबके सामने आ गई। इसके बाद इसका वास्तविक स्वरूप दुनिया के सामने आया।

इतिहास, आस्था और अद्भुत खोज का संगम

गोल्डन बुद्ध की खोज ने इतिहासकारों और श्रद्धालुओं दोनों को चौंका दिया।
यह न केवल थाईलैंड की धार्मिक धरोहर है, बल्कि यह साबित करती है कि कला और आस्था समय की किसी भी परत के नीचे छिपी रहे, एक दिन जरूर उजागर होती है।

आज का मौसम: दिल्ली-लखनऊ में धुंध, चेन्नई-कोलकाता में हल्की बारिश की संभावना

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। देशभर में आज मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में ठंडक बढ़ने लगी है, जबकि दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों में बादल और हल्की बारिश के आसार बने हुए हैं। मध्य भारत में दिन के समय धूप रहेगी लेकिन शाम तक तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है।

उत्तर भारत में तापमान में गिरावट

दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में सुबह-शाम हल्की ठंड महसूस की जा रही है।

दिन का अधिकतम तापमान 28°C से 31°C के बीच रहने का अनुमान है।

कुछ इलाकों में हल्का कोहरा और धुंध देखी जा सकती है।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में हल्की बर्फबारी की संभावना जताई गई है।

दक्षिण भारत में बादल और हल्की बारिश

तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में आज हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

चेन्नई और बेंगलुरु में बादल छाए रहने की संभावना।

अधिकतम तापमान 30°C से 33°C तक रह सकता है।

मध्य भारत में धूप के साथ सुहाना मौसम

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के अधिकांश क्षेत्रों में आज मुख्य रूप से साफ मौसम रहेगा।

तापमान 29°C से 34°C तक रह सकता है।

शाम होते-होते हल्की ठंड का असर महसूस होगा।

पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में वर्षा के संकेत

असम, मेघालय, मणिपुर और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश और बादल छाए रह सकते हैं।

कोलकाता में दोपहर बाद बूंदाबांदी की संभावना है।

अधिकतम तापमान लगभग 31°C रहेगा।

आज के लिए देशभर का औसत तापमान

न्यूनतम तापमान: 18°C से 22°C

अधिकतम तापमान: 28°C से 33°C

हवाओं की गति: 10–15 किमी/घंटा

मौसम विभाग की सलाह

सुबह-शाम बाहर निकलते समय हल्के गर्म कपड़े पहनें।

बारिश की संभावना वाले इलाकों में छाता या रेनकोट साथ रखें।

खुले क्षेत्रों में बिजली या तूफान के समय रुकना सुरक्षित नहीं है।

यात्रा से पहले स्थानीय मौसम बुलेटिन की जांच अवश्य करें।