Friday, July 3, 2026
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वीकेंड स्पेशल: दही वाले बैंगन कतरी की अनोखी रेसिपी जो हर किसी का दिल जीत ल

किचन के राज़: दही से बनने वाले व्यंजनों की गहराई, स्वाद और

निखार का विज्ञान – जानें दही वाले बैंगन कतरी से लेकर न फटने तक के सारे टिप्स


भूमिका: किचन की छोटी गलतियाँ, बड़े फर्क का कारण
किचन में कुकिंग करना केवल रेसिपी फॉलो करने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक कला और विज्ञान का सुंदर संगम है। हर सामग्री, हर तापमान, हर मसाला—सबका अपना स्वभाव होता है। इनमें सबसे नाजुक और स्वाद से भरपूर सामग्री है दही (Curd)। दही जहां व्यंजनों में मलाईदार टेक्सचर और खट्टा-मीठा स्वाद जोड़ती है, वहीं जरा-सी गलती पूरी डिश को खराब भी कर सकती है। खासकर जब आप करी या ग्रेवी में दही डालते हैं, तो एक पल की अनदेखी से यह फट जाती है और डिश का सारा टेक्सचर बिगड़ जाता है।
लेकिन ऐसा होना जरूरी नहीं। अगर आप थोड़ी सी समझदारी और सही तकनीक अपनाएं, तो न सिर्फ दही फटने से बचा सकते हैं बल्कि कुकिंग में इसका असली स्वाद और पौष्टिकता भी बनाए रख सकते हैं।
दही फटने का असली कारण – केमिस्ट्री का खेल
दही एक डेयरी उत्पाद है जिसमें प्रोटीन (कैसिन) और फैट (वसा) का मिश्रण होता है। जब इसे गर्म किया जाता है, तो तापमान के कारण प्रोटीन के बंधन टूटने लगते हैं और दही फटने लगती है।
अगर इसे अचानक बहुत गर्म करी में डाल दिया जाए या यह ठंडी हो, तो तापमान का यह फर्क ‘थर्मल शॉक’ कहलाता है। यही शॉक दही को दानेदार बना देता है और पानी अलग कर देता है।
इसके अलावा, करी में मौजूद खटास या एसिडिटी भी दही को अस्थिर कर देती है।
दही को फटने से बचाने के आसान कुकिंग हैक्स

  1. दही को अच्छी तरह फेंटें और स्मूद बनाएं
    दही को करी में डालने से पहले हमेशा अच्छी तरह फेंटें। इसे तब तक फेंटें जब तक यह पूरी तरह से क्रीमी और स्मूद न हो जाए।
    अगर आप चाहें तो इसमें 1-2 चम्मच बेसन या मैदा भी मिला सकते हैं। बेसन एक प्राकृतिक “स्टेबलाइज़र” की तरह काम करता है, जो प्रोटीन और पानी को बांधकर रखता है ताकि गर्मी लगने पर दही फटे नहीं।
  2. ठंडी दही नहीं, रूम टेंपरेचर वाली दही डालें
    फ्रिज से निकालकर तुरंत दही को गरम करी में डालना सबसे बड़ी गलती है।
    पहले दही को 15-20 मिनट तक रूम टेंपरेचर पर रख दें। ऐसा करने से तापमान संतुलित रहता है और दही आसानी से करी में मिक्स हो जाती है।
  3. धीमी आंच पर पकाएं और लगातार चलाते रहें
    जब भी दही डालें, पहले गैस की आंच धीमी करें।
    धीरे-धीरे पकाने से दही को समान रूप से गर्मी मिलती है और यह फटती नहीं। साथ ही, लगातार चलाते रहें ताकि गर्मी हर जगह बराबर फैले।
  4. मसाले डालने का सही समय जानें
    दही को हमेशा मसाले भूनने के बाद डालें, न कि मसाले के साथ।
    पहले मसालों को तेल में भून लें, फिर जब आंच थोड़ी धीमी हो, तब फेंटी हुई दही डालें। इससे न सिर्फ स्वाद बढ़ेगा बल्कि दही का टेक्सचर भी सही रहेगा।
    दही से बनने वाला स्वादिष्ट व्यंजन – दही वाले बैंगन कतरी
    अगर आप इस वीकेंड कुछ नया और स्वादिष्ट ट्राई करना चाहते हैं, तो “दही वाले बैंगन कतरी” जरूर बनाएं। यह एक ऐसी डिश है जो सब्जी और रायते दोनों का स्वाद एक साथ देती है — हल्की खटास, मलाईदार टेक्सचर और बैंगन की सुगंध का बेहतरीन संगम।
    आवश्यक सामग्री:बैंगन – 2 बड़े,नमक – 1 चम्मच,तेल – 4-5 चम्मच,हल्दी पाउडर – आधा चम्मच,जीरा पाउडर – 1 चम्मच,धनिया पाउडर – 1 चम्मच,दही – 1 कप (अच्छी तरह फेंटी हुई),लौंग – 2,साबुत काली मिर्च – 4-5 दाने,साबुत लाल मिर्च – 2 तड़के के लिए – थोड़ा तेल और जीरा
    बनाने की विधि:1. सबसे पहले एक बर्तन में पानी लेकर उसमें नमक मिलाएं।
  5. बैंगन का डंठल काटकर 1 इंच मोटी स्लाइस काटें और पानी में डाल दें, ताकि काले न पड़ें।
  6. अब एक पैन में तेल गरम करें और बैंगन की स्लाइस को दोनों तरफ से गोल्डन ब्राउन होने तक फ्राई करें।
  7. एक अलग पैन में 2 चम्मच तेल डालें।
  8. इसमें लौंग, काली मिर्च, हल्दी, जीरा पाउडर और धनिया पाउडर डालकर हल्का भूनें।
  9. अब इसमें एक लेयर फ्राई किए हुए बैंगन की लगाएं, फिर उसके ऊपर फेंटी हुई दही की एक लेयर डालें।
  10. इसी तरह 2-3 लेयर लगाएं और सबसे ऊपर दही की लेयर से खत्म करें।
  11. अब तड़का लगाएं – एक छोटे पैन में तेल गर्म करें, जीरा और साबुत लाल मिर्च डालें, हल्का भूनें और इसे बैंगन-दही के ऊपर डाल दें।
    आपकी दही वाली बैंगन कतरी तैयार है। इसे गरमागरम रोटी, पराठा या दाल-चावल के साथ सर्व करें और देखें कैसे इसका स्वाद हर किसी के दिल को जीत लेता है।
    दही क्यों है हेल्दी और स्वाद का सीक्रेट
    दही सिर्फ स्वाद नहीं बढ़ाती, बल्कि सेहत का खजाना भी है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन को सुधारते हैं, कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है और प्रोटीन से शरीर को ऊर्जा मिलती है।
    साथ ही, यह करी को क्रीमी टेक्सचर देती है, जिससे बिना क्रीम या मक्खन के भी डिश समृद्ध लगती है।
    कुकिंग में संतुलन ही स्वाद की कुंजी
    दही का इस्तेमाल करते हुए धैर्य, तापमान और सही तकनीक का ध्यान रखकर आप अपने हर व्यंजन को परफेक्ट बना सकते हैं।
    चाहे वह कढ़ी हो, दही वाला बैंगन हो या कोई रिच मुगलई ग्रेवी—अगर दही सही तरीके से डाली जाए, तो डिश का स्वाद दोगुना हो जाता है।
    कुकिंग में ये छोटे-छोटे राज ही असली “किचन स्मार्टनेस” हैं, जो हर बार आपके खाने को परफेक्ट बनाते हैं।

“RSS का सदी का संकल्प – धर्म, एकता और शक्ति से शांतिपूर्ण विश्व निर्माण”

“आरएसएस का शताब्दी विजन: मोहन भागवत बोले – संगठित हिंदू समाज ही बनाएगा खुशहाल और शक्तिशाली भारत

नागपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित दो दिवसीय लेक्चर सीरीज ‘न्यू होराइजन्स’ में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संगठन की मूल भावना और एकल लक्ष्य को स्पष्ट रूप से सामने रखा। उन्होंने कहा कि संघ का एकमात्र उद्देश्य पूरे हिंदू समाज को संगठित और सशक्त बनाना है, ताकि भारत न केवल खुशहाल और मजबूत बने बल्कि पूरी दुनिया को धर्म और शांति का मार्ग दिखा सके।

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भागवत ने कहा, “संघ का एक ही विजन है — पूरे हिंदू समाज को एक करना, उनमें संस्कार और सामर्थ्य भरना, ताकि वे एक समृद्ध भारत का निर्माण करें। जब हिंदू समाज संगठित होगा, बाकी कार्य समाज स्वयं करेगा।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या मुसलमान आरएसएस का हिस्सा बन सकते हैं, तो भागवत ने कहा कि संघ में किसी व्यक्ति की पहचान जाति, धर्म या पंथ से नहीं की जाती। उन्होंने कहा, “संघ में न ब्राह्मण की गिनती होती है, न मुसलमान की। सभी भारत माता के बेटे हैं। मुसलमान और ईसाई भी शाखा में आते हैं, हम उनसे उनकी पहचान नहीं पूछते।”

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उन्होंने यह भी जोड़ा कि संघ में आने वाला हर व्यक्ति पहले भारत माता का पुत्र है और सभी की अलग पहचान का सम्मान किया जाता है। भागवत ने कहा कि शाखा में आने के बाद सब एक भाव से जुड़ते हैं — ‘एक भारत, एक समाज, एक संस्कृति’ के साथ।

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यह वक्तव्य ऐसे समय आया है जब आरएसएस अपनी 100 वर्ष की यात्रा पूरी कर रहा है और भविष्य की दिशा तय कर रहा है, जो संगठन के “एक भारत, शक्तिशाली भारत” के लक्ष्य को और मजबूत करता है।

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महिलाओं की सुरक्षा व सशक्तिकरण को लेकर चला अभियान

सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

पुलिस अधीक्षक बलिया के निर्देशन में रविवार को मिशन शक्ति फेज-5.0 के तहत थाना सिकंदरपुर द्वारा कस्बे के बस स्टैंड चौराहे पर महिला सुरक्षा एवं सशक्तिकरण अभियान चलाया गया। इस दौरान महिलाओं और बालिकाओं को उनकी सुरक्षा, अधिकारों एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर जागरूक किया गया।कार्यक्रम में महिला आरक्षी म0आ0 कल्पना विश्वकर्मा तथा म0 PRD संगीता ने प्रतिभागियों को बताया कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत डायल 112, 1076, 1090, 102 या 108 पर फोन कर सहायता प्राप्त की जा सकती है। साथ ही महिलाओं को यह भी बताया गया कि कठिन परिस्थितियों में घबराने के बजाय धैर्य, विवेक और संयम से काम लें।
साइबर अपराध के संदर्भ में लोगों को सतर्क करते हुए कहा गया कि किसी भी अज्ञात लिंक या अनचाही कॉल को रिसीव न करें और यदि कोई ठगी की घटना घटित होती है तो तत्काल टोल फ्री नंबर 1930 पर सूचना दें।
महिलाओं को थाना परिसर में स्थापित मिशन शक्ति केंद्र के बारे में भी अवगत कराया गया, जहां उनकी समस्याओं का समाधान और आवश्यक सहायता प्रदान की जाती है। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं में आत्मरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समाज में उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना रहा।

खड़े डंपर से टकराई बाइक, पति की मौत – पत्नी गंभीर

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

रसड़ा-नगरा मार्ग पर राघोपुर गांव के समीप शनिवार की रात खड़े डंपर से बाइक टकरा गई। हादसे में डेहरी गांव निवासी धर्मेंद्र कुमार (55) पुत्र स्व. महेश राजभर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी प्रतिभा (50) गंभीर रूप से घायल हो गईं।
जानकारी के अनुसार, धर्मेंद्र राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय छितौनी में वार्ड ब्वॉय के पद पर कार्यरत थे। वह अपनी पत्नी के साथ नगरा की ओर से रिश्तेदारी से घर लौट रहे थे। इसी दौरान राघोपुर के पास सड़क किनारे खड़े डंपर से उनकी बाइक टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को तत्काल सीएचसी रसड़ा पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने धर्मेंद्र को मृत घोषित कर दिया। उनकी पत्नी की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें सदर अस्पताल बलिया रेफर कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इस दर्दनाक हादसे से गांव में शोक की लहर व्याप्त है।

निर्वाचन कार्यों की गुणवत्ता सुधार को लेकर प्रशासन सक्रिय, राजस्व व वीआरसी टीम पूरी तत्परता से जुटी

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत सलेमपुर उपजिलाधिकारी दिशा श्रीवास्तव द्वारा निर्वाचन कार्यों की समीक्षा लगातार की जा रही है। उनका मुख्य उद्देश्य निर्वाचन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, दक्षता और समयबद्धता सुनिश्चित करना है।

रविवार को एसडीएम सलेमपुर ने विभिन्न मतदान केंद्रों और राजस्व क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक प्रविष्टि की जांच पूरी सतर्कता से की जाए, ताकि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में जुड़ें और अपात्रों के नाम हटाए जा सकें।

एसडीएम ने कहा कि निर्वाचन कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या त्रुटि स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने कहा कि “मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की मजबूती की बुनियाद है, इसलिए सभी अधिकारी अपने दायित्व को पूर्ण निष्ठा और पारदर्शिता के साथ निभाएं।”

इस दौरान नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, लेखपाल और VRC (वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर) के कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे और एसडीएम को कार्य की अद्यतन स्थिति से अवगत कराया। पूरी टीम ने अभियान को सफलता तक पहुंचाने के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प दोहराया।

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उपजिलाधिकारी ने आम नागरिकों से भी अपील की कि वे अपने नाम, पते या आयु संबंधी किसी भी त्रुटि के सुधार के लिए समय रहते संबंधित बीएलओ (BLO) से संपर्क करें, ताकि मतदाता सूची अधिक सटीक और अद्यतन बनाई जा सके।

मनियर में कुल्हाड़ी से हमला, युवक की मौत

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

मनियर थाना क्षेत्र के महलीपुर गांव में शनिवार की रात हुई एक सनसनीखेज वारदात में कुल्हाड़ी से किए गए हमले में एक युवक की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, महलीपुर निवासी चन्दन राजभर (22) पुत्र गणेश राजभर शनिवार की रात करीब नौ बजे किसी काम से मनियर-बेरूआरबारी मार्ग पर जा रहा था। इसी दौरान गांव के ही कुछ लोगों ने उस पर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ 5-6 वार कर दिए। हमले में चन्दन गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा। परिजनों और ग्रामीणों ने आनन-फानन में घायल युवक को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही मनियर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। हालांकि हमले के कारणों का अभी पता नहीं चल सका है। पुलिस मामले की तहकीकात में जुटी हुई है।
इस घटना से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है, वहीं गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न उत्पन्न हो।

चेहरा देखकर रंग बदलता है क्या देश में कानून ऐसे चलता है?

भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश में कानून की सर्वोच्चता और समानता का सिद्धांत संविधान की आत्मा है। अनुच्छेद 14 स्पष्ट रूप से कहता है कि राज्य किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता से वंचित नहीं करेगा और सभी को विधि की समान संरक्षण का अधिकार होगा। फिर भी, व्यावहारिक जीवन में अक्सर देखने को मिलता है कि कानून का रंग चेहरा देखकर बदलता प्रतीत होता है। अमीर-गरीब, प्रभावशाली-निर्बल, सत्ताधारी-विपक्षी के बीच कानून की व्याख्या और लागू करने में भेदभाव नजर आता है। यह न केवल न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि समाज में असंतोष और अविश्वास की खाई को गहरा करता है। क्या यही कानून का असली चेहरा है, जो शक्ति और पहुंच के आधार पर अपना रूप बदल लेता है?

2024 भारतीय चुनाव विवाद

भारत के इतिहास में कानून के चुनिंदा लागू होने और भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा हालिया उदाहरण 2024 भारतीय आम चुनाव विवाद है, जिसमें अनुमानित रूप से अरबों रुपये के चुनावी धन का दुरुपयोग हुआ। 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान आरोप लगे कि निर्वाचन आयोग ऑफ इंडिया (ईसीआई) और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच साठगांठ से चुनावी धांधली की गई। विपक्षी दलों ने दावा किया कि वोटर लिस्ट में हेरफेर, ईवीएम की संदिग्धता और मतगणना में अनियमितताएं हुईं, जिससे परिणाम प्रभावित हुए। सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर हुईं, लेकिन अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया, जबकि छोटे स्तर की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई हुई। ईसीआई पर पक्षपातपूर्ण जांच न करने का आरोप लगा, और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। यह विवाद न केवल 1.4 अरब मतदाताओं के विश्वास को हिला गया, बल्कि कानून के दुरुपयोग का प्रतीक बन गया, जहां प्रभावशाली पक्ष को संरक्षण मिला। 2025 तक चल रही जांचों के बावजूद, कई बड़े नामों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जो दर्शाता है कि चुनाव कानून शक्तिशाली चेहरों के लिए नरम पड़ जाते हैं।

गुजरात का मोरबी पुल और अन्य हादसे जिसमे कानून नर्म

गुजरात में कानून के चेहरा बदलने का हालिया और गंभीर उदाहरण 30 अक्टूबर 2022 का मोरबी पुल हादसा है, जिसकी जांच और कानूनी प्रक्रिया 2023-2024 तक खिंचती रही, और प्रभावशाली लोगों को संरक्षण मिलने के आरोप लगे। ब्रिटिश कालीन झूलता पुल, जिसे ओरेवा ग्रुप (अजंता क्लॉक कंपनी) ने रखरखाव के लिए लिया था, अत्यधिक भीड़ के कारण टूट गया। इस हादसे में 135 लोगों की मौत हुई, जिनमें अधिकांश बच्चे और महिलाएं थीं। शुरुआती जांच में पता चला कि पुल का नवीनीकरण घटिया सामग्री से किया गया, क्षमता से अधिक लोगों को प्रवेश दिया गया, और सुरक्षा प्रमाणपत्र बिना उचित निरीक्षण के जारी किए गए। ओरेवा ग्रुप के मालिक जयसुख पटेल सहित नौ लोग गिरफ्तार हुए, लेकिन कंपनी के शीर्ष अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गुजरात सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया, लेकिन रिपोर्ट में देरी हुई और राजनीतिक दबाव के आरोप लगे, क्योंकि ओरेवा ग्रुप का सत्तारूढ़ दल से निकट संबंध माना जाता है।

2023 में गुजरात हाईकोर्ट ने सरकार की जांच पर सवाल उठाए और स्वतंत्र जांच की मांग की, लेकिन मामला लंबित रहा। पीड़ित परिवारों को मुआवजा तो मिला (प्रत्येक मृतक के लिए 2 लाख राज्य से और 10 लाख केंद्र से), किंतनीय अपराधी जिम्मेदारी तय करने में विलंब हुआ। 2024 तक चार्जशीट दायर हुई, लेकिन मुख्य आरोपी जयसुख पटेल को जमानत मिल गई, जबकि छोटे कर्मचारियों पर सख्ती बरती गई। यह प्रकरण दर्शाता है कि गुजरात में कानून राज्य की आर्थिक और राजनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर अपना रंग बदल लेता है—बड़े उद्योगपतियों को संरक्षण, जबकि साधारण नागरिकों और पीड़ितों को न्याय के लिए वर्षों इंतजार। हादसे की जांच रिपोर्ट 2024 में सार्वजनिक हुई, जिसमें रखरखाव की भयानक लापरवाही उजागर हुई, लेकिन उच्च स्तर पर जवाबदेही तय नहीं हुई। मोरबी हादसा न केवल इंजीनियरिंग विफलता, बल्कि कानूनी प्रणाली की असमानता का प्रतीक बन गया, जहां प्रभावशाली चेहरों के लिए कानून नरम और सामान्य जन के लिए कठोर हो जाता है।ऐसे ही गुजरात में सता पक्ष के लिए कानून कुछ भी हद तक जा सकता हे और कितने बड़े कांड को छोटा और छोटे से छोटे कांड को बड़ा दिखाता हे। जैसे टी.आर.पी. गेम जॉन , सरकारी भर्ती में धांधली , जमीनें बेच देना लोन माफी सभी चीजे हाइलाइट नहीं होती और कानून ने अपने आंखों में पटी बांध ली हे।

कानून निष्पक्ष होना अति आवश्यक

ये उदाहरण साबित करते हैं कि कानून का रंग चेहरा देखकर बदलना कोई नई बात नहीं, लेकिन यह लोकतंत्र के लिए घातक है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता, पारदर्शी जांच और सख्त जवाबदेही ही इस विकृति को रोक सकती है। यदि कानून सभी के लिए समान नहीं चलेगा, तो देश की एकता और विश्वास खतरे में पड़ जाएगा। समय आ गया है कि हम कानून को व्यक्ति नहीं, सिद्धांत से चलाएं। केवल तभी भारत सचमुच ‘विधि का राज्य’ बनेगा। वरना धीरे धीरे लोग कानून के गैर उपयोग जान जाएंगे और उसका वजूद सिर्फ कमजोर और अज्ञानी लोगों पर ही रहेगा जैसे ज्यादातर मोटर व्हीकल एक्ट में हो रहा हे। ऐसा भी हो सकता हे की बार बार पीड़ित लोग कानून की। धज्जियां उड़ाएंगे और कानून अपने हाथ में लेने लगे तो इसका नुकसान पूरे देश को उठाना पड़े। इसलिए देश और राज्यों के कानून और न्यायलय को यह चीज ध्यान में रख सुधार लाना चाहिए।।

प्रतीक संघवी गुजरात

ठंड आ गई, रोज़ नही नहाना है

गंगे च यमुने चैव गोदावरी,
सरस्वती, नर्मदे सिन्धु कावेरी,
जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु।
प्रसन्न होते देवगण और गुरु।

हमेशा स्नान के साथ यह मंत्र
सदा से ही जोड़ा जाता रहा है,
पर आजकल तो स्नान करने
का कोई महत्व ही नहीं रहा है।

कैसे कैसे करते हम बहाना है,
ठंड आ गई, रोज़ न नहाना है,
शेर कभी स्नान नहीं किया करते,
यह भी करते अच्छा बहाना है।

वैसे दशविधि स्नान एक
पवित्र धार्मिक विधि है,
देवी-देवता को दस विधि
से स्नान कराया जाता है।

जल, पंचामृत, पंचगव्य, दही,
घी, शहद, शक्कर, हल्दी,
फल का रस और गंगा जल
का प्रयोग किया जाता है।

आदित्य इस स्नान मंत्र का मूर्ति
स्थापना, अभिषेक, विशेषतया
पर्व पर शुद्धीकरण,आध्यात्मिक
शक्ति प्राप्ति हेतु किया जाता है।

  • डॉ. कर्नल आदि शंकर मिश्र
    आदित्य’

खूबसूरत चेहरे का राज़: आइब्रो की देखभाल में कौन-सा तेल है आपका सही साथी?

🌸 “घनी आइब्रो, गहरी खूबसूरती: जानें कौन-सा तेल देगा आपके चेहरे को प्राकृतिक निखार” 🌸

कैसे बनाए आइब्रो को घना और सुंदर: नारियल तेल या अरंडी का तेल – कौन है सबसे फायदेमंद?



खूबसूरत दिखना हर किसी की चाह होती है — चाहे वो चेहरे की चमक हो, बालों की चमक हो या आइब्रो की सुंदरता। घनी, सधी हुई और आकर्षक आइब्रो न सिर्फ चेहरे के हावभाव को उभारती हैं, बल्कि आत्मविश्वास को भी बढ़ाती हैं। यही कारण है कि महिलाएं अक्सर अपनी आइब्रो को परफेक्ट शेप में रखने के लिए थ्रेडिंग या वैक्सिंग का सहारा लेती हैं।
लेकिन कई बार बार-बार थ्रेडिंग कराने, हार्मोनल बदलाव, तनाव या पोषण की कमी के कारण आइब्रो के बाल झड़ने लगते हैं। ऐसे में चेहरा अपनी नैचुरल खूबसूरती खोने लगता है। बाजार में तो कई तरह के सीरम और क्रीम उपलब्ध हैं, लेकिन घरेलू तेलों से बेहतर कुछ नहीं। खासकर नारियल तेल (Coconut Oil) और अरंडी का तेल (Castor Oil) आइब्रो को घना और मजबूत बनाने के लिए सबसे लोकप्रिय घरेलू उपाय हैं।

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अब सवाल उठता है — दोनों में से कौन बेहतर है? आइए जानते हैं विस्तार से।
🌿 1. नारियल तेल के फायदे – कोमलता और पोषण का जादू
नारियल तेल को “नेचर का बेस्ट मॉइस्चराइज़र” कहा जाता है। इसमें मौजूद लॉरिक एसिड (Lauric Acid) और विटामिन E बालों की जड़ों में गहराई तक जाकर पोषण पहुंचाते हैं।

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बालों की जड़ें मजबूत बनाता है: नारियल तेल फॉलिकल्स को गहराई तक पोषण देता है, जिससे टूटे और झड़े हुए बाल दोबारा उगने में मदद मिलती है।
संक्रमण से सुरक्षा: इसके एंटीबैक्टीरियल गुण त्वचा को इंफेक्शन से बचाते हैं, जिससे बालों की ग्रोथ हेल्दी रहती है।
हाइड्रेशन बनाए रखता है: यह त्वचा को सूखने नहीं देता, जिससे आइब्रो का इलाका कोमल और चमकदार दिखता है।

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कैसे लगाएं:
रात में सोने से पहले कॉटन बड या उंगलियों की मदद से हल्के हाथों से नारियल तेल लगाएं और हल्का मसाज करें। सुबह गुनगुने पानी से धो लें।
🌿 2. अरंडी का तेल – तेजी से बाल उगाने का पारंपरिक नुस्खा
अरंडी का तेल यानी Castor Oil में पाया जाने वाला रिकिनोलिक एसिड (Ricinoleic Acid) बालों की ग्रोथ को बढ़ाने के लिए जाना जाता है। यह बालों के फॉलिकल्स में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाकर न सिर्फ बालों को घना करता है, बल्कि झड़ने से भी रोकता है।
आइब्रो पर अरंडी तेल के मुख्य फायदे:
तेजी से ग्रोथ बढ़ाता है: नियमित उपयोग से कुछ ही हफ्तों में आइब्रो के बाल मोटे और घने नजर आने लगते हैं।

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बालों को टूटने से रोकता है: इसके फैटी एसिड बालों की जड़ों को मजबूत बनाते हैं।
प्राकृतिक चमक लाता है: यह बालों को गहराई से पोषण देकर नेचुरल शाइन देता है।
कैसे लगाएं:
एक ड्रॉपर या कॉटन बड से बहुत कम मात्रा में अरंडी का तेल लें और धीरे-धीरे आइब्रो पर लगाएं। इसे रातभर रहने दें और सुबह हल्के गुनगुने पानी से धो लें।

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💧 3. कौन-सा तेल है बेहतर — नारियल या अरंडी का तेल?
दोनों तेलों के अपने-अपने गुण हैं।
अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है, तो नारियल तेल का उपयोग करें क्योंकि यह हल्का और मॉइस्चराइजिंग होता है।
अगर आप घने और मोटे बालों की तेजी से ग्रोथ चाहती हैं, तो अरंडी का तेल आपके लिए ज्यादा प्रभावी साबित होगा।
दरअसल, दोनों तेलों का मिश्रण सबसे बेहतर नतीजे देता है।
आप चाहें तो 1 चम्मच नारियल तेल और आधा चम्मच अरंडी तेल मिलाकर रात में लगा सकती हैं। इससे दोनों के गुण एक साथ मिलकर आपकी आइब्रो को गहराई से पोषण देंगे।
🌼 4. घरेलू टिप्स आइब्रो को घना बनाने के लिए
एलोवेरा जेल लगाएं – यह स्किन को शांत करता है और बालों की ग्रोथ में मदद करता है। विटामिन E कैप्सूल का तेल मिलाकर लगाएं – यह बालों को अंदर से मजबूती देता है। डाइट में सुधार करें – प्रोटीन, बायोटिन और आयरन से भरपूर भोजन लें।थ्रेडिंग का गैप बढ़ाएं – बार-बार आइब्रो बनवाने से बाल कमजोर होते हैं।
🌙 5. सावधानी और सलाह
हर व्यक्ति की स्किन अलग होती है, इसलिए किसी भी तेल का उपयोग करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। अगर जलन या एलर्जी महसूस हो तो तुरंत उपयोग बंद करें।
यह जानकारी सामान्य सौंदर्य ज्ञान पर आधारित है, किसी भी गंभीर समस्या के लिए त्वचा विशेषज्ञ या ब्यूटी एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।💫 खूबसूरती केवल चेहरे की बनावट में नहीं, बल्कि उसकी देखभाल में छिपी होती है। आइब्रो को घना और आकर्षक बनाए रखने के लिए प्राकृतिक तेलों से बेहतर कुछ नहीं। चाहे आप नारियल तेल चुनें या अरंडी का, नियमित उपयोग और सही देखभाल से आपका चेहरा खुद “ब्यूटीफुल कॉन्फिडेंस” का प्रतीक बन जाएगा।

बारिश से बर्बाद फसलों का मुआवजा दे सरकार : उर्मिला सिंह

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

चक्रवाती बारिश और तेज हवाओं ने बलिया जनपद के किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में पककर तैयार धान की फसल अब पानी में डूबी पड़ी है। कई जगहों पर कटे हुए धान के ढेर सड़ने लगे हैं। किसान न तो फसल निकाल पा रहे हैं, न ही उसे सुखाने का मौका मिल रहा है।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख नवांनगर व पूर्व एमएलसी स्व. सुदामा सिंह की पुत्रवधू उर्मिला सिंह ने किसानों की इस स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि किसानों ने मेहनत और पूंजी लगाकर फसल तैयार की थी, लेकिन अचानक आई चक्रवाती बारिश और तेज हवाओं ने सबकुछ नष्ट कर दिया। खेतों में पानी भरने से न केवल धान की फसल बर्बाद हुई है, बल्कि अब रबी की बुआई भी विलंबित होगी।

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चक्रवात से भाटी, संदवापुर नवानगर, कटघरा, बंसीबाजार, तेंदुआ, चेतन किशोर, बनहरा, बालूपुर, लीलकर, सीसोटार सहित कई गांवों में फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। धान पूरी तरह गिर जाने से किसानों की कमर टूट गई है, वहीं आलू, सरसों, मटर और सब्जियों की खेती पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है।
उर्मिला सिंह ने सरकार से मांग की है कि प्रभावित किसानों का तत्काल सर्वे कराया जाए और उन्हें मुआवजा व राहत राशि प्रदान की जाए, ताकि वे अगली फसल की तैयारी कर सकें। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि गांव-गांव जाकर वास्तविक क्षति का आकलन कर किसानों की आर्थिक सहायता सुनिश्चित की जाए।

गरीबों पर कहर बनती व्यवस्था और मरती इंसानियत

भागलपुर/देवरिया
हमारा समाज किस ओर जा रहा है—यह सवाल हर उस घटना के बाद और गहरा होता जा रहा है, जो कहीं न कहीं हमारी संवेदनहीनता और प्रशासनिक सुस्ती की पोल खोल देती है। हम विकास के दावे ज़रूर करते हैं, मोबाइल पर सैकड़ों मित्रों की सूची चमकती है, लेकिन पड़ोस में रहने वाले के दुख–सुख से हम अनजान हो चुके हैं। यही गिरती सामाजिक चेतना आज भयावह स्थिति का रूप ले रही है।
भागलपुर के शांत माने जाने वाले गांव में मंगरू राइनी उर्फ फखरुद्दीन की संदिग्ध मौत इसी टूटते सामाजिक ढांचे और लचर प्रशासनिक तंत्र का ताजा उदाहरण है। ठेला चलाकर परिवार पालने वाला एक साधारण युवक—जो अपनी मिलनसारिता और सरल स्वभाव के लिए जाना जाता था—अचानक कुएं में मृत पाया जाता है, और व्यवस्था खामोश पड़ी रहती है। इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा?

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ग्रामीणों और परिजनों ने कई दिन पहले ही पुलिस-प्रशासन को तहरीर दी थी, संभावित खतरे की जानकारी भी दी थी, लेकिन न तो पुलिस की तरफ़ से कोई सतर्कता दिखाई गई और न ही जांच की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया। यह निष्क्रियता केवल लापरवाही नहीं—यह एक गरीब की जिंदगी की कीमत को कम आँकने की मानसिकता है। थाने और चौकी का हाल यह है कि गरीब की तहरीर कार्रवाई नहीं, बल्कि परेशानी लेकर आती है, जबकि दलाल बेखौफ घूमते हैं।
जनमानस में यह चर्चा तेज है कि ‘जर, जोरू, जमीन’ जैसे पारंपरिक कारणों से आज भी कई जिंदगियाँ खत्म होती हैं। मंगरू की भी किसी से अनबन की जानकारी पहले से थी, फिर भी पुलिस की नींद नहीं खुली। अब भय है कि गरीब होने के कारण इस मामले को भी “अज्ञात” या “आत्महत्या” जैसे लेबल दे कर फाइल दबा दी जाएगी। यही हमारे सिस्टम की वो सच्चाई है जिसे हर कोई जानता है, पर कोई कहता नहीं।
सबसे बड़ी चिंता उन मासूम बच्चों की है, जो असमय पिता का साया खो चुके हैं। उनका भविष्य कौन देखेगा? कौन यह सोच रहा है कि 27–28 वर्ष के एक कमाऊ बेटे की मृत्यु सिर्फ़ एक परिवार का नहीं, बल्कि समाज का नुकसान है? लेकिन समाज से लेकर बुद्धिजीवी वर्ग तक सब मौन हैं। बाहुबल चरम पर है और अपराध की उछाल यह संदेश दे रही है कि आज गरीब की बारी है, कल किसी और की हो सकती है।
मौत आज दाने-दाने के भाव बिक रही है और व्यवस्था दलालों और भ्रष्टाचार के आगे घुटने टेक चुकी है। इस स्थिति में जरूरी है कि हम स्वयं से यह प्रश्न करें—क्या हम इसी समाज का निर्माण करना चाहते थे? जहाँ इंसानियत दम तोड़ दे और न्याय गरीब की पहुँच से बाहर हो?
प्रशासन के लिए यह मामला सिर्फ़ एक जांच नहीं, बल्कि भरोसा बहाल करने की परीक्षा है। पारदर्शी, निष्पक्ष और ठोस जांच ही यह साबित करेगी कि न्याय व्यवस्था अभी भी जीवित है। साथ ही समाज के जागरूक वर्ग को भी आगे आने की जरूरत है, क्योंकि यदि आज चुप्पी साध ली गई, तो कल यह चुप्पी किसी और मासूम की जिंदगी ले सकती है।
हमारा कर्तव्य है कि हम इंसानियत को जीवित रखें और हर उस अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाएं—जो किसी की गरीबी का फायदा उठाकर उसकी जिंदगी छीन लेता है।

लापता मंगरु का शव बरामद, दस दिन बाद खुली गुमशुदगी की गुत्थी

भागलपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
मईल थाना क्षेत्र के भागलपुर गांव में दस दिन से लापता फखरूदीन उर्फ मंगरु (35) की गुमशुदगी का राज शनिवार की शाम उस समय खुल गया, जब उसका सड़ा-गला शव गांव के पुरानी पुलिस चौकी तिराहा के पास बंद पड़े एक प्राइवेट ट्यूबवेल की पानी की टंकी से बरामद हुआ।

शव की पहचान मृतक की पत्नी अंजुम और मां बदरुनिशा ने की। शव देखते ही दोनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। दुर्गंधयुक्त शव को टंकी से निकालने के बाद पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

पुलिस ने मामले में दो युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

मंगलू उर्फ फखरूदीन, स्वर्गीय मुमताज का पुत्र था और ठेला चलाकर परिवार का भरण-पोषण करता था। वह 30 अक्टूबर की रात करीब दस बजे घर से निकला था, जिसके बाद वह लापता हो गया। दो दिन बाद उसकी मां बदरुनिशा ने मईल थाने में तहरीर दी थी और बताया था कि गांव का ही एक युवक उसे जान से मारने की धमकी दे चुका है, लेकिन उस समय पुलिस ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया।

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शनिवार की शाम किसी ने पुलिस को सूचना दी कि पुरानी पुलिस चौकी तिराहा के पास बंद पड़े ट्यूबवेल की टंकी से तेज दुर्गंध आ रही है। सूचना पर थानाध्यक्ष मईल राकेश सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और टंकी की तलाशी ली। इसमें से मंगरु का शव बरामद हुआ।

थानाध्यक्ष राकेश सिंह ने बताया कि मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए देवरिया भेज दिया गया है। प्राप्त तहरीर के आधार पर मामले की जांच की जा रही है।

जमीन विवाद में महिला से मारपीट, कपड़े फाड़े — जांच शुरू

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। सलेमपुर कोतवाली अंतर्गत
मझौलीराज राज चौकी क्षेत्र में दो दिन पहले हुई एक शर्मनाक घटना के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। शनिवार को नायब तहसीलदार गोपालजी के नेतृत्व में राजस्व टीम मौके पर पहुंची और खेत के साथ ही रास्ते को लेकर चल रहे विवाद की जांच की। टीम ने जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट एसडीएम दिशा श्रीवास्तव को सौंप दी।

मामला मझौलीराज के एक मोहल्ले का है, जहां पीड़िता के पति की पांच वर्ष पूर्व सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो चुकी है। पति के निधन के बाद जमीन के बंटवारे को लेकर उसका विवाद जेठ, देवर और अन्य परिजनों से चल रहा था। गुरुवार को विवाद इतना बढ़ा कि कुछ लोगों ने महिला की बेरहमी से पिटाई कर दी और उसके कपड़े तक फाड़ दिए।

अपमान और पीड़ा से व्यथित महिला अर्द्धनग्न अवस्था में ही पुलिस चौकी की ओर निकल पड़ी। रास्ते में कुछ महिलाओं ने चादर से उसे ढककर सहारा दिया।

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एसडीएम के निर्देश पर नायब तहसीलदार व राजस्व टीम ने मौके पर पहुंचकर पीड़िता से मुलाकात की, खेत और रास्ते का निरीक्षण किया और घटना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। लगभग एक घंटे तक जांच के बाद टीम वापस लौट गई।

आरोपियों पर कार्रवाई
पुलिस ने महिला की पिटाई के मामले में उर्मिला देवी, संदीप और रानी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। गुरुवार को ही एक आरोपी का शांतिभंग में चालान किया गया था।

धान खरीद की नई व्यवस्था किसानों पर भारी, क्रय केंद्रों पर पसरा सन्नाटा

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। धान खरीद को पारदर्शी बनाने के लिए शुरू की गई नई व्यवस्था फिलहाल किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। जिले के अधिकतर खरीद केंद्र तकनीकी खामियों, धीमे सर्वर और बाधित सत्यापन प्रक्रिया से जूझ रहे हैं। नतीजा यह कि खरीद की रफ्तार लगभग थम गई है और किसान हताश होकर वापस लौटने लगे हैं।
सरकार ने इस वर्ष आइरिस स्कैनिंग को अनिवार्य कर दिया है, लेकिन यही प्रक्रिया खरीद में सबसे बड़ी अड़चन बनकर उभर रही है। किसानों की आंखों की पुतलियों की स्कैनिंग बार-बार फेल हो रही है। सर्वर कभी धीमा, कभी पूरी तरह ठप, जिसके चलते एक-एक किसान का सत्यापन करने में कई मिनट लग रहे हैं। स्थिति यह है कि कई केंद्रों पर पूरा दिन बीत जाता है, लेकिन खरीद ढाई-तीन कुंतल से आगे नहीं बढ़ती।

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उम्रदराज किसानों की दिक्कत और गंभीर है। कई किसान मोतियाबिंद और अन्य नेत्र रोगों के कारण स्कैनिंग में सफल नहीं हो पा रहे। परेशान किसान यह कहते हुए लौट रहे हैं कि अगर यही हाल रहा तो वे मजबूरी में आढ़तियों को ही धान बेच देंगे, भले कीमत समर्थन मूल्य के आसपास ही क्यों न मिले।
क्रय एजेंसियों का भी यही कहना है कि लक्ष्य पूरा कर पाना इस स्थिति में लगभग असंभव हो गया है। कई अधिकारियों ने यह आशंका जताई है कि कहीं यह अभियान भी गेहूं खरीद जैसी परिणति न दोहरा दे, जिसमें मंडी के व्यापारी किसानों की उपज उठा ले गए और सरकारी खरीद सिर्फ आंकड़ों का खेल बनकर रह गई।
जिले में स्थिति यह है कि अधिकतर केंद्रों पर खरीद “नाम मात्र” है। किसानों में बढ़ती बेचैनी और क्रय एजेंसियों की असमर्थता इशारा कर रही है कि यदि समय रहते तकनीकी बाधाएं दूर न की गईं तो धान खरीद पर पूरे सीजन में संकट बना रहेगा।

बरसात से धान की फसल बर्बाद, किसानों की बढ़ी चिंता

सिकंदरपुर/बलिया(राष्ट्र की परम्परा)लगातार हो रही बरसात ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में पानी भर जाने से धान की फसल बर्बादी के कगार पर पहुंच गई है। कई जगहों पर धान पूरी तरह गिर चुका है, जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। पानी निकासी की व्यवस्था न होने से खेतों में फसल सड़ने लगी है।

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मालदह निवासी पूर्व प्रधान जगदीश वर्मा सत्य प्रकाश तिवारी ने बताया कि लगातार हो रही बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में पानी इतना भर गया है कि धान काटना मुश्किल हो गया है। मजदूर भी पानी में उतरकर काम करने को तैयार नहीं हैं, जिससे फसल कटाई का कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है। उन्होंने कहा कि बरसात की वजह से अब अगली फसल की बुवाई भी लेट हो जाएगी। खेतों में पानी सूखने में समय लगेगा, जिससे गेहूं की बुवाई पर भी असर पड़ेगा। किसानों का कहना है कि अगर जल्द मौसम नहीं सुधरा और पानी की निकासी नहीं हुई तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी। खेतों में खड़ी फसल से निकल रही दुर्गंध अब यह संकेत दे रही है कि बर्बादी तय है। ग्रामीणों ने प्रशासन से खेतों से पानी निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि सरकार को चाहिए कि नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा दिया जाए, ताकि वे अपनी अगली फसल की तैयारी कर सकें। लगातार बारिश से जहां मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा, वहीं किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। गाँवों में हर तरफ चिंता का माहौल है और किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए मौसम के सुधरने का इंतज़ार कर रहे हैं।